Monday, August 3, 2009

मीडिया हिन्दू-विरोधी क्यों है, इसका जवाब इन रिश्तों में मिलेगा… Why Indian Media is Anti-Hindutva

पहले इन रिश्तेदारियों पर एक नज़र डालिये, तब आप खुद ही समझ जायेंगे कि कैसे और क्यों “मीडिया का अधिकांश हिस्सा” हिन्दुओं और हिन्दुत्व का विरोधी है, किस प्रकार इन लोगों ने एक “नापाक गठजोड़” तैयार कर लिया है, किस तरह ये सब लोग मिलकर सत्ता संस्थान के शिखरों के करीब रहते हैं, किस तरह से इन प्रभावशाली(?) लोगों का सरकारी नीतियों में दखल होता है… आदि।

पेश हैं रिश्ते ही रिश्ते – (दिल्ली की दीवारों पर लिखा होता है वैसे वाले नहीं, ये हैं असली रिश्ते)

-सुज़ाना अरुंधती रॉय, प्रणव रॉय (नेहरु डायनेस्टी टीवी- NDTV) की भांजी हैं।
-प्रणव रॉय “काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशन्स” के इंटरनेशनल सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं।
-इसी बोर्ड के एक अन्य सदस्य हैं मुकेश अम्बानी।
-प्रणव रॉय की पत्नी हैं राधिका रॉय।
-राधिका रॉय, बृन्दा करात की बहन हैं।
-बृन्दा करात, प्रकाश करात (CPI) की पत्नी हैं।

-प्रकाश करात चेन्नै के “डिबेटिंग क्लब” के सदस्य थे।
-एन राम, पी चिदम्बरम और मैथिली शिवरामन भी इस ग्रुप के सदस्य थे।
-इस ग्रुप ने एक पत्रिका शुरु की थी “रैडिकल रीव्यू”।
-CPI(M) के एक वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी की पत्नी हैं सीमा चिश्ती।
-सीमा चिश्ती इंडियन एक्सप्रेस की “रेजिडेण्ट एडीटर” हैं।
-बरखा दत्त NDTV में काम करती हैं।
-बरखा दत्त की माँ हैं श्रीमती प्रभा दत्त।
-प्रभा दत्त हिन्दुस्तान टाइम्स की मुख्य रिपोर्टर थीं।
-राजदीप सरदेसाई पहले NDTV में थे, अब CNN-IBN के हैं (दोनों ही मुस्लिम चैनल हैं)।
-राजदीप सरदेसाई की पत्नी हैं सागरिका घोष।
-सागरिका घोष के पिता हैं दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक भास्कर घोष।
-सागरिका घोष की आंटी रूमा पॉल हैं।
-रूमा पॉल उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं।
-सागरिका घोष की दूसरी आंटी अरुंधती घोष हैं।
-अरुंधती घोष संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि हैं।
-CNN-IBN का “ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क” (GBN) से व्यावसायिक समझौता है।
-GBN टर्नर इंटरनेशनल और नेटवर्क-18 की एक कम्पनी है।
-NDTV भारत का एकमात्र चैनल है को “अधिकृत रूप से” पाकिस्तान में दिखाया जाता है।
-दिलीप डिसूज़ा PIPFD (Pakistan-India Peoples’ Forum for Peace and Democracy) के सदस्य हैं।
-दिलीप डिसूज़ा के पिता हैं जोसेफ़ बेन डिसूज़ा।
-जोसेफ़ बेन डिसूज़ा महाराष्ट्र सरकार के पूर्व सचिव रह चुके हैं।

-तीस्ता सीतलवाड भी PIPFD की सदस्य हैं।
-तीस्ता सीतलवाड के पति हैं जावेद आनन्द।
-जावेद आनन्द एक कम्पनी सबरंग कम्युनिकेशन और एक संस्था “मुस्लिम फ़ॉर सेकुलर डेमोक्रेसी” चलाते हैं।
-इस संस्था के प्रवक्ता हैं जावेद अख्तर।
-जावेद अख्तर की पत्नी हैं शबाना आज़मी।

-करण थापर ITV के मालिक हैं।
-ITV बीबीसी के लिये कार्यक्रमों का भी निर्माण करती है।
-करण थापर के पिता थे जनरल प्राणनाथ थापर (1962 का चीन युद्ध इन्हीं के नेतृत्व में हारा गया था)।
-करण थापर बेनज़ीर भुट्टो और ज़रदारी के बहुत अच्छे मित्र हैं।
-करण थापर के मामा की शादी नयनतारा सहगल से हुई है।
-नयनतारा सहगल, विजयलक्ष्मी पंडित की बेटी हैं।
-विजयलक्ष्मी पंडित, जवाहरलाल नेहरू की बहन हैं।

-मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आन्दोलन की मुख्य प्रवक्ता और कार्यकर्ता हैं।
-नबाआं को मदद मिलती है पैट्रिक मेकुल्ली से जो कि “इंटरनेशनल रिवर्स नेटवर्क (IRN)” संगठन में हैं।
-अंगना चटर्जी IRN की बोर्ड सदस्या हैं।
-अंगना चटर्जी PROXSA (Progressive South Asian Exchange Network) की भी सदस्या हैं।
-PROXSA संस्था, FOIL (Friends of Indian Leftist) से पैसा पाती है।
-अंगना चटर्जी के पति हैं रिचर्ड शेपायरो।
-FOIL के सह-संस्थापक हैं अमेरिकी वामपंथी बिजू मैथ्यू।
-राहुल बोस (अभिनेता) खालिद अंसारी के रिश्ते में हैं।
-खालिद अंसारी “मिड-डे” पब्लिकेशन के अध्यक्ष हैं।
-खालिद अंसारी एमसी मीडिया लिमिटेड के भी अध्यक्ष हैं।
-खालिद अंसारी, अब्दुल हमीद अंसारी के पिता हैं।
-अब्दुल हमीद अंसारी कांग्रेसी हैं।
-एवेंजेलिस्ट ईसाई और हिन्दुओं के खास आलोचक जॉन दयाल मिड-डे के दिल्ली संस्करण के प्रभारी हैं।

-नरसिम्हन राम (यानी एन राम) दक्षिण के प्रसिद्ध अखबार “द हिन्दू” के मुख्य सम्पादक हैं।
-एन राम की पहली पत्नी का नाम है सूसन।
-सूसन एक आयरिश हैं जो भारत में ऑक्सफ़ोर्ड पब्लिकेशन की इंचार्ज हैं।
-विद्या राम, एन राम की पुत्री हैं, वे भी एक पत्रकार हैं।
-एन राम की हालिया पत्नी मरियम हैं।
-त्रिचूर में आयोजित कैथोलिक बिशपों की एक मीटिंग में एन राम, जेनिफ़र अरुल और केएम रॉय ने भाग लिया है।
-जेनिफ़र अरुल, NDTV की दक्षिण भारत की प्रभारी हैं।
-जबकि केएम रॉय “द हिन्दू” के संवाददाता हैं।
-केएम रॉय “मंगलम” पब्लिकेशन के सम्पादक मंडल सदस्य भी हैं।
-मंगलम ग्रुप पब्लिकेशन एमसी वर्गीज़ ने शुरु किया है।
-केएम रॉय को “ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन लाइफ़टाइम अवार्ड” से सम्मानित किया गया है।
-“ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन” के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं जॉन दयाल।
-जॉन दयाल “ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल”(AICC) के सचिव भी हैं।
-AICC के अध्यक्ष हैं डॉ जोसेफ़ डिसूज़ा।
-जोसेफ़ डिसूज़ा ने “दलित फ़्रीडम नेटवर्क” की स्थापना की है।
-दलित फ़्रीडम नेटवर्क की सहयोगी संस्था है “ऑपरेशन मोबिलाइज़ेशन इंडिया” (OM India)।
-OM India के दक्षिण भारत प्रभारी हैं कुमार स्वामी।
-कुमार स्वामी कर्नाटक राज्य के मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं।
-OM India के उत्तर भारत प्रभारी हैं मोजेस परमार।
-OM India का लक्ष्य दुनिया के उन हिस्सों में चर्च को मजबूत करना है, जहाँ वे अब तक नहीं पहुँचे हैं।
-OMCC दलित फ़्रीडम नेटवर्क (DFN) के साथ काम करती है।
-DFN के सलाहकार मण्डल में विलियम आर्मस्ट्रांग शामिल हैं।
-विलियम आर्मस्ट्रांग, कोलोरेडो (अमेरिका) के पूर्व सीनेटर हैं और वर्तमान में कोलोरेडो क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेण्ट हैं। यह यूनिवर्सिटी विश्व भर में ईसा के प्रचार हेतु मुख्य रणनीतिकारों में शुमार की जाती है।
-DFN के सलाहकार मंडल में उदित राज भी शामिल हैं।
-उदित राज के जोसेफ़ पिट्स के अच्छे मित्र भी हैं।
-जोसेफ़ पिट्स ने ही नरेन्द्र मोदी को वीज़ा न देने के लिये कोंडोलीज़ा राइस से कहा था।
-जोसेफ़ पिट्स “कश्मीर फ़ोरम” के संस्थापक भी हैं।
-उदित राज भारत सरकार के नेशनल इंटीग्रेशन काउंसिल (राष्ट्रीय एकता परिषद) के सदस्य भी हैं।
-उदित राज कश्मीर पर बनी एक अन्तर्राष्ट्रीय समिति के सदस्य भी हैं।
-सुहासिनी हैदर, सुब्रह्मण्यम स्वामी की पुत्री हैं।
-सुहासिनी हैदर, सलमान हैदर की पुत्रवधू हैं।
-सलमान हैदर, भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं, चीन में राजदूत भी रह चुके हैं।

-रामोजी ग्रुप के मुखिया हैं रामोजी राव।
-रामोजी राव “ईनाडु” (सर्वाधिक खपत वाला तेलुगू अखबार) के संस्थापक हैं।
-रामोजी राव ईटीवी के भी मालिक हैं।
-रामोजी राव चन्द्रबाबू नायडू के परम मित्रों में से हैं।

-डेक्कन क्रॉनिकल के चेयरमैन हैं टी वेंकटरमन रेड्डी।
-रेड्डी साहब कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य हैं।
-एमजे अकबर डेक्कन क्रॉनिकल और एशियन एज के सम्पादक हैं।
-एमजे अकबर कांग्रेस विधायक भी रह चुके हैं।
-एमजे अकबर की पत्नी हैं मल्लिका जोसेफ़।
-मल्लिका जोसेफ़, टाइम्स ऑफ़ इंडिया में कार्यरत हैं।

-वाय सेमुअल राजशेखर रेड्डी आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।
-सेमुअल रेड्डी के पिता राजा रेड्डी ने पुलिवेन्दुला में एक डिग्री कालेज व एक पोलीटेक्नीक कालेज की स्थापना की।
-सेमुअल रेड्डी ने कहा है कि आंध्रा लोयोला कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उक्त दोनों कॉलेज लोयोला समूह को दान में दे दिये।
-सेमुअल रेड्डी की बेटी हैं शर्मिला।
-शर्मिला की शादी हुई है “अनिल कुमार” से। अनिल कुमार भी एक धर्म-परिवर्तित ईसाई हैं जिन्होंने “अनिल वर्ल्ड एवेंजेलिज़्म” नामक संस्था शुरु की और वे एक सक्रिय एवेंजेलिस्ट (कट्टर ईसाई धर्म प्रचारक) हैं।
-सेमुअल रेड्डी के पुत्र जगन रेड्डी युवा कांग्रेस नेता हैं।
-जगन रेड्डी “जगति पब्लिकेशन प्रा. लि.” के चेयरमैन हैं।
-भूमना करुणाकरा रेड्डी, सेमुअल रेड्डी की करीबी हैं।
-करुणाकरा रेड्डी, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की चेयरमैन हैं।
-चन्द्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि “लैंको समूह” को जगति पब्लिकेशन्स में निवेश करने हेतु दबाव डाला गया था।
-लैंको कम्पनी समूह, एल श्रीधर का है।
-एल श्रीधर, एल राजगोपाल के भाई हैं।
-एल राजगोपाल, पी उपेन्द्र के दामाद हैं।
-पी उपेन्द्र केन्द्र में कांग्रेस के मंत्री रह चुके हैं।
-सन टीवी चैनल समूह के मालिक हैं कलानिधि मारन
-कलानिधि मारन एक तमिल दैनिक “दिनाकरन” के भी मालिक हैं।
-कलानिधि के भाई हैं दयानिधि मारन।
-दयानिधि मारन केन्द्र में संचार मंत्री थे।
-कलानिधि मारन के पिता थे मुरासोली मारन।
-मुरासोली मारन के चाचा हैं एम करुणानिधि (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री)।
-करुणानिधि ने ‘कैलाग्नार टीवी” का उदघाटन किया।
-कैलाग्नार टीवी के मालिक हैं एम के अझागिरी।
-एम के अझागिरी, करुणानिधि के पुत्र हैं।
-करुणानिधि के एक और पुत्र हैं एम के स्टालिन।
-स्टालिन का नामकरण रूस के नेता के नाम पर किया गया।
-कनिमोझि, करुणानिधि की पुत्री हैं, और केन्द्र में राज्यमंत्री हैं।
-कनिमोझी, “द हिन्दू” अखबार में सह-सम्पादक भी हैं।
-कनिमोझी के दूसरे पति जी अरविन्दन सिंगापुर के एक जाने-माने व्यक्ति हैं।
-स्टार विजय एक तमिल चैनल है।
-विजय टीवी को स्टार टीवी ने खरीद लिया है।
-स्टार टीवी के मालिक हैं रूपर्ट मर्डोक।

-Act Now for Harmony and Democracy (अनहद) की संस्थापक और ट्रस्टी हैं शबनम हाशमी।
-शबनम हाशमी, गौहर रज़ा की पत्नी हैं।
-“अनहद” के एक और संस्थापक हैं के एम पणिक्कर।
-के एम पणिक्कर एक मार्क्सवादी इतिहासकार हैं, जो कई साल तक ICHR में काबिज रहे।
-पणिक्कर को पद्मभूषण भी मिला।
-हर्ष मन्दर भी “अनहद” के संस्थापक हैं।
-हर्ष मन्दर एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।
-हर्ष मन्दर, अजीत जोगी के खास मित्र हैं।
-अजीत जोगी, सोनिया गाँधी के खास हैं क्योंकि वे ईसाई हैं और इन्हीं की अगुआई में छत्तीसगढ़ में जोरशोर से धर्म-परिवर्तन करवाया गया और बाद में दिलीपसिंह जूदेव ने परिवर्तित आदिवासियों की हिन्दू धर्म में वापसी करवाई।
-कमला भसीन भी “अनहद” की संस्थापक सदस्य हैं।
-फ़िल्मकार सईद अख्तर मिर्ज़ा “अनहद” के ट्रस्टी हैं।

-मलयालम दैनिक “मातृभूमि” के मालिक हैं एमपी वीरेन्द्रकुमार
-वीरेन्द्रकुमार जद(से) के सांसद हैं (केरल से)
-केरल में देवेगौड़ा की पार्टी लेफ़्ट फ़्रण्ट की साझीदार है।
-शशि थरूर पूर्व राजनैयिक हैं।
-चन्द्रन थरूर, शशि थरूर के पिता हैं, जो कोलकाता की आनन्दबाज़ार पत्रिका में संवाददाता थे।
-चन्द्रन थरूर ने 1959 में द स्टेट्समैन” की अध्यक्षता की।
-शशि थरूर के दो जुड़वाँ लड़के ईशान और कनिष्क हैं, ईशान हांगकांग में “टाइम्स” पत्रिका के लिये काम करते हैं।
-कनिष्क लन्दन में “ओपन डेमोक्रेसी” नामक संस्था के लिये काम करते हैं।
-शशि थरूर की बहन शोभा थरूर की बेटी रागिनी (अमेरिकी पत्रिका) “इंडिया करंट्स” की सम्पादक हैं।
-परमेश्वर थरूर, शशि थरूर के चाचा हैं और वे “रीडर्स डाइजेस्ट” के भारत संस्करण के संस्थापक सदस्य हैं।

-शोभना भरतिया हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की अध्यक्षा हैं।
-शोभना भरतिया केके बिरला की पुत्री और जीड़ी बिरला की पोती हैं
-शोभना राज्यसभा की सदस्या भी हैं जिन्हें सोनिया ने नामांकित किया था।
-शोभना को 2005 में पद्मश्री भी मिल चुकी है।
-शोभना भरतिया सिंधिया परिवार की भी नज़दीकी मित्र हैं।
-करण थापर भी हिन्दुस्तान टाइम्स में कालम लिखते हैं।
-पत्रकार एन राम की भतीजी की शादी दयानिधि मारन से हुई है।

यह बात साबित हो चुकी है कि मीडिया का एक खास वर्ग हिन्दुत्व का विरोधी है, इस वर्ग के लिये भाजपा-संघ के बारे में नकारात्मक प्रचार करना, हिन्दू धर्म, हिन्दू देवताओं, हिन्दू रीति-रिवाजों, हिन्दू साधु-सन्तों सभी की आलोचना करना एक “धर्म” के समान है। इसका कारण हैं, कम्युनिस्ट-चर्चपरस्त-मुस्लिमपरस्त-तथाकथित सेकुलरिज़्म परस्त लोगों की आपसी रिश्तेदारी, सत्ता और मीडिया पर पकड़ और उनके द्वारा एक “गैंग” बना लिया जाना। यदि कोई समूह या व्यक्ति इस गैंग के सदस्य बन जायें, प्रिय पात्र बन जायें तब उनके और उनकी बिरादरी के खिलाफ़ कोई खबर आसानी से नहीं छपती। जबकि हिन्दुत्व पर ये सब लोग मिलजुलकर हमला बोलते हैं।

(नोट – यह जानकारियाँ नेट पर उपलब्ध विभिन्न वेबसाईट्स, फ़ोरम आदि पर आधारित हैं, इसमें मेरा कोई योगदान नहीं है। यदि इसमें कोई गलती दिखाई दे अथवा किसी नाम या रिश्ते में विसंगति अथवा गलती मिले तो टिप्पणी करें, तत्काल उसमें सुधार किया जायेगा…अपनी तरफ़ से कोई और रिश्ता उजागर करना चाहते हों तो वह भी इसमें जोड़ें…)

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110 comments:

mahashakti said...

