मंगलोर विमान दुर्घटना की वजह से "फ़र्जी पासपोर्ट रैकेट" का प्रभाव पुनः दिखाई दिया… Manglore Plane Crash, Fake Passports
कुछ दिनों पहले मंगलोर में एक विमान दुर्घटना हुई थी जिसमें 158 यात्रियों की मौत हुई तथा इस पर काफ़ी हो-हल्ला मचाया गया था। प्रफ़ुल्ल पटेल की इस बात के लिये आलोचना हुई थी कि नई बनी हुई छोटी हवाई पट्टी पर बड़ा विमान उतारने की इजाजत कैसे दी गई? लेकिन न तो इस मामले में आगे कुछ हुआ, न ही किसी मंत्री-अफ़सर का इस्तीफ़ा हुआ। इस विमान दुर्घटना के कई पहलुओं में से एक महत्वपूर्ण पहलू को मीडिया ने पूरी तरह से ब्लैक आउट कर दिया, और वह यह कि मारे गये कम से कम 9 यात्री ऐसे थे, जिनके ज़ब्त सामान की जाँच के बाद उनके पासपोर्ट फ़र्जी पाये गये, इसलिये न तो उनकी सही पहचान हो सकी है, और न ही मुआवज़ा दिया जा सका।
इस बात का खुलासा इस समय हुआ, जब स्थानीय अखबारों ने दुर्घटना में सौभाग्य से जीवित बचे यात्री से पूछताछ की, संयोग से उसके पास भी फ़र्जी पासपोर्ट ही पाया गया। मृतकों में से कुछ यात्री केरल के मूल निवासी थे, लेकिन उनके पासपोर्ट पर तमिलनाडु के घर के पते पाये गये, इसी प्रकार उनके फ़ोटो भी मिलते नहीं थे। केरल के उत्तरी इलाके के कासरगौड़ (Kasargod) जिले के कलेक्टर और एसपी ने इस मामले में जाँच शुरु कर दी है, ताकि विमान दुर्घटना में मारे गये असली लोगों की पहचान की जा सके। अपनी शर्म छिपाने की कोशिश करते हुए एसपी प्रकाश पी. कहते हैं कि "फ़र्जी पासपोर्ट पर इतनी जल्दी नतीजों पर पहुँचना ठीक नहीं है, अभी जाँच चल रही है और हम हरेक दस्तावेज की गम्भीरता से जाँच करेंगे…"। (तो अभी तक क्या कर रहे थे?)
केरल के इस जिले की सीमाएं एक तरफ़ कर्नाटक से लगती हैं, जबकि इस जिले से कन्नूर (Kannur) और मलप्पुरम (Malappuram) जैसे इस्लामी उग्रवाद के गढ़ और सिमी के ठिकाने भी अधिक दूर नहीं हैं। कासरगौड़ जिले में किसी भी आम आदमी से पासपोर्ट लेने के बारे में पूछिये वह आपसे पूछेगा कि "क्या आपको कासरगौड़ दूतावास का पासपोर्ट चाहिये?" "कासरगौड़ एम्बेसी" नामक परिभाषा स्थानीय स्तर पर गढ़ी गई है, जो लोग पासपोर्ट में तकनीक के जरिये फ़ोटो बदलकर नकली पासपोर्ट पकड़ा देते हैं उनके इस "रैकेट" को कासरगौड़ एम्बेसी कहा जाता है, जिसके बारे में "पुलिस और प्रशासन के अलावा" सभी जानते हैं। यह गोरखधंधा 1980 से चल रहा है, लेकिन खाड़ी देशों में काम करने के लालच और गरीबी के चलते असली पासपोर्ट बनवाने में अक्षम लोग इनके जाल में फ़ँस जाते हैं।
ग्लोबल मलयाली फ़ाउण्डेशन (Global Malyali Foundation) के अध्यक्ष वर्गीज़ मूलन, जो कि सऊदी अरब में रहते हैं… कहते हैं कि "केरल में गरीबी और बेरोजगारी के कारण कई मजदूर इस रैकेट के चंगुल में आ ही जाते हैं, जो इनका फ़ायदा उठाकर इन्हें किसी पासपोर्ट में फ़ोटो बदलकर इन्हें खाड़ी भेज देते हैं, दलालों को यह पता होता है कि इनका खाड़ी स्थित मालिक इनके दस्तावेज इन्हे नहीं देगा। बल्कि कई मामलों में तो इनके फ़र्जी पासपोर्ट भी उनके मालिक गुमा देते हैं या जानबूझकर खराब कर देते हैं। इसके बाद ये वहाँ नारकीय परिस्थितियों में काम करते रहते हैं, और जब तंग आकर भारत वापस भागना होता है तब या तो विमान के टायलेट में छिपकर आते हैं, अथवा फ़िर से उसी दलाल को पकड़ते हैं जिसने उसे पासपोर्ट दिलवाया था। वह