Monday, March 29, 2010

बाबरी मस्जिद पर अंजू गुप्ता का बयान, आडवाणी की उदासी और उमा-ॠतम्भरा की बेबाकी… Babri Mosque Demolition, Advani, Anju Gupta

एक बार फ़िर से बाबरी विध्वंस का मामला “नकली-सेकुलर मीडिया” की हेडलाइन बना हुआ है। इस बार का हंगामा बरपा है 1992 में आडवाणी की निजी सुरक्षा अधिकारी रहीं अंजू गुप्ता के उस बयान की वजह से जिसमें उन्होंने कहा कि “उस दिन आडवाणी ने भड़काऊ भाषण दिया था और बाबरी ढाँचा गिरने के बाद आडवाणी बहुत खुश हुए थे…”।

अंजू गुप्ता के समक्ष अब इस बयान की गम्भीरता साबित करने का भारी दबाव आने वाला है, उसका कारण यह है कि यही अंजू गुप्ता पहले दो बार आडवाणी को “क्लीन चिट” दे चुकी हैं, पहली बार सीबीआई की पूछताछ और सीबीआई कोर्ट में, तथा दूसरी बार लिब्रहान आयोग के सामने उन्होंने आडवाणी को पूरी तरह बेकसूर और मामले से असम्बद्ध बताया था, लेकिन अंजू गुप्ता के इस नवीनतम “यू-टर्न” का औचित्य समझना थोड़ा मुश्किल जरूर है, परन्तु नामुमकिन नहीं। अपने पहले बयान में (जब मामला ताज़ा-ताज़ा था, अब तो मामला भी पुराना हो गया, कई बातें भूली जा चुकी हैं जबकि कई मुद्दों और बयानों को “सेकुलर सुविधानुसार” तोड़ा-मरोड़ा जा चुका है) अंजू गुप्ता ने कहा था कि “आडवाणी ने कारसेवकों से बार-बार गुम्बद से उतर जाने की अपील की थी…” अब बदले हुए बयान में वे कह रही हैं कि “आडवाणी ने कारसेवकों से गुम्बद से उतरने की अपील कर रहे थे ताकि, कहीं कारसेवक गुम्बद के गिरने से घायल न हो जायें…”।

बहरहाल, “डेली पायोनियर” http://dailypioneer.com/244999/Officer-blames-Advani-BJP-unfazed.html ने अंजू गुप्ता के इस ताज़ा बयान के साथ ही उनका बायो-डाटा खंगालने की भी कोशिश की है। अपनी एक हालिया पोस्ट में मैंने भी कहा था कि “पूरे नाम” लिखने की परम्परा शुरु की जाये, ताकि सम्बन्धित व्यक्ति का पूरा “व्यक्तित्व” उभरकर सामने आ सके। श्रीमती अंजू गुप्ता फ़िलहाल “रिसर्च एण्ड एनालिसिस विंग” (RAW) में पदस्थ हैं जबकि उनके पति “शफ़ी अहमद रिज़वी”, गृहमंत्री पी चिदम्बरम के “विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी” (OSD) हैं…। अब आपके दिमाग की बत्ती भी जल गई होगी… कि अंजू गुप्ता “रिज़वी” को कहाँ से “प्रेरणा” प्राप्त हो रही है।  क्या अब भी कुछ कहने को बाकी रह गया है? इतने समझदार तो आप लोग हैं ही, कि “खिचड़ी” सूंघकर ही पहचान सकें… (अंजू गु्प्ता रिज़वी + शफ़ी रिज़वी + पी चिदम्बरम = सेकुलर खिचड़ी… यह ठीक उसी प्रकार है जैसे कि ईसाई पादरी + वीडियो टेप + NGO + तहलका = सेकुलर खिचड़ी…)

वहीं दूसरी तरफ़, आडवाणी अभी भी Politically Correct बनने (दिखने) के चक्कर में बाबरी ढाँचे के गिरने की खुशी को सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं… कहने का मतलब यह है कि तीन तरह के “कैरेक्टर” हमें देखने को मिल रहे हैं –

1) पहले हैं आडवाणी, जो अभी भी खुलेआम बाबरी विध्वंस की जिम्मेदारी नहीं ले रहे, जिन्ना की मज़ार पर जाकर मत्था भी टेक आये, जबकि बाल ठाकरे, आचार्य धर्मेन्द्र और विहिप के कई नेता इस पर सार्वजनिक खुशी जता चुके हैं। इसे कहते हैं “राजनीति”, और आडवाणी का यह मुगालता कि शायद मुसलमान कभी भाजपा को वोट दे भी दें… जबकि यह कई बार साबित हो चुका है कि चाहे किसी गधे को भी वोट देना पड़े, तब भी मुसलमान भाजपा को वोट नहीं देंगे।

