जी हाँ नरेन्द्र भाई मोदी… गुजरात एक "शत्रु राज्य" ही है, क्योंकि… … Narendra Modi, CBI, Amit Shah, Supreme Court
जिन लोगों ने गुजरात के गृहराज्य मंत्री अमित शाह की गिरफ़्तारी वाले दिन से अब तक टीवी चैनलों पर खबरें देखी होंगी, उन सभी ने एक बात अवश्य नोटिस की होगी… कि चैनलों पर "हिस्टीरिया" का दौरा अमूमन तभी पड़ता है, जब भाजपा-संघ-हिन्दुत्व से जुड़े किसी व्यक्ति के साथ कोई छोटी से छोटी भी घटना हो जाये। सोहराबुद्दीन के केस में तो मीडिया का "पगला जाना" स्वाभाविक ही था, जहाँ एक तरफ़ एंकर चीख रहे थे वहीं दूसरी तरफ़ हेडलाइन्स में और नीचे की स्क्रोल पट्टी में हमने क्या देखा… "अमित शाह गिरफ़्तार, क्या नरेन्द्र मोदी बचेंगे?…", "अमित शाह मोदी के खास आदमी, नरेन्द्र मोदी की छवि तार-तार हुई…", "क्या नरेन्द्र मोदी इस संकट से पार पा लेंगे…", "नरेन्द्र मोदी पर शिकंजा और कसा…" इत्यादि-इत्यादि-इत्यादि…
क्या इस केस से नरेन्द्र मोदी का अभी तक कोई भी, किसी भी प्रकार का सम्बन्ध उजागर हुआ है? क्या नरेन्द्र मोदी राज्य में होने वाली हर छोटी-मोटी घटना के लिये जिम्मेदार माने जायेंगे? एक-दो गुण्डों को एनकाउंटर में मार गिराने पर नरेन्द्र मोदी की जवाबदेही कैसे बनती है? लेकिन सोहराबुद्दीन के केस में जितने "मीडियाई रंगे सियार" हुंआ-हुंआ कर रहे हैं, उन्हें उनके "आकाओं" से इशारा मिला है कि कैसे भी हो नरेन्द्र मोदी की छवि खराब करो। कारण कई हैं - मुख्य है गुजरात का तीव्र विकास और हिन्दुत्व का उग्र चेहरा, देश-विदेश के कई शातिरों की आँखों की किरकिरी बना हुआ है। ज़रा इन आँकड़ों पर एक निगाह डाल लीजिये आप खुद ही समझ जायेंगे -
1) अब तक पिछले कुछ वर्षों में भारत में लगभग 5000 एनकाउंटर मौतें हुई हैं।
2) लगभग 1700 से अधिक एनकाउंटर के मामलों की सुनवाई और प्राथमिक रिपोर्ट देश के विभिन्न न्यायालयों और मानवाधिकार संगठनों के दफ़्तरों में धूल खा रही हैं।
3) पिछले दो दशक में अकेले उत्तरप्रदेश में 800 एनकाउंटर हुए।
4) यहाँ तक कि कांग्रेस शासित राज्य महाराष्ट्र में पिछले कुछ वर्षों में 400 एनकाउंटर हुए।
अब जो लोग जागरुक हैं और राजनैतिक खबरों पर ध्यान रखते हैं, वे बतायें कि इतने सैकड़ों मामलों में क्या कभी किसी ने, किसी राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ़ मीडिया में ऐसा दुष्प्रचार और घटिया अभियान देखा है? इतने सारे एनकाउण्टर के मामलों में विभिन्न राज्यों में पुलिस के कितने उच्चाधिकारियों को सजा अथवा मुकदमे दर्ज हुए हैं? क्या महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश या आंध्रप्रदेश में हुए एनकाउण्टर के लिये वहाँ के मुख्यमंत्री से जवाब-तलब हुए, या "शिकंजा" कसा गया? नहीं… क्योंकि यदि ऐसा होता तो जिन राज्यों में केन्द्र के जिम्मे सुरक्षा व्यवस्था है उनमें जैसे जम्मू-कश्मीर, मणिपुर अथवा झारखण्ड (राष्ट्रपति शासन) आदि में होने वाले किसी भी एनकाउंटर के लिये मनमोहन-चिदम्बरम या प्रतिभा पाटिल को जिम्मेदार माना जायेगा? और क्या मीडिया वालों को उनसे जवाबतलब करना चाहिये? सुरक्षा बलों द्वारा वीरप्पन की हत्या के बाद, उसकी पत्नी ने भी CBI के विरुद्ध चेन्नई हाइकोर्ट में अपील की थी, लेकिन तब तो कर्नाटक-तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के खिलाफ़ मीडिया ने कुछ नहीं कहा था? तो फ़िर अकेले नरेन्द्र मोदी को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
जवाब वही है, जो मैंने ऊपर दिया है… गुजरात के तीव्र विकास से "जलन" की भावना और "हिन्दुत्व के आइकॉन" को ध्वस्त करने की प्रबल इच्छा… तथा सबसे बड़ी बात "युवराज" की ताज़पोशी में बड़ा रोड़ा बनने जा रहे तथा भविष्य में कांग्रेस के लिये सबसे बड़ा राजनैतिक खतरा बने हुए नरेन्द्र भाई मोदी को खत्म करना। (ज़रा याद कीजिये राजेश पायलट, माधवराव सिंधिया, जीएमसी बालयोगी, पीआर कुमारमंगलम जैसे ऊर्जावान और युवा नेताओं की दुर्घटनाओं में मौत हुई है, क्योंकि ये सभी साफ़ छवि वाले व्यक्ति भविष्य में प्रधानमंत्री पद के दावेदार बन सकते थे)। फ़िलहाल गुजरात में 20 साल से दुरदुराई हुई और सत्ता के दरवाजे से बाहर बैठी कांग्रेस CBI का उपयोग करके नरेन्द्र मोदी को "राजनैतिक मौत" मारना चाहती है, लेकिन जैसे पहले भी कई कोशिशें नाकामयाब हुई हैं, आगे भी होती रहेंगी, क्योंकि एक तो कांग्रेस की "नीयत" ठीक नहीं है और दूसरे वह ज़मीनी राजनैतिक लड़ाई लड़ने का दम नहीं रखती।