दलाल फ़िर से उनसे 25000 रुपये लेकर एक और फ़र्जी पासपोर्ट दे देता है। सवाल उठता है कि दलालों के पास यह पासपोर्ट कैसे आते हैं, तो निश्चित रूप से कासरगौड़ के पासपोर्ट कार्यालय में इनके कुछ गुर्गे मौजूद हैं, साथ ही ये लोग ऐसे गरीब हज यात्रियों पर भी निगाह रखते हैं जिन्हें जीवन में सिर्फ़ एक बार ही पासपोर्ट की आवश्यकता पड़ने वाली है। ऐसे लोगों के बेटे और रिश्तेदार इन दलालों को सस्ते में यह पासपोर्ट बेच देते हैं, जिसे दलाल, अफ़सरों और बाबुओं से मिलकर आगे अपने "अंजाम" तक पहुँचाते हैं।
क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि देश से बाहर जाने वाले हरेक व्यक्ति की पूरी जाँच की जाती है, लेकिन मंगलोर दुर्घटना के सभी कागज़ातों की जाँच करना अब सम्भव नहीं है, क्योंकि कुछ जल गये हैं और कुछ गायब हो चुके हैं। पुलिस अधिकारी दबी ज़बान में स्वीकार करते हैं कि भले ही पासपोर्ट बनाने वाले एजेण्ट स्थानीय हों, लेकिन यह सारा खेल "खाड़ी देशों से कुछ बड़े लोग" चला रहे हैं।
वैसे फ़र्जी पासपोर्ट का मामला भारत के लिये नई बात नहीं है, अबू सलेम और उसकी प्रेमिका का पासपोर्ट भी भोपाल से बनवाया गया था, जिसमें गलत जानकारी, गलत पता, गलत फ़ोटो, गलत पुलिस सत्यापन किया गया था, लेकिन भारत के कर्मचारी-अधिकारी और अपना काम किसी भी तरह करवाने के लिये बेताब रहने वाली आम जनता इतनी भ्रष्ट है कि देश की सुरक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने में भी उन्हें कोई शर्म नहीं आती।
सरकार दिनोंदिन भारत से अन्तर्राष्ट्रीय हवाई उड़ानों और टर्मिनलों को बढ़ाती जा रही है, लेकिन उन हवाई टर्मिनलों पर सुरक्षा व्यवस्था और जाँच का काम रामभरोसे ही चलता है। केरल जैसे अतिसंवेदनशील राज्य, जहाँ सिमी की जड़ें मजबूत हैं तथा जहाँ से "ईसाई धर्मान्तरण के दिग्गज" पूरे भारत में फ़ैलते हैं, ऐसे राज्य में खाड़ी देशों से आने वाले यात्रियों के पास फ़र्जी पासपोर्ट मिलना इसी ओर इशारा करता है कि कोई भी जब चाहे तब इस देश में आ सकता है, जा सकता है, रह सकता है, बम विस्फ़ोट कर सकता है… कोई रोकने वाला नहीं। कोई भी चाहे तो नेपाल के रास्ते आ सकता है, चाहे तो बांग्लादेश के रास्ते, चाहे तो वाघा बॉर्डर से, चाहे तो कुपवाड़ा-अखनूर से, चाहे तो मन्नार की खाड़ी से, चाहे तो श्रीलंका के रास्ते से… और अब चाहे तो फ़र्जी पासपोर्ट से देश के किसी भी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरो, और भीड़ में खो जाओ। तात्पर्य कि कोई कहीं से भी आ सकता है, क्या भारत एक देश नहीं, धर्मशाला है? जहाँ बिना पैसा चुकाये, कोई भी, कैसी भी मौज करता रह सकता है? असल में, सरकार को इन बातों की कोई परवाह नहीं है, जबकि नेताओं-अफ़सरों-नागरिकों को "हराम के पैसों" की लत लग चुकी है, चाहे देश जाये भाड़ में। ऐसे में यदि आप सोचते हैं कि "भारत एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र" है, तो आप निहायत मूर्ख हैं…
http://www.mangaloretoday.com/mt/index.php?action=mn&type=1012
http://www.youtube.com/watch?v=Yxbh3bwI7k0
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31 comments:
जब नेता ही कबुतरबाज हो तो बाकि क्यों न बहती गंगा में हाथ धोये. देश का क्या है? पोटली पी कर या चेहरा देख कर वोट देने वालों को चिल्लाने का अधिकार नहीं.
