Thursday, August 26, 2010

क्या वोटिंग मशीन धोखाधड़ी के उजागर होने से कांग्रेस सरकार भयभीत है?… EVM Hacking, Hari Prasad Arrested, Vulnerable Voting Machines

हैदराबाद के निवासी श्री हरिप्रसाद, जिन्होंने भारतीय इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों में हैकिंग कैसे की जा सकती है और वोटिंग मशीनें सुरक्षित नहीं हैं इस बारे में विस्तृत अध्ययन किया है और उसका प्रदर्शन भी किया है… को मुम्बई पुलिस ने उनके हैदराबाद स्थित निवास से गिरफ़्तार कर लिया है। पुलिस ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने EVM की चोरी की है और चोरी की EVM से ही वे एक तेलुगू चैनल पर अपना प्रदर्शन कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि श्री हरिप्रसाद VETA (Citizens for Verifiability, Transparency and Accountability in Elections), के तकनीकी सलाहकार और शोधकर्ता हैं। हरिप्रसाद ने कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और यू-ट्यूब पर बाकायदा इस बात का खुलासा किया है कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों को किसी एक खास पार्टी के पक्ष में "हैक" और "क्रैक" किया जा सकता है। हरिप्रसाद के साथ तकनीकी टीम में अमेरिकी विश्वविद्यालय के दो प्रोफ़ेसर और "एथिकल हैकर" शामिल हैं तथा इस बारे में चुनाव विशेषज्ञ (Safologist) श्री राव ने एक पूरी पुस्तक लिखी है (यहाँ देखें…)। इन खुलासों के बाद लगता है कि कांग्रेस सरकार जो कि युवराज की ताजपोशी की तैयारियों में लगी है, घबरा गई है… और उसने समस्या का सही और उचित निराकरण करने की बजाय एक निरीह तकनीकी व्यक्ति को डराने के लिये उसे चोरी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है।

मामले की शुरुआत तब हुई, जब तेलुगू चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान जब एक दर्शक ने उनके द्वारा प्रयोग करके दिखाई जा रही मशीन की वैधता पर सवाल किया तब उन्होंने उस मशीन का सीरियल नम्बर बता दिया। अब तक पिछले कुछ चुनावों में देश भर में लगभग 100 वोटिंग मशीनें चोरी हो चुकी हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने कभी इतनी फ़ुर्ती से काम नहीं किया जितना हरिप्रसाद के मामले में किया। चुनाव आयोग ने तत्काल मुम्बई सम्पर्क करके उस सीरियल नम्बर की मशीन के बारे में पूछताछ की और पाया कि यह मशीन चोरी गई मशीनों में से एक है, तत्काल आंध्रप्रदेश पुलिस के सहयोग से मुम्बई पुलिस ने हरिप्रसाद को EVM चोरी के आरोप में उनके घर से उठा लिया। चुनाव आयोग सन् 2008 से ही हरिप्रसाद से खुन्नस खाये बैठा है, जब उन्होंने EVM के फ़ुलप्रूफ़ न होने तथा उसमे छेड़छाड़ और धोखाधड़ी की बातें सार्वजनिक रुप से प्रयोग करके दिखाना शुरु किया।

1) चुनाव आयोग ने पहले तो लगातार इस बात से इंकार किया कि ऐसा कुछ हो भी सकता है

2) फ़िर जब हरिप्रसाद की मुहिम आगे बढ़ी तो आयोग ने कहा कि हरिप्रसाद जो हैकिंग के करतब दिखा रहे हैं वह मशीनें विदेशी हैं

3) हरिप्रसाद ने चुनाव आयोग को चैलेंज किया कि उन्हें भारत की वोटिंग मशीनें उपलब्ध करवाई जायें तो वे उसमें भी गड़बड़ी करके दिखा सकते हैं

4) चुनाव आयोग ने भारतीय ब्यूरोक्रेसी का अनुपम उदाहरण देते हुए उनसे कहा कि वोटिंग मशीनें उन्हें नहीं दी जा सकती, क्योंकि वह गोपनीयता का उल्लंघन है, और (बिना किसी विशेषज्ञ समिति के) घोषणा की, कि चुनाव आयोग को भरोसा है कि भारतीय वोटिंग मशीनें पूरी तरह सुरक्षित हैं

5) और आज जब हरिप्रसाद ने किसी बेनामी सूत्रों के हवाले से एक भारतीय वोटिंग मशीन प्राप्त करके उसका भी सफ़लतापूर्वक हैकिंग कर दिखाया है तो चुनाव आयोग ने उन्हें मशीन चोरी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है (ये तो वही बात हुई कि भ्रष्टाचार उजागर करने वाले किसी स्टिंग ऑपरेशन के लिये, उस पत्रकार को ही जेल में ठूंस दिया जाये, जिसने उसे उजागर किया)।


हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी चुनाव आयोग के उपायुक्त अशोक शुक्ला और EVM की गड़बड़ी जाँचने के लिये बनी समिति के चेयरमैन पीवी इन्द्रसेन के आश्वासन के बावजूद हुई। यह दोनों सज्जन वॉशिंगटन में आयोजित EVM टेक्नोलॉजी और इसकी विश्वसनीयता पर आधारित सेमिनार में 9 अगस्त को उपस्थित थे, जहाँ श्री हरिप्रसाद के साथ प्रोफ़ेसर एलेक्स हाल्डरमैन भी थे और उस सेमिनार में वोटिंग मशीनों की हैकिंग के प्रदर्शन के बाद इन्होंने कहा था कि वे इस बात की जाँच करवायेंगे कि इन मशीनों में क्या गड़बड़ी है, लेकिन इस आश्वासन के बावजूद हरिप्रसाद को गिरफ़्तार कर लिया गया। इस सेमिनार में हारवर्ड, प्रिंसटन, स्टेनफ़ोर्ड विश्वविद्यालयों के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ ही माइक्रोसॉफ़्ट के अधिकारी भी मौजूद थे, और लगभग सभी इस बात पर सहमत थे कि इन मशीनों में गड़बड़ी और धोखाधड़ी की जा सकती है। (यहाँ देखें…) और (यहाँ भी देखें…)
(चित्र में हरिप्रसाद, एलेक्स हाल्डरमैन और रॉप गोन्ग्रिप…) (चित्र सौजन्य - गूगल)

हैदराबाद से मुम्बई ले जाये जाते समय श्री हरिप्रसाद ने अपने मोबाइल से जो संदेश दिया वह यह है -




श्री हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी के समय का वीडियो…



एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा है कि - "मैं यह अपने मोबाइल से लिख रहा हूं, पुलिस ने मुझे गिरफ़्तार किया है और पुलिस पर भारी ऊपरी दबाव है। हालांकि नये मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस पूरे मामले को देखने का आश्वासन दिया है, लेकिन फ़िर भी मैं उस व्यक्ति का नाम ज़ाहिर नहीं कर सकता जिसने पूरे विश्वास से मुझे EVM मशीन सौंपी थी। मुझे अपने काम से पूरी सन्तुष्टि है और विश्वास है कि यह देशहित में है, मैं अपने देश से प्यार करता हूं और लोकतन्त्र को मजबूत करने के लिये जो भी किया जा सकता है, वह किया जाना चाहिये…"

डॉ सुब्रह्मण्यम स्वामी ने खुलेआम सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 2009 के आम चुनाव में विदेशी हैकर्स को भारी पैसा देकर अनुबन्धित किया, जो दिल्ली के पाँच सितारा होटलों में बड़े-बड़े तकनीकी उपकरणों के साथ ठहरे थे, और इसकी गहन जाँच होनी चाहिये…। उल्लेखनीय है कि जब पुलिस ने हरिप्रसाद को गिरफ़्तार किया उस समय न तो उन्हें आरोप बताये गये और न ही कोई केस दर्ज किया गया। श्री हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी 21 अगस्त को हुई थी और मैंने किसी बड़े मीडिया समूह या चैनलों पर इस खबर को प्रमुखता से नहीं देखा, आपने देखा हो तो बतायें। आखिर मीडिया सरकार से इतना क्यों डरता है? यह डर है या कुछ और? तथा ऐसे में एक आम आदमी जो कुशासन, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से लड़ने की कोशिश कर रहा हो, क्या उसकी हिम्मत नहीं टूटेगी? यह बात जरूर है कि हरिप्रसाद ने जिस अज्ञात व्यक्ति से सरकारी वोटिंग मशीन प्राप्त की है, वह एक अपराध की श्रेणी में आता है, क्योंकि वह निश्चित रुप से गोपनीयता कानून का उल्लंघन है, लेकिन चूंकि हरिप्रसाद की मंशा सच्ची है और वह लोकतन्त्र की मजबूती के पक्ष में है तो इसे माफ़ किया जा सकता है। एक बड़ा घोटाला उजागर करने के लिये यदि हरिप्रसाद ने छोटा-मोटा गुनाह किया भी है तो उसे नज़रअंदाज़ करके असली समस्या की तरफ़ देखना चाहिये, लेकिन सरकार "बाल की खाल" और खुन्नस निकालने की तर्ज़ पर काम कर रही है, और इससे शक और मजबूत हो जाता है। नीचे जो चित्र है, उसमें देखिये EVM एक सरकारी जीप में कैसे बिना किसी सुरक्षाकर्मी के रखी हुई हैं और इसे आसानी से कोई भी चुरा सकता है… लेकिन सरकार हरिप्रसाद जी के पीछे पड़ गई है…



