Thursday, July 1, 2010

दिल्ली का नाम बदलकर "राहुल गाँधी सिटी" करना आपको मंजूर है? नहीं?… फ़िर कडप्पा का नाम "सेमुअल रेड्डी जिला" कैसे?... Kadappa Renamed YSR Conversion Agenda

19 जून 2010 को आंध्रप्रदेश सरकार ने कडप्पा जिले का नाम बदलकर "YSR जिला" रख दिया है, कहा गया कि विधानसभा ने यह प्रस्ताव पास करके हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गये YSR को श्रद्धांजलि दी है।


इस आशय का प्रस्ताव 3 सितम्बर 2009 को ही विधानसभा में पेश किया जा चुका था, इस प्रस्ताव पर कडप्पा जिले के सभी प्रमुख मानद नागरिकों ने नाराजी जताई थी, तथा हिन्दू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी किये, लेकिन "सेमुअल" का नाम सभी पर भारी पड़ा। उल्लेखनीय है कि सेमुअल रेड्डी ने ही 19 अगस्त 2005 को, वहाँ 1820-1829 के दौरान कलेक्टर रहे चार्ल्स फ़िलिप ब्राउन द्वारा उच्चारित सही शब्द "कुडप्पाह" को बदलकर "कडप्पा" कर दिया था।

देखा गया है कि देश की सभी प्रमुख योजनाओं, भवनों, सड़कों, स्टेडियमों, संस्थानों के नाम अक्सर "गांधी परिवार" से सम्बन्धित व्यक्तियों के नाम पर ही रखे जाते हैं, भले ही उनमें से किसी-किसी का देश के प्रति योगदान दो कौड़ी का भी क्यों न हो। (हाल ही में मुम्बई के बान्द्रा-वर्ली सी-लिंक पुल का नाम भी पहले "शिवाजी महाराज पुल" रखने का प्रस्ताव था, लेकिन वहाँ भी अचानक रहस्यमयी तरीके से "राजीव गाँधी" घुसपैठ कर गये और "शिवाजी" पर भारी पड़े)।

इसी क्रम में अब नई परम्परा के तहत "ईसाईयत के महान सेवक", "धर्मान्तरण के दिग्गज चैम्पियन" YSR के नाम पर "देश और समाज के प्रति उनकी अथक सेवाओं" को देखते हुए कडप्पा जिले का नाम बदल दिया गया है। चूंकि यह देश नेहरु-गाँधी परिवार की "बपौती" है और यहाँ के बुद्धिजीवी उनकी चाकरी करने में गर्व महसूस करते हैं इसलिये आने वाले समय में "गाँधी परिवार" के प्रिय व्यक्तियों के नाम पर ही जिलों के नाम रखे जायेंगे।
(यह मत पूछियेगा, कि देश को आर्थिक कुचक्र से बचाने वाले, नई आर्थिक नीति की नींव रखने वाले, पूरे 5 साल तक गैर-गाँधी परिवार के प्रधानमंत्री, नौ भाषाओं के ज्ञाता, आंध्रप्रदेश के गौरव कहे जाने वाले पीवी नरसिम्हाराव के नाम पर कितने जिले हैं, कितनी योजनाएं हैं, कितने पुल हैं… क्योंकि नरसिम्हाराव न तो गाँधी-नेहरु नामधारी हैं, और न ही ईसाई धर्मान्तरण के कार्यकर्ता… इसलिये उन्हें दरकिनार और उपेक्षित ही रखा जायेगा…)। तमाम सेकुलर और गाँधी परिवार के चमचे बुद्धिजीवियों और बिके हुए मीडिया की "बुद्धि" पर तरस भी आता है, हँसी भी आती है… जब वे लोग राहुल गाँधी को "देश का भविष्य" बताते हैं… साथ ही कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों पर दया भी आती है कि, आखिर ये कितने रीढ़विहीन और लिज़लिज़े टाइप के लोग हैं कि राज्य की किसी भी योजना का नाम उस राज्य के किसी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक व्यक्तित्व के नाम पर रखने की बजाय "गाँधी परिवार" के नाम पर रख देते हैं, जिनके नाम पर पहले से ही देश भर में 2-3 लाख योजनाएं, पुल, सड़कें, बगीचे, मैदान, संस्थाएं आदि मौजूद हैं।

