Thursday, April 29, 2010

भारतीय मीडिया के चरित्र को उजागर करती बैरकपुर स्पोर्टस कॉम्पलेक्स की शर्मनाक घटना…… Pseudo-Secular Indian Media, Barrackpur Molestation

16 अप्रैल 2010 को पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले में स्थित बैरकपुर स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स की यह घटना है। स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स की महिला खिलाड़ी और युवा प्रशिक्षु लड़कियाँ मैदान में प्रैक्टिस कर रही थीं। मैदान से बाहर बैठे हुए कुछ मुस्लिम लड़कों ने (आयु 16 से 20) इन खिलाड़ी लड़कियों पर ताने कसना शुरु किये, गालियाँ दीं और झूमाझटकी शुरु की। लड़कियों के साथ, आसपास की झुग्गी बस्तियों के मुस्लिम लड़के आये दिन इस प्रकार की छेड़छाड़ करते रहते हैं जिसकी शिकायत कई बार की जा चुकी है। उस दिन भी लड़कियों को लगा कि ये लड़के थोड़ी देर में चले जायेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उस झुण्ड में से एक-दो लड़कों ने डोना नाम की खिलाड़ी को पकड़कर उससे उसका मोबाइल नम्बर माँगा, किसी तरह डोना उनसे पीछा छुड़ाकर मैदान के बीच में आई, तब लड़कों ने मैदान के बाहर से चिल्लाना शुरु कर दिया, कि “हम तुम्हारे कमरे में आयेंगे…”, “हम तुम्हारे बिस्तर पर बैठेंगे…” आदि-आदि। इसे देखकर पास ही खेल रहे कुछ लड़कों ने उन गुण्डों का विरोध किया और उन्हें मारपीट कर वहाँ से भगा दिया, लड़कियाँ घबराकर स्पोर्ट्स क्लब की बिल्डिंग के भीतर चली गईं।


लेकिन शाम को लगभग 6.15 बजे अचानक उन्हीं लड़कों के साथ 50-60 मुस्लिम लड़के स्पोर्ट्स काम्पलेक्स की इमारत में जबरन घुस आये, जमकर तोड़फ़ोड़ की, लड़कियों के टॉयलेट में जाकर उनसे छेड़छाड़ की और कुछ लड़कियों को खूब पीटा, जिसमें से दो लड़कियाँ पूजा सिन्हा (17) और डॉली विश्वास (14) गम्भीर रूप से घायल हुईं। पूजा सिन्हा को एक निजी अस्पताल में भरती किया गया, जहाँ उसने स्थानीय पत्रकारों को घटना की जानकारी दी। उसने बताया कि वे लड़के मोहनपुर पंचायत के चोपकाथालिया मस्जिद पारा के हैं और आये दिन बाज़ार में आते-जाते हिन्दू लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करते रहते हैं, जिसकी शिकायत क्लब सेक्रेटरी को कई बार की थी, इसीलिये उस दिन उन मुस्लिम लड़कों ने मुझे अधिक निशाना बनाया और मेरी छाती पर चढ़कर पेट में लातें मारीं।


जैसा कि सभी जानते हैं, पश्चिम बंगाल के कई जिले अब मुस्लिम बहुल बन चुके हैं, 24 परगना जिला भी इसी में से एक है। इस स्पोर्ट्स क्लब के सेक्रेटरी अजय बर्मन रॉय, “माकपा के स्थानीय नेता” हैं, जिन्होंने पत्रकारों को इस घटना के बारे में कुछ भी लिखने के खिलाफ़ धमकाया। जब क्लब के वरिष्ठ सदस्य विष्णुपद चाकी से इस घटना और सुरक्षा के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था कि 50-60 लड़कों द्वारा अचानक हमला किये जाने से वे घबरा गये और ऐसे में सुरक्षा का कोई भी उपाय काम नहीं आता। आगे उन्होंने बताया कि मस्जिद पारा मोहल्ले से सलाम अहमद (36), कलाम खान (38) और मुबीन अहमद ने उन लड़कों को “समझा-बुझाकर”(?) क्लब से बाहर निकाला (घटना हो जाने के बाद)। उल्लेखनीय है कि सलाम खान भी एक स्थानीय CPIM नेता है और उसने भी क्लब के सदस्यों को इस बात की रिपोर्ट पुलिस में नहीं करने हेतु धमकाया। यहाँ तक कि उसने तोड़फ़ोड़ के निशान मिटाने की गरज से सामान को ठीकठाक जमवाने की कोशिश भी की, लेकिन क्लब के सदस्यों के विरोध के बाद वह वहाँ से चला गया।


