Wednesday, February 24, 2010

इस्लाम की छवि पूरी दुनिया में बुरी क्यों है… शायद ज़ाकिर नाईक जैसों के कारण?…… Zakir Naik, Islamic Propagandist, Indian Muslims & Secularism

एक इस्लामिक विद्वान(?) माने जाते हैं ज़ाकिर नाईक, पूरे भारत भर में घूम-घूम कर विभिन्न मंचों से इस्लाम का प्रचार करते हैं। इनके लाखों फ़ॉलोअर हैं जो इनकी हर बात को मानते हैं, ऐसा कहा जाता है कि ज़ाकिर नाईक जो भी कहते हैं या जो उदाहरण देते हैं वह “कुर-आन” की रोशनी में ही देते हैं। अर्थात इस्लाम के बारे में या इस्लामी धारणाओं-परम्पराओं के बारे में ज़ाकिर नाईक से कोई भी सवाल किया जाये तो वह “कुर-आन” के सन्दर्भ में ही जवाब देंगे। कुछ मूर्ख लोग इन्हें “उदार इस्लामिक” व्यक्ति भी मानते हैं, इन्हें पूरे भारत में खुलेआम कुछ भी कहने का अधिकार प्राप्त है क्योंकि यह सेकुलर देश है, लेकिन नीचे दिये गये दो वीडियो देखिये जिसमें यह आदमी “धर्म परिवर्तन” और “अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकार” के सवाल पर इस्लाम की व्याख्या किस तरह कर रहा है…

पहले वीडियो में उदारवादी(?) ज़ाकिर नाईक साहब फ़रमाते हैं कि यदि कोई व्यक्ति मुस्लिम से गैर-मुस्लिम बन जाता है तो उसकी सज़ा मौत है, यहाँ तक कि इस्लाम में आने के बाद वापस जाने की सजा भी मौत है…नाईक साहब फ़रमाते हैं कि चूंकि यह एक प्रकार की “गद्दारी” है इसलिये जैसे किसी देश के किसी व्यक्ति को अपने राज़ दूसरे देश को देने की सजा मौत होती है वही सजा इस्लाम से गैर-इस्लाम अपनाने पर होती है… है न कुतर्क की इन्तेहा… (अब ज़ाहिर है कि ज़ाकिर नाईक वेदों और कुर-आन के तथाकथित ज्ञाता हैं इसका मतलब कुर-आन में भी ऐसा ही लिखा होगा)। इसका एक मतलब यह भी है कि इस्लाम में “आना” वन-वे ट्रैफ़िक है, कोई इस्लाम में आ तो सकता है, लेकिन जा नहीं सकता (इसी से मिलता-जुलता कथन फ़िल्मों में मुम्बई का अण्डरवर्ल्ड माफ़िया भी दोहराता है), तो इससे क्या समझा जाये? सोचिये कि इस कथन और व्याख्या से कोई गैर-इस्लामी व्यक्ति क्या समझे? और जब कुर-आन की ऐसी व्याख्या मदरसे में पढ़ा(?) कोई मंदबुद्धि व्यक्ति सुनेगा तो वह कैसे “रिएक्ट” करेगा?




अब इसे कश्मीर के रजनीश मामले और कोलकाता के रिज़वान मामले से जोड़कर देखिये… दिमाग हिल जायेगा, क्योंकि ऐसा संदेह भी व्यक्त किया जा रहा है कि लक्स कोज़ी वाले अशोक तोड़ी ने रिज़वान को इस्लाम छोड़ने के लिये लगभग राजी कर लिया था, फ़िर संदेहास्पद तरीके से उसकी लाश पटरियों पर पाई गई और अब मामला न्यायालय में है, इसी तरह कश्मीर में रजनीश की थाने में हत्या कर दी गई, उसके द्वारा शादी करके लाई गई मुस्लिम लड़की अमीना को उसके घरवाले जम्मू से अपहरण करके श्रीनगर ले जा चुके… और उमर अब्दुल्ला जाँच का आश्वासन दे रहे हैं। यानी कि शरीयत के मुताबिक नाबालिग हिन्दू लड़की भी भगाई जा सकती है, लेकिन पढ़ी-लिखी वयस्क मुस्लिम लड़की किसी हिन्दू से शादी नहीं कर सकती। तात्पर्य यह है कि जब इस्लाम के तथाकथित विद्वान ज़ाकिर नाईक जब कुतर्कों के सहारे कुर-आन की मनमानी व्याख्या करते फ़िरते हैं तब “सेकुलर” सरकारें सोती क्यों रहती हैं? वामपंथी बगलें क्यों झाँकते रहते हैं? अब एक दूसरा वीडियो भी देखिये…





इस वीडियो में ज़ाकिर नाईक साहब फ़रमाते हैं कि मुस्लिम देशों में किसी अन्य धर्मांवलम्बी को किसी प्रकार के मानवाधिकार प्राप्त नहीं होने चाहिये, यहाँ तक कि किसी अन्य धर्म के पूजा स्थल भी नहीं बनाये जा सकते, सऊदी अरब और “etc.” का उदाहरण देते हुए वे कुतर्क देते रहते हैं, अपने सपनों में रमे हुए ज़ाकिर नाईक लगातार दोहराते हैं कि इस्लाम ही एकमात्र धर्म है, बाकी सब बेकार हैं, और मजे की बात यह कि फ़िर भी “कुर-आन” की टेक नहीं छोड़ते। ज़ाकिर नाईक के अनुसार मुस्लिम लोग तो किसी भी देश में मस्जिदें बना सकते हैं लेकिन इस्लामिक देश में चर्च या मन्दिर नहीं चलेगा। यदि कुर-आन में यही सब लिखा है तो समझ नहीं आता कि फ़िर काहे “शान्ति का धर्म” वाला राग अलापते रहते हैं? और जो भी मुठ्ठी भर शान्तिप्रिय समझदार मुसलमान हैं वह ऐसे “विद्वान”(?) का विरोध क्यों नहीं करते? वीडियो को पूरा सुनिये और सोचिये कि ज़ाकिर नाईक और तालिबान में कोई फ़र्क नज़र आता है आपको?