केन्द्र की कांग्रेस सरकारों द्वारा CBI का दुरुपयोग कोई नई बात नहीं है, षडयन्त्र, धोखाधड़ी, जालसाजी, पीठ पीछे से वार करना आदि कांग्रेस का पुराना चरित्र है, ज़रा याद कीजिये अमेठी के लोकप्रिय नेता संजय सिंह वाले केस को… एक समय कांग्रेस के अच्छे मित्रों में से एक संजय सिंह को जब कांग्रेस ने "खत्म" करने का इरादा किया तो बैडमिंटन खिलाड़ी सैयद मोदी की हत्या के केस में संजय सिंह को फ़ँसाया गया और मोदी की पत्नी अमिता और संजय सिंह के तथाकथित नाजायज़ सम्बन्धों के बारे में अखबारों में रोज़-दर-रोज़ नई-नई कहानियाँ "प्लाण्ट" की गईं, सैयद मोदी की हत्या को संजय-अमिता के रिश्तों से जोड़कर कांग्रेसी दरबार के चारण-भाट अखबारों ने चटखारेदार खबरें प्रकाशित कीं (गनीमत है कि उस समय आज की तरह कथित "निष्पक्ष" और सबसे तेज़ चैनल नहीं थे…)। आज 20 साल बाद क्या स्थिति है? वह केस न्यायालय में टिक नहीं पाया, CBI ने मामले की फ़ाइल बन्द कर दी, और कांग्रेस जिसे "बड़ा षडयंत्र" बता रही थी, वैसा कुछ भी साबित नहीं हो सका, तो क्या हुआ… संजय सिंह का राजनैतिक खात्मा तो हो गया।
राजनैतिक विश्लेषकों को बोफ़ोर्स घोटाले से ध्यान बँटाने के लिये और वीपी सिंह की उजली छवि को मलिन करने के लिये CBI की मदद और जालसाजी से रचा गया "सेंट किट्स काण्ड" भी याद होगा, जब कहा गया कि एक अनाम से द्वीप के एक अनाम से बैंक में वीपी सिंह और इनके बेटे के नाम लाखों डालर जमा हैं। लेकिन अन्त में क्या हुआ, जालसाजी उजागर हो गई, कांग्रेस बेनकाब हुई और चुनाव में हारी… ऐसे कई केस हैं, जहाँ CBI "कांग्रेस ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन" सिद्ध हुई है… और आज एक हिस्ट्री शीटर, जिसके ऊपर 60 से अधिक मामले हैं और जिसके घर के कुंए से 40 एके-47 रायफ़लें निकली हैं उस सोहराबुद्दीन की मौत पर कांग्रेस "घड़ियाली आँसू" बहा रही है, जो उसे बहुत महंगा पड़ेगा यह बात वह समझ नहीं रही।
अब एक नज़र डालते हैं हमारी "माननीय न्यायपालिका" पर (मैंने "माननीय" तो कह ही दिया है, आप इसमें 100 का गुणा कर लें… इतनी माननीय…। ताकि कोई मुझ पर न्यायालय की अवमानना का दावा न कर सके…)
- सोहराबुद्दीन के केस में "बड़े षडयन्त्र की जाँच" के आदेश "माननीय" जस्टिस तरुण चटर्जी ने अपने रिटायर होने की आखिरी तारीख को दिये (तरुण चटर्जी साहब को रिटायर होने के तुरन्त बाद असम और अरुणाचल प्रदेश के सीमा विवाद में मध्यस्थ के बतौर नियुक्ति मिल गई) (क्या गजब का संयोग है…)।
- इसी प्रकार SIT (Special Investigation Team) को नरेन्द्र मोदी से पूछताछ करने के आदेश सुप्रीम कोर्ट के "माननीय" न्यायाधीश अरिजीत पसायत ने भी अपनी नौकरी के अन्तिम दिन दिये (रिटायर होने के मात्र 6 दिनों के भीतर केन्द्र सरकार द्वारा पसायत साहब को CAT (Competition Appellate Tribunal) का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया) (ये भी क्या जोरदार संयोग है…)।
- भोपाल गैस काण्ड में कमजोर धाराएं लगाकर केस को मामूली बनाने वाले वकील जो थे सो तो थे ही, "माननीय" (फ़िर से माननीय) जस्टिस एएम अहमदी साहब भी रिटायर होने के बाद भोपाल मेमोरियल ट्रस्ट के अध्यक्ष बने, जो अब भोपाल पर हुए हल्ले-गुल्ले के बाद त्यागपत्र देकर शहीदाना अन्दाज़ में रुखसत हुए हैं… (यह भी क्या सॉलिड संयोग है…)।
