Tuesday, June 9, 2009

“धरती के विषवृक्ष पाकिस्तान” की “जमात-ए-इस्लामी” पार्टी के नेता का एक पुराना इंटरव्यू…(भाग-2) Jamat-E-Islami Pakistan Talibani Plans of Islam

(भाग-1 से जारी…)
जैसा कि पहले कहा गया है, इस इंटरव्यू में ज़ाहिर किये गये विचारों को पढ़कर कभी आप हँसेंगे, कभी आप माथा पीटेंगे, कभी गुस्सा होंगे, लेकिन कुल मिलाकर है बड़ा ही मजेदार इंटरव्यू। प्रस्तुत हैं जमात-ए-इस्लामी (पाकिस्तान) के मौलाना साहब के इंटरव्यू के हिन्दी अनुवाद का दूसरा भाग… जिसमें उन्होंने भारत के मुसलमानों के बारे में भी आश्चर्यजनक बयान दिये हैं…

प्रश्न (पत्रकार ज़लील आमिर) – क्या आपको नहीं लगता कि यदि कश्मीर पाकिस्तान का हिस्सा बन गया तो भारत में व्यापक पैमाने पर हिन्दू-मुस्लिम दंगे होंगे और उसमें काफ़ी संख्या में हमारे मुस्लिम भाई भी मारे जायेंगे?

उत्तर (मौलाना नबीउल्लाह) – हाँ, हो सकता है, लेकिन हमारी विचारधारा सिर्फ़ कुर-आन और हदीस की व्याख्याओं पर आधारित है। पैगम्बर मुहम्मद ने कहा है कि जो भी मुस्लिम, किसी अन्य गैर-मुस्लिम से मधुर सम्बन्ध रखता है वह सच्चा मुसलमान नहीं हो सकता। इसमें हिन्दू, ईसाई और यहूदी सभी शामिल हैं। पैगम्बर मोहम्मद ने यह भी कहा है कि यदि कोई मुस्लिम शासक खराब है तब भी मुस्लिमों को वह देश छोड़कर गैर-मुस्लिम देश में नहीं जाना चाहिये। इस बारे में हदीस और कुर-आन में स्पष्ट निर्देश हैं। इसलिये जो मुसलमान विभाजन के दौरान भारत से पाकिस्तान की तरफ़ नहीं आये, वे भी हमारी नज़र में “हिन्दू” ही हैं। वे भले ही सोचते रहें कि वे मुस्लिम हैं लेकिन अल्लाह के सामने ऐसा नहीं होगा। उदाहरण के तौर पर जैसे कि “अहमदिया” हैं, वे अपने आपको मुस्लिम मानते हैं लेकिन असल में वे हैं नहीं, इसलिये जब तक भारत के मुस्लमान किसी मुस्लिम देश में नहीं चले जाते तब तक वे सच्चे मुस्लिम नहीं हो सकते। अपने भारत दौरे के समय मैंने पाया कि भारत के हिन्दू किसान फ़सल लेने पर अपनी सारी उपज पूजा करके पहले भगवान को समर्पित कर देते हैं, इसलिये इस प्रकार की उपज मुसलमानों के लिये “हराम” है। क्योंकि भारत के सभी “तथाकथित” मुसलमान ऐसी फ़सल और अनाज खाते हैं जो कि अल्लाह से पहले किसी और भगवान को पहले ही समर्पित की जा चुकी है, कुर-आन में इसकी सख्त बन्दिश है और इसीलिये वे लोग सच्चे मुस्लमान नहीं हैं। पैगम्बर मोहम्मद का आदेश है कि मुसलमान उसी देश में रहें जहाँ वे बहुसंख्यक हैं, जो मुसलमान इस्लामिक देश छोड़कर दूसरे देश में बसता है वह काफ़िर माना जाये, सिर्फ़ उसी को मुसलमान माना जायेगा जो अल्लाह द्वारा शासित देश में आने को उत्सुक हो, गैर-इस्लामी देश में सदा के लिये बस चुका व्यक्ति मुसलमान नहीं है। ऐसे में यदि भारत के किसी दंगे में कोई मुसलमान मारा भी जाता है तो हमें उसकी परवाह क्यों होनी चाहिये? लेकिन फ़िलहाल रणनीतिक तौर पर हम भारत के मुसलमानों से मधुर सम्बन्ध बनाये हुए हैं। पाकिस्तान की बेहतरी के लिये काम करने वाले ही असली मुसलमान हैं। कश्मीर के मुसलमानों को मैं असली मुसलमान मान सकता हूँ, क्योंकि वे “हिन्दू शासन”(?) से मुक्ति हेतु संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन भारत के बाकी मुसलमानों ने भारत-पाक विभाजन स्वीकार कर लिया है और इसलिये वे मुस्लिम नहीं रहे।

