Monday, August 23, 2010

वामपंथी सेकुलरिज़्म का पाखण्ड और मीडिया का पक्षपाती रवैया फ़िर उजागर (सन्दर्भ : अब्दुल नासिर मदनी की गिरफ़्तारी)… Madni Arrest Issue, Communist Secularism and Media Bias

कुछ दिनों पहले देश की जनता ने मीडियाई जोकरों और सेकुलरों की जमात को गुजरात के गृहमंत्री अमित शाह की गिरफ़्तारी के मामले में "रुदालियाँ" गाते सुना है। एक घोषित खूंखार अपराधी को मार गिराने के मामले में, अमित शाह की गिरफ़्तारी और उसे नरेन्द्र मोदी से जोड़ने के लिये मीडियाई कौए लगातार 4-5 दिनों तक चैनलों पर जमकर कांव-कांव मचाये रहे, अन्ततः अमित शाह की गिरफ़्तारी हुई और "सेकुलरिज़्म" ने चैन की साँस ली…



जो लोग लगातार देश के घटियातम समाचार चैनल देखते रहते हैं, उनसे एक मामूली सवाल है कि केरल में अब्दुल नासिर मदनी की गिरफ़्तारी से सम्बन्धित "वामपंथी सेकुलर नौटंकी" कितने लोगों ने, कितने चैनलों पर, कितने अखबारों में देखी-सुनी या पढ़ी है? कितनी बार पढ़ी है और इस महत्वपूर्ण "सेकुलर" खबर (बल्कि सेकुलर शर्म कहना ज्यादा उचित है) को कितने चैनलों या अखबारों ने अपनी हेडलाइन बनाया है? इस सवाल के जवाब में ही हमारे 6M (मार्क्स, मुल्ला, मिशनरी, मैकाले, माइनो और मार्केट) के हाथों बिके हुए मीडिया की हिन्दू-विरोधी  फ़ितरत खुलकर सामने आ जायेगी। जहाँ एक तरफ़ अमित शाह की गिरफ़्तारी को मीडिया ने "राष्ट्रीय मुद्दा" बना दिया था और ऐसा माहौल बना दिया था कि यदि अमित शाह की गिरफ़्तारी नहीं हुई तो कोई साम्प्रदायिक सुनामी आयेगी और सभी सेकुलरों को बहा ले जायेगी, वहीं दूसरी तरफ़ केरल में बम विस्फ़ोट का एक आरोपी खुलेआम कानून-व्यवस्था को चुनौती देता रहा, केरल के वामपंथी गृहमंत्री ने उसे बचाने के लिये एड़ी-चोटी का जोर लगा डाला, आने वाले चुनावों मे हार से भयभीत वामपंथ ने मुस्लिमों को खुश करने के लिये केरल पुलिस का मनोबल तोड़ा… पूरे आठ दिन तक कर्नाटक पुलिस मदनी को गिरफ़्तार करने के लिये केरल में डेरा डाले रही तब कहीं जाकर उसे गिरफ़्तार कर सकी… लेकिन किसी हिन्दी न्यूज़ चैनल ने इस शर्मनाक घटना को अपनी तथाकथित "ब्रेकिंग न्यूज़" नहीं बनाया और ब्रेकिंग या मेकिंग तो छोड़िये, इस पूरे घटनाक्रम को ही ब्लैक-आउट कर दिया गया। यहाँ पर मुद्दा अमित शाह की बेगुनाही या अमित शाह से मदनी की तुलना करना नहीं है, क्योंकि अमित शाह और मदनी की कोई तुलना हो भी नहीं सकती… यहाँ पर मुद्दा है कि हिन्दुत्व विरोध के लिये मीडिया को कितने में और किसने खरीदा है? तथा वामपंथी स्टाइल का सेकुलरिज़्म मुस्लिम वोटों को खुश करने के लिये कितना नीचे गिरेगा?

