चिदम्बरम जी, जंगली भालू पालने के बारे में क्या विचार है? (माइक्रो पोस्ट)
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दी गई जानकारी में बताया गया है कि कश्मीर के कुलगाम इलाके के घने जंगलों में एक जंगली भालू ने हिज़बुल मुजाहिदीन के तो खतरनाक आतंकवादियों को मार गिराया है। डंडनार के घने जंगलों में छिपे बैठे हिजबुल के दो आतंकवादी सैफ़ुल्लाह और कैसर का सामना एक जंगली भालू से हो गया, जिसने उन दोनों को मौत की नींद सुला दिया। बताया जाता है कि सैफ़ुल्लाह हिजबुल का जिला कमाण्डर था जबकि कैसर तहसील कमाण्डर था। जिस पहाड़ी गुफ़ा में ये दोनों आतंकवादी छिपे बैठे थे, शायद वह उस भालू की थी। सुरक्षा बलों ने गुफ़ा में से दो एके-47 रायफ़लें, चार मैगजीन गोलियाँ और अन्य उपकरण बरामद किये हैं। दो दशक से चल रहे इस छद्म युद्ध में यह पहला मौका है, जब घने जंगलों में आतंकवादियों के छिपने के गुप्त ठिकाने पर किसी जंगली जानवर ने हमला किया है…
http://in.news.yahoo.com/43/20091102/812/tnl-wild-bear-kills-two-hizb-guerrillas.html
इस घटना से कुछ बातों पर गौर किया जाना आवश्यक है –
1) शायद चिदम्बरम जी सेना में जंगली भालुओं की नियुक्ति के बारे में गम्भीरता से विचार करेंगे, जिन्हें प्रशिक्षित करने में सेना के जवानों के मुकाबले कम खर्च आयेगा। (मेनका गाँधी से पूछ लीजियेगा)
2) फ़िर शायद ये जंगली भालू किसी मुफ़्ती या अब्दुल्ला के फ़ालतू आदेशों को न मानें।
3) एक सबक भी मिलता है कि जंगली भालू, भारत के लोगों से कहीं बेहतर हैं, जो अपने “घर” में घुसपैठ करने वाले को मार गिराते हैं। इसलिये सिफ़ारिश की जाती है कि बांग्लादेश सीमा पर भी कुछ भालू भेजे जायें…
4) एक सबक आतंकवादियों के लिये भी – कि किराये पर मिली एके47 रायफ़ल से जब वे एक भालू का मुकाबला न कर सके तो इतने बड़े भारत का मुकाबला कैसे करेंगे। एके47 चलाने के लिये “कायराना उंगलियाँ” काफ़ी होती हैं, लेकिन घुसपैठिये को मार गिराने के लिये जिगर वाले “भारतीय” भालू का निहत्था होना भी काफ़ी है।
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नोट – दो हफ़्ते के भीतर मेरे दोनों ही कम्प्यूटर और एक प्रिंटर खराब होने और रिपेयर करवाने की वजह से आर्थिक क्षति हुई है अतः मूड खराब होने के कारण बड़ी पोस्ट नहीं लिख पा रहा हूं, फ़िलहाल इस माइक्रो पोस्ट से काम चला लीजिये…। एकाध माइक्रो पोस्ट और जल्द ही भेजता हूं…







32 comments:
समोसे में रहे या न रहे आलू
पर आतंकवादियों को मारेगा भालू
आपको हुई आर्थिक क्षति का अफ़सोस है | आशा है आप जल्द ही इससे उबर जायेंगे |
भालू की हरकत से चिदंबरम के कान खड़े हो गए हैं , ऐसे देशभक्त भालूओं के रहने से कश्मीर समस्या के हल होने का खतरा है |
धारा ३७० के तहत ऐसे भालूओं को जल्द ही कश्मीर से निकाला जायेगा |
अगर संभव हो सके तो ऐसे भालूओं को साम्प्रदायिक घोषित किया जायेगा ( आखिर मरने वाले कश्मीर में समुदाय विशेष के लिए जिहाद कर रहे थे ) और इनका नक्सलियों से सम्बन्ध भी जोड़कर देखा जायेगा |
भालू ने अपने घर (गुफा) के अंदर खुराफातियों को बिल्कुल पसंद नहीं किया....
