Wednesday, March 31, 2010

नरेन्द्र मोदी के नाम से अब पूरी कॉंग्रेस “फ़्रस्ट्रेशन” का शिकार होने लगी है… … Narendra Modi, Congress Frustration, SIT, Gujrat Riots

वैसे तो “फ़टे हुए मुँह” वाले (बड़बोले) कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी किसी वक्तृत्व कला के लिये नहीं जाने जाते हैं, न ही उनसे कोई उम्मीद की जाती है कि तिवारी जी कोई “Sensible” (अक्लमंदी की) बात करेंगे (बल्कि अधिकतर कांग्रेस प्रवक्ता लगभग इसी श्रेणी के हैं चाहे वे सत्यव्रत चतुर्वेदी जैसे वरिष्ठ ही क्यों न हों), लेकिन कल (29/03/10) को टीवी पर नरेन्द्र मोदी सम्बन्धी बयान देते वक्त साफ़-साफ़ लग रहा था कि मनीष तिवारी सहित पूरी की पूरी कॉंग्रेस “Frustration” (हताशा) की शिकार हो गई है। जिस अभद्र भाषा का इस्तेमाल मनीष तिवारी ने एक प्रदेश के तीन-तीन बार संवैधानिक रुप से चुने गये मुख्यमंत्री के खिलाफ़ उपयोग की उसे सिर्फ़ निंदनीय कहना सही नहीं है, बल्कि ऐसी भाषा एक “घृणित परम्परा” की शुरुआत मानी जा सकती है।

अवसर था पत्रकार वार्ता का, जिसमें एक पत्रकार ने नरेन्द्र मोदी के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की एक मंच पर उपस्थिति के बारे में पूछ लिया। पत्रकार तो कभीकभार “छेड़ने” के लिये, या कभीकभार अपनी “कान्वेंटी अज्ञानता” की वजह से ऐसे सवाल पूछ लेते हैं लेकिन मनीष तिवारी एक राष्ट्रीय पार्टी (जो अभी तक स्वाधीनता संग्राम और गाँधी के नाम की रोटी खा रही है) के प्रवक्ता हैं, कम से कम उन्हें अपनी भाषा पर सन्तुलन रखना चाहिये था…।

उनका बयान गौर फ़रमाईये – “जब राज्य का मुख्यमंत्री खुद ही इतना “बेशरम” हो कि जिस मंच पर मुख्य न्यायाधीश विराजमान हों, उनके पास जाकर बैठ जाये, जिस आदमी को कल ही SIT ने पेशी के लिये बुलाया था, वह कैसे उस मंच पर बैठ “गया”। यह बात तो “उसे” सोचना चाहिये थी, यदि भाजपा में जरा भी शर्म बची हो तो वह उसे तुरन्त हटाये…” आदि-आदि-आदि-आदि और नरेन्द्र मोदी की तुलना दाऊद इब्राहीम से भी।

उल्लेखनीय है कि नरेन्द्र मोदी को अभी सिर्फ़ SIT ने पूछताछ के लिये बुलाया है, न तो नरेन्द्र मोदी पर कोई FIR दर्ज की गई है, न कोई मामला दर्ज हुआ है, न न्यायालय का समन प्राप्त हुआ। दोषी साबित होना तो दूर, अभी मुकदमे का ही अता-पता नहीं है, फ़िर ऐसे में गुजरात विधि विश्वविद्यालय के दीक्षान्त समारोह में एक चुना हुआ मुख्यमंत्री उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के साथ मंच साझा करता है तो इसमें कौन सा गुनाह हो गया? उसके बावजूद एक संवैधानिक पद पर आसीन मुख्यमंत्री के लिये “बैठ गया” (गये), “उसे” (उन्हें), “वह” (वे) जैसी “तू-तड़ाक” की भाषा और “बेशर्म” का सम्बोधन? पहले मनीष तिवारी खुद बतायें कि उनकी क्या औकात है? नरेन्द्र मोदी की तरह तीन बार मुख्यमंत्री बनने के लिये मनीष तिवारी को पच्चीस-तीस जन्म लेने पड़ेंगे (फ़िर भी शायद न बन पायें)। लेकिन चूंकि “मैडम” को नरेन्द्र मोदी पसन्द नहीं हैं इसलिये उनके साथ “अछूत” सा व्यवहार किया जायेगा, चूंकि “मैडम” को अमिताभ बच्चन पसन्द नहीं हैं इसलिये अभिषेक बच्चन के साथ भी दुर्व्यवहार किया जायेगा, चूंकि मैडम को मायावती जब-तब हड़का देती हैं इसलिये कभी मूर्तियों को लेकर तो कभी माला को लेकर उन्हें निशाने पर लिया जायेगा (भले एक ही परिवार की समाधियों ने दिल्ली में हजारों एकड़ पर कब्जा कर रखा हो), यह “चाटुकारिता और छूआछूत” की एक नई राजनैतिक परम्परा शुरु की जा रही है।