मुझे विश्वास है कि अभी भी कई पाठकों को इस "सुपर-सेकुलर" घटना के बारे में पूरी जानकारी नहीं होगी… उनके लिये संक्षिप्त में निम्न बिन्दु जान लेना बेहद आवश्यक है ताकि वे भी जान सकें कि ढोंग से भरा वामपंथ, घातक सेकुलरिज़्म और बिकाऊ मीडिया मिलकर उन्हें किस खतरनाक स्थिति में ले जा रहे हैं…

1) कोयम्बटूर बम धमाके का मुख्य आरोपी अब्दुल नासिर मदनी फ़िलहाल केरल की PDP पार्टी का प्रमुख नेता है।

2) कर्नाटक हाईकोर्ट ने दाखिल सबूतों के आधार पर मदनी को बंगलौर बम विस्फ़ोटों के मामले में गैर-ज़मानती वारण्ट जारी कर दिया, जिसमें गिरफ़्तारी होना तय था।

3) मदनी ने इसके खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई हुई है, लेकिन कर्नाटक पुलिस को मदनी को गिरफ़्तार करके उससे पूछताछ करनी थी।

4) कर्नाटक पुलिस केरल सरकार को सूचित करके केरल पुलिस को साथ लेकर मदनी को गिरफ़्तार करने गई, लेकिन केरल की वामपंथी सरकार अपने वादे से मुकर गई और कर्नाटक सरकार के पुलिस वाले वहाँ हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, क्योंकि केरल पुलिस ने मदनी को गिरफ़्तार करने में कोई रुचि नहीं दिखाई, न ही कर्नाटक पुलिस से कोई सहयोग किया (ज़ाहिर है कि वामपंथी सरकार के उच्च स्तरीय मंत्री का पुलिस पर दबाव था)।

5) इस बीच अब्दुल नासेर मदनी अनवारसेरी के एक अनाथालय में आराम से छिपा बैठा रहा, लेकिन केरल पुलिस की हिम्मत नहीं हुई कि वह अनाथाश्रम में घुसकर मदनी को गिरफ़्तार करे, क्योंकि मदनी आराम से अनाथाश्रम के अन्दर से ही प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके राज्य सरकार को सरेआम धमकी दे रहा था कि "यदि उसे हाथ लगाया गया, तो साम्प्रदायिक दंगे भड़कने का खतरा है…"। 2-3 दिन इसी ऊहापोह में गुज़र गये, पहले दिन जहाँ मदनी के सिर्फ़ 50 कार्यकर्ता अनाथाश्रम के बाहर थे और पुलिस वाले 200 थे, वक्त बीतने के साथ भीड़ बढ़ती गई और केरल पुलिस जिसके हाथ-पाँव पहले ही फ़ूले हुए थे, अब और घबरा गई। इस स्थिति का भरपूर राजनैतिक फ़ायदा लेने की वामपंथी सरकार की कोशिश उस समय बेनकाब हो गई जब कर्नाटक के गृह मंत्री और गिरफ़्तार करने आये पुलिस अधीक्षक ने केरल के DGP और IG से मिलकर मदनी को गिरफ़्तार करने में सहयोग देने की अपील की और उन्हें कोर्ट के आदेश के बारे में बताया।

6) इतना होने के बाद भी केरल पुलिस ने अनाथाश्रम के दरवाजे पर सिर्फ़ एक नोटिस लगाकर कि "अब्दुल नासिर मदनी को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर देना चाहिये, क्योंकि केरल पुलिस के पास ऐसी सूचना है कि अनाथाश्रम के भीतर भारी मात्रा में हथियार भी जमा हैं…" अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। अब्दुल नासिर मदनी लगातार कहता रहा कि सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आने के बाद ही वह आत्मसमर्पण करेगा (यानी जब वह चाहेगा, तब उसकी मर्जी से गिरफ़्तारी होगी…)। मदनी ने रविवार (15 अगस्त) को कहा कि वह बेगुनाह हैं और बम विस्फोट की घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है। मदनी ने कहा, 'मैं एक धार्मिक मुसलमान हूं और कुरान लेकर कहता हूं कि बम विस्फोट के मामले में सीधे या परोक्ष किसी भी तरह की भूमिका नहीं है। यदि कर्नाटक पुलिस चाहती है कि वह मुझे गिरफ्तार किए बगैर वापस नहीं जाएगी तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है। लेकिन इसके बाद हालात अस्थिर हो जाएंगे।' (ऐसी ही धमकी पूरे भारत को कश्मीर की तरफ़ से भी दी जाती है कि अफ़ज़ल गुरु को फ़ाँसी दी तो ठीक नहीं होगा… और "तथाकथित महाशक्ति भारत" के नेता सिर्फ़  हें हें हें हें हें करते रहते हैं…)। खैर… केरल पुलिस (यानी सेकुलर सरकार द्वारा आदेशित पुलिस) ने भी सरेआम "गिड़गिड़ाते हुए" मदनी से कहा कि अदालत के आदेश को देखते हुए वह गिरफ़्तारी में "सहयोग"(?) प्रदान करे…।

