Monday, September 21, 2009

आज भी लाईट नहीं गई, सेकुलरिज़्म की जय… (एक माइक्रो पोस्ट)

लगभग दो साल पहले ईद के दिन एक पोस्ट लिखी थी, यदि उसे आज भी ज्यों का त्यों पेश कर दूं तब भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। उज्जैन में रोज़ सुबह दो घण्टे बिजली कटौती होती है, चाहे होली हो, दिवाली हो या राखी हो, लेकिन आज सुबह लाईट नहीं गई, क्यों? इसके सही जवाब पर कोई ईनाम मिलने वाला नहीं है, क्योंकि सभी जानते हैं कि आज ईद है। (जिन्हें पता न हो, वे जान लें कि मध्यप्रदेश में एक साम्प्रदायिक पार्टी का शासन है)

कुछ नकली सेकुलरों को मेरा लिखा हुआ साम्प्रदायिक लगता है, वे पूछते हैं कि यह "नकली सेकुलरिज़्म" क्या होता है? दिवाली के दिन बिजली की कटौती होना और ईद के दिन नहीं होना… वोटों के लिये शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट को लतियाना जैसे सैकड़ों उदाहरण ही नकली सेकुलरिज़्म है, तुष्टिकरण है… आया समझ में? नहीं भी आया हो तो कौन परवाह करता है तुम्हारी…।

लेकिन समस्या यह भी है कि भाजपा में जो गंदे कांग्रेसी "कीटाणु" घुस आये हैं, उसे कैसे निकाला जाये? "डॉ भागवत" विभिन्न दवाओं से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इतना आसान नहीं लगता इस वायरस से मुक्ति पाना। दो साल पहले जब वह पोस्ट लिखी थी उस समय मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव सिर पर थे इसलिये कहा गया कि मुसलमानों के वोट लेने के लिये ईद के दिन कटौती न करके शिवराज नौटंकी कर रहे हैं, लेकिन आज की तारीख में जब कोई चुनाव नहीं होने वाले, यदि शिवराज ईद के दिन 10 घंटे की बिजली कटौती भी कर लेते तब भी कौन क्या उखाड़ लेता? लेकिन नहीं साहब… फ़िर भी भाजपा एक साम्प्रदायिक पार्टी है… मुसलमानों से सम्बन्धित केन्द्रीय योजनाओं में उत्तरप्रदेश से अधिक धन गुजरात सरकार खर्च कर रही है, लेकिन फ़िर भी मोदी "आदमखोर" हैं।

प्रिय पाठकों, अभी एक अन्य बड़ी पोस्ट लिखने में व्यस्त हूं, इसलिये…

'माइक्रो' को 'मैक्रो' समझना |
खत को तार समझना ||
मेरी इस प्रेमपाती को सेकुलरों के मुँह पर मारना… ||

(इस घटिया तुकबन्दी को कविता समझे जाने पर मुझे कोई आपत्ति नहीं है)
फ़िलहाल जय हो…

36 comments:

पंकज बेंगाणी said...

देश में धार्मिक त्यौहारों के मामले में कम से कम भेदभाव नहीं होना चाहिए. जब हम कहते हैं कि हम सब बराबर हैं तो हिन्दू भी तो इसमें शामिल हैं!

अजीब यह लगता है कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ऐसा कर रही है. कांग्रेस से तो अपेक्षित है.

संजय बेंगाणी said...

खूशी में ईद मनाओ कि बिजली नहीं गई. :)
खामखा होली-दिवाली जैसे साम्प्रदायिक त्योंहारों को बीच में ले आते हैं.

जी.के. अवधिया said...

मैं बैंक की नौकरी में था। जब मैं नौकरी लगा था उन दिनों बैंक में निम्न हिन्दू त्यौहारों में छुट्टी दी जाती थी

होली १ एक दिन, रामनवमी १ एक दिन, रक्षाबन्धन १ एक दिन, जन्माष्टमी १ एक दिन, गणेश चतुर्थी १ एक दिन, दुर्गा अष्टमी १ एक दिन, दशहरा १ एक दिन और दिवाली २ एक दिन याने कि कुल ९ दिन। किन्तु अब रक्षाबन्धन, गणेश चतुर्थी, दुर्गा अष्टमी और दिवाली की २ छुट्टियों में से १ को काट दिया गया है। कहाँ जोड़ा गया यह सभी को पता होगा। तो यह है सेक्यूलरिज्म!