शेष जय हिन्द.... :(
यदि आप सोचते हैं कि "भारत एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र" है, तो आप निहायत मूर्ख हैं…
भाउ हमारी मूर्खता का स्तर निहायत से कहीं ज़्यादा निहायत मूर्खतापूर्ण है।
हमारे चतुर नेता और मूर्ख जनता सोचती है कि सम्पन्नता पश्चिम देशों से आयेगी , उनसे जिन्होने 500 वर्षों से भी ज़्यादा हमें लूट लूट कर नंगा कर दिया ।
और सरकार का काम है बस भीख मांगना उधार मांगना। विश्वास नही होता हम कभी सोने की चिडिया थे।
कम से कम इस मामले में तो हरामखोरी न करें हमारे भ्रष्ट अफसर और काम बनवाने के लालची नागरिक.
:( जब देश बारूद से भर जाएगा तब समझेंगे क्या.
फर्जी पासपोर्ट वाली बात मीडिया में एक दिन के लिए आई थी. फिर उस न्यूज को मीडिया ने फोल्लो नहीं किया. पासपोर्ट का घपला अरब देशों में बहुत पुराना है. फिर २००७ की आई बी की रिपोर्ट जिसके अनुसार विदेश की फर्म जिसको पासपोर्ट छापने का ठेका दिया गया था, उसके यहाँ से हजारों भारतीय पासपोर्ट गायब होने की खबर थी. बाद में क्या हुआ कुछ पता नहीं.
आज आपकी पोस्ट पढ़कर सारी बातें सिलसिलेवार याद आ गईं. शायद देश अब इन बातों से ऊपर उठा चुका हैं. हम बहुत बड़े-बड़े खतरों के सामने हैं.
अपनी पीठ खुद ही थपथपाने वाले मीडिया जो - सबसे पहले - डंके की चोट पर - आप को रक्खे आगे इत्यादि लुभावने वाक्य लिख आकर मूर्ख जनता को और भी मूर्ख बनाए का काम करते हैं - उन्हें इतने वर्षों से चल रहे इन अति गंभीर षड्यंत्रों से - इन देशद्रोहपूर्ण कार्यों से - कोई मतलब नहीं है क्यों कि ये कार्य सेक्युलर हैं और सेक्युलर लोगों द्वारा सेक्युलर लोगों की सहायता के लिए किये जाते हैं |
इन्हीं सब कामों का ०.०१ प्रतिशत भी यदि कोई कॉम्मुनल अर्थात भगवा वस्त्रधारी अथवा उसका अनुयायी करता तो ये लोग आसमान सर पर उठा लेते |
अभी मीडिया दो दिनों से एक महान मॉडल के आत्महत्या कर लेने को राष्ट्रीय अपूरणीय क्षति बतला कर रुदाली की भूमिका निभा रहा है |
जिस देश की जनता मूर्ख हो - चोर और बेईमान लोग नेता बन गए हों - पत्रकार बिके हुए हों - न्याय ने तो पहले से ही अपनी आँखों पर पट्टी बांध कर खुद को अँधा बना रक्खा था और अब वो मानसिक रूप से भी अँधा हो गया हो क्योंकि मात्र २५ दिनों में कर देने वाले फैसले पर २५ वर्षों में भी सही फैसला न कर सके - उस देश का भगवान (यदि है तो) ही रक्षक है |
सही कहा आपने।
सुरेश जी ,
जनता इस राजनीतिक व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करना चाहती है| असली मुसीबत विकल्प के अभाव की है| भाजपा, कांग्रेस, वाम, सपा,माया,लालू,नीतीश सब के सब नीच, दुष्ट, कमीणे, हराम्खोर, धोखेबाज,लोभी,लालची,स्वार्थी हैं| जनता के पास विकल्प नहीं है| विकल्प की कमी ही सबसे बड़ी समस्या है |
रामदेव जी विकल्प देने का प्रयत्न कर रहे हैं , लेकिन कहीं कहीं रामदेव जी भी समझौतावादी नज़र आते हैं | समझौता वादी व्यक्तित्व इन बुरे हालातों को ठीक नहीं कर सकता | हिंदूवादी संगठन भी देश में निराशा ही दिखा रहे हैं |
इससे भी ज़्यादा बड़ी समस्या स्वयं इस देश की जनता है |
इस देश की जनता भी लोभी,लालची,स्वार्थी है| सबसे पहले तो जनता का नैतिक विकास करना पड़ेगा |
वास्तव में देश में एक बड़े भारी आंदोलन की ज़रूरत है| यह स्वतंत्रता के आंदोलन से भी ज़्यादा बड़ा और कठिन आंदोलन होगा |
कौन करेगा?????????????????????????