"गुलाम" बने रहने की कोई सीमा नहीं होती, यह इसी बात से स्पष्ट होता है कि ब्रिटेन की महारानी के हाथ से "गुलाम" देशों के "गुलाम" नागरिकों के मनोरंजन के लिये बनाये गये "खेलों"  पर अरबों रुपये खुशी-खुशी फ़ूंके जा रहे हैं, कलमाडी और प्रतिभा पाटिल, दाँत निपोरते हुए उन खेलों की बेटन ऐसे थाम रहे हैं, जैसे महारानी के हाथों यह पाकर वे कृतार्थ और धन्य-धन्य हो गये हों। यही हाल कांग्रेसियों और देश के तमाम बुद्धिजीवियों का है, जो अपने "मालिक" की कृपादृष्टि पाने के लिये लालायित रहते हैं। कडप्पा का नाम YSR डिस्ट्रिक्ट करने का फ़ैसला भी इसी "भाण्डगिरी" का नमूना है।

परन्तु इस मामले में "परम्परागत कांग्रेसी चमचागिरी" के अलावा एक विशेष एंगल और जुड़ा हुआ है। उल्लेखनीय है कि YSR (जो "हिन्दू" नाम रखे हुए, लाखों ईसाईयों में से एक थे) "सेवन्थ डे एडवेन्टिस्ट"  थे, और YSR ने आंध्रप्रदेश में नये चर्चों के बेतहाशा निर्माण, धर्मान्तरण के लिये NGOs को बढ़ावा देने तथा इवेंजेलिकल संस्थाओं को मन्दिरों से छीनकर कौड़ी के दाम ज़मीन दान करने का काम बखूबी किया है, इसीलिये यह साहब "मैडम माइनो" के खास व्यक्तियों में भी शामिल थे। वह तो शुक्र है आंध्रप्रदेश हाईकोर्ट का जिसने तिरुपति तिरुमाला  की सात पहाड़ियों में से पाँच पहाड़ियों पर "कब्जा" करने की YSR की बदकार कोशिश को खारिज कर दिया (हाईकोर्ट केस क्रमांक 1997(2) ALD, पेज 59 (DB) - टीके राघवन विरुद्ध आंध्रप्रदेश सरकार), वरना सबसे अधिक पैसे वाले भगवान तिरुपति भी एक पहाड़ी पर ही सीमित रह जाते, और उनके चारों तरफ़ चर्च बन जाते। (हालांकि पिछले दरवाजे से अभी भी ऐसी कोशिशें जारी हैं, और सफ़ल भी हो रही हैं, क्योंकि "हिन्दू"…………… हैं)।
(http://www.vijayvaani.com/FrmPublicDisplayArticle.aspx?id=795)

प्रत्येक शहर का अपना एक इतिहास होता है, एक संस्कृति होती है और उस जगह की कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर होती हैं। "नाम" की भूख में किसी सनकी पार्टी द्वारा उस शहर की सांस्कृतिक पहचान से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। यदि कांग्रेस को अपने सम्मानित नेता की यादगार में कुछ करना ही था तो वह अस्पताल, लायब्रेरी, स्टेडियम कुछ भी बनवा सकती थी, चेन्नई में प्रभु यीशु की जैसी बड़ी-बड़ी मूर्तियाँ लगवाई हैं वैसी ही एकाध मूर्ति YSR की भी लगवाई जा सकती थी (जिस पर कौए-कबूतर दिन रात बीट करते), लेकिन कडप्पा का नाम YSR के नाम पर करना वहाँ के निवासियों की "पहचान" खत्म करने समान है। उल्लेखनीय है कि "कडप्पा" एक समय मौर्य शासकों के अधीन था, जो कि बाद में सातवाहन के अधीन भी रहा। विजयनगर साम्राज्य के सेनापति, नायक और कमाण्डर यहाँ के किले में युद्ध के दौरान विश्राम करने आते थे। यह जगह प्रसिद्ध सन्त अन्नमाचार्य और श्री पोथन्ना जैसे विद्वानों की जन्मस्थली भी है। तेलुगू में "कडप्पा" का अर्थ "प्रवेश-द्वार" (Gateway) जैसा भी होता है, क्योंकि यह स्थान तिरुपति-तिरुमाला पवित्र स्थल का प्रवेश-द्वार समान ही है (ठीक वैसे ही जैसे "हरिद्वार" को बद्री-केदार का प्रवेश-द्वार अथवा "पवित्र गंगा" का भू-अवतरण स्थल कहा जाता है), ऐसी परिस्थिति में, "YSR जिला" जैसा बेहूदा नाम मिला था रखने को? (इतनी समृद्ध भारतीय संस्कृति की धरोहर रखने वाले कडप्पा का नाम एक "धर्म-परिवर्तित ईसाई" के नाम पर? जिसने ऐसा कोई तीर नहीं मारा कि पूरे जिले का नाम उस पर रखा जाये, वाकई शर्मनाक है।)


