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Monday 25 January 2010

ब्लॉगिंग के तीन साल पूरे… सभी पाठकों, प्रशंसकों और आलोचकों को धन्यवाद…

26 जनवरी 2010 को ब्लॉग जगत में प्रवेश के मेरे तीन वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। सबसे पहली पोस्ट 26 जनवरी 2007 को लिखी थी, तब से यह प्रवास सतत, अनथक और निष्ठा के साथ चल रहा है, इसमें मेरे पाठकों, प्रशंसकों, और आलोचकों का बहुत बड़ा योगदान है। यह जितना बड़ा सच है कि यदि व्यक्ति लगन से विभिन्न विषयों पर लगातार लिखता रहे तो उसे पढ़ने वालों की संख्या अपने-आप बढ़ती रहती है, वैसे ही ये भी सच है कि पाठकों के बिना कोई भी व्यक्ति अधिक समय तक नहीं लिख सकता। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं… और ब्लॉग तो संवाद का माध्यम है निजी डायरी नहीं इसलिये यहाँ पाठकों की निरन्तर बढ़ती संख्या अतिरिक्त महत्व रखती है।

अमूमन मैं लिखता चला जाता हूं, हिट्स/सब्स्क्राइबर/टिप्पणी आदि की परवाह किये बिना, लेकिन जैसी की परम्परा है कि किसी एक पड़ाव पर पहुँचने के बाद अक्सर सिंहावलोकन किया जाता है, मैंने भी अपने तीन वर्षीय प्रवास को मुड़कर देखने की कोशिश की और पाया कि पहले वर्ष में भले ही मैंने 164 पोस्टें लिखीं, लेकिन हिट्स मिली सिर्फ़ 14,000 और सब्स्क्राइबर बने सिर्फ़ 38। यह आँकड़े दिखाने का उद्देश्य सिर्फ़ नये-नवेले उदीयमान ब्लॉगरों को यह संदेश देना है कि कम से कम पहले साल के रिज़ल्ट देखकर अपने ब्लॉग का भविष्य तय नहीं करें, अर्थात निराश न हों। जब मुझे 164 पोस्ट लिखने के बावजूद सिर्फ़ 14000 हिट्स ही मिलीं और 38 सब्स्क्राइबरों ने ही मुझे अपने ई-मेल पर लेना पसन्द किया तो मैंने निराश होने की बजाय, दोगुने उत्साह से लेखन किया। अगले साल यानी 2008 में पोस्ट की संख्या कम हुई (सिर्फ़ 123), लेकिन मुझे एक साल में यह भी समझ में आ चुका था कि जब तक पोस्ट का विषय दिल को छूने वाला न हो, उसमें तथ्य-आँकड़े और विश्वसनीयता न हो तब तक उसे अधिक लोग नहीं पढ़ने वाले, इसलिये दूसरे वर्ष में पोस्ट की संख्या भले ही कम हुई, लेकिन उन पोस्टों की लम्बाई बढ़ती गई, क्योंकि प्रत्येक विषय पर अध्ययन, सर्च-रिसर्च आदि के बाद लिखने में समय अधिक लगता ही है।

आजकल ब्लॉगरों की संख्या के बढ़ने के साथ ही विभिन्न ब्लॉगर सम्मेलनों और आपसी मीटिंग्स का दौर प्रारम्भ हो चुका है। मैंने भी अपने ब्लॉग के दूसरा वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में मैंने हिन्दी ब्लॉग जगत के सुनहरे भविष्य के बड़े सपने संजोते हुए यह पोस्ट लिखी थी, क्योंकि बड़ा सपना देखने पर ही उसमें से कुछ न कुछ हासिल होता है। यह पोस्ट अभी भी कई ब्लॉगरों को गुदगुदाती है।  (सन 2040 का ब्लागर सम्मेलन)

अगले साल यानी 2009 में पोस्ट की संख्या में और थोड़ी कमी आई, अर्थात मैंने 2009 में सिर्फ़ 108 ही पोस्ट लिखीं, लेकिन इसका कारण यह नहीं कि लिखने के लिये विषय कम पड़ गये अथवा मेरी उर्जा में कमी आ गई, बल्कि यह रहा कि अब मुझे पोस्ट लिखने के बाद एक-दो दिनों तक टिप्पणियों के जरिये बहस-मुबाहिसा, तर्क-वितर्क करना पड़ता है, किसी खास मुद्दे पर अथवा किसी खास टिप्पणी पर प्रति-टिप्पणी भी करना पड़ता है, एवं अन्य ब्लॉग्स को पढ़ने के लिये भी समय देना होता है। फ़िर भी 12 माह में 108 पोस्ट (अर्थात एक माह में 9 पोस्ट) की गति ठीक कही जा सकती है, खासकर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि विषय पर विस्तार से लिखने-सोचने और फ़िर उसे टाइप करने में बहुत समय लग जाता है।

2009 में अपने लेखों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए मैंने “सर्वाधिकार सुरक्षित” वाली शर्त को थोड़ा ढीला करते हुए “क्रियेटिव कॉमन्स लायसेंस” का प्रयोग किया और आँकड़ो को देखते हुए लगता है कि यह प्रयोग सफ़ल रहा। जहाँ शुरुआती एक साल समाप्त होने के बाद मेरे सिर्फ़ 38 सब्स्क्राइबर्स थे वहीं अगले  दो साल में यह संख्या आज की तारीख में 538 को पार कर गई है (अर्थात अगले दो साल में 500 सब्स्क्राइबर बढ़े)। कुल मिलाकर यह कि तीन साल का यह प्रवास खट्टे-मीठे अनुभवों, कुछ कड़वी बहसों, कुछ नये मित्रों को जोड़ने, आभासी दुनिया से निकलकर कुछ ब्लॉग मित्रों से रूबरू मिलने का रहा, और इसे मैं संतोषजनक और उत्साहवर्धक मानता हूं। अब मेरा अगला लक्ष्य यह है कि अगले एक वर्ष में मेरे 1000 से अधिक सब्स्क्राइबर हो जायें (क्योंकि पिछले 2 वर्ष में जब 500 हो सकते हैं तो अगले एक साल में 500 और भी बढ़ सकते हैं, बड़ा लक्ष्य रखने में क्या हर्ज है)। जिस तेजी से ब्लॉग की संख्या बढ़ रही है, ज़ाहिर है कि आने वाले समय में ब्लॉगवाणी के मुखपृष्ठ पर आपका ब्लॉग अधिक से अधिक 15-20 मिनट या आधा घंटा ही रह सकेगा, ऐसे में मेरे 1000 सब्स्क्राइबर होने से कम से कम मुझे यह भरोसा रहे कि यदि ब्लागवाणी/चिठ्ठाजगत अथवा गूगल सर्च से अधिक पाठक न भी मिलें, 1000 लोग तो मेरा लिखा हुआ पढ़ेंगे ही, ऐसे में हिट्स की संख्या भी अब मायने नहीं रखती क्योंकि मुझे बताया गया है कि हिट्स काउंटर के अंकों में सब्स्क्राइबर्स की संख्या शामिल नहीं होती।

खैर, अन्त में मेरे सभी पाठकों, शुभचिन्तकों, प्रशंसकों, आलोचकों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन करना चाहूंगा कि अपना स्नेह ऐसे ही बनाये रखें… ताकि मैं अपनी पूरी ऊर्जा, सामर्थ्य, निष्ठा और लगन के साथ लिखता रहूं…

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