7) अन्ततः केरल की वामपंथी सरकार ने दिल पर पत्थर रखकर आठ दिन की नौटंकी के बाद अब्दुल नासिर मदनी को कर्नाटक पुलिस के हवाले किया (वह भी उस दिन, जिस दिन मदनी ने चाहा…) और छाती पीट-पीटकर इस बात की पूरी व्यवस्था कर ली कि लोग समझें (यानी मुस्लिम वोटर समझें) कि अब्दुल नासिर मदनी एक बेगुनाह, बेकसूर, मासूम, संवेदनशील इंसान है, केरल पुलिस की मजबूरी(?) थी कि वह मदनी को कर्नाटक के हवाले करती… आदि-आदि।

चाहे पश्चिम बंगाल हो या केरल, वामपंथियों और सेकुलरों की ऐसी नग्न धर्मनिरपेक्षता (शर्मनिरपेक्षता) जब-तब सामने आती ही रहती है, इसके बावजूद कंधे पर झोला लटकाकर ऊँचे-ऊँचे आदर्शों की बात करना इन्हें बेहद रुचिकर लगता है। इस मामले में भी, केरल सरकार के उच्च स्तरीय राजनैतिक ड्रामे के बावजूद कानून-व्यवस्था का बलात्कार होते-होते बच गया…।

खतरे की घण्टी बजाता एक और उदाहरण देखिये -

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला देश का सर्वाधिक घनी मुस्लिम आबादी वाला जिला है। यहाँ के जिला मजिस्ट्रेट (परवेज़ अहमद सिद्दीकी) के कार्यालय से चुनाव के मद्देनज़र मतदाता सूची का नवीनीकरण करने के लिये जो आदेश जारी हुए, उसमें सिर्फ़ पत्र के सब्जेक्ट में "मुर्शिदाबाद" लिखा गया, इसके बाद उस पत्र में कई जगह "मुस्लिमाबाद" लिखा गया है (सन्दर्भ - दैनिक स्टेट्समैन 29 जुलाई)। वह पत्र कम से कम चार-पाँच अन्य जूनियर अधिकारियों के हाथों हस्ताक्षर होता हुआ आगे बढ़ा, लेकिन किसी ने भी "मुर्शिदाबाद" की जगह "मुस्लिमाबाद" कैसे हुआ, क्यों हुआ… के बारे में पूछताछ करना तो दूर इस गलती(?) पर ध्यान तक देना उचित नहीं समझा।

जब कलेक्टर से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से कहा कि यह सिर्फ़ "स्पेलिंग मिस्टेक" है…। अब आप कितने ही बेढंगे और अनमने तरीके से "मुर्शिदाबाद" लिखिये, देखें कि वह "मुस्लिमाबाद" कैसे बनता है… चलिये हिन्दी न सही अंग्रेजी में ही Murshidabad को Muslimabad लिखकर देखिये कि क्या स्पेलिंग मिस्टेक से यह सम्भव है? आप कहेंगे कि यह तो बड़ी छोटी सी बात है, लेकिन थोड़ा गहराई से विचार करेंगे तो आप खुद मानेंगे कि यह कोई छोटी बात नहीं है। मुर्शिदाबाद में ही कुछ समय पहले एक धार्मिक संस्थान ने स्कूलों में बंगाल के नक्शे मुफ़्त बँटवाये थे, जिसमें मुर्शिदाबाद को स्वायत्त मुस्लिम इलाका प्रदर्शित किया गया था… तब भी प्रशासन ने कुछ नहीं किया था और अब भी प्रशासन चुप्पी साधे हुए है… बोलेगा कौन? वामपंथी शासन (और विचारधारा भी) पश्चिम बंगाल की 16 सीटों पर निर्णायक मतदाता बन चुके मुस्लिमों को खुश रखना चाहती है और ममता बनर्जी भी यही चाहती हैं… ठीक उसी तरह, जैसे केरल में मदनी से बाकायदा Request की गई थी कि "महोदय, जब आप चाहें, गिरफ़्तार हों जायें…"।