इसके बाद घबराये हुए स्पोर्ट्स क्लब के सदस्यों ने टीटागढ़ पुलिस थाने में दबाव के तहत “बगैर किसी का नाम लिखे” एक रिपोर्ट दर्ज करवाई और 18.04.10 को 24 परगना जिले के एसपी के नाम भी ज्ञापन सौंपा। स्पोर्ट्स क्लब के सदस्यों ने लिखित में स्थानीय पंचायत के अध्यक्ष प्रेमचन्द बिस्वास (CPIM) और बैरकपुर नगरपालिका चेयरमैन बिजोली कान्ति मित्रा (CPIM) को भी इसकी रिपोर्ट दी, लेकिन न ही कुछ होना था, न ही हुआ।

http://www.indiaworldreport.com/archive/update24_04_10_kolkata_media.html

क्या आपने इस घटना की कोई खबर किसी राष्ट्रीय चैनल या अखबार में पढ़ी-देखी-सुनी? निश्चित रूप से नहीं। क्योंकि एक तो यह मामला वामपंथियों से जुड़ा हुआ है जो पश्चिम बंगाल के आगामी चुनाव में मुस्लिमों के वोट लेने के लिये “कुछ भी” (जी हाँ कुछ भी) करने-करवाने को तैयार बैठे हैं, और दिल्ली सहित कई क्षेत्रों में इनके जो “बौद्धिक गुर्गे” मीडिया में कब्जा जमाये बैठे हैं, वह ऐसी खबरों को सामने आने नहीं देते… अलबत्ता मौका लगने पर देशद्रोही चिल्लाचोट करने (जैसे JNU में नक्सल समर्थक मीटिंग) में आगे रहते हैं। मंगलोर के पब में प्रमोद मुतालिक के गुण्डों ने जो किया वह गलत था, उसकी मैं निंदा करता हूं, लेकिन उस घटना और इस घटना के मीडिया कवरेज का अन्तर ही “सेकुलरिज़्मयुक्त मीडिया(?)” का असली चरित्र उजागर करने के लिये काफ़ी है (मतलब ये कि गुजरात दंगों में हुई कुछ मौतों को जमकर लगातार उछालो, लेकिन कश्मीर से 3 लाख हिन्दुओं के जातीय सफ़ाये पर चुप रहो…)। रही बात मानवाधिकार और नारी संगठनों की तो वे भी उसी समय जागते हैं जब मामला अल्पसंख्यकों से जुड़ा हुआ हो (जैसे कि कश्मीर के स्वर्गीय रजनीश की पत्नी अमीना यूसुफ़ न तो नारी है, न ही मानव)।

जैसे-जैसे बंगाल का चुनाव नज़दीक आयेगा, तृणमूल, कांग्रेस और वाम दलों में मुस्लिमों को रिझाने का गंदा खेल अपने चरम पर पहुँचेगा (लेकिन यदि किसी ने हिन्दू वोटों को एकजुट करने की बात की, तो वह “साम्प्रदायिक” घोषित हो जायेंगे)

