“धरती के विषवृक्ष पाकिस्तान” की “जमात-ए-इस्लामी” पार्टी के नेता का एक पुराना इंटरव्यू…(भाग-1) Jamat-E-Islami Pakistan Talibani Plans of Islam
आज समूची दुनिया पाकिस्तान और उसकी पैदाइश “तालिबान” से आशंकित है, कि पता नहीं ये “ज्यादा समझदार” लोग कब, क्या कर बैठें। लेकिन इनकी यह मानसिकता कैसे बनी और इसके पीछे क्या सोच है इसका आभास इस इंटरव्यू से लगाया जा सकता है। यह इंटरव्यू दस वर्ष पहले अर्थात 1999 में लिया गया है। पंजगार (अफ़गानिस्तान) से प्रकाशित होने वाली “जम्हूरिया-इस्लामिया” नामक बलूची मासिक पत्रिका के लिये पत्रकार जलील आमिर द्वारा मौलाना नवाबज़ादा नबीउल्लाह खान जो कि पाकिस्तान की मुख्य इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख मौलाना काज़ी अहमद के दायें हाथ हैं, का इंटरव्यू लिया गया है, जिसमें मौलाना साहब ने “तालिबान” की सोच को स्पष्ट किया है। यह इंटरव्यू दस साल पहले (फ़रवरी 1999) का है, लेकिन इसमें जो “महान विचार” मौलाना साहब ने छोटे-छोटे बीजों के रूप में प्रकट किये हैं, वे इतने वर्षों में एक “जहरीले पेड़” का रूप ले चुके हैं। इस इंटरव्यू में प्रस्तुत मौलाना साहब के विचारों से यह भी ज्ञात होता है कि किस तरह से ये लोग धर्म का नाम लेकर युवाओं और बच्चों का ब्रेन-वॉश करते रहे हैं और आज तालिबान यानी छात्र (ऐसे छात्र ??) पूरी मानवता के लिये खतरा बन गये हैं। ऊपर से तुर्रा यह, कि ये मौलाना साहब इन सभी विचारों पर कुरआन के स्तर पर किसी से भी बहस करने को तैयार हैं… (है कोई कुरआन का जानकार जो इन साहब से बहस कर सके?)… इस इंटरव्यू में ज़ाहिर किये गये विचारों को पढ़कर कभी आप हँसेंगे, कभी आप माथा पीटेंगे, कभी गुस्सा होंगे, लेकिन कुल मिलाकर है बड़ा ही मजेदार इंटरव्यू। प्रस्तुत हैं जमात-ए-इस्लामी के मौलाना साहब के इंटरव्यू का हिन्दी अनुवाद…
महिलाओं और पुरुषों की बराबरी की बात करना मूर्खता है
(पत्रकार ज़लील आमिर) प्रश्न – मौलाना साहब, पाकिस्तान में आजकल महिलाओं का सवाल बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, तालिबान जैसे संगठन महिलाओं की आज़ादी के खिलाफ़ हैं, जबकि कुछ प्रगतिशील मुस्लिम विद्वानों ने महिलाओं को पुरुषों के बराबर का दर्जा दिया है। इस सम्बन्ध में आपका क्या नज़रिया है?
