Friday, February 12, 2010

महाशिवरात्रि के पावन पर्व से मेरे ब्लॉग पर एक प्रयोग… ... Donation Paypal Code for Blogs

प्रिय मित्रों और मेरे नियमित पाठकों… कुछ दिनों पूर्व ब्लॉगिंग की दुनिया में मेरे तीन वर्ष पूरे हुए। अब तक आप लोगों का स्नेह, आशीर्वाद और समर्थन मुझे भरपूर मिला है और मैं इसका आभारी हूं। पहला एक वर्ष छोड़ दिया जाये तो गत दो वर्ष से देश में फ़न फ़ैलाये बैठे “नकली सेकुलरिज़्म”, “कांग्रेस की चालबाजियों” और मीडिया के एकतरफ़ा और चाटुकार रवैये के खिलाफ़ मैंने सतत लिखा है। राष्ट्रवादी विचारों (जिसे लोग गलतफ़हमी में हिन्दुत्ववादी विचार समझ लेते हैं) के प्रचार और प्रसार के लिये मैंने अब तक पूर्ण समर्पण और निष्ठा से लेखन किया है जिसका अनुमोदन आपकी टिप्पणियों, ई-मेल तथा फ़ोन द्वारा समय-समय पर किया जाता रहा है।

अपने ब्लॉग के जरिये किसी “विचारधारा” का प्रचार-प्रसार एक बेहद मुश्किल कार्य होता है, खासकर उस स्थिति में जबकि ब्लॉगर की आर्थिक क्षमताएं और संसाधन बेहद सीमित हों। अधिक भूमिका न बनाते हुए सीधे अपनी बात पर आता हूं… वर्तमान प्रिण्ट और इलेक्ट्रानिक मीडिया द्वारा जारी पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग तथा हिन्दुत्ववादी शक्तियों की आवाज़ को नज़र-अंदाज़ किये जाने के षडयंत्रों के बीच, मेरे ब्लॉग को विस्तार देने, उसे एक विचारधारा आधारित डाटाबेसनुमा ब्लॉग बनाने तथा विभिन्न अन्य कार्यों के लिये सबसे बड़ी आवश्यकता “फ़ायनेंस” की महसूस हो रही है।

अतः महाशिवरात्रि के पावन दिन से मैं अपने ब्लॉग पर “पे-पाल” का “डोनेट” बटन लगा रहा हूं, (देखें साइड बार) ताकि कोई सज्जन राष्ट्रवादी/हिन्दुत्ववादी विचारधारा के पोषण-प्रचार-प्रसार के लिये कोई आर्थिक सहयोग करना चाहते हों, तो वे अपने क्रेडिट कार्ड के जरिये “पे-पाल” के खाते में इच्छित राशि डाल सकते हैं। जिन बन्धुओं के पास “पे-पाल” खाता और क्रेडिट कार्ड नहीं है, उनके लिये “स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया” का एक “सेविंग अकाउंट” नम्बर "030046820585" दिया जा रहा है (साइड बार भी देखें), भारत के किसी भी कोने में रहने वाले व्यक्ति इस खाते में सीधे नकद राशि या चेक डाल सकते हैं। यह एक इंटरनेट बैंकिंग खाता है, और इस खाते शुरु करने हेतु मैंने इसमें 5000 रुपये की प्रारम्भिक राशि डाली है। इस खाते में आने वाली सहयोग राशि से निम्न कार्यों के संपादन-संचालन में मदद मिलेगी-

1) लायब्रेरियों की सदस्यता, तथा सशुल्क पुस्तकों को डाउनलोड करना इत्यादि

2) ब्लॉग पर विगत तीन वर्ष से लिखित सामग्री को पुस्तक का रूप देना

3) उस पुस्तक को सामान्यजन तक निःशुल्क उपलब्ध करवाने हेतु लगने वाला धन

4) महत्वपूर्ण राष्ट्रवादी लेखकों की पुस्तकों, शोधग्रन्थों आदि को खरीदने के लिये।

5) कुछ महत्वपूर्ण सीडी, डीवीडी खरीदने एवं वेबसाईटों के रजिस्ट्रेशन अथवा पेड-डाउनलोड हेतु