जमात-ए-इस्लामी पार्टी “गुलाम प्रथा” को फ़िर शुरु करेगी…

सभी अरब देशों में “गुलाम” प्रथा चलती है, पैगम्बर मोहम्मद ने भी कहा है कि गुलामों के साथ अच्छा व्यवहार करो और उन्हें समय-समय पर आज़ाद करते रहो। जमात जब पाकिस्तान में सत्ता में आयेगी तो “गुलाम प्रथा” फ़िर शुरु की जायेगी, सभी पकड़े गये हिन्दू कैदियों को गुलाम बनाया जायेगा। लगभग सभी अरब देशों में यह प्रथा धड़ल्ले से जारी है, हालांकि अरब देशों में भारी संख्या में हिन्दू काम कर रहे हैं, लेकिन हमारा इरादा अरबों की पवित्र भूमि को पुनः पवित्र बनाना है और यह काम हिन्दुओं को वहाँ से निकालकर या गुलाम बनाकर ही किया जा सकता है। फ़िलहाल वहाँ के हिन्दुओं ने अरबों को मानसिक रूप से भ्रष्ट कर दिया है।

हिन्दुओं के मन्दिर, मुस्लिम भूमि को अपवित्र करते हैं…

अरब देशों और कतर आदि में मैंने देखा कि वहाँ हिन्दुओं के कई मन्दिर हैं, अरब के बादशाह ने मन्दिर बनाने की अनुमति देकर ही गलती की है, ऊपर से सुल्तान के परिवार के सदस्य मन्दिर का उद्घाटन करने भी गये। काज़ी अहमद इस बात से भी काफ़ी नाराज़ हैं कि कतर की रॉयल परिवार के कुछ सदस्य भगवान “अय्यप्पा” में भी आस्था रखते हैं। इससे जमात प्रमुख बेहद खफ़ा हैं और उन्होंने इन शैतानी शक्तियों से लड़ने का संकल्प लिया है।

धर्म-परिवर्तन की सजा मौत है…
मौलाना साहब फ़रमाते हैं कि मुसलमानों के लिये धर्म परिवर्तन या अन्य धर्मों की ओर झुकाव की सजा सिर्फ़ मौत है। पाकिस्तान में अभी शरीयत का कानून लागू नहीं है, इसलिये यहाँ संविधान के तहत धर्म परिवर्तन किया जा सकता है, लेकिन जब जमात सत्ता में आयेगी तब इसके लिये मौत की सजा मुकर्रर की जायेगी।

विश्व का सारा ज्ञान कुरान और हदीस में समाया हुआ है…
मौलाना साहब आगे फ़रमाते हैं कि विश्व का समूचा ज्ञान कुर-आन और हदीस में समाया हुआ है, कुर-आन से अधिक जानने पर एटम बम और टीवी जैसी विनाशकारी समस्याएं पैदा होती हैं। संगीत, टीवी, फ़ोटोग्राफ़ी आदि शैतानी और हराम वस्तुएं हैं। पहले के ज़माने में संगीत सिर्फ़ गायन तक सीमित था, लेकिन नई तकनीक ने इसे घर-घर में पहुँचा दिया है, हमें इस शैतानी चीज़ से नई पीढ़ी का बचाव करना है।

साइंस और टेक्नोलॉजी मानव सभ्यता के लिये बुरी बातें हैं…
मौलाना के महान विचार यहीं नहीं थमते, वे कहते हैं… “मैं भी एक सिविल इंजीनियर हूँ, और मेरा मानना है कि साइंस और टेक्नोलॉजी सभ्यता के विकास के लिये बहुत बुरी बातें हैं। जितना ज्यादा आप इसका ज्ञान प्राप्त करते जाते हैं, आप सर्वकालिक महान पुस्तक कुर-आन पर सवाल उठाने लगते हैं। हदीस में स्पष्ट कहा गया है कि “धरती गोल नहीं चपटी है… लेकिन वैज्ञानिक हमें बताते हैं कि धरती गोल है, लेकिन कुप्रचार के जरिये लोगों के मन में कुर-आन के प्रति संशय पैदा कर दिये गये हैं। हम कुर-आन के वैज्ञानिक पहलुओं को जनता के सामने लायेंगे और सिद्ध करेंगे कि कुर-आन ही पूरी तरह वैज्ञानिक है और पूर्ण सत्य है।

प्रश्न – आप साइंस और टेक्नोलॉजी को बुरा कह रहे हैं, फ़ोटोग्राफ़ी को हराम बता रहे हैं, लेकिन पश्चिमी देशों से हथियार आयात करते हैं और पासपोर्ट के लिये फ़ोटो भी तो खिंचवाते हैं?