इस कहानी का मोरल संदेश--अपने घर को सुरक्षित रखना हर आदमी का मौलिक कर्त्वय और अधिकार है।
भालू साम्प्रदायिक भी हो सकता है, जिसने मासूम को मार डाला. हमारे यहाँ तो खातिरदारी की परम्परा रही है.
ये बात सही है कि हम जानवरों से भी गए गुजरे है. तभी जानवर की मौत मरते है और जै हो करते है.
इनकी तो हर सियासी फितरत ही चालू है
इनसे दमदार तो वह जंगली भालू है !
भालू को दिया जाये परमवीर चक्र !
मेरा आईडिया कुछ दूसरा है ..क्यों न मनसे को बहुदर वीरो को राज ठाकरे की अगुवाई में कश्मीर के जंगलो की कटाई के लिए भेजा जाए ....ओर जहाँ तहां वहां खड़े जवानो के राईफिल बीच में उठाने के वास्ते ........इस देश के नेताओ जैसे कौडा ओर उनके चेलो को ....नक्सल प्रभावित जगहों में .सी आर पी ऍफ़ के ट्रको में चौकसी के लिए आगे रखा जाये ओर उन्हें सजा के तौर पर बीस साल तक इन जवानो का खाना पीना बनाने ओर पानी पिलाने के वास्ते रखा जाए ....
आपको हुई आर्थिक क्षति का अफ़सोस है |
wo bhaalu bahut achcha tha....
kaash! hum sab bhaalu ban jayen....
भालू का पहले धर्म निर्धारित करना होगा, यह देखना जरूरी है कि मुस्लिम भालूओं के साथ अन्याय न हो।
क्या भालू मुस्लिम भी हो सकते है, रामायण में तो हिन्दू (जामवंत)था :)
अच्छा जी काम चला लेंगे.
आर्थिक क्षति का अफसोस है.
नोट – दो हफ़्ते के भीतर मेरे दोनों ही कम्प्यूटर और एक प्रिंटर खराब होने और रिपेयर करवाने की वजह से आर्थिक क्षति हुई है अतः मूड खराब होने के कारण बड़ी पोस्ट नहीं लिख पा रहा हूं, फ़िलहाल इस माइक्रो पोस्ट से काम चला लीजिये…। एकाध माइक्रो पोस्ट और जल्द ही भेजता हूं…
यह तो मैंने पढ़ा ही नहीं था...... सुरेश जी यहाँ मैं आपसे सहमत नहीं हूँ ! आप जैसे वीर पुरुष से यह कदापि उम्मीद नहीं थी कि इतनी सी बात पर आप मूड खराब कर बैठोगे ! चलता है श्रीमान ....its part of game or life.
जिस तरह मंहगाई ने बजट के बारह बजा दी है, ऐसे अनपेक्षित खर्चे मूड बिगाड़ते ही है. सांत्वनाएं.
डॉ साहेब का आइडिया अच्छा है.. बेचारे भालुओं को काहे तकलिफ दें..
भालू ने अपने कारनामे से हमें जो सन्देश दिया है उस पर हमें ध्यान देना होगा
किराये पर मिली एके47 रायफ़ल से जब वे एक भालू का मुकाबला न कर सके तो इतने बड़े भारत का मुकाबला कैसे करेंगे।
kya kyaa likh laetey haen waah man khush hua aur ek dam sahii likhaa haen
bas yae jo ghar kae bhedhi haen unko daekhnae kae liyae aankhae khuli rakhee jaye
Us bhalu ko mera sadar pranam.