खैर पुरानी बातें जाने दीजिये - अभी बात करते हैं "माननीय" जस्टिस तरुण चटर्जी की… CBI ने गाजियाबाद के GPF घोटाले में तरुण चटर्जी के साथ-साथ 23 अन्य न्यायाधीशों के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर करने की सिफ़ारिश की थी। जस्टिस चटर्जी साहब के खिलाफ़ पुख्ता केस इसलिये नहीं बन पाया, क्योंकि मामले के मुख्य गवाह न्यायालय के क्लर्क आशुतोष अस्थाना की गाजियाबाद के जेल में "संदिग्ध परिस्थितियों" में मौत हो गई। इस क्लर्क ने चटर्जी साहब समेत कई जजों के नाम अपने रिकॉर्डेड बयान में लिये थे। अस्थाना के परिवारवालों ने आरोप लगाये हैं कि "विशिष्ट और वीआईपी" व्यक्तियों को बचाने की खातिर अस्थाना को हिरासत में जहर देकर मार दिया गया। फ़िर भी मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन के आदेश पर सीबीआई ने जस्टिस चटर्जी से उनके कोलकाता के निवास पर पूछताछ की थी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक चटर्जी के सुपुत्र ने भी महंगे लैपटॉप और फ़ोन के "उपहार"(?) स्वीकार किये थे।
वैसे "माननीय" जस्टिस चटर्जी साहब ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपनी सम्पत्ति का खुलासा किया है जिससे पता चलता है कि वे बहुत ही "गरीब" हैं, क्योंकि उनके पास खुद का मकान नहीं है, उन्होंने सिर्फ़ 10,000 रुपये म्युचुअल फ़ण्ड में लगाये हैं और 10,000 की ही एक एफ़डी है, हालांकि उनके पास एक गाड़ी Tavera है जबकि दूसरी गाड़ी होण्डा सिएल के लिये उन्होंने बैंक से कर्ज़ लिया है। (वैसे एक बात बताऊं, मेरी दुकान के सामने, एक चाय का ठेला लगता है उसके मालिक ने कल ही मेरे यहाँ से उसकी 20,000 रुपये की एफ़डी की फ़ोटो कॉपी करवाई है) अब बताईये भला, इतने "गरीब" और "माननीय" न्यायाधीश कभी CBI और अपने पद का दुरुपयोग कर सकते हैं क्या? नहीं…नहीं… ज़रूर मुझे ही कोई गलतफ़हमी हुई होगी…
खैर जाने दीजिये, नरेन्द्र भाई मोदी… यदि आपको यह लगता है कि केन्द्र की निगाह में गुजरात एक "शत्रु राज्य" है, तो सही ही होगा, क्योंकि मुम्बई-भिवण्डी-मालेगाँव के दंगों के बावजूद सुधाकरराव नाईक या शरद पवार को कभी "हत्यारा" नहीं कहा गया… एक पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा दिल्ली में चुन-चुनकर मारे गये हजारों सिखों को कभी भी "नरसंहार" नहीं कहा गया… हमारे टैक्स के पैसों पर पलने वाले कश्मीर और वहाँ से हिन्दुओं के पलायन को कभी "Genocide" (जातीय सफ़ाया) नहीं कहा जाता… वारेन एण्डरसन को भागने में मदद करने वाले भी "मासूम" कहलाते हैं… यह सूची अनन्त है। लेकिन नरेन्द्रभाई, आप निश्चित ही "शत्रु" हैं, क्योंकि गुजरात की जनता लगातार भाजपा को वोट देती रहती है। आपको "हत्यारा", "तानाशाह", "अक्खड़", "साम्प्रदायिक", "मुस्लिम विरोधी" जैसा बहुत कुछ लगातार कहा जाता रहेगा… इसमें गलती आपकी भी नहीं है, गलती है गुजरात की जनता की… जो भाजपा को वोट दे रही है। एक तो आप किसी की कठपुतली नहीं हैं, ऊपर से तुर्रा यह कि लाखों-करोड़ों लोग आपको प्रधानमंत्री बनवाने का सपना भी देख रहे हैं…जो कि "योग्य युवराज"(?) के होते हुए एक बड़ा जुर्म माना जाता है… तो सीबीआई भी बेचारी क्या करे, वे भी तो किसी के "नौकर हैं ना… "आदेश" का पालन तो उन्हें करना ही पड़ेगा…।
जाते-जाते "एक हथौड़ा" और झेल जाईये… प्रस्तुत वीडियो में नरेन्द्र मोदी के घोर विरोधी रहे पूर्व कांग्रेसी यतीन ओझा ने रहस्योद्घाटन किया है, कि तीन साल पहले दिल्ली में अहमद पटेल के बंगले पर नरेन्द्रभाई मोदी को "फ़ँसाने" की जो रणनीति बनाई गई थी, वे उसके साक्षी हैं। उल्लेखनीय है कि यतीन ओझा वह व्यक्ति हैं जो नरेन्द्र मोदी के सामने उस समय चुनाव लड़े थे, जब कांग्रेस के सभी दिग्गजों ने पक्की हार को देखते हुए मोदी के सामने खड़े होने से इंकार कर दिया था…
डायरेक्ट लिंक http://www.youtube.com/watch?v=_U6zyHSvTYA
लेख के अन्य सन्दर्भ :
http://deshgujarat.com/2010/08/01/judge-who-ordered-cbi-probe-in-sohrab-case-himself-under-cbi-scanner-for-corruption/
http://indiatoday.intoday.in/site/Story/107058/India/cbi-for-action-against-24-judges-in-pf-scam.html
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41 comments:
ऐसी खबरें चाह के भी सबसे तेज चैनल तो क्या उसका यदि कोई उसका बाप चैनल (हालांकि अपने बाप का पता तो इन्हें भी नहीं मालूम) भी हो तो नहीं ला पायेगा.