इस सम्बन्ध में कई प्रश्न खड़े होते हैं कि जब लालू और शिबू सोरेन जैसे बाकायदा मुकदमा चले हुए और सजा पाये हुए लोग सोनिया के पास खड़े होकर दाँत निपोर सकते हैं, सुखराम और शहाबुद्दीन जैसे लोग संसद में कांग्रेसियों के गले में बाँहे डाले बतिया सकते हैं, तो नरेन्द्र मोदी के ऊपर तो अभी FIR तक नहीं हुई है, लेकिन चूंकि मैडम को साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा है कि उनके “भोंदू युवराज” की राह में सबसे बड़े रोड़े नरेन्द्र मोदी, मायावती जैसे कद्दावर नेता हैं। ये लोग भूल जाते हैं कि चाहे मोदी हों या मायावती, सभी जनता द्वारा चुने गये संवैधानिक पदों पर आसीन मुख्यमंत्री हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ ही क्या, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के साथ भी मंच पर आयेंगे (यदि वे उनके राज्य के दौरे पर आये तो)।

भाजपा-संघ के किसी अन्य नेता के साथ इस प्रकार का व्यवहार अभी तक नहीं हुआ है, इसी से पता चलता है कि नरेन्द्र मोदी, भाजपा के नेताओं से काफ़ी ऊपर और लोकप्रिय हैं, तथा इसीलिये उनके नाम से कांग्रेस को मिर्ची भी ज्यादा लगती है, परन्तु जिस प्रकार की “राजनैतिक अस्पृश्यता” का प्रदर्शन कांग्रेस, नरेन्द्र मोदी और बच्चन के साथ कर रही है वह बेहद भौण्डापन है।

एक बार पहले भी जब आडवाणी देश के गृहमंत्री पद पर आसीन थे (वह भी जनता द्वारा चुनी हुई सरकार ही थी), तब भी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने उन्हें “बर्बर” कहा था, ऐसी तो इन लोगों की मानसिकता और संस्कृति है, और यही लोग भाजपा को हमेशा संस्कृति और आचरण के बारे में उपदेश देते रहते हैं… जबकि भाजपा ने कभी नहीं कहा कि सिख दंगों में “बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है…” जैसे बयान देने वाले राजीव गाँधी के साथ मंच शेयर नहीं करेंगे। क्या कभी भाजपा ने यह कहा कि चूंकि सुधाकरराव नाईक 1993 के मुम्बई दंगों के समय मूक दर्शक बने बैठे रहे इसलिये, शरद पवार “शकर माफ़िया” हैं इसलिये, भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ज़मीन माफ़िया हैं इसलिये, सज्जन कुमार सिक्खों के हत्यारे हैं इसलिये, इनके खिलाफ़ अनाप-शनाप भाषा का उपयोग करेंगे? इनके साथ मंच शेयर नहीं करेंगे? कभी नहीं कहा। लेकिन नरेन्द्र मोदी के नाम के साथ “मुस्लिम वोट बैंक” जुड़ा हुआ है इसलिये उनका अपमान करना कांग्रेस अपना जन्मसिद्ध अधिकार मानती है। भारत के किसी राज्य की जनता द्वारा चुने हुए मुख्यमंत्री को अमेरिका वीज़ा नहीं देता लेकिन कांग्रेस के मुँह से बोल तक नहीं फ़ूटता, क्योंकि तब वह “देश का अपमान” न होकर “हिन्दुत्व का अपमान” होता है… जिसमें उन्हें खुशी मिलती है।

अंग्रेजी के चार शब्द हैं - Provocation, Irritation, Aggravation और Frustration. (अर्थात उकसाना, जलाना, गम्भीर करना और कुण्ठाग्रस्त करना) । अक्सर मनोविज्ञान के छात्रों से यह सवाल पूछा जाता है कि इन शब्दों का आपस में क्या सम्बन्ध है, तथा इन चारों शब्दों की सीरिज बनाकर उसे उदाहरण सहित स्पष्ट करो…।

इसे मोटे तौर पर समझने के लिये एक काल्पनिक फ़ोन वार्ता पढ़िये –

(नरेन्द्र मोदी भारत के लोहा व्यापारी हैं, जबकि आसिफ़ अली ज़रदारी पाकिस्तान के लोहे के व्यापारी हैं)
फ़ोन की घण्टी बजती है –
नरेन्द्र मोदी – क्यों बे जरदारी, सरिया है क्या?
जरदारी – हाँ है…
मोदी – मुँह में डाल ले… (फ़ोन कट…)