पाकिस्तान और अन्य इस्लामिक देशों से लगातार खबरें आती हैं कि वहाँ अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होते हैं, मलेशिया में हिन्दुओं पर ज़ुल्म होते हैं, पाकिस्तान में हिन्दू जनसंख्या घटते-घटते 2 प्रतिशत रह गई है, हिन्दू परिवारों की लड़कियों को जबरन उठा लिया जाता है और इन परिवारों से जज़िया वसूल किया जाता है और हाल ही में पाकिस्तान में तालिबान द्वारा दो सिखों के सर कलम कर दिये गये, क्योंकि उन्होंने इस्लाम कबूल करने से मना कर दिया था, ऐसा लगता है कि यह सब ज़ाकिर नाईक की शिक्षा और व्याख्यानों का असर है। ऐसे में भारतीय मुसलमानों द्वारा ऐसी घटनाओं की कड़ी निंदा तो दूर, इसके विरोध में दबी सी आवाज़ भी नहीं उठाई जाती, ऐसा क्यों होता है? लेकिन ज़ाकिर नाईक जैसे “समाज-सुधारक” और “व्याख्याता” मौजूद हों तब तो हो चुका उद्धार किसी समाज का…। बढ़ते प्रभाव (या दुष्प्रभाव) की वजह से आम लोगों को लगने लगा है कि सचमुच कहीं इस्लाम वैसा ही तो नहीं, जैसा अमेरिका, ब्रिटेन अथवा इज़राइल सारी दुनिया को समझाने की कोशिश कर रहे हैं… और पाकिस्तान, लीबिया, सोमालिया, जैसे देश उसे अमलीजामा पहनाकर दिखा भी रहे हैं…


Zakir Naik, Islam and Zakir Naik, Propaganda of Islam and Terrorism, Quran and its Preaches, ज़ाकिर नाईक, इस्लाम की मनमानी व्याख्या, इस्लामी प्रचार और ज़ाकिर नाईक, कुरान और आतंकवाद, Blogging, Hindi Blogging, Hindi Blog and Hindi Typing, Hindi Blog History, Help for Hindi Blogging, Hindi Typing on Computers, Hindi Blog and Unicode

73 comments:

रंजन said...

bakvaas aadami he.. nahi aadmi nahi he....

Amit said...

विश्वास नहीं होता कि कोई आदमी इतना महामूर्ख भी हो सकता है! क्या यह जाकिर नाइक नाम का आदमी वास्तव में इस्लाम प्रचारक है?

क्या इस्लाम वास्तव में एसा कबीलाई धर्म है जिसमें से बाहर जाने वालों की हत्या कर दी जाय? यदि किसी धर्म को छोड़ना गद्दारी है तो क्या जाकिर नाइक के पूर्वज गद्दार नहीं थे जिन्होंने अपना धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाया?

जो सजा इस्लाम मानने वाले इस्लाम छोड़ने वालों के लिये तय करते हैं यदि यही सजा अन्य धर्म वाले भी तय करने लगें तो सेक्यूलरिये तो अपनी छातियां पीट पीट कर सुजा लेंगें...

Amit said...

सचमुच ये आदमी नहीं है... आदमी तो कतई नहीं है...

Pankaj Parashar said...

जाकिर नाईक को आपने ठीक समझा है. हालांकि आपके अधिकांश पोस्ट्स में आप जिस नजरिये की ताईद करते हैं उसके कारण आपसे सहमत होना बेहद कठिन होता है, मगर जाकिर नाईक के बारे में आपने ठीक लिखा है. यह आदमी अंग्रेजी में बोलकर एक तरफ जहां अपनी कथित आधुनिकता का परिचय देता है, वहीं दूसरी ओर पूरे मुस्लिम समुदाय को मध्यकालीन सोच में ही जमे रहने को उत्साहित करता है.

Pak Hindustani said...

इन महोदय के बारे में पढ़कर मन में एक अजीब सा घिन और डर का भाव उत्पन्न हुआ. ठीक वैसे ही जैसा सड़क पर जाते किसी पागल कुत्ते को देखकर होता है.

मुसलमानों को इस कदर बेइज्जत उनका खुद का ही आदमी कर रहा है.

मुस्लिम इसे कैसे सह रहे हैं? इस प्रकार नफरत के बीज बोने वाले पर तो हिन्दु जनमानस थूकता है. यहां तक कि 'प्रखर हिन्दूवादी' कहे जाने वाले ठाकरे जैसे नेता भी ऐसा घृणास्पद बयान देने की हिम्मत नहीं करते.

मुस्लिमों को आगे आकर इसे समझाना चहिये.

Remesh said...

This Jakir Naik seems to be a Talibani.

Just like a mad dog...

पी.सी.गोदियाल said...

इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा लेकिन ख़ास बुद्धिजीवी वर्ग अगर मेरे एक सवाल का सही और सटीक उत्तर दे दे तो मैं धन्य समझूंगा !
पाकिस्तान की नीव विशुद्ध इस्लाम आधारित थी / है , तो फिर आज क्यों सारा विश्व (islamic and non-islamic both) उस पर थूक रहा है ?

विजयप्रकाश said...

जाकिर की बीसवीं शताब्दी की देह में सोलहवीं शताब्दी की रूह घुस गयी है. ऐसे लोगों का इलाज जरूरी है.

अन्तर सोहिल said...

"फिल्मों में मुम्बई का अण्डरवर्ल्ड माफिया ने कुर-आन पढ रखी होगी जी"
ये भी हो सकता है कि लेखक ने कुर-आन से यह डायलाग चुराया हो

कुर-आन पढने और जानने वाले लोग क्यों नहीं इस आदमी (जाकिर नाईक) को जवाब देते, जो कुर-आन की उल्टी-सीधी व्याख्या करता फिर रहा है

प्रणाम

सुलभ § सतरंगी said...

मैंने जाकिर नाइक को इससे पहले टेलीविजन पर do ek baar सुना हूँ, अंग्रेजी में भाषण अच्छा देते हैं. मैं उनके वाक् कौशल पर फ़िदा भी हूँ. लेकिन उनके कुतर्कों का कोई जवाब नहीं. ये सिर्फ दो ही बात समझते हैं, एक इस्लाम और दुसरा गैर-इस्लाम.

ये कहते हैं, दिनी तालिम के सिर्फ हम जानकार हैं. ये हम कौन कौन है. हर वो मुस्लिम जो सिर्फ नाम का मुस्लिम है, या, मुस्लिम परिवार में जन्म लेता है, या धर्म-परिवर्तन कर मुसलमान बनता है. बाकी कौन हैं(?)

उन्हें पता होना चाहिए की, ६ ठी शताब्दी से पहले भी ये दुनिया पुरखुलुशी से आबाद चल रही थी, और बहुत से सभ्यता पृथ्वी के अलग अलग हिस्सों में दौर रही थी. मानव समुदाय पृथ्वी पर एकमात्र प्रगतिशील प्राणी समूह है. पहले लोगों ने खेती करना सीखा, बैलगाड़ी बनाना सीखा. समुद्र यात्रा करना सीखा. धार्मिक किताब वाचने की परंपरा हाल के इतिहास में शुरू हुई....