जब चुनाव आयोग कह रहा है कि वह कुछ भी छिपाना नहीं चाहता, तब सरकार को हरिप्रसाद, हैकर्स और अन्य सॉफ़्टवेयर तकनीकी लोगों को एक साथ बैठाकर संशय के बादल दूर करना चाहिये, या किसी बेगुनाह शोधकर्ता को इस प्रकार परेशान करना चाहिये? आखिर चुनाव आयोग ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा है? इन मशीनों को हरिप्रसाद ने सफ़लतापूर्वक चन्द्रबाबू नायडू, लालकृष्ण आडवाणी, ममता बनर्जी आदि नेताओं के सामने भी हैक करके दिखाया है, फ़िर भी विपक्ष की चुप्पी संदेह पैदा करने वाली है, कहीं विपक्षी नेता "कभी तो अपनी भी जुगाड़ लगेगी…" के चक्कर में चुप्पी साधे हुए हैं, यह भी हो सकता है कि उनकी भी ऐसी "जुगाड़" कुछ राज्यों के चुनाव में पहले से लग चुकी है? लेकिन लोकतन्त्र पर मंडराते खतरे का क्या? आम जनता जो वोटिंग के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त करती है उसका क्या? पिछले 1 साल से जो तटस्थ गैर-राजनैतिक लोग वोटिंग मशीनों में हेराफ़ेरी और धोखाधड़ी की बात को सिरे से खारिज करते आ रहे थे, अब वे भी सोच में पड़ गये हैं।


सन्दर्भ -
http://www.thestatesman.net/index.php?id=338823&option=com_content&catid=35

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44 comments:

amit singh said...

श्री हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी 21 अगस्त को हुई थी और मैंने किसी बड़े मीडिया समूह या चैनलों पर इस खबर को प्रमुखता से नहीं देखा, आपने देखा हो तो बतायें। आखिर मीडिया सरकार से इतना क्यों डरता है?

डरता नहीं बिक चुका है

महाशक्ति said...

मीडिया को चकला चलावाने के फुर्सत मिले तो ऐसी खबरे आये, युवराज के राजीव गांधी की मजार पर फूल चढ़ाने जाये तो देखिये पूरे देश के पेपर और टीवी पर आता है।

पाक हिन्दुस्तानी said...

पहली बात तो मैं हरिप्रसाद का EVM मशीन हासिल करने को चोरी नहीं मानता. उन्होंने चुनाव आयोग के झूठ को साबित करने के लिये जिन कदमों का सहारा लिया वो एथिकल हैकिंग के अन्तर्गत आती हैं और ऐसे लोगों का सारी दुनिया सम्मान करती है.

हरिप्रसाद को सलाम, उन्होंने चुनाव आयोग के झूठ को आईना दिखाया.

अगर भारतीय सरकार को कुछ करना ही था तो वोटों की चोरी को रोकना था, लोकतंत्र के पहरेदारों को गिरफ्तार करके इन्होंने जाहिर कर दिया है कि इनके इरादे किस कदर गंदे हैं.

आपके लेख के लिये धन्यवाद.

मीडिया से तो नहीं, लेकिन स्वतंत्र विचारकों से आशा है. यह खबर हर जगह पहुंचनी चाहिये.

रंजन said...

चोरी के सामान के साथ कोई पकड़ा जाए तब कहए की और भी तो सामान चोरी हुआ है... केवल मुझे ही क्यों पकड़ रहे हो...

अगर आप अवैध तरीके के सरकारी संम्पति रखते है तो आप कानूनन जुर्म करते है.. फिर आप ये कहें की हम तो 'इथिकल' चोर है.. बहुत बचकाना तर्क है...

चोरी चोरी है... उद्देश्य चाहे कुछ भी हो..

ab inconvenienti said...

विपक्ष खासकर भारतीय जनता पार्टी की इस मामले में चुप्पी का क्या मतलब है? अभी तक तो विपक्ष द्वारा हंगामा हो जाना चाहिए था, यह घोषणा हो जानी थी की जबतक बैलट वापस नहीं अपनाया जाएगा तब तक विपक्ष हर चुनाव का बहिष्कार करेगा. ये कांग्रेसी २००४ से वोटिंग मशीन के दम पर बहुमत में हैं, यह साबित हो जाने पर भी विपक्ष कांग्रेस सरकार और इसके लिए फैसले तुरंत बर्खास्त करने की मांग नहीं कर रहा, क्यों?

२००४ और २००९ के लोकसभा चुनावों, आंध्र के विधानसभा चुनाव ने में कांग्रेस ने बहुमत प्राप्त किया, जबकि तीनों ही चुनावों में सारे एक्सिट पोल अनुमान कांग्रेस की हार की पूरी सम्भावना दर्शा रहे थे. आंध्र में तो जिन सीटों पर कोई वाईएसआर की सभाओं में बिलकुल भीड़ नहीं होती थी, और तेलगुदेशम या भाजपा के पक्ष में पूरा माहौल था वहां भी ये पार्टियां कांग्रेस से भारी अंतर से हारी.

जब चुनाव पूर्व अनुमानों और नतीजों में अंतर पर चर्चा होने लगी, तब नवीन चावला की अध्यक्षता में चुनाव आयोग ने एक्सिट पोल पर ही रोक लगा दी. तब के मुख्य न्यायाधीश गोपालकृष्णन ने चुनाव आयोग को अधिसूचित किया था की चुनाव पूर्व अनुमानों पर रोक पूरी तरह कानूनी है. लगता है सुप्रीम कोर्ट का इस इवीएम् मामले में भी यही रवैया होगा, न्याय की उम्मीद कम से कम कोर्ट से तो नहीं है.

