Tuesday, March 2, 2010

ऐ ग्राफ़िक डिजाइनरों, सावधान… पता नहीं किस आकृति में अल्लाह दिखाई दे जाये… ... Graphic Designers Beware Allah Symbol

कुछ माह पहले एप्पल कप्म्यूटर्स की नवनिर्मित इमारत को काले कपड़े से ढँक कर उसका निर्माण कार्य किया जा रहा था, चूंकि इमारत का आकार चौकोर था, इसलिये कुछ धर्मान्धों को उसमें “काबा” की शक्ल दिखाई दे गई और उन्होंने हंगामा खड़ा कर दिया था। यहाँ देखें… http://www.thepatri0t.net/2006/11/08/apples-mecca-non-sense/

आये दिन जब-तब समूचे विश्व भर में ऐसे मामले सामने आते रहते हैं जब फ़लाँ चित्र से, फ़लाँ कृत्य से, फ़लाँ डिजाइन से “मुसलमानों की भावनाएं आहत हुई हैं…” का राग सुनाई दे जाता है (क्या इनकी भावनायें इतनी कमजोर हैं कि किसी काल्पनिक बात से भी आहत हो जाती हैं?)। माना जा सकता है कि एकाध मामले में जानबूझकर शरारती तत्व इन्हें छेड़ने के लिये ऐसा करता हो, लेकिन सभी मामलों को धर्म, धार्मिक चिन्हों और भावनाओं तथा अस्मिता के साथ जोड़ देना भी ठीक नहीं है। एप्पल की बिल्डिंग (जिसे “काबा” का प्रतिरूप कहकर हंगामा किया था) तो हाल ही का उदाहरण है, लेकिन इसके पहले भी ऐसे कई मामले आ चुके हैं, जहाँ कल्पना के घोड़े दौड़ाकर किसी आकृति को इस्लाम के साथ जोड़ दिया गया हो… आईये देखें…



सन् 1997-98 की बात है, जब जूता बनाने वाली अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनी “नाईकी” को बाज़ार से अपने 8 लाख जोड़ी जूते वापस लेने को मजबूर किया गया, क्योंकि जूते पर जो अंग्रेजी शब्द Air (हवा) लिखा हुआ था, उसकी डिजाइन अरबी लिपि के शब्द “अल्लाह” से मिलती-जुलती लगती थी, जबकि कई मुस्लिम विद्वानों ने भी देखा और माना कि यह आकृति “अल्लाह” तो कतई नहीं है बल्कि साफ़-साफ़ “AIR” है, लेकिन उन्मादियों को समझाये कौन? पाकिस्तान से डॉ अहमद जमाल चौधरी ने अपनी टिप्पणी में भी कहा कि “इस आकृति का अर्थ अल्लाह के रूप में निकालना नितांत मूर्खता है, हो सकता है कि पहली नज़र में यह अरबी लिपि का अल्लाह दिखता हो, लेकिन यह साफ़ Air लिखा है, जब अरबी लिपि को दाँये से बाँये पढ़ा जाता है तब यह अल्लाह कैसे हो सकता है? लेकिन जैसा कि होता आया है विद्वानों और उदारवादियों की आवाज़ अनसुनी कर दी गई, और नाईकी को जूते वापस लेने पड़े।

Nike Shoes

इसी प्रकार सितम्बर 2005 में एक और पढ़े-लिखे मुस्लिम राशिद अख्तर ने इंग्लैण्ड में “बर्गर किंग” नामक ब्राण्ड की आइसक्रीम के डिजाइन पर आपत्ति उठाई और कहा कि यह आकृति “अल्लाह” शब्द से मिलती है, मैं इस आइसक्रीम कोन के विज्ञापन बनाने वाले डिजाइनर को चैन से नहीं बैठने दूंगा…। जबकि उस कोन के विज्ञापन को आड़ा करके देखने पर ही अरबी लिपि के “अल्लाह” जैसा आभास होता है, लेकिन फ़िर भी हंगामा होना ही था, सो हुआ… और “धार्मिक भावनाओं का सम्मान”(?) करते हुए नाईकी कम्पनी की तरह बर्गर किंग ने लाखों की संख्या में अपने आइसक्रीम कोन और विज्ञापन बाज़ार से वापस लिये।

इसी प्रकार एक सज्जन(?) को कॉफ़ी के मशहूर ब्राण्ड “कोज़ी” (http://www.getcosi.com/) के एक कप पर कॉफ़ी से उठती भाप के लोगो को उलटा करके देखने पर भी “अल्लाह” दिखाई दे गया। आप भी देखिये…



विश्व इस्लामिक कॉन्फ़्रेंस 2006 की बैठक के दौरान एक पत्रकार ने “संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त” के लोगो में भी “अल्लाह” की आकृति देख ली (बताईये भला, ये भी कोई बात हुई, कहाँ तो मानवाधिकार का नाम और कहाँ ऐसा आपत्तिजनक लोगो?), कहने का मतलब ये है कि “अल्लाह” शब्द सर्वव्यापी है वह कहीं भी दिखाई दे सकता है, बस देखने वाली “नज़र-ए-खास” चाहिये।