2) दूसरी हैं, अंजू गुप्ता “रिज़वी” जो एक हिन्दू नारी होने की वजह से अपने “संस्कारों” के चलते (शायद) अपने “पति” के कहने पर अपने दो-दो बार दिये गये बयान से पलटी खा गईं…

3) तीसरी हैं, उमा भारती और साध्वी ॠतंभरा, जो बाबरी ढाँचा गिरने पर खुशी से चिल्लाईं और गले मिलीं। उमा भारती ने खुलेआम कहा कि जो हुआ अच्छा हुआ, और यूपीए सरकार में दम है तो उन्हें गिरफ़्तार करें। यह उमा भारती ही थीं जिन्होंने हुबली में तिरंगा फ़हराया और मुख्यमंत्री पद से हाथ धोया, और वह भी उमा भारती ही हैं जिन्हें भाजपा से बेइज्जत होकर निकलना पड़ा था…

तीनों “कैरेक्टरों” का विश्लेषण करने से तीन बातें उभरती हैं –

1) भाजपा भी “Politically Correct” होने के चक्कर में अपना “हिन्दू वोट” गँवा रही है, क्योंकि गडकरी का ताज़ा बयान “आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता…” इसी “पोलिटिकल करेक्टनेस” की ओर इशारा कर रहा है…

2) “लव जेहाद” एक वास्तविकता है, अतः जहाँ तक सम्भव हो (और जैसे ही पता चले) व्यक्ति का पूरा नाम लिखें। (जैसे तीस्ता जावेद सीतलवाड…, मुझे भी “अंजू गुप्ता रिज़वी” का पूरा नाम आज ही पता चला, इसलिये डेली पायोनियर को धन्यवाद)।

3) हिन्दू साध्वियाँ (उमा, ॠतम्भरा और प्रज्ञा) जैसी भी हों, कम से कम राजनेताओं की तरह ढोंगी और पाखण्डी तो नहीं हैं। (बगैर आरक्षण के आगे बढ़ी हुई महिला शक्ति को सलाम… )

लगता है समय आ गया है, कि कांग्रेस की “बी” टीम तथा “बेशर्म Political Correctness” की ओर बढ़ रही, “भाजपा” का कोई अन्य सशक्त विकल्प खोजना शुरु करना पड़ेगा…क्योंकि दो-दो लोकसभा चुनावों में हार का मुँह देखने के बावजूद, न तो भाजपा ने बरेली दंगा मुद्दे पर कोई आंदोलन-घेराव-प्रदर्शन किया, न ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुसलमानों को 4% आरक्षण दिये जाने का पुरजोर ढंग से विरोध किया है… जब तक भाजपा इस दुविधा में फ़ँसी रहेगी, ऐसे ही पिटती रहेगी…, और फ़िर अंजू गुप्ता रिज़वी हों या कम्युनिस्ट बैकग्राउण्ड वाले सुधीन्द्र कुलकर्णी हों… हिन्दुत्व को “धक्का-अडंगा मारने वाले” भी तो सैकड़ों भरे पड़े हैं…


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46 comments:

पी.सी.गोदियाल said...

"लगता है समय आ गया है, कि कांग्रेस की “बी” टीम तथा “बेशर्म Political Correctness” की ओर बढ़ रही, “भाजपा” का कोई अन्य सशक्त विकल्प खोजना शुरु करना पड़ेगा…क्योंकि दो-दो लोकसभा चुनावों में हार का मुँह देखने के बावजूद, न तो भाजपा ने बरेली दंगा मुद्दे पर कोई आंदोलन-घेराव-प्रदर्शन किया, न ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुसलमानों को 4% आरक्षण दिये जाने का पुरजोर ढंग से विरोध किया है… "

अक्षरस समर्थन करता हूँ !

संजय बेंगाणी said...

भाजपा का विकल्प यानी हिन्दु वोटों का बिखराव! अजिब मुसीबत है....

Suresh Chiplunkar said...