ये रही सीधी बात नो बकवास :)

अनुनाद सिंह said...

सब कुछ इतना साफ है कि अक्ल के अंधे को भी कारण और प्रभाव का रिस्ता साफ-साफ दिखने लगेगा।

Suresh Chiplunkar said...

धन्यवाद महाशक्ति भाई, आजकल "सच का सामना" के बारे में बहुत बात हो रही है ना…। मैंने सोचा मीडिया को भी करवा दूं "सच का सामना"… :)

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ये सच का सामना कम से कम सिक-उलर मीडिया को तो हजम होने से रहा. बहरहाल आपने बहुत अच्छा काम किया है.

निशाचर said...

इस "मीडिया माफिया" के गठजोड़ का जवाब देने के लिए हिंदूवादी संगठनों को भी अपने अखबार निकलने होंगे साथ ही अपने टी वी चैनल शुरू करने होंगे . यह न तो इतना आसान होगा न ही इतनी आसानी से हजम किया जायेगा लेकिन यही एक रास्ता है.

Baba said...

aakhi soniya gandhi aa hi gai aape lekh main...

Sanjeet Tripathi said...

ग्रेट!

क्या रिसर्च करते हो बॉस आप।
वाकई लिखने के लिए इतना रिसर्च तो आजकल के पत्तरकार भी नई करते होंगे।
मानना पड़ेगा।
जनून हो तो आप जैसा।

वैसे लगता है कि 'प्रभु' को अब 'सुनील' की जगह ले लेनी चाहिए ;)

SALEEM AKHTER SIDDIQUI said...

chiplonker ji,
wase to aao bahut sare naam bhool gaye hain. phir bhi ek naam mera bhi likh dete to main bhi DHANY ho jata. main bhi bade aadmiyon main shumar ho jata.

Suresh Chiplunkar said...

सलीम भाई, जो नाम मैं भूल गया हूं आप अपनी टिप्पणी में जोड़ दीजिये…… और आप चाहते हैं तो मैं आपका नाम भी जोड़ दूंगा, आप बताईये तो सही कहाँ जोड़ना है? किस बड़े व्यक्ति से आपकी रिश्तेदारी है? :)

Ratan Singh Shekhawat said...

आपने तो इनके रिश्तों की पूरी कुंडली ही खोल दी |

safat alam said...

(गठजोड़ का जवाब देने के लिए हिंदूवादी संगठनों को भी अपने अखबार निकलने होंगे साथ ही अपने टी वी चैनल शुरू करने होंगे)

शायद भारत में अब तक हिन्दू संगठनों का कोई अखबार अथवा कोई चैनल नहीं चल रहा है। क्या ही अच्छी टिप्पणी है। अगर निकलना शुरू हो जाए तो इसके बाद क्या होगा ईश्वर ही जाने।

सुरेश साहिब के नाम
नकारात्मक लेख से यदि बचते तो अच्छा होता। यह देश के हित में नहीं है। इसके द्वारा आप लोग पारस्परिक मित्रता को खत्म करना चाहते हैं। कृपया सकारात्मक लेख लिखें। धन्यवाद

सागर नाहर said...

हे भगवान..
पढ़ते पढ़ते थक गया, पूरा पढ़ नहीं पाया।:)

एक और जोड़ दीजिये राज्यसभा के सदस्य हैं गिरीश संघी जो संघी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री के चैयरमेन हैं और स्वतंत्र वार्ता(हिन्दी) तथा वार्ता(तेलुगु) अखबार भी यह समूह निकालता है।

haal-ahwaal said...

isme ek jaankaari missing hai....
NDTV,CNN-IBN aur aise hi dusre media houses ko fund kaha se milta hai...ye bhi batana chahiye...

Shiv Kumar Mishra said...

अजब रिश्ते...गजब रिश्ते...

गजब शोध है आपका. भले ही जानकारी नेट पर हो, लेकिन इकठ्ठा करने में आपने जो मेहनत की है, उसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद.

Shyam Verma said...

great research !!!

Virender Rawal said...

ab samajh me aaya ki dal me kuchh kala nahi balki poori dal hi kali hai.

Tabhi charo taraf hindu santo or devtaon par khule aam aarop lagta hai par koi support me nahi aata hai. jo support me aata hai usko koi
coverage nahi di jaati.
Bhagwan ram ke hone me sandeh ho jaata hai . par dawood aur kasaab ko manavta ke rakshak batane ke liye research hoti hai.
Har bomb blast ke baad bas sarkar
compensation bantane me jyada ruchi leti hai na ki dushman ko muhtod jawab dene me . aur ye besharm media wale bas hame apmanit karne ke liye bas baaten-baaten karte dikhte hain jaise sara theka inhi ke jimme hai.
itni lamba comment karne ke liye khed hai. Par suresh ji ke abhaar vyakt karne ke liye mere paas shabdon ki kami nahi hai. Suresh ji , bhagwan aap par sada kripa banaye rakhe

!! ram !!
!! hari om !!

चन्दन चौहान said...

अगर पुरा लेख पढ़ कर समझ में ना आये तो संक्षेप में यही वे लोग हैं जो हिन्दुस्तान का लूटिया डुबोनें में लगें हैं

P.N. Subramanian said...

भैय्या रे भैय्या यह तो हनुमान की पूँछ से भी लम्बी रिश्तेदारी लग रही है. बधाई हो

Suresh Chiplunkar said...

@ शिवकुमार मिश्रा जी - धन्यवाद
@ वीरेन्द्र रावल जी - धन्यवाद
@ सफ़त आलम - इस लेख में आपको नकारात्मकता कहाँ से दिखाई दे गई? क्या यह सब झूठ है? आपने कहा कि "देशहित" में नहीं है - स्पष्ट कीजिये कि क्यों नहीं है? मीडिया के हिन्दुत्व विरोधी रुख के दसियों उदाहरण गिनाये जा सकते हैं। सकारात्मक हिन्दूवादी रुख को स्पष्ट करने के लिये निश्चित ही एक चैनल की सख्त आवश्यकता है, फ़िलहाल तो हिन्दुओं-हिन्दुत्व को सिर्फ़ नकारात्मक रंग से पोता जा रहा है चारों तरफ़…

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

क्या बात है, बहुत ही गहन अध्ययन। द्रोपदी के चीर की तरह खुलता ही जा रहा है पर रिश्तेदारियां कम नहीं हो रहीं।
क्या कहा जाये?

psudo said...

Suresh Ji, this is as impressive as any of your post. Can you quote the source of this information.

chandan said...

भइया कुछ भी हो लिस्ट पढ़कर हैरानी नहीं हुई, जितना कि इस पर मेहनत किया गया है, फिर भी काबिलेतारीफ तो है ही.....और मज़ेदार भी

Vivek Rastogi said...

बहुत बढ़िया इन मीडिया को नंगा करने वाला कोई तो होना चाहिये पर अगर कोई इलेक्ट्रानिक मीडिया वाला ये सब करता तो मजा दस गुना ज्यादा हो जाता। इस पर तो सभी मीडिया वालों को अपने न्यूज चैनल में ब्रेकिंग न्यूज बनाकर सारे समझदार लोगों से बहस करवाना चाहिये। कि देखो ये सुरेश चिपलूनकर ने क्या लिख दिया अपने खिलाफ़...

चन्दन कुमार said...

behtarin suresh ji maza aa gaya really

Kumar Dev said...

सुरेश जी,
बधाई हो, आप तो राजपुरोहित हो लिए जो तथाकथित सेकुलरों की रिश्तेदारी ( या वंशावली ) खोज ली मेरी तरफ से निकट भविष्य में प्रकाशित होने वाले "हिन्दू" पत्रिका के मुख्य संपादक नियुक्त किये जाते है l
पता नहीं क्यों कुछ पढ़े लिखे ( अनपढ़ ) बहुसंख्यक लोगो को मिर्ची लग जाती है आपके हिंदुत्व के गाने से ये @#$*&*&*## नहीं समझते की हम हिन्दुओं के दरियादिली की वजह से ही ये यहाँ खा कमा रहे है l
वैसे एक समझदार #@#&*&*#@## सेकुलर अपनी जमात फैला रहा है ( "स्वच्छ सन्देश" नाम का )

Meenu khare said...

great research !!!

Satyajeetprakash said...

सच में गिरीश संघी का नाम तो भूल ही गए. वे संघी इंडस्ट्रीज के मालिक है और हिंदी-तेलुगु में वार्ता दैनिक निकालते हैं. साथ ही वे कांग्रेस से राज्यसभा के सदस्य भी हैं. सोनिया गांधी के काफी करीब.

Common Hindu said...

मानना पड़ेगा।
जनून हो तो आप जैसा।

Common Hindu said...

as usual
great research !!!

Common Hindu said...

Hello Blogger Friend,

Your excellent post has been back-linked in
http://hinduonline.blogspot.com/

- a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu
- Hindu Online.

kailash tiwari said...

Jo nam aapane ginae hain ye sabhi ek uddheshya ko lekar samrpit bhaw se kam kar rahen hain. unhen govt. se har prakar ki sukh suvidhaen prapt hain. Hindutwa ki bat karne walon ko unse sabak lena chahie.
Suresh ji ap akele apne dam par desh bhakti ki jyoti jalae huwe hain.Mujhe nahin lagata hai ki kisi Hindu neta ne aapko gambhirata se liya ho. ya apko koi protsahan diya ho. ye hamare tathakatith leaders ki galti hai. Aapko yadi ek manch diya jave to aap kya nahin kar sakate hain? Jin dhurton ke aapne nam ginae hain unhen ap akele pani palane men saksham hain.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

निस्सन्देह आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। साधुवाद।

BS said...

कमाल है साहब, इतनी बात के बावजूद हिंदूवादी (बीजेपी वाले खास तौर पर) इन के चैनल और अखबारों में इंटरव्यह देने के लिये दीवाने हुये जाते हैं। इन्हीं अखबारों और चैनलों पर भाजपा शासित राज्यों के विज्ञापन देते हैं। भाजपाई सरकारों में इन्हीं को पूछा जाता है। बाजपेई साहब विदेश यात्रा में इन्हें ही ले जाते थे।

हिंदू वादी इस समय अंग्रेजीदां लोगों के कब्जे में हैं।

तो क्या क्यों माना जाये कि या तो हिंदू वादी मूर्ख हैं या फिर ये जो नाम गिनाये गये हैं वो ठीक हैं या फिर सब एक ही हैं अलग-अलग नामों से दुकान चलाते हैं।

TUMHARI KHOJ ME said...

सुरेश जी,
आपकी पोस्‍ट ने बहुत से लोगों की भ्रम की उन भ्रान्तिओं को तोडा होगा जो हमें या आपको बिना इन आंकडों के ही पता हैं । पर मुददा यह है कि इस देश की आम जनता को तो न तो इसके बारे में पता है और न ही वे इसे समझ पाएगें पर असली वोटबैंक भी वहीं हैं ।

वीरेन्द्र जैन said...

पाहली बात तो यह पोस्ट पुरानी है मेनें किसी और सांप्रदायिक ब्लॉग पर पढ़ी है पर आप ने अपने स्त्रोत का ज़िक्र नहीं किया दुसरे इससे क्या सिद्ध होता है या इससे साम्प्रदायिकों के षडयंत्र और उनके गुनाह कैसे कम माने जाना चाहिए . बात किसी की गलतबयानी या खबरों के तोड़ने मरोड़ने के प्रमाण पर ही हो सकती है. बहुत सारे सांप्रदायिक मिल कर कुछ शोर करें तो उससे सत्य नहीं बदल जाता .संघ परिवार के नंगे गुनाह सबको दिखाई पढ़ते हैं चाहे वे गुजरात के हों या सब्बरवाल की ह्त्या ke

जयराम "विप्लव" said...

सुरेश जी इस लेख पर कुछ कहना बस में नहीं है! कोई कुछ भी कहे मीडिया में नए आगंतुकों से पुच्छे तो नाते-रिश्तों के चलन का प्रमाण पुख्ता हो जायेगा . अरे यहाँ तो मुफ्त में कमर तोड़ने वाले भी नाना -मामू के भरोसे ही आते हैं !और लेख में उल्ल्लिखित तमाम रिश्ते तो जगजाहिर है जिन्हें एक साथ सार्वजनिक किया गया है .

Mohammed Umar Kairanvi said...

maharaj ismen wesi hi boo aarahi he,jesi aapne aurangzeb ke article men ki thi,,,woh article aapne apne blog men andar ko kahin rakh liya,,
jo nahin padh sake woh yeh he:
http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2008/06/aurangzeb-kashi-vishwanath-temple.html

makkari wali research karke pesh kiya tha use aapne,,jab men asal cheez lakar net men pesh ki to ,, chhupa liya aapne woh article,,,,himmat he to apne blog men use ooper ko lao..

thoda sa yeh asal article isi blog par comment men mil jayega,,,,poora padhna chahen to visit
islaminhindi.blogspot.com

परमजीत बाली said...

आप ने सच से सामना करवा दिया:)
बहुत गहरी खोज है यह तो आपको बहुत बहुत बधाई।

AlbelaKhatri.com said...

aapka aalekh athvaa report,

ye jo bhi hai

aankhen khol dene wala hai

kaash !

har bharteey tak ye jaankaari

pahunc sake...

main bhi mere star par try

karoongaa

pahli baar aayaa hoon shaayad aapke blog par aur ek halchal see apne

manh me lekar laut rahaa hoon

kuchh puraani panktiyaan yaad aati

hain :

KIS RAAVAN KI BAANHEN KAATOON

KIS LANKAA KO AAG LAGAAUN

GHAR-GHAR LANKAA,PAG-PAG RAAVAN

ITNE RAAM KAHAAN SE LAAUN ?


aapka haardik abhinandan !

