लोकतन्त्र खतरे में??? - वोटिंग मशीन, उसकी वैधता और हैकिंग से सम्बन्धित शानदार पुस्तक… EVM Hacking, Elections in India, Indian Democracy
गत लोकसभा चुनावों के बाद से ही कांग्रेस को छोड़कर बाकी सभी राजनैतिक दलों के मन में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों को लेकर एक संशय है। इस विषय पर काफ़ी कुछ लिखा भी जा चुका है और विद्वानों और सॉफ़्टवेयर इंजीनियरों ने समय-समय पर विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के मॉडलों पर प्रयोग करके यह साबित किया है कि वोटिंग मशीनों को आसानी से "हैक" किया जा सकता है, अर्थात इनके परिणामों से छेड़छाड़ और इनमें बदलाव किया जा सकता है (अब चुनाव आयोग भी मान गया है कि छेड़छाड़ सम्भव है)। आम जनता को इन मशीनों के बारे में, इनके उपयोग के बारे में, इनमें निहित खतरों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है, इसलिये हाल ही में प्रसिद्ध चुनाव विश्लेषक, शोधक और राजनैतिक लेखक श्री जीवीएल नरसिम्हाराव ने इस बारे में विस्तार से एक पुस्तक लिखी है… "डेमोक्रेसी एट रिस्क…"। इस पुस्तक की प्रस्तावना श्री लालकृष्ण आडवाणी और चन्द्रबाबू नायडू ने लिखी है, तथा दूसरी प्रस्तावना स्टेनफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर डेविड डिल द्वारा लिखी गई है।
इस पुस्तक में 16 छोटे-छोटे अध्याय हैं जिसमें भारतीय इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के बारे में जानकारी दी गई है। शुरुआत में बताया गया है कि किस तरह इन मशीनों को अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों में उपयोग में लाया गया, लेकिन लगातार आलोचनाओं और न्यूनतम सुरक्षा मानकों पर खरी न उतरने की वजह से उन्हें काबिल नहीं समझा गया। कई चुनावी विवादों में इन मशीनों की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठे, और अन्ततः लम्बी बहस के बाद अमेरिका, जर्मनी, हॉलैण्ड, आयरलैण्ड आदि देशों में यह तय किया गया कि प्रत्येक मतदाता द्वारा दिये गये वोट का भौतिक सत्यापन होना जरूरी है, इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन भरोसेमन्द नहीं है। अमेरिका के 50 में से 32 राज्यों ने पुनः कागजी मतपत्र की व्यवस्था से ही चुनाव करवाना शुरु कर दिया।
इस विषय पर मैंने मई 2009 में ही दो विस्तृत पोस्ट लिखीं थी, जिन्हें यहाँ क्लिक करके… और यहाँ क्लिक करके… http://blog.sureshchiplunkar.com/2009/06/evm-rigging-elections-and-voting-fraud.html पढ़ा जा सकता है, जिसमें EVM से छेड़खानी के बारे में विस्तार से बताया था…।
जबकि इधर भारत में, चुनाव आयोग सतत इस बात का प्रचार करता रहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें पूर्णतः सुरक्षित और पारदर्शी हैं तथा इनमें कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। कई पाठकों को यह पता नहीं होगा कि वोटिंग मशीनों की निर्माता कम्पनियों BEL (भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड) और ECIL (इलेक्ट्रॉनिक्स कार्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड) ने EVM के माइक्रोचिप में किये जाने वाले सीक्रेट सोर्स कोड (Secret Source Code) का काम विदेशी कम्पनियों को आउटसोर्स किया। लेखक ने सवाल उठाया है कि जब हमारे देश में ही योग्य और प्रतिभावान सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हैं तो यह महत्वपूर्ण काम आउटसोर्स क्यों किया गया?