बेरोजगार said...

कल मैं परीक्षा देने निकला हर चौराहे पर राहुल गाँधी,सोनिया गाँधी और अशोक गहलोत जी ईद की मुबारक दे रहे थे. दिवाली इतना बुरा त्यौहार भी नहीं है,.कभी दिवाली की शुभकामना ही दे लिया करो.

शिवम् मिश्रा said...

केवल आपके शहर में ही नहीं, भारत के हर शहर का यही हाल है !!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

भाई, भाजपा के सेकुलरिज्म को तो बख्श देते।

अन्तर सोहिल said...

संजय बेंगाणी जी की टिप्पणी को दोबारा पढ लें।

प्रणाम

पी.सी.गोदियाल said...

यह मुस्लिम समुदाय की अशिक्षा की ही खामिया है कि ये लोग आज भी अपने सच्चे मित्र और असली दुश्मन मे फर्क कर पाने मे असमर्थ है! और इनकी इसी कमी अथवा खामियो के चलते इस बात का सीधा फ़ायदा हो रहा है, हमारे इन राजनैतिक दलो को, जो सेक्युलरिज्म की दुहाई देकर इन्हे सरेआम उल्लू बना रहे है ! किसी ने अंग्रेजो के नक्शे कदम पर चलकर प्यार से फूट डालो और राज करो की नीति अपनाकर अपना उल्लु सीधा किया तो कुछ अन्य तथाकथित सेक्युलर पार्टिया झुनझुना पकडा रहे है ! ध्यान रहे कि सच्चा मित्र वो नही होता जो आपसे हमेशा मीठा बोलकर अपना उल्लू सीधा करता है, बल्कि सच्चा मित्र वह है जो आपके मुह पर आपकी कमियां आपकी खामियां गिनाता हो, ताकि आप अन्धेरे मे न रहे, और सुधार लाने का प्रयत्न कर सकें ! इन तथाकथित सेक्युलर पार्टियो ने पिछ्ले साठ-बासठ सालो से आपसे सिर्फ़ मीठा बोला है और नतीजा आप यह भुगत रहे है कि मुसलमान हर क्षेत्र मे पिछड गया है !

इसलिये अभी भी वक्त है सही दोस्त् और दुश्मन को पह्चानिये, सिर्फ तुष्टीकरण से कुछ नहीं होने वाला ! जैसा कि पहले कहा हमारी यह राजनीति एक कूडे का ढेर बन चूका है और इसी कूडे में से हमें कुछ उपयोगी वस्तुए ढूँढनी है ! यह आप भी जानते है और मैं भी कि आज कोई भी राजनैतिक दल ईमानदार नहीं रहा मगर वो कहावत है कि डाकुवो में भी वो डाकू थोडा ठीक लगता है जो कुछ अपने उसूल रखता हो !

Dipti said...

कम से कम आप तो त्यौहार को त्यौहार की तरह मनाइए। करने दीजिए नेताओं को गंदी राजनीति।

राज भाटिय़ा said...

सुरेश जी, ८०% होने के वाव्जुद भी हम अपने हक के लिये मारे मारे फ़िर रहे है, कारण हम खुद ही है, चुनाव के समय हम इस काग्रेस की तरफ़ भागते है, पेसो के लिये अपने वोट बेच देते है, गोरी का छोरा झोपडी मै सो गया तो हम उसे त्याग समझते है,कब हम जागेगे, जब पुरे भारत को पता है कि चुनाव मै हेरा फ़ेरी हुयी तो जनता क्यो नही जागी, इरान से ही सबक लेलो... क्यो इन ५०० गुंडो के हवाले देश कर रहे है, ओर फ़िर चिल्ला रहे हो, अजी जनता से बडी ताकत किसी मै नही, यही जनता तखता पलट सकती है,नया इतिहास लिख सकती है, छोडो इस ईद ओर दिवाली के झगडे...चुनाव से पहले अपने आप को तेयार करो कि हम चुने सिर्फ़ इस पार्टी को जिस मै कोई दल बदल कर दुसरी पार्टी का कमीना ना घुसा हो, हमे पार्टी के संग अपने नेता को भी देखे, जब तक हम मे जागरुकता नही आयेगी हम युही लडते रहे गे, ओर यह नेता हमे लाडाते रहेगे...
आपस मै लडने की जगह इन नेताओ को इन की ओकात दिखाओ आओ सब मिल कर लडे

म्लेच्छ सन्देश : पाकिस्तान की आवाज़ said...