==============
चलते-चलते : वामपंथियों के “बौद्धिक पाखण्ड” का एक और उदाहरण देखते जाईये – केरल के अलप्पुझा जिले की माकपा केन्द्रीय समिति ने स्थानीय नेता के राघवन के खिलाफ़ अनुशासनहीनता की कार्रवाई की है, क्योंकि उन्होंने अपने पुत्र की “विद्यारम्भम” नामक धार्मिक क्रिया करवाई (बच्चे की औपचारिक शिक्षा प्रारम्भ किये जाने पर यह धार्मिक क्रिया की जाती है)। अलप्पुझा के माकपा प्रमुख थॉमस इसाक के अनुसार, राघवन ने हिन्दू धार्मिक क्रियाकलाप करके एक बड़ा अपराध किया है। इसी महान बौद्धिक पार्टी ने कन्नूर जिले में एक माकपा कार्यकर्ता को पार्टी से निकाल दिया था क्योंकि उसने गृहप्रवेश के दौरान गणेश पूजा कर ली थी। ये बात और है कि पार्टी के ही एक नेता टीके हम्ज़ा द्वारा हज यात्रा किये जाने पर, तथा पिनरई विजयन द्वारा खुलेआम मुरिन्गूर चर्च के “चंगाई” कार्यक्रमों की तारीफ़ के मामले में माकपा ने चुप्पी साध रखी है।

अर्थात साम्प्रदायिकता का मतलब सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दुत्व होता है, और “धर्म अफ़ीम है” का जो नारा बुलन्द किया जाता है वह सिर्फ़ हिन्दू धर्म के लिये होता है…। एक बात जरूर है कि पैसे और ज़मीन पर कब्जे के लिये उन्हें हिन्दू मठ-मन्दिर ही याद आते हैं, शायद इसीलिये आजीवन ये लोग केरल और बंगाल से बाहर नहीं निकल पाये और अब जल्दी ही ममता बैनर्जी द्वारा बंगाल की खाड़ी में फ़ेंक दिये जायेंगे।

Barrackpur Sports Complex Molestation, Muslim Youths Eve Teasing in Bengal, Communist Parties of India and Secularism, West Bengal Assembly Elections and Vote Bank Politics, Muslim Mob Mentality, Communalism and Hinduism, Kerala Communist Party, बैरकपुर स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स, मुसलमान लड़कों द्वारा बंगाल में छेड़छाड़ की घटनायें, वामपंथी पार्टियाँ और सेकुलरिज़्म, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और मुस्लिम वोट बैंक, साम्प्रदायिकता और हिन्दुत्व, केरल कम्युनिस्ट पार्टी, Blogging, Hindi Blogging, Hindi Blog and Hindi Typing, Hindi Blog History, Help for Hindi Blogging, Hindi Typing on Computers, Hindi Blog and Unicode

47 comments:

Bhavesh (भावेश ) said...

हर बार की तरह एक खोजी लेख लिखने पर आपको बधाई. हम सब जानते है कि मीडिया तो पूरी तरह बिका हुआ है. अफ़सोस ये है की न्याय, कानून और पुलिस भी जाति और धर्म के आधार पर काम करती है. मीडिया ने इस खबर को कही नहीं परोसा लेकिन पुलिस ने भी किस तरह से प्राथमिकी दर्ज की. दरसल जब तक लोग गलत को गलत कहना नहीं सीख पाएंगे और उस पर जात और धर्म का रंग लगा देंगे तब तक कही कुछ भी सही होने वाला नहीं. इंसानियत और मानवीय मूल्य शर्मसार हो कर पाताल से भी नीचे रसातल में गिरते जा रहे है.

संजय बेंगाणी said...

कहने को तो बहुत कुछ है, मगर @#$% फिलहाल इतना ही. आगे फिर से लिखता हूँ.

पी.सी.गोदियाल said...

मुझे याद आ रहा है कुछ साल पहले किसी ने बताया था कि बांग्लादेश सीमा पर पश्चिम बंगाल का एक इलाका ऐंसा है जहां आम आदमी तो दूर पुलिस वाले भी दिन में जाने से कतराते है ! दक्षिण दिनाजपुर के गांव में भारत-बांग्लादेश सीमा पर रेड ब्रिगेड की छत्र -छाया में फला-फूला यह अवैध बांग्लादेशीयों का ऐसा इलाका है, जहां बांग्लादेशी बड़े आराम से सीमा सुरक्षा बल की आँखों में धूल झोंक अपनी गर्भवती महिलाओं को भी प्रसव के लिए भारत की सीमा में मौजूद अस्पतालों में लाते है, ताकि नवजात को भारतीय नागरिक का प्रमाणपत्र मिल जाए !