अगर हरीप्रसाद ने कोर्ट में अर्जी दायर कर वोटिंग मशीन पाने की कोशिश की होती तो उन्हें कम से कम दस पंद्रह साल इंतजार करना पड़ता. न्याय व्यवस्था को देखते हुए हैरत नहीं होगी की इस मामले में कोर्ट हरिप्रसाद को ही अपराधी ठहरा दे.

Alok Nandan said...

suresh ji is aalekh ko main tewaronline.com per chalana chahata hun....kaya ijajat hai??

ab inconvenienti said...

(typo)तब के मुख्य न्यायाधीश गोपालकृष्णन ने चुनाव आयोग

ko

तब के मुख्य न्यायाधीश बालाकृष्णन ने चुनाव आयोग

padhden

Aisa hi Hoga said...

kya kare ..
aisa hi hota hai..
Jab tak yeh Gandhi ke ek bhi pariwar wala zinda hai ...
yeh aisi hi karange,..
in sab gandhi ko bich chorahe me goli marani chahiye...

Er.Diwas Dinesh Gaur said...

सच कहते हैं सुरेश भाई,अब सरकार ही सरकार बनाने के लिये चुनाव करेगी और स्वयं को सरकार घोषित करेगी,और हम भारतीय मूर्खों की तरह यही सोचते रह जायेंगे के हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का हिस्सा हैं जबकि इस लोकतंत्र में हमारी कोई साझेदारी नहीं है,अब समझ आया कि सभी दिशाओं में कांग्रेस की थू थू होने के बावजूद केंद्र में तथा कई प्रदेशों में कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियाँ कैसे अपनी सरकार तथा हमें मुर्ख बनाती हैं...

भारत स्वाभिमान said...

सच कहते हैं सुरेश भाई,अब सरकार ही सरकार बनाने के लिये चुनाव करेगी और स्वयं को सरकार घोषित करेगी,और हम भारतीय मूर्खों की तरह यही सोचते रह जायेंगे के हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का हिस्सा हैं जबकि इस लोकतंत्र में हमारी कोई साझेदारी नहीं है,अब समझ आया कि सभी दिशाओं में कांग्रेस की थू थू होने के बावजूद केंद्र में तथा कई प्रदेशों में कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियाँ कैसे अपनी सरकार तथा हमें मुर्ख बनाती हैं...

Anonymous said...

दिमाग थकेला हो तो आराम करो
काहे को बकवास पेल रहे हो
हर बात का एंगल युवराज और सोनिया जी की तरफ मोड़ देते हो
पता नहीं कितना पैसा संघ से तुमको मिलता है ?

Victor unicorn said...

सुरेश जी प्रणाम , जब एपल ने अपना आई फोन बाजार मे उतारा था ,तो उसने भी यही दावे किए थे -कि यह बहुत सुरक्षित है ,कोई भी इसे तब तक इस्तेमाल नही कर सकता जब तक की वो एक खास आपरेटर से कनेक्शन ना ले , लेकिन नतीज यह हुआ कि एक कल के किशोर ने जो तकनीकी रूप से सामान्य शिक्षा प्राप्त था इसे तोड़ कर रख दिया ,अगर एक मामूली फोन के साथ ऐसा किया जा सकता है .
तो यहा तो दाव पर पूरा राजकोष लगा है !

psudo said...

Sometimes i feel by looking at BJP's behaviousr that Congress party has something to black mail them. Dont know what? Otherwise EVM is such a big issue!

दीर्घतमा said...

सुरेश जी यह तो सभी जानते है कि सोनिया गाधी भारतीय नहीं है ये तो एन केन प्रकारेण सत्ता प्राप्त करना वह जैसे भी हो नहीं तो जिस मकसद से राजीव से बिवाह हुआ था वह उद्देश्य पूरा नहीं होगा फिर बेटिकन सिटी को क्या उत्तर देगी, ईशाई धर्म -पादरी सभी फ्रोड है ये हिन्द्दुओ को ठगने क़े लिए इस समय भगवा बस्त्र व रुद्राक्ष धारण कर लिए है इसलिय सोनिया अपने गुलामो द्वारा भारत को भारतीयता को समाप्त करने पर तुली है पूरे भारत को साप सूघ गया है आवस्यकता एक नयी आज़ादी कि लडाई की.

ab inconvenienti said...

@ psudo

सही कहा आपने, कुछ ऐसा है जिसके दम पर भाजपा को ब्लेकमेल किया जा रहा है. इतने बड़े बड़े मुद्दे सामने हैं और लोगों में इतना असंतोष है की विपक्ष आन्दोलन छेड़ दे तो देश में चरों तरफ से सत्तापलट की मांग होने लगे. महगाई, परमाणु डील, भोपाल कांड, जीन संवर्धित फसल विधेयक, खुलेआम अनाज सड़ना, सीमा अतिक्रमण, कश्मीर, धर्मान्तरण, आर्थिक घोटाले, ईवीएम् जैसे कितने और मुद्दे हैं.