जरा सोचिये, दिल्ली का नाम बदलकर "राहुल गाँधी सिटी", जयपुर का नाम बदलकर "गुलाबी प्रियंका नगरी", भोपाल का नाम बदलकर "मासूम राजीव गाँधी नगर" आदि कर दिया जाये, तो कैसा लगेगा? वामपंथी ऐसा "मानते" हैं (मुगालता पालने में कोई हर्ज नहीं है) कि बंगाल के लिये ज्योति बसु ने बहुत काम किया है, तो क्या कोलकाता का नाम बदलकर "ज्योति बाबू सिटी" कर दिया जाये, क्या कोलकाता के निवासियों को यह मंजूर होगा? ज़ाहिर है कि यह विचार सिरे से ही फ़ूहड़ लगता है, तो फ़िर कडप्पा का नाम YSR पर क्यों? क्या भारत के "मानसिक कंगाल बुद्धिजीवी" और "मीडियाई भाण्ड" इसका विरोध करेंगे, या "पारिवारिक चमचागिरी" की खोल में ही अपना जीवन बिताएंगे?
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चलते-चलते : इस कदम के विरोध में हैदराबाद के श्री गुरुनाथ ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश के नाम एक ऑनलाइन याचिका तैयार की है, कृपया इस पर हस्ताक्षर करें… ताकि भविष्य में तिरुचिरापल्ली का नाम "करुणानिधि नगरम" या लखनऊ का नाम "सलमान खुर्शीदाबाद" होने से बचाया जा सके…

http://www.petitiononline.com/06242010/petition.html


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38 comments:

संजय बेंगाणी said...

ए भाई ए...तुमेरे को पता भी है, उसके मरने पर कित्ते लोग आत्म हत्या कर रहे ले थे, और भी करते मगर साल्ला भांड़ा फूट गया. ऐसे पवितर आत्माओं पर उँगली नहीं उठाने का.
***
विषय की बात है इसलिए बता दूँ, हमारे शहर में नए बने पूलों के नाम माणेक शो, विक्रम साराभाई जैसे 'गेर-देशभक्तों' के नाम पर रखे गए है.नए मार्गों के नाम साहित्यकारों के नामों पर रखे गए है. साम्प्रदायिक सरकार ऐसे ही कुकर्म करती है. इससे पहले बने पूल इन्दिरा गाँधी ब्रिज, नेहरू ब्रिज, राजीव गाँधी अंडरब्रिज के नाम से जाने जाते है.

Anonymous said...

अब तो ब्लोग जेहाद शुरु हो चूका है. हमारी अंजुमन, लखनऊ ब्लोगर एसोसियेशन व इनके मुसलमान सदस्य ब्लोग बना- बनाकर हिन्दू धर्म को गालियाँ दे रहे हैं तथा इस्लाम की सैक्सियत (शरीयत) का खुला प्रचार कर रहे हैं. सैक्सियत के नाम पर चार विवाह करने का लालच देकर पुरुषों को इस्लाम अपनाने के लिए उकसाया जा रहा है. इस्लाम का जन्मदाता देश अरब सैक्सियत की खुली छूट दे चुका है. वहाँ मिस्यार की आड़ में व्यभिचार को सरकार की मान्यता प्राप्त है. अरब एक बड़ा चकला बनकर सामने आया है. मुस्लमान उम्र के नाम पर अपनी बहन बेटियों का मिस्यार करा रहे हैं. हैदराबाद में बूढ़े शेखो को अपनी बेटियां परोसने वाले मुसलमानों से क्या आशा की जा सकती है? जो अपनी बहन - बेटियों को इज्ज़त नीलम करते हों वो भारत माता का क्या सम्मान करेंगे.