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

सुरेश भाई आपने काफी मिहनत की है | बहुत अच्छा किया इसे लिख कर | अपना कार्य जारी रखें | जहाँ तक मुहम्मद भाई की बात है , उनपे समय बर्बाद करने से कोई फायदा नहीं | वो भी एक क्षद्म सेकुलर हैं उनसे सच की आशा नहीं की जा सकती | मुहम्मद जी के ब्लॉग पे गया और निम्न बातें दिखी और कई सवाल उनके लिए मन मैं आ गई | मुहम्मद भाई जवाब दीजिये समय निकाल कर :

* हजरत मुहम्मद कल्कि अवतार हिन्दू ग्रन्थ ; प्रश्न : क्या आप हिन्दू धर्म ग्रंथों को स्वीकार करते हैं ? यदि हाँ तो हमारे ग्रंथों मैं भगवान् राम, कृष्ण, शिव , ब्रह्मा .... को प्रमुखता दी गई है , क्या आप राम, कृष्ण, शिव , ब्रह्मा को भगवान् मानते हैं ? यदि नहीं मानते तो क्या ये साबित नहीं होता की आप इतने सारे हिन्दू ग्रंथों की वाणी को नकार के बस दो-चार श्लोक का गलत अर्थ निकाल रहे हैं वो भी अपने फायदे के लिए ?

* हिन्दू ग्रंथों मैं कलियुग का काल लगभग ४,३२,००० वर्ष माना गया है और कल्कि अवतार कलि युग के अंत मैं होगा | आपने ये कैसे मान लिया की कलि युग का अंत हो चुका है ? चलिए आपकी बात थोड़े समय के लिए मान ली, जब आप भविष्य पुराण का reference दे रहे हैं तो उसी भविष्य पुराण मैं राम, कृष्ण, शिव को भगवन माना गया है , इसको आप क्यों भूल रहे हैं ?

* आपने औरंगजेब को हिन्दुओं का हितैसी बताने का भरपूर प्रयास किया है ... हो सकता है सेकुलार्स आपके लिए कोई अवार्ड दिलवा दें | हम हिन्दुओं को ये मत बतएये की औरंगजेब हिन्दुओं का हितैसी था | शायद आपके नजर मैं लाखों हिन्दुओं का कत्लेआम करने वाला शासक ही हिन्दू हितैसी है | हिन्दुओं पे जजिया कर लगानेवाला हिन्दू हितैसी है | हजारों मंदिर तोड़ने वाला हिन्दू हितैसी है | खैर जो भी हो ये आपका अपना विचार है , हम क्यों आपके फटे मैं टांग अदाएं | हम हिन्दू तो ये विश्वास करने से रहें , हाँ कुछ मुस्लिम भाई आपके झांसे मैं जरुर आ जयेंगे |

* कश्मीर मैं कम से कम १०० हिन्दू मंदिर पिछले २० वर्षों मैं थोड़े गए हैं | तोडे गए मंदिरों का पूरा लेखा जोखा आपको Mr. Kaul की पुस्तक मैं मिल जायेंगी | पुस्तक मैं तोडे गए मंदिरों की एड्रेस भी मिल जाएगा | खैर, आप तो इसमें भी बोल सकते हैं की मंदिर हिन्दुओं की भलाई के लिए ही तोडा गया या मंदिर तोडे ही नहीं गए |

वैसे भी बहुत कम ही मुस्लिम भाई हैं जो दुसरे धर्म की इज्जत करते हैं | नहीं तो उनके लिए इस्लाम को ना मानने वाले काफिर हैं | शायद आपकी नजर मैं अहमदिया मुस्लिम , शिया भी काफिर ही हैं |

smart said...
This comment has been removed by the author.
smart said...

सुरेश जी आप द्वारा किया गया "पोस्टमार्टम" वाकई कबीले तारीफ़ है. हिंदुत्व का विरोध करना अपने आप का विरोध करना है. हिंदुत्व नहीं रहेगा तो धर्म निरपेक्षता भी नहीं रहेगी ,पाकिस्तान की तरह.ये गुट बना कर हिंदुत्व की खिलाफत कर रहे है बहुत भरी पड़ेगा.
एक उदाहरण देता हूँ पिछले दिनों एन डी टीवी इमेजिन पर एक "नाचने वाली" का स्वयंवर (इससे पहले वाले स्वयंवर टीवी पर प्रसारित नहीं हुए)प्रसारित किया गया. जिसने वर चुनने से पहले प्रार्थना की वो "जीसस" की थी. जब कि वो नाचने वाली अपने को "गणेश भक्त बताती है".
खैर हजारों सालों से हमें मार खाते रहने कि आदत पड़ गई है तो कोई फर्क नहीं पड़ता है. "आवहु सब मिल रोवहु भाई भारत दुर्दशा देखि न जाई"

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

नमस्कार वीरेंद्र जी,

आपका comment chiplunkar jee के साईट पे मिला , बड़ा दुःख हुआ की आपके जैसा बुजुर्ग व्यक्ती ऐसा बोल रहा है | मैंने थोड़े रेफेरेंस निकाले हैं, वैसे आपका comment देखकर नहीं लगता की आप सच जानना चाहते है, phir भी मैं कोशिश कर रहा हूँ :

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प्रोनोय Roy is married to Radhika Roy (sister of Brinda Karat),... He is the cousin of the prize winning Indian writer Arundhati Roy[1] .Dr Roy's father and Arundhati's father are brothers. लिंक : http://en.wikipedia.org/wiki/Prannoy_Roy

Arundhati Roy was born in Shillong, Meghalaya,[1] India, to a Keralite Syrian Christian mother, the women's rights activist Mary Roy, link : http://en.wikipedia.org/wiki/Arundhati_Roy
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यदि आप सच मैं रेफेरेंस चाहते हैं तो आगे मिहनत कर आपको भेजूंगा | पर आपने तो पहले ही हमें सांप्रदायिक करार दिया है | आप ठहरे सेकुलर हम तो हैं सांप्रदायिक , मुझे नहीं लगता आप सांप्रदायिक लोगों के दिए reference को मानेंगे, phir भी अपनी तरफ से कोशिश करूंगा |

धन्यवाद
राकेश

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

भाई बहुत दूर तक रिश्तो का पीछा किया और करवाया . अपना मिडिया तो नोटों के तले दव जाता है . पञ्चजन्य भी तो खरा नहीं उतरा .

रंजन said...

सुरेश जी आपकी मेहनत को सलाम... पर कुछ बातें
१. मुझे ये रिश्ते देख समझ नहीं आया कि ये हिन्दुत्व विरोधी क्यों है? किसी की पत्नी, बहन, भाई, दोस्त होना एक बात है और विचार दुसरी.. ये जरुरी नहीं की मेरे विचार मेरे दोस्तों के, रिश्तेदारों के विचारों से मेल खाये..

२. इसमें बहुत सारे तो हिन्दु ही है.. तो वे क्यों हिन्दुत्व के विरोधी है? और किस हिन्दुत्व के विरोधी है..

३. ये बहुत छोटी लिस्ट है अगर ये विरोधी है तो सोचीये समर्थन में कितने होगें... क्या फर्क पड़ता है?

एक और बात जहां तक भाजपा के बारें में नकारात्मक प्रचार की है तो मेरा मानना है कि भाजपा इतने मौके क्यों देती है कि उसके बारे में गल्त प्रचार है... बहुत हद तक क्या वो खुद जिम्मेदार नहीं है अपनी स्थिती के लिए..

संजय बेंगाणी said...

यह एक चक्रव्यू (वर्तनी गलत लग रही है) सा है, जिसे तोड़ना कतई आसान नहीं, मगर उजागर होना ही चाहिए. काफी कुछ पता था, मगर एक जगह रख देना बधाई के पात्र है.

अजय कुमार झा said...

sueresh jee ,
sirf itna kehnaa chahungaa ki aaj blogging mein bahut kam log itne sanjeedaa aur samarpit hain..aapkee lekhanee aur jazbe dono ko salaam..ek yaadgaar post

त्यागी said...

श्री सुरेश जी
आपके योगदान को राष्ट्र और हिन्दू दोनों याद रखेगा और इस निस्वार्थ सेवा और सूचना के लिए बधाई और धन्यवाद.
त्यागी
http://parshuram27.blogspot.com/

वजूद said...

मेरे सभी दोस्तों! आपने जो भी लिखा ये आपके अपने विचार हैं. सुरेश जी ने जिन किन्ही साईट से ये सन्दर्भ लिए काबिले तारीफ़ हैं. लेकिन वीरेंद्र जी के भाव को समझिये. वे भी आप सभी की तरह सच बोल रहे हैं. हमारा दायित्वा है कि हम सभी गढे मुर्दे उखाड़ने से बाज़ आयें. अन्यथा एक बुरे भविष्य में देश को ले जाने को तैयार रहें. देख लीजिये - आज जर्मनी में ही हिटलर के नाम पर लोग थूकते हैं. उमर और सफत आलम जी आप भी इसे सिर्फ एक विचार ही मानें तो अच्छा है, क्योंकि अधिकाँश हिन्दू इन बातों में पड़ते ही नहीं.

वैसे आप सभी अगर फिर भी ऐसा ही सोचते हैं तो मई सिर्फ एक गुजारिश करना चाहूंगा -"यदि आपकी औकात है तो सारे मुसलामानों को मार दो या हिन्दू बना दो. या मुसलामानों में हिम्मत है तो सारे हिन्दुओं को मार दें या मोमीन बना दें. कम से कम ये ज़हर तो ख़त्म हो जाएगा. प्लीज़...ब्लॉग का दुरूपयोग रोकिये....

bumbhole said...

Ye bhi ek khabar hai........ jara jaldi se dekhiye ......... copy n paste in ur browser
----------------------------------

http://link.brightcove.com/services/player/bcpid1184614595?bctid=27874456001

Mohammed Umar Kairanvi said...

@ श्री राकेश सिंह जी, मुझे 'मुहम्‍मद' ना लिखा करें, यह नाम अंन्तिम सेदेष्‍टा का आपका नहीं तो हमारा सही उमर या कैरानवी कहें तो चलेगा, आपने ध्‍यान नहीं दिया इस ब्लाग में मैंने अपनी तरफ से एक मात्रा तक नहीं लगाई, इसलिये कि वह मेरा लेख नहीं कुछ हिन्‍दू भाइयों ने धार्मिक सौहार्द पर कुछ लिखा है, मैंने उसे सम्मान दिया बस, जवाब लेना है तो लेखक से लो, प्रकाशक से लो, मेरा अनुमान है कि जितने ज्ञानी आप लग रहे हैं तीनो प्रस्‍तुत किताबें पढे तो जवाब आपको अपने आप मिल जायेगा,
(2) मैंने औरंगजेब को किसी का हितैषी नहीं बताया है, आपने वहाँ भी ध्‍यान से नहीं पढा वह पूर्व गवर्नर उडीसा का लेख है, इसी लेख को श्री चिपलूनकर को गलत तरीके से पेश किया था अगर आपने वह पढ लिया तो इनकी आलोचना पढ लें, जिसकी हैडिंग भी उत्तेजक है,
कशीमीर की बात आप कह रहे हैं तो ठीक ही कह रहे होंगे मैं अगर ऐसा है तो मेरी नजर मैं गलत है, इसका जवाब उनसे मांगिये,

अहमदिया लोंगो का आपने अच्छा किया यहाँ जिक्र कर दिया, उन्होंने ''श्री क़ष्‍णी जी और कल्कि अवतार' पुस्‍तक अपनी वेब पर डाली हुई है, हाय हाय किया श्री क़ष्‍णा जी के बारे मे लिखा है जैसे पहले उनपर आरोप बतायेंगे फिर अपना नजरिया.... कैसे हो तुम ऐसी पुस्तक जिसमें केवल क़ष्‍ण जी ऐसा ऐसा लिखा अब तक नहीं पढी....अरे मैंने तो केवल उनकी एक छोटी सी बात से नाराज होकर एक लाजवाब पुस्तक नेट पर भर दी, जो अब islamhouse.com इस्लाम की सबसे बडी वेबसाइट पर सुशोभित हो रही है देखो मैंने तुम सबको पहले ही पोस्ट में खबरदार किया था,

पुस्तक ''कादियानियों ( अहमदियों ) की हकीकत''
अहमदी धर्म के आरम्भ करने वाले मिर्ज़ा गुलाम अहमद क़ादियानी जो कभी कृष्णजी बने और यहूदियों और ईसाइयों को अपने जाल में फंसाने के लिए मूसा और ईसा भी बने। आज मुसलमानों के लिए सिर दर्द बने हुये हैं, यह पुस्तक qadiyaniyat (ahmadiyat) ki haqeeqat उन नाम के मुसलमानों जिनको 56 इस्लामिक देशों ने इसलाम धर्म से निकाल रखा है, जो हज के लिए मक्का नहीं जा सकते, पंजाब के कादियान कस्बे में अपना हज कर लेते हैं की हक़ीक़त बयान करती है, यह किताब हिन्दी में उनके प्रचार को खत्म करेगी। इन्शाअल्लाह।

तुम सब कुछ कर सकोगे क़ष्‍ण जी के लिये? इतना करलो केवल पढ ही लो link antimawtar.blogspot.com पर मिल जायेगा,

मनुज said...

सम्माननीय मोहम्मद उमर जी, वैसे तो आप सुरेश जी को मक्कार, डरपोक और सांप्रदायिक और ना जाने क्या-क्या समझ रहे है, पर एक बात का जवाब दीजीयेगा अगर आप अपने आप को पंथनिरपेक्षता का बहुत बड़ा झंडाबरदार समझते हो तो, आप अपने ब्लॉग पर किसी पंथ के प्रवर्तक के प्रति असम्मान जताने वाली पुस्तक (कदियानियत की हकीकत) का लिंक क्यों उपलब्ध करा रहे है ?
क्या अहमदी पंथ के लोगो को इश्वर का आत्मसाक्षात्कार करने के लिए इसलाम के बनाये मापदंडो का पालन करने आवश्यक है ?
ये तो निश्चित है की आपके मन में पंथनिरपेक्षता और सर्वधर्म-समभाव जैसे मूल्यों के प्रति कोई सम्मान नहीं है, पर सनातन धर्मं या कदियानियत पर शोध करने से पहले ज़रा अपने गिरेबान में झाँक लेना अच्छा रहेगा, क्यों हैं ना ?
ज़रा जवाब दीजीयेगा -
http://www.faithfreedom.org/
http://www.answering-islam.org/Quran/Contra/

Mohammed Umar Kairanvi said...

@ मनुज जी, आप ठीक कह रहे हैं, अहमदि मत के लिये आप लोग तो गुस्सा ना दिखा सके जबकि वह श्री कष्‍ण जी पर बहुत बुरा लिख रहे हैं, लेकिन भाई उन्‍होंने मुहम्‍मद साहब पर जो लूटमार की वह मैं तो सहन ना कर सका,
हुआ यूं कि मुझे नेट में एक लाइन मिली वह कुछ यूँ थी ''zakir lerned ahmad dedat, adedat learned maulana rahmatullah kairanvi, kairanvi friend our first Khalifa''

मैंने अपने कस्बे पर काम किया है, kairana.blogspot.com आजकल उपर ही लेख है 'कर्ण नगरी आपकी अहसानमंद रहेगी' हमारे कस्बे की शख्सियत को वह अपना बना रहे थे, बस अपने को अपना रखने के लिये ले आया यह किताब, इसको दुनिया की सबसे अधिक भाषाओं वेबसाइट ने हिन्‍दी सेक्‍शन में देकर अमर कर दिया, वहां लगने पर मैं तो बडा इतरा रहा हूँ,
चलो यह मेरी खता सही, कौन सा मुझे सेकुलर वेकुलर का अवार्ड लेना है, आखिर मेरा गुस्सा भी तो कोई चीज है, आप किया गुस्सा दिखा सकते हो क़ष्‍ण जी बारे में दिखाएं ना दिखा सकें तो कम से कम पढ तो लिजिये मेरी बताई किताब उनकी वेबसाइट से alisalm.org

cmpershad said...

भाई-भतीजावाद के लिए क्या और भी प्रमाण की आवश्यकता है? हम तो भैया गुलाम थे, हैं और रहेंगे:)

मनुज said...

