उम्मीद है कि रॉन वॉट्स दम्पति को भारत रत्न मिलकर रहेगा… ... Ron Watts, Conversion Adventist Church
हम अशिक्षित और संस्कृतिविहीन किस्म के भारतवासियों विशेषकर हिन्दुओं को श्री रॉन वॉट्स तथा श्रीमती डोरोथी वॉट्स का तहेदिल से शुक्रगुज़ार होना चाहिये कि उन्होंने भारत में आकर ईसाई धर्म का प्रचार करने की ज़हमत उठाई और अपने काम को बड़ी लगन और मेहनत से सफ़लता की ऊँचाई पर ले जा रहे हैं। कहीं ऐसा न हो कि उन्हें भारत रत्न मिले और आप उल्लू की तरह पूछते फ़िरें कि ये कौन हैं? और इन्हें भारत रत्न क्यों दिया गया?, इसलिये मेरा फ़र्ज़ बनता है कि आपको इनके बारे में बताऊं…
कनाडा निवासी वॉट्स दम्पति “सेवेन्थ-डे एडवेंटिस्ट चर्च” के दक्षिण एशिया प्रभारी हैं। 1997 में जिस समय इन्होंने इस चर्च के दक्षिण एशिया का प्रभार संभाला, उस समय 103 वर्षों के कार्यकाल में भारत में इसके सदस्यों की संख्या दो लाख पच्चीस हजार ही थी। लेकिन सिर्फ़ 5 साल में अर्थात 2002 तक ही वॉट्स दम्पति ने भारत में इसके सदस्यों की संख्या 7 लाख तक पहुँचा दी (है ना कमाल का काम!!!)। इन्होंने गरीब भारतीयों के लिये इतना जबरदस्त काम किया, कि सिर्फ़ एक दिन में ही ओंगोल (आंध्रप्रदेश) में 15018 लोगों ने धर्म परिवर्तन करके ईसाई धर्म अपना लिया।
http://www.adventistreview.org/2001-1506/news.html
और
http://www.adventistreview.org/2004-1533/news.html
वॉट्स दम्पति का लक्ष्य 10,000 चर्चों के निर्माण का है, और जल्द ही वे इस जादुई आँकड़े को छूने वाले हैं तथा उस समय एक भव्य विजय दिवस मनाया जायेगा। असल में इस महान काम में देरी सिर्फ़ इसलिये हुई, क्योंकि इनके सबसे बड़े मददगार और “हमारी महारानी” के खासुलखास व्यक्ति, अर्थात “भारत रत्न” एक और दावेदार सेमुअल रेड्डी की हवाई दुर्घटना में मौत हो गई। फ़िर भी वॉट्स दम्पति को पाँच राज्यों के ईसाई मुख्यमंत्रियों का पूरा समर्थन हासिल है और वे अपना परोपकार कार्य निरन्तर जारी रखे हैं। इनकी मदद के लिये अमेरिका स्थित मारान्था वॉलंटियर्स भी हैं जिन्होंने भारत में दो साल में 750 चर्च बनाने तथा ओरेगॉन स्थित फ़ार्ली परिवार, जिन्होंने एक चर्च प्रतिदिन के हिसाब से 1000 चर्च बनाने का संकल्प लिया है। इनका यह महान कार्य(?) जल्द ही पूरा होगा, साथ ही भारत में इनकी स्थानीय मदद के लिये इनके कब्जे वाला 80% बिकाऊ मीडिया और हजारों असली-नकली NGOs भी हैं।
श्री एवं श्रीमती वॉट्स की मेहनत और “राष्ट्रीय कार्य” का फ़ल उन्हें दिखाई भी देने लगा है, क्योंकि उत्तर-पूर्व के राज्यों मिजोरम, नागालैण्ड और मणिपुर में पिछले 25 वर्षों में ईसाई जनसंख्या में 200% का अभूतपूर्व उछाल आया है। त्रिपुरा जैसे प्रदेश में जहाँ आज़ादी के समय एक भी ईसाई नहीं था, 60 साल में एक लाख बीस हजार हो गये हैं, (हालांकि त्रिपुरा में कई सालों से वामपंथी शासन है, लेकिन इससे चर्च की गतिविधि पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता, क्योंकि वामपंथियों के अनुसार सिर्फ़ “हिन्दू धर्म” ही दुश्मनी रखने योग्य है, बाकी के धर्म तो उनके परम दोस्त हैं) इसी प्रकार अरुणाचल प्रदेश में सन् 1961 की जनगणना में सिर्फ़ 1710 ईसाई थे जो अब बढ़कर एक लाख के आसपास हो गये हैं तथा चर्चों की संख्या भी 780 हो गई है।