दुनिया बहुत पुरानी है दोस्त. कुछ महापुरुष, गौतम बुद्ध, इशु, मोहम्मद, स्वामी विवेकानंद इनको हम इसलिए जानते हैं की इनके साक्ष्य मौजूद हैं.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अभी भी कुछ बाकी रह गया है क्या?
आवश्यकता यह है कि महफूज जी जैसे आधुनिक और सही सोच रखने वाले लोगों को मुस्लिमों के नायक और नेता के रूप में आगे लाया जाये.
जाकिर जैसे लोग तो विशुद्ध तालिबानी जल्लाद हैं.
मुस्लिम भाइयों बाहर निकलो इस कट्टरवाद से
और महफूज जी जैसी सोच विकसित करो. यह
कठमुल्ले आप लोगों को अंधेरी गुफा में धकेलना चाहते हैं.

संजय बेंगाणी said...

किसी वैज्ञानिक, उपदेशक वगेरे की टिप्पणी नहीं आई अभी तक? या फिर सारा ज्ञान व उपदेश की जरूरत हिन्दुओं को ही है?

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

एक उपलब्धि और कि पाराशर जी सहमत तो हुये आखिर किसी मोड़ पर अन्यथा....

अजय मोहन said...

निःसंदेह मैं कई बार आपसे असहमत रहा हूँ लेकिन इस्लाम का जो रूप ये नेता और वक्ता दिखाते हैं वह कम से कम हमारे देश में तो हरगिज स्वीकार्य नहीं है। ज़ाकिर नाइक पहले बहत्तर फ़िर्कों में बँटे मुसलमानों को तो समेट कर एक कर लें फिर आगे की रस्साकशी करें।
एक बात समझ में नहीं आती कि जिस तरह हमारी प्राचीन परंपरा में शास्त्रार्थ हुआ करते थे आज उस तरह के शास्त्रार्थ के लिये सनातन धर्म के जानकार इन महोदय के शिविरों में क्यों नहीं जाते?भयभीत रहते हैं या कोई कूटनीतिक कारण रहते हैं?यदि हो सके तो आप भी इस विषय पर कलम चलाएं।

शंकर फुलारा said...

एक कहावत याद आ रही है की साधारण मुसलमान से पढ़ा लिखा मुसलमान ज्यादा खरनाक होता है. ये एक बार और सिद्ध हो रहा है. मुसलामानों को अपनी सोच को आज के नजरिये से सोचना होगा.

दिवाकर मणि said...

जाकिर नाइक जैसे दोगले धर्मोपदेशकों(?) के लिए सबसे अच्छी जगह यदि कोई हो सकती है तो आगरा-रांची इत्यादि में स्थित पागलखाना. ओ म्लेच्छ जाकिर !! जाके पहले अपना इलाज करा, फिर बकवास करना.

K.D.__ said...

ज़ाकिर नाईक से खिलाफ कोई कारवाई नही होगी
जब उसके चेले अमेरिका पर कोई हमला करेंगे तो भारत सरकार कूछ करेगी क्यूं की
अमेरिकन आदमी की जान की किमत भारतीय आदमी के जान की किमत से जादा है
ये सिर्फ अमेरिकन सरकार की नही लेकिन भारत सरकार की भी सोच लगति है


जब पुणे शहर पर हमला हुआ तो चिदंबरम ने कहा की कूछ भी हो जाए हम पाकिस्तान से शांतता चर्चा चालू करेंगे क्युंकी पाकिस्तान के कूछ दहशद वादी गुट ये चर्चा ना हो इस लिये ये हमले कर रहे है हम उनकी इच्छा कभी पुरी नही होने देन्गे

मतलब भारत मैं कितने भी हमले हो जाए तो भी चलेगा कितनी भी जाने जाए तो भी चलेगा

ये है हमारी जान की किमत

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

इस लम्पट को भाव देने का क्या मतलब?!

आनंद जी.शर्मा said...

सभी मत, पंथ, सम्प्रदाय परिभाषाएं (Definitions) हैं जो जीवन जीने का तरीका बताती हैं l परिभाषाएं (Definitions) किसी न किसी विद्वान् या मक्कार या ताकतवर द्वारा अपने अभीष्ट की सिद्धि के लिए तत्कालीन देश (Place Geography) , काल ((Period, Time) परिस्थितियों / मजबूरिओं (Prevailing Situation) और अर्जित (Acquired ) / आरोपित (Imposed) ज्ञान (Knowledge) / अज्ञान (Ignorance) के आधार पर बनायीं जाती हैं l
प्रकृति ने अपनी संपदा का वितरण सामान रूप से नहीं किया है - बहुत भेदभाव किया है l प्रकृति ने अति प्रसन्न होकर भारत भूमि पर अपनी संपदा न्योंछावर की है l भारतमाता के सपूतों ने भी प्रकृति प्रदत्त संसाधनों और अपने श्रम, कौशल, बुद्धि के समन्वय से भारत भूमि के भंडार भरे l भारत की संतानों में विश्वास, प्रेम, करुणा, वात्सल्य, सदभाव, परोपकार, त्याग, जीवनदान, प्रकृति संरक्षण, प्राणी मात्र पर दया इत्यादि सकारात्मक भाव (यह सब भी परिभाषाएं हैं) सहज और स्वाभाविक रूप से - अनुवांशिक रूप से - विद्यमान रहते हैं और इन्ही भावों से प्रेरित कर्म भारत के मत, पंथ, सम्प्रदायों के मूल सिद्धांतों के रूप में परिभाषित किये गए हैं l इसीलिए सर्व विदित है - इतिहास साक्ष्य है - भारत ने कभी भी किसी पर आक्रमण नहीं किया l चूँकि प्रकृति ने भारत को दिया ही दिया है - इसलिए भारतीय भी प्रकृति से प्रेरणा ले कर दान देते ही रहते हैं l आज तक विदेशी आक्रमणकारी भारत को लूट रहें हैं और भारत के सपूत भी सहर्ष लुटा रहें हैं - दान दे रहें हैं l
उपरोक्त परिस्थितियों के सर्वथा विपरीत - जिस स्थान पर प्रकृति ने खाने पीने के लिए कुछ न दिया हो - उस स्थान पर जीवित रहने के लिए मनुष्य को हिंसक पशुओं से प्रेरणा लेनी पड़ती है l उस स्थान के लोग जीवन निर्वाह के लिए अविश्वास, घृणा, क्रोध, झूठ, कपट, प्रपंच, लूट, अपहरण, बलात्कार, आक्रमण, हत्या इत्यादि कर्मों को सहज और स्वाभाविक रूप से स्वीकार कर लेते हैं और यही उनके मत. पंथ, संप्रदाय के मूल सिद्धांतों के रूप में परिभाषित किये जाते हैं l
परन्तु प्रकृति भी न्याय अवश्य करती है l जिस स्थान पर खाने पीने को खूब दिया है - वहां के लोगों को अक्कल रत्ती भर की नहीं दी - क्योंकि अक्कल होती तो वे एकदम छोटी छोटी, बचकानी, बेहुदी, निरर्थक बातों पर आपस में ही न लड़ते बल्कि संगठित हो कर विदेशी आक्रमणकारिओं से युद्ध कर अपनी मातृभूमि की रक्षा करते l
इसके विपरीत - जिस स्थान पर प्रकृति ने खाने पीने के लिए कुछ न दिया - उस स्थान पर लोग विद्वान् न सही परन्तु अति चालाक, सुसंगठित, दुस्साहसी और उद्येश्य के प्रति पूर्ण समर्पित होते हैं l
इतिहास साक्ष्य है कि सीधे सादे १० विद्वान् + खाए पिए १० शिथिलमति = २० लोग मिल कर भी १ शातिर मक्कार का मुकाबला नहीं कर सकते l भारत के लोग आक्रमणकारिओं को सिर्फ पानी पी पी कर कोस सकते हैं बस - इस से अधिक कुछ करने कि क्षमता न तो थी और न है l दूसरों को कोसने से पहले अपने गिरेबान में झाँकने कि जरुरत है l विदेशी आक्रमणकारी अपने अपने स्वधर्म का पालन कर रहें हैं - अधर्मी तो हम हैं जो स्वधर्म भूल कर खतरों को अनदेखा कर रहें हैं - ऑंखें मूंद कर सोने का नाटक करते हुए l