6) कार्यकर्ता सम्मेलनों और समविचारी लोगों से मिलने के लिये यात्रा करने आदि में…

7) इंटरनेट, टाइपिंग इत्यादि का खर्च। यदि प्रयोग सफ़ल रहा और भविष्य में सम्भव हुआ तो इस जनजागरण कार्य के लिये अलग से एक कम्प्यूटर अथवा लेपटॉप खरीदकर एक टाइपिस्ट नियुक्त करना…

8) ज़ाहिर है कि इससे ब्लॉग अथवा ब्लॉग्स पर अधिक गुणवत्तापूर्ण सामग्री प्रदान की जा सकेगी…

इस प्रकार के अनेक कार्य होते हैं जिसमें निश्चित रूप से धन की आवश्यकता होती है। तात्पर्य यह कि विचारधारा को तो आगे बढ़ाना ही है, राष्ट्रवाद का प्रचार तो करना ही है, सेकुलरिज़्म और वामपंथ के दोगलेपन को उजागर तो करना ही है… यह काम तो ब्लॉग के माध्यम से सतत जारी है ही, लेकिन अब उसे और भी ज़मीनी स्तर तक उतारने का वक्त आ गया है जिसमें आर्थिक संसाधन आड़े नहीं आना चाहिये। जिस तरह से मीडिया पर वामपंथियों और सेकुलरिस्टों का कब्जा है उसे देखते हुए युवा-वर्ग में राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रसार का एक तरीका अब इंटरनेट, ब्लॉग, ट्विटर, SMS आदि आधुनिक वाला है, दूसरा तरीका “संघ” का तरीका है जिसमें “मैन-टू-मैन” मार्किंग की जाती है, स्थानीय स्तर पर दो-दो-चार-चार के समूह बनाकर छोटी-छोटी चर्चाओं के जरिये विचारधारा का प्रचार किया जाता है। यदि कोई सहयोगी इस सम्बन्ध में आर्थिक सहयोग के अलावा (जैसे कि एक सज्जन ने मेरे इस ब्लॉग को डोमेन रूप दिया है और तमाम आग्रह के बावजूद कोई पैसा नहीं लिया है), एक और मित्र ने मेरे नये ब्लॉग http://hindubulletin.blogspot.com की निःशुल्क साज-सज्जा की है।  इस प्रकार से आर्थिक या तकनीकी सहयोग कोई और मित्र करना चाहते हों तो वे मुझसे ई-मेल पर सम्पर्क साध सकते हैं।

विगत तीन वर्षों के मेरे काम को देखते हुए मुझे आशा है कि मेरी इस पहल को निश्चित रूप से सहयोग मिलेगा (क्योंकि जब देश में कई फ़र्जी NGOs, ट्रस्ट, बाबा-प्रवचनकार आदि लोग "बिना किसी काम के" सिर्फ़ बातों-बातों में लाखों रुपया दान लेने में कामयाब हो जाते हैं, तो “काम करके दिखाने” के बाद मुझे  जितनी भी राशि मिलेगी उससे "विचारधारा" आगे बढ़ाने में कुछ तो मदद मिलेगी)। राशि के उपयोग के सम्बन्ध में ऊपर लिख चुका हूं, अब पाठकों को सिर्फ़ इतना ही आश्वस्त कर सकता हूं कि अगले वर्ष की महाशिवरात्रि पर इस आगामी वर्ष में जितनी भी सहयोग राशि एकत्रित होगी, उसका पूरा हिसाब आपके सामने रखा जायेगा। मित्रों, पाठकों और शुभचिंतकों से आर्थिक सहयोग लेना ज्यादा ठीक है, बजाय चीन, वेटिकन या खाड़ी देशों के…