जै सेक्युलर देवा, स्वामी जै सेक्युलर देवा
जूते हिन्दू खाएँ तुम खाओ मेवा,

जै सेक्युलर देवा...

बात तुम्हारी न्यारी, हमें भली लगती
अमरनाथ को त्यागो हज की करो सेवा

जै सेक्युलर देवा...

संजय बेंगाणी said...

"भाई, भाजपा के सेकुलरिज्म को तो बख्श देते।"

विरोध तुष्टिकरण व बकवास चीजों का है. फिर क्या कॉंग्रेस क्या भाजपा...हमारा मतलब तो भारत से है.

jayram " viplav " said...

तुष्टिकरण किसका होता है ? मेरी समझ में उसी का मुंह बंद किया जाता है जो नुक्सान पहुँचने की कुवत रखता है . क्या हिन्दू नाम का कोई समुदाय पर्व त्योहारों में बिजली कटौती या अन्य मसलों पर बलवा कर सकता है ? क्या धर्म के नाम पर एक खास दल को मतदान करता है ? जब आपका वोट बैंक में जमा न होकर बिखरा पड़ा है तब क्या उम्मीद पाले बैठे हैं ? जाति-पांति के नाम पर बिखरे कुनबे में कोई अपना माथा क्यूँ खपाए ? क्यों न एक धर्मांध समुदाय जो कि आँख मुंड कर एकमत से वोट करता है ,को पटाया जाये ?
और भाजपा की दिक्कत यही है कि उसके कैडर और वोटर विपक्ष में रहते हुए तो रोते हीं हैं लेकिन सत्ता में होते हुए भी उनको उपेक्षा ही मिलती है .

रंजना said...

मैं जो कहना चाह रही थी,श्री पी सी गोदियाल जी ने कह दी.......
मुझे इसमें कोई गुरेज नहीं कि ईद पर बिजली नहीं गयी या छुट्टी दी गयी,मुझे इससे गुरेज है कि मुसलमानों ने अपने को शियासतदारों/तुष्टिकर्ताओं के हाथों का खिलौना बना लिया है.....

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

नकली सेकुलरिज्म को उजागर करती आपकी पोस्ट हर बार की तरह कुछ सोचने पर मजबूर करती है।

लेकिन आज तो हम सभी ईद की मुबारकबाद देने में व्यस्त हैं। मुस्लिम परिवारों में खुशी के जो दुर्लभ मौके आते हैं, ईद उनमें से एक है।

बाकी समय तो इन्हे गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी व धर्मान्धता से प्रसूत अनेक झंझावातों और खून खराबों के बीच बिताना पड़ता है।

Dr. Anil Kumar Tyagi said...

तोडो और राज करो का नारा कांग्रेस ने अग्रेजों से लिया है। जिसको वह सिद्धता से निभा रही है। जब तक हम अपना ही स्वार्थ देखने की प्रवृत्ति नही त्यागेंगे तब तक भारत का भला नहीं हो सकता। भाजपा का हर काम काग्रेस व सभी नकली सेकुलरिज्म पर्टियों को नाटक ही लगेगा, क्योंकि नकली कहकर ही तुष्टिकरण किया जा सकता है। मुसलमनों को हिन्दूऔं का डर दिखाकर वोट जो लेना है।

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

भाजपा हो या कोई अन्य पार्टी, सेकुलरिस्म का इतना दबदबा और जोर है की अच्छे लोग सेकुलरिस्म के गंदे नाले मैं अपना हाथ धो ही लेता है |

यदि आपने सेकुलरिस्म के गंदे नाले मैं अपना हाथ नहीं धोया तो सेकुलर नाले के ठेकेदार लोग आप पर ऐसा कीचड़ उछालेंगे की आप भी सोचेंगे की रोज-रोज कीचड़ झेलने से अच्छा है एक-आध बार सेकुलरिस्म की गन्दगी से अपना हाथ धो ही लिया जाए |

amitabh tripathi said...