कुश said...

घोर गुलाम मानसिकता की परिचायक है ऐसी खबरे..

Anonymous said...

अब तो ब्लोग जेहाद शुरु हो चूका है. हमारी अंजुमन, लखनऊ ब्लोगर एसोसियेशन व इनके मुसलमान सदस्य ब्लोग बना- बनाकर हिन्दू धर्म को गालियाँ दे रहे हैं तथा इस्लाम की सैक्सियत (शरीयत) का खुला प्रचार कर रहे हैं. सैक्सियत के नाम पर चार विवाह करने का लालच देकर पुरुषों को इस्लाम अपनाने के लिए उकसाया जा रहा है. इस्लाम का जन्मदाता देश अरब सैक्सियत की खुली छूट दे चुका है. वहाँ मिस्यार की आड़ में व्यभिचार को सरकार की मान्यता प्राप्त है. अरब एक बड़ा चकला बनकर सामने आया है. मुस्लमान उमरा के नाम पर अपनी बहन बेटियों का मिस्यार करा रहे हैं. हैदराबाद में बूढ़े शेखो को अपनी बेटियां परोसने वाले मुसलमानों से क्या आशा की जा सकती है? जो अपनी बहन - बेटियों को इज्ज़त नीलम करते हों वो भारत माता का क्या सम्मान करेंगे.

अमित शर्मा said...

घोर गुलाम मानसिकता की परिचायक है ऐसी खबरे..

दिवाकर मणि said...

कड्डपा का नाम बदलने का कोई औचित्य नहीं समझ में आ रहा। आखिर YSR की कौन सी ऐसी महान करनी रही है, जिसके कारण उनके नाम पर एक जिले का नाम बदला जा रहा है। इसाइयत फैलाने का अगर ऐसा ही घृणित खेला जाता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हिन्दू भी अतिवाद के रास्ते पर चलने लगें।

man said...

सर वन्देमातरम
अभी आठ साल पहले अन्तिम सांसे गिन रही कांग्रेस अब दस साल के शासन के करीब आजाने से उसका योवन बुढ़ापे में भी हिचकोले मार रहा हे |जय हो |सेकुलर मीडियाई शहनाई वादक तो वो ही बजायेंगे जो मालिक बजवाना चाहता हे ,मंगतो से आशा रखना बेकार हे| जय हो|bijale के khambo रास्तो गलियों मोहल्लो,सडको पूलों स्कूलों ,बगीचों .वाचनालयो हवाई जहाजी हवाई अडो रेल वे स्टेशनो ,पहाड़ो की चोटियों .तालाबो ,खइयो दर्रो पेड़ पोधो ,कारखानों ,शोचालयो ,,,,अब क्या क्या पता नहीं कितने मूर्त और अमूर्त चीजो के नामे इन्होने """नेहरु गाँधी द मिक्स जेनेटिक फॅमिली फ्रॉम एवरी पार्ट फरो वर्ल्ड ,,,,, हेव a ग्रेट कलेवर फोक्स थिंकिंग """के नाम पर रखे हे|जय हो| राहुल गाँधी ने केसे नहीं संघर्ष किया""" ???पलास्टिक की tagari से mitti dalee हे | जय हो| देल्ही का नाम राहुल के नहीं fuk mohan के नाम kar dena chahiye |

RAJAN said...

pahle yojnaon ka naam.ab jilon ke.phir rajyon ke naam badle jayenge.aur akhir me desh ka bhi.
oh sorry sorry.ye mahaan koshish to pahle hi ho chuki hai.kisi ne kaha tha na ki 'INDIA IS INDIRA AND INDIRA IS INDIA'.
to bas suresh bhai unhi ke saono ko pura karne ki disha me pahla kadam hai.

हिंदुत्व और राष्ट्रवाद said...

सुरेशजी,

अब ज़रा ये भी ध्यान दीजिये...

चेन्नई के "व्हील इंडिया फ्लायोवर" का नाम कुछ दिनों में बदलकर " मुथु स्वामी चेट्टियार" रखा जा रहा है,.. ये मुथु स्वामी कोई संस्कृतिक शक्शियत नहीं बल्कि "DMK & CONGRESS" के बीच एक कड़ी थी... जिसने सोनिया गाँधी का ईमान तक बिकवा दिया,, जो हिन्दुस्तानी विधवा होकर भी "चेट्टियार साहब कि मध्यस्था" के कारन "अपने पति के हत्यारों" से बहित ही गूढ़ समबन्ध बनाये हुए है...