तात्पर्य यह है कि यदि आप किसी आतंकवादी (कसाब, अफ़ज़ल), किसी हिस्ट्रीशीटर (अब्दुल नासिर मदनी, सोहराबुद्दीन), किसी सताये हुए मुस्लिम (मकबूल फ़िदा हुसैन, इमरान हाशमी), बेगुनाह और मासूम मुस्लिम (रिज़वान, इशरत जहाँ) के पक्ष में आवाज़ उठायें तो आप सेकुलर, प्रगतिशील, मानवाधिकारवादी, संवेदनशील… और भी न जाने क्या-क्या कहलाएंगे, लेकिन जैसे ही आपने, बिना किसी ठोस सबूत के मकोका लगाकर जेल में रखी गईं साध्वी प्रज्ञा के पक्ष में कुछ कहा, कश्मीरी पण्डितों के बारे में सवाल किया, रजनीश (कश्मीर) और रिज़वान (पश्चिम बंगाल) की मौतों के बारे में तुलना की… तो आप तड़ से "साम्प्रदायिक" घोषित कर दिये जायेंगे…। 6M के हाथों बिका मीडिया, सेकुलरिस्ट, कांग्रेस-वामपंथी (यहाँ तक कि तूफ़ान को देखकर भी रेत में सिर गड़ाये बैठे शतुरमुर्ग टाइप के उच्च-मध्यमवर्गीय हिन्दू) सब मिलकर आपके पीछे पड़ जायेंगे…

बहरहाल, अब्दुल नासिर मदनी को कर्नाटक पुलिस गिरफ़्तार करके ले गई है, तो शायद दिग्विजयसिंह, सोनिया गाँधी को पत्र लिखकर इसके लिये चिदम्बरम और गडकरी को जिम्मेदार ठहरायेंगे, हो सकता है वे आजमगढ़ की तरह एकाध दौरा केरल का भी कर लें… शायद मनमोहन सिंह जी रातों को ठीक से सो न सकें…(जब भी किसी "मासूम" मुस्लिम पर अत्याचार होता है तब ऐसा होता है, चाहे वह भारत का मासूम हो या ऑस्ट्रेलिया का…), शायद केरल के वामपंथी, जो बेचारे बड़े गहरे अवसाद में हैं अब कानून बदलने की माँग कर डालें… सम्भव है कि ममता बनर्जी, मदनी के समर्थन में केरल में भी एकाध रैली निकाल लें… शायद शबाना आज़मी एकाध धरना आयोजित कर लें… शायद तीस्ता जावेद सीतलवाड इस "अत्याचार" के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट चली जायें (भले ही झूठ बोलने के लिये वहाँ से 2-3 बार लताड़ खा चुकी हों)… लगे हाथों महेश भट्ट भी "सेकुलर बयान की एक खट्टी डकार" ले लें… तो भाईयों-बहनों कुछ भी हो सकता है, आखिर एक "मासूम, अमनपसन्द, बेगुनाह, संवेदनशील… और भी न जाने क्या-क्या टाइप के मुस्लिम" का सवाल है बाबा…




सन्दर्भ - http://hindi.economictimes.indiatimes.com/articleshow/6319250.cms

http://expressbuzz.com/states/kerala/high-level-deal-struck-behind-curtains/198955.html

http://hindusamhati.blogspot.com/2010/08/murshidabad-now-muslimabad-impending.html


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23 comments:

संजय बेंगाणी said...

महेश भट्ट तो फिल्म बनाएंगे मदनी पर. एक मासूम अपराधी. भट्ट सा'ब की फिल्म में अमुमन गेंगस्टर होता है बहुत मासूम, प्रेम करने वाला और विलैन हमेंशा पुलिस होती है. तो मदनी भी सही रहेगा. बड़ा मासूम, धर्मनिरपेक्ष, देशप्रेमी, स्नेह करने वाला. वरना वामपंथी काहे पुचकारते?

पाक हिन्दुस्तानी said...

धन्यवाद इस आलेख के लिये... केरल की सरकार दोनों हाथों में लड्डू चाहती है. मुस्लिम कट्टरपंथियों ने जब पादरियों के हाथ काटना शुरु किया तो दरकते इसाई वोटबैंक को वापस लाने के लिये इनका मूर्खमंत्री (मुस्लिमाबाद जैसी स्पेलिंग मिस्टेक हो गई, कृपया मुख्यमंत्री पढ़ें) बयान देता है कि केरल में मुसलमान तबाही मचा देंगे... और अब मदनी जैसे कट्टरपंथी आदमी को गिरफ्तार करने में इन्हें घबराहट होती है.