@ गोदियाल जी और बेंगाणी जी -
भाजपा का विकल्प खोजना वाकई मुसीबत तो है ही, हिन्दू वोटों का बिखराव भी होगा, लेकिन दूसरा रास्ता है "भाजपा को सुधारना" जो हम-आप नहीं कर सकते।

अब भाजपा को भी मुस्लिम वोटों की "भूख" लगी है, हिन्दू जायें भाड़ में… ऐसे में उपाय क्या हो? कुछ तो करना ही पड़ेगा… या तो भाजपा को लगातार हरा-हराकर इतना पस्त कर दिया जाये कि उसे "हिन्दुत्व" के वोटों की कीमत पता चले और वह वापस अपने "मूल स्वरूप" में लौटे…।

सुनने में यह अजीब लगता है, लेकिन हिन्दुओं की दुर्दशा, भाजपा का नकलीपन और 6M के हाथों बिके मीडिया के व्यवहार को देखकर लगता नहीं कि "हिन्दू" नामक प्राणी अधिक दिनों तक इज्जत से रह पायेगा…। ऐसे में भाजपा का विकल्प न सही उसका "सुधार कार्यक्रम" तो किया ही जा सकता है… :)

Neeraj नीरज نیرج said...

१. आडवाणी, उमा और अन्य बीजेपी वाले राजनीति करते हैं। इसका मतलब यह कि उन्हें भारतीय संविधान के दायरे में रहकर ही बयान देने होंगे। वे उंगली कटाकर शहीद दिखना चाहते हैं।

२. आपको भी पता है कि एनडीटीवी और अन्य कथित सेकुलरिस्टों को बीजेपी वाले बहुत भाव देते हैं। बाकी समान विचारधारा वाले रिपोर्टरों और एनजीओ के लिए उन्होंने कुछ नहीं किया और ना ही वे उन्हें बुद्धिजीवी मानते हैं। घर का जोगी जोगड़ा आन गांव का सिद्ध। विपरीत ध्रुव में आकर्षण वाली बात है।

३. बीजेपी भी यह जान चुकी है कि जातीय कुष्चक्र मे फंसा हिन्दू समाज कभी एक नहीं हो सकता। हमारी विविधता हमारी एकजुटता में बाधा है इसलिए पालीटिकिल करक्टनेस की लाइन पर चला जाए।

४. मैंने 2002-2004 के दौरान बीजेपी सेंट्रल आफिस के साथ काम किया है और मैं समझ चुका हूं कि हिन्दुत्व का एजंडा इनके बूते की बात नहीं है। आज भी इनके लोगों को सत्ता का नशा है और ये छोटे छोटे द्वीपों पर ही राज कर मस्तिया रहे हैं।

५. पार्टी में व्यवसायिक वर्ग का प्रभुत्व है और वे कांग्रेस से पंगे लेकर चलते धंधे में नुकसान नहीं उठाना चाहते हैं। इसलिए व्यवसायिक हित इन्हें खुला आंदोलन करने से रोकते हैं। सारा कुछ दिखावे के लिए चल रहा है।

नवीन त्यागी said...

सुरेश जी नितिन गडकरी से पहले भी राजनाथ जी ने अध्यक्स पद संभालते ही अपने भाषण में कहा था की अब हिंदी -हिन्दू -हिन्दुस्तान का नारा हिन्दू -मुस्लिम हिन्दुस्तान हो जाना चाहिये .तो अब गडकरी भी स्वीकार कर रहा है की मुसलमान के साथ साथ हिन्दू भी आतंकवादी है.
इसके साथ तो वो वाली बात होने वाली है कि---------
'न खुदा ही मिला न विसाले सनम
न इधर के रहे न उधर के रहे '.
हिंदी में भी एक कहावत है कि धोबी का कुत्ता ना घर का ना घाट का.

नवीन त्यागी said...

सुरेश जी नितिन गडकरी से पहले भी राजनाथ जी ने अध्यक्स पद संभालते ही अपने भाषण में कहा था की अब हिंदी -हिन्दू -हिन्दुस्तान का नारा हिन्दू -मुस्लिम हिन्दुस्तान हो जाना चाहिये .तो अब गडकरी भी स्वीकार कर रहा है की मुसलमान के साथ साथ हिन्दू भी आतंकवादी है.
इसके साथ तो वो वाली बात होने वाली है कि---------
'न खुदा ही मिला न विसाले सनम
न इधर के रहे न उधर के रहे '.
हिंदी में भी एक कहावत है कि धोबी का कुत्ता ना घर का ना घाट का.

Dikshit Ajay K said...

जय श्री राम
हो गया काम
अब कोई भी भोंके हमें क्या फर्क परता है?

nitin tyagi said...

i am agree with your views

बाबा रामदेव जी का भारतीय स्वाभिमान बीजेपी का सशक्त विकल्प हो सकता है |

meraj said...