सूचना के अधिकार के तहत श्री वीवी राव को सरकार द्वारा दी गई जानकारी के पृष्ठ क्रमांक 33 के अनुसार "देश की 13.78 लाख वोटिंग मशीनों में से 9.30 मशीनें पुरानी हैं, जबकि 4.48 लाख मशीनें नई हैं। पुरानी मशीनों में हेराफ़ेरी की अधिक सम्भावनाओं को देखते हुए याचिकाकर्ता ने जानना चाहा कि इन मशीनों को किन-किन राज्यों की कौन-कौन सी लोकसभा सीटों पर उपयोग किया गया, लेकिन आज तक उन्हें इसका जवाब नहीं मिला। यहाँ तक कि चुनाव आयोग ने उन्हीं के द्वारा गठित समिति की सिफ़ारिशों को दरकिनार करते हुए लोकसभा चुनावों में इन मशीनों को उपयोग करने का फ़ैसला कर लिया। जब 16 मई 2009 को लोकसभा के नतीजे आये तो सभी विपक्षी राजनैतिक दल स्तब्ध रह गये थे और उसी समय से इन मशीनों पर प्रश्न चिन्ह लगने शुरु हो गये थे।
पुस्तक के अध्याय 4 में लेखक ने EVM की कई असामान्य गतिविधियों के बारे में बताया है। अध्याय 5 में बताया गया है कि कुछ राजनैतिक पार्टियों से "इलेक्ट्रॉनिक फ़िक्सरों" ने उनके पक्ष में फ़िक्सिंग हेतु भारी राशि की माँग की। बाद में लेखक ने विभिन्न उदाहरण देकर बताया है कि किस तरह चुनाव आयोग ने भारतीय आईटी विशेषज्ञों द्वारा मशीनों में हेराफ़ेरी सिद्ध करने के लिये किये जाने वाले प्रयोगों में अडंगे लगाने की कोशिशें की। इन मशीनों की वैधता, पारदर्शिता और भारतीय परिवेश और "भारतीय चुनावी वातावरण" में उपयोग को लेकर मामला न्यायालय में चल रहा है। पाठकों की जानकारी के लिये उन्हें इस पुस्तक को अवश्य पढ़ना चाहिये, यह पुस्तक अपने-आप में इकलौती है, क्योंकि ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर सारी सामग्री एक साथ एक ही जगह पढ़ने को मिलती है। पुस्तक के प्रिण्ट फ़ॉर्मेट को मंगवाने के लिये निम्न पते पर सम्पर्क करें…
जबकि इस पुस्तक को सीधे मुफ़्त में http://indianevm.com से डाउनलोड किया जा सकता है…(सिर्फ़ 1.38 MB)। इसी वेबसाइट पर आपको EVM से सम्बन्धित सभी आँकड़े, तथ्य और नेताओं और विशेषज्ञों के बयान आदि पढ़ने को मिल जायेंगे।
कांग्रेस समर्थकों, भाजपा विरोधियों और तटस्थों सभी से अपील है कि इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें, ताकि दिमाग के जाले साफ़ हो सकें, और साथ ही इन प्रश्नों के उत्तर अवश्य खोजकर रखियेगा -
1) इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में वोट देने के बाद क्या आप दावे से कह सकते हैं कि आपका वोट उसी पार्टी के खाते में गया जिसे आपने वोट दिया था? यदि आपको विश्वास है, तो इसका सबूत क्या है?
2) कागजी मतपत्र पर तो आप अपने हाथ से अपनी आँखों के सामने मतपत्र पर सील लगाते हैं, जबकि EVM में क्या सिर्फ़ पंजे या कमल पर बटन दबाने और "पीं" की आवाज़ से ही आपने कैसे मान लिया कि आपका वोट दिया जा चुका है? जबकि हैकर्स इस बात को सिद्ध कर चुके हैं कि मशीन को इस प्रकार प्रोग्राम किया जा सकता है, कि "हर तीसरा या चौथा वोट" "किसी एक खास पार्टी" के खाते में ही जाये, ताकि कोई गड़बड़ी का आरोप भी न लगा सके।
3) वोट देने के सिर्फ़ 1-2 माह बाद यदि किसी कारणवश यह पता करना हो कि किस मतदाता ने किस पार्टी को वोट दिया था, तो यह कैसे होगा? जबकि आपके वोट का कोई प्रिण्ट रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है।
4) अमेरिका, जर्मनी, हॉलैण्ड जैसे तकनीकी रुप से समृद्ध और विकसित देश इन मशीनों को चुनाव सिस्टम से बाहर क्यों कर चुके हैं?