उत्तर – आपका कहना सही है, लेकिन यह सिर्फ़ रणनीति के तौर पर है। अल्लाह ने हमे पेट्रोल की ताकत दी है, जिससे पश्चिमी देशों की कारें चलती हैं, इसके बदले में हम उनसे हथियार लेते हैं और यही हथियार आगे चलकर उन्हें खत्म करने में काम आयेंगे।

प्रश्न – आजकल पाकिस्तान में भी आरक्षण को लेकर झगड़े बढ़ रहे हैं, इस सम्बन्ध जमात की क्या नीति होगी।

उत्तर – यह समस्या असल में भाषा की समस्या है, फ़िलहाल उर्दू बोलने वाले मुसलमान और सिन्धी बोलने वाले मुसलमानों (मोहाजिरों) के बीच झगड़े अधिक हैं। हम सत्ता में आये तो सभी क्षेत्रीय भाषाओं (पश्तो, सिंधी, बलूची, उर्दू, पंजाबी आदि) को बन्द करके सिर्फ़ अरबी को राजकाज की भाषा बनायेंगे। यही एकमात्र पवित्र भाषा है। इसके द्वारा सभी जनता कुर-आन और हदीस की व्याख्या को ठीक से समझ सकेगी, और धर्म आधारित आरक्षण के झगड़े बन्द होंगे।

प्रश्न- पाकिस्तान के कुछ सेकुलर पत्रकार जमात का कड़ा विरोध करते हैं, डॉन और कराची से निकलने वाले कई अखबार आपके विरोधी हैं। इस बारे में आपके क्या विचार हैं?
उत्तर – जब पाकिस्तान में शरीयत लागू होगी तब इनमें से एक भी पत्रकार नहीं दिखाई देगा, वे कोर्ट भी नहीं जा पायेंगे। ये सेकुलर पत्रकार हमारे वक्तव्यों को तोड़-मरोड़कर जनता के सामने पेश करते हैं और हमारी छवि खराब करते हैं। ये लोग पाकिस्तान का इतिहास अंग्रेजों के जमाने से लिखते हैं और शुरु करते हैं, जबकि पाकिस्तान का इतिहास विभाजन और आज़ादी के बाद ही शुरु होता है। सेकुलर पत्रकार “काफ़िर” हैं, वे मुस्लिम हैं ही नहीं। वे हमारे पास आयें और कुर-आन और हदीस की व्याख्या के बारे में पूछें, हम उनकी हरेक शंका का समाधान कुर-आन की रौशनी में करने को तैयार हैं। वे यह सिद्ध करें कि जो हमने कहा है कुर-आन के अनुसार वह गलत है, तो हम मान लेंगे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सकते। ये लोग कुर-आन और हदीस पर कोई बहस नहीं करना चाहते। हम साबित कर देंगे कि कुर-आन के हिसाब से ये लोग गैर-मुस्लिम हैं, ये लोग “कादियानियों” की तरह हैं जो कहते हैं कि “जेहाद” कोई अनिवार्य बात नहीं है… यह बकवास है।
प्रश्न – आपका अमूल्य समय देने के लिये धन्यवाद…
उत्तर – अल्लाह का रहमोकरम आपके साथ रहे…

इस इंटरव्यू के मूल अंग्रेजी भाग को यहाँ देखा जा सकता है…
http://www.islam-watch.org/JihadiUmmah/What-Islam-Wants-Nabiullah-Khan.htm


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22 comments:

ASHWANI JAIN said...

Lage raho Suresh ji ....Vishvraksh bel Hindustan me bhi kafi fail gayi hai

संजय बेंगाणी said...

वो कहते है ना कि मन बहलाने के लिए गालिब यह ख़याल भी अच्छा है :)

मौलाना पर खुदा की रहमत बनी रहे.

मैं तो हँस रहा हूँ.....

पंगेबाज said...
This comment has been removed by the author.
पंगेबाज said...

संजय जी आप गलत हस रहे है . ये एक सीधे सच्चे अल्लह को मानने वाले बंदे की दिल से निकली बाते है. आने वाले वक्त मे यदि सेकुलरता यू ही चलती रही जिस्का साथ मुसलिम एक वक्तिया रणनीति के तहत दे रहे है तो यकीन रखिये आप मुस्लिम भारत मे गुलाम होंगे . इस सेकुलरो की मानसिक गुलामी वाकई इस प्रकार की सोच को स्मर्थन दे रही है अंदर से नही तो बाहर से ही सही . इन सभी को कसाब के साथ अफ़जल के साथ पाक भेज देना चाहिये :)

पंगेबाज said...