वैसे मदनी की कलई अब खुल चुकी है,अपनी गिरफ्तारी होने पर केरला में जबर्दस्त रोष की बात करता था, लेकिन जनता ने इस पर ध्यान भी नहीं दिया, सिर्फ इसके चमचे थोडा बहुत दिखावा (प्रदर्शन का मतलब यही होता है न?) कर आये.

अब आशा है कर्नाटक सरकार इसको इसके गुनाहों की उचित सज़ा दिलवायेगी (वैसे बिना बात की उम्मीद है, जो लोग रेड्डी ब्रदर्स जैसे खुल्ले चोरों को नहीं रोक पाये वो इसको भी क्या रोक सकेंगे)

सम्वेदना के स्वर said...

सवाल यही है कि आपाधापी से भरें आज के जीवन में पब्लिक ओपिनियन बनाने में इसी मीडिया का बहुत बड़ा रोल रहता है, इस बात से आप भी इंकार नहीं कर सकते.

राजनैतिक रूप से बीजेपी को यदि इससे नुक्सान होता है तो उसके मीडिया मैनेज़र क्या कर रहें है?
"सरवाइवल आफ द फ़िटेस्ट" के इस खेल में उनके पास तो अपनी बात ठीक से कहने वाले लोग भी नहीं है! टीवी चैनलों पर रिरयाते, फुटेज के लिये तरसते इन लोगों से उम्मीद नहीं कर सकते आप. दरअसल हमाम में ये भी नगें हैं, वरना किसने रोका है उन्हें इन चैनल वालों से इस बारे में सवाल पूछनें में, इनामी टेलीविज़न पत्रकारों के व्यक्तिगत कार्यकलापों का ब्योरा लेने या देने में? क्या डर है कि बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जायेगी ?
चैनल वाले यदि आपकी पूरी बात नहीं दिखाते तो अपने ब्लोग बनायीयें और बताइये सारी बात? क्यों नहीं है आपका भी डैडीकेडिट चैनल ? देश की राजनीति क्या कल परसों से ही ऐसी हुई है?

Amit singh said...

अरे मदनी गिरफ्तार हो गया? मुझे तो पता ही नहीं चला...
बेबकुफ़ सेकुलारिया अच्युतानंदन का बयान पढ़ा था जिसमें वह इस इस्लामिक आतंकवादी मदनी के पेरों के निचे अपनी नाक रगडने जैसा कुछ कह रहा था.

सुलभ § Sulabh said...

मदनी की गिरफ्तारी की सूचना मुझे यहाँ ब्लॉग से मिली.
टेलीविजन आजकल देखता नहीं, और कोई ब्रेकिंग न्यूज़ टाइप हल्ला भी नहीं सुना. अब सुनना चाहिए आगे क्या क्या होता है.

बाकी शर्मनिरपेक्षता (धर्मनिरपेक्षता) बाढ़ की तरह अपने उफ़ान पर है. क्या क्या बचेगा और क्या नही बचेगा, कहना मुश्किल है.

man said...

सर सादर वन्दे ,
एक बार फिर भांडो और सफ़ेद खून के कीड़ो की नंगई खोलता आलेख ,मदनी इनका फूफेर ससुर लगता हे उसके आगे तोये अपनी मान्ड़ेंगे ,इस में कोई सरपरायज नहीं |

jasvant said...