अतः अब समय आ गया है कि इन मशीनों के उपयोग पर पुनर्विचार किया जाये तथा 2009 के लोकसभा चुनावों को तत्काल प्रभाव से दोबारा करवाया जाये…
Electronic Voting Machines, EVM Hacking Techniques, Indian Democracy and EVM, Electronic Voting Machines in India, Voting Machine Problems and Solutions, Election Commission of India, Political Parties in India on EVM, Free and Fair Elections in India, इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन EVM, वोटिंग मशीन छेड़छाड़ और हेराफ़ेरी की सम्भावना, भारतीय लोकतन्त्र खतरे में, चुनाव आयोग भारत सरकार, सुरक्षित और पारदर्शी चुनाव प्रणाली, Blogging, Hindi Blogging, Hindi Blog and Hindi Typing, Hindi Blog History, Help for Hindi Blogging, Hindi Typing on Computers, Hindi Blog and Unicode




30 comments:
अब समय आ गया है कि इन मशीनों के उपयोग पर पुनर्विचार किया जाये एवं आगामी किसी भी चुनाव (चाहे वह विधानसभा का हो या लोकसभा का) में इसके प्रयोग को प्रतिबंधित किया जाए ताकि सही मायने में भारत के लोग गर्व से कह सकें कि हमारा देश एक सच्चा लोकतांत्रिक देश है ।
आपने बिल्कुल सही कहा
हमसबों को भी अब इस EVM मशीन का विरोध हर चुनाव में करना चाहिए ,वास्तव में कांग्रेस की एक और शर्मनाक और बेहद बेशर्मी भरी हरकत का खुलासा हुआ है इस किताब के प्रकाशित होने से | शर्म आणी चाहिए सोनिया गाँधी को इस तरीके से UPA का चेयर पर्सन बनने पर ...ये सब फर्जी हैं हमें इन सबका भी विरोध करना चाहिए ,इन फर्जियों ने देश और समाज का बेरागर्क कर दिया है ...
पेशोपेश में डाल दिया.
पते की बात उठाई है सुरेश जी ! कहीं ऐसा तो नहीं कि आउट सोर्स वाले को इनाम भी आउट सोर्स ( मेरे मतलब स्विस बैंक ) से किया गया हो ?
उत्तम: लेख: श्रीमन
kya hoga is desh ka
लोकतन्त्र खतरे में???
क्या इस देश में लोकतंत्र नाम की कोई चीज़ है भी? लोकतंत्र ठप्पा लगाने और बटन दबाने तक ही है, इसके बाद बादशाहत और बाप का राज है.
अंधेर नगरी चौपट माता (ईतावली)
सब अन्तर्राष्ट्रिय षणयंत्र के तहत हो रहा है और हम हाथ पर हाथ धरे बैठे है।
क्या कुछ कारगर किया जा सकता है इस विषय मे सुरेश भाई??
desh ka ro raam hi malik hai, tabhi main kahun itani ghatiya sarakaar kaise jeet jati hai.
मुठ्ठी भर लोग इस देश को चू__या बना रहे हैं और लूट खसोट रहे हैं. इसमें हर तबके, जात और धर्म के लोग हैं. फ्रांस की क्रांति के कई कारणों में से एक ये भी था की उस समय (१७८९) अधिसंख्य लोग भूखे मर रहे थे और सत्ता के शीर्ष पर बैठे चंद लोग मज़े कर रहे थे. EVM मशीन भी इन लोगों की लूट खसोट का एक औज़ार है और ये औज़ार इन लोगों ने २००९ चुनाव में क्या खूब इस्तेमाल किया है. चुनाव आयोग भी इनका एक टूल भर ही है नहीं तो EVM पर बहस से दूर क्यों भागता?
भाई हम तो उकता गए इस झंडू बाम लोकतंत्र से जहाँ पर ८०% लोगो की सुनी ही न जाये. और १० जपत से सरे देशो को डंडे के दम पर हांका जाये.
हमने तो लिखना भी छोड़ दिया इस डेमोक्रसी पर. हर तरफ तेरा ही जलवा सोनिया और राहुल जिंदाबाद जिंदाबाद
parshuram27.blogspot.com/
हा हा हा अरे कागज़ी डालो या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से चार बजे बाद तो वोटिंग बूथ पर वोटिंग बंद और और सारे मवाली जिस पार्टी को या उम्मीदवार को जिताना चाहते उसके समर्थन मे बूथ को बंद करके धड़ाधड़ ठप्पे लागाते है या बटन दबाते है
वोट देने पहुचती जनता 25% और मतदान हो जाता है 45 - 50 -55 %
लोकतंत्र नाम का ये झुनझुना तो पूंजीवादियो ने जनता को दे दिया कि सरकार तो जनता कि है .......