हालांकि पे-पाल का "डोनेशन" कोड लगाने की पहल कोई नई बात नहीं है, अंग्रेजी में तो कई ब्लॉग्स पर यह है, हिन्दी में भी "विस्फ़ोट" और "अंकुर गुप्ता" जैसे कुछ ब्लॉग्स पर यह पहले से ही है, उद्देश्य भले ही अलग-अलग हों। शुरुआत में मुझे यह पे-पाल कोड लगाने में संकोच हो रहा था, लेकिन कई दिनों के आपसी विमर्श, कुछ वरिष्ठ ब्लॉगरों तथा मेरे कुछ देशी-विदेशी स्नेही शुभचिंतकों और पाठकों द्वारा इस विचार को समर्थन दिये जाने की वजह से यह प्रयोग करके देखना चाहता हूं, पता नहीं सफ़ल होता है या नहीं…

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36 comments:

संजय बेंगाणी said...

शुभकामनाएं.


मेरे निजी अनुभव ठीक नहीं रहे है. बाबा होता तो धन की कमी नहीं होती. लफ्फाजे करनी हो तो धन ही धन है. काम करना हो तो....


कृपया इसे अन्यथा न ले. मैं शुभ चाहता हूँ, चाहता रहुंगा. केवल अपने विचार साँझा किये है. इस टिप्पणी को हाल में बन्द रखें. शुरूआत ही नकारात्मक क्यों हो. पहले लोगो की टिप्पणियाँ आने दें.

अज्जु कसाई said...

कभी भीक कटोरे में मांगी जाती थी, अब युग बदला तो हमें भी बदल जाना चाहिये, सार्थक प्रयास, साइबर भिखारियों को रास्‍ता दिखाने के लिये धन्‍यवाद

Suresh Chiplunkar said...

संजय भाई, मैं जानता हूं कि आप शुभचिंतक ही हैं… लेकिन अपने अनुभव जरूर सार्वजनिक करें (भले ही मेल पर करें), हो सकता है कि मेरे साथ कुछ अन्य लोगों को भी जानकारी मिले, सबक मिले…। यह कोड तो अभी प्रयोगात्मक लगाया है… आपने सही कहा कि "काम करने" वाले को पैसा मिलना थोड़ा कठिन है… बातें करने वाले को आसान है…

सुमो said...

आपका लक्ष्य बहुत अच्छा है.

आपकी राह में कैंकड़े भी आयेंगे जो आपकी टांग खीचना चाहेंगे, उनसे घबरायें नहीं... जिसमें जितनी अक्ल होती है वह उतना ही बातें करता है, सो इन मक्खी मच्छरों से डरने वालों से परेशान न हों...

vikas mehta said...

abhi poora lekh padhaa nhi hai lekin apka sahyog karna chahiye har kisi ko

Pak Hindustani said...

सुरेश जी,
यह बिल्कुल सही कदम है. आपने विकिपीडिया और ग्रीनपीस का रास्ता अपनाया है. विकिपीडिया ने किसी बिके हुये मीडिया हाउस की तरह नेताओं और पूंजीपतियों से पैसा बटोरने के बजाय सिर्फ अपने खर्चे लायक पैसे को पब्लिक से लिया ताकी वो स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से अपना काम कर सके. इसी प्रकार ग्रीनपीस को भी अपनी लड़ाई लड़्ने के लिये सिर्फ जनता का ही पैसा कबूल है. आप ने जो योगदान राष्ट्र के नाम पर बात करके किया है वो अमूल्य है. अब आशा है कि समान राष्ट्रप्रेमी लोगों के सहयोग से यह मुहिम और भी आगे जायेगी. क्योंकि राष्ट्र की बात को कहने के लिये न तो चर्च स्पांसर करेगा, न कोई सऊदी में बैठा अमीर इसलिये इसे हमें और आपको ही करना है. मुझे विश्वास है आगाज़ शुभ होगा और अंजाम भी.