safat alam taimi said...

यह बात नोट कर लें कि सही मुस्लिमान के वजूद का उद्देश्य शान्ति की स्थापना है। वह शान्ति के लिए ही जीता है। कुरआन ने मानव जीव का सम्मान इतना किया कि किसी एक इन्सान की हत्या को पूरे मानव की हत्या क़रार दिया है(सूरः माइदा 32) और शान्ति दूत जो सम्पूर्ण संसार के लिए दयालुता थे (अंबिया107) ने कहा कि जो कोई इस्लामी देश में रहने वाले किसी गैर-मुस्लिम की हत्या कर दे वह स्वर्ग की सुगंध भी न पाएगा।( बुख़ारी)
इस पर सारे मुसलमान सहमत हैं बल्कि इस पर शत-प्रतिशत विश्वास रखते हैं। यह भी नोट कर लें कि तालिबान की गतिविधियों से इस्लामी नियम नहीं बदल सकता। इस्लामी नियम जहां भा लागू होगा वहाँ शान्तिपूर्ण समाज की स्थापना होगी।
इस्लामी सिद्धान्त को समझने का प्रयास करें और अज्ञानता में कोई बात न करें। यही मेरा अनुरोध होगा सुरेश भाई तथा उनके समान दूसरे लोगों से। ईश्वर का आप सब पर दया हो।

safat alam taimi said...

इस्लाम ही सारे मानव का धर्म है। यही भूला हुआ पाठ डा0 ज़ाकिर नाइक पढ़ा रहे हैं। हमारी अमानत हमारी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं। हम सत्य से दूर हो चुके हैं। आखिर क्यों इस सत्य पर लिपा-पोती करके लोगों को अंधकार में रखना चाहते हैं।

ज़रा सोचिए कि सारे मानव में चार प्रकार की समानताएं पाई जाती हैं (1) सबका सृष्टिकर्ता केवल एक ईश्वर है (2) सारे मनुष्य एक ही आदि पुरूष की संतान हैं (3) मानव की रचना एक प्रकार की धातु से ही होती आ रही है (4) पैदा होने का नियम भी एक ही है।
यह सारी समानताएं बताती हैं कि मानव का धर्म भी एक ही होना चाहिए। और एक है भी इसे जानने की आवश्यकता है यारो...

SHIVLOK said...

IS SIRFIRE KO KOII

SWAMII MAHFOOJ KE BLOG PAR BHEJO

JO SAMJHATE HAIN

ISLIYE SIRF PREM HII KARNA CHAAHIYE

http://lekhnee.blogspot.com/2010/02/blog-post.html

SHIV RATAN GUPTA
9414783323

the said...

हा-हा-हा...ये लो, ज़ाकिर नाइक के चेले साहब आ गए. ये जनाब बता रहे हैं कि सभी मानव एक हैं और साथ ही कह रहे हैं कि इसलाम ही सही है, बाकी सब गलत है, इसलिए सब इसलाम अपना लो और अपना जीवन सुधार लो. कोई इनसे पूछे कि यह "सत्य" इन्हें किसने बताया? हा-हा-हा. बंद दिमाग की भी हद होती है. यहां तो लग रहा है कि दिमाग ही नहीं है. सचमुच सुरेश जी, आपके लेख पढकर खून खौलने लगता है और जो तनाव होता है, वह सारा तनाव जनाब सफ़ट आलम टैमी जैसों की टिप्पणियां पढकर दूर हो जाता है. हा-हा-हा. कितनी अच्छी बात बताई है सफ़ट साहब ने. मेरे मन में मानव के इस "एकमात्र" धर्म के बारे में जानने की और उत्सुकता जन्मी है.

safat alam taimi said...

प्रिय मित्रो! आप सब हमारी बुद्धि पर अवश्य हंस सकते हैं और आप को इसका इख्तियार है पर मैं तो अपनी बात नहीं कर रहा आपके ईश्वर की बात कर रहा हूं। उस ईश्वर की,जिसे माननते तो सब हैं परन्तु पहचानते बहुत कम लोग हैं। इसी संदेश की ओर तो वेदों ने हमें निमंत्रन दिया है। हमारा काम परिचय कराना है। आपकी अमानत आपकी सेवा में प्रस्तुत करना है। मनवाना हमारा कर्तव्य नहीं। हम किसी को इस्लाम स्वीकार करने को नहीं कहते। क़ुरआन में है ( धर्म के सम्बन्घ में कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं) लेकिन जिसको आपसे प्रेम होगा वह आपकी धरोहर का आपसे तो परिचय अवश्य कराएगा। इसके लिए आप उसे पागल और दीवाना का नाम दें, उसकी बुद्धि पर हंसें तो यह आपको इख्तियार है, स्वतंत्रता पर प्रतिबंध नहीं। धन्यवाद

Ratan Singh Shekhawat said...
This comment has been removed by the author.
Ratan Singh Shekhawat said...

वोट कट न जाये इसी डर से सेकुलर सरकार इस लम्पट को झेल रही है |

Ratan Singh Shekhawat said...

हा हा हा ... सफत आलम बढ़िया ख्याल पाल रखें है !! लोग सोते हुए सपने देखते है तुम लोग जागते सपने देख रहे हो | जिस धर्म के अनुयायियों ने पुरे विश्व को आतंक के साये में डाल रखा है वह शांति का धर्म ! सबसे बढ़िया धर्म !

जो धर्म अपने अनुयायियों को शांति का पाठ पढ़कर शांत नहीं रख सकता वह क्या सबसे अच्छा होगा ?

EMRAN ANSARI said...