सामान्यतः “कोकाकोला” कम्पनी को अमेरिकी पूंजीवाद का प्रवर्तक माना जाता है और वामपंथियों से इसकी दुश्मनी काफ़ी पुरानी है, लेकिन कोकाकोला कम्पनी के विश्वप्रसिद्ध लोगो में भी “धार्मिक भावनाएं भड़कने का सामान” ढूंढ लिया गया, कहा गया कि कोकाकोला के ब्राण्ड लोगो को आईने में उलटा करके देखने पर जो अरबी शब्द बनता है वह है “ना तो मोहम्मद है, न ही मक्का है” (कल्पना की बेहतरीन उड़ान)… आईये देखें कि कैसे…



पहले चित्र में कोकाकोला का मूल लोगो है, दूसरे चित्र में उसे आईने में उल्टा करके देखा गया और फ़िर उससे मिलते-जुलते अरबी लिपि के शब्द दिखाकर मुसलमानों से अपील की गई है कि वे पूरे विश्व में कोकाकोला के उत्पादों का बहिष्कार करें (गनीमत है कि कोकाकोला से उसका लोगो बदलने को नहीं कहा…)। यह एक शोध का विषय हो सकता है कि विश्व के कितने मुसलमानों ने कोकाकोला पीना छोड़ दिया, लेकिन आकृतियों में कुछ खास बात ढूंढने वाली निगाह के क्या कहने…। 


कहने का तात्पर्य यह है, कि ऐ ग्राफ़िक डिजाइनरों, संभल जाओ, पता नहीं किस आकृति में, किस चीज़ पर छपे, किस लोगो में… “अल्लाह” की छवि दिखाई दे जाये। कोई भी डिज़ाइन बनाने के बाद उसे आड़ा-तिरछा-उलटा-पुलटा करके, आईने के सामने रखकर, पानी में डालकर, आग में तपाकर, सभी दूर से चेक कर लेना कि कहीं गलती से भी “अल्लाह” (या कोई और इस्लामिक धार्मिक चिन्ह) न दिखाई दे जाये… वरना तगड़ी व्यावसायिक चोट हो जायेगी।

(समाजशास्त्रियों के लिये एक और शोध का विषय दे रहा हूं - भारत में रहने वाले कितने मुसलमानों को अरबी लिपि का ज्ञान है…… चलिये शुद्ध अरबी लिपि छोड़िये, शुद्ध उर्दू लिपि का ज्ञान कितने प्रतिशत मुसलमानों को है… इस पर शोध किया जाये)।

अब थोड़ा हटकर एक पैराग्राफ़ –

हाल ही में मकबूल फ़िदा हुसैन के भारत न लौटने और कतर की नागरिकता ग्रहण किये जाने पर भी काफ़ी बड़ा “वामपंथी-सेकुलर छातीकूट अभियान” चलाया गया, जबकि अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के पक्षधर, कला और कलाकार की भावनाओं का सम्मान करने, व्यक्तिगत आज़ादी के पहरुआ आदि होने का ढोंग करने वालों ने डेनमार्क के कार्टूनिस्ट के पक्ष में खड़े होने से इनकार कर दिया, तसलीमा नसरीन को भारत में पीटा गया तब भी मुँह नहीं खोला, सलमान रुशदी की पुस्तक तथा फ़िल्म “द विंसी कोड” पर प्रतिबन्ध लगा दिये जाने पर भी रजाई ओढ़कर सोये रहे… सारे पाखण्डी।

खैर अब ज़रा इन चित्रों को देखिये, इन चित्रों में से किसी आकृति को आड़ा-तिरछा-उलटा-पुलटा-आईना करके देखने की जरूरत नहीं है… सब कुछ साफ़ है…



यदि किसी को पता हो तो बतायें, कि इन्हें बनाने वाले कलाकार(?), पेण्टर को कितनी बार पीटा गया? ऐसे भद्दे और धार्मिक भड़काऊ उत्पाद बनाने वाली कितनी कम्पनियों में आग लगाई गई? विदेशों में कितने लोगों ने इसका बहिष्कार किया, ईसाई अथवा मुस्लिम समाज के कितने "धर्मनिरपेक्ष" प्रतिनिधियों ने इनके खिलाफ़ आवाज़ उठाई?

लेकिन फ़िर भी, नाथूराम गोडसे की पुस्तक और नाटक पर प्रतिबन्ध अवश्य होना चाहिये, तथा हिन्दू देवताओं की नंगी तस्वीरें बनाई जा सकती हैं उन तस्वीरों को बनाने वाले कलाकार को "भारत रत्न" दिलवाने के लिये लॉबिंग की जा सकती है… हिन्दू भगवानों को चप्पल, अंडरवियर आदि पर भी चित्रित किया जा सकता है, भगवान शिव को कुत्ते के रूप में दर्शाया जा सकता है… क्योंकि हिन्दू तो  *#@#*!!*  हैं (क्या खुद अपने मुँह से कहूं… आप तो जानते ही हैं कि हिन्दू "क्या" और "कैसे" हैं… और यह नतीजा है पिछले 60 साल से लगातार लगाये जा रहे सेकुलरिज़्म और गाँधीवाद के इंजेक्शनों का…………)।


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58 comments:

Varun Kumar Jaiswal said...

जय हो भाऊ !!!!