संजय जी आप गलत हस रहे है . ये एक सीधे सच्चे अल्लह को मानने वाले बंदे की दिल से निकली बाते है. आने वाले वक्त मे यदि सेकुलरता यू ही चलती रही जिस्का साथ मुसलिम एक वक्तिया रणनीति के तहत दे रहे है तो यकीन रखिये आप मुस्लिम भारत मे गुलाम होंगे . इस सेकुलरो की मानसिक गुलामी वाकई इस प्रकार की सोच को स्मर्थन दे रही है अंदर से नही तो बाहर से ही सही . इन सभी को कसाब के साथ अफ़जल के साथ पाक भेज देना चाहिये :)

पंगेबाज said...

संजय जी आप गलत हस रहे है . ये एक सीधे सच्चे अल्लह को मानने वाले बंदे की दिल से निकली बाते है. आने वाले वक्त मे यदि सेकुलरता यू ही चलती रही जिस्का साथ मुसलिम एक वक्तिया रणनीति के तहत दे रहे है तो यकीन रखिये आप मुस्लिम भारत मे गुलाम होंगे . इस सेकुलरो की मानसिक गुलामी वाकई इस प्रकार की सोच को स्मर्थन दे रही है अंदर से नही तो बाहर से ही सही . इन सभी को कसाब के साथ अफ़जल के साथ पाक भेज देना चाहिये :)

Shahi said...


Suresh ji see one thing this time no Muslim secular blogger has posted any comment It means they are agree with these views....

In your previous posts they commented within minutes but this time why they are not writing anything?????

I think they knew that same type of propaganda is spreading among muslim youth that is against this country and Non Muslims.....

GJ said...

Hello Blogger Friend,

Your excellent post has been back-linked in
http://hinduonline.blogspot.com/

- a blog for Daily Posts, News, Views Compilation by a Common Hindu
- Hindu Online.

Please visit the blog Hindu Online for outstanding posts from a large number of bloogers, sites worth reading out of your precious time and give your valuable suggestions, guidance and comments.

चन्दन चौहान said...

भगवान भला करे इस मौलवी का करोडो़ साल जीये और अपने मुस्लमान भाई को हिन्दुस्तान छोड़ने के लिये कहे जिससे हमारा हिन्दुस्तान फिर से सोने कि चिडी़या बन सके।

रंजना said...

Lajawaab sakshatkaar....bahut maja aaya...

HA HA HA HA.....

सुमन्त मिश्र ‘कात्यायन’ said...

इकबाल का एक शेर बड़ा मौजूँ है-

तुम्हारी तहज़ीब अपनें खंजर से आप ही ख़ुद्कुशी करेगी।
जो शाखे-नाज़ुक पै आशियाना बनेगा नापायदार होगा॥

दर्पण साह "दर्शन" said...

Suresh ji aapki post mujhe bahut-bahut-bahut pasanmd aati hain....

apki lagbagh sabhi post maine padhi hai....
...aap jo karya kar rahi hain uske liye badhai sweekarein.


Jai Shri Krishna.

Anil Pusadkar said...

विषवृक्ष की कटिंग शटिंग ज़रूरी हो गई है।

Dikshit Ajay K said...

इस मैं कोई दो राय नहीं हैं की इस्लाम एक श्रेष्ठ धर्म है जिस मैं मानवता की भलाई के लिए दुसरे धर्मों की तरह ही काफी कुछ लिखा है, लकिन दुःख इस बात का है की कुछ कठमुल्ला लोग अपने स्वार्थ के लिए कुरान की अपने- अपने ढंग से व्याख्या करते हैं. और अपने को ज्ञानी कहलवाने का प्रयास करते हैं. मेरे विचार से तो एअसे लोगों का बोलना या कुत्तों के भोंकना एक बराबर है. इस पर धयान नहीं दीया जाना छाहिये .

वैसे मैं इस पोस्ट ( भाग 1 व २) के वारे मैं खुर्शीद जी के विचारों का बहुत ही उत्सुकता से इंतजार कर रहा हूँ और आशा करता हूँ की अगले १-२ दिन मैं मेरी मनोकामना पुरी होगी.

Dikshit Ajay K said...