कौन करेगा?????????????????????????
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कौन करेगा?????????????????????????
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ये बात पूर्णतया सच है कि भारत मे सुरक्षा व्यवस्था नाम की कोई चीज नही है.
जाने कितने बंग्लादेशी लोग रोज घुसपैठ करके भारत मे अवैध रुप से रह रहे है.सीमा पार से कुछ गददार अफसरो की मिलीभगत से रोज पाकिस्तानी हिँजड़े भारत मे घुस कर अपने कारनामो को अंजाम दे रहे
लेकिन सवाल ये है कि इसकी चिँता करे कौन.
इस सरकार से तो ये उम्मीद ही नही कर सकते
और इस सरकार के प्यारे मुल्लो की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि वो किसी दूसरी सरकार को आने नही देते.
हिँदु तो इतना बुद्धिमान है कि वो वोट ही नही देता.
तो फिर चिल्लाने से क्या फायदा?
झेलते रहो .अब भगत सिँह तो आयेँगे नही.
... तो क्या मुसलमान देशद्रोही है?
क्या मुसलमान ऐसे हिन्दुओं का दिल जीत सकते हैं ?
इस लेख के बाद हो सकता है कुछ खास विचारधारा के ब्लॉगरों की जमात मुझे फास्सिट घोषित कर दे। हो सकता है मुझे कट्टरवादी, पुरातनंपथी, दक्षिणपंथी, पक्षपाती, ढकोसलावादी, रूढ़ीवादी, पुरातनवादी, और पिछड़ा व अप्रगतिशीस घोषित कर दिया जाए। इतना ही नहीं इस पोस्ट के बाद मुझ पर किसी हिन्दूवादी संगठन का एजेंट होने का आरोप भी मढ़ दिया जाए तो कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन मुझे डर नहीं, जो सच है कहना चाहता हूं और कहता रहूंगा।
एक सीधा-सा सवाल आपसे पूछता हूं क्या देश के शत्रु को फांसी पर लटकाने से देश की स्थिति बिगड़ सकती है? क्या किसी देश की जनता लाखों लोगों के हत्यारे की फांसी के खिलाफ सड़कों पर आ सकती है? पूरी आशा है कि अगर आप सच्चे भारतीय हैं तो आपका जवाब होगा-देश के गद्दारों को फांसी पर ही लटकाना चाहिए? लेकिन आपकी आस्थाएं इस देश से नहीं जुड़ी तो मैं आपकी प्रतिक्रिया का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
पढने के लिए आयें अपनापंचू पर....
www.apnapanchoo.blogspot.com
Please check this also
hhttp://www.deccanherald.com/content/75887/no-mangalore-air-crash-victims.html
यहाँ के हुक्मरानों को अपने आपको सेकुलर साबित करने से फुर्सत मिले तो इन सब पर ध्यान दें ना ?
अगर कोई भी ये सोचता है कि "भारत एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र" है, तो वो केवल अपने आप से छलावा कर रहा है. देश में किसी भी पासपोर्ट के चोरी होने के बाद पुलिस रिपोर्ट करते वक्त उसे तत्काल ब्लैक लिस्ट नहीं किया जाता, क्योंकि पुलिस इसे एक सामान्य FIR के रूप में लिखती है. जब आवेदक अपने पासपोर्ट के लिए पासपोर्ट कार्यालय जाता है और नया आवेदन करता है उसके बाद ही शायद उस पुराने पासपोर्ट को ब्लैक लिस्ट किया जाता है. इतने समय बाद जब तक वो पासपोर्ट ब्लैक लिस्ट हो अक्सर सरकारी अधिकारियो की मिलीभगत से उस पासपोर्ट का बेजा इस्तेमाल हो चुका होता है.
एक बात और, अक्सर सुना है और सही भी है कि देश के पासपोर्ट में हेराफेरी करना सबसे आसान है क्योंकि उसमे कोई भी सिक्यूरिटी चिन्ह जैसे होलोग्राम, बायोमेट्रिक चिप इत्यादी का इस्तेमाल नहीं होता है.