जय हो माननीय न्यायाधीश (?) चटरजी की और उनके निष्पक्ष (?) निर्णयों और बेदाग (?) चरित्र की...
अंत में, सोनिया मैडम, राहुल बाबा और उनके भक्त गणों को कोटि-कोटि #@$&^%*&^%@$^%*&^(*&(**)(@#%^&%*&&*(
जय हो, जय हो.....
गुजरात को गाँधी का गुजरात कहने वालों को नहीं पता यही गुजराती देश के लिए गाँधी के मुँह पर दरवाजा भी बन्द कर चुके है.
वोट से जिसे न हटा सके उसे कानून का दूरौपयोग से हटाना है. कॉग्रेस, दानवाधिकारवादी, अल्पसंख्यक (?), मिश्नरी, मीडिया सब जोर लगा रहे है. वैसे फैविकोल भी गुजरात में ही बनता है :)
''क्या इस केस से नरेन्द्र मोदी का अभी तक कोई भी, किसी भी प्रकार का सम्बन्ध उजागर हुआ है? क्या नरेन्द्र मोदी राज्य में होने वाली हर छोटी-मोटी घटना के लिये जिम्मेदार माने जायेंगे?''
यानी कि गुजरात में मंत्रियों को भी वसूली / एनकाउंटर जैसी 'छोटी-मोटी' बातों का कानूनी अधिकार है? :)
…………..
अंधेरे का राही...
किस तरह अश्लील है कविता...
शब्द नही है मेरे पास ,कुत्ते को कुत्ता बोलुंगा तो मुकदमा झेलना होगा बस इसलिये अभी असहाय सा महसूस कर रहा हूँ । पर दिल मे एक बात सदा उठती है,
यदा-यदा ही धर्मस्य:,ग्लानिर्भवतिभारत:।
अभ्युत्थानमअधर्मस्य,तदात्मानमसृजाम्यहम:।।
देखते है वो दिन कब आता है,पर पता नही UPA के पाप का घडा कब भरेगा ???
सन्तोष होता है पढकर, महाजाल पर लेख मानो पेशाब कर रहे हों भ्रष्टाचार के चेहरे पर ॥
गुजरात में 20 साल से दुरदुराई हुई और सत्ता के दरवाजे से बाहर बैठी कांग्रेस CBI का उपयोग करके नरेन्द्र मोदी को "राजनैतिक मौत" मारना चाहती है
मुद्दई लाख बुरा चाहे तो क्या होता है….…
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कान्ग्रेसी यतीन ओझा के इस खुलासे के बाद सुप्रीम कोर्ट को चाहिये कि वह अहमद पटेल को तुरन्त गिरफ्तार करके इसके खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का मुकदमा चलाना चाहिये
जाकिर अली सा'ब, हो सकता है वसूली जैसा मामला हो, फिर वसूली देने वाले कहाँ है? उन्हे गिरफ्तार क्यों नहीं किया जाता? क्या सुपारी देने वाला अपराधी नहीं होता?
नरेन्द्र मोदी को अब गुजरात से बाहर निकल कर पूरे देश मे दौरा करना चाहिये.
इस देश पर और हिँदुओ पर मंडरा रहे संकटो के बारे मे लोगो को बता कर और उस संकट के समाधान के लिये अपनी सख्त नीति का भी प्रचार करना चाहिये. ताकि हिँदु एकजुट हो सके . क्यो कि हिँदु चाहे जितना भी पथभ्रष्ट हो जाये. लेकिन
जब उसे अपने देश पर मंडराते हुये भयंकर खतरो के बारे मे विस्तार से बताया जायेगा. और उस खतरो से मुक्ति के लिये जब उनके सामने नरेन्द्र मोदी का एकमात्र विकल्प रखा जायेगा. तब हिँदु जरुर एकजुट होगा और नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन पायेँगे.
इसलिये बीजेपी को अभी से पूरे देश मे इस देश पर मंडराते संकटो के बारे मे लोगो को जोर शोर से बताना चाहिये.