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चेन्नई के ही "जेमिनी फ्लायोवर" का नाम भी किसी "कांग्रेसी" के नाम पर रखा जायेगा..

--
क्या कर सकते है हम...>????

राजकुमार सोनी said...

आपने बहुत ही अच्छा मुद्दा उठाया है।
यह तो सोचने वाली बात है ही।

महफूज़ अली said...

बहुत ही क्रांतिकारी लेख.... आपसे १००% सहमत......

ललित शर्मा said...

इतिहास के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।

अनामिका की सदाये...... said...

बहुत अच्छा लेख . बधाई.

आपका यह लेख कल २/७/१० के चर्चा मंच के लिए लिया गया है.
http://charchamanch.blogspot.com/

आभर

man said...

सालो की नीचता देखो इनकी पूरे भारत में सडको का कर्न्तिकारी जाल बिछाने वाले ""अटल बिहारी का नाम से सवर्निम चत्र्भूज योजना का नाम भी बदल के राजीव गाँधी के नाम कर दिया गया था २००४ में """जेसे की उसने बनवाई थी सड़के

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

गांधी परिवार और "गाँधी दासों" का बस चले तो भारत का नाम बदल कर "राजीव देश" कर देंगे.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

तालिबानी शासन की बुनियाद रखी जा रही है. आगे चलकर हमारे वंशज हमें गालियां देंगे. और हिन्दू शब्द का प्रयोग अपमानजनक रूप में होगा.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

यह बाते हमे आन्दोलित नही कर सकती क्योकि हम भारतीय है .

सुनील दत्त said...

इटालियन अंग्रेज एंटोनिया व उसके गुलामों ने देश को हिन्दूविहीन करने का बीड़ा जो उठाया है जिसे बैद्धिक गुलाम हिन्दूओं के सहयोग से आगे बड़ाया जा रहा है.
हिन्दूओं को जागरू करने का आपका प्रयास सराहनीय है।
क्या बात है कोइ नराजगी चल रही है क्या?

डॉ महेश सिन्हा said...

इस देश का नाम ही बदल देना चाहिए . इतने जवान मर रहे हैं और सरकार फैसला ही नहीं कर पा रही की क्या करे !

"Fageria" said...

अब तो इस देश का नाम बदलकर "सोनिया का बसेरा" होने का इंतज़ार है....

लगता है ये कथित गांधीवादी इस देश का सत्यानास करके ही मानेंगे...

ajit gupta said...

सुरेशजी, यह भूल गए क्‍या - इन्दिरा इज इण्डिया और इण्डिया इज इन्दिरा। कुछ भी हो सकता है।

lokendra singh rajput said...

सच कहा साहब...
हो भी सकता है दिल्ली का नाम राहुल गांधी सिटी। और देश का नाम सोनिया गांधी देश। हा... हा... हा.... हमारे नेताओं के बौद्धिक दिवालिए पर खूब जोर की हंसी आ रही है।

नवीन त्यागी said...

congres me kutto ko samman milna sadiyon se chala aa raha hai.

सुलभ § Sulabh said...

क्या कहें हम ऐसी दशा (दुर्दशा) पर :( :( :(

दीपक 'मशाल' said...

ऐसी चमचागिरी के खिलाफ हूँ और आपसे १००% सहमत... जोरदार लिखा..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

विचारणीय लेख....

ASHWANI JAIN said...

srry due to technical problem has to write in English.

Agar ab tak khabar naa mili ho to bata du..Uttar Pradesh me Kanpur Dehat ka naam badal kar RamBai Nagar kar diya hai aur amethi ko Sultanpur dist se hata kar alag distt bana kar Shahuji Maharaj Jila naam diya hai.
Mayawati ke Lucknow me pahle se hi kam kaarname nahi hai ab Congress ke garh me sendh laga di hai.
Dekho abhi to start hai.
Uttar Pradesh Tec. University ko do part me divide kar Budha University and Mahamaya naam diya hai.
UPTU is(was) one of the largest tech universities of Asia..par ab ye apni pahchan kho degi...thnx to Daulat(errr...Dalit) ki Beti.