सुरेशजी, किसे दोष दे, जब अपने ही घर में "विभीषण" बैठे है..
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बंगलादेशी सीमा और नेपाल के रास्ते कि जाने वाली घुसपैठ के बारे में हमारे "हुक्मरान" अच्छी तरह से जानते है,, पर वो चुप है.. क्यूंकि वहां से भारत आने वाले "एक मजबूर समुदाय " के लोग है..::?? सब जानते है कि बंगलादेश से लगाती "पश्चिम बंगाल और बिहार सीमा में "सेक्युलर और मुल्ला मार्क्स" कि राजनीती ठाठे मारती है... "एक खास समुदाय" ही इनका वोट बैंक है, जिसकी राजनीति पे ये लोग अपनी रोटियां सकते है.. अब बताइए "इन विशेष मेहमानों" को आने से कौन रोक सकता है...???
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राजस्थान से लगती जैसलमेर सीमा "रुकांवाला" से दिन रात "विशेष मेहमानों" का आवागमन जारी है.. इसका अंदाजा आप जैसलमेर और जोधपुर रेलवे स्टेशन पर जमा "भिखारियों" (?) को देखकर लगा सकते है.. अब इनमे से कौन "आतंकवादी और कौन मजबूरी का मारा है,,,ये हमारे नेता अच्छी तरह से जानते है,,,
'
सुरेशजी, राजस्थान के रास्ते कि जाने वाली घुसपेठ कितनी भयावह इस बारे में जल्दी ही लेख लिखने जा रहा हूँ, चूँकि राजस्थान का बाशिंदा हूँ इसलिए शायद इन मुद्दों को ठीक तरीके से उठा सकूँ ....
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हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद,,,,
बढ़िया है!
क्या आपने हिंदी ब्लॉग संकलन के नए अवतार हमारीवाणी पर अपना ब्लॉग पंजीकृत किया?
हिंदी ब्लॉग लिखने वाले लेखकों के लिए हमारीवाणी नाम से एकदम नया और अद्भुत ब्लॉग संकलक बनकर तैयार है।
अधिक पढने के लिए चटका लगाएँ:
http://hamarivani.blogspot.com
कटु सत्य है कि देश मे दस सबसे गम्भीर समस्याओं की विवेचना करे तो इस्लाम या आई एस आई का हाथ उसमे होता ही है। ये कैसे देशभक्त पैदा हो रहे है ??
धर्मशाला में भी ठहरने के पैसे लगते हैं भारत तो एक फुटपाथ की तरह है, कोई आओ कोई जाओ. मेरा फुटपाथ महान!!
sir mera thindi ka option hi gayab ho gya he ,me pahale browssing mojill fire fox se karta tha ,ab googal chrom me kata hoo,isme hindi he hi nahee,,,aap bataye hindi kese type karoo comment box me
ओ भ्रष्टाचार.. हर तरफ तेरा जलवा.. हर तरफ तेरा ही जलवा..
आज सारा भारत आतंकवादियों व गद्दारों का गढ़ बनता जा रहा है।
आपका प्रयस सराहनीय ही नहीं आंखे खोल देने वाला है।
यहां एक विस्तृत टिप्पणी की दरकार है।
http://shrut-sugya.blogspot.com/2010/06/blog-post_29.html
बंधू भारत को तो इन लोगो ने एक पेशाबघर बना दिया है कोई भी ऐरा गैरा लेकिन मासूम आदमी आये और मूत के चला जाये. फिर जब वो चला जायेगा तो उसके मूत का analysis किया जायेगा . की भाई रंग कैसा था मीडियावाले एक animation बना के बताएँगे की भाई उसने कैसे मूता किन पर और कोन सी जगह पर मूता वोह मूतते समय क्या कर रहा था उसकी बॉडी language कैसी थी और किसी मीडिया वाले का बस चला तो उसका मूतते हुए एक एक्सक्लूसिव साक्षात्कार भी लेलेंगे फिर बार बार दिखायेंगे की भाई मूतने की ट्रेनिंग कहाँ से ली अब यह भी कोई पूछने की बात है क्या लेकिन क्या करे और कुछ तो आता नहीं है. और अगर आता भी है तो दिखाया नहीं जायेगा और नौकरी भी गवानी पड़ेगी सो अलग.