बाकी अज्जु कसाई जैसे गिरे हुये लोगों की बात पर ध्यान न दें. इन्हें सिर्फ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की स्पांसरशिप ही पसंद आयेगी.

आपको ज्यादा से ज्यादा स्पांसर मिलें, यही कामना है.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अच्छा प्रयास है, अच्छे फल भी मिलेंगे.

विरोध said...

kuchh samay baad anubhav bhi bataye taki is raste par aage badha jaye .vaise bhi muft ke boudhik ki koi seema bhi honi chahiye .
subhkamnay

Suresh Chiplunkar said...

असल में मेरे एक अच्छे मित्र, सम्मानित और वरिष्ठ ब्लॉगर ने कुछ माह पहले व्यक्तिगत चैटिंग में भविष्यवाणी की थी कि मैं जल्दी ही ब्लॉगिंग बन्द कर दूंगा, उन्होंने मुझसे कहा कि जिस गुस्से और ऊर्जा के साथ मैं लिखता हूं, मेरा ब्लॉग-जीवन जल्दी ही समाप्त होने वाला है… एक अंग्रेजी शब्द उन्होंने उपयोग किया "Burn-Out हो जाओगे"।
अब मेरे सामने यह चुनौती है कि मेरा ब्लॉग सफ़र जारी रहे… "बर्न-आउट" होने का एकमात्र रास्ता था "आर्थिक अड़चनें"… यह कोड और यह प्रयोग उसी अड़चन को दूर करने का प्रयास है… बाकी तो मैं जैसा काम अभी तक करता आया हूं आगे भी करता रहूंगा…।

Tarkeshwar Giri said...

EK ACCHI PAHEL, SABKO KARNA CHAHIYE, AKHIR KAUN DEKH RAHA HAI KI PAISA KIDHAR JAA RAHA HAI,
AUR TO AUR DHOOD AUR CHEENI KA BHI KHARCH NIKAL AAYEGA.

जी.के. अवधिया said...

हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं!

पी.सी.गोदियाल said...

सुरेश जी , सर्वप्रथम महाशिवरात्रि की बधाई और शुभकामनाये ! शुभचिंतक अगर ज्यादा मेहरवान हो जाए तो इस गरीब नवाज को मत भूलियेगा :)

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

सुरेश भाई,
आप बहुत ही अच्छा सोच रहे हो पर देने वाला कभी सही नहीं सोचता और वो भी तब जब उसको लफ्फाजी (आजकल गंभीर लेखन को इसी नाम से पुकारते हैं बुद्धिभोगी) के लिए कुछ देना हो.
आजकल दानदाताओं के लिए सही काम लफ्फाजी है और गलत काम समाज सेवा. हमने पिछले लगभग १३-१४ वर्षों में अपनी जेब का धन लगा-लगा कर कन्या भ्रूण हत्या निवारण के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया है, आज भी चला रहे हैं पर किसी ने एक रुपये भी देना उचित नहीं समझा. इसके ठीक उलट लगभग सात साल पहले हमारी मित्र मंडली ने एक जगह धार्मिक आयोजन करवाया तो उसमें ५८ हजार रुपये मिल गए.
आजकल वैसे भी बाबाओं का ज़माना है.
आपको शुभकामनायें. यदि सफल हो जाएँ तो हमें भी बताइयेगा, हम भी इस तरह से मांगने निकल पड़ेंगे.
जय हिन्द, जय बुन्देलखण्ड

महेन्द्र मिश्र said...

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये ....

संजय बेंगाणी said...

कुमारेन्द्रजी का अनुभव कुछ कुछ मेरे अनुभव जैसा है. मैं एक अच्छे काम के लिए मामुली धन जुटाने गया था. उससे हजार गुना ज्यादा धन एक बाबा की बकवास पर खर्च होते देख खाली हाथ लौटा था.