Dost zara samajhne ki koshish kijiye. Hinduon ka dost aur hitaishi hona koi bura kam nahi hai par bila wajah dusron ka dushman hona zarur bura hai. Is se nuksan kiska ho raha hai? apka , mera, hamara , hum sab ka aur hamarey desh ka.Musalmano ko khuli gali dekar aap mulk me nafrat ki khai ko aur gehra hi kar rahe hain, ye desh bhakti to nahi hi ho sakti. Ishwar hum sabko sadbuddhi de.

विजयप्रकाश said...

बी.जे.पी अब एक चुकी हुई, दिशाहीन पार्टी हो चुकी है.

सौरभ आत्रेय said...

आप काफी अच्छी जानकारी निकाल कर लाए हैं जिससे सीधा ही षड्यंत्र साफ़ हो जाता है. लेकिन भाजपा में वो दम ही नहीं है और इस कथित पालीटिकिल करक्टनेस के चक्कर में पालीटिकिल वीकनेस को प्राप्त हो चुकी है और भविष्य में अधिक हो जायेगी.

भाजपा के इस तरह के लक्षण तो काफी समय से देखने में आ रहे हैं बल्कि मुस्लिम तुष्टिकरण तो उन्होंने सत्ता में (NDA Gov.) आने पर शुरू कर ही दिया था. भाजपा की हार का भी यहीं सबसे मुख्य कारण रहा है लेकिन उसकी बुद्धि में ये बात नहीं आती है और वो भी कांग्रेस बनने की राह पर अग्रसर है , भाजपा का महत्त्व बस इतना ही है जैसे की अन्धों में काणा सरदार अन्यथा दूध के धुले तो ये भी नहीं है ये तो बेचारी हिंदू जनता जानती ही है. निश्चित तौर पर भाजपा का विकल्प ढूँढना होगा लेकिन जैसा नीरज जी ने कहा है हिंदू जातियों में बंटा है इसीलिए किसी नए दल को उनको एकजुट करने के लिए बहुत मेहनत की जरूरत होगी और ये जाति विभाजन ही हिंदुओं के सत्यनाश और विनाश का सबसे बड़ा कारण है.

सलीम ख़ान said...

अजिब मुसीबत है...

सौरभ आत्रेय said...

@meraj

इस लेख में मुसलमानों को गाली कहाँ दी गयी है जरा स्पष्ट करेंगे?

राष्ट्रीयता और हिंदू यदि अपनी बिगड़ती हालत पर चिंतन करते हैं तो इसमें आपके अनुसार मुसलमानों को गाली लग जाती है. इस गाली लगने का कारण भी आप जैसे हिंदू ही हैं जिन्हें हिंदुओं की दुर्दशा नहीं दिखती, प्रत्येक पार्टी मुस्लिम के तलवे चाटने के लिए इतनी तत्पर है जैसे कि ईश्वर उपासना में कोई भक्त लींन होंने के लिए तत्पर हो, जैसे इस पुण्य के काम से वंचित रह जायेंगे. फिर भी आप जैसे लोगो पर कौनसी दुनिया की पट्टी बंधी है जो प्रत्यक्ष स्पष्ट सैंकड़ो मुस्लिम तुष्टिकरण के प्रकरणों को नहीं देख पाते. सच में मुझे तो बहुत ही आश्चर्य जनक लगता है इस तरह का व्यवहार.

Dhananjay said...

क्या कहूँ. सब कुछ तो कहा जा चुका है. कांग्रेस तो पैदा ही देशवासियों को तोड़ने के लिए हुई थी, और इसीलिए कांग्रेस से ज्यादा शिकायत नहीं कर सकते क्योंकि वो अपना पैदा होना सार्थक कर रही है. चिंताजनक बात तो ये है की भाजपा दिग्भ्रमित हो चुकी है. संजय बेंगाणी जी ने सही कहा है की भाजपा का विकल्प याने की हिंदू वोटों का बंटवारा. क्या करें, आगे कुआं; पीछे खाई; और बीच में ये सकुलर भाई...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

कोई स्वीकारे या न स्वीकारे लेकिन सेफ पैसेज और स्पेस खोजना ही अब एकमात्र रास्ता है हिन्दुओं के आगे.

nikhil said...

hahahaha

ab inconvenienti said...

कांग्रेस की “बी” टीम तथा “बेशर्म Political Correctness” की ओर बढ़ रही, “भाजपा” का कोई अन्य सशक्त विकल्प खोजना शुरु करना पड़ेगा…

यही तो हम भी कब से कह रहे हैं. भाजपा हिन्दुओं की नहीं रही, सब चोर साले भर गए हैं.