रही बात फर्जी पासपोर्ट की तो भाई इसमे सरकारी अधिकारी के साथ साथ देश के लोग भी बराबर के शरीक है जो इन अधिकारियो को रिश्वत लेने के लिए उकसाते है क्योंकि भाई यह रिश्वत देने वाले कूद को ज्यादा समझदार समझते है और सही रस्ते चलते लोगो को मुर्ख. क्या करे भाई लक्ष्मी का वहां उल्लू जो है तो भाई जिन पर अतिरिक्त और अनाधिकृत लक्ष्मी है तो वो कोन है.आप ही समझ लो.
और यह जो सुरेश चिपलूनकर है एक दम से फालतू आदमी है कोई काम नहीं है इसे . यह एक अलग तरह के आदमी है कितना समझाया इन्हें की भाई नपुंसक कुछ नहीं कर सकते लेकिन मानते ही नहीं सभी को अपने जैसा मर्द बनाने पर आमादा है.
खैर भगवान भला करे इनका और सभी का
बंधू भारत को तो इन लोगो ने एक पेशाबघर बना दिया है कोई भी ऐरा गैरा लेकिन मासूम आदमी आये और मूत के चला जाये. फिर जब वो चला जायेगा तो उसके मूत का analysis किया जायेगा . की भाई रंग कैसा था मीडियावाले एक animation बना के बताएँगे की भाई उसने कैसे मूता किन पर और कोन सी जगह पर मूता वोह मूतते समय क्या कर रहा था उसकी बॉडी language कैसी थी और किसी मीडिया वाले का बस चला तो उसका मूतते हुए एक एक्सक्लूसिव साक्षात्कार भी लेलेंगे फिर बार बार दिखायेंगे की भाई मूतने की ट्रेनिंग कहाँ से ली अब यह भी कोई पूछने की बात है क्या लेकिन क्या करे और कुछ तो आता नहीं है. और अगर आता भी है तो दिखाया नहीं जायेगा और नौकरी भी गवानी पड़ेगी सो अलग.
रही बात फर्जी पासपोर्ट की तो भाई इसमे सरकारी अधिकारी के साथ साथ देश के लोग भी बराबर के शरीक है जो इन अधिकारियो को रिश्वत लेने के लिए उकसाते है क्योंकि भाई यह रिश्वत देने वाले कूद को ज्यादा समझदार समझते है और सही रस्ते चलते लोगो को मुर्ख. क्या करे भाई लक्ष्मी का वहां उल्लू जो है तो भाई जिन पर अतिरिक्त और अनाधिकृत लक्ष्मी है तो वो कोन है.आप ही समझ लो.
और यह जो सुरेश चिपलूनकर है एक दम से फालतू आदमी है कोई काम नहीं है इसे . यह एक अलग तरह के आदमी है कितना समझाया इन्हें की भाई नपुंसक कुछ नहीं कर सकते लेकिन मानते ही नहीं सभी को अपने जैसा मर्द बनाने पर आमादा है.
खैर भगवान भला करे इनका और सभी का
सुरेश भाई
मुर्दे रह जाते हैं और कंधे देने वालों का अग्नि संस्कार हो जाता है।
व्यवस्था ही ऐसी है।
संजय जी:
राम तेरी गंगा मैली हो गयी पापियों के हाथ धोते धोते..
सुरेश जी:
हमेशा की तरह एक खबर जो की खोज पूर्ण है और लकीर से हट के है.
'हमारी' सरकार क्या करेगी... कुछ नहीं.
जो विदेशी लोगों के हाँथ बिक चुकी है, उससे क्या उम्मीद करें??
अंधा बाटें रेवड़ी... पुन पुन आपन को दे..
बढ़िया लेख, देश की सुरक्षा से समझौता करने वालों के प्रति अतिरिक्त सख्ती की आवश्यकता है !!
न्देमातरम सर ,
वाजपेये के शासन काल में जब जार्ज फर्नाडीज ,रक्षा मंत्री था ,अमेरिका यात्रा के दोरान ,उसके ढीले कुरते पायजामे के कारन ,एक कमरे में नंगा करके तलाशी ली गयी ,खुजली के मरीज शाहरूख खान को अपनी त्यागमयी फिल्म के parmotion के सिलसले में हवाई अड्डे पर हिरोपना दिखा ना भरी पड़ा ,उसको तीन घंटे स्टैंड बाय मोड पर रखा गया |.ये सुरक्षा सम्न्धी बाते अमेरिका और खूदार desho में सामन्य हे,जब नागरिक खूदार होंगे तोव्य्वस्था को तो झक मरा के या कुछ भी मरा के दूरस्त रहना पड़ेगा ,लकिन जब नागरिक ही तेल लगवाने और तेल लगाने liye के उतावले रहते हे तो फिर तो गंभीर कमी अछे नागरिक तेयार करने को लेकर हे ,भोगवाद सभी जगह हे लकिन सभी जगह इमानदारी और देश की सुरक्षा की कीमत पर नहीं गंदगी के दलदल में akhanth डूबे नागरिको ,परशाशन,सरकारों , मशीनरी ,आदी के बाद केवल भारत के भाग्य और भगवन से उम्मीद हे की कुछ अछा हो जाये ?