आज यह लेख पढ़कर खास नजर वाले ( ? ) बलवे - दंगे की पूरी तैयारी कर चुके हैं |

बाकि ( हिन्दू ) तो प्रगतिशील है ना उससे कोई आशा ना ही करें तो बेहतर होगा |

::))

संजय बेंगाणी said...

सार: हर चीज को उल्टा करने पर उल्टे लोगों को अल्लाह दिखता है.

सलीम ख़ान said...

देखो ब्लोगरो देखो और देखिये मिश्र जी साइंस वाले भी और जाकिर भाई साइंस वाले भी और प्रवीण भाई डेल्ही वाले भी और वे भी जो सलीम को कोसते थे, कहते थे कि तुम गलत सलत लिखते हो (हालाँकि किसी में भी हिम्मत न हो सकी कि मुझसे बात कर सके, क्यूंकि मैं सत्य लिखता था और हूँ...)

रही भात सुरेश बाबू की तो उन्हें सिर्फ एक पुणे वाले कच्छे वाले बीमार व्यक्ति की संज्ञा ही दी जा सकती है, उन्हें इतनी बात भी पता नहीं, खुद उनके धर्म एक सबसे बड़े धर्माचार्य (सुरेश टाइप के लोग उन्हें नहीं मानते) जिन्हें शंकराचार्य कहा जाता है (जो एकेश्वरवाद को ही मानते हैं जिया कि वेदों में लिखा है) भी इस्लाम को ईश्वर का धर्म कहते हैं.....

इंतज़ार करो जल्द ही एक बड़ा ब्लास्ट करने की तैयारी में हूँ, ब्लॉग जगत में !!!

ab inconvenienti said...

पर फिर भी हुसैन की पेंटिंग और इन बातों का विरोध भीड़ से करना ठीक नहीं है, बलप्रयोग जाहिलों का तरीका है, इससे हमारी कूटनीतिक स्थिति ख़राब होती है और पीआर पर बुरा असर पड़ता है. हिन्दू विरोधियों को हिन्दुओं को बदनाम करने का मसाला मिल जाता है. हमें यहूदियों की दीर्घकालीन निति अपनानी चाहिए, जो सोच समझ कर ठन्डे दिमाग से काम लेते हैं. और जहालत का सामना कूटनीति, राजनीती, टेक्नोलोजी, शिक्षा, लोबिंग, मीडिया, भय, धन, संसाधन, बड़े युद्ध, दखल और मनोविज्ञान के ज़रिये करते हैं. हिन्दू शिक्षा और छवि जैसे कई मामलों में मीलों आगे हैं, मध्ययुगीन फ़ौज और मानसिकता टेक्नोलोजी, शिक्षा और धन के आगे किसी काम की नहीं नहीं है. चीनी इसी के दम पर आगे बढे हैं, हिन्दुओं को भी यही चीजें अपनी मुट्ठी में लेने की कोशिश करनी चाहिए. हिन्दू समाज को यहूदियों के पैटर्न पर प्रगतिशील बनाना चाहिए, वे संख्या में भले कम हैं पर पर दुनिया पर राज करते हैं. एक नाख़ून भर के इसराइल ने अकेले सारे मध्य पूर्व की #^%~* कर रखी है.

उम्दा सोच said...

दमित हो हो कर ,दमन के आदी हिन्दुओ से क्या कोइ उम्मीद रक्खे,लोक्तन्त्र मे इन्हे युवराज दिखता है, मक्बूल के चित्र मे इन्हे कला दिखती है, विदेशीयो से इन्हे प्रगती दिख्ती है! ये खान के अधिकार के लिये खडे होन्गे पर काश्मीरी पन्डितो के अधिकार पर बात करने को बोलो तो मुह मे सेकुलर गुह ठूस कर चुप बैठ जाते है!


मरे ज़मीर वालो से मुझे कोइ उम्मीद नही है !!!

K.D.__ said...

@ ab inconvenienti

एकदम सही कहा
इस्राएल की ख़ुफ़िया एजेन्सी mossad के बारे में भी पढ़ो जो की दुनिया में पेहेले ५ ख़ुफ़िया एजेन्सी में नंबर होनेके बवजुत खर्चा एकदम कम है

Varun Kumar Jaiswal said...

ये देखो फिर से फलाने खान आ गए बड़ा ब्लास्ट करने ! जब भी बात खेत की हो तो ये खलिहान में घुस जाते हैं |
वैसे बड़ा ब्लास्ट ( शायद अबकी ट्रेनिंग जाकिर नाइक के चाचा 'ओसामा' ने दी है ) | :) :)

Mohammed Umar Kairanvi said...

भाई चिपलूनकर साहब, जूते पर ऐसी डिजाइन बनायी गयी है कि वह english में Air है लेकिन दायें से बायें वाकई अल्‍लाह है

पी.सी.गोदियाल said...

@ab inconvenienti बात में दम था , मगर इस देश के सेकुलर घोंचुओ से वह भी उम्मीद करना सरासर बेवकूफी है !२६/११ की हैंडलिंग का नतीजा अभी भारत-पाक विदेश सचिवो की बैठक में देख लिया ! विदेश निति के रक्षक देख लिए ! जो सउदी अरबिया पूरे विश्व में आतंकवाद को धन मुहैया करवा रहा है, उससे ही जाकर कह रहे है की तुम हमारे और पाकिस्तान के बीच मध्यस्था करो ! मैं तो सोच-सोच कर हैरान हो रहा हूँ कि अगर यही महापुरुष उस समय UN महासचिव बन जाता तो सत्यानाश हो जाता !