आज दिल्ली विश्वविद्यालय के एक छात्र ने कहा कि मैं सुरेश चिपलूनकर के प्रयासों को नमस्कार करता हूँ। तालाब में लहर बननी आरम्भ हो चुकी है।

Vivek Rastogi said...

सही बात है आज हमारी छुट्टी नहीं थी, आज हमारा स्वैच्छिक अवकाश था पर हमने नहीं लिया और आज काम कर के आ रहे हैं और आने पर आपकी पोस्ट पढ़ी, तो सेकुलरिस्म का मतलब समझ में आया।

जय हो।

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

"अंधी पीसे...कुत्ता खाए"

Common Hindu said...

Hello Blogger Friend,

Your excellent post has been back-linked in
http://hinduonline.blogspot.com/

- a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu
- Hindu Online.

प्रवीण शाह said...

.
.
.
"दो साल पहले जब वह पोस्ट लिखी थी उस समय मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव सिर पर थे इसलिये कहा गया कि मुसलमानों के वोट लेने के लिये ईद के दिन कटौती न करके शिवराज नौटंकी कर रहे हैं, लेकिन आज की तारीख में जब कोई चुनाव नहीं होने वाले, यदि शिवराज ईद के दिन 10 घंटे की बिजली कटौती भी कर लेते तब भी कौन क्या उखाड़ लेता? लेकिन नहीं साहब..."

धन्य हैं आप गुरुदेव और आपके प्रशंसक भी...
मैं तो चुप रहूंगा यहाँ पर याद रखिये कोई बिना ब्रेन वाश हुआ बच्चा भी बता देगा कि हिन्दू हृदय सम्राट सुरेश चिपलूनकर(जो उपरोक्त वक्तव्य दे रहे हैं)ने क्या पहना है...

हाँ, मैं सेक्युलर हूँ।

Chinmay said...

हद है , यहाँ पुणे में तो कांग्रेसी राज है लेकिन फिर भी यहाँ पूरी दुपहर बिजली नदारद थी उपर से यहाँ अगले माह विधानसभा चुनाव भी होने हैं.

aarya said...

सुरेश जी
सादर वन्दे!
क्या टिप्पणी करूं यहाँ भाई लोगों ने सब कह ही दिया है, एक भाई ने तो अपने को गर्व से सेकुलर भी कहा है, धन्य हैं आप जो आपने अपने को पहचान लिया इसीलिए तो राज कर रहे हैं लेकिन जिस दिन हिन्दू (भारतीय संस्कृति है इसका मतलब ) अपने को पहचान लेगा उस दिन ये मौकापरस्त सेकुलर और यैसे समाज को बांटकर खुद को अच्छा कहने वालों की दुकान बंद हो जायेगी.
इंतजार करिए .....
रत्नेश त्रिपाठी

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

भाई एक बार प्रशासन से यह पूछने पर कि वह किसी हिन्दू त्योहार पर टेंट लगा कर मंदिर आदि पर बधाई देने के लिए क्यों नहीं खड़ा रहता, जेल में डाल देने की धमकी मिली थी।
आज देखा होगा सब गले से लगने-लगाने को आतुर दिख रहे थे। किसी हिन्दू त्योहार पर ऐसा नहीं होता है।
वैसे हिन्दुओं के त्योहार कोई त्योहार हैं? साम्प्रदायिक कहीं के।

विवेक सिंह said...

क्या सोचकर लिखे थे हम भाजपा को शाबाशी देंगे ?

हम दोहरी नीतियों की निन्दा ही करेंगे,

चाहे वे नीतियाँ किसी की भी हों !

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

सुरेश जी, आप अच्छा लिखते है मैं आपके लेखन का कायल हुं लेकिन "कभी-कभी आप इतनी बचकानी बात कर देते है की बस आपकी अक्ल पर तरस खाने को जी चाहता है...।"

किसी चीज़ को तो सेक्युलर या साम्प्रदायिक्ता के दायरे से बाहर रखिये....आप हर चीज़ को सिर्फ़ एक नज़रिये और एक चश्मे से देखते है जो कि गलत है...........फ़िर आप में और "सलीम खान" में क्या फ़र्क रह गया----आपको सलीम और उमर से हमेशा ये शिकायत रही की "वो खेतों की बात पर खलीहानों बात करने लगते है".....तो आप भी बिजली की कटौती, सेक्युलर और साम्प्रदायिक्ता, और ईद को जोड रहे हैं......