अब तो ब्लोग जेहाद शुरु हो चूका है. हमारी अंजुमन, लखनऊ ब्लोगर एसोसियेशन व इनके मुसलमान सदस्य ब्लोग बना- बनाकर हिन्दू धर्म को गालियाँ दे रहे हैं तथा इस्लाम की सैक्सियत (शरीयत) का खुला प्रचार कर रहे हैं. सैक्सियत के नाम पर चार विवाह करने का लालच देकर पुरुषों को इस्लाम अपनाने के लिए उकसाया जा रहा है. इस्लाम का जन्मदाता देश अरब सैक्सियत की खुली छूट दे चुका है. वहाँ मिस्यार की आड़ में व्यभिचार को सरकार की मान्यता प्राप्त है. अरब एक बड़ा चकला बनकर सामने आया है. मुस्लमान उमरा के नाम पर अपनी बहन बेटियों का मिस्यार करा रहे हैं. हैदराबाद में बूढ़े शेखो को अपनी बेटियां परोसने वाले मुसलमानों से क्या आशा की जा सकती है? जो अपनी बहन - बेटियों को इज्ज़त नीलम करते हों वो भारत माता का क्या सम्मान करेंगे.
अब तो कश्मीर घाटी के कुतो ,भड्वो ने बाबा अमरनाथ यात्रा को भी निशाना बना शुरू कर दिया हे ,ये धन्यवाद हे ""लूज फक मोहन"" के विशेस १ हजार करोड़ """ के अनुदान का ,,,,सालो पिछवाडा भी हमारा ,बांस की लाठी भी हमारी ,,,,,कूटने वाला अलगाव वादी ?बाकी में धन्यवाद दूंगा जिन्होंने पिछले तीन दिनों में 9 को सुलाया हे ,जय हिंद .जय भवानी जय हिंद की सेना .........................................|
@आदरणीय एवं गुरुतुल्य सुरेश जी
आज जैसे ही अपना ब्लॉग खोला तो मेरी नवीनतम पोस्ट
जब अपनी जनता की ही ऐसी मानसिकता है तो नेताओं को क्या कहा जाए - Huge Lack of Discipline & Morality in our Public पर आपका कमेन्ट देखकर मैं चौंक गया .मुझे यकीन ही नहीं आया की आप मेरे ब्लॉग पर आये और कमेन्ट किया .मेरे लिए तो ये एक सपने के सच होने जैसा था .आपके और डॉ.अन्वेर जमाल जी के ब्लोग्स पढ़-पढ़ कर ही मैंने इस ब्लॉग जगत में कदम रखा था तो आप दोनों ही मेरे लिए गुरु समान हैं और मैंने आपको पहले भी बताया था की जब तक आप दोनों का ही कमेन्ट रुपी आशीर्वाद मुझे प्राप्त नहीं हो जाता तब तक मैं अपने ब्लॉग को अधूरा ही मानूंगा .सच में आज बहुत ख़ुशी हो रही है और आज मुझे अपना ब्लॉग सम्पूर्ण महसूस हो रहा है .
मेरी पोस्ट पर अपनी बहुत ही महत्वपूर्ण राय रखने के लिए आपका बहुत -2 धन्यवाद .
और मैं आपकी राय से पूर्णतया सहमत हूँ की- भारत के लोगों को एक सख्त कानून-व्यवस्था वाला हिटलर टाइप का व्यक्ति ही सुधार सकता है और साथ ही आपका ये point भी काफी सोचने पर मजबूर कर देता है की- यही भारतीय जब विदेश जाते हैं तब वहाँ के एक-एक कानून का ईमानदारी से पालन करते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वहाँ कोई गड़बड़ की तो खैर नहीं…
सच में हमें पश्चिम की नियमों के प्रति सख्ती और उनके कुशलतापूर्वक क्रियान्वन से गहरी सीख और प्रेरणा लेने की आवश्यकता है .