K.D.__ said...

read

मोसाद के मुकाबले भारत कहाँ

Link http://rawan.mywebdunia.com/2008/12/05/1228465920000.html

संजय बेंगाणी said...

खान सा'ब धमाके के अलावा भी दुनिया में करने को कई काम है. मगर कहते है न मियाँ की दौड़ मस्जिद तक. अरे भाई आगे देखो, आगे बढ़ो.... कब तक भावनाएं लिये बैठोगे?

और किसी संत महात्मा शंकाचार्य ने कह दिया इस्लाम ईश्वर का धर्म है तो चिपलुनकर क्या लिखना छोड़ दे या इस्लाम कबुल कर ले? इस पोस्ट से इस बात का क्या सम्बन्ध? हिन्दु धर्म किसी एक किताब, संत-महात्मा की जागीर नहीं है. आप तो यह कहो, क्या हर चीज को उल्टा-सीधा कर अल्लाह अल्लाह चिल्लाना सही है? एक डिजाइनर के नाते लिखता हूँ, यह हद दर्जे की मूर्खता है.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

केंचुओं से फुंफकारने की भी उम्मीद बेमानी है. सलीम का कहा पढिये, कैरानवी का पढ़िये. हिन्दू अभी तमाम इन के ब्लाग पर जाकर इस प्रकार की चीजों की लानत मलामत करेंगे. लेकिन महफूज जी जैसे दो-तीन लोगों को छोड़कर एक भी मुसलमान हिन्दुओं के देवी-देवताओं के इस अपमान की निन्दा भी नहीं करेगा. यह सत्य हिन्दुओं को दिखाई नहीं देता. कहां मोसाद और कहां भारत की एजेंसियों के आरामतलब लोग और कहां का नेतृत्व. ॒टऽ॑ है.

अन्तर सोहिल said...

नमस्कार

Pak Hindustani said...

बिना बात इस तरह हर चीज़ में धार्मिक कनेक्शन ढूंढ़ना मूर्खतापूर्ण ही है, वैसे इस बेवकूफी से हिन्दू दूर ही रहें तो ठीक. हमें इसे अपनाने की जगह जो जाहिल धर्म के नाम पर चीख-पुकार इस तरह की फिज़ूल चीख-पुकार मचा रहे हैं उन्हें समझाने के लिये समय का उपयोग करना चाहिये.

आशा है आप का लेख कुछ लोगों की तो आंखे खोलेगा.

हमें भरोसा है कि अगर धर्म के इस पोंगेपन पर कई सारे लेखक कलम चलायें और बात करें तो रिफार्म के लिये मजबूर होना पड़ता है.

बाकी बात रही जाकिर नाईक ने चमचों की, तो भाई उनका पेशा है यह क्योंकि इसी के लिये जाकिर नाईक के पास फडिंग आती है. अगर यह नहीं करेंगे तो कामकाज करना पड़ेगा.

Pak Hindustani said...

और रॉ को कुछ न समझने वाले महानुभावों को एक बात कह दूं.

सबसे अच्छी खुफिया एजेन्सी वही है जिसके काम के बारे में किसी को पता नहीं चले.

अगर रॉ बात नहीं करती तो इसका मतलब यह नहीं कि वह काम नहीं करती. आप आतंकियों के उन कारनामों के बारे में जान कर बौखला जाते हो जो वो कर जाते हैं.

जिन्हें रोक दिया जाता है उन की चर्चा नहीं होती. हमारी सुरक्षा और खुफिया एजेन्सी भी काम में लगी है और बेहद विपरीत परिस्थितियों में अपने काम को अंजाम दे रहीं हैं. उनके कारनामें आप जानें न जानें, यकीन मानिये, वो चालू हैं.

और नहीं तो पाकिस्तानी अखबार पढ़ा करिये.

सलीम ख़ान said...

महफूज़ ने हिन्दू ब्लॉगरों की नब्ज़ पकड़ ली है और वह हिन्दू ब्लॉगरों का इसीलिए चहेते बने बैठे हैं...

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

जूता है नायाब। हर नायाब चीज अल्लाह की नियामत है।
बकिया नंगे से कौन लड़े। जूता आइसक्रीम वापस लेने में ही भलमनसाहत है।

vikas mehta said...

bhaiyo ye sab kin desho ka nangaa nach hai unke khilaf hindu muslim sabhi ashiyaai desho ko ekttrit hona chahiye sabhi ashiyaai desh nhi to kam se kam bhartiyo ko to sangthit hona hi chahiye kab tak apmaan shoge ya apmaan ki adt hi pad chuki hai jati par ladne wale logo desh ki khatir sangthit ho jao

संजय बेंगाणी said...

एक नियम सा है कि अपने देश की एजेसीं के कारनामे लिखे नहीं जाते.
रॉ की स्थापना इन्दिरा गाँधी ने की थी. एक सराहनीय कदम था. रॉ ने शानदार काम किया. कुछ बेवकुफ प्र.म. को इसकी जरूरत नहीं लगी. बाद में सुस्ती सी रही. मगर पाकिस्तान इससे परेशान है. रॉ धारदार रहे यह भारत के लिए जरूरी है.