क्यो कि युवराज का प्रचार तो मीडिया जोर शोर से कर ही रहा है और जिसका प्रचार ज्यादा हो वही प्रोडक्ट बिकता है .भले ही उसमे गोबर भरा हो.
एक निष्पक्ष समझदार व्यक्ति कांग्रेस की शातिर और गन्दी राजनीति को समझ सकता है बसरते वो अपनी आँख खुले रखे |
कांग्रेस CBI का दुरूपयोग आज से नहीं बहुत पहले से करती आ रही है हाँ इन दिनों CBI का दुरूपयोग चरम पे जरुर है |
देखिये किस प्रकार CBI की कृपा से पप्पू यादव अब तक बहार घूम रहे हैं, CBI की मेहरबानी टी रहेगी ही क्यूंकि पप्पू यादव की पत्नी कांग्रेस संसद जो ठहरी |
@ज़ाकिर अली जी एनकाउंटर जैसी 'छोटी-मोटी' बातों का कानूनी अधिकार कहीं नहीं है ना तो गुजरात में ना अन्य प्रदेश में | लगता है आपने पूरा आलेख ठीक से पढ़ा नहीं - "पिछले कुछ वर्षों में भारत में लगभग 5000 एनकाउंटर मौतें हुई हैं। " बाकी एनकाउंटर में सीबीआई & कांग्रेस क्यूँ चुप बैठी है?
ji ha you r right abhi kashmir me jo ho raha he to umor abdula inocent hai magar yehi halata aaj gujarat me ho te to narendr modi ko gunegar mana jata hamare chidbaram sahab kashmiri atakvadi ko phir se punrvasan ki bate karte hai lekin us sahb ko koi bataye ki pehele vaha pe kashmiri pandito ka punrvasan karo. yatin oza ka vidieo dekha kar yehi lagta hai ke congress agle 50 sall gujarat me apni sarakar banane ka khwb chod de to acchaa hai
Hardik Rangpariya
इन माननीयो से भगवान बचाये .
८४ के दन्गो के बारे मे कभी उन पर उंगली नही उठी जिन्होने कहा था जब बडा पेड गिरता है तो धरती हिलती है
एक दिन दो हेडलाइन्स -
१. सीबीआई ने अमित शाह को ग़िरफ़्तार किया।
२. सीबीआई की जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट।
सीबीआई "प्रधानमंत्री का थाना" है।
सादर वन्दे सर ,
सामयिक और ला जवाब पोस्ट लिखी हे आपने |सही हे के ''ढीले भोंदू"" की राह में सबसे बड़ा रोड़ा भाई नरेन्द्र ही बने हुवे हे |एक तो उग्र हिन्दुत्व और विकास का चेहरा भाई नरेन्द्र दूसरा "पालतू कुतिया की"" तरह कांग्रेस को गुजरात में सता के दरवाजे पर बिठाये रखना ,इस से सेंटर के कांग्रेसी धुरंदरो को "देगी मिर्च का तड़का ""लगा हुवाहे पिछवाड़े में ?में अपने सम्पूर्ण विश्वास और अपनी भक्ति से कह रह हूँ की २०१४ में नरेन्द्र भाई को कोई नहीं रोक सकता हे परधान मंत्री बनने से |चाहे जितने ये दोगले और गन्दी नस्ल के कीड़े अपनी ???? के घोड़े दोडा ले |आप ने जो ancounter के आंकड़े पर्स्तूत किये हे ,क्या कोई मीडियाई दल्ला पर्स्तूत करेगा ?नहीं करेगा ,क्योकि सालो के पेट में ""सफ़ेद खून के आकावो"" का पेशाब हे?एक तो ये "" इटालियन गुडिया का बाल ""लूज मोहन भाई ने अभी पूरे आठ साल से पूरे देश को रास्ट्र विरोधी ताकतों की"" नर्तकी ""बनाये हुवे हे ?उपर से ये ""संकर्मित जेनेटिक कोड"" भोंदू सपने देख रह हे ?गुजरात की क्रांति पूरे देश में फैलेगी |देख रहे सारे लोग इन इन hinjado को और इन की फोजो को जो साले गाँव लूटने चले हे ?
