IPL-3 में पाकिस्तानियों का रास्ता सुगम करते शाहरुख खान… (माइक्रो पोस्ट)…… IPL-3 Auction, Pakistani Players, Shahrukh Khan
भारतभूमि नामक महान धरा के तथाकथित “फ़िल्मी बादशाह” यानी शाहरुख, पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ हुए “बर्ताव”(?) से बहुत दुखी हैं, उन्होंने कहा है कि जो भी हुआ गलत हुआ (यानी जब टीम के लिये खिलाड़ियों की बोली लगाई जा रही थी, तब वे सो रहे थे)। प्रियंका गाँधी के बच्चों के लाड़ले और कांग्रेस के टिकिट पर लोकसभा चुनाव लड़ने को बेताब शाहरुख कहते हैं कि खेलों में राजनीति नहीं होना चाहिये और IPL की नीलामी में जो हुआ वह उन्होंने जानबूझकर नहीं किया। पाकिस्तान को इस मामले में संयम बरतना चाहिये… http://ibnlive.in.com/news/ipl-could-have-been-respectful-to-pak-srk/109146-5.html?utm_source=IBNdaily_MCDB_250110&utm_medium=mailer । अब भला शाहरुख खान जब “माहौल” बनाने में लगे हैं तो फ़िर शाहिद अफ़रीदी को कौन रोक सकेगा IPL-3 में?
उधर तत्काल ऑस्ट्रेलिया से ताबड़तोड़ गालीगलौज में माहिर शाहिद अफ़रीदी का “थूक कर चाटने वाला बयान” भी आ गया कि “जो भी हुआ उसे वे भुला चुके हैं और IPL की बोली के अगले दौर के लिये वे उपलब्ध रहेंगे”, http://cricket.rediff.com/report/2010/jan/26/shahid-afridi-decides-to-forgive-and-forget-open-to-ipl-in-future.htm यानी कहाँ तो लड़ने की बातें कर रहे थे, और अपना आत्मसम्मान भुलाकर फ़िर से IPL के पैसों पर लार टपकाने लगे। अब बेचारे जहीर अब्बास के बयान का क्या होगा, पाकिस्तानी कबड्डी टीम के बयानों का क्या होगा, पाकिस्तानी हॉकी संघ के टीम न भेजने के फ़ैसले का क्या होगा… और एक “सज्जन” ने पाकिस्तानी कोर्ट में जो याचिका (http://cricket.rediff.com/report/2010/jan/25/pak-court-issues-notice-to-indian-govt-over-ipl-snub.htm) लगाई है उस पर अब कोर्ट को शाहिद अफ़रीदी और शाहरुख खान को नोटिस जारी करके पूछना चाहिये कि “भाई लोगों, जब अपनी बात से पलटना ही था, पैसों के लिये स्वाभिमान गिरवी रखना ही था, दोनों देशों की नकली दोस्ती के राग-तराने गाना ही था… तब पहले क्यों दहाड़ रहे थे?”… लेकिन पाकिस्तानी हैं ही ऐसे… आज़ादी के समय से ही भारत के पैसों पर पलने वाले…
इधर हमारे चिदम्बरम साहब भी बड़े उदास मूड में कह रहे हैं कि “पाकिस्तान को इस मुद्दे को इतना तूल नहीं देना चाहिये, उन्हें बुरा लगना स्वाभाविक है लेकिन इस मामले में सरकार की अपनी सीमाएं हैं” (यानी कि मेरे बस में होता तो ललित मोदी के कान पकड़कर उसे पाकिस्तानी खिलाड़ियों को शामिल करने को कहता)…
बहरहाल, मुझे तो ऐसा लगता है कि शाहरुख की आने वाली फ़िल्म जिसका नाम ज़ाहिर है कि “माइ नेम इज़ खान” है (क्योंकि “माइ नेम इज़ कश्मीरी पंडित” बनाने की परम्परा इस देश में नहीं है) के पाकिस्तान में होने वाले “बिजनेस” पर फ़र्क पड़ने की आशंका को लेकर शाहरुख बेचैन हैं, उधर भारत के कुछ “सेकुलर चैनल” वाले भी IPL-3 के पाकिस्तान में प्रसारण न होने को लेकर चिन्तित होंगे… क्योंकि उनकी विज्ञापन की कमाई मारी जायेगी… सो बात का लब्बेलुआब यह है कि पिछले दरवाजे से किसी बहाने पाकिस्तानी खिलाड़ियों के लिये दरवाजे खोलने की तैयारी चल रही है…
जैसा कि मैं पहले भी कई बार कह चुका हूं कि भारतीयों के लिये (और पाकिस्तानियों के लिये भी) “धंधा” अधिक महत्वपूर्ण होता है राष्ट्र के स्वाभिमान की अपेक्षा…। चीन हमारी जमीन हथियाता जा रहा है, नकली और घटिया माल से हमारे बाज़ार बिगाड़ रहा है और हम उससे “धंधे” की बात कर रहे हैं… पाकिस्तान तो 60 साल में भारी नुकसान पहुँचा चुका, उसे भी हमने “धंधे” की खातिर “मोस्ट फ़ेवर्ड नेशन” का दर्जा दे रखा है, बांग्लादेश हमारे वीर जवानों की लाशों को भी बेइज्जती से भेजता है और हम उसे 400 करोड़ का अनुदान देते हैं “धंधे” के नाम पर… क्योंकि मैकाले आधारित शिक्षा पद्धति ने हमें “आत्मसम्मान” क्या होता है, यह कभी सिखाया ही नहीं…







22 comments:
यहाँ तो वे विश्व बंधुत्व की बात करते है सुरेश जी ! और हमारे द्वारा यह सच्चाई बयां करने पर हमें तुच्छ और गलीच मानसिकता का करार देते है !बस धंधा चल निकले बाकी तो सब कुछ सेकेंडरी है ! खैर ,उन्हें सिर्फ मीठा सुनने की आदत जो है !:)
यानी सद्बुद्धी नहीं आई आपको :)
शाहरूख के इस कदम पर मैने उन्हे अगला दिलीप कुमार सॉरी युसुफखान कहा था, वही वापस दुहराता हूँ.