फ़िरदौस ख़ान said...

बेहद शर्मनाक घटना है... ऐसा मुस्लिम लड़कियों के साथ भी होता है... जो लोग मुस्लिम इलाकों में रहते हैं... वो बखूबी इस सब से परिचित होंगे ही... हमारे कई परिचित मुसलमान ख़ुद मुस्लिम इलाकों में रहना पसंद नहीं करते... वजह... गंदगी और ऐसी ही घटनाएं...

जिन इलाकों में पढ़े-लिखे मुस्लिम हैं, वहां ऐसा कुछ नहीं होता...
इस सबकी वजह अनपढ़ता और 'ग़लत शिक्षा' का नतीजा है...

SANJEEV RANA said...

is jaankari ke liye dhanyawaad
kya kahe sala mahol hi khrab ho gya hain kuch chatukaaro ke karan

कहत कबीरा...सुन भई साधो said...

जिन्हें महिलाओं को 'खेती' समझने की शिक्षा मिली हो, उनसे आशा ही क्या की जा सकती है!!!

कहत कबीरा...सुन भई साधो said...

@फ़िरदौस ख़ान

बहन फ़िरदौस से सहमत!!!

kunwarji's said...

सुरेश जी ये आप क्या कह रहे हो!अपने आतंकवादी भाई साहब तो कह रहे थे कि भारतीय मिडिया मुसलमानों के खिलाफ है!सलीम भाई पढना और कुछ अमूल्य(मूल्यहीन नहीं) विचार यहाँ देना!



कुंवर जी,

Awadhesh Pandey said...

sochta hoon kee blog na hota, to shayad aisee ghatnayen hamare samne mushkil se hee atee. mujhe samajh nahi aata ki baki opposition kya kar raha tha.

संजय बेंगाणी said...

मुझे लगता है आप जल्दबाजी कर रहे है. अभी ऐसा कुछ नहीं हुआ जिस पर आपत्ति की जाए. ये सब सामन्य घटनाएं है. अभी जो होना बाकि है वह बता देता हूँ, मसलन लड़्कियों को छेड़ना भर नहीं उन्हे बुर्का पहनने पर मजबुर करना, खेलों से दूर रहने के लिए कहना और भुकंप के लिए उनके खुले-आम अभ्यास करने को जिम्मेदार ठहराना बाकि है. अभी शरीयत के कानून के हिसाब से खिलाड़ियों को सजा देने की माँग नहीं हुई, केवल उनके बिस्तर तक जाने की माँग हुई है. अतः अभी रूके....लगता है आप जहाँ की बात कर रहें है वहाँ मुस्लिम आबादी 35% तक नहीं पहूँची.

Amit said...

भारतीय मीडिया की हालत तो शोचनीय है ही

Amit said...

"जैसे-जैसे बंगाल का चुनाव नज़दीक आयेगा, तृणमूल, कांग्रेस और वाम दलों में मुस्लिमों को रिझाने का गंदा खेल अपने चरम पर पहुँचेगा"

पूर्ण सहमति

त्यागी said...

this is the part of big conspiracy of islamic terrorism. now hindu will start evacuate from this place just sake of peace and this will continue till then india become islamic state.

thanks sonia ji, Left friends. JNU insects and Media jockers for your kind support to make it happen.
best regards
parshuram27.blogspot.com/

Deepesh said...

फिरदोस जी
"ऐसा मुस्लिम लड़कियों के साथ भी होता है"
कोइ सबूत, रिपोर्ट, चित्र ...

man said...