मुझे तो ये समझ नहीं आता की ये किस प्रकार का आत्मघाती माहौल बनाया जा रहा है हमारे देश में , जिन पुलिस वालों और अमित भाई को बधाई दी जानी चाहिए थी एक आतंकवादी और गैंगस्टर का अंत करने के लिए उन्हें जेल में डाला जा रहा है और उस गुंडे के लिए सहानुभूति का माहौल बनाया जा रहा है जिसके आतंक से दो-२ राज्यों के मार्बल उद्योगपति कांपते थे ,खुद सोचिये ये सब होने के बाद हमारे पुलिसकर्मियों में क्या सन्देश जाएगा की देखो ये फल मिलता है हमें ऐसे गुंडों और आतंकवादियों के खिलाफ कारवाई करने का
मैं साफ़-२ कहता हूँ की नरेंद्र भाई या अमित शाह ने कुछ गलत नहीं किया ऐसे खून्कार गुंडे और आतंकवादी के आतंक का अंत करके ,बल्कि ये काम पूरे देश में होना चाहिए ,पूरे देश में जो भी ऐसे लोग हैं जो की समाज के लिए आतंक का पर्याय बनते हैं ,निर्दोष लोगों का खून बहाते हैं और जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं ,ऐसे लोगों का भी जल्दी से जल्दी encounter किया जाए चाहे वे किसी भी धर्म के क्यों ना हों
मेरी तरफ से तो नरेंद्र मोदी जी और उनके आदमियों को पूरा समर्थन है ,ना जाने कब मोदी जी इस देश की कमान संभालेंगे
महक
क्या कहें साहब इस देश के मीडिया और कई लेखकों को बड़ा कष्ट है नरेन्द्र मोदी से। याद कीजिए सारे मीडिया कैसे मिलकर नरेन्द्र मोदी के पीछे पड़ गए थे चुनाव के समय... मानो विपक्ष में मीडिया ही चुनाव मैदान में खड़ा हो। असल में यह सब सोच-समझ कर कराया जा रहा है।
MEDIA IS NOT FARE THESE DAYS.
THEY NEVER GIVE +VE NEWS.
-VE NEWS MEAN MEDIA.
AHSOK CHAKARDHAR ONCE SAID
"HANSI TO HAMESHA BEWKOOFI KI BATO PER HI AATI H"
SO THESE DAYS MENTALLY WE ARE BLACK MAILED & ARE FED WITH CHEAP NEWS.
सादर वन्दे सुरेश जी , काश आपकी हर पोस्ट इस देश का हर हिन्दू पढ़े इस देश का मिडिया तो कभी भी इस देश का नहीं रहा वो तो इटली से चलता है .
@आदरणीय एवं गुरुतुल्य सुरेश जी
कृपया आप भी ब्लॉग संसद के member बनें ,आप जैसे लोगों की उस ब्लॉग को बहुत आवश्यकता है,आपको member के रूप में पाकर मुझे बेहद प्रसन्नता होगी
महक
आपकी मेहनत वास्तव में तारीफे काबिल है कि आप जिस तरह से चुन-चुन कर आंकडें लाते हैं और इन सबकी पोल खोलते है किन्तु जाकिर अली जैसे बेवकूफों और सेकुलर हिंदुओं की समझ में यह सब नहीं आने वाला.
आपके लेखों से इन गुण्डों के प्रति लोगो के मन दबे ज्वालामुखी को थोड़ी और आग मिलती है जिससे उनको संतुष्टि होती है और धीरे-२ वो उग्र होता है. आप कृपया इस आग को बढ़ाते रहें शायद एक दिन हम लोगो के अन्दर दबा यह ज्वालामुखी कभी तो फूटेगा.
बहोत बढ़िया सर जी...
लेकिन लगता है की ... बस अभी बहोत पढ़ लिया.... कुछ तोह करना चाहिए यह.. कांग्रेस की मारने के लिए...
आप को भी यही सलाह है ...
आप भी कुछ करे... ऐसा बस लिखने से क्या होगा? बस पड़ने वालो को कुछ फरक नाही पड़ता ...
so please ऐसा कुछ करो.. जो यह ना हो
thanks..
कांग्रेस ओर सीबीआई की असलियत ओर पोल खोलते हुए सुनिए ओर देखिये खुद श्री नरेन्द्र मोदी जी को हिंदी में
Part-1
http://www.youtube.com/watch?v=A3EWofTIFUU
Part-2
http://www.youtube.com/watch?v=11zuB7eXwCI&feature=related
Part-3
http://www.youtube.com/watch?v=0eKDAf9Fl1w&feature=related
सवाल क्या है?
जबाब क्या है?
पर ये तो कीर्तन है कि एक ने हरे रामा हरे कृष्णा गया तो बकी सब भी दुहराने लगे।
सवाल यह है कि अमित शाह का अपना इतिहास भूगोल क्या रहा है और गवाहों सबूतों को वर्षों तक तलाशने के बाद जब सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जाँच में आरोपी को पकड़ा और अगला आरोपी पकड़ में आने वाला था पर गुजरात कोर्ट ने रिमांड पर देने की अनुमति नहीं दी। एक निरंतर क्रमशः विकसित होते गये राज्य में विकास की वर्तमान दशा का श्रेय एक व्यक्ति को दे भी दें तो उसे अपराधों की छूट तो नहीं दी जा सकती । वैसे तो कानोन के छिद्रों से सभी पैसे वाले निकल जाते हैं किंतु जाँच की सजा ही जितनी मिल जाये वही बहुत है।
अपराध के दो ध्रुवों के अलावा भी जनता है क्योंकि दोनों को मिला कर भी मुश्किल से 60 प्रतिशत समर्थन हासिल होता है अतः एक दूसरे के अपराधों को गिना कर बचत का रास्ता ढूंढना भी नैतिक अपराध है। जिन्होंने जब अपराध किया है तो उसका विरोध करने के लिए उनके खिलाफ आन्दोलन करने के लिए किसने रोका था किंतु उनके किये अपराधों के बहाने अपने अपराधियों को बचाने का तरीका ठीक नहीं है। फिर दोनों ही पक्ष सत्ता में रहे हैं तब क्या किया?