Ratan Singh Shekhawat said...

अब आपके दिमाग की बत्ती भी जल गई होगी… कि अंजू गुप्ता “रिज़वी” को कहाँ से “प्रेरणा” प्राप्त हो रही है। क्या अब भी कुछ कहने को बाकी रह गया है? इतने समझदार तो आप लोग हैं ही, कि “खिचड़ी” सूंघकर ही पहचान सकें… (अंजू गु्प्ता रिज़वी + शफ़ी रिज़वी + पी चिदम्बरम = सेकुलर खिचड़ी… यह ठीक उसी प्रकार है जैसे कि ईसाई पादरी + वीडियो टेप + NGO + तहलका = सेकुलर खिचड़ी…)

@ वाकई दिमाग की बत्ती जला दी आपने ! "अंजू गु्प्ता रिज़वी + शफ़ी रिज़वी + पी चिदम्बरम = सेकुलर खिचड़ी" इस एक वाक्य ने पूरा माजरा समझा दिया |

त्यागी said...

good. but 4 more year you will have to see all this bullshit.
congress is in power. they bound to divide india and this is the task given to SONIA.
she is doing and we are ONLY watching.
regards
Tyagi

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

भाजपा के एक राष्ट्रीय महामंत्री है मुख्तार अब्बास नकवी . उनकी पत्नी सन्घ के पदाधिकारी की बेटी है . इसी रिश्ते से वह दमाद है भाजपा के . और ऎश कर रहे है . भाजपा के नेता शाहनवाज की पत्नी भी हिन्दु है ,और पुराने नेता सिकन्दर बख्त की पत्नी भी हिन्दु थी .

भाजपा तो मुस्लिम दमादो क सम्मान करती है फ़िर भी मुसलमान साथ नही दे रहे है .....
हिन्दु क्या बेबकुफ़ है जो इन बातो के बाद भी इन्हे मजबुत करने की सोचे .

Neeraj Rohilla said...

Good morning...

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

अंजू गु्प्ता रिज़वी + शफ़ी रिज़वी + पी चिदम्बरम = सेकुलर खिचड़ी
?????

K. S. Dwivedi said...

Suresh Ji,

Namaskaar!!!

Pichhle 1 saal se aapki blog padh rah hoon... Likhna nahi aata isiliye kabhi comment nahi kiya.

Aaj aapse poochhe bina ek harkat kar di hai.. Ek domain register kiya (http://www.सुरेश.co.cc). Isko aapke blog par redirect kar diya hai.

Ye domain free mein mil raha hai. Aap is domain par mail ID bhi config kar sakte hain...

Ummeed hai aapko bura nahi laga hoga.

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

देखिये जब तक आम हिन्दू अपने अधिकारों, संस्कृति, धर्म के प्रति सजग नहीं होगा तब तक कोई भी विकल्प तलासिये सब बेकार जायेंगे | यदि हिन्दू सजग हो तो भाजपा की छोडिये हो सकता है कांग्रेस भी हमारे वोट के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाएगा | रोना इसी बात का है की हिन्दुओं के लिए लढने वाले मुर्ख कहलाये जाते हैं ... क्योंकि आम हिन्दू तो हिन्दू रक्षकों को ही सबसे पहले गरियाता है |

जहाँ तक भाजपा के बेशर्म Political Correctness”की बात है ... भाजपा भी आखिर क्या करे ? आम हिन्दू तो अपने आप को हिन्दू ना कहकर सेकुलर कहलाना पसंद करता है | हिन्दुओं को सेकुलर कांग्रेस ही भाता है ... पिछले ६० वर्षों का इतिहास तो यही कहता है | अब यदि आम हिन्दू जनता जाती वर्ग में बट लालू, सोनिया, मुलायम जैसे घोर हिन्दू विरोधी को वोट देकर जिताता है तो क्या कहा जाए ?

ढेर सारे पढ़े लिखे संभ्रांत हिन्दुओं को अब राउल (राहुल) गाँधी से भारत उदय की आशा है !! क्या किया जाए ? आज भी भाजपा का स्तर गिरने के बावजूद ये कांग्रेस से कहीं बेहतर विकल्प है पर हिन्दुओं को १००% perfect भाजपा चाहिए ... ९०% या ६०% भी है तो नहीं चलेगी .... पर सर से पैर तक भ्रष्ट कांग्रेस को वोट देते समय उनसे perfectness का हिसाब नहीं मागा जाता |

ePandit said...