सुरेश राष्ट्रीय मुद्दों को इन्टरनेट पर काफी शानदार तरीके से समझाते है, लेकिन हमेशा की तरह ऐसे लोगो की आवाज दबा दी जाती है, जैसे बी जे पि की, मुस्लिम घाघरे में छुपी मिडिया, ये सब चंद हिजड़े हिन्दुओ की मेहरबानियों का नतीजा है, ये मिडिया ने तो हिन्दुओ एव संस्कृति को हिजड़ा बना दिया है, ये एन, डी टी. वि , हेडलाइन टुडे, इंडिया टी वि ( रंडी चेनल ) जेसे बाजारू चेन्नल हिन्दुओ का गला एवं आवाज घोटने में लगे हुए है, एक एसा माहोल बनाना चाहते है जिसकी कोई पहचान नहीं है, इन भड़वे चेनलों का मकसद सिर्फ चाटुकारिता करना और पैसा, टी आर पि कमाना है , जिस दिन हमारे आर एस एस ने हेडलाइन टुडे पर हमला किया था तो , आज तक के लोग मुद्दे के आटे से गरमा गरम समोसे बनाने में लग गए, शाम को उन्होंने एन डी टी वि का वो विनोद दुआ है जो अपने आप को सेकुलरिस्म का सिपाही कहता है, जो पुरे भारत में जायका इंडिया का ( स्वाद भारत का नहीं ...याद आया ) जेसे कार्यक्रम करता है , उससे इस घटना के बारें में पूछा हेडलाइन वालो ने तो उसने बताया की "आर एस एस लातों के भुत है ऐसे नहीं मानेंगे." उससे पूछो. जब आर एस एस एन डी टी वि आएगी तो कोई तू वहा पर नहीं मिलेगा लेकिन तेरे टट्टू मर खायेंगे हेडलाइन टुडे की तरह ! और अबकी बार सिर्फ १००० लोग नहीं १००००० आयेंगे ! जय हिंद वन्दे मातरम ,

man said...

अब तो मदनी जेसे मोल्वियो के लिए वेतन की मांग लालूजेसे जोकर और मिया मुलायम जेसे भडवो ने सरकारसे की हे जीस पर उसने गंभीरता से विचार करने की कहा हे ,अब पता नहीं साले ये जोकर आजमगढ़ को अलग रास्ट्र बनाने की मांग ना कर ले , वोट के लिए ये इतने छीदे नहीं हो सकते हे , सालो की ????? से कुछ ने कुछ गलती हुई हे फ्लेशबैक में ?आखिर खून हे तो बोलेगा ही ,संसद में या भाषण में ?

राहुल पंडित said...

चलिए आपने तो बता दिया.....कुछ लोग तो जान जाएँ...
मीडिया को हिन्दुओं से पैसे थोड़े ही मिलते हैं...जो इस खबर को तवज्जो देगी?

दीर्घतमा said...

वास्तव में हमारे गाव में एक कहावत है कि जैसा खाय अन्न वैसा बने मनं ,मिडिया तो बिदेशी धन से चल रही है तो आप अंदाज कर सकते है की ये कितने देश भक्त हो सकते है .संजय बेगानी ने महेश भट्ट की चर्चा की तो महेश भट्ट से कोई देश हित की उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्यों की वे भी मुस्लिम ही है नाम हिन्दू रखने से कोई हिन्दू व देश भक्त नहीं हो जाता .

आनंद said...

बहुत ही बेबाकी से तथ्यात्मक लेखन के लिये बधाई...

दिवाकर मणि said...

पता नहीं आप सबों को हो क्या गया है !! अरे भाई देश के दामादाधिराज मदनी मियां ने कह दिया कि वे बेकसूर हैं, फिर भी आप लोग उनके पिछवाड़े को कुरेदने में लगे हुए हैं. अफजल, कसाब, लादेन या अन्य कोई भी मुस्लिम चाहे आप और दुनिया उसे आतंकवादी ही क्यों ना माने, बस केवल यह कह दे, और खासकर कुरान की कस्म लेकर कि वो निरीह, बेजुबान, निरपराध है तो सबको यह मान लेना चाहिये कि वो ऐसा ही है. इस देश की मीडिया, सरकार, नेता सब मान गये कि मदनी जी भोले-भाले संत टाइप मुल्ला हैं, आप लोग बस नहीं मान रहे. आप ही लोगों के कारण इस देश की सांप्रदायिक एकता व सद्भाव खतरे में हैं. मीडिया वालों कहां हो......जल्दी से इस सुरेश चिपलूनकर और यहां पर आने वाले अन्य टिप्पणीकारों पर एक रिपोर्ट तैयार करो..... "सावधान..देश की एकता खतरे में....इंटरनेट पर देश की धर्मनिरपेक्षता को नंगा करता यह व्यक्ति बहुत शातिर है...फलां-फलां हिन्दू आतंकवादी संगठनों से इसका वास्ता है...इसपर पोटा, टाडा लगना चाहिये...बिना देर किये जेल की सलाखों के अंदर करना चाहिये....." आदि-आदि शीर्षक से मीडियाई भांडो एक रिपोर्ट तो तैयार करो...अरे कहां हो एन.डी.टी.वी. वालों, सबसे तेज चैनल वालों, इंडिया टीवी वालों.....जल्दी करो...नहीं तो टी.आर.पी. की दौड़ में पिछड़ जाओगे....

man said...