New Rupee Symbol Design Competition and It's Devastating Effect On Homegrown Design Talent
http://www.saveindianrupeesymbol.org
New Indian Rupee Symbol And Times Of India Media Hoax
http://newindianrupeesymbol.blogspot.com/
मुझे तो बस यही सोच-सोच कर हैरानी होती है कि अगर मोदी न होते तो इन कोंग्रेसियों की दाल रोटी चलती कैसे ? हाँ, वोट-बैंक को लुभाने के लिए कोई और हथकंडा अपना लेते, कमी थोड़े ही है आपने देश में ! बस, वोट बैंक जैसे बेहुदे लोग मिल जाने चाहिए इन्हें जो सालों तक एक हे राग अलापते रहें !
@ वीरेंदर जैन साहब,
हिंदुत्व भाजपा और संघ के नाम से आपको फिर "खुजली" होने लगी.. अब इसका क्या उपाय करे दादा हम तो नहीं जानते..
१ ) CBI अपना खेल गुजरात में खेल लेती वीरेंदर जैन जी, लेकिन मोदीजी का वो बयान आपको याद होगा जब उन्होंने कहा था "क्या गुजरात कि न्यायपालिकाओं को ताले लगा दे क्या."??? ये बात कांग्रेस कि उस साजिश के मद्देनजर जिसमे "सोराबुद्दीन" केस को गुजरात से बाहर ले जाने कि बात थी.. तब तथाकथित "न्यायपालिकाओं" को मिर्ची लगी थी..
२) अगर बात कानून व्यवस्था बनाये रखने कि बात है तो "रिपोर्ट" ये कहती है कि "कांग्रेस शाशित राज्यों में" अपराध का ग्राफ बाधा है.. कितने मुद्दे गिनाऊ..आपको.. जो आपकी कांग्रेस कि छवि में चार चाँद लगा देंगे..
-- लेकिन आपकी कांग्रेस कि अंधभक्ति के आगे आपको कुछ नहीं दिखाई देगा.. वो कहावत तो सुनी होगी .. भैंस के आगे ....क्या फायदा....?? समझ गए न..
जय हिंद,
hindutva aur rashtravaad,,
सुरेश जी अपना सिक्का खोटा न हो तो हमे किसी से क्या कहने की जरुरत है। हम हिन्दू पता नही किस मिट्टी के बनें हैं अपना सब कुछ लूटता छूटता देख रहे हैं कर कुछ नहीं हैं, कोई ज्यादा करने की भी जरुरत भी नहीं सिर्फ एकता ही दिखानी है। हिन्दुत्व को कोसने वाले हिन्दू, कांग्रेस को वोट देकर सत्ता में लाने वाले हिन्दू, संसद में मुसलमानों व ईसाइयों के लिये हिन्दूओं का हक छीनने वाले हिन्दू, माले गांव बम्ब धमाकों में साधवी व साधुवों को फसाने वाले हिन्दू, क्या-क्या गिनाऊ, हिन्दओं में जातीवाद का जहर घोलकर अपनों को अपना दुश्मन हिन्दू ही बना रहे हैं।
बहुत ही अच्छा, उम्दा और विश्लेषणात्मक लेख...
बधाई....
@ वीरेंद्र जैन,
या तो आपने सुरेश जी के लेख को ध्यान से पढ़ा नहीं
या फिर आप बेहद शातिराना दिमाग़ के धनी हैं|
सुरेश जी के लेख का केंद्र निम्न पॅरग्रॅफ है इस हिस्से को ध्यान से पढ़े फिर जवाब दे सकने की योग्यता हो जवाब देना :- :-
1) अब तक पिछले कुछ वर्षों में भारत में लगभग 5000 एनकाउंटर मौतें हुई हैं।
2) लगभग 1700 से अधिक एनकाउंटर के मामलों की सुनवाई और प्राथमिक रिपोर्ट देश के विभिन्न न्यायालयों और मानवाधिकार संगठनों के दफ़्तरों में धूल खा रही हैं।
3) पिछले दो दशक में अकेले उत्तरप्रदेश में 800 एनकाउंटर हुए।
4) यहाँ तक कि कांग्रेस शासित राज्य महाराष्ट्र में पिछले कुछ वर्षों में 400 एनकाउंटर हुए।
अब जो लोग जागरुक हैं और राजनैतिक खबरों पर ध्यान रखते हैं, वे बतायें कि इतने सैकड़ों मामलों में क्या कभी किसी ने, किसी राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ़ मीडिया में ऐसा दुष्प्रचार और घटिया अभियान देखा है? इतने सारे एनकाउण्टर के मामलों में विभिन्न राज्यों में पुलिस के कितने उच्चाधिकारियों को सजा अथवा मुकदमे दर्ज हुए हैं? क्या महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश या आंध्रप्रदेश में हुए एनकाउण्टर के लिये वहाँ के मुख्यमंत्री से जवाब-तलब हुए, या "शिकंजा" कसा गया? नहीं… क्योंकि यदि ऐसा होता तो जिन राज्यों में केन्द्र के जिम्मे सुरक्षा व्यवस्था है उनमें जैसे जम्मू-कश्मीर, मणिपुर अथवा झारखण्ड (राष्ट्रपति शासन) आदि में होने वाले किसी भी एनकाउंटर के लिये मनमोहन-चिदम्बरम या प्रतिभा पाटिल को जिम्मेदार माना जायेगा? और क्या मीडिया वालों को उनसे जवाबतलब करना चाहिये? सुरक्षा बलों द्वारा वीरप्पन की हत्या के बाद, उसकी पत्नी ने भी CBI के विरुद्ध चेन्नई हाइकोर्ट में अपील की थी, लेकिन तब तो कर्नाटक-तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के खिलाफ़ मीडिया ने कुछ नहीं कहा था? तो फ़िर अकेले नरेन्द्र मोदी को क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