रचना said...

pata nahin kyun yae mujhe sahii nahin lagaa
karaan bahut sae haen apr sahii nahin lagaa kyuki donation word apane aap mae sahii nahin haen

mujeh lagtaa haen aap ko koi aur upaay daekhna hogaa jaese reading membership yaani aap apni post kaa kuch hissa yahaan blog par dae aur baaki apni site par dae site par jo padhnae aaaye wo sadsytaa lae

aap likhtey haen , research kar kae is liyae paathak bahut haen so ek library membership ho naaki donation yaa daan

mujeh daan daene aur laene dono mae aapti haen

ई-गुरु राजीव said...

ये गलत बात कही है चिपलूनकर. इसलिए आज सावधान कर रहा हूँ.
मैं वर्षों से तुम्हारा पाठक हूँ पर आज टिप्पणी कर रहा हूँ.
हिंद महासागर क्या हिन्दुओं का है !! बिलकुल नहीं, पूरे राष्ट्र का है.
जय हिंद जब बोलते हैं तो क्या सिर्फ हिन्दुओं के घरों की जय बोलते हैं !! नहीं, पूरे राष्ट्र की जय बोलते हैं.
अतः ये राष्ट्र-प्रेम और हिंदुत्व दोनों एक ही हैं.
जब भाजपा कहती है कि वह हिंदुत्व का मुद्दा नहीं छोड़ेगी तो उसका मतलब राष्ट्र-प्रेम होता है न कि हिन्दू-प्रेम.
आर.एस.एस. शक्तिशाली हिन्दू राष्ट्र की बात करती है तो क्या उसकी हिन्दू की परिभाषा में इसाई और मुस्लिम नहीं आते !! बिलकुल आते हैं मेरे बन्धु.
अतः अपनी बात का स्पष्टीकरण दो. अपनी गलती मानो और ऊपर लेबल "हिंदुत्व और राष्ट्रवाद" को सुधारो. जो सालों से ग़लतफ़हमी फैला रहा है.

ई-गुरु राजीव said...

अभी पिछले सप्ताह बेंगानी से लड़ पड़ा और आज तुमसे उलझ रहा हूँ, पता नहीं मेरे अपने ही तनाव हैं या वास्तव में मैं ही सही हूँ. :)

ई-गुरु राजीव said...

अभी-अभी चिपलूनकर से चैट वार्ता भी की.
पहली बार की वार्ता थी, सुखद रही.
देखते हैं कि मेरे साहब ये "हिंदुत्व और राष्ट्रवाद" वाला लेबल बदलेंगे या नहीं.
हालाँकि उन्होंने मान लिया कि दोनों एक हैं. :)
तो फिर भी मुझे दुर्वासा बन कर आज अपनी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ रही है.
आप लोग (टिप्पणीकार) भी बस चिपलूनकर की सराहना करोगे या फिर गाली दोगे सही बात यानि उसकी गलती नहीं बताओगे.
ये क्या किसी को दिखा नहीं था ?
सब के सब काहिल हैं, इसी कारण हमें अपनी काहिली छोड़ कर टिप्पणी करनी पड़ रही है.
(मुझे मुर्दे की तरह पड़े रहना प्रिय है, पड़े रहने दो..... सब लोग हिसाब से चलते रहो अन्यथा मुझे भी इस ब्लॉग जगत में उतरना पड़ेगा. जो हम नहीं चाहते.)

Common Hindu said...

Hello Blogger Friend,

Your excellent post has been back-linked in
http://hinduonline.blogspot.com/

- a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu
- Hindu Online.