(मौलाना नबीउल्लाह) उत्तर – मैं पहले भी कह चुका हूँ, महिलाओं के बारे में पैगम्बर मोहम्मद (PBUH) और जमात के विचार एकदम समान हैं और इसके अनुसार “महिलाओं और पुरुषों की बराबरी की बात करना नितांत मूर्खता है”, जो काम मर्द कर सकता है, महिला नहीं कर सकती। महिलायें पुरुषों के मुकाबले शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होती हैं। पुरुष को हमेशा महिलाओं की “देखरेख” करनी चाहिये। महिलाओं को घर में ही रहना चाहिये, उन्हें शिक्षा तो दी जा सकती है, लेकिन वह शिक्षा पुरुषों से मुकाबले के लिये नहीं होना चाहिये। काज़ी साहब ने आगे फ़रमाया कि जब भी जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान में सत्ता में आयेगी तब महिलाओं और अल्पसंख्यकों का मताधिकार समाप्त कर दिया जायेगा, “शरीयत” में उन्हें वोट देने का कोई अधिकार नहीं है। सिर्फ़ मुस्लिम पुरुष की मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।
जब पत्रकार ज़लील आमिर ने उनसे इस सम्बन्ध में कुर-आन की हदीसों का उदाहरण देने की गुज़ारिश की तो उन्होंने इस सम्बन्ध में कई हदीसों का उदाहरण भी दिया। आमिर ने उनसे अगला सवाल किया कि “फ़िर इस बारे में जमात पूरे पाकिस्तान में कुर-आन की हदीसों को लेकर एक खुला आन्दोलन क्यों नहीं चलाती? इसके जवाब में मौलाना कहते हैं कि चूंकि अभी जमात-ए-इस्लामी अल्पमत में है और इस बात पर कहीं वोट दे रही महिलायें जमात के खिलाफ़ वोट न कर दें इसलिये अभी इसे नहीं उठाया जा रहा, लेकिन “वक्त आने पर” कुर-आन के अनुसार महिलाओं को वोट का अधिकार से वंचित किया जायेगा।
सभी गैर-मुस्लिमों को जज़िया देना होगा
प्रश्न – पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय जज़िया को लेकर आशंकित है, इस बारे में आपके क्या विचार हैं?
उत्तर – हाँ, सभी गैर-मुस्लिमों को जज़िया देना ही चाहिये। जज़िया कोई सुरक्षा धनराशि नहीं है, बल्कि यह सभी गैर-मुस्लिमों पर बन्धनकारक है कि वे जज़िया अदा करें। जब जमात पाकिस्तान में सत्ता में आयेगी तब जज़िया पूरी तरह से लागू किया जायेगा, यदि कोई इस्लाम स्वीकार करना चाहे तभी उसे छूट दी जा सकती है, वरना कोई रियायत नहीं।
सभी भारतीय हिन्दुओं को इस्लाम धर्म स्वीकार करना होगा
प्रश्न - भारत के बारे में आपके क्या विचार हैं?
उत्तर – जमात-ए-इस्लामी पहले से ही भारत को लेकर काम कर रहा है, हमारा लक्ष्य है कि भारत के सभी हिन्दुओं को मुस्लिम बनाया जाये। बाबरी मस्जिद के गिराये जाने के बाद इसकी योजना को और बढ़ाया गया है। पाकिस्तान के पंजाब और सिंध में कई मन्दिर गिराये जा चुके हैं और हमने हिन्दुओं की सम्पत्ति को नष्ट करने का फ़रमान भी जारी किया हुआ है, लेकिन हमारा फ़ोकस मन्दिर ढहाने पर ज्यादा होता है। हमने हाल ही में जारी अपने पेम्फ़लेट में कहा है कि प्रत्येक काफ़िर के पूजास्थल को ढहाने से मुस्लिम अल्लाह के और करीब आ जाता है। इस हेतु हमने सभी पेम्फ़लेट्स पर कुर-आन की हदीसों का भी उल्लेख किया है। जिस प्रकार बाबर ने राम मन्दिर गिराया उसी प्रकार सच्चे मुसलमान को पाकिस्तान में स्थित सभी मन्दिरों को तोड़ देना चाहिये। हमारी योजना है कि भारत के मुसलमानों को भी वहाँ मन्दिर गिराने के लिये कहा जाये, लेकिन “हिन्दू पुलिस” ने भारत के मुसलमानों पर अत्याचार करना शुरु कर दिया।
प्रश्न – यदि सत्ता में आये तो पाकिस्तान में आप किस प्रकार की सरकार की स्थापना करेंगे?