कंहा छिप्पी रहती हे ऐसी गन्दी खबरे,,,श्रीमान को बहुत साधुवाद की वो इन की मानसिकता और भांड मिडिया की सचाई लोगो के सामने ला रहे हे ,पता ही नहीं इतने कितने भयानक कांड दबा दिए होंगे इन लाल गा??? के बंदरो ने ....?? बंगाल में एक और नयी मुसीबत हिंदुवो के लिए तरिन्मूल कांग्रेस पैदा कर रही हे .....बिछे जा रहे सभी मुस्लिम वोटो के लिए ...और कुछ भी बिछा सकते हे .....??? ये केवल बंगाल की ही नहीं पूरे रास्ट्र की दयनीय स्थिति हे जंहा पर मुस्लीम बाहुल्य हे ,,? एक ट्रक ड्राईवर की जबानी की सन20002 से पहले जब भी वो गुजरात जाता तो हाई वे अहमदाबाद की मुस्लीम बस्ती से निकलता था ...उस १५ किमी के हाई वे को पार करने में २ से ३ घंटे लग जाते थे ,,क्योकि कोई टेम्पो सड़क के बीच में खड़ा हे तो ..वो खड़ा ही रहता ..किसी की मजाल नहीं उसे हटने के लिए कह दे ..मर्डर हो जाते थे ...कोई मोहतरमा सड़क बीचक खडी हे तो खडी रहती थी मजाल कोई होर्न बजादे....लकिन दो हजार दो के दंगो में उसका ट्रक वंहा से निकला तो उसके ६ टायर खून से लाल हो गए थे ....ये स्तीथिया हे जंहा मुस्लिम बाहुल्य हे ....जयपुर के रामगंज में पोलिसे वाले वहां का चालान नहीं कट सकते ..घर में घूस के तलाशी लेना तो दूर ....बंगाल क्यों जाये यही ऐसे हालत हे ??केवेल वोट बैंक ?...बी.ज.प की रास्ट्रीय कार्य कारिणी के मेम्बर तेजेंदर पालसिंह की जबानी आप खुद ही पढ़ लीजिये http://www.orkut.co.in/Main#Album?uid=16569242369507261650&aid=1253803687......ab kya kahenegeअब जगह जगह मिनी पाक बन गए हे ....स्थिति बड़ी नाजुक हे ....भाई हे जो मानने के लिए तियार नहीं उल्टा सवारकर को अफगानिस्तान में जन्मा रहे ...एक भाई बाल ठाकरे कोगिलानी बनाने पे तूले हुवे हे.....बाकि सब ठीक हे वन्देमातरम जय श्री राम

man said...

http://www.orkut.co.in/Main#Album?uid=16569242369507261650&aid=1253803687 .....
tejendrapal singh bagaa...

HAR HAR MAHADEV said...

http://blogmaakalka.blogspot.com/
please see this blog

फ़िरदौस ख़ान said...

@Deepesh ...
मुस्लिम लड़कियों के स्कूलों पर बम फोड़े जाते हैं... क्या आप ख़बरें देखते या पढ़ते नहीं हैं...
हिन्दुस्तान में जिस तरह तालिबानी मानसिकता को बढ़ावा मिल रहा है... हो सकता है भविष्य में यहां भी लड़कियों के स्कूलों (मुस्लिम बहुल इलाक़ों में) पर भी बम फोड़े जाने लगें...

जहां तक सिर्फ़ छेड़खानी की बात है... यह हर जगह हैं... और पुरानी दिल्ली को लीजिये... लोग बुर्क़े वाली को भी नहीं छोड़ते... भले ही बुर्क़े के अन्दर उनकी मां की उम्र की औरत हो...

यह सब 'ग़लत' शिक्षा का 'असर' है... जब तक बच्चों को यह नहीं सिखाया जाएगा कि औरतें भी मर्दों की तरह ही 'इंसान' होती हैं... तब तक माहौल को बदलना आसान नहीं...

E-Guru Rajeev said...
This comment has been removed by the author.
E-Guru Rajeev said...

बेहद शर्मनाक घटना.
जितनी निंदा की जाय कम है.

Amit Sharma said...

मिडिया थोड़े ही है यह रंडीखाना बन गया है,जहां मिडियाकर्मी रूपी वेश्याये पैसे के इशारों पे नंगा नाच दिखा रहे है

सुलभ § सतरंगी said...

बंगलादेश से सटे होने के कारण बंगाल बिहार ओड़िसा में भी समस्या फैला जा रहा है.
सेकुलर(?) मीडिया और वोट बैंक की राजनीति दोनों को झेलता आज का हिन्दुस्तान

Manav said...