ISLAM IS MOST MISUDERSTOOD RELIGION .... & UPTO A GREAT EXTENT WE MUSLIMS ARE LIABLE FOR THIS THING.

Ghost Buster said...

यहाँ जाकिर नाइक की बोलती बंद होती है:

इस्लाम त्यागने की सजा मौत मुक़र्रर है. लेकिन फिर भी बहुत बड़ी संख्या में लोग इससे बाहर जाने की हिम्मत दिखा रहे हैं. इनमें से सबसे बड़ा नाम है अली सिना का.

अली सिना ईरान में एक मुस्लिम परिवार में जन्मे और इस्लामी वातावरण में ही जिए. लेकिन उम्र के साथ जब समझ में इजाफा हुआ तो उन्होंने महसूस किया कि इस्लाम दरअसल एक "खतरनाक कल्ट" है जो न सिर्फ स्वतन्त्र संसार के लिए खतरा है बल्कि अपने स्वयं के अनुयायियों को भी आतंकित करके जकडे रखता है. इसमें अपने विरोधी विचारों को सहन करने का कतई सामर्थ्य नहीं है और इसका एकमात्र उद्देश्य दुनिया भर से अन्य सभी रिलीजंस और विचारधाराओं का सफाया करके सातवीं शताब्दी के अरबी कल्चर की स्थापना करना है.

उन्होंने इस्लाम को त्याग दिया और कुछ समान विचार वाले पूर्व-मुस्लिमों के साथ मिलकर एक मुहिम प्रारंभ की जिसे फेथ-फ्रीडम इंटरनेशनल का नाम दिया गया. आज ये दुनिया कि सबसे ज्यादा देखी-पढ़ी जाने वाली वेबसाइट्स में से एक है.

http://www.faithfreedom.org

यहाँ जाकिर नाइक जैसों की सभी बकवास का जवाब मिल जाएगा. दुनिया भर में इस्लामवादियों द्वारा फैलाया जा रहा धुंआधार प्रोपेगेंडा यहाँ बुरी तरह मुंह की खाता है.

अली सिना वर्तमान में केनेडा में रहते हैं.

Common Hindu said...

Hello Blogger Friend,

Your excellent post has been back-linked in
http://hinduonline.blogspot.com/

- a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu
- Hindu Online.

डॉ महेश सिन्हा said...

समस्या ये एक व्यक्ति नहीं पैदा कर रहा है यह एक गिरोह है जो इस देश के बढ़ते कदमों को रोकना चाहता है . हमारी मजबूरी यह है की आज एक दोस्त है जिसने हमेशा हमारा साथ दिया लेकिन हम हमारे झोठे सिद्धांतों को अपना कफन बनाये ढोते रहे .

एक महफूज से कुछ नहीं होगा
अगर इस देश की दिशा बदल्नि है तो सबको अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्रों से बचना होगा तभी हम महफूज होंगे .

SHIVLOK said...

NA HINDU
NA MUSALMAN
NA ISAAII

IS DUNIYA KA SABSE ACHCHAA DHARM HOTA HAI

JEEO0 AUR JEENE DO

IS DHARM KO MUSALMAN NAHIN JAANTE
ISILIYE SARII DUNIYA KE LIYE ISLAAM KHATRA BAN CHUKA HAI

JAKIR NAIIK AUR SAFAT JAISE LOG TO IS DUNIYA KE LIYE ISLAAM SE BHII BADA KHATRA HAIN

SHIV RATAN GUPTA

RAJENDRA said...

jakir naik jese log islaam ko kitnee bulandi par le jayenge yeh sochna un musalmaano ka kaam hai jo use sir par uthae phirate hain

K.D.__ said...

@ safat alam taimi
below is u r thots

यह बात नोट कर लें कि सही मुस्लिमान के वजूद का उद्देश्य शान्ति की स्थापना है। वह शान्ति के लिए ही जीता है। कुरआन ने मानव जीव का सम्मान इतना किया कि किसी एक इन्सान की हत्या को पूरे मानव की हत्या क़रार दिया है(सूरः माइदा 32) और शान्ति दूत जो सम्पूर्ण संसार के लिए दयालुता थे (अंबिया107) ने कहा कि जो कोई इस्लामी देश में रहने वाले किसी गैर-मुस्लिम की हत्या कर दे वह स्वर्ग की सुगंध भी न पाएगा।( बुख़ारी)
इस पर सारे मुसलमान सहमत हैं बल्कि इस पर शत-प्रतिशत विश्वास रखते हैं।

1)सारे मुसलमान सहमत हैं बल्कि इस पर शत-प्रतिशत विश्वास रखते हैं।
पहले सारे सहमत है का मतलब तय करो अगर पाकिस्तान के मुसलमान उसमे आते है तो बताओ की वहाँ क्यूँ नॉन-मुस्लिम को मारते है


second point
इस्लामी नियम जहां भा लागू होगा वहाँ शान्तिपूर्ण समाज की स्थापना होगी।

2)दुनिया में ऐसे नियम कॉनसे मुस्लिम देश में लागू हुए है और वहाँ शांति ही शांति है बताइए और अगर ऐसा कोई देश नही है तो क्यूँ मुस्लिम देश भी ये क़ानून क्यूँ लागू नही करते

सलीम ख़ान said...

सुरेश अब तुम भौकने के लिए स्वतंत्र हो क्यूंकि मैं और मेरे जैसे कुछ लोगों ने तुम पर रहम कर रखा है. तुम जैसों को तो शाहरुख़ ख़ान जैसे सिरफिरे से भी नफरत ही जबकि वह इस्लाम का बिलकुल भी पनाल नहीं करता, और तुम्हें उससे नफरत इसलिए है क्यूंकि वह शाहरुख़ है. ज़ाकिर नाइक जैसे महान भारतीय पर तुम और तुम जैसे चश्माधारी इत्यादि लम्पटों की टिप्पणियां देख कर ही मैं समझ गया (नाम नहीं लूँगा नहीं तो ब्लॉगर ज़ाकिर भाई की आफत हो जायेगी) कि जब "वे" पढ़ लिख जाते हैं तो अति साम्रदायिक हो जाते हैं.

तुम्हारी बताई गई बातें सर्वथा ज़ुबान से हिला कर कहे गए शब्द है; जैसे अगर मैं कहूँ कि "मैं कल शाम को आइसक्रीम खाने चंद्रमा पर जाऊंगा और फिर शादी के बाद हनीमून मनाने मंगल ग्रह पर"

खुश हो लो और मैं और मेरे जैसे कुछ लोगों ने तुम पर रहम कर रखा है. तुम लोग नफ़रत फ़ैला कर, आतंक फ़ैला कर अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहते हो. तुम कहते हो कि फ़लां ख़बर को फलां खबर से जोड़ कर देख लो आश्चर्य में पढ़ जाओगे आदि आदि.