विपक्ष की रहस्यमयी चुप्पी और निष्क्रियता उसकी किसी बड़ी मज़बूरी की तरफ इशारा करती है.

DEEPAK BABA said...

आखिर चुनाव आयोग ऐसा बर्ताव क्यों कर रहा है? इन मशीनों को हरिप्रसाद ने सफ़लतापूर्वक चन्द्रबाबू नायडू, लालकृष्ण आडवाणी, ममता बनर्जी आदि नेताओं के सामने भी हैक करके दिखाया है,

क्या मीडिया और क्या नेता सभी - खामोश है.... इस ख़ामोशी के बहुत अर्थ निकलते हैं.

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

मेरी इश्वर से प्रार्थना है की श्री हरिप्रसाद जी सकुशल जल्दी बाहर आ जाएँ. हरिप्रसाद ने जो कुछ किया वो वास्तव में देश हित में है, पर अब पुलिस उसके ऊपर क्या कहर बरपाएगी, इसकी कल्पना करते ही रोयें खड़े हो जाते हैं.

EVM में धोखाधड़ी बहुत बड़ा खेल है जिसकी वास्तविक स्थिति का ज्ञान आम जन को नहीं है. विपक्ष कम से कम भाजपा की चुप्पी बहुत कुछ बयां करती है. स्वपन दासगुप्ता जी का ये आलेख 'Govt, Opp made for each other' http://www.dailypioneer.com/274728/Govt-Opp-made-for-each-other.html भारत की गन्दी राजनीति का एक और चेहरा उजागर करती है.

भाजपा को कांग्रेस कई मामलों में (सोहराबुद्दीन, बाबरी मस्जिद ....) ब्लेकमेल कर रही है और भाजपा भी अपने छोटे-छोटे स्वार्थ के लिए बड़े मुद्दे को छोड़ कर (कांग्रेस के मन माफिक) छोटे मुद्दे में फसी है.

man said...

जय श्री राम सर ,
वाकई आप ने तथ्य परक और राजकीय भांड भेदी सूचना दी हे ,कंहा थी ये सूचना ?और ये ""सरकारी कहारों"" और उनके ""भादी और ढीली नसों के मालिको """की अन्यायी तस्वीर को पेश्किया हे की केसे साले ये"" सरकरी कहार""हाथ में और ??///
??तेल लगाये घुमते हे ? बस "'मनी"'?चुनाव आयोग के ऑफिसर अपनी पर्तिबधता के लिए जाने जाते थे ओ अभी सरकारी कुट्वाई के लिए ?सालो ने केसे इशारो में पुलिसिया एक्शन करवा दिया |अब face बुक पे उन profilo के पीछे पड़े हे जो इनका नाडा खोल रही हे |लगे रहो गंदे मिलावटी खून की ओलादो ?

डॉ महेश सिन्हा said...

विरोधी दल अब कोई बचा नही। प्रजातन्त्र की ताबूत में एक और कील ।

( BHAGAT SINGH ) said...

दिन प्रतिदिन भ्रष्टाचार की रैँक मे भारत अपने नंबर बढ़ाता जा रहा है.
बहुत जल्द नंबर वन पे होगा.

राहुल पंडित said...

kab tak chalega aisa?

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

सुरेश जी, किसी भी मशीन को सच्चा करार नहीं दिया जा सकता। कौन सा ताला ऐसा है जिस चोरों ने नहीं तोड़ा हो। फिर भी ताले गारंटी के साथ बिके हैं। मौजूदा चुनाव प्रणाली पूरी तरह अक्षम है। आप या मैं यदि चुनाव लड़ना चाहें तो नहीं लड़ सकते। केवल वही चुनाव लड़ सकता हो जिसे पूंजीपतियों से करोड़ों का चंदा मिलता है। वह उन्हें ही मिलता है जो उन के लिए काम करते हैं। मौजूदा व्यवस्था को ही बदलना होगा। यदि जनतंत्र को बचाना और आगे विकसित होने देना है।

प्रवीण शाह said...

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आदरणीय सुरेश जी,

आपकी चिंता सही है, EVM ही नहीं ऐसी कोई भी चीज जिसे प्रोग्राम किया जाता है हैक की जा सकती है, यही कारण है कि तकनीक के महारथी देश अमेरिका में भी चुनाव बैलट से होते हैं, मत पत्र से चुनाव होने में परिणाम आने में थोड़ी देर भले ही होती है,पर यह तरीका ज्यादा सही है।


...

Anonymous said...

आपके लेख के लिये धन्यवाद.

Divya said...