ओह पता नहीं कितने ऐसे पूरे नाम वाले शख्स अपने एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

नवीन त्यागी said...

नितिन गडकरी = भाजपा गटर में गिरी

मिहिरभोज said...

बंधुओ भाजपा का विकल्प नहीं हिंदुओं के पास और फिलहाल न ही ढूंढना चाहिये(नहीं तो तब तक ये शर्मनिरपेक्ष नालायक देश को बेच बाच देंगे).....इसी भाजपा को सुधरना होगा ......नहीं तो जनता अपने आप सुधार देगी

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

आडवानी का ढुल-मूल रवैया ही भाजपा हो नुक्सान दे रहा है....और फजीहत का कारण भी बन रहा है....

संजय बेंगाणी said...

भाजपा के पास क्या विकल्प है यह भी सोचें.

SANJEEV RANA said...

bjp ke ander pichle 4-5 saal me jitne bhi darame huye h (uma,adwani, jinna,)ye bjp ko le doobe aur ab bachi hui kasar ye mudde poore kar denge.
hinduo ka kya h
lutte rahenge aise hi jab tak ekjut nhi hote

अन्तर सोहिल said...

आडवानी और भाजपा का यही मुगालता हिन्दुओं के बिखराव में सहायक है जी
हिन्दू साध्वियाँ (उमा, ॠतम्भरा और प्रज्ञा) जैसी भी हों, कम से कम राजनेताओं की तरह ढोंगी और पाखण्डी तो नहीं हैं। (बगैर आरक्षण के आगे बढ़ी हुई महिला शक्ति को सलाम… )

प्रणाम स्वीकार करें

अन्तर सोहिल said...

आदरणीय सुरेश जी
एक प्रार्थना है, अगर संभव हो तो कृप्या ब्लाग सैटिंग में साईट फीड में अलाऊ ब्लाग फीड को फुल कर दें, आपका अभारी रहूंगां।

प्रणाम

वीरेन्द्र जैन said...

बन्धुवर,
कुतर्कों की कोई सीमा होती है, आपको अपने काम से घिन नहीं आती?
1-बाबरी मस्ज़िद टूटी थी
2-उसे तोड़ने का माहौल बनाने के लिए आडवानी ने रथ यात्रा कर के दंगे फैलवाये थे, या कह लें हुये थे
3- आडवाणी वहाँ उपस्थित थे
4- वे साफ और नंगा झूठ बोल रहे थे कि मस्ज़िद गिरने पर उनकी आँखों में आंसू थे और सबसे अधिक दुखी थे
5- क्या आपको पता है कि इस सब की उम्मीद करके ही उन्हें प्रधान मंत्री पद का प्रत्याशी बनाया गया था व अब उन्हें विपक्ष के नेता पद से हटा कर एन डी ए की ज़िम्मेवारी दी गयी है
4- अब इसमें आप अंजू गुप्ता के पति के मुसलमान होने को बीच में लाकर विषय को क्यों भटकाना चाहते हो, जबकि भाजपा के कार्यकाल में मंत्री बने सभी मुस्लिम शाहनवाज, मुख्तार अब्बास, सिकन्दर बख्त, और उमर अब्दुला की योग्यता उनकी पत्नियों का हिन्दू होना था।
5- एक बात आपने सही कही है कि भाजपा से तो उग्र हिन्दुत्व वाले/वालियाँ अच्छी हैं, पर आप ठाकरे परिवार को छोड़ गये। अब ये लोग कितने अच्छे हैं वह तो दुनिया को पता है।
6- क्या हिन्दुत्व को आप कहीं से बाँध सकते हैं, या परिभाषित कर सकते हैं? इसलिए केवल मुस्लिम उग्रवाद का विरोध नहीं समग्र उग्रवाद और जन विरोधी नीतियों का विरोध करना सीखिये।
5- भगत सिंह ने बम फैंकने के बाद खुद गिरफ्तारी दी थी ताकि उनके बयान से पूरा देश जाग्रत हो सके और हुआ भी। किंतु संघ परिवार तो अपनी ही नीतियों पर शर्म करता है और सजा से बचने के लिए झूठ पर झूठ बोलता जाता है

सुलभ § सतरंगी said...

कहाँ सेकुलर खिचड़ी और कहाँ राष्ट्र अभिमान की बातें.

दल दलों का देश हो गया है.

SHIVLOK said...