कर लो जितना आतंक कलम से करना हो इसमें तुम्हारी गलती नहीं है यह तो चलन है; पिछले डेढ़ सौ साल में एक दिन में औसतन दर्जन भर से ज़्यादा किताबें इस्लाम के खिलाफ़ छपी गयी हैं और छपी जा रहीं है. और इस्लाम है कि भारत में तो फ़ैल ही रहा है; खुद अमेरिका में भी 149% की दर से फ़ैल रहा है. कभी सोची है इसकी वजह!!!!!!!!!!!!!!!!

तुम और तुम जैसे कथित चश्माधारी और ग़ैर-चश्माधारी (अंधे) ब्लोगरों के लिए खुला चैलेन्ज है, मेरी तरफ से !!!

K.D.__ said...

@ सलीम भाई


तुम और तुम जैसे कथित चश्माधारी और ग़ैर-चश्माधारी (अंधे) ब्लोगरों के लिए खुला चैलेन्ज है, मेरी तरफ से !!!

चॅलेंज तो देते हो मगर कौन सा वह तो बताते जाओ हमेशा की तॅरहा पढने वाले को कूछ भी नही समझ राहा की चॅलेंज कोनसा बॉल रहे हो

talib د عا ؤ ں کا طا لب said...

jis tarah quraan ko uske sandarbhom ko kat kar samjha jaata hi.yahi haal is mazmoon me hai..zakir naik sanatan dharm ki hi baat karte hain lekin sahi sanatan dharm ki..wahi ek dharm hai aur baaqi to bhatak gaye aur sahi sanatan dharm ka antim sahi roop islam hai.

hindi ka ek shaayar hai rajesh joshi unhon ne kaha hai unki satra ko thodha tabdili k saath likh raha hoon.mahfooz sahab k liye

JO RSS K NA HONGE MAARE JAAYENGE!!!

Ghost Buster said...

एक लिंक और देना चाहूंगा उन सभी भोले लोगों के लिए जो इस्लाम की हकीकत से नावाकिफ हैं और इस्लामिक प्रोपेगेंडा के आसान शिकार हैं. यदि इस्लाम के प्रारंभिक इतिहास और मध्ययुग में उसके वैश्विक विस्तार की घटनाओं पर नजर डालें तो समझ में आ जाएगा कि इस्लाम और आतंकवाद पर्यायवाची शब्द हैं. वास्तव में तालिबान और अन्य इस्लामिक आतंकवादी संगठन ही इस्लाम के सच्चे अनुयायी हैं.

इस्लाम के बारे में सब कुछ सही सही जानने समझने के लिए इस विकिपीडिया लिंक को देखें:

विकीइस्लाम

अभी तक आतंकवादी तकनीकों के इस्तेमाल से इन सब बातों/विचारों/चर्चाओं पर एक तरह का बैन इम्पोस किया जाता रहा है. लेकिन सूचना तकनीकी के विस्फोट के युग में अब इन बातों को ढांका/छुपाया नहीं जा सकता. बगैर इंटरनेट के शायद इस्लाम दो-तीन सौ वर्ष और चलता पर अब इसकी उम्र सौ वर्ष से ज्यादा नहीं बची है. आवश्यकता केवल इसकी असलियत को ज्यादा से ज्यादा लोगों पर उजागर करने की और उस पर चर्चा करने की है. सभी समझदार इंसानों का योगदान अपेक्षित है.

रंजना said...

अपनी दुरावस्था के लिए यह पंथ और इसके अनुयायी स्वयं ही जिम्मेवार है और रही सही कसर हमारी सेकुलर सरकार पूरा कर रही है...
काश कि ये अपने सोच समझ को वृहत्तर कर पाते .... अपनी आँखें खोलकर वास्तविकता को देख परख पाते...

निशाचर said...

प्रोफाइल तो सलीम का है लेकिन बोल कैरानवी रहा है. चेले का कुछ तो असर गुरु पर भी होगा ...............

खैर तकरीबन सब "अमन के फ़रिश्ते" तो आ लिए लेकिन उनके भोंपू अभी तक दिखाई नहीं दिए........ शायद "नेपथ्यलीला" में व्यस्त होंगे:)

Neeraj नीरज نیرج said...

ज़रा इधर देखिए कितना महिमामंडित किया जा रहा है यहां ज़ाकिर नायक को.. एनडीटीवी पर शेखर गुप्ता के साथ
http://www.youtube.com/watch?v=Qyxn2L1Ag4Q

Sam said...
This comment has been removed by the author.
Sam said...
This comment has been removed by the author.
Sam said...

Islam America mei 149 % ki rate se badh nahi raha hai fail raha hai..iska reason hai ki " Musalman kahte hai ki "hum 5 hamare 25"....jabki hamare hindustani kahte hai ki "ham 2 hamare 2".......yahi karan hai ki hum hindustaniyon ko ye log daba rahe hai......baaki tou rajnetaon ko apna dhanda bhi tou chalana hai bhai varna unka tou pariwar hi bhuka mar jaayega jinmei unke paltu kutte bhi shamil hai.......

Dikshit Ajay K said...

सुरेश भाई, तुम्हारी एक बात मुझे बिलकुल पसंद नहीं है की जैसे ही गली मैं कोई कुत्ता भोंकता है तुम पत्थर ले कर उस के पीछे भागने लगते हो. यहाँ तक तो ठीक है, पर तुम्हारी देखा-देखी मेरे जैसे लोग भी पत्थर फकेने और चिल्लाने लगते हैं. इतने गाली देते लोगों की भीढ़ देख भी उस को बेकार का प्रचार मिल जाता. इन तरह के लोग बहुत चालाक होते हैं और विरोधिओं मैं से कुछ लोगों को लालच दे कर खरीद लेते हैं जो हमारे समाज में रह उस की ही नीव को खोकला करते हैं. इन से और इन के प्रोपोगंडे से बचने का सब से बेहतर उपाय है की कुत्ता भोंके तो किनारे से निकल जाओ उस पर पत्थर फकने या चिल्लाने से भी उस का प्रोचार होता है. कोई सुने गा नहीं तो खुद ही दम दबा कर साइड मैं बैठ जाई गा

जीत भार्गव said...

Jakir Nayak, Javed Akhtar, MF Husain are the another face of Taliban.

मिहिरभोज said...

बगैर इंटरनेट के शायद इस्लाम दो-तीन सौ वर्ष और चलता पर अब इसकी उम्र सौ वर्ष से ज्यादा नहीं बची है. .......सौ प्रतिशत समर्थन्.....इन सावन के अंधों को कौन समझाये,,....सही बात तो ये है कि इस्लाम एक ऐसी अंधी गुफा है जिसमें घुसने के बाद व्यक्ति को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता हैं.....और वो फिर उस अंधेरे को ही सच मान लेता हैं.....ठीक है ....इनके लिए अंधेरा कायम रहे......

safat alam taimi said...