अब बजाते रहे इस झुनझुने को और मन बहलाते रहो हा हा हा
ये कांग्रेस की मंशा थी,जनता की वोट से नहीं,वोटिंग मशीन के करामात से जीती कांग्रेस.आप के विचारों से पूर्णतया सहमत हूँ.२००९ चुनाव फिर से होना चाहिए और भविष्य में किसी भी चुनाव में वोटिंग मशीन नहीं प्रयोग में लाना चाहिए.
सदर वन्दे सर ,
एक गंभीर और चिंता जनक मुद्दा उठाया हे आपने फिर एक बार ,जिसने पुस्तक लिखी हे कोई सामान्य व्यक्ती नहीं हे, बल्की विदवान व्यक्ती हे |इस चिंता जनक स्थिति को सभी राजनितिक दल बुधिजिवियो ,विद्वानों ,आम जनता तक शीघ्र पहुचाई जाये जिस से अभी से ही इसके खिलाफ माहोल बनाने लगे |सर आप ने एक बहुत ही उचित और यक्ष सवाल उठाया हे ,ये बहुत ही ही घातक हे |इस मशीनके परिणामो से परभावित राजनितिक दलों को पूरजोर से माहोल बना देना चाहिए की इस के साथ मतपत्र का ईस्त्मोल भी हो ताकि गड़बड़ी की कोई सम्भावना ना हो |
जिस परकार कांग्रेस वर्तमान में बेफिक्री , निरंकुशता और मनमानी पर उतर आई हे ,इस की सम्भावना 80% तक बढ़ जाती हे ,की किस परकार मंत्री काम करने की बजाय जनता को महंगाई पर व्यंगात्मक ताने मारते हे,परधानमंत्री तक महंगाई की ,आतंकी हमले की चला के भविश्यवाणी करते हे ,देखा हे किसी भी देश में ?कूल मिला के ऐसी बे फिकरी कभी नहीं देखी गयी ?कोई मोटा रोग छिपा हे इसके पीछे और ये रोग इ.वि. एम का ghotala ही हे |
अच्छा और सार्थक मुद्दा उठाया है। इस पर बहस चलनी चाहिए। सरकार को फिर से सोचना चाहिए ईवीएम के उपयोग पर।
लगता लोकतंत्र बेचारा हो गया है वोटिंग मशीन पर पहले ही सवाल उठ चुका है आपने सही समय पर यह बिषय उठाया है वोटिंग मशीन से मतदान नहीं होना चाहिए.
बेईमान शासक को सबक लोकतंत्र में जनता सिखा सकती है पर उसे जानबूझकर अशिक्षित गरीब बनाये रखने का कुचक्र जब शासक रच रहा हो तो क्रांति ही एकमात्र विकल्प है
hum ye kahna chahenge ki agar dainik jiwan ki gatividhi me samajik roop se abhayst ho chuke oon tamam buraion ka nivaran raat me bina kisi nam ke 'secret agent'
ki tarah ek 'code' ke dwara har sahar, kasba, gaon me chalai jaye
iska praroop blogwood ke o' log le
jo samvednaon se sarobar hain. is tarah ke duruh karya duniyadari nibhate huye bhi ki ja sakti hai.
...bina naam ke...bina pahchan ke..
'co e no.' ke dwara.
वह देश जिसमें 77 प्रतिशत जनता बीस रुपये रोज़ पर जिन्दा है वहाँ बेहद गरीब और अशिक्षित मतदाताओं से इलेक्ट्रोनिक वोट डलवाना ही सवाल खड़े करता है.
भारतीय बाजारों को विदेशी नियंत्रण में रखने के लिये, देश की राजनीति में खासे निहित स्वार्थ हैं, ऐसे में किसी विशेष पार्टी के सत्तारुढ होने में ईवीएम के गलत इस्तेमाल से इंकार नहीं किया जा सकता.