संजय बेंगाणी said...

मियाँ सलीम आप जैसे लोग डॉ. कलाम, एम.जे.अकबर जैसे लोगों को मुसलमान नहीं मानते. जिन्हे मानते हो उन्हे दुनिया कुछ और ही मानती है. फिर फिल्म बनाते हो खान मतलब आतंकी नहीं होता. अब दोष किसे दें. शुएब या महफुज से किसी को आपत्ति नहीं इसलिए आपके लिए बेकार हो गए?!

Vivek Rastogi said...

अरे इनका बस चले तो गूगल वालों को भी बोलें कि गूगल अल्लाह का नाम है और अल्लाह की सेवा में अता कर दिया जाये। वेब स्पेस पर भी मुस्लिम कट्टरवादिता चाहिये।

हे राम अल्लाह के इन बंदों को अकल दे..।

Suresh Chiplunkar said...

सलीम भाई, खामखा उबल रहे हो… क्या ये सारी तस्वीरें और खबरें काल्पनिक हैं या मैंने अपने मन से बनाई हैं? जो घटा है सिर्फ़ वही तो सामने लाकर रखा है, तो इतनी मिर्ची क्यों लगी कि पुणे और शंकराचार्य तक पहुँच गये? अब तुम ब्लास्ट करो या फ़ुस्सी करो इससे मुझे क्या…। हिन्दुओं के भगवानों के अपमान वाले चित्रों पर तो मजा आया होगा ना तुम्हें…? पोस्ट का सार तो समझो…

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

सुरेश जी,

Nike के जुतों पर उठाया गया विवाद बिल्कुल सही था....क्यौंकी उस शब्द ना टेडा करने की ज़रुरत थी और ना ही आइने में देखने की.....

रही बात हिन्दु धर्म के अपमान पर आवाज़ उठाने की.......तो ये काम मैनें तो किया था..

http://hamarahindustaan.blogspot.com/2009/10/one-appeal-to-all-indian-register-your.html


लेकिन इस मसले पर तो हिन्दु लोग ही विरोध करने वाले का साथ नही देते.....आप देख सकते है मेरे इस लेख पर सिर्फ़ 15 टिप्पणी है उसमे से भी 4 मेरी हैं...

=================
"हमारा हिन्दुस्तान"

"इस्लाम और कुरआन"

The Holy Qur-an

Unique Collection Of Technology

Coding | A Programmers Area

safat alam taimi said...

Suresh Chiplunkar जी
इस्लाम हमें उदारता की शिक्षा देता है इसी लिए कुरआन ने हमें मना किया की हम किसी के भगवानों का अपमान करें , हम किसी के भगवन का न अपमान करते हैं और न अल्लाह का अपमान बर्दाश्त कर सकते हैं क्यूंकि भगवान कुछ लोगों के लिए है जबके अल्लाह संसार का मालिक और स्वामी है

डॉ महेश सिन्हा said...

सुना था मुहम्मद साहब जहाँ बैठते थे उस जगह कोई निशान नहीं छोड़ते थे क्योंकि उनकी किसी प्रतीक से कोई लगावट नहीं थी . उन्होने केवल एक ग्रंथ छोड़ा अपने बंदों के लिए . लेकिन उनके बंदों ने सब ढूंद निकाला .

सौरभ आत्रेय said...

वैसे मुझे इनमें से कुछ बातों की जानकारी थी किन्तु आपने अपने एक लेख में डाल कर अच्छा कार्य किया है और इन लोगो की मूर्खता और अंधविश्वासों को उजागर किया है.

@सलीम खान

इन तस्वीरों में अल्लाह लिखा है या नहीं लिखा है ये तो मैं नहीं जानता पर मुस्लिमों के इस कृत से यह भी सिद्ध होता है कि ये सबसे बड़े मूर्तिपूजक हैं क्योंकि ये अल्लाह को उसके लिखे हुए नाम में मान कर उसका अपमान मान रहे हैं अर्थात उसको लिखित मूर्त रूप शब्द में स्वीकार रहे हैं जिस प्रकार अधिकतर हिंदू तस्वीरों में ईश्वर को मूर्त रूप मानता है पर कम से कम हिंदू यह तो स्वीकारते हैं कि मैं मूर्तिपूजक हूँ.पर क्या मुस्लिमों के इस कृत्य से, काबा की तरफ मुंह करके नमाज़ पढ़ना, वहां काले पत्थर को चूमना जैसे आदि कार्य मूर्तिपूजा के अंतर्गत नहीं आते? खैर यहाँ पर ये बहस का विषय नहीं है मुद्दा यह है कि हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरों का मजाक उड़ाया जाता है तो कोई सामने नहीं आता और बेशर्मी से उनका पमान किया जाता है और एक अल्लाह शब्द लिखने आदि से बवाल मच जाता है जोकि सरासर अन्यायपूर्ण है.

वैसे मैं स्वयं मूर्तिपूजा में विश्वास नहीं रखता हूँ किन्तु जो हिंदू मूर्तियों में विश्वास रखते हैं उनको उनका अपमान करके नहीं बल्कि तार्किकता से ज्ञान की कसौटी पर समझाने में विश्वास करता हूँ और यह हमारा आपसी मामला है पर ईश्वर का वह स्वरुप बिलकुल नहीं है जो तुम अल्लाह में परिभाषित करते हो.