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

सुरेश जी सबसे पहले महाशिवरात्रि पे शुभकामनाएं |

आज जब लोग अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए donation लेते हैं तो आप अच्छे कार्य के लिए सहायता मैं क्यूँ संकोच करते हैं ? एक बात और कहना चाहता हूँ की पेपाल से donation में काफी पैसा commission में चला जाता है ... इसलिए शुभचिंतकों से आपकी तरफ से ये कहना चाहता हूँ की बैंक अकाउंट में direct deposit या ट्रान्सफर बेहतर option है | बैंक से ट्रान्सफर करने के लिए निम्न जानकारी की आवश्यकता है :

१. FCNR code 2. Branch City 3. Branch Details .... कृपया कर ये सारी जानकारी भी इस ब्लॉग पे दाल दें ताकि ऑनलाइन ट्रान्सफर करने में सहूलियत हो |

चलते चलते ... ई-गुरु राजीव ने सही कहा है ... हिंदुत्ववाद और रस्त्रवाद मैं कोई मतभेद नहीं है |

Mithilesh dubey said...

सुरेश भईया आपका प्रयास सराहनिय है , आपको सफलता अवश्य ही मिलेगी ।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

इस प्रयोग की सफलता हेतु हार्दिक शुभकामनाएं।

Neeraj नीरज نیرج said...

मैं हमेशा की तरह साथ हूं। बाकी बातें जी टाक पर।

Vivek Rastogi said...

@राकेश सिंह जी,
बैंक से ट्रान्सफ़र करने के लिये कुछ जानकारियों की आवश्यकता होती है, मैं सही कर रहा हूँ,

१. IFSC code 2. Bank Name 3. Branch Name 4. Branch City

ये सब चीजें आपको अपनी चेकबुक पर ही लिखी हुई मिल जायेंगी।

@सुरेश जी,

अगर केवल IFSC Code ही बता देंगे तो ट्रांसफ़र करने वाले के लिये यही जानकारी बहुत होगी।

lata said...

आपके प्रयास एवम कार्य सराहनीय हैं.
हम सदैव आपके साथ होना चाहेंगे.
कृपया बेहिचक आगे बढ़ते रहें.

Anil Pusadkar said...

भाऊ हम आपके साथ हैं।

Shyam Verma said...

If your will is strong, and you are dedicated to your work, then Money will always be there to help you, this is my personal experience.

You are such a good writer that all of your readers will be supporting you in there best form.

@For all supporters- Dont think the money as donation, see it as our way of supporting the movement.

Thanks
Shyam

rahul said...

अरे भाई कुछ दान भी होगा कि साथ रहने से काम चले गा ,
मै रस्तोगी जी से कहता हूँ कि ,ट्रांसफर के लिए नाम तथा अकाउंट नंबर कि ही आवश्यकता पड़ती है |
बाकि गुप्त दान में एक रूपए भी आता है.

uthojago said...

u r in right direction, there was no other option

Harish Bist said...

कोई भी अच्छा कार्य का आरंम्भ करते समय धर्य रखने की आवश्कता होती हॆ। सुरेश जी आप अपने पवित्र व नॆतिक कार्यो को आगे बढाते रहिए। भारत के राष्ट्रवादी नागरिको का तन, मन, धन से आपको सहयोग मिलता रहेगा।

Vivek Rastogi said...

@राहुल जी,

मैं यहाँ Third Party Transfer (NEFT) के बारे में जानकारी दे रहा था।

हाँ अगर चेक से ट्रांसफ़र कर रहे हैं, तो केवल नाम और अकाउँट नंबर से ही काम चल जायेगा।

जीत भार्गव said...
This comment has been removed by the author.
जीत भार्गव said...

अव्वल तो ये कि आपने ये लाइन ही गलत पकड़ कर रखी है. राष्ट्रवाद की बजाय सेकुलरवादी गिरोह में होते तो ना केवल खाड़ी देशो से पैसा मिलता बल्कि वेटिकन से भी धन मुहैया हो जाता. उससे भी बड़ा फायदा ये होता कि आप खादी में लिपटे रहकर अमेरिका में सरकारी खर्चे पर प्रगतीशील और जनवादी भी कहलाते!!