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ये हमारा दुर्भाग्य है की हम सच्चाई को दबाकर , गलतफेहमीयों में जीते हैं। हरी प्रसाद की काबिलियत को भारत सरकार अपने हक में इस्तेमाल कर सकती है। जो हैक कर सकता , वो एक सक्षम मशीन भी बना सकता है। जिसके दम पर हम अमेरिका जैसे देश से आगे निकल सकते हैं।

लेकिन नहीं, यहाँ अयोग्य लोगों का बोल बाला है, कुछ लोग जो ज़रा से बेहतर हुए, उन्हें कुचलने वाले हज़ारो आ जायेंगे। हरी प्रसाद ने एक सच उजागर किया लेकिन अधिकारी अपनी कमी को छुपा रहे हैं।

इस व्यवहार से हरी प्रसाद जैसे लोगों को आतंकवादी देश आसानी से खरीद सकते हैं ।

लोकतंत्र को जो खतरा है वो तो है ही ।
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पी.सी.गोदियाल said...

सुरेश जी,

मगर हमारा अन्धविश्वासी कहें या फिर सत्ता पक्ष के प्रति कृतज्ञं, चुनाव आयोग तो यह मानने को तैयार ही नहीं ! वह तो बस यही रटे जा रहा की इसे टेम्पर नहीं किया जा सकता, मानो यह कोई दैविक वस्तु हो गई जिसके साथ कोई छेद-छाड़ नहीं कर सकता ! पिछले मई में यह रिपोर्ट बी.बी सी पर भी छापी थी ;

"अमरीकी वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे भारत में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को हैक किया जा सकता है.
एक उपकरण को इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन के साथ जोड़ने के बाद मिशीगन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मोबाइल से संदेश भेजकर वोटिग मशीन के नतीजे बदल सकने में कामयाब रहे.

पर भारतीय चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन पूरी तरह से विश्वसनीय है और छेड़छाड़ के लिए मशीन को हासिल करना बहुत मुश्किल है.

हॉल्डरमैन ने बीबीसी को बताया, "हमने एक ऐसा नकली डिस्प्ले बोर्ड बनाया जो कि असल डिस्प्ले जैसा दिखता था. लेकिन इसके नीचे हमने एक माइक्रोप्रोसेसर और ब्लूटूथ उपकरण लगाया. हमारा नकली डिस्प्ले बोर्ड वोट की कुल संख्या को पता कर उसके स्थान पर गलत संख्या को दर्शाता है यानी हेराफेरी करनेवाले लोग जो नतीजे चाहते है मशीन वही नतीजे दिखाती है."

इसके अलावा उन्होंने एक माइक्रोप्रोसेसर लगाया जिससे वो चुनाव और मतगणना के दौर के बीच वोटिंग मशीन मे रखे गए मतों की संख्या मे भी बदलाव कर सकते हैं."

kaverpal said...

Dear suresh ji rajneta is baat se darte hai ki kahin se tumahara koi baap na aa jaaye nahi to is tarah sansad sadasyo ki pay nahi badhti kyon ki in sabko desh ki fikra thode hi hai har jagah dharna hadtal virodh karenge lekin apni pay ke baare me koi yeh nahi kaheta ki abhi mat badhao badh aayi hui hai yaa badal fata hai jab ki kisi sansad ne apna sansad nidhi ka kota kahin par bhi imandari se nahi lagaya hai usko ye log uper ki amdani kahete hain fir ye voting machine ke baare me kyon bolenge

पी.सी.गोदियाल said...

हमारा चुनाव आयोग मुझे तो लगता है या तो बहुत ज्यादा अन्धविश्वासी है इन मशीनों के बारे में, या फिर सत्ता पक्ष के पार्टी कृतज्ञंता हाथ बंधे है !

सम्वेदना के स्वर said...

मीडिया की इस विषय पर खामोशी सवाल खड़े करती है.हाँ सनद रहे कि पिछले दिनों तीन अंगेजी न्यूज़ चैनलों पर यह खबर ही नहीं इन पर चर्चा भी देखी :
1. बेहतरीन कवरेज़ था ,न्यूज़ एक्स चैनल का; इसके पैनल में थे महेश जेठमलानी, तुषार गाधीं, जी.वी.एल. नरसिम्ह राव, तथा हरि प्रसाद के मित्र. सारे तथ्य किसी बहुत बड़े घोटाले और लोकतंत्र की किडनैपिंग की कहानी कहते ही लगे.
2. एन.डी,टी.वी 24x7 के प्रणव राय ने जब कार्यक्रम के अंत में यह कहा कि ऐसी बातें क्यों हो रहीं है? मैने अच्छी तरह से इन मशीनों को देखा है और मै 100% दावे के साथ कह सकता हूं कि इनसे कुछ गड़बड़ नहीं हो सकती, तो हम आश्चर्य चकित थे यह सोचकर, इतना बड़ा पत्रकार यह क्या कह रहा है? कोई भी वैज्ञानिक सोच का व्यक्ति किसी मशीन को लेकर इस तरह की घोषणा नहीं कर सकता. प्रणव राय तो शायद कम्पूटर वैज्ञानिक नहीं हैं पर ऐसी बात कह गये.
3. तीसरी चर्चा कल रात ही टाइम्स नाउ पर देखी अरनब गोस्वामी जो अब पक्के वकील बन चुके है अपने साथ विनोद मेहता (आउटलुक मैगज़ीन वाले) और महेश जेठमलानी के साथ की अदालत लगा कर बैठे थे. पूरी चर्चा में विनोद मेहता ने महेश जेठमलानी को बोलने ही नहीं दिया और हताश महेश जेठमलानी अपना सिर धुनते रह गये. अरनब ने एक मज़ेदार आरोप भी लगाया महेश जेठमलानी पर की आप लोग देश की जनता के मन मे शक के बीज डाल रहें हैं.
बस यही बात हमें झझोर गयी कि जो मीडिया इतना चतुर है कि इस बात को शक के बीज समझता है, वो दिनरात जो दिखा रहा है वो सब किसी टीआरपी के लालच में नही बल्कि जानबूझ कर हो रहा है!