एक दृष्टि रॉन (रोनॉल्ड) वॉट्स साहब के सम्पर्कों पर भी डाल लें, ताकि आपको विश्वास हो जाये कि आपका “भविष्य” एकदम सही हाथों में है…
1) रॉन वाट्स के खिलाफ़ बिजनेस वीज़ा पर अवैध रूप से भारत में दिन गुजारने और कलेक्टर द्वारा देश निकाला दिये जाने के बावजूद जबरन भारत में टिके रहने के आरोप हैं, लेकिन उन्हें भारत से कौन निकाल सकता है, जब “महारानी” जी से उनके घरेलू सम्बन्ध हों… क्या कहा… विश्वास नहीं होता? खुद ही पढ़ लीजिये…
http://www.scribd.com/doc/983197/RON-WATTS-AND-SONIA-GANDHI-OPERATE-TOGETHER
2) रॉन वॉट्स साहब को ऐरा-गैरा न समझ लीजियेगा, इनकी पहुँच सीधे चिदम्बरम साहब के घर तक भी है… चिदम्बरम साहब की श्रीमती नलिनी चिदम्बरम, रॉन वॉट्स की वकील हैं, अब ऐसे में चिदम्बरम साहब की क्या हिम्मत है कि वे वॉट्स को देशनिकाला दें। ज्यादा क्या बताऊँ… आप खुद ही इनके रिश्तों के बारे में पढ़ लीजिये…
http://www.hvk.org/articles/0605/12.html
3) इन साहब की कार्यपद्धति के बारे में विस्तार से जानने के लिये यहाँ देखें…
http://www.organiser.org/dynamic/modules.php?name=Content&pa=showpage&pid=184&page=5
तात्पर्य यह कि समस्त भारतवासियों को वॉट्स दम्पति का शुक्रगुज़ार होना चाहिये कि उन्होंने हजारों लोगों को “सभ्य” बनाया, वरना वे खामख्वाह हिन्दुत्व जैसे बर्बर और असभ्य धर्म में फ़ँसे रहते। इसलिये मैं “महारानी” से अनुशंसा करता हूं कि वॉट्स दम्पति द्वारा भारत के प्रति इस “अतुलनीय योगदान” के लिये इन्हें शीघ्रातिशीघ्र “भारत रत्न” प्रदान करे।
आप क्या सोचते हैं, क्या इन्हें भारत रत्न मिल पायेगा? मुझे तो पूरा विश्वास है कि कांग्रेसियों की “इटली वाली महारानी” इस पर अवश्य विचार करेंगी, आखिर पहले भी ग्राहम स्टेंस की विधवा को हमने उनके “भारत के प्रति अतुलनीय योगदान” के लिये पद्म पुरस्कार दिया ही था।
वैसे तो “अतिथि देवो भवः” की परम्परा भारतवर्ष में कायम रहे इसलिये अफ़ज़ल गुरु, कसाब, क्वात्रोची, वॉरेन एण्डरसन, रॉन वॉट्स जैसे लोगों की “सेवा” में कांग्रेस सतत समर्पित कार्य करती ही है, फ़िर भी मैं तमाम सेकुलरों, कांग्रेसियों, वामपंथियों और बचे-खुचे बिकाऊ बुद्धिजीवियों से भी आग्रह करता हूं कि वे भी अपनी तरफ़ से इस कर्मठ कार्यकर्ता को भारत रत्न दिलवाने हेतु पूरा ज़ोर लगायें, कहीं ऐसा न हो कि हमारी मेहमाननवाज़ी में कोई कमी रह जाये…।
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36 comments:
अभी दो तीन दिन पहले सूरत में नक्सली नेता पकड़ा गया था. आज "फादर" ने विरोध दर्ज करवाया है. कुछ समझ में आ रहा है? अरे भाई हिन्दु कार्यकर्ताओं को रास्ते से हटाने की सुपारी इन्हे ही तो दी जाती है.