सत्य गौतम said...

जय भीम । आपसे सहमत सुरेश जी पर शुद्ध भारतीय अम्बेडकर साहित्य भी पढ़े और प्रचार करें

Paathey said...

bahut hi uttam lekh hai bhaisaahab chatukaarita ne is desh ko patan ke kagaar par la khada kiya hai

त्यागी said...

as much as i can appriciate i should. again you have proved that you are one of the blogger who is keeping flag of hindutva and bhartiyeta. very good article and at very appropiete time.
regards
parshuram27.blogspot.com/

भगत सिंह said...

नाम बदलने मे अगर कुछ मेहनत करनी पड़ती तो शायद ये हरामखोर नेता नाम न बदल पाते . लेकिन इनके लिये तो किसी राज्य या शहर का नाम बदलना सांस लेने जितना आसान है.
तो हर कोई अपने दादा ,अम्मा ,बप्पा के ऊपर शहरो के नाम रखने पे तुला है.
अब हरामखोरो से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है?
एक अपनी मायावती है वो तो उत्तर प्रदेश को दलित प्रदेश बनाने मे तुली है और वहाँ के जिलो के नाम दलितो के नाम पर रख रही है.
इस देश मे राजनीति की परिभाषा ही बदल गयी है
दूसरे देश के लोगो को
भारत आकर हमारे नेताओ से असली राजनीति सीखनी चाहिये.

" हम लाये थे तूफान से कश्ती निकाल के.
इस देश को रखना मेरे हरामखोरो संभाल के"

SHIVLOK said...

-:(
-:(
-:(
-:(
ये सब जानकार बहुत दुख होता है|

SHIV RATAN GUPTA
9414783323

{ भगत सिँह } said...

@सत्य गौतम
तुम जो कोई भी हो
लेकिन तुम जो अपने ब्लाग पर हिँदु आराध्य या हिँदु ग्रन्थो के बारे अनाप शनाप लिख रहे हो .ये मत करो. इससे तुम कही न कही भारत विरोधी लोगो का साथ दे रहे हो
अगर तुम्हे कोई मानसिक बीमारी है तो बताओ .फिर उसका इलाज करवाया जायेगा.
लेकिन तुम्हारी इस तरह की घ्रणित हरकते बर्दाश्त नही की जायेँगी.

Anonymous said...

मुहम्मद उमर कैरान्वी ने सत्य गौतम के नाम का बुरका पहन लिया

Anonymous said...

मुहम्मद उमर कैरान्वी ने सत्य गौतम के नाम का बुरका पहन लिया

ab inconvenienti said...

सत्य गौतम के नाम से कैरानवी यह हरकत कर रहा है.

महाबली भीमसेन said...

अबे हिँजड़े सत्य गौतम.
पहले अपना सत्य बता. कि तू किस फैक्ट्री का प्रोडक्ट है?

Tarun Tripathi said...

कांग्रेस का सिर्फ़ एक ही काम है - "4-1/2 साल जनता की लो, फिर 6 महीने दो".
अगर ऐसा नही होता तो शीला जी कभी तीसरी बार CM ना बन पाती. रही बात नामकरण संस्कार की तो मुझे आज तक समझ नही आया कि क्या नाम बदलने से विकास संभव है ?? उत्तर प्रदेश मे कितने जिलों के नाम बदले गये. क्या कोई सुधार आया राज्य की दशा मे ?? कडप्पा जो कि भारतीय संस्कृति का परिचायक नाम है, उसे बदलने से क्या हो जाएगा ?? क्या गारंटी है कि वहाँ की सारी समस्याएँ समाप्त हो जाएँगी ?? मैं यहाँ एक ज्वलंत प्रश्न भी उठाना चाहूँगा कि क्या राहुक गाँधी भी मन्नू की तरह होते जा रहे हैं ?? जब कोई बताएगा कि आज आपको बोलना है तो क्या राजकुमार तभी बोलेंगे ?? 42 साल के "युवा" राजकुमार, जब भी देश मे कोई ज्वलंत मुद्दा उठता है, तभी गायब हो जाते हैं. आजिज आ गया हूँ मैं इन "मेरुदण्ड विहिनो से"...