A comun man of Bharat said...

Why election commision is moving the direction of EVM hacking to stealing EVM.

While he opened the eyes of public that democracy is at risk that means present & future is in enemy's hand?

Why Oposition specially BJP is keeping quiet ? Why Why Why ?

I request all the people spread this news as much you can because our media is sold out & bastard.

see more how to hack an EVM --http://indiaevm.org

honesty project democracy said...

सुरेश जी आपने यह पोस्ट लिखकर निश्चय ही सराहनीय काम किया है ,आपने ब्लोगिंग को सार्थक रूप में प्रयोग किया है इसके लिए आपका धन्यवाद और आभार ,हमने आपके इस मुहीम को समर्थन देने के लिए एक पोस्ट भी लिखा है तथा विश्व के ब्लोगरों से आग्रह किया है की श्री हरी प्रसाद के समर्थन में जरूर आगे आयें .. पढ़िए इस ब्लॉग पर

http://gantantradusrupaiyaekdin.blogspot.com/2010/08/blog-post_27.html

दिवाकर मणि said...

वाह रे ईवीएम मशीन !!
देखन में छोटन लगे, घाव करे गंभीर. कौन जानता है कि देश/राज्य की जनता अपने वोट के द्वारा किसे गद्दी पर बिठाना चाहती थी लेकिन इस EVM की कृपा से बैठ कौन गया ! चुनाव आयोग द्वारा तकनीकसंपन्न बनने की होड़ में लोकतंत्र के साथ किया जा रहा खिलवाड़, उन्हें सोनिया मैडम की कठपुतली ही साबित कर रहा है. एक समय था जब टी.एन. शेषन मुख्य चुनाव आयुक्त थे, और उन्होंने सभी पार्टियों एवं नेताओं को आठ-आठ आंसू रोने पर मजबूर कर दिया था, और यह साबित कर दिया था कि "चुनाव आयोग" नेताओं के हाथों बिकी हुई कोई पतुरिया नहीं है. लेकिन नवीन चावला एवं उत्तराधिकारी चुनाव-आयुक्तों को देखकर ऐसा तो नहीं लगता.

मान लिया कि हरिप्रसाद जी ने गलत तरीके से EVM मशीन हासिल की, लेकिन यह उतना बड़ा अपराध नहीं है, जितना बड़ा अपराध चुनाव आयोग एवं देश की सरकार कर रही है. देश की कुर्सी पर काबिज इन महाघोटालानंदनों लल्लूओं महाचोरों को कौन सजा देगा.

Sachi said...

सुरेशजी,

पहले तो मैं आपके विचार से सहमत नहीं था, फिर बाद में जब मैंने बीबीसी पर रिपोर्ट पढ़ी, तो मुझे आपकी बातों पर थोड़ा भरोसा हुआ। उसके बाद आज आपके इस रिपोर्ट को पढ़कर कौन यह नहीं कह सकता कि मामले की वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए।

पता नहीं, हमारा जनतंत्र कब सच्चे अर्थों में जनतंत्र बनेगा?

Bhavesh (भावेश ) said...

"लोकतन्त्र पर मंडराते खतरे का क्या? आम जनता जो वोटिंग के माध्यम से अपनी भावना व्यक्त करती है उसका क्या?" ये कौन से देश की बात कर रहे है सुरेशजी. क्या आज देश की किसी भी राजनितिक पार्टी में एक भी ऐसा नेता है, जो देश की सोचता है. एक पंक्ति में बोले तो बरबाद-ए-गुलिस्तां करने को बस एक ही उल्लू काफी था, हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा.

उम्दा सोच said...

देश हित मे उठाया गया हरिप्रसाद जी का कदम सराहनीय है तथा आप का सार्थक ब्लागिंग किया जाना भी उतना ही सराहनीय है, आपकी ये चिंगारी अखणड भारतीयो मे देशप्रेम की ज्वाला जागृत अवष्य करेगी।

सुलभ § Sulabh said...