इसे कहते हैं Provocation करना…

अगले दिन फ़िर फ़ोन बजता है –
नरेन्द्र मोदी – क्यों बे जरदारी, सरिया है क्या?
जरदारी (स्मार्ट बनने की कोशिश) – सरिया नहीं है…
मोदी – क्यों, मुँह में डाल लिया क्या? (फ़िर फ़ोन कट…)

इसे कहते हैं, “Irritation” में डालना…

अगले दिन फ़िर फ़ोन बजता है –
नरेन्द्र भाई – क्यों बे जरदारी, सरिया है क्या?
जरदारी (ओवर स्मार्ट बनने की कोशिश) – अबे साले, सरिया है भी और नहीं भी…
नरेन्द्र भाई – अच्छा, यानी कि बार-बार उसे मुँह में डालकर निकाल रहा है? (फ़ोन कट…)

इसे कहते हैं Aggravation में डालना…

अगले दिन जरदारी, मोदी से बदला लेने की सोचता है… खुद ही फ़ोन करता है…
जरदारी – क्यों बे मोदी, सरिया है क्या?
नरेन्द्र मोदी – अबे मुँह में दो-दो सरिये डालेगा क्या? (फ़ोन कट…)

इसे कहते हैं Frustration पैदा कर देना…

इसी “साइकियाट्रिक मैनेजमेण्ट” की भाषा में कहा जाये तो मोदी ने अमिताभ को गुजरात का ब्राण्ड एम्बेसेडर बनाकर कांग्रेस को पहले “Provocation” दिया, फ़िर SIT के समक्ष “भाण्ड मीडिया की मनमानी” से तय हुई 21 तारीख की बजाय, 27 को मुस्कराते हुए पेश होकर कांग्रेस को “Irritation” दिया, फ़िर अमिताभ के साथ हुए व्यवहार की तुलना में, कांग्रेसियों को तालिबानी कहकर “Aggravation mode” में डाल दिया, और अगले ही दिन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के साथ एक मंच पर आकर मोदी ने कांग्रेस को “Frustration” भी दे दिया…। मनीष तिवारी की असभ्य भाषा उसी Frustration का शानदार उदाहरण है… इसलिये अपने परम विरोधी के बारे आदरणीय शब्दों में बयान देने की क्लास अटेण्ड करने के लिये मनीष तिवारी को अमर सिंह के पास भेजा जाना चाहिये।
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चलते-चलते :- पुराना हैदराबाद दंगों की आग में जल रहा है, लगभग 20 मन्दिर तोड़े जा चुके हैं और एक जैन गौशाला को आग लगाकर कई गायों को आग के हवाले किया गया है, दूसरी तरफ़ देश की एकमात्र "त्यागमूर्ति" ने लाभ के पद से इस्तीफ़ा देने का नाटक करने के बाद अब पुनः "राष्ट्रीय सलाहकार परिषद" का गठन कर लिया है और उसके अध्यक्ष पद पर काबिज हो गईं हैं… क्या यह दोनों खबरें किसी कथित नेशनल चैनल या अंग्रेजी अखबार में देखी-सुनी-पढ़ी हैं? निश्चित रूप से नहीं, क्योंकि "त्याग की देवी" की न तो आलोचना की जा सकती है, न उनसे सवाल-जवाब करने की किसी पत्रकार की हैसियत है…। इसी प्रकार चाहे बरेली हो, रायबरेली हो, इडुक्की हो या हैदराबाद सभी दंगों की खबरें "सेंसर" कर दी जायेंगी…आखिर "गंगा-जमनी" संस्कृति का सवाल है भई!!! 6M आधारित टीवी-अखबार वालों को हिदायत है कि सारी खबरें छोड़कर भाजपा-संघ-हिन्दुत्व-मोदी को गरियाओ…। जिन लोगों को यह "साजिश" नहीं दिखाई दे रही, वे या तो मूर्ख हैं या खुद भी इसमें शामिल हैं…

बहरहाल, अब तो यही एकमात्र इच्छा है कि किसी दिन नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लें, और मैं उस दिन टीवी पर मनीष तिवारी, सीताराम येचुरी, प्रकाश करात, सोनिया गाँधी आदि का “सड़े हुए कद्दू” जैसा मुँह देखूं… और उनके जले-फ़ुँके हुए बयान सुनूं…


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49 comments:

संजय बेंगाणी said...