@ गोदियाल साहब - महंगाई ने अच्छे-अच्छे वीरों की वाट लगा रखी है, ऐसे में कुछ भी अतिरिक्त खर्चा यानी गरीबी में आटा गीला… :)
भारत के भालू तो बड़े देशभक्त निकले। इन्हें हमारी ओर से ढेरों साधुवाद।
hey us bhalu ne VANDE MATRAM gaya tha ki nai ???? sachha desh bhakt
sikho yaar usse kuch
हो सकता है ... कश्मीर की सरकार इन भालुओं को कश्मीर के जंगल से हटाने के लिए कोई गुप-चुप मुहीम चलाये | भालू ने बहुत बड़ी गलती कर दी ... अरे आतंकवादियों को मारने से पहले ये तो भालू को सोच लेना चाहिए था की wo mufti के rajya मैं mufti के saathiyon को maar रहे हैं !
@sajid khan जी भालू ने ये तो नहीं बताया की वो वन्दे मातरम् पढा या नहीं पर इतना जरुर बताया की कुरान के आयात नहीं पढा था उसने | भला कुरान पढ़ लेता तो अपने देश के दुश्मनों को मारता कैसे !
अभी अभी चिदम्बरमजी का एस एम एस आया-
मूड ठीक कीजिए और भालुओं का इन्तेज़ाम कीजिए... कश्मीर भेजना है:)
जय जामवंत
सुरेश जी आप जिस विषय पर कलम रखते हो वहा कमाल हो जाता है. खैर अभी भालुओं के खिलाफ मुहीम चलाने के लिए महेश भट्ट को फुरसत नहीं है वह अपने सपूत 'राहुल' -हैडली प्रकरण में 'बेडली' बिजी हैं. शायद तीस्ता भालुओं की खाल के बाल निकालने का जिम्मा ले और शहीद होनेवाले दानवो के दानावाधिकारों के लिए लड़ाई लड़े. इधर नेहरू डायनेस्टी टी वी और क्राइस्ट न्यूज नेटवर्क ने अपने 'खोजी' पत्रकारों को यह पता लगाने के लिए काश्मीर भेज दिया है कि भालू के इस हमले के पीछे कोइ 'साम्प्रदायिक' संगठन तो नहीं है. सूना है बेगम मुफ्ती घाटी से भालुओं को तडीपार करने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव भी लानेवाली है. इसके साथ ही कुछ लोगों ने 'गिरगिट' की बजाय भालुओं को पत्थर मारना शुरू कर दिया है. लेकिन कुछ भी कहो हमारे सेकुलर नेताओं की तुलना में यह भालू भले हैं. जे जामवंत.
बोत गलत बात हो गई जी, भालू को बातचीत के जरिए समस्या का हल निकालना चाहिए था, हिंसा से नहीं :-)
पता किया जाए कि मारने वाला भालू हिंदू तो नहीं था, अगर ऐसा है तो मानवाधिकार (दानवाधिकार) वालों को तुरंत खबर की जाए।
आपको हुए आर्थिक नुकसान के लिए खेद है, मध्यमवर्गीय होने के नाते ऐसा नुकसान होने पर होने वाली परेशानी को समझता हूँ।
सुझाव बहुत ही अच्छा है ...मगर अच्छे सुझाव चाहता कौन है ...!!
सुरेश जी , बहुत दिनों से आपने पुराने हिंदी गीतों और क्रिकेट पर कोई पोस्ट नहीं लिखा , आपके क्रिकेट और पुराने हिंदी गीतों पर नयी पोस्ट की प्रतीक्षा है.
me to kehta hoo us bhalu jee ko inam milna chahiye
or ek shiksha usase ye hame mili hai ghar me agar dushman ghus jaye to use mar mar kar itna bhagao wo ghar to kya desh me bhi nhi ghuse
Ise micro post kaise kahun...yah to top ka gola nikla....ghaav kare gambheer jaisa....
Aanad aa gaya padhkar..jis din yah samachaar patra me padha tha,ham to usi din se bhaalu maharaaj ka jaykara laga rahe hain aur sachmuch lagta hai hamse bhale to ye bhaalu...
सीमा पर चारों तरफ भालू ही भालू छोड़ देने चाहिये.
Lekin Suresh ji,
Aapne to kharab mood men bhii achhii aur shandar post likh dalii.
Aur ek bat jan liijiye, ye post koii micro post na hai, ye to double MACRO sai.
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