आदरणीय सुरेश जी,
आजकल कुछ अजीब सा लग रहा है |
प्राचीन काल में जब ऋषि मुनि गण जन हित के लिए यज्ञ करते थे तब दुष्ट राक्षस गण यज्ञ ध्वंस करने के लिए लुप्त रह कर उसमें विष्ठा हड्डी इत्यादि निकृष्ट वस्तुएं डाल देते थे |
नेगेटिव और पॉजिटिव आस्पेक्ट्स हमेशा बनी रहेंगी - आज भी बनी हुई हैं |
आप भारत के जन हित के लिए यज्ञ कर रहें हैं - तो ज्ञात अज्ञात दुष्ट राक्षस गणों द्वारा आपके यज्ञ को ध्वंस करने का प्रयास तो होगा ही - और हो भी रहा है |
आजकल यज्ञ में पानी गिराने वाले ही दिखाई दे रहे हैं - मानसिक विष्ठा - हड्डी इत्यादि निकृष्ट वस्तुएं डालने वाले संभवतः अज्ञातवास का सेवन कर निकृष्ट वस्तुओं के संचय में लगे हुए हैं |
संभवतः शीघ्र ही क्षद्म वेश धारी दुष्टों से मानसिक विष्ठा प्रक्षेपित की जाएगी - तैयार रहिएगा |
is article ko face book main share karna chatha tha per salo ki pahuch yahn tak bhi hain ki google null report dikha raha koi baat nahi sabko mail or apka link bhejuga.
Hamesh ki tarah ek Umda Lekh.
Sadar.
नमस्ते
इसमें सब दोस भा.ज.पा. क़ा है आधे भारत पर उसका शासन है उग्र आन्दोलन की आवस्यकता है आखिर सज्जन कुमार को क्यों गिरफ्तार किया जाता बोफोर्ष व गिश कांड में सोनिया से पूछ-ताछ क्योंन हो ,नरेन्द्र मोदी क़ा देश ब्यापी दौरा होना चाहिए और जनता की अदालत में जाना चाहिए.फिर जनता निर्णय करेगी महाराष्ट्र,दिल्ली,उत्तर प्रदेश इत्यादि अदालतों पर कैसे भरोसा किया जाय जब गुजरात भरोसे मंद नहीं .
धन्यवाद.
दादा की हताशा साफ झलक रही हे की कांग्रेस के पापो में साथ देने में इनका bhi हाथ हे ,दादा khood ko garv के साथ rastriya nagrik nahee bata sakte हे ?kitani lachari हे ?
मुस्लिम वोटो के लिए कोई कुछ भी करेगा , यही कांग्रेस कर रही है, देश की किसी को क्या पड़ी है ?
कांग्रेस की ये सब चालें घटिया तुष्टिकरण का परिणाम है
गुजरात तब तक ही शत्रु राज्य है,
जब तक केंद्र में कांग्रेस और गुजरात में गैर-कांग्रेस सरकार है.
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@ वीरेन्द्र जैनः- बन्धुवर, अब तो एक केन्द्रीय मन्त्री (कैबिनेट स्तर की) ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि नक्सल नेता आज़ाद का भी फर्ज़ी एनकाउन्टर हुआ है, आप चिदम्बरम पर मुकदमें की मांग कब करने वाले हैं? आपको इस मुहिम मे मेरा सहयोग प्राप्त होगा धन से भी समय मे भी। कृपया निःसंकोच इस blog के माध्यम संपर्क करें।
श्री मान सुरेश जी को सदर नमन !
इस देश को सब खाने को बैठे है भाई साहब आप और मेरे चिलाने से कोन सुनने वाला है !
मुझे आपका लिंक गूगल पर सर्च करते हुए मिला ।
मैने आपका ब्लोग पढा. अच्छ लगा. लिखते रहिये. एक शेर कहना है
इस दौरे तरक्की के अंदाज निराले हैं
जहनों में अन्धेरे हैं, सड़कों पे उजाले हैं
उस दिन का इन्तजार है, जब सभी भारतवासी हिन्दी को इज्जत देना शुरु करेंगे.
Thanks for Promoting our belovd National Language by writing a blog in it.
Jyotsna Verma
Liver Transplant Consultant
www.indialivertransplant.com
SURESH JI
muze samz nahi aata ki aap ke kai lekh padhkar to rajniti ki duniya me bhukamp aa jana chahiye lekin gndhi premi ( medam ) chaplus neta chup kyo hai.?????? kya unhone shvikar karliya hai aap ki bato ko.....
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