तिवारी को नहीं मालुम मोदी तो केवल सीट के सामने प्रस्तुत हुए थे, इन्दीरा गाँधी को तो अदालत से लताड़ भी पड़ी थी, मुकलमा चला तो और चुनाव अवैध घोषित हुआ था और बेशर्मी से पद त्यागने की जगह आपातकाल लगाया था. तानाशाही व परिवारवाद में रचे बसे लोग लोगतंत्र की दुहाई पता नहीं किस मूँह से दे रहे है.

संजय बेंगाणी said...

मुकलमा चला तो और चुनाव अवैध घोषित हुआ था = मुकदमा चला था अय्र चुनाव अवैध घोषित हुआ था.

Pak Hindustani said...

मनीष तिवारी जैसा छिछला इन्सान कांग्रेस जैसी पार्टी के लिये सही प्रवक्ता है, यह समय-समय पर कांग्रेस का सही स्तर जाहिर करता रहता है, अभी भी यह बेशर्म और जाहिल किस्म की बातें जो यह कर रहा है उसमें इसके दिमाग का घटियापन साफ दिख रहा है

हम तो बस यही कह सकते हैं कि

इस तरह के @#$%‍ लोगों के साथ @#$% किस्म का व्यवहार ही करना चाहिये

पी.सी.गोदियाल said...

इस बात पर गुजरात के लोगो को लताड़ना चाहिए ! सिर्फ वोट देकर ही अपनी खुशी अथवा रोष व्यक्त नहीं किया जा सकता ! कौंग्रेस इतने समय से लगातार गुजरात के लोगों की बेइज्जती कर रही है ! मुख्यमंत्री को इस तरह गाली देना मतलब जनता को गाली देना!उसे गुजरात के लोगो की प्रगति से इर्ष्या है ! जिसे वह पचा नहीं पा रही है ! ऐसा न होता तो अमिताव बच्चन प्रकरण नहीं होता ! वे एक आम नागरिक है और उन्हें पूरा हक़ है कि क्या सही है और क्या गलत इसका निर्णय करने का ! तो यदि गुजरात के लोगो को अपने स्वाभिमान की ज़रा भी फिक्र है तो उन्हें दिल्ली तक इस बात का पुरजोर विरोध करना चाहिए, जो उन्होंने अब तक नहीं किया !

दिवाकर मणि said...

बिल्कुल सही कहा आपने. मादाम सोनिया माइनो के बकैतों की बकैती सुनकर ही पता चल जाता है कि आज की कांग्रेस पार्टी कितनी नीचे गिर चुकी है। अब तो यह लगता ही नहीं कि यह वही पार्टी है जिसने देश की आजादी में अमूल्य योगदान दिया था। यह पार्टी वर्तमान में एक विदेशी औरत व उसके भोंदू युवराज (जिनकी एकमात्र योग्यता किसी गांधी (महात्मा गांधी नहीं) खानदान से होना है) के तलुओं को चाटने वाले भांडों की जमात बन चुकी है।

Amit said...

मनीष तिवारियों जैसों के साथ प्राब्लम ये है कि अपनी स्वामिभक्ति दिखाने के लिये इन्हें सिर्फ पूंछ हिलाना ही नहीं, दूसरों पर भोंकना भी पड़ता है, लगातार तेजी से भौकने रहना पड़ता है.

इसके पिता विश्वनाथ तिवारी भले आदमी थे, लेकिन ये तो बचपन से ही बड़ा स्वार्थी था, ना़ज़नीन से शादी के बाद तो भोंकने और काटने की बीमारी बहुत बढ़ गई है.

अन्तर सोहिल said...

पहले मनीष तिवारी खुद बतायें कि उनकी क्या औकात है? नरेन्द्र मोदी की तरह तीन बार मुख्यमंत्री बनने के लिये मनीष तिवारी को पच्चीस-तीस जन्म लेने पड़ेंगे (फ़िर भी शायद न बन पायें)
सही कहा
किसी दिन नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लें.
यही इच्छा तो सभी हिन्दुओं की है, मगर अडवानी भी तो अडे रहते हैं।

प्रणाम स्वीकार करें

मिहिरभोज said...

अमिताभ बच्चन और नरेंद्र मोदी दोनों ही प्रकरण मैं कांग्रेस की बोखलाहट देखने लायक है....ये सही है कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ इनके अनर्गल बयान देकर कांग्रेस अपनी फ्रस्टेशन ही दिखा रही है....याने दो दो सरिये मुंह मैं लेकर बोल रही है

नवीन त्यागी said...