@मोहम्मद उमर कैरानवी जी,
जैसा की आपने कहा कि "एक लाजवाब किताब आपको नेट पर मिली" और आपने ब्लॉग पर डाल दी, और हम हिन्दुओं में इतना साहस नहीं है की हमारे कृष्ण जी के बारे उल्टा सीधा लिखने वाले कादियानियत के प्रवर्तक के बारे में कुछ लिखे तो ये आप इतना अवश्य समझ ले की उन्होंने तो सिर्फ हमारे आराध्य के बारे में कुछ कहा ही है पर आपने (मतलब इस्लामवादियों ने) तो हिन्दू संस्कृति को सूक्ष्म और वाह्य रूप से इतना नुक्सान पहुँचाया है कि हम अबतक उससे उबरे नहीं है, जब हमने आपको माफ़ कर दिया तो कादियानी किस खेत की मूली हैं!!!!
चलिए, अब आप ललकार ही रहे है तो ज़रा निम्न लिंक्स पर जो इसलाम से सम्बंधित आपत्तियां हैं, उनका निराकरण करे तब कादियानियत या सनातन धर्म पर कुछ कहियेगा!!
http://www.faithfreedom.org/
http://www.answering-islam.org/Quran/Contra/

Mohammed Umar Kairanvi said...

@ मनुज जी, आप श्री क़ष्‍ण जी को 'सिर्फ हमारे आराघ्‍य' लिख रहे हैं, मुझे लगता है उनके सम्मान मे यह शब्द आप ठीक उपयोग नहीं कर रहे गौर करें 'सिर्फ आराध्‍य'
और मैंने अपने कमेंट में लिखा है 'नेट में भर दी' बात का वज़न नहीं गिराईये, अहमदियों पर अच्छी किताबें पढी फिर जो किताब अधिक उपयोगी लगी उसे ebook और युनिकोड दो रूपों में नेट में भरी, आप यह बात को यह लिखकर वह भी कोमों के बीच वज़न गिरा रहे हैं,
हिन्‍दू संस्‍क़ति को इस बात ने अधिक नुकसान पहुंचाया है कि वह अपनी सारी शक्ति केवल इस्लाम के खिलाफ लगा देते हैं, सब तरफ देखो मैंने तो कई तरफ मोर्चे खाले हुये हैं,
भाई एयर कंडीशन को छोडो पसीना बहाओ, खाली भडकाओ नहीं, कादियानियों को खेत की मूली बताने वाले मेरे भाई इनकी शक्ति देखकर हैरत में पड जाओगे,
आपने जो साइटों के लिंक दिये हैं उस बारे में कहता हूँ मैंने किसी की आपत्तियों का जवाब नहीं देना, आजकल मैं हिन्‍दी ब्लागजगत में डेरा डाले हुये हों यहाँ कोई भी सवाल कर ले,
यह भी सब सुन लें केवल इस्लाम के पीछे ना पडो, मैं सबके मर्जों की दवा जानता हूँ, घमण्‍ड ना समझे आखें खराब की हैं, दुनिया भर की किताबें पढकर,
सनातन धर्म की बात, इस पर मैं आज एक पुस्तक नेट में डाली है, अभी बताउंगा नहीं 1-2 दिन और इन्तजार किजिये खाकसार को एक मेगजीन का ऐडिटर (नेट) बनाया गया है, उस मेगजीन का मकसद है 'भारत को विश्‍व गुरू बनाना' उस में सनातन धर्म पर भी बातें होंगी,

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

उमर जी मैं आपके सारे प्रश्नों-सनकों का उत्तर देने का प्रयास कर रहा हूँ :

* किसी भी व्यक्ती को उसके 1st name से ही संबोधित किया जाता है | चुकी आपका नाम का पहला शब्द मुहम्मद है, इसलिए आपको मुहम्मद कह कर संबोधित किया | फिर भी आपके कहे अनुसार आगे से उमर कह कर संबोधित करूंगा |

* कोई भी लेख यदि आपके साईट पे है तो इका मतलब है की आपका विचार उस लेख से मेल खता है | और जब आपके साईट पे है तो आपको प्रश्नों का जवाब भी देना चाहिए | आप ऐसा नहीं bol सकते की ये लेख मैंने वहां से ली है तो उनसे जाकर पूछिये | यदि आप चाहते है की मैं उनसे पुचुं तो आप कृपया ऐसे लेख अपने साईट पे ना लिखें जिसका जवाब आप खुद ही नहीं दे सकते | आपका - हमारा सब का समय जाता है | blooging should not the political party's mouthpiece.

* उमर भाई जहाँ तक पुस्तक पढने की बात है मैं कई ऐसे पुस्तक पढ़ चुका हूँ की चलो अच्छा और सच्चा विश्लेसन होगा पर ज्यादातर समय निराशा ही हाथ लगी | पुस्तक का heading ही बताता है की लेखक क्या बोल रहा है | यहाँ पे भी यही बोलूंगा आपके साईट पे पुस्तक का चित्र है तो आप पहले इस पुस्तक को पढ़ लीजिये फिर अपने साईट पे लगाएइए |

* तुम सब कुछ कर सकोगे क़ष्‍ण जी के लिये? - ये भाषा बहुत आपत्ति जनक है | फिर भी जवाब सुनना चाहेंगे | हाँ उमर भाई मैं कृष्ण जी के लिए कुछ भी कर सकता हूँ पर आप जैसे इस्लाम के रक्षक जैसा दुसरे धर्म अनुयायी को काफिर कह कर कत्लेआम नहीं कर सकता |

चलते-चलते इतना जरुर बोलूंगा की आप अपने साईट पे वही कुछ प्रकाशित करें जिसका आप जवाब दे सकें |

smart said...

मुस्लिम प्रसन्नता- मुम्बई आक्रमण ने कुछ स्तरों पर निन्दा, आधिकारिक दुख और अनौपचारिक रूप से उत्साह को प्रेरित किया। जैसा कि इजरायल इंटेलिजेंस हेरिटेज एण्ड कोमेमोरेशन सेंटर ने पाया कि ईरान और सीरिया की सरकारों ने इस घटना का उपयोग , “ संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और इजरायलवादी आन्दोलन को निशाना बनाने में किया और यह प्रदर्शित किया कि यही लोग भारत में और सामान्य तौर पर विश्व में आतंकवाद के लिये उत्तरदायी हैं”। अल जजीरा की वेबसाइट ऐसी टिप्पणियों से भरी पडी थी, “ मुसलमानों के लिये अल्लाह की शानदार विजय, जिहाद की शानदार विजय” “ मुम्बई में यहूदी केन्द्र में यहूदी रबाई और उसकी पत्नी की मृत्यु ह्रदय को सुख देने वाला समाचार है”

इस प्रकार की सर्वोच्चता और संकीर्णता की भावना किसी भी प्रकार से आश्चर्यजनक नहीं है जबकि इस बात के अभिलेखित साक्ष्य हैं कि विश्व भर में मुसलमानों के मध्य आतंकवाद स्वीकार्य है। उदाहरण के लिये पिउ रिसर्च सेंटर फार द पीपुल एंड द प्रेस ने 2006 बसंत में लोगों के व्यवहार के सन्दर्भ में एक सर्वेक्षण किया था कि मुसलमान और पश्चिमी एक दूसरे को किस प्रकार देखते हैं। इस सर्वेक्षण में विश्व के दस मुस्लिम जनसंख्या वाले क्षेत्रों के एक हजार लोगों में ऐसे मुसलमानों का अनुपात अधिक था जो कुछ अवसरों पर आत्मघाती बम विस्फोट को न्यायसंगत ठहराते हैं। जर्मनी में 13 प्रतिशत, पाकिस्तान में 22 प्रतिशत, तुर्की में 26 प्रतिशत और नाइजीरया में 69 प्रतिशत।

एक चौंकाने वाली संख्या का प्रतिशत ऐसे लोगों का था जो कुछ मात्रा में ओसामा बिन लादेन में विश्वास व्यक्त कर रहे थे। तुर्की में 8 प्रतिशत, मिस्र में 68 प्रतिशत, पाकिस्तान में 48 प्रतिशत और नाइजीरिया में 72 प्रतिशत। पिउ सर्वेक्षण के निष्कर्ष में 2006 में मैने कहा था कि, “ यह संख्या सिद्ध करती है कि मुसलमानों के मध्य आतंकवाद की जडें काफी गहरी हैं और यह आने वाले वर्षों में भी खतरे के रूप में विद्यमान रहेगा” निश्चय ही निष्कर्ष है नहीं?

पश्चिमी नकार- नहीं- इस तथ्य को पश्चिमी राजनीतिक, पत्रकारीय और अकादमिक लोग नजरअन्दाज कर रहे हैं कि आतंकवादी मछलियाँ निकट के मुस्लिम समुद्रों में मेजबान बन कर तैर रही हैं। इसे राजनीतिक रूप से सही होना कहें, बहुलतावादी संस्कृति कहें या स्वयं की अवहेलना कहें जो भी नाम इसे दिया जाये इस मानसिकता से भ्रम और संकल्पशक्ति का अभाव झलकता है।

आतंकवाद को नाम देने से बचने की भावना इस नकार का कारण है। जब एक अकेला जिहादी आक्रमण करता है तो राजनेता, कानून प्रवर्तन संस्थायें और मीडिया उन शक्तियों के साथ खडी होती हैं जो आतंकवाद के तथ्यों को भी नकार देती हैं और जब सभी इस आक्रमण के आतंकी स्वरूप को स्वीकार भी कर लेते हैं तो तकनीकी आधार पर इसके लिये आतंकवादियों को दोषी ठहराने से बचा जाता है।

इस प्रकार अप्रत्यक्ष ढंग से इस्लामवादियों को पुकारने के विषय को मैने 2004 में बेसलान में इस्लामवादियों द्वारा एक विद्यालय पर आक्रमण के मामले में अभिलेखित किया था और बीस ऐसे विशेषण बताये थे जो प्रयोग किये गये थे- कार्यकर्ता, हमलावर, आक्रमणकारी, बम विस्फोट करने वाले, बन्दी बनाने वाले, कमांडो, अपराधी, अतिवादी, लडाके, गुट, गुरिल्ला, बन्दूकधारी, अपहर्ता, उग्रवादी, अपहरण करने वाले, उग्रवादी, आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले, क्रांतिकारी, विद्रोही और अलगाववादी और कुछ भी लेकिन आतंकवादी नहीं ।
(by Daniel Pppes)

Dr.Aditya Kumar said...

Eyeopening research on relations.Excellent.

वीरेन्द्र जैन said...

प्रिय राकेशजी
हमें आपकी टिप्पणी पढ़ कर और फिर आपका प्रोफाइल देख कर बड़ी कोफ्त हुयी की आपको कैसे विज्ञानं विषय की डिग्री मिल गयी . आपने मेरी टिप्पणी को ठीक से पढ़े बिना ही कुछ का कुछ लिख मारा है मुझे आश्चर्य है की एक वैज्ञानिक कैसे अवैग्यनिकों के धूर्ततापूर्ण अभियान में सम्मिलित हो सकता है कृपया मेरी टिप्पणी को दुबारा पढिये और सोच समझ कर लिखिए . जनता पार्टी के शाशन में सम्मिलित होने के लिए अपनी जनसंघ पार्टी को भंग करने का पाखण्ड करने वाले आडवाणी ने सशर्त सूचना और प्रसारण मंत्रालय लिया था और उस समय कितने आरएसएस के लोगों को अखबारों में घुसाया था उसकी सूची भी उपलब्ध है पर यह जान लीजिये कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा खम्भा है और यह अपराध तब करता है जब यह सच को छुपाता है या तोड़ता मरोड़ता है . आपको पता होना चाहिए कि सच को छुपाने और तोड़ने मरोड़ने का काम कौन करता है . सेक्युलारिस्म एक वैज्ञानिक दर्शन पर आधारित जीवन पद्धति है , संवैधानिक है और सांप्रदायिक पाखंडी भी उसे सच्चे सेक्युलर और सूडो सेक्युलर का विचलन देकर भी स्वीकारने् के लिए विवश हैं जो रिश्ते बताये गए हैं उनमें से अधिकांश विचारों के सामान होने के कारण बाद में बने हैं . मेरी समझ में नहीं आता कि इसमें आपत्ति कहाँ पर है ? क्या आपने अडवानी कि पहली बहु के द्वारा अडवानी के बारे में लिब्राहन आयोग को दिया गया आरोप पत्र देखा है ? न देखा हो तो इन्टरनेट पर देखिये . में humsamvet.org.in पर प्रति सप्ताह लिखता हूँ उसकी आर्काइव में जाकर पढिये मेरे तीन सौ लेख भाजपा के बारे में ही हैं

पंकज बेंगाणी said...

सुरेशजी,


आपके इस अभिनव और भागीरथ प्रयास को देख आश्चर्यचकित हूँ. बहुत बढिया.


परंतु मुझे ऐसा लगता है कि किसी भाई, भतीजा, पति, पत्नी, चाची, नातिन होने से उनके पक्षपाती हो जाने को सिद्ध नहीं किया जा सकता. मैं यह नहीं कहता कि इनमें से अधिकतर लोग पक्षपाती नहीं है, परंतु सिर्फ यह सबूत नहीं हो सकता.

दूसरा यह कि कुछेक नाम ऐसे हैं जिन पर मेरी आपत्ति है. एम जे अकबर ऐसा ही एक नाम है, जिनके प्रति मेरे मन में सम्मान है. ऐसा दूसरा नाम सलमान हैदर का भी है.

फिर आपने अधिसंख्य मीडिया हाउस को छोड़ दिया है. इंडिया टूडे ग्रुप को भी! ज़ी ग्रुप को भी! उनका झुकाव भी जगजाहिर है. किस ओर? :)

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

वीरेंदर जी नमस्कार,

आपकी भाषा देककर समझ मैं आ गया ... phir भी जवाब देना मेरा धर्म है इसलिए जवाब दे रहा हूं | आपने अपने कमेन्ट मैं reference मांगा और मैंने सिर्फ एक रेफेरेंस विकिपीडिया का दे दिया | इसमें आग बबूला होने वाली क्या बात है ?

* आप कह रहे है की मैंने आपकी टिपण्णी पढ़ी ही नहीं , चलिए देखते हैं " ... आपने स्रोत का जिक्र नहीं किया है ... " ये आपके टिपण्णी मैं है | तो भाई साहब मैंने एक स्रोत का लिंक भेज दिया | इसमें आपको क्या बुराई दिख गई ?

* आपने लिखा की "... आपको कैसे विज्ञानं विषय की डिग्री मिल गयी ..." . तो भाई साहब मिहनत किया इसलिए डिग्री मिली, आज भी मिहनत कर रहा हूँ तो कम खा रहा हूँ | ये डिग्री मुझे secular या सांप्रदायिक लोगों ने नहीं दी है | आप जैसे लोग रहे तो वो दिन दूर नहीं जब सिर्फ तथाकथित सेकुलार्स को ही डिग्री डी जाने लगे गी | बहरहाल वो दिन अभी बहुत दूर है |

* जी हाँ मैं तथाकथित सेकुलार्स जैसे आँख मूंद कर बात नहीं करता | इसके लिए आप जैसे मुझे साम्रदायिक कह दे तो कह दे मुझे फर्क नहीं पड़ता | मैं सत्य की बात करता हूँ ना की सेकुलार्स जैसा :
--> गोधरा, १९८४ के सिख दंगे, और ढेर सारे कांग्रेस शासित राज्यों के दंगे को भूल जाओ और सिर्फ गुजरात दंगे की बात करो |
--> मुसलामानों को अलग से पैकेज और आरक्षण दो, क्योंकि वो अल्पसंख्यक है , बाकी अल्पसंख्यकों (सिख, बोद्ध, जैन ....) को भूल जाओ | जैसे की सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम अल्पसंख्यक ही गरीब है बाकी अल्पसंख्यक बहुत आमिर हैं !
--> कश्मीरी हिन्दुओं और बोद्धों की बात मत करो क्योंकि वो हिन्दू है | उसके लिए कोई सहायता या पैकेज की आवश्यकता ही नहीं |
--> भगवान् राम का कोई अस्तित्वा ही नहीं है कहने वाले सच्च्चे सेकुलर कहलाते हैं |
.... लिस्ट बहुत लम्बी है |

* आपने ये भी लिखा है की . "....जनता पार्टी के शाशन में सम्मिलित होने के लिए अपनी जनसंघ पार्टी को भंग करने का पाखण्ड करने वाले आडवाणी ने सशर्त सूचना और प्रसारण मंत्रालय लिया था और उस समय कितने आरएसएस के लोगों को अखबारों में घुसाया था उसकी सूची भी उपलब्ध है ... " . यदि आपके पास लिस्ट है तो अपने ब्लॉग मैं लिखिए ना आपको किसने रोक रखा है ? यदि हम NDTV, CNN-IBN... और कांग्रेस link की पोले खोल रहे हैं तो आपको बुरा क्यों लग रहा है ?