लोकतंत्र की रक्षा हेतु हरिप्रसाद जी का कार्य प्रशंसनीय है.
प्रकरण से साफ़ तय है कि मामला उपरी दबाव का है. तो क्या हम यही सुनने के लिए हैं कि EVM फूलप्रूफ है.
यहाँ हर मामले में HOLE है. लानत है हमारे सिस्टम पर.

Anonymous said...

@ ranjan,

अगर ऐसी बात है तो कांग्रेस ने तो पूरा लोकतंत्र हीं चुरा लिया है, और इस देश पे राज कर रहे हैं| क्या आप बतेयेंगे कि एक छोटी चोरी के लिया सजा और बरे छोर को मज़ा क्यूँ????

Jisan said...

कौन बोलता है की प्रणव राय इतने बड़े पत्रकार है, एक बात बताऊ अगर बीजेपी की सर्कार आएगी तो वे ऐसा नहीं कहेंगे, कोंग्रेस है तो कोंग्रेस के साथ, प्रणव राय कोंग्रेसी है, आजकल हर मिडिया वाला कोंग्रेसी है, नहीं तो हरिप्रसाद का इत्नाकव्रेज ज्यादा देता, और मदनी के बारे में ज्यादा बोलता की ये कैसा धर्मनिरपेक्षता

ab inconvenienti said...

आज के हालत में ऐसा लगता है अगर हरिप्रसाद को रिमांड में ही यातना देकर मार डाला जाए, तो कही कोई आवाज़ तक नहीं होगी.

न कोई अख़बार इस उनके हिरासत से लापता हो जाने को उठाएगा न ही कोई चैनल इसका फालोअप लेगा. आज यह खबर प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया से पूरी तरह गायब है. दो तीन दिन में सभी हरिप्रसाद की गिरफ़्तारी और ईवीएम् भूल जाएंगे. सिस्टम हर संभव कोशिश कर रहा है की जैसे भी और जितनी भी जल्दी हो सके लोग इस मुद्दे को भूल जाएँ. वोटिंग मशीन में बड़ी ताकतों ने काफी बड़ा दांव लगा रखा है.

और पूरी सम्भावना है की अगले चुनाव भी बिलकुल इन्ही (कु)व्यस्थाओं, सुरक्षा खामियों और विदेशी हैकर्स के साथ होंगे.

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

इसी EVM को कैसे hack किया जाय यहाँ देखें :
http://www.youtube.com/watch?v=t61Vq3LC30M&feature=player_embedded#!

सौरभ आत्रेय said...

मैंने आपका यह लेख कल पढ़ा था, पढ़ कर और हरी प्रसाद जी की प्रजेन्टेशन को देख कर निश्चित तौर बुद्धि सन्न हो गयी है कि कैसे हम इन गुण्डों की शातिर चालों के चलते इनको अपने ऊपर सहन करने के लिये बाध्य हो गये हैं.

और ऊपर से आश्चर्य की बात भाजपा की चुप्पी भी है जो उसको भी सन्देह में डालती है ,

ऊपर एक टिप्पणी में भी यह सच ही कहा है --

इतने बड़े बड़े मुद्दे सामने हैं और लोगों में इतना असंतोष है कि विपक्ष आन्दोलन छेड़ दे तो देश में चारों तरफ से सत्तापलट की मांग होने लगे. महंगाई, परमाणु डील, भोपाल कांड, जीन संवर्धित फसल विधेयक, खुलेआम अनाज सड़ना, सीमा अतिक्रमण, कश्मीर, मतान्तरण, आर्थिक घोटाले, ईवीएम् जैसे कितने और असंख्य मुद्दे हैं.

लगता है भाजपा एक निष्क्रिय कांग्रेस बनती जा रही है इससे तो बेहतर पुरानी कांग्रेस ही है जोकी गुण्डागर्दी और हरामीपना डंके की चोट पर खुल कर तो करती है.

shailendra said...

such a grea8 job by you

a big sallute to you.

i think such person like you in blogging as a 'sipahi' of rashtra.

aapka chota sa kankar ek din jaroor
lahar ko kinare lagayega.


pranam

SHIVLOK said...

लालू मुलायम माया ममता येचुरी मन्नू सोनिया नीतीश आडवाणी मोदी पंवार पासवान
सबके सब चोर उचक्के नीच चोटे हैं
चोर हैं चोटे हैं इसीलिए तो चुप हैं
चोर हैं चोटे हैं इसीलिए तो चुप हैं
चोर हैं चोटे हैं इसीलिए तो चुप हैं
चोर हैं चोटे हैं इसीलिए तो चुप हैं

rakesh ravi said...

आपके लेख विचारोत्तेजक हैं। कई बार मुझे लगता है की आपकी बाते संकीर्ण हैं और शायद पक्षपात पूर्ण मगर मैं आपके लिखों का कायल हूँ।
आपके इस लेख पर बहुत लोगों ने टिपण्णी की है, मैं इस टिपण्णी से यह जाहिर करना चाहता हूँ की आपकी बातों से एक और व्यक्ति प्रभावित और सहमत है।
धन्यवाद
राकेश रवि