जिस तथाकथित शंकराचार्य की बात तुम करते हो वो एक मुर्ख, हरामी कांग्रेसी कुत्ता है और उसे नहीं पता हिंदू धर्म के बारे में कुछ भी. और वैसे भी हिंदू धर्म किसी मुल्ला-मौलवी की जागीर नहीं है जो किसी मुर्ख के कहने से बदल जायेगा.

Varun Kumar Jaiswal said...

देखो भाई ! मैंने तो सुबह ही कह दिया था की फ़लाने खान दंगा और बलवा करने को तैयार हैं |
देखिये अब बलवा दंगा हो भी रहा है |
भारत में ऐसे बलवाई और दंगाइयों को वैज्ञानिक पुरस्कार भी मिलने लगे हैं |

:) :) ||

RaniVishal said...

Tathyapurna sudran aalekha...!!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

महाशक्ति said...

महाशक्ति नामक ज्‍वालामुखी शान्‍त है कृपया इसे शान्‍त रहने दे, किसी भी प्रकार का ब्‍लास्‍ट ज्‍वालामुखी को अशांत कर सकता है और अशान्ति होने पर इस्‍लाम का संदेश आतंक मचाओ हूर मिलेगी,
आतंक की राह पर इस्‍लाम और कुरान
,
अल्‍लाह की शक्ति का अतिक्रमण करता भारतीय संविधान, ऊपर वाला “खुदा” है तो देर से अंधेर भली जैसे लावे निकल सकते है और किसी को नुकसान हो तो इसकी जिम्‍मेदारी मेरी नही होगी।

जय हिन्‍द - जय महाशक्ति

HINDU TIGERS said...

जागो हिन्दू जागो

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

वास्तविकता तो है की अपने को प्रगतिशील, कला के पारखी, मोडर्न हिन्दू को हिन्दुओं के देवी देवताओं की नंगी और शर्मनाक चित्र से शायद ही कोई फर्क पड़ता है | प्रगतिशील, कला के पारखी, मोडर्न हिन्दू को यही लगता है की अरे मैं फ़िदा हुसैन या जाकिर नायक जैसों का विरोध कैसे करूँ ... विरोध करूंगा तो मेरी प्रगतिशील, कला के पारखी, मोडर्न होने का तमगा छीन जाएगा | अब जहाँ हम हिन्दुओं को अपनी अस्मिता, स्वाभिमान से ज्यादा तमगे की चिंता है तो उस हिन्दू समाज का क्या कहा जाए ?

रही बात मुसलमान भाईयों की तो वो जरुरत से ज्यादा, बिना मतलब के हल्ला मचा रहे हैं | जब एक मुसलमान मकबूल फ़िदा हुसैन हन्दू देवी देवताओं की अपमानजनक पेंटिंग बनाते हैं तो ये बड़े खुस होते हैं ... जैसे ही कोई मुहम्मद साहब का कार्टून बना देता है ... ये दंगा मचा देते हैं ... इस दोगलेपन का क्या कहा जाए ?

मनुज said...

@सौरभ आत्रेय जी ,
बिलकुल सही कहा. पूर्ण सहमत...

venus kesari said...

हमेशा की तरह हिलाऊ पोस्ट है
और आपके विचारों से सहमत हूँ
हिन्दू इतना उदार है कि उसे कायरता की श्रेणी में भी रखा जा सकता है

डॉ महेश सिन्हा said...

भारत के ख़िलाफ़ षड्यंत्र का खुलासा यहाँ देखें

Anil Pusadkar said...

यंहा तो छोटा भीम,गणेशा और ना जाने क्या-क्या दिखा रहे हैं।एक विज्ञापन है गर्म कपडों का उसमे तो चीरहरण के दृश्य मे द्रौपदी को फ़्लाईंग किस करते दिखया गया है।इतना कंही किसी और धर्म मे हो जाता तो बवाल मच जाता,उदाहरण ताज़ा ही है एक फ़िल्म ने सारे देश में हंगामा मचा दिया और उसके बाद हुये धमाके पर रोने की बजाय खान की कमाई का गुणगान किया जा रहा है।वाह रे साम्प्रदायिकता,वाह रे धर्मनिरपेक्षता,वाहे रे सहनशीलता और वाह रे हिंदू।
शानदार लिखा भाऊ कब तक़ सोयेंगे जब तक़ आप जैसे लोग हैं कभी तो जागेंगे।

संजय बेंगाणी said...

@ मियाँ साफत आलम तैमी

इस्लाम हमें उदारता की शिक्षा देता है...


यह उदारता मुस्लिम शासन के गुलामी वाले दौर में हमने देखी थी. इसी उदारता ने देश को तुड़वा कर पाकिस्तान का निर्माण करवाया था. फिर उदारता को अफगानिस्तान में बुद्ध की प्रतिमाओं पर उतरते देखा है.

भगवान कुछ लोगों के लिए है जबके अल्लाह संसार का मालिक और स्वामी है....

घोषणा से ही कुछ होता हो तो संसार का मालिक और स्वामी मैं हूँ, अल्लाह केवल मुसलमानों के लिए है.

sangeeta swarup said...