अब आप ने थाम ली मुफलिसों की लाइन, तो हम क्या कहें?? इसमे तो भाई गाँठ का गोपीचंद बनाना ही लिखा है. अभी तक जितने भी कमेन्ट आये हैं उसमे सभी ने कहा है कि हम आपके साथ हैं, लेकिन किसी ने भी (मैंने भी) यह नहीं कहा है कि सुरेशजी ५०० या १००० का चेक भेज रहा हूँ.
खैर ये हुई कुनैन की गोली. अब आते हैं एंटीबायोटिक पर..मेरी राय है कि:
-क्यों ना आप अपने ब्लॉग पर विज्ञापनदाताओ से सीधे ही विज्ञापन स्वीकार करके प्रकाशित करे. यह राजस्व का अच्छा जरिया है.
-भुगतान करके पढने वाली बात बढ़िया है लेकिन इससे पाठको का दायरा सीमित हो जाएगा. नतीजन विचार प्रसार भी सीमित हो जाएगा. जो आपको नागवार गुजरेगा.
-आपके ब्लॉग के लिए विज्ञापन राजस्व जुटाया जा सकता है लेकिन अगर वह वेबसाईट के रूप में हो तो मार्केटिंग बहुत आसान हो जाती है. जिसमे आपके लेख के अलावा अन्य लेखको के भी आलेख प्रकाशित हो और समग्र न्यूज-व्यूज पोर्टल हो. जैसेकि विस्फोट ने किया है.
-अपने लेखो की व्यवस्थित मार्केटिंग कर के चुनिन्दा अखबारों से ताई-अप किया जा सकता है, जो उसे छापने के बदले आपको भुगतान करे और ब्लॉग/वेबसाईट का लिंक भी दे.
(यह सब राय और हौंसला अफजाई मैं इसलिए कर रहा हूँ कि इसमे मेरा कोई पैसा खर्च नहीं हो रहा है!!)

अब आते हैं लाइलाज कैंसर रूपी कसाई लोगो पर..
@ अज्जू कसाई, कुछ साल पहले सेकुलर पत्रकार तरुण तेजपाल ने 'जनता के लिए जनता का अखबार' निकालने के लिए शहर-शहर घूमकर चन्दा उगाई की थी. उनके हाथ में भी कटोरा था, लेकिन मुंह में सेकुलरिज्म का और निष्पक्षता का नारा था. मेरे भी कई मित्र उसके झांसे में फंस गए लेकिन आशंका अनुरूप तहलका ने अपने आरंभिक अंको में ही राहुल बाबा पर कवर स्टोरी छाप डाली (जबकि तब राहुल बाबा उतने 'महान' नहीं थे जितने 'महान' वो आज हैं). इसके बाद तहलका को चन्दा देने वाले आज तक उसे कोस रहे हैं. रही बात सुरेशजी की तो बन्दे में इतना दम तो दिखता ही है कि चाहे तो मुम्बई-दिल्ली-अहमदाबाद में किसी कोर्पोरेट घराने के लिए न्यूजलेटर संभालने या कंटेंट लेखन का काम करे तो भी अच्छा-खासा धन आराम से कमा सकता है. जो कसाई-बुद्धी के बस की बात नहीं है. बावजूद इसके वह दिल की आवाज पर चलते हुए जनता और देश के ली कलम घिस रहे हैं. और कोई कितना भी रोक ले आनेवाले कल को यही सुरेश चिपलूनकर बेशक अपने आप में एक दमदार ब्रांड बन जाएगा. क्योंकि घराना पत्रकारिता और राष्ट्रविरोधी सेकुलर मीडिया के सामने उनका विकल्प सैकड़ो लोगो के लिए प्रेरणा का काम कर रहा है. और कई नामी वेबसाइट्स से भी ज्यादा फोलोअर तो सुरेशजी के ब्लॉग के हैं.

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

सुरेश जी आप IFSC code भेज दें मैं १००० (Rs. 1000) आपके अकाउंट मैं ट्रान्सफर कर दूंगा |

rajiv said...

Pay pal ne India me payment band kar rakhi hai.
vaise aap ne nek kaam kiya .. See rajubindas.blogspot.com