सुरेश जी इन कोंग्रेसियो को शर्म आनी चाहिए .१९८४ में इंदिरा की हत्या के बाद राजीव गाँधी के शब्द थे की,"जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो जमीन हिलती ही है'.और उसके इन शब्दों के बाद कोंग्रेसी गुंडों ने देश भर में कई हजार सिख भाइयों का क़त्ल किया था. और आज कोंग्रेस उन सबको क्लीन चीट देने पर लगी हुई है. कोंग्रेस के किसी भी कार्यकर्त्ता ने राजीव के उन शब्दों को कभी गलत नहीं बताया .और बताते भी क्यों आखिर मरने वाले मुसलमान थोड़े ही थे.

SUKRITISOFT said...
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psudo said...

Is there any one more shameless than our current prime minsiter , who is working day in and out for US? And they are telling Modi. Liten to Ramdeve Ji speech where he shows the present govt its place.

नवीन त्यागी said...

असल में एक बात और है की कोंग्रेस को पता है की भाजपा ने यदि अगले चुनाव में नरेंद्र मोदी को प्रधान मंत्री के रूप में प्रस्तुत कर दिया तो उसकी क्या गत होगी. इसलिए मोदी के विरूद्ध माहोल बनाकर मुसलमानों को कांग्रेस के पक्स में करने की एक मुहीम छेड़ी हुई है. आम शब्दों में कांग्रेस की मोदी से ........समझदार को इशारा काफी है

Awadhesh Pandey said...

Ultimate. Bas aapka blog jan jan tak pahuchana chahiye.

सुलभ § सतरंगी said...

किसी भी लोकतांत्रिक देश में ऐसी ओछी हरकतें नहीं हुई होंगी. तानाशाही कैसे होती है... पीछे देखा है... अब FRUSTRATION देखिये.

Bhavesh (भावेश ) said...

वरिष्ट पत्रकार, श्री एस एन विनोद जी अपने ब्लॉग में लिखते है कि "सवा सौ आबादी वाला भारत देश आखिर कब तक मुट्ठी भर ऐसे अल्पज्ञानी नेताओं के तमाचे सहता रहेगा। इन्हें जवाब दिया जाना चाहिए।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी 8 वर्ष पूर्व के गुजरात दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसएईटी) के समझ उपस्थित क्या हुए कि नेताओं ने नैतिकता का झंडा ले ज्ञान बखारना शुरु कर दिया। कांग्रेस की ओर चुनौती दी गई कि यदि बीजेपी में जरा भी नौतिकता होती तो वह ऐसे उच्च पद को बदनाम किए जाने से पहले मोदी से पद से हटने को कहती। जांच टीम के समक्ष मोदी के पेश होने से संवैधनिक मुख्यमंत्री का पद बदनाम हुआ है। यह भी कहा गया कि जनता की नजर में मोदी दोषी हैं। दरअसल मोदी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। उन्हें तो एक पीडि़त की शिकायत पर जांच दल ने पूछताछ के लिए बुलाया था।
अब कोई कांग्रेस से यह पूछे कि इंदिरा गांधी तो प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए अदालत में हाजिर हुईं और मुकदमा हार भी चुकीं थीं। इसके बावजूद उन्होंने पद से इस्तीफा देना तो दूर, सत्ता में बने रहने के लिए देश को आपातकाल के हवाले कर दिया था। आम जनता से उनके मौलिक अधिकार छीन उसे न्याय से भी दूर कर दिया था।
आज के नीता जैसे माया, लल्लू, मुल्लू सब कांग्रेस के कमीनेपन के नतीजे है. इन्होने जब देखा की नंगेपान से देश पर राज किया जा सकता है तो इन्होने नंगो की फ़ौज बनाई और बैठ गए संसद में. ये तिवारी भी इसी खेत कि उपज है.

पी.सी.गोदियाल said...

"psudo said...
Is there any one more shameless than our current prime minsiter , who is working day in and out for US?"

This has been the biggest tragedy of this century that country got people like MMS.

vedvyathit said...

yh to kangres ki rivayt h tatha godhra me mre gye hinduon ko bhulne ka kam hai aaj jo hindu vhan jlaye gye hain un ki koi bat nhi kr rha kaise ghtiya log hain ye
inhe to bhgvan bhi sdbudhi nhi de skta hai
dr. ved vyathit

EJAZ AHMAD IDREESI said...

पगला गए हो का सुरेश तुम, लगता है अतिवाद के शिकार हुई गएन हो. कौनो बात नहीं है, अब हमहूँ आई गईं हैं, आजमगढ़ के परोसी जिल्ला के निवासी है हम. अब हिन् तो शुरुआत है बाद में बतईबा.

anna said...

aaka joke accha tha ... and ... usko accha convert kia .. per iska asli version(:P) hi hona chahiye in logo ke lie...