और आपकी current पोस्ट (मंगलोर विमान दुर्घटना की वजह से "फ़र्जी पासपोर्ट रैकेट" का प्रभाव पुनः दिखाई दिया… Manglore Plane Crash, Fake Passports ) के ज़रिये आपने जो चिंता जाहिर की है उससे हर देशभक्त हिन्दुस्तानी चिंतित है लेकिन करें क्या ,जब तक नरेंद्र मोदी जी जैसे सख्त और कुशल प्रशासक केंद्र में नहीं आते तब तक कुछ होता हुआ नहीं लगता .
साथ ही शिवलोक जी से भी पूरी तरह सहमत हूँ की -
इससे भी ज़्यादा बड़ी समस्या स्वयं इस देश की जनता है |
इस देश की जनता भी लोभी,लालची,स्वार्थी है| सबसे पहले तो जनता का नैतिक विकास करना पड़ेगा |
अगर सच में हमें देश को बदलना है तो जनता को जागरूक और उसका नैतिक विकास तो करना ही पड़ेगा ,अगर हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का सही ढंग से पालन करे तो एक दिन में ये देश सुधर सकता है .
एक बार फिर टिपण्णी के लिए धनयवाद एवं आभार
महक
और आपकी current पोस्ट (मंगलोर विमान दुर्घटना की वजह से "फ़र्जी पासपोर्ट रैकेट" का प्रभाव पुनः दिखाई दिया… Manglore Plane Crash, Fake Passports ) के ज़रिये आपने जो चिंता जाहिर की है उससे हर देशभक्त हिन्दुस्तानी चिंतित है लेकिन करें क्या ,जब तक नरेंद्र मोदी जी जैसे सख्त और कुशल प्रशासक केंद्र में नहीं आते तब तक कुछ होता हुआ नहीं लगता .
साथ ही शिवलोक जी से भी पूरी तरह सहमत हूँ की -
इससे भी ज़्यादा बड़ी समस्या स्वयं इस देश की जनता है |
इस देश की जनता भी लोभी,लालची,स्वार्थी है| सबसे पहले तो जनता का नैतिक विकास करना पड़ेगा |
अगर सच में हमें देश को बदलना है तो जनता को जागरूक और उसका नैतिक विकास तो करना ही पड़ेगा ,अगर हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों और कर्तव्यों का सही ढंग से पालन करे तो एक दिन में ये देश सुधर सकता है .
एक बार फिर टिपण्णी के लिए धनयवाद एवं आभार
महक
@आदरणीय एवं गुरुतुल्य सुरेश जी
आज जैसे ही अपना ब्लॉग खोला तो मेरी नवीनतम पोस्ट
जब अपनी जनता की ही ऐसी मानसिकता है तो नेताओं को क्या कहा जाए - Huge Lack of Discipline & Morality in our Public पर आपका कमेन्ट देखकर मैं चौंक गया .मुझे यकीन ही नहीं आया की आप मेरे ब्लॉग पर आये और कमेन्ट किया .मेरे लिए तो ये एक सपने के सच होने जैसा था .आपके और डॉ.अन्वेर जमाल जी के ब्लोग्स पढ़-पढ़ कर ही मैंने इस ब्लॉग जगत में कदम रखा था तो आप दोनों ही मेरे लिए गुरु समान हैं और मैंने आपको पहले भी बताया था की जब तक आप दोनों का ही कमेन्ट रुपी आशीर्वाद मुझे प्राप्त नहीं हो जाता तब तक मैं अपने ब्लॉग को अधूरा ही मानूंगा .सच में आज बहुत ख़ुशी हो रही है और आज मुझे अपना ब्लॉग सम्पूर्ण महसूस हो रहा है .
मेरी पोस्ट पर अपनी बहुत ही महत्वपूर्ण राय रखने के लिए आपका बहुत -2 धन्यवाद .
और मैं आपकी राय से पूर्णतया सहमत हूँ की- भारत के लोगों को एक सख्त कानून-व्यवस्था वाला हिटलर टाइप का व्यक्ति ही सुधार सकता है और साथ ही आपका ये point भी काफी सोचने पर मजबूर कर देता है की- यही भारतीय जब विदेश जाते हैं तब वहाँ के एक-एक कानून का ईमानदारी से पालन करते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि वहाँ कोई गड़बड़ की तो खैर नहीं…
सच में हमें पश्चिम की नियमों के प्रति सख्ती और उनके कुशलतापूर्वक क्रियान्वन से गहरी सीख और प्रेरणा लेने की आवश्यकता है .
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