* आपका कहा है "... पर यह जान लीजिये कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा खम्भा है और यह अपराध तब करता है जब यह सच को छुपाता है या तोड़ता मरोड़ता है . आपको पता होना चाहिए कि सच को छुपाने और तोड़ने मरोड़ने का काम कौन करता है . ... " जी हाँ इसी की तो चर्चा हो रही है की आज मीडिया क्या कह रहा है .. सुरेश भाई ने यहो लिस्ट दी है की कौन खबर को तोड़ मरोड़ रहा है और कैसे ... मेरी छोडिये भाई साहब पुरे ब्लॉग जगत को देखिये हर जगह मीडिया की गन्दी करतूतों का प्रमाण मिल जाएगा ... अब आप कहें की नहीं NDTV, CNN-IBN... आदि चैनल बिलकुल निष्पक्ष है ... तो भाई साहब आप और कोई नहीं बस एक सेकुलर होने का ढोंग कर रहे हैं |

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

वीरेंदर जी आगे का उत्तर इधर है :

* आपने ये कहा है की " .... सेक्युलारिस्म एक वैज्ञानिक दर्शन पर आधारित जीवन पद्धति है , संवैधानिक है और सांप्रदायिक पाखंडी भी उसे सच्चे सेक्युलर और सूडो सेक्युलर का विचलन देकर भी स्वीकारने् के लिए विवश हैं जो रिश्ते बताये गए हैं उनमें से अधिकांश विचारों के सामान होने के कारण बाद में बने हैं ...." भारत मैं जो सेकुलरिस्म चल रहा है वो किसी भी वैज्ञानिक दर्शन पर आधारित जीवन पद्धति नहीं रह गया है | भारत का सेकुलरिस्म मैं .. एंटी हिन्दू बनो...क्योंकि आजकल यही फैशन है और अगर advanced कहाना है तो हिन्दुओं के विरोध में और अल्पसंख्यकों के पक्ष में बात करो.....प्रगतिशील कहलाओगे... यह अमोघ मन्त्र है आज का ....जाप करो सफलता कदम चूमेगी... आप भी शायद इसी मन्त्र का जाप कर रहे है |

* मेरी आपत्ति इसमें है की भारत की सभी जनता को एक समान नहीं देखा जाता, कोई भी योजना हो मुस्लिमों के लिए अलग से बात होती है | चुनाव मैं भी सेकुलार्स मुस्लिम भाइयों को एक वोट बैंक बना कर इस्तेमाल कर रहे है | जहाँ देखो वही बस हिन्दू धर्म को गरियाया जा रहा है , इसके भोले पण का फायदा उठाया जा रहा है .... एक उद्धरण देता हूँ सेकुलार्स कहते हैं हिन्दू गरीब है इस्ल्ये धर्म परिवर्तन कर रहा है, क्या मुस्लिम गरीब नहीं है तो मुस्लिमों का धर्म परिवर्तन क्यों नहीं होता ? कारण साफ़ है |

* मैंने संघ की बात कहीं नहीं की है, और ना ही मैं संघ का आदमी हूँ , जब आपने उठाया ही है तो सुने : विश्व मैं कोई ऐसी संस्था नहीं है जो १००% सही हो, और यही बात संघ पे भी लागू होती है | संघ ने भी कुछ गलतियां की है ... और अभी भी इसमें कुछ छोटे-मोटे खामी होंगी पर इसका मतलब ये नहीं की संघ बिलकुल ही गंदा है | आज भी आपात काल मैं संघ के लोग सहायता को आगे आते हैं | शायद आप ये भी नहीं मानेंगे की " The same Nehru government invited Rashtriya Swayamsewak Sangh (RSS) workers to join the 1963 Republic Day parade in full RSS uniform in honour of their patriotic work during the war. "

* आपने ये कह कर की "... प्रति सप्ताह लिखता हूँ उसकी आर्काइव में जाकर पढिये मेरे तीन सौ लेख भाजपा के बारे में ही हैं ... " क्या बोलना चाहते हैं ? मैंने भाजपा का समर्थन तो नहीं किया है | एक प्रश्न पूछना चाहुगा : भाजपा पे तो ३०० , कांग्रेस पे कितना लेख लिखे हैं ? कृपया इसका भी जिक्र करें | वैसे ये सब आपको कहने से कोई फायदा नहीं क्योंकी जो व्यक्ती ३०० लेख भाजपा के विरुद्ध लिख रहा है और कांग्रेस की करतूतों पे गौण है तो बात साफ़ है .... phir क्यों समय बर्बाद करना |

विरेंद्रा जी इस उत्तर को आप अन्यथा ना लेंगे , मेरी आपसे कोई व्यक्तिगत बैर नहीं है | मैंने तो बस अपने विचारों को रखा है

Mohammed Umar Kairanvi said...

yeh sab naatak he tumhara,,, ek aadh akhbar jo tumse natak kar raha hoga,,usko bhi apni taraf lana chahte honge....are musalmanon ki khabar kab lagti he,,,jab desh men aag lagani hoti he,,, jab islam ko zaleel karna hota he..

sach yeh he media par tumhara hi qabza he,,,bakwas he yeh baten,, kairana press club se lekar delhi press club tak ka press ka anubhav he mere pass,,, 60 saal men hindi ka ek akhbar he aaj hamare paas
are dushmanon ek awam e hind ke elawa lagwa ke dikhado khabar men banata hoon islam ki khabar batao 100 banaoon 50 banoon un men kitni kaun se akhbar men lagegi?

@ राकेश सिंह- sahb, aap theek kehte hen, mujhe jawab dena chahiye, men deta bhi hoon jawab, lekin har kisi ko nahin deta na,,,thoda ruk kar dekh raha tha aap kiya cheez hen. men doonga jawab, insha Allah.

muslim naam men aapka english rule nahin chalta,, jese 'abdul wahid' men first part ke meaning hen banda doosre part ka matlab khuda bhi hota he,,is men is naam wale ko agar ham banda kahenge to galat hoga wahid kahenge to bhi galat hoga,,,,, donon part ko sath bolna padega,,,,so baat ki ek baat aapne jo naam ka falsafa diya he woh islam men nahin chata islam ke apne qayde qanoon hen..
mene yahan sawal jawab kal dene chhode de ke blogvani ne is post ko apne board se hata diya tha..
teesri baat ka jawab he ke, aap pustak padh chuke ma'yus hen,,,koi baat nahin kal ya parson tak aapke mizaz ko bhaye aisi kitab hi net jagat di he... urdu men tehlka macha chuki hindi ko bata bata ke tayyar rehne ke liye keh raha hoon,,, ke kahin hil na jaye.

aapki aakhri baat qatle aam par men yahi keh sakta hoon,,,, mujh se behs kijiye,,, bas ,,, mujhe daraya na kijiye men agar darane pe aaya to yeh blog sammanit logon ke padhne ka nahin rahega,,, aur men aapki tarah tehzeeb yafta nahin apni qalam men mera khuda hi jaanta he kese izzat ke sath aapse mukhatib hoon,,,

is par baat karne wale bhi mil jayenge aise hi likhte rahiye,,

bhai mere jawab ko gaur se padho mene jawab se bachna nahin chah raha tha dekh raha tha ke yeh aadmi mujhe uljha raha he ya khud ulajh raha he,....ab aap mere se mere blog ke elawa bhi sawal kar sakte hen..

har ek ko janab hamne izazat dedi to holi blogging,,doosri baat men apne blog par comment ka jawab nahin deta yani comment par comment nahin karta is liye doosre bhai bandon se bhi aise hi jagah par baat karta hoon...

aap ya koi bhi yahan sawaal chodiye der sawer men zaroor aaoonga.

वीरेन्द्र जैन said...

प्रिय सुरेश भाई
मैं स्वीकार करता हूँ कि एक सच्चे स्वतंत्रतासेनानी का पुत्र होने के नाते मैं जब भी साम्प्रदायिकता से भरी कुटिलिताओं देखता हूँ तो मेरे अन्दर भगत सिंह और प्रेमचन्द के विचार और आत्मा जाग जाती है तब मैं षड़यंत्रकारियों के प्रति भाषा में कटु हो जाता हूँ। यह कटुता व्यक्तिगत नहीं है।
आपकी पोस्ट पढ कर ऐसा लगता है कि अगर आप अपने बयान में सच्चे हैं और भाजपा व संघ के बंधुआ नहीं हैं तो किसी परिस्त्थिवश साम्प्रदायिकों के कुप्रचार के दुष्प्रभाव में घिर गये हैं इसलिए आपसे संवाद किया जा सकता है।
• मैंने पोस्ट के ब्लागर के लिए यह लिखा था कि उसकी पोस्ट पुरानी है और उसने अपने पोस्ट का स्त्रोत नहीं बताया।( किंतु अब उसने इतनी बधाइयां प्राप्त करने के बाद उसके मौलिक न होने की टिप्पणी नीचे लगा दी है) मैंने उसके गलत होने की बात नहीं कही थी और अगर कहना होता तो उससे कहता जिसने पहली बार वह पोस्ट लिखी थी। मैं तो उक्त टिप्पणी में स्वयं ही यह कह कर उन रिश्तों को स्वीकार रहा था कि इन रिश्तेदारियों में अपराध कहाँ है? पर जब आप मुझे स्त्रोत बताने लगे तब मुझे लगा कि आप अपने संगठन की अंधभक्ति में बिना ध्यान दिये लिख रहे हैं। यदि उक्त पढे लिखे वैज्ञानिक र्दशन वाले लोग रिश्ते में नहीं भी बंधते तो भी दूसरे हजारों धर्मनिरपेक्ष मीडियाकर्मियों की तरह साम्प्रदायिकता से मनुष्यता की रक्षा कर रहे होते।
• गोधरा में साबरमती एक्सप्रैस की एक बोगी नम्बर 6 में लगी आग और उसमें दो कारसेवकों समेत 59 लोगों के जलने के बारे में मेरे लेखों में 150 पेजों से अधिक की सामग्री है उसके उपयुक्त यह स्थल नहीं है। पर यदि आप यह बता सकें कि गोधरा कांड के बारे में आप क्या सोचते हें तो उसका बिन्दुवार उत्तर मैं यहाँ दे सकता हूँ।
• 1984 की सिख विरोधी हिंसा और कॅंाग्रेस राज्यों में हुये दंगों में किसी सैक्युलर ने उन्हें और उनके प्रशासन को नहीं बख्शा है। वे खराब शासक हैं, भ्रष्ट भी हैं किंतु वे 'राजधर्म' नहीं भूलते। इसलिए उनके किसी प्रधानमंत्री को याद नहीं दिलाना पड़ता। सभी सैक्युलर काँग्रेस के वोट बैंक के हथकंडों के आलोचक हैं पर सिख जैन और बौद्धों के अल्पसंख्यक होने और मुस्लिमों के अल्पसंख्यक होने में फर्क है। हिन्दू बस्ती में सबसे पहले जैन को मकान मिलेगा फिर सिख को फिर बौद्ध को और मुसलमान को.....? यही हाल आर्थिक स्थिति आदि का भी है किंतु विभाजनकारी साम्प्रदायिक इसे एक कमजोर वर्ग के सशक्तिकरण से हट कर हिन्दू मुसलमान में बता कर प्रचारित करता है।
• कश्मीर समस्या को हिन्दू मुसलमान समस्या से देखना और प्रचारित करना ही साम्प्रदायिकता है। वह राज्य के एक भाग की स्वतंत्र होने की चाह की समस्या है। शेख अब्दुल्ला वहाँ के हिन्दू मुस्लिम दोनों का ही नेता था और वहाँ कभी भी साम्प्रदायिक दंगे नहीं हुये भले ही राजनीतिक मतभेद रहे हों।
• राम के बारे में आपकी टिप्पणी आपके वैज्ञानिक होने के बारे में फिर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। आप पुराण को इतिहास मानने और उसके पात्रों को अवतार मानने के लिए स्वतंत्र हैं किंतु पहले वैज्ञानिक होने का दावा छोड़ दीजिये।

वीरेन्द्र जैन said...

• जनता पार्टी शासन में भरती किये गये आरएसएस के लोगों के बारे में लिखने के साथ साथ मेंने यह भी लिखा है कि मैं उसे कोई समस्या नहीं मानता किंतु 1989 में अयोध्या में पुलिस कार्यवाही में मरे 18 मृतकों को हजारों बताने वाले व साबरमती एक्सप्रैस के एक डिब्बे में लगी आग को 'रामभक्तों से भरी पूरी ट्रेन में आग लगा देने' में बदलने वाले कौन हैं जो अब भी हजारों लोगों को दंगों में झोंकवा कर खुद ऐश कर रहे हैं। मीडिया को सबसे अधिक पैकेज देने वाली भाजपा के बीच दलाली का काम कौन से मीडियाकर्मी कर रहे हैं? असल में मैं तो एक गैर विषय को विषय बनाने के पीछे छुपे मंतव्य का खुलासा कर रहा था। पिछले ही दिनों जब एक भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी की प्रैस काँफ्रेंस में संघ पर टिप्पणी की गयी तो उन्होंने भी कहा था िक इस प्रैस काँफ्रैंस में 75 प्रतिशत तो संघ के ही सदस्य हैं। यह समाचार भी जनसत्ता में छपा था।
• क्या उक्त पोस्ट में किसी चैनल के गलत कारनामे की पोल खोली गयी है? मीडिया द्वारा की जा रही करतूतों को उक्त पोस्ट से जोड़ने की हरकत मत कीजिये। ऐसी हरकतें संघी पेंतरेबाजी का ही हिस्सा हैं।
• भारत में सैक्यूलिरों द्वारा शाहबानो पर लिया गया स्टैंड आप को पता नहीं शायद! सैक्युलर हर तरह की साम्प्रदायिकता का विरोध करते हें किंतु लोकतंत्र में बहुसंख्यक साम्प्रदायिकता कितना बड़ा खतरा है वह आडवाणी की रथयात्रा और गुजरात के नरसंहार से प्रकट है।
• धर्म परिवर्तन और धार्मिक स्वतंत्रता दोनों के लिए कानून हैं और मनुष्यों को दलित बनाये रखने के लिए व अपने वोट बैंक की संभावनाओं की दृष्टि से धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित करना फासिज्म है। जो दबाव या लालच का शिकार होगा वह स्वयं ही कानून की मदद लेगा।
• संघ के लोग सबसे अधिक संध से अपनी संलग्नता को छुपाते हैं क्योंकि उनमें एक अपराध बोध रहता है। आप सचमुच यदि संध के नहीं हें तो बधाई के पात्र हैं किंतु उसी नेहरू सरकार ने गांधी की हत्या के बाद उस पर प्रतिबंध भी लगाया था । 1963 में किस तरह नेहरू को घेरा गया था उन तथ्यों से आप परिचित नहीं हैं। कृप्या चीन के साथ हुये सीमाविवाद पर अपनी जानकारी ठीक करलें तो बहुत सारे भ्रम दूर हो जायेंगे।
• में अन्यथा वन्यथा नहीं लेता और दशकों से इसी तरह बहस कर रहा हूँ क्यों कि कहा गया है- वादे वादे जायते तत्वबोध:। आपकी शांकाओं का सदैव स्वागत है।

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

उमर जी, जब आप इस भाषा " yeh sab naatak he tumhara, " पे उतर गए हैं, लेकिन मैं गली गलौज वाली भाषा पे नहीं उतरना चाहता | जब तक शालीनता बनी रहती है तब तक ही बात करने का फायदा है |

दूसरी बात जरुस कहूंगा की आपने आपको मुहम्मद कह कर संबोधित किये जाने पे आग बबूला हैं | और बोंल रहे हैं की " .... muslim naam men aapka english rule nahin चलता " देखिये जब आप अंग्रेजी या हिंदी मैं कमेन्ट करेंगे तो लोग उसी हिसाब से जवाब देंगे | हिंदी या अंग्रेजी मैं लोगों को पहले नाम से सी संबोधित किया जाता है और वही मैंने किया | अब ये बता रहे हैं की मुस्लिम नाम मैं ऐसा नहीं चलता तो भाई साहब हम क्या करें , आप-हम हिंदी , अंग्रेजी को बदल तो नहीं सकते ? अब आपके कहे अनुसार ही मैंने आपको उमर जी कह कर संबोधित किया phir भी आपको आपत्ति है | हमारे भी एक परम मित्र हैं नईम अहमद , हमने समेशा उन्हें नईम (1st name) कह कर बुलाया , कोई दिक्कत नहीं है | और एक मित्र हैं सलीम खान , उनको सलीम के नाम से ही बुलाते हैं | सहरुख, सलमान, आमिर खान को भी उनके पहले नाम से ही पुकारा जाता है , उन्हें भी कोई दिक्कत नहीं है | खैर छोडिये ये बातैये की आपको आपके कहे अनुसार उमर मैं भी कोई दिखी क्या ?