उत्तर – ज़ाहिर है कि यह एक “शरीयत” पर चलने वाली सरकार होगी। संविधान में शरीयत को शामिल किया जायेगा, मदरसों में पढ़े हुए आलिमों को ही हर न्यायालय में काज़ी नियुक्त किया जायेगा, जिनका फ़ैसला अन्तिम होगा।
हमारा उद्देश्य है “सतत जिहाद”
जमात-ए-इस्लामी का मूल उद्देश्य काफ़िरों द्वारा शासित ज़मीन को इस्लाम के झण्डे तले लाना है। काज़ी साहब का दृष्टिकोण है कि कश्मीर से लेकर भारत, श्रीलंका, बर्मा और इधर अफ़गानिस्तान और ताजिकिस्तान तक दारुल-इस्लाम की स्थापना होनी चाहिये। जमात के नेताओं ने बांग्लादेश में यह करने में लगभग सफ़लता हासिल कर ली है।
प्रश्न – लेकिन श्रीलंका और बर्मा तो बौद्ध धर्म वाले देश हैं इनके बारे में आपके क्या विचार हैं?
उत्तर – हाँ हम जानते हैं कि ये दोनों देश बौद्ध हैं लेकिन एक ज़माने में बलूचिस्तान और अफ़गानिस्तान में बड़ी संख्या में बौद्ध रहा करते थे। हम इन दोनों देशों पर इस्लाम लागू करवाने के लिये हर प्रकार का दबाव डालेंगे, लेकिन हमारा पहला लक्ष्य भारत है।
प्रश्न – भारत के सम्बन्ध में आपकी क्या योजनायें हैं? आपकी सारी बातें कश्मीर पर ही क्यों आधारित होती हैं?
उत्तर – देखिये, एक इमारत में नींव होती है और ऊपर मेहराब होती है, जब नींव का पत्थर गिरा दिया जाता है तो मेहराब भी अपने आप गिर जाती है, कश्मीर को हम भारत की नींव मानते हैं, एक बार कश्मीर को भारत से अलग कर दिया जाये तो वह सेकुलर नहीं रह सकेगा। कश्मीर के आज़ाद होते ही हमारा काम आसान हो जायेगा और कश्मीर की तर्ज़ पर नागालैण्ड, आसाम, मिजोरम, झारखण्ड, तमिलनाडु और खालिस्तान को भी अलग होते देर नहीं लगेगी।
भारत को 100% मुस्लिम बनाया जायेगा…
प्रश्न – जैसा कि आप कह रहे हैं, यदि भारत के टुकड़े हो गये तो फ़िर इस प्रकार के कई “हिन्दू” देशों को आप इस्लामिक कैसे बना पायेंगे? वे फ़िर से एकत्रित होकर पाकिस्तान के लिये चुनौती बन सकते हैं।
उत्तर – संगठित और हिन्दू बहुसंख्यक वाला भारत दारुल-इस्लाम की राह में सबसे बड़ी बाधा है, एक बार उसके टुकड़े शुरु हुए तो इस्लामीकरण में आसानी होगी।
प्रश्न – यह तो बहुत विशाल सपना है, 700 वर्ष के मुगल शासनकाल में भी यह सम्भव नहीं हुआ तो अब कैसे होगा?
उत्तर – सही कहा आपने, लेकिन उस वक्त मुस्लिम (मुगल) बादशाहों ने हिन्दुओं को अपने दरबार और कामकाज में अधिकार दे रखे थे। जब एक बार यह तय हो जायेगा कि भारत में सिर्फ़ मुस्लिम ही वोट दे सकेंगे और भारत एक इस्लामिक देश बन गया है, अपने-आप स्थितियाँ बदल जायेंगी, हालांकि इसके लिये भारत के हिन्दुओं और ईसाईयों के दिल में डर पैदा करना ज़रूरी है। मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ, आज़ादी से पहले पाकिस्तान के काफ़ी सारे इलाकों में 25% से अधिक हिन्दू बच गये थे, लेकिन आज या तो वे भाग गये हैं या उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया है, यही हमें धीरे-धीरे भारत में भी करना है। आज की तारीख में पाकिस्तान में सिर्फ़ 2% हिन्दू बचे हैं, आखिर यह सब कैसे हुआ? 700 साल के मुगल शासनकाल में जो नहीं हुआ वह हमने 50 साल में ही कर दिया है, हिन्दुओं में हम इतना आतंक पैदा कर देते हैं कि वे डरकर इस्लाम कबूल कर ही लेते हैं। धर्मान्तरण करने का सबसे सही तरीका आतंक ही है। हमने यही तकनीक पंजाब और सिंध में अपनाई है, हिन्दुओं, ईसाईयों और अहमदिया सम्प्रदाय के लोगों को लगातार आतंक में जीने को मजबूर किया और नतीजा आपके सामने है, इंशाअल्लाह हम भारत में भी कामयाब होंगे।
(भाग-2 में जारी रहेगा…)
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22 comments:
मैं तो हँस रहा हूँ.