@VEERENDRA JAIN
VEERENDRA JAIN SAHAB को एक प्रयोग करना चाहिए, अपनी मां बहन बेटी को एक सप्ताह के लिए किसी हिंदू मित्र के घर हिंदुओं के मोहल्ले में मेहमान के रूप में रखो और फिर एक सप्ताह के लिए किसी मुस्लिम मित्र के घर मुस्लिमों के मोहल्ले में मेहमान के रूप में रखो और दोनो ही परिस्थितियों में अपने दिल की धड़कनों के अंतर को स्वयं जांचना अपनी मां बहन बेटी को हिंदुओं के मोहल्ले में अकेले भेजने में कोई डर नहीं लगता जबकि मुस्लिम मोहल्ले में अकेले भेजो फिर अपने दिल की हलचल महसूस करो सच समझ में आएगा.

Suresh Chiplunkar said...

आदरणीय वीरेन्द्र जैन साहब,

"घिन" तो नहीं, अलबत्ता पहले संकोच अवश्य होता था, लेकिन जब से दिल्ली और भोपाल में बैठे कुछ स्वानमधन्य पत्रकारों को कांग्रेस और वामपंथी नेताओं के कुकर्मों का खुलकर बचाव करते देखा, धर्मनिरपेक्षता को शर्मनिरपेक्षता में बदलते देखा, भूमाफ़िया-खनन माफ़िया को भी कांग्रेसी-भाजपाई खानों में बाँटना देखा, पत्रकारों को दारू की एक बोतल के लिये बिकते देखा, तभी से वह संकोच भी चला गया, और सोचा कि भले ही लोगों को "घिन" आये लेकिन मैं गन्दगी को साफ़ करने के लिये "विचारधारा" का ही लेखन करूंगा… अब आपको पसन्द नहीं तो मैं क्या कर सकता हूं, मुझे भी ऊपर बताये गये "कु-कृत्य" पसन्द नहीं, लेकिन मैं तो किसी से आग्रह नहीं कर सकता कि वामपंथियों की चमचागिरी मत करो…।

बहरहाल, मुझे ये समझ नहीं आया कि इस पोस्ट में तो मैंने भाजपा को ही "निकम्मा" कहा, आडवाणी की आलोचना की और भाजपा का विकल्प ढूंढने या फ़िर इसे "सुधारने" की बात कही है, तब भी आपको बुरा लग गया? क्या अब मैं राजनैतिक विषयों पर लिखना ही छोड़ दूं?

रही "लव जेहाद" की बात तो जल्दी ही एक पोस्ट में विस्तार से इस बारे में आपको समझाने का "प्रयास" (सिर्फ़ प्रयास) करूंगा…।

आप उमर सहित सभी मामलों में मुझसे वरिष्ठ हैं, इसलिये आप ही बतायें किन-किन कामों को करने में घिन आने की सम्भावना होती है, और वह मुझे करने चाहिये या नहीं…
==========
नोट - (शिवलोक जी की टिप्पणी से व्यक्तिगत रूप से सहमत नहीं, लेकिन फ़िर भी इसे हटाऊंगा नहीं, यह उनके विचार हैं मैं कौन होता हूं, उन्हें बैन करने वाला… सभी प्रकार के विचार आमंत्रित होते हैं… "घिन" वाले भी)

Dhananjay said...

ऊपर राकेश सिंह ने अपनी टिप्पणी में जिन के बारे में कहा है, वीरेंद्र जैन उन्ही लोगों में से एक हैं.

SHIVLOK said...

@SURESH CHIPLUNKAR

What is wrong in my comment?
AND
This is not my thinking and I never think in this way BUT

This is a most practical feeling and psuedo secular like VEERENDRA JAIN can enjoy practically this >>>>> and this is only a sense of expression & nothing more.

HINDU TIGERS said...
This comment has been removed by the author.
भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ऊपर राकेश जी की टिप्पणी बिल्कुल ठीक है. शिवलोक जी की टिप्पणी से भाषा या आवेग की असहमति हो सकती है, लेकिन उस आवेश से तो लाख गुना ज्यादा अच्छा है जिसके चलते डेनमार्क में कार्टून के बनने पर यहां घर फूंक दिये जाते हैं. जिसके चलते लाखों हिन्दू कश्मीर में मार दिये जाते हैं. वीरेन्द्र जी, गोयबल्स..
क्या इतना काफी नहीं है. वीरेन्द्र जी ये बतायेंगे कि क्या मंदिर तोड़कर मस्जिदें बनाई गयीं या नहीं. यदि किसी के घर में कोई जबरदस्ती कब्जा कर ले तो घरवाले को क्या करना चाहिये.

जीत भार्गव said...