नवीन त्यागी said...

कुछ हरामियों को ब्लॉग पर धमकी देने की आदत पड़ गई है. पता है कभी सामना तो होगा नहीं.उसमे एक नंगा और शामिल हो गया है इजाज अहमद
मेरे ख्याल से इसने दो गधों को नंगा नहीं देखा है.

त्यागी said...

This time you have written in very different manner but really good substance and good language with twist of good humor.
really appriceated the way you show the status to congress.
good good.
Tyagi
http://parshuram27.blogspot.com/

Bharat Swabhimaan Manch said...

नवीन जी आपको अपनी लाइन पूरी करनी चाहिए.ha ha ha ha haaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa. आप का कहना बिलकुल ठीक है नरेंद्र मोदी का विरोध करके कोंग्रेस अपने आगामी चुनाव के लिए मुसलमानों की वोट एकत्र कर रही है.

nitin tyagi said...

@अब तो यही एकमात्र इच्छा है कि किसी दिन नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लें, और मैं उस दिन टीवी पर मनीष तिवारी, सीताराम येचुरी, प्रकाश करात, सोनिया गाँधी आदि का “सड़े हुए कद्दू” जैसा मुँह देखूं… और उनके जले-फ़ुँके हुए बयान सुनूं…

kya baat kahi hai maza aa gaya

Dhananjay said...

अब तो यही एकमात्र इच्छा है कि किसी दिन नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लें, और मैं उस दिन टीवी पर मनीष तिवारी, सीताराम येचुरी, प्रकाश करात, सोनिया गाँधी आदि का “सड़े हुए कद्दू” जैसा मुँह देखूं… और उनके जले-फ़ुँके हुए बयान सुनूं…

भैय्या ये काम तो पिछले साल ही हो जाता अगर आडवानी अपनी जिद छोड़ देते.

और जहाँ तक कांग्रेस की बात है, तो उसे मुहँ में नहीं कहीं और सरिये देने की जरूरत है.

HINDU TIGERS said...

ईटालियन एंटोनियो माईनो मारियो के गुलाम कांग्रेसी एंटोनिया के देश ईटली के माफिया गिरोहों की भाषा वोल रहे हैं क्यों न कांग्रेस को आगे से माफिया गिरोह कहकर पुकारा जाए।
आपने बड़ी सहजता व सपष्टता से कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रख दिया बचकर रहना एंटोनिया के कुछ पालतु कुते आजकल अपनी बफादारी सिद्ध करने के लिए पागल हुए फिर रहे हैं ....

Dhananjay said...
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Dhananjay said...
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सौरभ आत्रेय said...

सार्थक लेख !!
Very Nice.

VICHAAR SHOONYA said...

मैं जब छोटा था तब किसी ने मुझे बताया था की कांग्रेस में नेता सिर्फ एक है और बाकि सब जूते चप्पल उठाने वाले हैं। इसलिए कांग्रेस जूते चप्पल उठाने वालों की पार्टी है। अब आप जूते चप्पल उठाने वालों से क्या अपेक्षा करेंगे। सुरेश जी आपका ब्लॉग पढ़कर मुझे थोडा शांति मिलती है क्योंकि आप बहुत अच्छे से इन लोगों की धुलाई करते हैं जो मैं नहीं कर सकता । आप यों ही मेरे मन को सकून पहुचाते रहें। धन्यवाद।

तिलक रेलन said...

कांग्रेस में भारती होने की यही तो विशेषता है.वहां राष्ट्र भक्तों के लिए नहीं चाटुकार स्वामीभक्त कुत्ते बिल्लिओं के लिए विशेष स्थान है !जो जितना बड़ा स्वामिभक्त (स्वामिनीभक्त)भोंकू उतना बड़ा प्रवक्ता (भोंपू)का पद, मलाई खाय बिल्लियाँ !

वीरेन्द्र जैन said...