गाँधीवाद जिन्दाबाद. सर्वधर्म सम्भाव जिन्दाबाद. गंगा जमुना संस्कृति जिन्दाबाद. यह इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि हम कह लेते है आने वाली पीढ़ी तो कहने से रही. वे हिन्दु रहेंगे ही नहीं ना.
zarur milega bharat ratna .. inhe nahi milega to kya atal ji ko milega
ये रॉन वॉट्स कौन है ?
दुबारा मत पूछना !!
इसका तात्पर्य है कि हिन्दूवादी संगठन संगठित नही है और न ही हिन्दू धर्म के प्रति जागरूक ।।।
एक और खुलासा , आप का अभिनन्दन सुरेश भाऊ।
चिपलूनकर साहब, आप विस्वास नहीं करेंगे , मैं भी इस पर एक लेख लिखने वाला था लेकिन कहते है कि जो होता है वह सही के लिए ही होता है, जिस बेहतरी और प्रमाणिक ढंग से आपने लिखा, वह मैं कभी नहीं लिख पाता ! हाँ, मेरे लेख की विषयवस्तु थोड़ा अलग थी ! शोर्ट में उस लेख के माध्यम से मैं कहना ये चाहता था कि इसाई मिशनरियों को देखिये किस निराले अंदाज में लोगो को न सिर्फ लुभाकर बल्कि उन्हें फायदा पहुंचाकर भी अपना कार्य कर रही है ! हिन्दू धर्म को तो आजकल ये कलयुगी बाबा लोग ही बदनाम करने पर तुले है ! अब अपने "श्री- श्री " को ही ले लीजिये , हालांकि मैं मानता हूँ कि मीडिया भी, हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए एक सोची समझी नीति के तहत इसप्रकार की बातों को बहुत ज्यादा तूल दे रहा है, मगर फिर भी इन श्री श्री महाराज का उस घटना के ( जोकि सिर्फ सुर्खियाँ बटोरने का एक हथकंडा लग रहा है ) बाद का ब्यवहार क्षोभनीय लगा ! कल उस महाशय को टीवी पर देख रहा था जिसके गोली लगने की बात उठी थी , कहता था कि कोई चीज मेरी जंग से टकराई और जब मैंने नीचे देखा तो गोली जमीन पर पडी थी ! सच कितनी हास्यास्पद बात है , इन कलियुगियों ने ही इस धर्म का बेड़ा गरक कर दिया ! जितना धन ये अपनी यह सब ड्रामेबाजी करने में व्यर्थ गवाते है , यदि उसको गरीब हिन्दुओं के उत्थान में लगाते तो क्यों नहीं हिन्दू धर्म भी मजबूत होता ?
जबकि इसाई मिशनरियां किस तरह इन परिवर्तित ईसाईयों को मदद पहुंचा रही है उसका उदाहरण देखिये ! मेरे पडोश में एक परिवर्तित मद्रासी परिवार रहता है ! बेटा १२वी में है, उन्होंने चेन्नई के एक इसाई इंजीनियरिंग स्कूल से उसे टेस्ट दिलवाया, नौन-क्रिश्चियन योग्य बच्चो को एक तरफ करते हुए उस स्कूल ने उसे सीट दे दी (२० मई के आस-पास की बात थी ) २२ मई को १२वी का रिजल्ट आया तो वह बच्चा गणित में सिर्फ १२ नंबर लाया था ! अब आप सोच सकते हो कि ऐसे बच्चे का सेलेक्शन किया गया भले ही वह इस साल इन्जिनीरिंग ज्वाइन नहीं कर सकता, फिर भी कहने का तात्पर्य ये है ऐसे कितने हिन्दू संगठन है जो इसप्रकार हिन्दू बच्चो का पक्ष ले रहे है ? तो मैं तो यही कहूंगा कि रोन वाट्स को भारत रत्न मिलना ही चाहिए !