इस मैं कोई दो राय नहीं हैं की इस्लाम एक श्रेष्ठ धर्म है जिस मैं मानवता की भलाई के लिए दुसरे धर्मों की तरह ही काफी कुछ लिखा है, लकिन दुःख इस बात का है की कुछ कठमुल्ला लोग अपने स्वार्थ के लिए कुरान की अपने- अपने ढंग से व्याख्या करते हैं. और अपने को ज्ञानी कहलवाने का प्रयास करते हैं. मेरे विचार से तो एअसे लोगों का बोलना या कुत्तों के भोंकना एक बराबर है. इस पर धयान नहीं दीया जाना छाहिये .

वैसे मैं इस पोस्ट ( भाग 1 व २) के वारे मैं खुर्शीद जी के विचारों का बहुत ही उत्सुकता से इंतजार कर रहा हूँ और आशा करता हूँ की अगले १-२ दिन मैं मेरी मनोकामना पुरी होगी.

safat alam said...

मै इस्लामिक ला को जानता हूँ . हमारे पाठक कदापि इसे इस्लामी धारणा न समझें . यह उसका अपना विचार है . इस्लाम का नहीं .

प्रदीप कुमार said...

apki sabhi post maine padhi hai.......aap jo karya kar rahi hain uske liye badhai sweekarein.

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ said...

सुरेश भाई जिंदाबाद, आपने फिर से तर्क (कुतर्क) के ज़रिये अपनी बात सिद्ध करने की कोशिश की पाकिस्तान से मेरा कोई वास्ता नहीं हां,इसलाम की बैटन को जनाब आपने जिस तरह से यहाँ लिखा वह गलत है, और एक चैलेन्ज आपके पास इसका कोई सबूत नहीं है. केवल तर्कों के अलावा. "तर्क से कोई भी अपनी बात (चाहे वो झूठी क्यूँ न हो) को सही सिद्ध कर सकता है.

जय हो कुतर्का !!

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ said...

और हाँ, इस्लाम से सम्बंधित कुछ वेबसाइट तो ईसाईयों ने और नॉन-मुस्लिम ने बना कर इस्लाम के बारे में गलत खबरों को प्रकाशित किया है मेरे पास ऐसी दर्जनों वेबसाइट का नाम है जो यह काम कर रही हैं. इस्लाम को समझने के लिए आपको किसी वेबसाइट का मोहताज होने की ज़रुरत नहीं है बल्कि इस्लाम को जानने के लिए आपको कुरान और हज़रत मोहम्मद (ईश्वर की उन पर शांति हो) की जीवनी और आदर्शों को (हदीसों) को पढना चाहिए. "कार को ड्राईवर से मत तौलिये" इससे सम्बंधित लेख मी ब्लॉग पर पढ़े "मुस्लिम धोखेबाज़ होते है!!!!???"

कृष्ण मोहन मिश्र said...

kindly visit on www.kmmishra.wordpress.com

K M Mishra
Allahabad.

Kumar Dev said...

आदरणीय सुरेश जी,
एक बार फिर से मेरी बधाई स्वीकारें इस अच्छे लेख के लिए, अब अपनी बात....
स्वच्छ संदेश ने जो बात कही है वो एक तरह से आँख बंद कर डंडा चलाने जैसा है,
आपके पास अगर सारे सबूत है तो आप वैसे फर्जी वेबसाइटों के खिलाफ कारवाही क्यूँ नहीं करते, या फिर इन पर भरोसा करो,
क्यूँ नहीं आप सब इस सच्चाई को स्वीकार करते की उस कठमुल्ला में जो कुछ भी कहा है उस में आपको क्या सही नज़र आया, क्या ये सब आज के परिवेश में नहीं हो रहा है, जिस पाकिस्तान के झंडे इस देश के कुछ अंधमुसलमान लहराते फिरते है, ये मुल्ला भी तो वहीं का जमाती है क्या ये तुम सब को काफिर नहीं कहता, क्या ये तुम्हे गले लगा लेगा.....
कुछ तो शर्म करो जिस देश का खाते हो उसी देश की पीठ में छुरा घोपते हो..... धर्म भक्त बनने से कुछ प्राप्त हो सकता है लेकिन देश भक्त बनने से सबकुछ प्राप्त होता है.......................
"जय जवान, जय किसान, जय भगवान्"

परमजीत बाली said...

मौलाना साहब के जो इरादे हैं इन्हें हल्के मे नही लेना चाहिए....क्योकि मौलाना की पैठ मुसलमानों मे बहुत गहरी होती है..सो उन के विचारो का असर उन पर जरूर होता है। हम लोग भले ही कुरआन के बारे मे ज्यादा ना जानते हो लेकिन मौलाना की बातो का असर
उन के अपने भाई बंधुओं पर तो जरूर होता है और हो भी रहा होगा।....जो बहुत गंभीर हालात पैदा करते जा रहे हैं।