मैं आपको एक किस्सा सुनाता हुं---आपने "आगरा की राम बारात" के बारे में सुना तो होगा----अभी दो-तीन दिन पहले सीता जी की विदाई हुयी है...... मैं आगरा के जिस श्रेत्र में रहता हूं वहां पर मिश्रित आबादी है लेकिन वो दो हिस्सों मे बंटी हुई है....तो जिस हिस्से में मुस्लिम रहते है वहां का 1,000 KVA का टार्संफ़ार्मर फ़ुकं गया क्यौंकी यहां का लोड 1,300 KVA है..... तो उस 1,000 KVA के बदले 400-400 KVA के दो टार्संफ़ार्मर लगाये गये और जो टार्संफ़ार्मर 1,500 KVA का नाई की मंण्डी श्रेत्र के लिये पास हुआ था वो जनकपुरी में लगाया गया.....जितने दिन जनकपुरी रही उतने दिन सात से आठ घण्टे कटौती हुई---सेहरी और रोज़ा अफ़तार के वक्त बिजली आती थी......नाई की मण्डी में जुते के कारखाने बहुत ज़्यादा है....और वो सारे मुस्लिमों के है....तो जब कारखाने में बिजली ना होने की वजह से जनरेटर चलता है तो कारखानेदार की लागत बढ जाती है और आंडर भी देर मे पुरा होता है.....लेकिन हमारे यहां तो किसी ने ऐतराज़ नही किया...... अभी दो दिन पहले ये टार्संफ़ार्मर हमारे यहां लगा है....


चाहता तो मैं भी इस पर एक "माईक्रो पोस्ट" डालकर सरकार को गाली दे सकता था क्यौकि ये कटौती सिर्फ़ मुस्लिम बहुल इलाकों में हो रही थी....दलितों के इलाको में नही......

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

आपके ब्लोग के कुछ पाठक और टिप्पणीकार ऐसे है जो बगैर अपने दिमाग का इस्तेमाल किये आपके लेख पर हां करके आखं बन्द करके आपके पीछे चलने लगते है......

आपके पास बहुत अच्छा मंच है और बहुत से लोग आपकी पढते है और उस पर यकीन करते है तो ---- "मेरी आपसे गुज़ारिश है अपने नज़रिये में थोडा सा बदलाव लाये हर चीज़ को एक निगाह से ना देखें...अक्सर ऐसे मौकों पर मैं दुसरों से कहता हूं

"That Nobody Is perfect but Everybody Have Some Qualities"

अपने धर्म का सख्ती से पालन करना अच्छी बात है मैं भी करता हुं.........किसी विचारधारा का समर्थन करना भी कोई बुरी बात नही है लेकिन अपने प्रतिद्वंदी के गुणों का भी तो सम्मान करना चाहिये.......


मेरी बात बहुत लम्बी हो गयी....लेकिन आपके लेखन में बहुत ताकत है जिसे मैंने महसुस किया है तो उस ताकत को ऐसे बर्बाद होते देख कर अच्छा नही लगा तो आवेश में बहुत कुछ कह गया.....

आशा है की आप मेरी बात को अन्यथा नही लेगें

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

@ बेरोज़गार जी,

आदमी को वही दिखता है जो वो देखना चाहता है...आपने ईद मुबारक के पोस्टर तो देख लिये लेकिन वो पोस्टर कौन देखेगा जीन दिवाली मुबारक लिखा है.....

आपको अगर वो पोस्टर अपने शहर में नही दिख रहे है तो मैं आपको आगरा में लगें पोस्टर दिखा सकता हूं-----

अगर आप कहें तो एक लेख मैं उन तस्वीरों के साथ लिख सकता हूं जिसमें
"ईद और दीवाली" अलावा दशहरे की भी बधाई दी गयी है.......

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

@ अवधिया जी,

आप क्या चाहते है की देश के १८% मुसलमानों को उनके त्यौहार पर छुट्टी ना मिलें??????