तीसरी बात ये की आपने जो लिखा है (hindi in english letters) वो समझ मैं ही नहीं आ रहा है | तो मैं आगे क्या बोलूं ?

एक बात मैं जो समझा आप बोंल रहे हैं की मैं आपको डरा कर कुछ कहना चाहता हूँ | क्या आप बतायेंगी की मेरी किस भाषा से आपको लगा की मैं आपको डराना चाहता हूँ ? और एक मुर्ख ही इन्टरनेट ब्लॉग्गिंग मैं किसी बालिग़ को डराने का सहस कर सकता है |

जाते - जाते इतना कहूंगा की ना मेरी कोई आपसे व्यक्तिगत दुश्मनी है ना आपकी | आप अपने विचार रख रहे हैं मैं अपना और ये आदान प्रदान तब तक चल सकता है जब शालीनता बनी रहती है |

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

प्रिय वीरेंद्र जी,

आपका टिपण्णी पढा और एक बात समझ मैं आयी की आप पक्के सेकुलर है | भाई साहब आप पत्रकार है और ढेर सारे points ऐसे लिखे हैं एक सेकुलर ही लिख सकता है |

" 1984 की सिख विरोधी हिंसा और कॅंाग्रेस राज्यों में हुये दंगों में किसी सैक्युलर ने उन्हें और उनके प्रशासन को नहीं बख्शा है। वे खराब शासक हैं, भ्रष्ट भी हैं किंतु वे 'राजधर्म' नहीं भूलते। इसलिए उनके किसी प्रधानमंत्री को याद नहीं दिलाना पड़ता। " --> भाई साहब राजीव गाँधी ने ८४ के खून खराबे यही कहा था ना की जब बड़ा वृक्ष गिरता है तो ऐसा होता ही है | वह क्या राज धर्म था वो | सज्जन कुमार, जगदीश तेत्लर कांग्रेस के हाल ताल MP थे phir भी आप कह रहे हैं की प्रशासन ने उन्हें नहीं बक्शा ... वाह भाई वाह क्या ग़ज़ब का सेकुलरिस्म है ?

* कश्मीर पे आप कहते हैं की हिन्दू - मुसलमान का का problem ही नहीं है , phir क्यों लाखों सिर्फ हिन्दू, सिखों को निर्वासित जीवन बिताना पड़ रहा है ? Kashmiri Pandits were 25% of the population in the Valley before its integration with India.Today they can be counted on fingers in valley. खैर आप ये सब मानने से रहे | सेकुलर प्रयोगशाला से इसके लिए भी कोई नया शब्द गधेंगे |

* मुझे वैज्ञानिक या कुछ और होने का certificate सेकुलार्स से नहीं लेना होगा | और मैं सेकुलर प्रयोगशाला मैं काम नहीं करता, मैं जहाँ काम करता हूँ वहां मेरी क्षमता, मेरी सोच, निपुणता, बुद्धि पे पूरा भरोसा है | आज ही जाना की वैज्ञानिक होना ना होना भी अब सेकुलर ही decide करेंगे |

* आप राम को ऐतिहासिक नहीं मानते ये आपका प्रॉब्लम है मैं इतना जानता हूँ की देश की बहुसंख्यक जनता इसे ऐतिहासिक मानता है सिवाए सेकुलार्स के | आप सेकुलर हैं तो आप ऐसा सोचने के लिए स्वतंत्र है , कृपया आप इतिहासय्ग मत बनिए | एक पत्रकार हैं और वही रहिये | हम जैसे सांप्रदायिक लोगों को प्रवचन मत दीजिये की राम ऐतिहासिक नहीं , ये प्रवचन सेकुलर भाई को ही समझाईये | अमेरिका, कॅनॅडा, ब्रिटेन ... देशों मैं लाखों लोगों ने हिन्दू धर्म को अपनाया और राम और कृष्ण को ऐतिहासिक माना और सिद्ध किया | कई वैज्ञानिक भी राम को ऐतिहासिक सिद्ध किया , बस भारतीय सेकुलर ही ऐसा नहीं मानता |

और कुछ कहने की आवस्यकता ही नहीं है | हम सेकुलार्स की नजर मैं सांप्रदायिक है, हमें तो कोई मलाल नहीं | आप सेकुलर की प्रयोगशाला के वैज्ञानिक बने रहिये , टेक्नोलॉजी की वैज्ञानिक को मत बतैयी की वैज्ञानिक कौन है |

अंत मैं आपने लिखा है की दशकों से आप इस तरह का बहस कर रहे है | तो भाई साहब मैंने इतना बहस किया ही नहीं , बहस का इतना फुर्सत मिले तब तो | मैं जो सच देखता हूँ वही कहता , सेकुलर या साम्रदायिकता की संस्था नहीं खोल रखा है |

आपने ये तो बताया की बीजेपी पे 300 आलेख लिखे और लिंक भी दिया | कृपया कर ये बताएँगे की कांग्रेस की करतूतों पे कितना आलेख लिखा है ?

वीरेन्द्र जैन said...

प्रिय राकेश भाई पहले तोमें क्षमा चाहूँगा की में राकेश की जगह सुरेश लिख गया पर हैं तो दोनों ही एक . दरअसल यह वेर्सेस या बनाम की भाषा साम्प्रदायिकता ही सिखाती है .वे ही अपने अपराधों को ढकने के लिए दूसरे के अपराध बड़े बताने लगते हैं . सेक्युलर हर तरह की साम्प्रदायिकता के खिलाफ हैं
.गेलीलियो वैज्ञानिक था भले ही उस समय के विश्वास उसके पक्ष में नहीं थे.आप भी हो सकते हैं यदि विवेक का इस्तेमाल करें . लाखों लोग सूर्यग्रहण पर स्नान को जाते हैं उन्हें जाना चाहिए क्योंकि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण के नहीं हैं . इतिहास, इतिहास है और पुराण, पुराण .उस पुराण के सैकडों पाठ हैं और दो प्रमुख पाठों में भी भारी अंतर है पता नहीं आप किस पाठ को इतिहास मानते हैं और क्यों ? मानिए पर वैज्ञानिक होने का पाखण्ड मत पालिए.
अब तो आपको समझ में आ गया होगा की मैनें कांग्रेस के खिलाफ भी कम नहीं लिखा होगा किन्तु इस समय कांग्रस के लेखों की सूची देना फिर उसी तुलना में पड़ना होगा . इस समय वह विषय नहीं है . आप पहले साम्प्रदायिकों की निंदा कीजिये फिर राजनीति पर आइये
कश्मीर में विदेशी अलगाव वादियों ने शेष हिन्दुस्तान के लोगों से काटने के लिए कुछ लोगों पर हमले किये जिस से डर कर वहां के पडित जम्मू में सरकारी मेहमानी कर रहे हैं और भाजपा अलगाव वादियों की राह आसन कर रही है ऐसे हमले तो बोडो नागा और माओवादी भी कर रहे हैं पर हम कहाँ जाएँ . साम्प्रदायिकता बिलकुल भिन्न चीज है . कृपया बुद्धिजीवी बनिए और सच को सच कहना सीखिए .

khursheed said...

भारत का सबसे ज्यादा बिकने वाला हिंदी समाचार पत्र दैनिक जागरण के संपादक भाजपा के राज्यसभा के सदस्य हैं और ये समाचारपत्र अपना कर्त्तव्य बखूबी निभा रहा है.

Suresh Chiplunkar said...

वीरेन्द्र जैन साहब, वैसे तो मैं भी खामखा की बहस में उलझने से अक्सर बचता हूँ, लेकिन आपने आरोप लगाया है कि "…मैंने पोस्ट के ब्लागर के लिए यह लिखा था कि उसकी पोस्ट पुरानी है और उसने अपने पोस्ट का स्त्रोत नहीं बताया।( किंतु अब उसने इतनी बधाइयां प्राप्त करने के बाद उसके मौलिक न होने की टिप्पणी नीचे लगा दी है)…" तो आपकी सूचना के लिये बता दूं कि पोस्ट करने के पहले मिनट से ही वह टिप्पणी नीचे लगाई हुई है कि "यह जानकारी नेट पर विभिन्न स्रोतों से ली गई है", यदि आपने पहली बार में पूरी पोस्ट ठीक से नहीं पढ़ी तो इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। जब भी मैं कहीं से कोई स्रोत लेता हूँ तो उसका उल्लेख अवश्य करता हूँ, आप मेरी पिछली सारी पोस्ट उठाकर देख सकते हैं।
2) "…अगर आप अपने बयान में सच्चे हैं और भाजपा व संघ के बंधुआ नहीं हैं तो किसी परिस्त्थिवश साम्प्रदायिकों के कुप्रचार के दुष्प्रभाव में घिर गये हैं…" यानी सिर्फ़ संघ का बंधुआ होने में खराबी है? सेकुलरों, वामपंथियों या कांग्रेसियों के बंधुआ होने में नहीं?
3) "…जिस से डर कर वहां के पडित जम्मू में सरकारी मेहमानी कर रहे हैं…" घोर आपत्तिजनक बात कही है ये आपने…। क्या जम्मू में पंडितों को अपना घर-बार छोड़कर रहने में मजा आ रहा है?
4) रिश्तेदारियों की लिस्ट में जो नाम हैं उनके अखबार, उनके लेख उठाकर देख लीजिये कि उनके विचार कैसे हैं और कैसे वे लोग एक खास विचारधारा को प्रोजेक्ट करते हैं…। आपकी निगाह में सिर्फ़ बहुसंख्यक साम्प्रदायिकता खतरनाक है? बाकी नहीं? अन्य सम्प्रदायों के लोग दूसरे समुदाय को दबाने और परिवर्तित करने में "मिशनरी" भाव से लगे हैं (बहुसंख्यक होने पर या जनसंख्या सन्तुलन बराबर होने पर ही - केरल, बंगाल, असम आदि के सैकड़ों उदाहरण हैं), इस पर आपका क्या कहना है? क्या उपदेश सिर्फ़ हिन्दुओं के लिये ही हैं?

Mohammed Umar Kairanvi said...

@ राकेश सिंह जी, आप ने मुझे कमेंटस द्वारा बताया कि अंतिम अवतार पर पुस्तक लिखने वाले डाक्‍टर सा‍हब मुसलमान होगये, उन्होंने किया नाम रखा यह भी बता देते, बेहद प्रसन्‍नता हुई, धन्यवाद, आप कत्ल, कत्लआम जैसे शब्‍द अपने कमेंटस में ना लाया करे, बस बात किजिये,
दूसरे के कम्पयूटर से कमेंटस कर रहा था, इस लिये रोमन में लिखना पडा, 3 दिन की छुटटी पर जा रहा हूँ इसलिये कम मिलना होगा तब तक आप islaminhindi.blogspot.com पर ज़रा तहलका मचा देने वाली किताब पढ लिजिये

पुस्‍तक ''अब भी ना जागे तो'-----जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजूर कर दिया था उसका यह हिन्‍दी रूपान्‍तर है, महान सन्‍त एवं विद्वान मौलाना आचार्य शम्‍स नवेद उस्‍मानी के ध‍ार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन पर आधारति पुस्‍तक के लेखक हैं, धार्मिक तुलनात्‍मक अध्‍ययन के जाने माने लेखक और स्वर्गीय सन्‍त के प्रिय शिष्‍य एस. अब्‍दुल्लाह तारिक, स्वर्गीय मौलाना ही के एक योग्‍य शिष्‍य जावेद अन्‍जुम (प्रवक्‍ता अर्थ शास्त्र) के हाथों पुस्तक के अनुवाद द्वारा यह संभव हो सका है कि अनुवाद में मूल पुस्‍तक के असल भाव का प्रतिबिम्‍ब उतर आए इस्लाम की ज्‍योति में मूल सनातन धर्म के भीतर झांकाने का सार्थक प्रयास हिन्‍दी प्रेमियों के लिए प्रस्‍तुत है,

Mohammed Umar Kairanvi said...

भाई लोंगों जरा सभी जवाब दो, ब्लाग जगत में कल्कि अवतार का हंगामा है, किया किसी मिडिया वाले के कानों में अवतार का शौर अब तक नहीं गया, किया कोई है मिडिया में जो इस चर्चा पर कलम उठाये? मैं बताउं तुम इस लिये नहीं उठाओगे इससे इस्लाम का भला होगा, तुम्‍हें तो बस ज़लील करने वाली खबर चाहिये,

Mohammed Umar Kairanvi said...

चिपलूनकर जी, दूसरों को अपनी ओर से जवाब देने का अधिकर देके चुप बैठ गये हो, बन्‍दा ब्लाग जगत में यह रूतबा स्वयं बना चुका के जवाद देने योग्‍य समझा जाये, कहो तो Rank बताउं, राजीव गाँधी का लेख आपका किसने नहीं चलने दिया, नेट में गवाहियां हैं इस बात की, औरंगजेब वाले लेख का आपका हिन्‍दी जगत के साथ मजाक उजागर हो चुका है, अब मिडिया को धमका कर T.V. की दुनिया में जा रहे हो, वहां पर भी तुम्‍हें एक उमर मिलेगा परिचय में करा दूंगा, तैयार होकर जाइये वह मेरे बराबर के कसबे की शान है वह,
मिडिया वालो को डराने पर आपको बधाई

LoveGuru said...

bat kaha se kaha pahunchi hai

LoveGuru said...

भारत रत्न श्री खैरानवी की ऊल्टी सीधी बातों का जवाब दिया जाए. जानते नहीं आप कि बन्दा ब्लाग जगत में इतना रूतबा तो बना चुका है कि.. हा हा हा हा हा हा कि.. पढने वाले का हंस हंस कर पेट दुखा दे.

जवाब दो खैरानवी को.. अभी का अभी नही तो कयामत ला देगा वो हा हा हा हा हा हा

psudo said...

kasie kaise log banaye hain bhagwan tune...