मैंने पहले ही कहा था की यह पब्लिसिटी स्टंट है, पाकिस्तानी ज़रूर खेलेंगे. आईपीएल हर साल इस तरह की मार्केटिंग रणनीती तैयार करता है.
Khan felt that the youth should circumvent all that is said about India and Pakistan by the politicians and say, "Pakistan is a great neighbour to have. We are great neighbours, They are good neighbours. Let us love each other."
"Let me be honest. My family is from Pakistan, my father was born there and his family is also from there," he added.
http://www.dawn.com/wps/wcm/connect/dawn-content-library/dawn/news/cricket/14-pakistan-should-have-been-picked-for-ipl-shahrukh-khan-zj-02
गरीबों के मुंह से निवाला छिन जाये,नौजवानों को रोजगार न मिले,आतंकवाद पर कोई बस न चले, मुसलमानों को वोट के लिए तुष्ट किया जाता रहे,आस्ट्रेलिया में लात खाते रहें,महंगाई जैसी जरूरी चीजों से ध्यान हटा कर फालतू की बातों को उछालते रहें यही इस देश की सरकार कर रही है. जय हो!!!! ....... हाँ IPL का मतलब "इसमे पैसा लगाओ" होता है.
कुछ भी नया नहीं है इस चरित्तर में! :)
अब उन्हें चोर दरवाजे से चाहे शाहरूख बुला ले या फिर और कोई। देश्ा ने तो एकबार अपनी इच्छा बता दी। यह सच है कि यह देश व्यापार के लिए ही चल रहा है। पहले और बाद में बस यहाँ व्यापार ही है और कुछ नहीं। बढिया पोस्ट, हमेशा की तरह बधाई।
पैसा जो ना कराये.... इन जैसों के लिए तो देशभक्ति बहुत बाद में आती है......
यह लिंक देखिये…
http://ibnlive.in.com/news/lets-be-nice-to-pak-players-srk-minister/109260-5.html?utm_source=IBNdaily_MCDB_270110&utm_medium=mailer
अब शाहरुख के साथ खेल मंत्री गिल भी कूद पड़े हैं इसमें… सभी को अचानक पाकिस्तानियों पर प्रेम आने लगा है,
शायद इसीलिये कसाब और अफ़ज़ल को बचा रखा है अब तक कि आओ पाकियों एकाध हवाई अपहरण करो और हमें मुक्त करो…
गन्दा है पर धन्धा है ये
अगर इन्हें ये पता चल जाये कि पाकिस्तानीयों को खरीदने पर इन्हें हिन्दुस्तान में नुकसान होगा तो पाकिस्तान को गालियां देने लगेंगे
पाकिस्तान के अलावा और भी कई देशों के खिलाडियों पर बोली नहीं लगी, ये पाकिस्तानी ही क्यों न बिकने पर इतना रो रो कर गला फाड़ रहे हैं
next NISHAN-E-PAKISTAN.....to
"ASS R GAY" sorry SRK ko hi milne wala hai.
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shahrukh so raha tha kya.....?
khud kharid leta kisne roka tha....
achhi awaj uthai
"आत्मसम्मान"
पता नहीं किस चिड़िया की बात कर रहें हैं सुरेश जी, वो तो शायद भगत सिंह के साथ ही फ़ांसी चढ़ गई थी या थोड़ी बहुत जिंदा होगी तो कारगिल के बाद तो अवश्य ही शरम से मर गयी होगी।
पाकिस्तान हमारा छोटा भाई है.. छोटा भाई तो गलती करेगा ही बड़े को तो उसको माफ़ करना चाहिए..
माफ़ कीजियेगा गलती से साफ़ की जगह माफ़ लिख दिया..
सब कुछ तो कह दिया गया .
अबतो सिर्फ इस लेख के लिए बधाई ही बची है .
तो स्वीकार करें !
यही तो हमें सिखाया जाता है. सही को सही और गलत को गलत कहना न तो सिखाया गया और न ही आगे उम्मीद है.
शर्म से एक ही बात निकल रही है... "जय हो"
कश्मीर में अपनी सेना के कई जाबाज सैनिकों के मृत्यु पे चिदंबरम साहब इतने दुखी नहीं दिखे जितने की IPL में पाकिस्तानियों के नहीं चुनने से ! हमारे सेकुलर नेताओं को अपने देश से ज्यादा चिंता पाकिस्तान के मुसलामानों से होती है .... आखिर वोट बैंक का सवाल जो है |
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