माननीय चिपलूनकर साहब,
आपके प्रशंषको की कतार में इक मेरा नाम भी जोड़ लीजिये!
मै बिहार से हु, बंगलोर में इक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत हु, और देश के लिए, देश की हालत पे बेचैन हु!
बस हमेशा बी जे पी को वोट देके अपने कर्तव्यो की इतिश्री कर लेता हु!
पर इसबार बाबा रामदेव की पार्टी को देने का निश्चय किया है.
हिंदुत्व से ज्यादा राष्ट्रवाद के लिए!
आप कुछ मार्गदर्शन करे
आपसे प्रभावित,
सुशांत भारतीय
शायद मिल ही जाता, पर आप के इस आलेख से निश्चय ही रुक जाएगा।
अच्छा धोया है आपने...
अफ़सोस है कि इस साजिश को रोकने का कोई माध्यम नहीं दिखायी दे रहा।
जब तक देश को इस गद्दारों की सरदार महारानी से मुक्त नहीं कर लिया जाता तब तक इस तरह के कुककर्म करने वाले धर्मांतरण के ठेकेदार व आतंकवादी वेलगाम अपने षडयन्त्रों को अन्जाम देते रहेंगे।
गोदियाल जी आप भी इस विषय पर जरूर लिखें।
सुरेश जी, आपने तो जैसे मेरी आंखे ही खोल दी |
भारत के असभ्य, अनपढ़, गंवार, जाहिल, जंगली, भूखे नंगे लोगो को सभ्य बनाने का इतना बड़ा व्यापार जोर शोर से चल रहा है और ये मिडिया वाले हमें दिन रात नाच, गाने, हंसी मजाक, भांडों और नगरवधुओं के अन्तरंग संबंधों की रसप्रद गहन चर्चा में फंसाए रक्खे हैं - "सभ्य" बनने के बारे में तो कुछ बताते ही नहीं हैं |
मुझे भी अब जल्दी से जल्दी "सभ्य" बनना है और अपना "भविष्य सुरक्षित" करना है |
किसको, कब, कहाँ, कैसे कोंटेक्ट करूँ ?
गोदियाल जी से अक्षरश: सहमत. हिन्दू धर्मगुरुओं की बहुत बड़ी कमी है यह...
लेकिन इस तथ्य को भी नहीं भूलना चाहिये कि सरकारों का संरक्षण एक बहुत बड़ी चीज है... सरकारें और तथाकथित निरपेक्ष जो न करा दें कम है..
bhai saheb Suressh ji, jab Saif Ali ko bina kuchh kiye karaye mil sakata hai to apne Ron saheb to bahut hi yogya hain.
Future is dark!!!!!!
यह हमारा दुर्भाग्य है की आजाद भारत की महारानी विदेशी है और हम अपने को आजाद कहते हैं ? जब एलिजाबेथ ने भारत आने से मना कर दिया तो मुझे कुछ समझ में नहीं आया | लेकिन अब समझ में आ रहा है एलिजाबेथ सोच रही होगी की जो हम और हमारे पूर्वज सैकड़ों वर्षों में नहीं कर पाए वह काम अकेले वर्त्तमान भारत की महारानी ने कुछ ही वर्षों में कर दिखाया , ऐसे में मै कौन सा मुह लेकर भारत जाऊ |
सबसे बड़ा प्रश्न तो यही है की क्या हम आजाद हैं ? और नहीं! तो जो भी हो रहा है वह अभी कम है |
रत्नेश त्रिपाठी
किसी देश का बंटवारा कराना हो तो उसके नागरिकों का धर्म परिवतित करवादो । दूसरे देश पर कब्जा करने की मध्ययुगीन तकनीकी ।
fokat me ehsaan thode hi lete hai hum kisika.Madam ko thoda wappt do.Bharat Ratna to dekar rahenge.
fokat me ehsaan thode hi lete hai hum kisika Ron saheb.Madam ko thoda wappt do.Bharat Ratna to dekar rahenge.