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

उमर भाई आपने लिखा है " ...पुस्‍तक ''अब भी ना जागे तो'-----जिस पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजूर कर दिया था ... " | मैंने पुस्तक पूरी तो नाभिं पढ़ी क्यों की तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने वाले लेखक को क्या पढ़ना | लेखक एक बात कहता है की मुहम्मद साहब कल्कि अवतार हैं और भविष्य पुराण का उद्धरण देते हैं | मेरे हिसाब से लेखक ये बताना छह रहा है की कल्कि अवतार मुहमाद साहब है , इसलिए हिन्दुओं को इस्लाम स्वीकार कर लेना चाहिए | मुझे लगता है की लेखक का प्रयास है कैसे हिन्दुओं को मुर्ख बना कर इस्लाम काबुल करवाया जाए | लेखक नीमन बातों पे चुप है , पता नहीं क्यों:

* हिन्दू ग्रंथों मैं कलियुग का काल लगभग ४,३२,००० वर्ष माना गया है और कल्कि अवतार कलि युग के अंत मैं होगा | और अभी तक सिर्फ ५, ००० वर्ष ही गुजरे हैं | लेखक ने ये कैसे मान लिया की कलि युग का अंत हो चुका है ? चलिए उनकी बात थोड़े समय के लिए मान ली, जब भविष्य पुराण का reference दे रहे हैं तो उसी भविष्य पुराण मैं राम, कृष्ण, शिव को भगवन माना गया है , लेखक इसे क्यों भूल रहे हैं ? क्या हमारे मुस्लमान भाई कल्कि अवतार से पहले की अवतारों (राम, कृष्ण) को भगवान् मानते हैं ? इसपे हमारे मुस्लिम भाई चुप हो जाते हैं , मतलब की आप हमारे मुहम्मद साहब को कल्कि अवतार मानो पर हम तो आपके कल्कि अवतार से पहले के अवतारों को मानते ही नहीं !!! अब कोई मुरक हिन्दू ही उनकी बात मानेगा |

* हमारे ग्रंथों मैं भगवान् राम, कृष्ण, शिव , ब्रह्मा .... को प्रमुखता दी गई है , क्या आप राम, कृष्ण, शिव , ब्रह्मा को भगवान् मानते हैं ? यदि नहीं मानते तो क्या ये साबित नहीं होता की आप इतने सारे हिन्दू ग्रंथों की वाणी को नकार के बस दो-चार श्लोक का गलत अर्थ निकाल रहे हैं वो भी अपने फायदे के लिए ?

आपने ये भी दावा किया है की " पुस्‍तक ने उर्दू जगत में तहलका मचा दिया और लाखों भारतीय मुसलमानों को अपने हिन्‍दू भाईयों एवं सनातन धर्म के प्रति अपने द़ष्टिकोण को बदलने पर मजूर कर दिया था ... " . इस पुस्तक ने मुसलमान भाइयों की बीच तहलका ही मचाया होगा , सत्य से इसका कोई सरोकार है ही नहीं | जब इतना तहलका मचाया है तो आपने ये पुस्तक पढ़ी होती और पढ़ी है तो मेरे सरल सवालों का जवाब दें तो अच्छा रहेगा |

मुझको ऐसा लगता है की मुहम्मद साहब का कल्कि अवतार बस झुटा प्रचार है | बहुत हिन्दू भाइयों को ये पता ही नहीं है की उसी भविष्य पूरण मैं कलि का काल ४,३२,००० वर्ष माना गया है और कल्कि अवतार कलि युग के अंत मैं होगा | और अभी तक सिर्फ ५,००० वर्ष ही गुजरे हैं | हो सकता है कई अज्ञानी हिन्दू इनकी बातों मैं आ कर इस्लाम को स्वीकार कर ले , यही तो उनका चाल है और इसी लिए ललकारा जा रहा है की इसपे कमेन्ट करो ये पुस्तक पढो ... भाई मैं तो इस समझ गया हूँ ... जो ना समझें हैं वो पढें |

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

जैन साहब आपने लिखा है "अब तो आपको समझ में आ गया होगा की मैनें कांग्रेस के खिलाफ भी कम नहीं लिखा होगा किन्तु इस समय कांग्रस के लेखों की सूची देना फिर उसी तुलना में पड़ना होगा " , भाई साहब मैंने तो अब तक यही समझा की आप कांग्रेस सेकुलर हैं | आपने भाजपा पर लिखे गए आलेकों का संख्यां ३०० बता दिया अब कांग्रेस जिसने देश पर ५० साल से ऊपर राज किये की करतूतों पर लिखे गए लेखों की संख्या और लिंक बताने मैं क्या परेशानी है ? क्या यही बात ये सिद्ध नहीं करती है की आप सेकुलर कांग्रेस है ?

आपने बड़ा अजीब ढंग से ये दुह रा रहे हैं की मैं वैज्ञानिक होने का ढोंग कर रहा हूँ | इसका बार - बार मैंने खंडन किया phir भी आप घिसे रिकोर्ड की तरह एक ही बात बोले जा रहे हैं बिना समझे | phir कहता हूँ मेरी डिग्री पे सवाल उठानेवाले कौन होते हैं , आपके कहने से मुझे डिग्री नहीं मिली | मैंने कभी आपके डिग्री या पत्रकार होने पे सवाल नहीं उठाया पर अब अति हो गया है पता नहीं आप पत्रकार हैं या किसी विचार धरा के संवाहक ?

एक सच्छा पत्रकार किसी विचार धरा का गुलाम नहीं हो सकता | उसके लिए विचारधारा से ज्यादा प्रमुख सच होता है | इस हिसाब से आप कुछ नहीं बस सेकुलर कांग्रेस पार्टी के समर्थक हैं, अपने आपको पत्रकार मत कहिये |

भारत मैं सेकुलार्स की परिभाषा इस प्रकार दी जाने लगी है :

-> अल्पसंख्यकों का तुस्टीकरण | उनके लिए अलग से धर्म आधारित आरक्षण , पैकेज | तुर्रा , सिख, जैन, बोद्ध, पारसी अल्पसंख्यक नहीं सिर्ग मुस्लिम और क्रिश्चियन क्यों क्योंकि सिख, जैन, बोद्ध, पारसी हिन्दू से मिल के रहते हैं | भाई मुस्लिम को हमने तो नहीं कहा की अलग रहो | SECULAR DEFINITION OF MINORITY IS JUST MUSLIM & CHRISTIAN.

-> SECULARISM एक विज्ञान है जिसके वैज्ञानिक CONGRESS. SP, कम्युनिस्ट, bsp, समर्थक ही हो सकते हैं | सेकुलर विज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण ingredient है anti-hindu .

-> जैसे ही किसी ने भाजपा से हाथ मिलाया वो सांप्रदायिक हो गया, वही phir से कांग्रेस, कम्युनिस्ट मैं सामिल हो कर सेकुलर हो जाता है | यदि आपको सेकुलर साबित करनी है तो फलां-फलां लोगों से सर्तिफिकाते लीजिये |

-> हिन्दुओं के हित की बात भूल के भी मत कीजिये चाहे वो अमरनाथ यात्रा सम्बन्धी भूमि विवाद हो या phir कश्मीरी पंडितों की व्यथा हो |

-> इनदिनों और एक चीज सेकुलरिस्म मैं जुड़ गया है , भगवान् राम कृष्ण ऐतिहासिक नहीं ये पुराण की मन गदंथ कहानी भर है | बाल्मीकि जी की रामायण इनको पुराण या उपनिषद लगती है |

-> इतने ग्रन्थ हैं किसी मैं नहीं लिखा है की ये charachter कपनिक है | जितने भी स्थान रामायण मैं वर्णित है उसमे ज्यादातर आज भी हैं , phir भी इन्हें राम काल्पनिक कैरेक्टर ही लालते हैं , और लगे भी क्यों नहीं जब सेकुलर के आकाओं ने कह-दिया सो कह दिया ... सारे हिन्दू ग्रन्थ झूठे हैं सच तो सिर्फ ये बोलते हैं |

...............

ऐसी सेकुलरिस्म आपको मुबारक हो ... मैं तो भगवान् राम को ऐतिहासिक भी मानता हूँ ... इसके लिए मुझे सांप्रदायिक कहलाने मैं कोई आपत्ति नहीं |

बहस का लम्बाआआ ... अन्हुभाव तो नहीं है पर जब जरुरत से ज्यादा लंबा होने लगे तो उसे गल्थोथ्री कहा जाता है | और गल्थोथ्री मैं विश्वास नहीं करता |

अपने तो भाई राम राम ...

वीरेन्द्र जैन said...

apani bhi ram ram. par kripa kar ke vigyan aur itihaas ka matalab zarur kisi se samajh lijiye

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...
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Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

सेकुलर लोगों से विज्ञान और इतिहास नहीं समझनी हमे | आप अपनी पत्रकारिता के सेकुलर स्कूल (कांग्रेस ) वालों को पदाईये | आपके सुझाव की हमे आवश्यकता नहीं, आपना राय अपने पास ही रखें आपको काम आयेगा |

साम्प्रदायिकता का अवार्ड तो हमें मिल ही चुका है |

चुकी आपने बार बार मन करने पे भी सुझाव दिया है तो लगे हाथों मैं भी एक सुझाव दे ही देता हूँ : अपने secularism की परिभाषा कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचा दीजिये कोई अवार्ड तो मिल ही जाएगा |

राम राम !

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

इतने सारे रिश्ते.. बहुत खूब खोज खबर की है आपने.. हैपी ब्लॉगिंग

बेरोजगार said...

सभी हिन्दी ब्लोगर भाइयों/बहनों से अनुरोध है की यहाँ मैं एक प्रस्ताव रख रहा हूँ कृपया इस पर अपनी सहमति देने की कृपा करें। ब्लोगर भाइयों के आपसी प्यार को देखते हुए मेरी हार्दिक इच्छा है की एक हिन्दी ब्लोगर संघ की स्थापना की जाए और (वैसे तो सभी इन्टरनेट पर मिलते ही हैं) साल में एक बार कहीं मीटिंग आयोजित की जाए. इंटरनेट पर ही अध्यक्ष, सचिव, इत्यादि के चुनाव हो जायें। मेरे इस सुझाव पर गौर करें। हिन्दी ब्लोगर संघको मजबूती प्रदान करें। भाई सुरेश जी से मेरी प्रार्थना है की इस कम में रूचि दिखाते हुए.सहयोग दें. ब्लोगर संघ के उद्देश्य, नियम, चुनाव प्रक्रिया के बारे में आगली पोस्ट में बताऊंगा.स्तरीय ब्लॉग लेखकों को सक्रियता के आधार पर चयनित किया जायेगा.

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

अगर हिन्दू मुस्लिमों की तरह कट्टर होते तो वीरेन्द्र जी जैसे हिन्दुओं के लिये भी जगह न मिलती, अब यह भी नहीं कहा जा सकता कि वीरेन्द्र जी वीरेन्द्र ही हैं या कोई और. बहरहाल, हिन्दुओं की इस दरियादिली का ही लाभ उठाकर लोग धर्मनिरपेक्ष होने का दिखावा कर अपने धर्मों का प्रचार करते हैं, और मूर्ख हिन्दू उस पर खूब सहयोग करते हैं. काश यही रवैया वीरेन्द्र जी इस्लाम के प्रति अपनायें, उन्हें वास्तविकता का ज्ञान हो जायेगा.

मुनीश ( munish ) said...

This issue needs attention , no doubt !

कृष्ण मोहन मिश्र said...

इस घिनौने सिंडिकेट की जानकारी देने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद ।
अब आगे क्या किया जा सकता है । दैनिक जागरण अखबार के बारे में आपके क्या
विचार हैं । मुझको ऐसा लगता है कि सिर्फ यही एक अखबार है जो कि कम्युनिस्टों से थोड़ा बहुत बचा हुआ है ।

स्वच्छ सन्देश ; हिन्दोस्तान की आवाज़ said...

आप सारे लोग फालतू की बहस न करो और जजिया दो मुझको, देखो इस्लाम क्या कहता है।
नीचे देखो जरा....


Tuesday, July 7, 2009
हर काफ़िर पर चाहे वह ईसाई या यहूदी ही क्यूँ न हो, इस्लाम स्वीकार करना अनिवार्य है, क्यूंकि अल्लाह त-आला अपनी किताब में फरमाता है:

"(ऐ मुहम्मद ! ) आप कह दीजिये कि ऐ लोगों! मैं तुम सभी की ओर उस अल्लाह का भेजा हुआ पैगम्बर हूँ, जो असमानों और ज़मीन का बादशाह है, उसके अतिरिक्त कोई (सच्चा) पूज्य नहीं, वही मारता है वही जीलाता है. इसलिए तुम अल्लाह पर और उसके रसूल, उम्मी (अनपढ़) पैग़म्बर पर ईमान लाओ, जो स्वयं भी अल्लाह पर और उसके कलाम पर ईमान रखते हैं, और उनकी पैरवी करो ताकि तुम्हें मार्गदर्शन प्राप्त करो." (सूरतुल आराफ़: १५८)

अतः तमाम लोगों पर अनिवार्य है कि वे अल्लाह के पैग़म्बर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर ईमान लायें, किन्तु इस्लाम धर्म ने अल्लाह त-आला की दया और हिक़मत से गैर-मुस्लिमों के लिए इस बात को भी जाईज़ ठहराया कि वो अपने धर्म पर बाक़ी रहें. इस शर्त के साथ कि वह मुसलमानों के नियमों के अधीन रहें, अल्लाह त-आला का फरमान है:

"जो लोग अहले-क़िताब (यानि यहूदी और ईसाई) में से अल्लाह पर ईमान नहीं लाते और न आखिरत के दिन पर विश्वास करते है और न उन चीज़ों को हराम समझते हैं जो अल्लाह और उसके पैग़म्बर ने हराम घोषित किये हैं और न सत्य धर्म को स्वीकारते हैं, उनसे जंग करों यहाँ तक वह अपमानित हो अपने हाथ से जिज़्या दें दे." (सूरतुल तौबा: २९)

सहीह हदीस में बुरौदा रज़िअल्लाहु अन्हु से वर्णित हदीस में है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम जब किसी लश्कर (फौज) या सर्रिया (फौजी दस्ता जिसमें आप शरीक न रहें हो) का अमीन नियुक्त करते तो तो आप उसे अल्लाह त-आला से डरने और अपने सह-यात्री मुसलमानों के साथ भलाई और शुभ चिंता का आदेश देते और फरमाते:

"उन्हें तीन बातों की ओर बुलाओ (विकल्प दो) वह उनमें से जिसको भी स्वीकार कर लें, तुम उनकी ओर से उसको कुबूल कर लो और उन से (जंग करने से) रुक जाओ." (सहीह मुस्लिम हदीस नं. १७३१)

इन तीन बातों में से एक यह है कि वह जिज़्या दें. इसलिए बुद्धिजीवियों के कथनों में से उचित कथन के अनुसार यहूदियों एवं ईसाईयों के अतिरिक्त अन्य काफ़िरों (गैर-मुस्लिमों) से भी जिज़्या स्वीकार किया जाये.

सारांश यह है कि गैर-मुस्लिमों के लिए यह अनिवार्य है कि वो या तो इस्लाम में प्रवेश करें या इस्लामी अह्कान शासन के अधीन हो जाएँ.

अल्लाह ही तौफ़ीक़ देने वाला है.

लेख संग्रहकर्ता: सलीम खान
Mon Aug 10, 10:56:00 AM IST

anil said...

you have not disclose how, who fund them. many of these channels or papers are making losses still they are getting money as share capital from FII.
they get all always hefty ad from western companies.
see when ramayan was started on tv mafatlal industires and nirma was advertiser. but when niram grows in rural market. HL has to give ad.
similarly most of family dont like TARA but zee was full of ad for this program why it suits their intrest.
i have read in a magazine for tv and satelite "satelite tv is resposible for nuclear family. and with familty spliting sale of tv washing machines is increasing:
so on 15 th august we should take decision not to watch tv they are here to influence us not to educate us.
when ever we read or watch think is it right , what my inner soul says...

Anand said...