आज ही किसी ने गुजरात को लेकर फासीवादियों पर कोई फिल्म बनी है उसकी तारिफ में चिट्ठा लिखा था. उसे यह पोस्ट भी पढ़नी चाहिए.
सर फ़ोड़ने की इच्छा हो रही है।ये मत पूछना किसका।
रोचक है!
इस चुगद कि औलाद को न तमीज़ है, न अक्ल. किसी ब्लाग पर ही लिखा था.
वो उल्लू थे जो अंडे दे गये
ये पट्ठे हैं जो अंडे से रहे हैं
बहुत सही पट्ठे हैं ये मिंया जो कट्टरपंथी अंडे सेने में लगे हैं. अभी पाकिस्तान में कबूतर निकला है इनके अंडो में से, पहले अपने देश के पके हुये आमलेट की नमक-मिर्ची चैक कर लें फिर भारत का रुख करें.
ये औरतों का मताधिकार छीनेंगे, भारत के टुकड़े कर इस्लामिक बनायेंगे, लंका ढहायेंगे?
सुबह उठकर मुर्गे ने बांग दी
सवेरा हुआ
मुर्गा अकड़ा... मैंने सूरज उगा दिया
शाम को कुक्कड़ फ्राई
दे ले बांग, तू भी.
सुरेश जी आप ने लिखा तो सही है, यह एक सिरफ़िरा ही कह सकता है, लेकिन इसे नजर अंदाज भी नही करना चाहिये, लेकिन हमारे नेता, हमारी सरकार तो पलके बिछा रही है इन के सामने, अगर ऎसा ही चला तो ....
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मै तो इस बंदे की तारीफ़ करूंगा , एक दम सच और साफ़ साफ़ अपनी बात कहने वाला. कोई सेकुलरता के लबादे को ओढ कर कुछ और कहने कुछ और करने वाला बंदा नही है ये. जो इन्होने पाक मे किया वही ये भारत मे भी करने के इच्छूक है और लगातार अपनी मंजिलो की और बढते जा रहे है. इनका साथ देने के लिये हमारे यहा ढेर सारे लोग भी मौजूद है . हमारे माननीय प्रधान मंत्री से लेकर तमाम मानवाधिकार वाले इन्ही के साथ खडे दिखाई देते है जी बस जरूरत जरा ध्यान से देखने की है . इसाईयत को फ़ैलाने वाले बिना कहे इनसे ज्यादा तेजी से अपना काम किये जा रहे है . आने वाले वक्त मे हम हिंदू किसी कोने मे छुपे एक दूसरे के कान मे गाकर गाकर चौडे हो रहे होंगे कुछ बात है कि हस्ती मिटती नही हमारी
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पंगेबाज जी की बात विचारणीय है।सच मे कहीं ऐसा ही भविष्य ना हो।
सुरेश जी
आपने ये अच्छी जानकारी दी है. हम इस महानुभाव को झूठा और सिरफिरा कहकर मुह मोड़ सकते है. पर धयान दीजिये ये सिर्फ बात नहीं कर रहा. ये डाटा भी दे रहा है.
१) उसे क्या चाहिए , ये उसे पता है. मतलब की बात करे तो OBJECTIVE उसने फिक्स कर रखा है.