अगली बार जब भाजपा की सरकार आये तो एक विधेयक पास कराकर इस छुट्टी को रद्द करा दीजियेगा

और वैसे भी हमें तो नमाज़ पढने के लिये सिर्फ़ आधा घंटा चाहिये और ईद की नमाज़ का वक्त तो आफ़िस के वर्किंग आवर से पहले होता है.......और मैने तो ईद के दिन नमाज़ पढकर आफ़िस में काम किया है----कालेज़ में क्लास भी ली है और इम्तिहान भी दिया है

मुनीश ( munish ) said...

Jay Eid !

RAJENDRA said...

kasif arif ki tippani keval is baar ki eed ke sandarbh main hai dhyan rahe agra ke jaane mane ilake naaee ki mandi loha mandi main jo hota rahata vah kisi se chupa nahin hai -bhai akhaadaa kisi pahalwan ka nahin hota kabhi kisi ko chot lag jaye to akhade ka kya dosh hai

yogssg said...

सुरेश जी, मैं राजस्थान के झुंझुनू शहर का निवासी हूँ, हमारे यहाँ भी रोजाना दोपहर को 2 : 30 से 4 : 30 तक बिजली की कटोती होती है, परन्तु ईद वाले दिन नहीं बिजली नहीं गयी | जहाँ तक मैं सोचता हूँ भारत के ज्यादातर शहरों में ऐसा ही होता होगा |

yogssg said...

काशिफ आरिफ जी आप की टिप्पणियां भी गौर करने लायक होती हैं, परन्तु बहुत से मामलों में किसी एक या दो उदहारण से तो हमें सारी समस्या को टेकल नहीं करना चाहिए | यहाँ बात एवरेज के हिसाब से पूरे भारत के लिए हो रही है | किसी एक मुसलमान पर विपत्ति होने का मतलब ये भी नहीं की भारत के सभी मुसलमान विपत्ति में हैं और किसी एक हिन्दू के समृद्ध और सुखी होने से सभी हिन्दू भी सुखी या समृद्ध नहीं हो जाते आप इतने पढ़े लिखे हैं इतना तो समझते होंगे, की किसी पार्टी विशेष का ही हो जाने से किसी नेता का सही होना तय नहीं हो जाता | आप यदि भारत या राष्ट्र के नज़रिए से समस्याओं को देखेंगे तो ज्यादा अच्छा लगेगा, सुरेश जी हमेशा ही तो मुसलमानों के खिलाफ नहीं लिखते क्या आपने उनके हिन्दू मंदिरों के घोटाले वाले लेख नहीं पढ़े | मैं बस यही कहना चाहता हूँ जो गलत है वो गलत है चाहे किसी भी धर्म की हो, जो बात देश हित के खिलाफ है वो हमें सहन नहीं करनी चाहिए, सुरेश जी इसीलिए तो इसे नकली सेकुलरिज्म बोलते हैं क्योंकि नियम कायदे तो सभी के लिए सामान ही होने चाहिए |