Boss, I am not with Indian Media but would like to put up an another view. Usually muslims and trible cristians which comprises about 15% of Indian population usually never took any intrest in media news, and therefore looking at jurnalism as a business, they have to generate the news which is sellable, and thus all the news usually represent majority of the population.
Hardcore muslims have started brainwashing literate muslims but I feel education is the only solution, rather then blaming them.
Media gives the news which people can talk about, and react in a non violent manner. If they talk about muslim issue which is not against shariyat, they shall be killed as per law of Kuran.

Ratan Singh Shekhawat said...

बेहद शर्मनाक घटना.
जितनी निंदा की जाय कम है

Ratan Singh Shekhawat said...

इन शर्मनाक घटनाओं के जिम्मेदार ये छद्म धर्मनिरपेक्ष राजनैतिक दल है |
वामपंथी तो दोगले है |

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

फिरदौस से सहमत... यह कहना चाहता हूं कि इन लोगों को मजहब के नाम पर इस सब करने के लिये आगे बढ़ाया जा रहा है और राजनीतिक आका उन्हें बचा रहे हैं. हिन्दू मदहोश हैं, जिस दिन अपने वोट की कीमत लेना सीख लेंगे, सब ठीक हो जायेगा, लेकिन जब तक वह दिन आयेगा, हाथ से समय फिसल चुका होगा..

सौरभ आत्रेय said...

आप अनेक बार मिडिया के कुकर्मों और कुचरित्र को पाठकों के सामने रख चुके हैं, यह क्रम लगातार जारी है और आगे भी रहेगा किन्तु ये लोग ऐसा दुस्साहस बार-२ करते रहेंगे ये भी सभी जानते हैं. इसीलिए सभी पाठकों से निवेदन है कि वे इस तरह के समाचारों, मीडिया के राष्ट्रघाती प्रचार को किसी पत्रिका, समाचार पत्र, ईमेल इत्यादि के माध्यम से जन-२ तक पहुंचाने का प्रयास करें ताकि न केवल इस ब्लॉग के पाठक वरन इन्टरनेट से दूर रहने वाली जनता भी इसको अधिक से अधिक जान सके. हो सकता है धीरे-२ ही सही क्या पता किसी दिन इस राष्ट्र के लोगो की तन्द्रा अपनी बची-कुची इज्जत लुटने से पहले भंग हो ही जाये.

awyaleek said...

बस यही कहूँगा कि खून खौल जाता है.अभी तक तो गुजरात वाला दंगा पर मुझे मुसलमानॊं पर दया ही आता था और लगता था कि जो भी बहुत गलत हुआ पर नहीं बिल्कुल ठीक हुआ था.ये लोग इसी के लायक हैं.जब से मुस्लिमों ने भारत में कदम रखा है तब से हिन्दु बस अपनी प्राणों की आहुति ही दे रहे हैं लेकिन उसका परिणाम क्या निकला.कुछ भी नहीं.अपने आपको बापू और महात्मा कहलाने वाले सिर्फ़ उस गद्दार ने ही कोरोडो़ हिन्दुओं की बलि चढा़ दी मुसल्मानों को सुधारने के लिये लेकिन क्या हुआ...?ये लोग सिर्फ़ भारत के दुश्मन हैं और कुछ नहीं.मुसलमान का मतलब ही है भारत का दुश्मन..और जिन लोगों की ये गलतफ़हमी में जी रहे हैं या मुसल्मानों के अनपढ़ होने का बहाना बना रहे हैं उन्हें बता देता हूँ कि मुसलमानों के पढे़-लिखॆ होने से कोइ फ़र्क नही पड़ता क्योंकि उन्हें कुरान के अलावा और खून_खराबे और हिन्दुओं को सताने के अलावा और कोइ बात समझ में ही नहीं आती.

awyaleek said...