आपका एक सन्देश तो सही है कि कांग्रेस जैसी आदर्श अतीत वाली पार्टी को मोदी और अटल जैसी भाषा नहीं बोलना चाहिए। अटलजी अपनी मीटिंगों में कहा करते थे-
इन्दिराजी कैत्ती एं कि मैं नहले पर दहला मारूंगी पर मैं कैत्ता ऊँ कि मैं बेगम पर इक्का मारूंगा, इन्दिराजी कैत्ती एं कि अटलजी जब दौनों हाथ उठाकर भाषण देते हैं तो मुझे हिटलर की याद आती है पर मुझे अभी तक भाषन देने का ऐसा कोई तरीका नहीं आता जिसमें टाँग उठा कर भाषण दिया जाता हो आदि
नरेन्द्र मोदी कहते थे कि लिग्दोह[वरिष्ठ चुनाव आयुक्त] और सोनिया जी कहीं चर्च में मिलते होंगे या एक जर्सी गाय और बछड़ा गुजरात में घूम रहे हैं या पाँच के पच्चीस आदि आदि
2- एक लोकतांत्रिक ढंग से चुने नेता को अपने हासिल पद के अनुसार व्यवहार करने की सुविधा है जिसके अनुसार भाजपा के समर्थन से मुख्य मंत्री पद पर बैठे शिबू सोरेन को है या राबड़ी देवी लालू प्रसाद को थी जिन्हें भाजपा के शत्रुघन सिन्हा टीवी बहसों में लल्लू कहा करते थे। याद दिला दूं कि चुनाव से विजयी गीता कौड़ा, कैलाश विजय वर्गीय, अजय विश्नोई, नरोत्तम मिश्रा, विजय शाह तथा उत्तर प्रदेश बिहार आदि के अनेक आर्थिक अपराधी बाहुबली और माफिया आदि को भी लाभ मिल रहा है। उनकी तथाकथित लोक्तांत्रिक जीत को एंजाय करने के वे अधिकारी हैं।
असल में राजनीतिक भाषा के प्रयोग की तमीज़ भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही बामपंथियों से सीखना चाहिए

जीत भार्गव said...

कुछ दिन पहले मनीष तिवारी ने कहा था कि, कश्मीर से पंडित क्यों भाग गए, उनको वही रहना चाहिए था. यह पंडितो की गलती है कि वो वहां से भाग गए. यह जले पे नमक छिड़कने जैसा बयान था. यह हमेशा ऐसे ही चुभते हुए बयान देता है. अगर मनीष में अकल होती तो कोंग्रेस में क्यों होते. उसका एक ही मकसद है कि मेडम मैनो को कैसे चापलूसी से राजी किया जाए. और यही इसकी खूबी है. जय हो!
सुरेश आपने एक जोक में 'मुंह' शब्द इस्तेमाल किया है... इसकी बजाय दूसरा उपयुक्त शब्द भी है-@#@$. खैर ये तो मेरी राय है, बाकी आपको जो उचित लगे. हां..हां..हां.

SHIVLOK said...

@ VEERENDRA

YOUR spirit is not pure.

कांग्रेस इस देश की सबसे बड़ी कम्यूनल पार्टी है, यह एक असभ्य, शातिर और चालबाज पार्टी है| मुस्लिम हित की बात करना धर्मनिरपक्षता, हिंदू हित की बात करना सांप्रदायिकता, हिंदू विरोध धर्मनिरपेक्षता, न्याय की बात करने का मतलब सांप्रदायिकता, वाह रे दुष्ट कॉंग्रेसी नेताओं, क्यों देश की जनता के दिलो में जहर घोल रहे हो| ज़रा आंखें खोल कर विश्वपरिदृश्य को देखो, भारत में मुसलमान जितने सम्मानित, सुरक्षित, प्रसन्न जीवन जी रहे हैं, विश्व के किसी भी देश में मुसलमान इतना स्वतंत्र और सम्मानित नहीं हैं जितना भारत में हैं| जहां तक नरेंद्र मोदी का सवाल है तो उन्होने गोधरा कांड में वह सब कुछ किया जो कोई भी ज़िम्मेदार मुख्यमंत्री करता| मोदी की न्यायप्रियता तो इसी बात से सिद्ध हो जाती है कि उन्होने सैकड़ो अनाधिकृत मंदिर तुड़वा दिए, है कोई और इस तरह की मिसाल| मोदी को हिंदूवादी नेता कहना भी ग़लत है, यदि ऐसा होता तो वो मंदिरों को तोड़ने का आदेश नहीं देते| केवल मुसलमानों के वोट के लालची उल्टी सीधी बात करते हैं|

Awadhesh Pandey said...

जैसे लगता है आपने मनौती मांगी और ईश्वर ने मोदी जी को आशीष दे दिया. जल्दी ही मोदी जी राष्ट्र के प्रधान मंत्री के प्रत्याशी होंगे और उसके बाद प्रधान मंत्रीपद की शपथ भी लेंगे, ऐसी ही कामना करता हूँ.
मन मस्त फकीरी धारी है, बस एक ही धुन है जय भारत.

Himalayi Dharohar said...

धन्य है काँग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी.......

मनीष तिवारी का बयान न केवल काँग्रेस के वैचारिक दिवालियेपन को प्रदर्शित करता है, अपितु तिवारी की मानसिक स्थिति का भी परिचायक है........