आँख खोलने के लिए सशक्त पोस्ट है पर जो आँख खोल कर भी अंधे बने रहते हैं उनको कैसे जगाया जाये.....

कायरता को सहनशीलता के आवरण से ढक लिया जाता है.....

सुलभ § सतरंगी said...

जो मछली जल के अन्दर पैदा होती है. जल में आँखे खोलती है, उसे बाहर की दुनिया जानलेवा लगती है.
जबकि सचाई यह भी है की जल में ही उसके किसी दुसरे जीव जंतुओं द्वारा निगल जाने का खतरा भी बना रहता है.
दुनिया की विविधताओं और इसकी खूबसूरती को समझने की जरुरत है न की सिर्फ अरबी लिपि से दुनिया को दुनिया बताने की.

सुलभ § सतरंगी said...


A L L A H (अल्लाह) को उल्टा पढ़े H A L L A (हल्ला)
हल्ला मचाओ !!
R A M (राम) को उल्टा पढ़े M A R (मार)
मारपीट करो!!
G O D (गौड) को उल्टा पढ़े D O G (डॉग या कुत्ते)
मेरा मालिक कुत्ता है !!

जो अक्ल के अंधे हैं, वे उल्टा रास्ता चलते हैं. धर्म को कभी नहीं समझेंगे की " धर्म: मतिव्य उद्धरिता: (धर्म बुद्धि से जन्म लेता है)".
खूब हल्ला करेंगे, मार पीट करेंगे, और सीधे सादे लोगों का जीना मुहाल करेंगे.

सब अपने मन का मालिक है ? माफ़ कीजियेगा मैं डिजायनर नहीं हूँ, नहीं तो और अच्छे से डिजायन बना सकता था.

वीरेन्द्र जैन said...

साम्प्रद्दयिकता किसी भी रंग की हो उसे दूसरों की चींटी हाथी और अपना हाथी चींटी दिखाई देता है। जिसे आप उभार रहे हैं वह हिन्दू और मुस्लिम कट्टरता के नमूने हैं और साम्रदायिक किसी भी धर्म के हों वे समाज और दर्शन के शत्रु हैं। बाबरी मस्ज़िद को जब हिन्दू साम्प्रदायिकों ने तोड़ दिया तब परख कार्यक्रम में विनोद दुआ ने विसिमिल्लाह् खां [भारत रत्न]से पूछा था कि आपको कैसा लगा तो उनका उत्तर था कि नमाज तो कहीं पर भी दस्ती[रूमाल] बिछा कर पढी जा सकती है पर इस नाम पर जो भाई चारा तोड़ने की कोशिशें हैं वे खतरनाक हैं

संजय बेंगाणी said...

@ विरेन्द्र जैन.

मस्जिद हिन्दु साम्प्रदायिको ने नहीं तोड़ी थी. जो मन्दीर बाबर ने तोड़ कर मस्जिद बनाई थी और जहाँ नमाज नहीं पढ़ी जाती थी उसे तोड़ा था.

इतिहास की जानकारी हो तो मुगलों के तल्वे चाटने वालों के वंशज आज भी जिन्दा है. सदा रहेंगे. खुद को कोस कर महान बनने का मुगालते पालेंगे.

उम्दा सोच said...

॰ विरेन्द्र जैन जी आप किसकी बात कर रहे है ? "भाईचारा" की या झूठे भाई बना कर चारा डाल रहे है??? जैसा कान्ग्रेस करती आई है सदा से !!!

वैसे जैचन्द से आप का कोइ कनेक्सन्……???

या ये सेकुलर वाला फ़्री इश्टाईल मारा है ???

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

यहाँ एक बात कहना चाहेंगे कि हम हिन्दू अपने में भी सुधार करें और अपने देवी-देवताओं के अश्लील प्रदर्शन पर मुस्लिमों की तरह ही कट्टर प्रदर्शन करें. हम हिन्दुओं का विरोध तो हिन्दू ही करते हैं तो क्या कहें.....................
फिर भी अब चेतना होगा. इसी पर अपने ब्लॉग पर पोस्ट लिखी है. देखिएगा.
जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

SHIVLOK said...

महफूज़ ने हिन्दू ब्लॉगरों की नब्ज़ पकड़ ली है और वह हिन्दू ब्लॉगरों का इसीलिए चहेते बने बैठे हैं...

Mr. SALIM
You are 100% wrong.

Mahfooj loves

You also start loving
Then yourself will find the नब्ज़
The real नब्ज़ is love


SHIV RATAN GUPTA
9414783323

SHIVLOK said...

SAFAT ALAM taimi said...

Suresh Chiplunkar जी
इस्लाम हमें उदारता की शिक्षा देता है इसी लिए कुरआन ने हमें मना किया की हम किसी के भगवानों का अपमान करें , हम किसी के भगवन का न अपमान करते हैं और न अल्लाह का अपमान बर्दाश्त कर सकते हैं क्यूंकि भगवान कुछ लोगों के लिए है जबके अल्लाह संसार का मालिक और स्वामी है

भगवान कुछ लोगों के लिए है जबके अल्लाह संसार का मालिक और स्वामी है BADII GALATFAHMII


ALLAH KUCHH LOGON KE LIYE HAI
SABKE LIYE NAHIN,
SAMJHO SAFAT ALAM taimi

Neeraj नीरज نیرج said...