दूसरी बात ये की इस ब्लॉग को लगभग पूरा पढने के बाद मैंने यही नोट किया है की आपकी टिप्पणियां (एक दो जगह छोड़ दे तो) केवल मुस्लिमों से सम्बंधित लेखों पर ही है | आप भी वही गलती कर रहे हैं जो नकली सेकुलरिस्ट कर रहे हैं यदि वो हिन्दुओं में नकली सेकुलरिस्ट हैं तो आपके लिए मैं यही कहूँगा की आप मुस्लिमों में नकली सेकुलरिस्ट हैं | हो सकता है की आपने किसी विरोध, डर या
हिचकिचाहट के चलते ऐसे लेखों पर टिप्पणियां नहीं की कि ये तो वैसे पीछे पड़े हैं अगर हिन्दुओं के खिलाफ लिख दिया तो फिर ज्वालामुखी फूट जायेगा | मसलन महाकालेश्वर के ऑडिट घोटाले वाले लेख पर भी आपकी टिपण्णी होती तो मैं आपको सच्ची हिम्मत वाला कहता | जिस तरह कई दुसरे हिन्दू टिप्पणीकारों ने आपके कई कमेंट्स को सराहा है वैसी बात मुस्लिम भाइयों में कम ही देखने को मिलती है | आप लोग मुस्लिमों के साथ कुछ गलत हो जाये तो उसका पक्ष तो ले सकते हैं लेकिन आप हिन्दुओं के साथ हुए किसी अन्याय पर मुँह क्यों नहीं खोलते ? क्या संत कबीर ने सिर्फ मुस्लिम आडम्बरों का विरोध किया था, या सिर्फ हिन्दू आडम्बरों का, नहीं उन्होंने सिर्फ आडम्बरों का विरोध किया था चाहे वो किसी भी धर्म के हों | यदि आप वाकई अपने ब्लॉग के सब टाइटल "धर्म, जात - पात को एक तरफ़ रख कर हिन्दुस्तान को एक सूत्र के पिरोने की कोशिश...." को सार्थक बनाना चाहते हैं तो बिना डरे हिन्दू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, इसाई, जैन या किसी भी धर्म से सम्बंधित पाखंड और दिखावे का विरोध करें और राष्ट्र हित कि बात करें | मैं आपको मुस्लिम हितों कि वकालत करने से तो नहीं रोक रहा मेरा कहना यही कि आप वही तक सीमित न रहकर अपने दायरे को बढायें और कबीर वाला विद्रोह दिखाएँ | मैं भी मानता हूँ कभी कभार सुरेश जी लिखते समय अति पर चले जाते हैं, तो उसके लिए आप अपने विचार कमेन्ट में लिख ही सकते हैं और अपना विरोध जता सकते हैं, वे कभी कमेन्ट डिलीट नहीं करते ये क्या उनकी विचारों
कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति प्रेम का परिचायक नहीं यदि वो वाकई में यदि हिन्दू कट्टरवादी होते तो सभी मुस्लिम भाइयों की कमेन्ट को ही डिलीट कर देते और अपना ही राग अलापते रहते आपकी सुनते ही क्यों | अगर आप ये मानते हैं की उनका ब्लॉग बहुत लोग पढ़ रहे हैं तो ये मत भूलिए की वही लोग सबकी कमेन्ट भी पढ़कर जाते हैं, इसलिए आर्टिकल के विषय को लेकर ज्यादा चिंता न करें और तुंरत अपनी कमेन्ट डाले, आपकी कमेन्ट भी आर्टिकल के साथ सब-आर्टिकल बन जाती है और वो भी लोगों पर आटे में नमक की तरह असर करती है | जैसा की आपने अपने खुद के ब्लॉग पर ये बात लिखी है की आपकी कमेन्ट डिलीट कर दी जाती है | यदि ऐसा सच है तो मुझे भी आप व्यक्तिगत रूप से अवगत कराएँ मेरा इ-मेल पता है, yss.rajneesh@gmail.com, क्योंकि हो सकता है आपकी कमेन्ट फिर डिलीट हो जाये | और यदि मेरी कमेन्ट ही डिलीट हो जाती है आपके पढने से पहले तो फिर मैं ये स्वत: ही जान जाऊंगा की ऐसा भी हो रहा है |

Ravi said...

Suresh Ji,

Ek aur baat Add kerna Chahunga, aap Eid aur Navratri ke beech Fruits aur Vegitables ke beech ka aantar bhi dekh lo....

Roze aur Eid ke Samay to Apple 60-80 Rupay KG tha lekin jaise he Navratri aayee Apple 100 pe aa gaya.... Wahi haal aur sabhi fruits and vegitables ka hai....


aau aap to jaante he hai ke ish business main kon sabse jyada kaam kerta hai....

Government to aapna Vote bank badhane ke liye Alpshankyakon ko badhawa de he rahi hai,
Alpshankyak bhi aachaa fayda utha rahe hai...

Aisha kishi desh main nahi hota hoga....

Mohammed Umar Kairanvi said...

भैया बहुत दिनों बाद मिले हो लो हम भी 30 दिन रोजे रख कर अपनी धार्मिक सर्विस कराकर हाजिर हैं, आपके यहां ईद पर बिजली रही इसके लिये उधर की सरकार को बधाई, ज‍बकि हमने कभी ध्‍यान नही दिया था आपके कौनसे त्‍यौहार पर आपको बिजली नहीं मिलती क्‍यूंकि सब कहते है आज फलाना त्‍यौहार है बिजली नहीं जायेगी,
इस बार ईद पर हमें कैराना में खूब बिजली मिली इसकी यहां से मायावती जी को धन्‍यवाद

signature:
विचार करें कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? हैं या यह big Game against Islam है?
antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)

छ अल्लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकें
islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)