मैं जब दशवीं कक्षा में पढ़ रहा था उसी समय मेरे एक मुसलमान दोस्त ने एक दिन बिना किसी बात के ही अपने दिल की अब भडा़स निकाल ली और खुले आम कहने लगा कि कश्मीर पाकिस्तान का अंग है उसे पाकिस्तान को दे देना चाहिये.भारत कमीना है जो उसे अबतक अपने पास रखा है.उस समय तक मैंने ये कल्पना भी नहीं की थी कि भारत का कोइ भी नागरिक इस तरह की बातें सोच भी सकता है.वो लड़का पढ़ने में भी अच्छा था.दूसरा या तिसरा स्थान पर रहता था अपने कक्ष में.उसे मैं बहुत ही समझदार समझता था और उससे इस तरह के किसी काम की आशा नहीं की थी.उस समय से मुझे शंका होना शुरू हुआ और सुरेश भैया का लेख पढ-पढ़ कर विश्वास हो गया कि भारत के लगभग मुसलमान भारत के, हिन्दुओं के,और इन्सानियत के दुश्मन हैं.इनके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिये जैसा किसी विषैला साँप के साथ या सीमा-पार के दुश्मनों के साथ किया जाता है..,

awyaleek said...

एक और उदाहरण देना चाहूँगा-ये बात ६ठी या ७वीं वर्ग की है जब एक मुसलमान शिक्षक जो जीव विग्यान से स्नातक थे,कक्षा में पढा़ रहे थे तभी उनकी नजर एक छिपकली पर पडी़ (गिरगिट नहीं छिपकली) और ब्लैक-बोर्ड को साफ़ करने वाले डस्टर से उन्होंने उस छिपकली को मार दिया.डस्टर खून से लथपथ हो गया.ये हृदय-विदारक घटना लड़किय़ों से सहा नहीं गया.उनलोगों के आँख से आँसू निकल पडे..भरी क्लास में ही रोना सुरू कर दिया था उनलोगों ने..
मेरा दावा है कि भारत की शिक्षा में उतना दम नहीं कि वो मुसलमान की मानसिकता को जरा सा हिला भी पाये....अगर कोई मुसलमान के अनपढ़ होने की बात करता है तो ये सिर्फ़ शुतुर्मुर्ग के शिकारी को देखकर अपना सर बालू में छिपाकर शिकारी से बचने वाली बात है और कुछ नहीं..

anna said...

bhout sochniya sthiti hai..
aapko aisi khabar khoojne ke lie saadhuwaad...

Chandan said...

Channels like Aaj tak .. yestday it was showing .. sher aur zebra ki ladai..on prime time,, and india TV ke to kahane hi kya..

HAR HAR MAHADEV said...

please see this blog

HAR HAR MAHADEV said...

http://blogmaakalka.blogspot.com/2010/04/blog-post_30.html......please see this blog

ab inconvenienti said...

मीडिया से छन कर ख़बरें आ रही हैं की माधुरी गुप्ता ने छह साल पहले इस्लाम कुबूल कर लिया था. वह शिया मत की अनुयाई थी.

http://www.ndtv.com/news/india/did-madhuri-gupta-diplomat-spy-convert-to-islam-21873.php

http://www.indianexpress.com/news/madhuri-gupta-may-have-embraced-islam-report/613039/

Dikshit Ajay K said...

गाँधी और नेहरु की लगाईं विष बेल को सोनिया अपने काग्रेसी गुर्गों की मदद से हिन्दुओं के खून से सींच रही है. सिर्फ वक्त की बात हमारा तिरंगा, तिरंगे से दुरंगा (हरा - मुस्लिम, सफ़ेद - इटली/इसाइयत का प्रतिक) रह जाय तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी. जय हो

nitin tyagi said...

Indian media sucks

sunil patel said...

यह घटना वाकइ बड़ी शर्मनाक है।

Pratik Jain said...

बहुत ही अच्छा लेख। ऐसे विषयों को उठाने के लिये आपको धन्यवाद।

psudo said...

Compare this with what happen in mangalore in 2009, where whole media showed , ramsene..assaulting pub. So the thumb rule in indian media is ignore something done by Muslims and cristans and highlight even small things done by hinds.

Mahak said...

ऐसे लोगों को नंगा करके पीटना चाहिए और इनकी खाल उधेड़ देनी चाहिए .
सुरेश जी इस खबर को तथ्यों सहित रखने के लिए आपको बहुत-२ धन्यवाद एवं साधुवाद

महक

जीत भार्गव said...