अजी बिलकुल मिलना चाहिये। जब तक भारत के दुर्भाग्य से महारानी सोनिया जी अपना गुप्त एंजेंडा लागू करती रहेंगी, यही होगा। दुर्भाग्य है देश का और हिन्दुओं का।
Sures जी इस साल की जन गणना से धर्म की जानकारी वाला कालम गायब है , जल्दी ही आपके डाटा देने की शक्ति ख़त्म हो जायेगी ह ह महारानी जिंदाबाद
चिदम्बरम, माओवादियों का कुछ नहीं कर सकते क्योंकि माओवाद चर्च से संरक्षित है। पूर्वोत्तर भारत में चर्च से ही सारी गतिविधियाँ (माओवादी) चलरही है। मानवाधिकार की दूकान चलानें वाले गौतम नौलखा तो छत्तीसगढ़ में रामकृस्न मिशन के स्कूल चलानें पर सवाल उठाते हैं लेकिन इन इलाकों में चर्च की गतिविधियों पर कोई टिप्पड़ी नहीं करते क्यों??? अरुंधती राय क्यों कि मूलत: क्रिश्चियन हैं इसीलिए उनकी आवाज बंद रहना ठीक ही है। लेकिन हिन्दु संगठन इस पर धरना आंदोलन प्रदर्श्न क्यों नहीं करते? कम से कम जनता और देश के सामने इन कुकर्मो की सच्चाइ खुलासा की जाए।
देशभक्त लेखको और नागरिको आप सब को साधुवाद सुरेश जी के लेख को सरहाने का. परन्तु कब तक गिडगिडाते रहोगे. किसी भिखारी अरुन्धिता, कभी हिन्दू संघटन और कभी बीजेपी से इस बात पर प्रतिक्रिया न करने पर की रोज भारत माता का गोश्त काट काट कर बेचा जा रहा है और हम है की गिडगिडाना ही नहीं बंद करते.
अरे तुम्हारे अन्दर जबतक खून की जगह लावा नहीं बहेगा हिंदुस्तान टुकडो में बिकता जायेगा.
जिसका पौरुष भी जिन्दा हो क्यों कौम वो ही शर्मिंदा हो
जगाने का वक्त भी ख़त्म हो गया तुम जागो, खुद जागो
parshuram27.blogspot.com/
आपसे पूरी तरह से सहमत हूँ चिपलूनकर जी .
आज मेरी ये अंतिम टिप्पणियाँ हैं ब्लोग्वानी पर.
कुछ निजी कारणों से मुझे ब्रेक लेना पड़ रहा हैं .
लेकिन पता नही ये ब्रेक कितना लंबा होगा .
और आशा करता हूँ की आप मेरा आज अंतिम लेख जरूर पढोगे .
अलविदा .
संजीव राणा
हिन्दुस्तानी
मै तो पहले से ही मानता हूं मुस्लिम के बराबर अगर ईसाई हो्ते तो भारत अब तक ईसाई मुल्क हो जाता .
मै तो पहले से ही मानता हूं मुस्लिम के बराबर अगर ईसाई हो्ते तो भारत अब तक ईसाई मुल्क हो जाता .
मै तो पहले से ही मानता हूं मुस्लिम के बराबर अगर ईसाई हो्ते तो भारत अब तक ईसाई मुल्क हो जाता .
आपने चौंकाने वाले तथ्यों से अवगत कराया है.
Hello Blogger Friend,
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1.yahan par kitne log hai jinke koi bhi bacche english school mei nahi padhte????