मिहिरभोज जी
इस्लाम ही सारे मानव का धर्म है। यही भूला हुआ पाठ डा0 ज़ाकिर नाइक पढ़ा रहे हैं। हमारी अमानत हमारी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं। हम सत्य से दूर हो चुके हैं। आखिर क्यों इस सत्य पर लिपा-पोती करके लोगों को अंधकार में रखना चाहते हैं।

Arvind Mishra said...

इसलिए ही मैं नास्तिक हूँ -घोषणा नहीं करता पर अब कर रहा हूँ -और मुझे किसी भी धर्म के विकृत रूप से घृणा है !
हमने मानवीयता को ही नहीं ईश्वरत्व को भी गन्दा कर डाला है-उबकाई आती है ऐसे कुंद दिमाग लोगों से !

usta said...

Agar muslim krur hote to HINDUSATAN pe 1000 se jiyada years tak yahan shasan kiya hai to aaj Ham log aise nahi hote sab muslim hote.sadiyon purane mandir aur math nahi hote itihas ko bigadne ka kaam na karo. kiyun tum log bhole bhale logon ko islam ke bare me galat jankari de rahe ho

डॉ महेश सिन्हा said...

यही तो समझ नहीं आया इतने साल राज करने के बाद भी गरीब कैसे? की आरक्षण की हद तक आ गए

Rajendra jangid said...

AAP Likhte Rahiye Chiplunkar sahab, ye Salim jaise dogale kutte aise hi bhonkenge, Kyunki Inlogo ka ek hi makasad hai Hinduatan Ko pakisthan kaise banaya jaye.. sale harami kahi ke.. ye TURK aur KATHMULLE hai kya cheez Lutere hai, hamare desh me lutere ban ke aaye the.. ab to bas ek hi UPAY Bacha Hai.. Inki @@~##&$*@@ Par Lat mar ke inko bahar nikala, Mauka MIla to ek do ko jaroor hi naptaunga..

SADHUVAAD

yusufkhan said...

salaam tum sab gade ho ek aadmi ne kuch bhi likha or tum sab ne ouse shi maan liya vakeme tum hindu bevkuf hote ho hamesase gulami ki aadat hai tum logo sabse pahle tumhe chahiye ki jo ye likh rahaa hai kon hai ye juta hai ya sach aese hi camenent nahi karnaa chahiye aek bhay yehape kah rahaa hai ki muslmano ko es dess se nikaldena chahiye tere baba ka hai ye dess is dess pe hamne 1000salo tak hukumat ki hai tum se jeyada es pe hak hamara hai

yusuf khan saudi binladin group
{riyadh}saudi areb

yusufkhan said...

tum sab ki maaa chod duga me akelaa kafi tum logo ke liye

irshad said...

irshad...

i jus want to say all of u gys..that,at least follow the common things..given by our religons....!!!

irshad said...

plz..understand the islam first...and then comment....

irshad said...

mr jakir naik means not the islam.....agar islam ko jan na hai...to muhmmad(s.a.w)ne kaise jindagi gujari hai..ye jan lo....try to live the life like muhmmad(s.a.w)then and then y come wahat is the islam....and what he says....

sazidhusain said...

ye to achchi bat hai islam schcha hai . mai zyad pada hua ho nahi .ye zanta hu jo bate islam me hai aur kisi me nahi (khane, pina saf safai rahen sehen shadi ) hindo me kaha hai aisa sare niym aadmi ke hai ek sabal - ram ne kaha kaha ki meri pooja karo. sudher jao

P K Surya said...

kuran kee haqiqat to esi se samne ati he kee ye log apne bachcho se etna krur tarike se pes ate hen bachpan me he masoom bachcho ka khatna karte he Ishwar ke diye sarir se khilwar karte hen jo musalman apne bachche ko etna dard de sakte hen, unke muh se Shanti, ahinsa kee bat shobha nahi deti. mai kuran roj padhta hun ek se ek baikuf wali bat likhi he, tabhi mai sochta hun mere kai sare muslim dost Geeta kyon padhte hen unhe hindu riti riwaj kaise pata he ya uspe kyon visvas karte hen, kyonki Mushlim bhai log Humare sabse mahatwapurn kitab Geeta me Kewal sahi Karm ko sabse bada Dharm bataya gaya he, rahi bat Sri Ram Sri Krishna ko Bhagwan manne wali bat to ye humare Mahapurus he Sri Ram ko Maryada Purushotam Ram, Sri Krishna ko Yogeswar Krishna kaha jata he. or han Bhagwan to hum apne atithi ko bhi kahte hen Hindu me sabse bada bhagwan Mata Pita or Guru(teacher) ko mana gaya he, Hindu Dharam he ek aisa Dharam he jahan kaha jata se Sarwa Dharm Hitaya Sarwa Dharm Sukhaya.... koi jor jabardasti nahi he ki ap Bhagwan ko mano ya na mano puja karo he mandir jao he jao kyonki Vaid ho ya upnisad ya Geeta Sabse bada Dharm Insaniyat or SAHI KARMA ko mana gaya he... Humare sabse bade Vaid Mantra Gayatri mantra ka matlab samjhne k bad pata chalega kee hindu Dharma kya hota he--- 'We meditate on that most adorable, desirable and enchanting luster and brilliance of our Supreme Being, our Source Energy, our Collective Consciousness….who is our creator, inspirer and source of eternal Joy. May this warm and loving Light inspire and guide our mind and open our hearts,

AKS said...

DOSTO ISLAM SHANTI WALA DHARM HAI ISMEN KOI SHAK KEE GUNJAISH NAHIN
LOGON KEE BURAIYON KO KISI DHARM SE NA JODA JAYE ISLAM HAESHA JINDABAD RAHEGA

Anonymous said...

chilu teri tarah tere saathi bhi chill poon karte rahte hain.karenge kyu nahi iske badle me moti moti rakam jo mil rahi hai.ab jiski khaoge to nibhaani padegi. hinduo ko bewkof banakar tum to bakayda madad bhi maante ho.tumhare blog me likha hai.lekin tum logo ki dukaandari jyaada dino tak nahi chalne wali yah baat tay hai......

amjad said...

salam, agar aaplog Dr Zakir Naik ki kisi bat se asahmat hai to aap direct unke conference me jakar unse sawal kar sakte hai,aapko har tarah ke sawal karne ki azadi hai, aur inshaallah aapko sare jawab miljaenge, aaplog istarah bina soche samjhe aur bina jane islam ki galat tasweer pesh na karen.
I hope you will understand
Amjad Alam

Anonymous said...

is bloge bale ki esi tesi kar do sare desh me hamesa santi rhegi.

Anonymous said...