सवाल हिन्दुत्व के प्रसार या बढ़ती भगवा आक्रामकता नहीं है. क़तई नहीं है. सवाल बेतहाशा गति से बढ़ती इस्लामिक आक्रामकता का है. जहां धर्मनिरपेक्षता, ग़ैरमुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है. वहाबत ने मुस्लिमों मे भी कट्टरता बढ़ाई है और यह पूरी दुनिया में ख़तरनाक ढंग से आगे बढ़ रही है. इसका ड
टकर मुक़ाबला करना जारी रहे. वे भी करें जो सिक्यूलर है..वरना उनकी सेकुलरपंथी भाड़ में घुस जाएगी.
दो बातों पर मेरा अटूट विश्वास है-
अव्वल तो यह कि यह देश तभी तक धर्मनिरपेक्ष है जब तक कि यहां हिन्दू बहुमत में हैं.
दूसरे यह कि, मुस्लिम जहां अल्पमत में हैं वे धर्मनिरपेक्ष समाज के पैरोकार होते हैं. जहां बहुमत में हैं वे इस्लामी परचम बुलंद कर देते हैं. मुस्लिम समाज के तमाम वे लोग जो प्रगतिशील विचारधारा से जुड़ें है- उनकी आवाज़ भी परचम लहराते ही नक्कारखाने की तूती बन जाती है. उन्हें भी यह समझ लेना चाहिए.

nitin tyagi said...

@topic and सौरभ आत्रेय

+100

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

इस समय हमारे शहर मे दन्गा हुआ है कर्फ़्यु लगा है इस समय . अल्पसंख्यक भाइयो ने बहुसंख्यक भाइयो की दुकाने जला दी घर जला दिये लेकिन अल्पसंख्यक भाई लोग सुरक्षित है इसे कहते है बड्ड्पन्न . और हमे सिखाया गया है क्षमा बडन को चाहिये छोटन को उत्पाद

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

उत्पाद को उत्पात पढे

पंकज बेंगाणी said...

मैं नीरज भाई से सहमत हूँ.

Mithilesh dubey said...

सुरेश भईया नमस्कार

आपका मेल आईडी ना होने की वजह से अपनी बात आपको कमेण्ट के रुप में दे रहा हूँ ,आपका कमेंण्ट देखा आपका मेरे प्रति प्यार और मुझे बड़े भाई जैसा समझाना बहुत बढ़िया लगा , और खुशी हुई कि आप सच्चाई के साथ है , मैं आपको सदैव अपना मार्गदर्शक समझता हूँ और आपसे बहुत कुछ सिख भी रहा हूँ , आपका तहे दिल से आभारी हूँ , उम्मिद है कि आगे भी आप अपना आर्शिवाद देते रहेंगे ।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

महफूज जी ने नब्ज नहीं पकड़ी, वह असली हिन्दुस्तानी है, असली मुस्लिम है और असली धर्मनिरपेक्ष हैं.

राहुल कौशल said...

भईया नमस्कार
वाकई हम हिन्दू तो गां................हो गए है (माफ़ी जो ऐसा शब्द लिया) ..............मकबूल हुसैन को सा.....को जितने जुटे मरे जाये कम है.........न तो सरकार न ही ये मीडिया ऐसे मुद्दे को दिखाती है और ना ही इनकी चर्चा करती है........एक मेरे पास फोटो हैं शिव लिंग का वो शिव लिंग भारत में नहीं है.......और जिसने उसको भेजा है उसका पता और उसकी फोटो कॉपी आपको भेजूंगा हो सकते तो आप उसकी जाँच पड़ताल कर दिखाने का कष्ट करे जैसा मै जनता हूँ वो अरब का कही का है.................और रही हिन्दुओ की बात हम सब गहरी नींद में सो गए है जिनकी नींद तब भी नहीं जागेगी जब हमारे सामने ही कोई हमारी हर वास्तु का मूल्य ना लगा दे.....डर है की कही जल्दी ही हम अपने आप को गिरवी ना रख दें

जीत भार्गव said...

भाई नीरज दीवान की बात से १०००% सहमत हूँ. उन्होंने इस्लामी जेहाद के मनोविज्ञान को सही तरीके से समझा है. और सही खतरों के प्रति आगाह किया है. रही बात सलीम-टैमी वगैरह कि तो उन्हें इधर-उधर तकरीरे करने की बजाय खुद की कौम को सुधारने और सही रास्ते पर लाने की कोशिश करनी चाहिए. आप लोगो को शुक्र मनाना चाहिए कि महफूज और एपीजे कलाम जैसे लोगो के कारण इस्लाम की थोड़ी बहुत इज्जत बची हुई है.
जो लोग भाई चारे की बात कर रहे हैं उन्हें अफगानिस्तान जाना चाहिए क्योंकि वहां भारतीय शान्ति मिशन में गए लोगो का तालिबान जेहादियों द्वारा क़त्ल कर दिए जाने के बाद कोइ शांतिदूत बनाकर जाना नहीं चाहता है.

Awadhesh said...

bahut hi achcha lekh hai.

मुनीश ( munish ) said...

sundar , santulit .

Jumardi Ramdani said...

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Jumardi Ramdani said...

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