हमारा विचार है कि कुछ नहीं तो पेंन ड्राइव की तरह कोई पैसिव बैकअप भी होना चाहिये प्रत्येक ईवीएम मशीन का, जिसे अलग से रखा जाये और विवाद की स्थिति में उसके डाटा और मूल ईवीएम के डाटा का मिलान किया जाये. वोटर नम्बर के साथ प्रत्येक मत को रजिस्टर किया जाये, और चुनाव के बाद यह सभी डाटा इनटरनैट पर उप्लब्ध रहे ताकि अपना पासवर्ड डालकर कोई भी ताकीद कर सके कि उसका वोट कहाँ गया ? ये आधी अधूरी व्यव्स्था ही शक डालती है!!
उल्लेखनीय है कि विश्व के दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण लोकतंत्र अमरिका तथा इंगलैंड आज भी पेपर वोटिंग में ही विश्वास रहते हैं तथा विकसित देश होने के बावज़ूद ईवीएम के इस्तेमाल से बचते रहे हैं.
आपने विषय तो बहुत अच्छा उठाया है लेकिन
आप ऐसा क्यों मानते है कि EVM का प्रयोग कांग्रेस द्वारा सिर्फ़ अपनी कुर्सी बचाने के लिये किया जाता है ? इन्ही EVM का प्रयोग मध्य प्रदेश और गुजरात में हुआ था जहाँ भाजपा की सरकार शानदार तरीके से दो दो बार चुनी गयी है.
कागजी वोटींग से EVM वोटींग कई गुना अच्छी है, इनकी त्रुटियों को दुर कर उपयोग करना उचीत होगा.
आँखे खोलने वाला और शरीर में बिजली कौन्धाने वाला लेख है यह. देश का भविष्य और भी असुरक्षित लगने लगा है. मैंने यह किताब बीच-२ में से अभी थोड़ी-२ सी पढ़ी है. वास्तव में इस किताब की बात में दम है.
@आनन्द
EVM का दुरूपयोग कोई भी करे कान्ग्रेस या भाजपा दोनों ही परिस्तिथी में यह खतरनाक है किन्तु अभी हाल ही लोकसभा के चुनाव में कान्ग्रेस के जीतने की आशा न केवल विरोधियों को थी वरन स्वयं कांग्रेसियों को भी नहीं थी.
किन्तु मध्य-प्रदेश और गुजरात में भाजपा के जीतने की सभी को ८०% आशा तो थी ही तो इस परिस्तिथी में शक कान्ग्रेस पर ही जाता है. और वैसे भी कान्ग्रेस तो अपने जन्म से ही जनता के साथ धोखे और भ्रष्टता के लिये जानी जाती है.
तो कुल मिला कर सन्देह और चरित्र के अनुसार कान्ग्रेस ही ऐसा घिनोना कार्य कर सकती है.
आँखें खोलने वाली इस उपयोगी पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार..
मशीन टेम्परप्रूफ़ नहीं है। मुझे यह कांग्रेसी षडयंत्र नहीं बल्कि पूंजीवादी षडयंत्र ज्यादा लगता है। अलबत्ता इसे टेम्परप्रूफ़ बनाने की कोशिश जारी रखनी चाहिए।
मैं यही सोच रहा हूं कि चिदम्बरम हारते-हारते कैसे जीत गए।
आज लोकतंत्र की हालत जैसे रईस के बच्चे की खिलोने की तरह मालूम पड़ती है.
हर स्तर पर हर चरण में गहन पड़ताल जरुरी है.
बिल्कुल सही कहा आपने इस पर बहस चलनी चाहिए।
suresh chiplunkarji aap jara shopping maalo ke adheekata hone ke paschat hi jaroori khaadya saamagri ke kyo badh rahe he us baare me bhi kuchh likhiye
JAB TAK SARKAR EVM BAND NAHI KARE TAB TAK FARZI UMMIDVAR KHADE KAR KE UMMIDVARO KI SANKHYA 48 SE UPAR RAKHE TAAKI EVM CHUNAAV ME NAHI UPAYOG KI JAA SAKE
महोदय, यही कारण है कि प्याज का मंहगा होने पर दिल्ली की और केन्द्रीय सरकार गिर गयी, अब जबकि हर चीज मंहगी है, फिर भी यूपीए जिन्दाबाद..
ये तय करना मुश्किल है कि राहुल महाजन अधिक छिछोरा है या हिन्दी न्यूज़ चैनल
____________________________
सर एक बात बताइए ..क्या कर सकते है हम ? नाही बीजेपी आपना न्यूज़ चैनल शुरू कराती है .... नाही हम जैसे लोग :(
Post a Comment