सुरेश जी एक टिपण्णी यहाँ भी है पढ़ लीजिये. आप जैसे लोगों के कारन से ही देश टूटता रहा है...
धरती बंटी, आसमान बांटा, आदमी और पशु बांटा, शहीदों को जातियों में बांटा, अब आप मीडिया को भी धर्म में बांटने लग गए हैं. मैं आगे कुछ लिखूं, इससे बेहतर होगा कि आप 'विजयेन्द्र जी' का लिखा पूरा लेख ही पढ़ लें..
आपकी सुविधा के लिए यहीं पेस्ट कर दे रहा हूँ.....


http://nirmansamvad.blogspot.com/2009/08/blog-post_4970.html
सुरेश चिपलुन्कर जी क्या चाहते हैं, मीडिया भगवन का भोग और भभूत बांटता फिरे?
"सुरेश चिपलूनकर जी का नाम सुना था, पढ़ा नहीं था. मीडिया के हिन्दू-विरोधी चरित्र पर उनकी बचैनी ने मुझे मजबूर कर दिया, कि मैं भी कुछ कहूं.
भाई सुरेश जी, मीडिया इस्लाम का प्रचारक नहीं है. न ही मीडिया का काम चर्च में घंटा बजाना रह गया है. आप क्या चाहते हैं कि मीडिया शंख फूंके?
इस मीडिया को नमाज अता करते नहीं देखा, न ही किसी पादरी से सांठ-गांठ करते. हाँ, हमारे बाबा, स्वामी जरूर ही छाये रहते हैं. हिन्दू धर्म से जुड़े हुए सीरियलों का भरमार है. इन्ही चैनलों ने रामायण और महाभारत दिखाया, जिसका असर यह हुआ, कि भाजपा २ से ९२ पर पहुँच गई. इन्हीं चैनलों की कृपा के कारण हिन्दू धर्म के प्रणेता सत्ता तक पहुंचे.
कोई देवता अछूते नहीं हैं, जिसे निर्माता ने नहीं छुआ हो. भाग्य, भगवान और स्वर्ग की सीढ़ी को देखते-देखते आँखें थक गयी.
अब तो धार्मिक चैनल ही खुल गया है. खाए-पिए, अघाये साधू, दिनभर प्रवचन पेलते रहते हैं. पूरा इलेक्ट्रोनिक मीडिया भगवामय हो गया है. जिधर देखो उधर भगवा रंग ही मौजूद है. किसी मियां को चैनल पर कहाँ देखते हैं. आरती-महाआरती का लाइव प्रसारण हो रहा है. अब क्या चाहते हैं आप, कि मीडिया घर-घर प्रसाद बांटने जाए.....! आपकी मंगल कामना रही तो रिपोर्टर के हाथ में माइक के साथ-साथ जनता को देने के लिए भगवान का भोग और भभूत भी होगा. मीडिया के इस हिंदूवादी चरित्र को और कितना प्रभावी बनाना चाहते हैं.
आपके इस हिंदूवादी मीडिया की संकल्पना पर विमर्श जारी है.
शेष फिर.......

Mohammed Umar Kairanvi said...

Rakesh Singh जी, इस्लामिक नाम का फलफसफा में पिछले कमेंटस में समझा नहीं सका था, अब कोशिश करता हूं, आपने कहा आपके यहां नाम का पहला भाग पुकारा जाता है, ठीक कहा है मगर हिन्‍दुस्तान में दूसरा भाग अधिक पसंद किया जाता है यह आप इंडिया आओगे तो समझोगे, यहां शर्मा जी से पूछो जैसे मोबाइल पर प्रोगराम सुनने को मिलेंगे, मैंने इस प्रकार के लेख पढे हैं कि विदेशी कम्‍पनियों के आगुन्‍तकों का इस बारे में हिदायत दी जाती है कि वह अन्तिम भाग से दूसरों को पुकारें,
इस्‍लामी नाम के अपने उसूल हैं, जैसे पहला हमें बताया जाता है कि पूरा नाम लो या जो उसको पसंद हो वह लो नाम बिगाडकर लेना मना है, कुछ नाम ऐसे हैं जो दोनों का साथ लेना अनिवार्य है जिनमें अब्‍दुल शब्‍द आता हो जैसे अब्‍दुल वाहिद, अब्‍दुल सत्‍तार, अब्‍दुल गफूर आदि
वह इस लिये कि पहले भाग का अर्थ होता है बन्‍दा और जो अब्‍दुल के साथ 99 प्रकार के नाम लगते हैं वह अल्‍लाह के गुण हैं अर्थात वह अल्लाह होता है दोंनो मिलकर बनते हैं अल्‍लाह का बन्‍दा, जैसे अब्‍दुल रजाक यानी रिज्क देने वाले का बन्‍दा, अब्‍दुल रहीम अर्थात रहम करने वाले का बंदगी करने वाला, इस नाम को रहीम नहीं कह सकते कियूंकि रहम करने वाला तो अल्‍लाह केवल अब्दुल नहीं कह सकते कियूंकि उसका अर्थ तो सिर्फ बन्‍दगी करने वाला है किसकी वाली बात नहीं आ पाती,
99 ऐसे नाम है जिन्‍हें जुडवां नाम साथ लेना होता है जो नहीं लेता उसे जानकार लोग समझ लेते हैं कितना ज्ञान है,

Mohammed Umar Kairanvi said...

Rakesh Singh जी, हमारी प्रस्तुत किताबें आप ना पढें इसमें हमारा हित है, लेकिन हम तो पढ रहे हैं आपकी किताबें ना पढते तो हमें कैसे पता चलता कि कल्कि व अन्तिम अवतार पर यह किताबें Big game against islam है, मैं भी मिलूंगा इन लेखकों से साथ में आपके सवाल भी उनसे करूंगा अभी दो किताबें और आनी हैं इस टापिक पर फिर दो उमर (कैरानवी & सेफ) मिलकर सवाल भी करेंगे, जवाब भी देंगे, जिस भविष्‍य पुराण की आप बात कर रहे हैं वह में देख चुका सवाल हम करेंगे आप लोग इन उपाघ्‍याय और श्रीवास्‍तव के साथ मिलकर जवाब देना, पढों या ना पढो दो किताबों की और प्रतीक्षा करो

Mohammed Umar Kairanvi said...

@ स्‍वच्छ सन्देश ; हिन्दोस्तान की आवाज़ नामी नक्‍काल, तुम्‍हें चैलेंज है कैरानवी की नक्ल करके दिखाओ, किसी ने इतने घाट का पानी पिया हो तो आओ नकलची बनके, लेकिन सोच लो कैरानवी का निराला अंदाज कहां से लाओगे, मेरा अनुमान है कि तुम सलीम खान नहीं हो वह नहीं लिख सकता 'जजिया दो मुझको'

Mohammed Umar Kairanvi said...

@ बेरोजगार भाई अल्लाह तुम्‍हें रोजगार से नवाजे यह तुमने अपने ब्लाग में पोस्ट बनाके डाली थी मैं देखने गया तो गायब मिली, मेरे एक कमेंटस के कारण गायब करके कमेंटों में बिखेरते फिर रहे हो बताओ तो कहां है मुझे उस सुपरहिट कमेंट की आवश्यकता है, यकीन ना हो तो गूगल में नीचे की लाइन कापी करके सर्च करो पोस्ट होने का सबूत मिलता है लेकिन पोस्ट गायब है, अगर आप नहीं बताओगे तो दोबारा लिखूंगा फिर पता नहीं वह सुपरहिट हो जाये इस लिये मेरीभलाई इसीमें है मेरा कमेंटस मुझे लौटादो,
copy text for google :
''सभी हिन्दी ब्लोगर भाइयों/बहनों से अनुरोध है की यहाँ मैं एक प्रस्ताव रख रहा हूँ कृपया इस पर अपनी सहमति देने की कृपा करें''

Mohammed Umar Kairanvi said...

@LoveGuru said... आपके लिये janokti ब्लाग पर कमेंटस छोडा है, वहां जहां उमर चालीसा लिखा गया था,भाई हमें कैराना रत्न ही पुकारा करो, भारत रत्न के लिये मिडिया तन्त्र डरकर महाराज का नाम पेश करने वाला है, इनको बधाई देदो

Mohammed Umar Kairanvi said...

@ Anand जी जो आपने कमेंटस में पोस्ट डाली है उस पर मेरा कमेंटस भी वहां है वह भी यहां लग जाये तो किया बुरा है वह यह हैः
साधू, बाबा लाख सही,,, साहब अगर टी वी पर नजर आयें तो हिन्‍दुत्व प्रसारण है अन्यथा नहीं आप लाख गिनाते रहिये, घर-घर में प्रसाद बंटने पर महाराज फिर पोस्ट लिखेंगे 'मिडिया ने किया मिठाइयों में घोटाला सारी मिठाई मुस्लिम घरों में भेज दी' इतनी मिसालें काफी हैं कि हिन्‍दुत्व पर मिडिया काफी कुछ कर रही है, इस्लाम को तो बस जलील करती है, सानिया मिर्जा की नेकर के साइज और फतवे जैसे विषय इनका जलील करने का प्यारा खिलौना है,

Mohammed Umar Kairanvi said...

मिडिया तन्त्र इस पोस्ट से बोर होगया हो ता, भाईयों, साहब अगली पोस्ट में रेल में चुटकुले सुना रहे हैं वहां पधारिये और बगैर टिकट रेल यात्रा के चुटकलों से मन को हलका करें, उससे अगली पोस्ट में फिल्‍मी दुनिया के गीतों से भी आनन्‍दमय होने का इन्‍तजाम कर दिया गया है

Mohammed Umar Kairanvi said...

चिंपलूनकर जी मुझे अगली पोस्ट में मौलाना बनाकर आपने बेकार के चुटकुले सुनाये, आप इस ब्लाग यात्रा के सफर के दौरान धर्म के नाम पर कितना लिख चुके जब एक आदमी आपसे धर्म की बात करता है तो आप कहते हो मुझे बगैर कष्ट के यात्रा करने दो, खेर अब धर्म पर कलम उठाते वक्त सोच लिजिये कि आपको अपना सफर कैसे करना है अन्यथा उस चुटकुले के मौलाना आप होंगे तब,,

Mohammed Umar Kairanvi said...

पाठक बन्‍धुओं यह मिडिया पर यह लेख तो बरबाद हो गया, अब बात पटरी पे लाना के लिये कहूं तो वह यह कि हर तन्त्र की तरह मिडिया तन्त्र में भी पैसे का बोलबाला है हिन्‍दू धर्म वाले इधर अधिक पैसा लगा रहे हैं उनका प्रसार हो रहा है पर यह सोच लिया करो टीवी के साथ रिमोर्ट कन्‍टरोल भी तो होता है, टीवी को इतना भी धर्म से ना भरवाओ कि लोग टीवी से भागने लगें

Mohammed Umar Kairanvi said...

चिपलूनकर जी यह लेख तबाह होने पर मेरी बधाई, आपकी बालिंग पर यह मेरा 100 वां रन (इस पोस्ट का सौवां कमेंटस) है और इससे अगली पोस्ट में मैं अर्द्ध शतक लगा चुका अर्थात उसमें 50वां कमेंटस मेरा है, देखा तेदुलकर के मुरीद हैं जनाब हैप्‍पी ब्लागिंग

anil said...

have you seen how our media take side of usa on sharukh khan .
they put all arguments on behafe of usa.
but fact is when they give visa they ask lot of question and only give when they are satisfied.
custom checking is ok. if you have doubt that person is bringing some ileagl material you can do physical checking also. but our star and politician did not caary any illgeal thing to usa.on contary wetern criketer are found in drug reckets.our leaders like gorge, abudul kalam or narsingh rao never do any illeagl things even then they are subject to wrost checking.
reason is they want to hert self respect of famous people.
and because our so called liber media full of friends of usa. is doing what we have seen..
same thing is with JAswat singh episode... he is made hero just because he was usa supporter..
this book is also written just to suplment US efforts to stablise pakistan

राहुल कौशल (जर्नलिस्ट) said...

उम्र कैरंवी और सफत आलम जी ये जो रिश्ते यहाँ दिए गए हैं वो सब सुरेश चिपलूनकर ने पहले ही बता दिया कि एकत्र किये गए हैं बस उनका काम था सारा तामझाम एक ही जगह लेने का और वो सुरेश चिपलूनकर जी ने बखूबी एकत्र किया हैं.......सुरेश चिपलूनकर जी एक बात और आप के जूनून को सत् सत् नमन
अंत में एक बात और दहकती रग पे हाथ रखोगे तो कुछ लोग विरोध करेंगे ही, "अब हाथी जब चलता हैं तो.................." वाली कहावत तो सुनी होगी ही ना

anil said...

pl see today 23 sep 200p artical the kobad ghandi i knew by jyoti...
she wite only about bjp, rss .
here she says she was in touch and meeting with wanted naxal leader..
she should be in jail ...
again very intresting watching killing of chicken to perpare for bloody revolution. same shot was shown in TAMAS serial but shown as rss man telling to learn so that when you kill muslim you could stand...and than all this so callled naxal sypthier were telling world nothing is wrong...
now we know fact...

anil said...

pl see today hindustan times 23sep 2009
page 11
the kobad ghanddy i knew. by jyoti punwani...
se always write about bjp rss...
now she is saying that she was in touch with this naxali leader who was wanted.. no crime?
one more she describle how this naxal leader told then to learn wring necks of chicken ..how other wise we stand site of blood when revolotion come.... remebering
TAMAS serial on DD same shot was shown as RSS leader doing this. now fact is naxal do it and they name it on RSS.
how cheater are they.

murar said...

baat sac ha ham jasay patarkab ka deploma kar k soostay ha ke ham apanay dam par kableyt sa job par

सौरभ आत्रेय said...

एक कहावत सभी ने सुनी होगी "लातो के भूत बातों से नहीं मानते" तो वीरन्द्र, उमर आदि जो छद्म सेकुलर पिशाच हैं इन जैसो को इस धरती से मुक्त कर देने में ही भलाई है, चाहे तुम कितना ही तर्क देदो, प्रमाण दे दो पर ये कहेंगे अपने ही मन की, अब या तो इनमें बुद्धि कम है, या इनको ये सब प्रचार करने का पैसा मिलता है. उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति को बचपन से ये पढाया जाए कि सूरज पश्चिम से उदय होता है और पूरब में अस्त होता है अब बड़े होने पर एक बुद्दिमान व्यक्ति तुरंत समझ जायेगा मुझे गलत सिखाया गया है क्योंकि सूरज तो पूरब से उदय होता है ये तो प्रत्यक्ष प्रमाणित है किन्तु उमर , वीरेंद्र आदि जैसे लोग सूरज को पश्चिम से ही उदय कराएँगे चाहे इनको रोज सूरज पूरब से उगता दिखाई दे चाहे तुम कितना ही चिल्लाओ ये लोग नहीं बदलने वाले इस लिए इनको तर्क देना ही बेवकूफी है क्योंकि इनका कोई स्तर ही नहीं है. मैंने हाल ही में इन जैसो के द्वारा लिखित पुस्तक की समीक्षा की है पर मैं जानता हूँ ये लोग नहीं समझेंगे, मैंने भी ये समीक्षा इन जैसो के लिए नहीं बल्कि उस उपरोक्त उदाहरण में वर्णित बुद्दिमान व्यक्ति के लिए लिखी है क्योंकि ये लोग तो hardcore anti-hindu हैं इनकी बुद्दी में कोई बात नहीं घुसती.

Neeraj नीरज نیرج said...

एमजे अकबर ही वे शख्‍स हैं जिन्होंने शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद राजीव और मुस्लिम कट्टरपंथियों के बीच सेतु का काम किया था। वे कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य भी रहे।
यहां भी पढ़ें The orthodox Muslims in India felt threatened by what they perceived as an encroachment of the Muslim Personal Law, and protested loudly at the judgement. Their spokesmen were Muslim community leaders Obaidullah Khan Azmi, MJ Akbar and Syed Shahabuddin. They formed an organization known as the All India Muslim Personal Law Board and threatened to agitate in large numbers in all major cities. The then Prime Minister, Rajiv Gandhi, agreed to their demands and cited the gesture as an example of "secularism".

स्रोत- http://en.academic.ru/dic.nsf/enwiki/298332


इसलिए ये भी जानना ज़रूरी है कि कट्टरपंथियों के प्रभुत्व में आते ही बड़ा से बड़ा मुस्लिम बुद्धिजीवी फ़ौरन अपनी टोपी लगा लेता है। मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना - लाइनें लिखने वाले अल्लामा इक़बाल का उदाहरण आपके सामने है।

Krishna Baraskar said...

Bhai Sahab aapke dwara sanklit ye jaankari to achhe achhe research wale bhi nahi kar sakte..
mai to aapka bahut badaa fan ho gaya hu..
abhi tak mere man me yahi prashn daudtaa tha ki aakhir kya karan hai ki hindu virodhi samachar 2 pal me pure desh me fail jaate hai aur Hinduwo ke favour me agar koi samachar ho to wah turant dab jaata hai ..
mere itne dino ke confution kaa itna sateek jawaab aapne diya hai..
mai aapka abhaari rahunga...

Suresh Chandra Gupta said...

कमाल है लोग कितना वक्त बर्बाद कर देते हैं दूसरों में कमियां निकालने के लिए. यह वक्त अगर वह अपने ईश्वर से मिलने में लगाएं तो बेहतर रहेगा.

Mrs. Asha Joglekar said...

Rishte hee rishte !!!!!!!