2.yahan kitne log hai jo birthday ke
din cake nahi kaate????
3.yahan kitne log hai jo ki Pent, Shirt,Jeans,T-Shirt nahin pahente sirf Bharatiya Dress pahante hai????
4.yahan kitne aise log hai jinke bacche unko mummy,papa nahi kahte hai????
5.yahan kitne log hai jo jab kisi se milte hai tou haat nahi milate sirf namaskaar kerte hai?
6.yahan kitne log hai jo rozana pooja paath karte hai ya mandir jaate hai (avoid exam time)?????
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7.yahan kitne log hai jo 1 January ko naye saal ki wish nahi karte????
hindu sanskriti ki hum yuvaon ko bahut chinta hai,lekin koi kuch nahi ker sakta.....pahle muglon ke gulaam the,uske baad angrejon ke gulaam bane aur aab angrej maansikta ke gulaam hai......
kya hoga is desh ka main to bas ye kahunga
समझोतों से नहीं कभी भी युद्ध टला करते हैं।
कायर जन ही इनसे खुद को स्वयं छला करते हैं।।
उचित काल को राष्ट्र स्वयं ही बातों में खोता जो।
अपनी ही भावी पीढी का अपराधी होता वो॥
यह बहुत ही गंभीर मसला है. पुरे देश में हिन्दू धर्म के धर्माचार्यों को बदनाम करने का बड़ा भारी षड़यंत्र है . इसमें वे लोग और संस्थाएं तो लगी है जो अब तक केवल गरीब हिन्दुओं के धर्मान्तरण में लगी थी , अब उनका प्रयास यह है कि एक एक कर के हिन्दुओं के अधिकांश धर्माचार्यों को बदनाम कर दिया जाये ताकि मध्यम वर्गीय हिन्दुओं की आस्था को आघात पहुंचे और उनको भी धर्मान्तरण के लिए प्रेरित किया जा सके . इस कुत्सित प्रयास में उन राजनितिक दलों की भी भागीदारी है जो अल्पसंख्यंक वोट बैंक की राजनीति करते है . और जिनके आका स्वयं मिशनरी गतिविधियों से परोक्ष रूप से जुड़े है
सर वन्दे मातरम ,
हजारो वर्षो से खतरे में पड़े हिंदू धरम ने अपनी सहिशुनता दयुलाता और कायरता के कारन हमेशा नुक्सान उठाया हे ,आज क्या कारन हे की भारत में ही भारत के एक महान धरम की फजीहत ह रही हे ,अधिकतर लोगो ने मंदिर में परसाद चढाने या घर में भगवान के सामने स्वार्थ पूर्ती को ही अपना धरम मान लिया हे ,में और मेरा छोटा सा परिवार बाकी जाये साले भाड़ में ??????ऐसा क्यों ?कंहा से आयी ये विचार धराये ? सभी अंगरेजी शिक्षया नीती का कमाल .आज एक बी.प.ओ का रास्ट्र वादी दोस्त मुझसे चाटिंग कर रह था .कह रहा था की ,मेरा देश मेरा हिन्दू समाज इन बातो की खिली उड़ाई जाती हे ,इन पढ़े लिखे अंगरेजी रोंवो वाले देशी पिल्लो दुवारा, मेने कहा दिल छोटा ना करो लगे रह ये देशी पिल्लै ,हे देशी ही रहेंगे ,गुमराह हे ,देशी रोटी का टूकड़ा मिलते ही ,देशी हो जायेंगे?
just read the link......
http://en.wikipedia.org/wiki/Rahul_Gandhi#Swiss_Bank_Accounts
Oh my GOD.
या है मेरे भगवान|
बोलिए क्या कहूँ ??????????
suresh ji ram-ram
aaj hindu santo ko badnam karne ka sadyantar chal raha he / jisse ki hinduo ki ashta ko tesh lage/
mandiro me dan dene se accha he ki un hindu sangthano ki madad kari jay jo ghar vapsi ka karya kar rahe he(sewa karyo dwara)
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