भाजपा का विकल्प तलाशना कोइ समाधान नहीं होगा. इससे सिर्फ हिन्दू वोटो का बंटवारा ही होगा. असली हल तो भाजपा को 'सुधारना' है. यदि भाजपा नेता इम्पोर्ट करना छोड़ दे और कैडर तैयार करके उन्हें आगे लाये तो बात बनेगी. दूसरी तरफ संघ को भी अपने प्रतिभावान और नेतृत्व-कुशल स्वयंसेवक भाजपा को देने चाहिए. ताकि वैधारिक प्रतिबद्धता वाले और ईमानदार लोगो के हाथो में भाजपा की कमान आये. इस बार तरुण विजय और किरण खेर को टीवी पर देखा तो आनंद आया. इन दोनों में धार और प्रतिबद्धता देखी. दोनों के सामने सेकुलर भांड मिमियाते नजर आये. ऐसे लोगो को आगे लाना चाहिए. भाजपा की सबसे बड़ी कमी यही है कि वह कोंग्रेसी राजदीप सरदेसाइयो पर भरोसा करती है. जबकि राजदीप का अतीत कोंग्रेस की चमचागिरी का रहा है. भाई नीरज दीवान ने सही कहा है कि भाजपा घर की मुर्गी दाल बराबर समझती है. एक और बात कि भाजपा हिंदुत्व की मार्केटिंग सही ढंग से नहीं कर पाई, मीडिया मैनेजमेंट भी फिसड्डी रही.
आडवानी का जिन्ना को सेकुलर बताने के गहरे निहितार्थ थे. जो हम समझ नहीं पाए. इसा बयान के जरिये वह पाकिस्तान को भी धर्म निरपेक्षता की राह पर लाना चाहते थे. लेकिन इस बात को अपने ही नहीं समझ पाए तो पांचवी फेल बुरी नीयत वाले मीडियाकर्मी कहाँ समझ पाते...?

जीत भार्गव said...

वीरेंद्र जैन को दोष देना अच्छी बात नहीं है...वह आपको पढ़-पढ़कर कुंठित हो गए हैं. जो आपके लिए प्रयुक्त उनकी शब्दावली से ही जाहिर होता है. समझ नहीं आता कि जब ९०% पत्रकार/लेखक वीरेंद्र जैन को सुहाना लगे ऐसा लिख रहे हैं, ऐसे में एकाद सुरेश जी जैसा सूरमा थोड़ा धारदार लिखता है तो उनके पेट में मरोड़ क्यों आती है??
गनीमत है इस बार उन्होंने अपने ब्लॉग का लिंक नहीं दिया.. वरना अपनी मार्केटिंग करके थक गए है, फिर भी पाठक नहीं जुटा पा रहे हैं.

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

हमलोग नाहक में ही वीरेंद्र जैन पे ऊर्जा बहा रहे हैं | वीरेंद्र जैन की पत्रकारिता के दो मुख्य उद्देश्य है :

१. हिन्दू विरोध किसी भी कीमत पे |
(जैन साहब खुद ही फक्र से कहते हैं की उन्होंने भाजपा के खिलाफ ३०० से ज्यादा आलेख लिखे हैं |)

२. कांग्रेस और सोनिया मैडम की जी हजुरी |
( क्या पता मैडम की नजर इनपे पड़ जाए और वीरेंदर जैन को वो अपने टीम में सामिल कर लें | )

JANARDAN MISHRA said...

SURESH JI
jaha tak meri jankari hai des me koi bhi neta midiya ko dhuttkar kar sasan nahi kar sakta, lekin gujrat ke ser NARENDRA MODI des ke ek matra neta hai jinho ne midiya ko kabhi ghas nahi dala, phirbhi vo khub tandurast sasan chala rahe hai, jisse saf hai ki aadmi imandar aur desh premi ho to ushe kisi se darne ki jarurat nahi hai......NAMO NAMAH

Raj said...

BJP ka vikalphy janta party (subramaniam swamy ki),jp ne kahatha ye party firse kahdi hogi ,so janta party se achha ko ho sakta hy

vivek upadhyay said...

aapke lekh sahi me ek nayi disha de sakte hai hamare jaise yuvaon ko,abhi tak hume jo indian print aur electronic media se khabare milti thi unhe sach samajhte the..
ab aapke blogs aur unme diye hue links se hum un sabhi tathyo ka visleshan kar pate hain..
aap yunhi blogs likhte rahe.
humne bhi ek prayas kiya hai is page maadhyam se aapke maargdarshan ki aavashykta hai.