यह तो सिर्फ एक नमूना है. ऐसी कई घटनाए होती हैं जो मीडिया दबा देता है. सेकुलर नेतागिरी के तो अपने स्वार्थ होते हैं. लेकिन मीडिया निष्पक्ष होने के बजाय पक्षपाती हो जाए तो समझो बड़ा गर्क ही है.
-क्या मीडिया के आर्थिक संसाधनों-स्त्रोतों की तहकीकात नहीं होनी चाहिए? खासकर न्यूज चैनलों की और अंगरेजी अखबारों की ?
-क्या मीडिया को मोनिटर करने वाली संस्थाओं के समक्ष इस पक्षपाती रवैये को नहीं रखा जा सकता?
-जरूरत इस बात की है की आम लोगों को इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा बताया जाए.
-मीडिया की एक ताकत विज्ञापन राजस्व होता है. क्यों ना इस सेकुलर मीडिया को विज्ञापन देने वाले ब्रांडो को हिन्दू ग्राहक पंचायत और संगठन बाकायदा इसके बारे में बताये और जरूरत पड़ने पर चैनल और ब्रांड के बहिष्कार की धमकी दे.
-क्यों ना हिन्दुओं का पक्ष रखने वाला कोई दैनिक अखबार, न्यूज चैनल हो?
ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर हमें विचार करके बेलगाम और बेशर्म मीडिया को अपनी औकात बतानी होगी.

Ganesh Prasad said...

सुरेश जी, उस दिन प्रमुख न्यूज़ चानेल पे तो दरअसल कुछ गंभीर मसले पे बात हो रही थी मसलन,

१.) पहली बार देखिये कार को हवा में उड़ते हुए
२.) आज टीवी पर होगी लाइव डकैती
३.) ड्रीम गर्ल & ड्रीम बॉय
४.) सुनसान रास्ता और घना जंगल इत्यादि इत्यादि

जयराम “विप्लव” { jayram"viplav" } said...

ब्लॉग पर सक्रीय चंद बेअक्ल तथाकथित मुसलमान , तथाकथित इसलिए कि वो इस्लाम के मुताबिक मुसलमान नहीं है खुद जामिया मिल्लिया इस्लामिया जैसे संस्थान के इस्लामिक विद्वान इन जाकिर नायक के चेलों और इनके गुरु को सच्चा मुसलमान मानने से इनकार करते हैं . वो ऐसे किसी भी आदमी को काफिर समझते हैं जो अवतारवाद में यकीन रखता है और मुहम्मद साहब को कल्कि अवतार बताता है . अब , ये लोग पहले आपस में मशविरा करके आम राय कायम करें फ़िर ऐसे किसी सिद्धांत को ब्लॉग में फैलाएं . वैसे इससे जनता को कोई लेना-देना नहीं है . जनता अमन -चैन से अपने अपने भगवान, अपने खुदा के साथ खुश है . उनको भूखे पेट धर्म पर बहस करने की जरुरत और फुरसत दोनों नहीं है . अच्छा होगा यदि ये स्वघोषित धर्मगुरु अपने समाज में व्याप्त बेकारी, गरीबी , अशिक्षा आदि को दूर करें ताकि संसद में धर्म के आधार पर संख्या के आधार पर इनको आरक्षण की भीख ना मांगनी पड़े !
--

vedvyathit said...

kya aas paas hindoo bsti nhi hai ?in gundon ko sbk sikhne ke liye kb tk pitoge

Ankit.....................the real scholar said...

yahi to hai sachchha islaam ................islaam me jehaad ke liye balatkar karna anivaary hai kyun kee isse kafiron ke man me islaam kee dhak jam jaatee hai

Raj said...

pehli baat ye lato ke bhut hy or dusra ki ye bolywod or ad jo aati hy jyadatar usme ek hi angel hota hy kese ladki patao,jese koi spray chhto ladki pechhy padjaye gi ye film me sharuk ya salman sirf ladki pata hy par kabhi dekha ye kisi ko sister banty hy,ye velintinday bhi kuchh es hi hy-http://youtu.be/puRfBFLzRL4