बेकार की बहस कर रहे हो जब कोई बात समझ में न आये तो उस पर बहस नहीं करनी चाहिए जाकिर नाइक ने बिलकुल सही कहा क्या तुम्हे हरियाणा के मंत्री जी श्री चन्द्र मोहन का केस नहीं पता जिन्होंने केवल अपने जाती फायेदे के लिए इस्लाम धर्म अपना कर ना केवल उसे बदनाम किया बल्कि उसका मज़ाक भी बना डाला अब ऐसे लोगो को अगर डर न दिया जायेगा तो धर्म का हश्र बुरा हो जायेगा अगर कोई तुम्हारे धर्म के साथ ऐसा करे तो तुम भी यही करोगे दोस्त ये जो clause कुरान में है ये इस्लाम को मिसुसे से बचने के लिए है की चन्द्र मोहन जैसे लोग इसका गलत फायेदा केवल अपना उल्लू सीधा करने के लिए या इस्लाम को बदनाम करने के लिए न उठा सकें इस्लाम किसी को ज़बरदस्ती नहीं करता जब तुम्हे इस्लाम में पूरा यकीन हो तभी आना इस्लाम में वेरना इस्लाम को या अल्लाह को किसी की ज़रूरत नहीं है जैसे जीना चाहते हो जी लो बाकी तो सब सामने आएगा ही और आप क्या समझते हो की ये देश किसका है क्या आपको पता है की आर्य कौन थे इब्राहीम अलैहिस्सलाम की उम्मत क लोग थे आर्य वो भी इस्लामी थे सनातन धर्म को मानने वाले लेकिन धीरे धीरे सनातन धर्म के रूप को बिगाड़ कर हिन्दू नाम का कथित धर्म बना दिया गया कभी अल्लाह तौफीक दे तो मिलना जाकिर नाइक से इस्लाम ले आओगे इंशाल्लाह.

Anonymous said...

madarchodo kya hindu-musalmaan laga rakha hai keval hume is duniya ke vikas ke baare me sochna hai apne desh k vikas k baare me sochna hai apne parivaar k baare me socho kitna kamate ho kaise kamate ho apne bachcho ko kya dekar jaoge ye danga fasad yaaro kuch shanti ki saugaat dekar jaao aman kaayam karo jo man kare vo dharm apnao par saal koi islam k liye pagal hua ja raha hai koi hindu kah kar khush hua ja raha hai apne development ki socho yaaro kasam khao is comment ke baad koi dusra comment nahi dega ladai ka bas aapas me pyar mahhobat failao yaaaro uparwala sabka bhala kare

sunil said...

सलीम आ गए न तुम अपनी ओकात पर तुम मुसलमान दूसरों को बेवकूफ समझते हो तुम जैसे लोगों का एजेंडा ही दुसरे मजहब के लोगों को मुसलमान बनाना है जैसा की तुमने लिखा है अगर तुम्हारे मजहब में शांति है तो फिर सारी दुनिया में मुसलमान आतंकी क्यों है क्या तुमने कभी आत्म मंथन किया है ...तुम लोगों का इतिहास भी बताता है मुहम्मद गोरी, मोहम्मद गजनवी, चंगेज खान, बाबर ये सब क्या भारत में शांति की स्थापना करने आये थे? और जो तुम्हारे जाकिर हुसैन साहब है क्या बोल रहे है ? क्या वो भी दिखाई नहीं दे रहा पकिस्तान में हिन्दुओ की क्या हालत है? मुसलमानों ने आज तक किसी फतवे का कभी विरोध क्यों नहीं किया है सच तो ये है की तुम लोग विस्तार की नीति पर काम कर रहे हो....जो चाहता है सारे विश्व में इस्लाम का राज हो .....

Anonymous said...

गलती तो हरियाणा के मंत्री जी को इस्लाम कुबूल करवाने वाले मुल्ला जी की है जो या तो रूपए के लालच में या इस्लाम के विस्तारीकरण की लालच में आ गए होंगा

zainul haq said...

jis tarah 1 charwaha bhed bakriyon ko hankta hai usi tarah tum sab ho jo sacchai ka rasta dikha raha hai(Dr.zakir nayek) use galat bol rahe ho tum logo ko andh vishwas ki aadat ho gai hai or tum log usi me rahna pasand karte ho...islam ek kanoon hai jo allah ka banaya huwa hai usk mutabik chaloge duniya ki har mushqil se nizat paoge...na ki apne banaye huye kanoon se...kisi par ilzam lagane se pahle kam se kam apne dharm ki kitab ved puran ko to padho usme kya likha huwa hai tab pata chalega ki zakir nayek jhutha hai ki tum sab....

akhilesh pandey said...

musalmaano ka yahi kattarpanthi ki aadut hee enko sari duniya ka DUSHMAN(ENEMY) bna rakha h . chahey way HINDO ho ISAI ho SIKH ho ya BAUDDUHA ho sub say enki FIGHT hoti hee raheyge

hashmi izhar said...

mere pyare allah ke sare bande chahe vo hindu ho ya musalman ya sikh ya isai ya koi aur mazhab par sab se badi baat jo hai ki jitne bhilog duniya me paida hote hai wo sab dada aadam ki hi aulad hai aur sach me saare hi ek paida karne wale ke bande hai aur islam kisi ko koi bhi kam jabar dasti karne ka hukm nahi deta aur islam ek best desiplin deta hai jis ki madad se allah ke sare bande safe reh sakte hai aur kuch log islam ki bato ko tod marod kar pesh karte hai jisse aam aadmi ko islam ke bareme suni sunaibate hi pata chalti hai but islam is a best desiplined way in the world hamare sab ke nabi mohammad mustafa sallalaho alayhevassallam ne duniya ko bhalai ka rasta dekhaya hai aur behtar se behtar tareekese jindagi bitana sikhaya hai jo sirf musalmano ke liye nahi hai voto sare allah ke bandoke liye hai jo allah ko mane ya na mane aur musalman ye janta hai ki duniyame hak bat ke saath raho is lie jab koi baat ho jatihai tab musalman kiduty hai ki wo sach baat ka pata lagae aur uska sath de mager duniya me taqatwar aadmi ka sab paksh lete hai islie haqiqat dusri deekhti hai islam ke mannewalo ke liye duniya ek examination hall hai aur wo sach allah ki ibadat aur hak ke saath aur izzat kesath rehne ki kosish karta hai lekin is zamane me sach samne badi mushkil se aata hai i am mohammad izhar is duniya ke saare allah ke bando ki hifazat ki dua karta hu chahe wo jo bhi kaum ke ho aur ek baat " koi dekhe na dekhe allah sab dekhta hai"

saddam raza said...

Jaakir nayek kutta hai bo kaafir hai

saddam raza said...

Jakir nayek baaj a apni harketon se

saddam raza said...

Jakir nayek 24.no kutte baaj a apni harkaton se hamaare peyare majhev deen islaam ko badnaam na ker