२) उसकी वास्तविक स्थिति क्या है, ये भी उसे पता है. मतलब REALITY से है. उसे पुरी जानकारी है % में. उसके आँख खुले है. क्या था, क्या हो रहा है, इसका मतलब क्या है.... ये दस साल पुराना लेख है. अगर ध्यान से देखे तो उसने १० साल में अपने GOAL के करीब ही पहुंचा है. उसके पास 'PLAN' भी है.
देश, समाज और सरकार सब सो रहे है और कह रहे है "अभी दिल्ली दूर है". अब तो विश्व को सचेत होना ही चाहिए?
jai ho bhartiya secularism ki.
इस विषवृक्ष को अमेरिका पास पोस कर बडा़ कर रहा है। अभी हाल ही में २०० करोड डालर की असैन्य मदद दी गई जो सैन्य बल बढाने में लगेगी!
आदरणीय सुरेश जी,
आपका यही अंदाज़ तो पसंद है हमें.. आप जब भी लिखते हो तूफ़ान ला देते हो,
लेकिन सिर्फ लिखने से आज तक कुछ हुआ है इस देश में, यहाँ तो सिर्फ कुंभकर्ण रहते है या फिर जयचंद.... अभी कुछ ऐसे भी लोग आयेंगे टिप्पणी देने जो आपको गलत ठहराएंगे... फिर आपको सन्देश प्रेषित करेंगे ( धमकी वाले ), क्यूंकि उन्हें मिर्ची लगेगी की फिर आपने उनके खुदा पर तोहमत लगा दी l
बहुत सारे ऐसे लोग है जो आपके लेख पर टीका टिप्पणी तो करने आते जरुर है लेकिन आपका हौसला बढाने नही बल्कि आपके लेख पर मज़ा लेने के लिए आते है .............. इसीलिए ऐसे चाटूकारो से सावधान रहे.......
आपका शुभचिंतक.........
"जय जवान, जय किसान, जय विज्ञानं और जय भगवान्"
सुरेश जी,
यह साक्षात्कार पढ़ाने के लिए बहुत धन्यवाद!
लेकिन जैसा आप ने लिखा और बहुत से पाठकों की प्रतिक्रिया में भी व्यक्त किया है; यह हँसने, गुस्सा करने, खीजने या आनंद लेने का विषय नहीं है।
जिस किसी ने भी यह इंटरव्यू दिया है वे भी तो सब यही चाहते हैं कि हम यही सब करें। इस से उन का मकसद हल होता है।
यह गंभीरता से विचार करने का विषय है कि इस का वास्तविक हल क्या है। जब तक खुद मुसलमानों में से इस का विरोध नहीं होता है इस का मुकाबला करना कठिन है। ऐसा नहीं कि इस तरह के कठमुल्लापन के विरुद्ध वहाँ से आवाजें न उठती हों। बहुत उठती हैं लेकिन उन्हें दबा दिया जाता है। इस के लिए सही नीति यही हो सकती है कि जो मुसलमान इस कठमुल्लापन के विरुद्ध आवाज उठाते हैं हम उन्हें मजबूती से खड़े रहने और आगे बढ़ने में मदद करें।
लेकिन हम उन्हें भी कठमुल्लाओं के साथ गरिया देते हैं, जिस से वे भी उन्हीं की पांत में खड़े हो जाते हैं या फिर चुप हो बैठते हैं। मुसलमानों के भीतर इस कठमुल्लापन के विरुद्ध संघर्षरत लोगों और पाँतों पर, उनके कामों पर, उन की सफलताओं पर आप लिखेंगे तो बहुत बड़ा काम करेंगे। आप यह कह सकते हैं कि उन पर मैं क्यों नहीं लिखता। लेकिन मेरा मुख्य विषय कानून और न्याय व्यवस्था है। आप का इस मामले में अध्ययन भी है और रुचि भी है और कुछ कर गुजरने की आकांक्षा भी। इसीलिए आप से ऐसा करने की अपेक्षा कर दी है।