भारतीय सेकुलर भडवो के लिए बुरी खबर ....८५% नुयार्क वासी नहीं चाहते जीरो ground पे मस्जिद ,साले अब भारतीय भडवे श्यापा करेंगे इनकी माँ का कसम मर गया हे ? लकिन अमेरिकी कहेंगे की दूसरा कसम कर लो लेकिन मस्जीद नहीं ?

Yash said...

अपने मुल्ला मनमोहन ने तो एलान कर दिया है की देश के संसाधनों पर पहला हक़ मुसलमानों का होना चाहिए, क्योकि ये देश सदियों से मुसलमानों का है और हिन्दू तो अभी अभी आये है ५० - ६० साल हुए हें ना , ये हमारी बदनसीबी है की हमें ऐसा पी. एम. मिला, इसे मै अपने ऑफिस का चपरासी भी न रखु !

सौरभ आत्रेय said...

फिर से हम सभी
सनातन वैदिक हिन्दू धर्म के अनुयायियों को निरुत्तर करता यह आलेख !!
और
6-M का हम सभी को यह सन्देश --> उखाड़ लो जो उखाड़ना है ??

kaverpal said...

Dear suresh hamara hindi midia tois tarah kam karta hai jis tarah ek najayaj aulad kam karti hai jisko seahna hamari majburi hai kyonki yeh najayaj aulad bhi to hamari hai

खुर्शीद अहमद said...

मदनी की इससे पहले भी कोयम्बतूर बोम्ब ब्लास्ट के झूठे आरोप में गिरफ्तार किया गया था लेकिन हुआ क्या? मदनी के खिलाफ कोई सबूत ही पुलिस अदालत में पेश नहीं कर पाई और वो बाइज्ज़त बरी हो गए. और हाँ बंगलोर बम ब्लास्ट में सिलसिले में तो पहले आजमगढ़ के लडको को गिरफ्तार किया गया था और अब मदनी. खैर संघी सरकार कर्णाटक की कुछ भी करे बस मुसलमानों को परेशां करना चाहिए.

Anonymous said...

Hai-2 khurshid beta, tohare sasur ke sab jutthe kahela.Okare giraftari ke hamara bahut dukh hai. I,m with u. Just keep it up.

DEEPAK BABA said...

लो दद्दा, खुर्शीद अहमद के साथ ही ६ एम् का विधवा आलाप चालू हो गया है. खुर्शीद साहेब अभी तो मदानी का बाल बांका भी नहीं हुवा.पता नहीं आपके बेशर्म पूर्वज कैसे रह गए भारत विशाल में, उनको भी पकिस्तान चला जाना चाहिए था. शर्म आती है अपने को भारतीय गणराज्य का नागरिक कहते हुवे. जहाँ व्यवस्था मात्र कुछ लोगों को पुष्ट करने के बुधीवहीन, कायर, बहुसंख्यक लोगों का हक दबोती है.

कुछ शब्द आपको अच्छे नहीं लगेगे परन्तु आपने खुर्शीद की टिपण्णी चस्पा की है तो कृपया मेरी टिपण्णी को पोस्ट के साथ लगा देना.

{ BHAGAT SINGH } said...

मदनी को मार मार कर भूतनी बना देना चाहिये.

खुर्शीद अहमद said...

पीडीपी नेता अब्दुल नासिर मदनी की बेंगलूर स्टेडियम के बाहर हुए विस्फोटो में संलिप्तता संबंधी कर्नाटक के गृह मंत्री के दावे की राज्य पुलिस ने बुधवार को हवा निकाल दी। पुलिस ने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत में यहां चिन्नास्वामी क्रिकेट स्टेडियम के समीप हुए दोनों विस्फोटों में मदनी की भूमिका अब तक साबित नहीं हो पाई है।

Dainik Jagran (Bhajpa ka samacharpatra) ka kahna hai.

Divya said...

Ah ! Pseudosecularism ! This is the IRONY !

Anonymous said...

If three "Yadva's' can pressurize central Govt to have caste based census, and be successful to en cash and re-establish caste system. MY (Muslim + Yadav) formula become the key of success in election, the situation could be imagined.
Who says Brahmins ruled over and destroyed India? We have been ruled over by Mughals and Yadva dynasty and still being ruled over by themselves. Rest all politicians are mere businessmen and activists are part of the greedy crowd