काँग्रेस को चाहिए कि वह तत्काल तिवारी को किसी मानसिक चिकित्सालय मेँ भर्ती कराकर उनका उपचार कराये............

निशाचर said...

@ वीरेंदर जैन,
एक पूर्व प्रधानमंत्री के बोलने के लहजे की नक़ल उतारना वैसी ही छिछोरी हरकत है जैसे किसी को फिसलकर गिरते हुए देखकर हँसना. इस तरह की मिमिक्री तमाम नेताओं की -जिनमें कम्यूनिस्ट भी शामिल हैं- की जा सकती है.

राजनीतिक वाकयुद्ध में वाचिक संयम और शुचिता की बात करते हुए ज्यादा आत्ममुग्ध होने की आवश्यकता नहीं है. किसी तरह की खामख्याली पालने से पहले नेताजी सुभाष के विषय में अपने प्रिय कमीनिस्टों के हताशा भरे उद्गारों को भी याद कर लीजिये जब उन्होंने नेताजी को "तोजो का कुत्ता" कहा था.

हमाम में सभी नंगे है जनाब, फर्क फकत इतना है कि कांग्रेसियों और कम्यूनिस्टों का इतिहास जरा पुराना है.

Shiv Kumar Mishra said...

अरे ऊ चिरकुट आदमी है. आप सही कहे हैं. ज्यादातर कांग्रेसी प्रवक्ता चिरकुट हैं.

Dikshit Ajay K said...

मोदी होंगे बीजेपी के पीएम कैंडिडेट (Nav Bharat Times)
:)
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abhi abhi sochanaa mili hai

badhai
:)
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ab koi farak nahin partaa, chaahe koi bhee bhonke.

Dhananjay said...

@दीक्षित अजय
वो एक अप्रैल फूल खबर है. वैसे हम तो ये चाहते हैं की ये खबर सच हो जाये.

sharma said...

............aik din jarur shriman modi ji hamare desh ke PM honge aur ye aid sashwat satya hai......kute bhir bhonk he payege. phir lagega ki ham sab hindustan main hi rahte hai. ......... jai bharat....jai hind..........vande mataram

सागर नाहर said...

कांग्रेस जैसी आदर्श अतीत वाली पार्टी को....
वीरेन्द्र जी के इन शब्दों को "जोक ऑफ द ईयर" नहीं मानना चाहिये?

SHIVLOK said...

@ वीरेंद्र जैन
@ सागर नाहर

"कांग्रेस जैसी आदर्श अतीत वाली पार्टी को....
वीरेन्द्र जी के इन शब्दों को "जोक ऑफ द ईयर" नहीं मानना चाहिये?"

मैं सागर नाहर जी से पूरी तरह से सहमत हूँ वीरेंद्र जैन जी का उपरोक्त कथन जोक ऑफ दी इयर घोषित किया जाता है और उन्हें पुरुस्कार के तौर पर 786 #$%@&*^%#$#@##$$% भेंट करने की घोषणा करता हूँ|

RAJENDRA said...

सुरेश भाई कांग्रेस के नेताओं की बेशर्मी और चाटुकारिता जगजाहिर है उनके विचार से (अगर कोई हैं तो) सब वे लोग देशद्रोही और गलत हैं जो कांग्रेश की विचारधारा की असलियत से वाकिफ हैं.

RAJENDRA said...

सुरेश भाई कांग्रेस के नेताओं की बेशर्मी और चाटुकारिता जगजाहिर है उनके विचार से (अगर कोई हैं तो) सब वे लोग देशद्रोही और गलत हैं जो कांग्रेश की विचारधारा की असलियत से वाकिफ हैं.

जीत भार्गव said...

@ Shivlok
@ sagar Nahar
I Am Agreed, this is joke of the year.

राहुल कौशल said...

दादा ८४ के दंगो की हत्यारन के पुत्र बधू जब भारतीय प्रधान मंत्री को आदेशित कर सकती है तो गुजरात को नयी पहचान देने वाला मुख्य मंत्री भी किसी भी जगह सम्मान पा सकता है और जो फालतू गाल बजा रहे हैं वो तो कुत्ते के माफिक भोंक सकते है बस

सोनू said...

"कान्वेंटी अज्ञानता"

आपने यह जुमला बहुत बढ़िया गढ़ा है।

impact said...

जिस दिन नर्मदा के बार बार पुनर्वास से तंग आकर गुजरात में भी नक्सली खेप पैदा होगी उस दिन हम भी देखेंगे मोदी का कौशल.

इंडियन said...

Sureshji,

You express yourself so perfectly. I appreciate your art of expression. About Congress whatever you have expressed is 100% right. You almost said what I feel like deep within.