इस में बहुत सारी बातें इस्लामी धारणा के खिलाफ है. इस्लाम मंदिर को गिराने की बिल्कुल अनुमति नहीं देता. इसमें कोई मतभेद नहीं मेरे भाई. बल्कि इस्लाम ने अन्य धर्मों के गुरुओं को बुरा कहने से भी रोकता है . जजया की धारणा भी इस्लामी शासन में है पाकिस्तान जैसे देश में नहीं. और इसका चलन ज़कात के समान है . इसलिय कि मुस्लिम देश में मुसलमान जकात देते हैं उसी तरह गैर मुस्लिम जाजया देकर अपनी हिफाज़त का प्रबंध करते हैं. फिर इस्लाम में कोई जोर जबरदस्ती नहीं . इस्लाम की धारणा एक है अनेक नहीं . इसलिय मेरी आप जैसे महँ लोगों से गुजारिश होगी कि बिना तहकीक के इस्लाम पर टिप्पनी न करें . इस वार्ता में इस्लाम के विरोध बातें हैं
सफ़त आलम साहब, मैंने इसमें अपनी ओर से एक भी शब्द नहीं जोड़ा है, यह इंटरव्यू इसीलिये दोबारा प्रकाशित किया गया है ताकि लोग पाकिस्तान के मौलानाओं के विचार जान सकें और समझ सकें कि किस तरह से कुर-आन को उसके "कथित" जानकार, विकृत कर रहे हैं और उसे ही सच बनाकर प्रस्तुत कर रहे हैं… यह इंटरव्यू दस साल पहले लिया गया था और इसी विचारधारा पर तालिबान का गठन हुआ है… इंटरव्यू के अगले भाग में आप पायेंगे कि पाकिस्तान के कथित मौलाना साहब भारत के मुसलमानो के बारे में क्या विचार रखते है… मैं भी जानता हूँ कि इस इंटरव्यू में कई बातें मूर्खतापूर्ण हैं, लेकिन इसमें मेरी तरफ़ से कुछ भी नहीं जोड़ा गया है, आपकी शिकायत वाजिब है, लेकिन ऐसे मौलानाओं को बेनकाब करना ही तो बड़ा काम है…
इस विचारधारा को सामने लाने के लिए धन्यवाद ...... काफ़ी पहले इस बारे मे कुछ सुना था...आज पूरा पढ़ भी लिया....
यहा का मीडिया और पार्टियाँ इन खबरों को नही बतायएंगी....क्योंकि इससे उसकी सेक्युलर छवि को नुकसान होगा......
अगर कोई हिंदू नेता ऐसी बात कहता तो उसे फाँसी दे दी जाती.......या दिन रात टीवी पर गली गाल्लोज सुरू हो जाती.....आंटंकवाद निरोधक क़ानून मे उसकी जिंदगी तबाह हो जाती.....
फिर कौन इन देश के दुश्मनों की नीतिया जनता के सामने लाएगा........है कोई इस देश मे...?
कोई मुस्लिम सज्जन भी इन बातों का विरोध नही करेंगे क्योंकि उनके उपर कट्टरपंथियों के हमले का खतरा पैदा हो जाएगा......जैसा की बांग्लादेशी लेखिका के साथ हुआ....
ये हमारा दुर्भाग्य है की हम जानते हुए भी इन दुश्मनो को मारने के लिए अपने जासूसों का उपयोग नही करते.....
आख़िर कब हम इजरायल की तरह इन दुस्मनो को समाप्त करेंगे.....
अब बात करते हैं अपने देश मे तो भारी तादाद मे पाकिस्तानी और बांग्लादेशी जासूस देश के मुसलमानों को कट्टरता और गद्दारी का पाठ पढ़ने मे लगे हैं.......
इन जासूसों ने ना सिर्फ़ अपनी जबरदस्त राजनीतिक और सामाजिक पकड़ बना ली है वरन देश को तबाह करने की पूरी तैयारी कर रखी है ....
चार करोड़ बानग्लादेशियों ने पहले ही देश मे इनको आधारभूत ढाँचा दिलवा दिया है....ऊपर से पासवान जैसे नेता भी इनको वोट बॅंक बनाने मे लगे है.....
इन्ही बेवकूफ़ नेताओं को वोटेबंक का लालच दिखाकर कोई भी देश विरोधी गतिविधि करते रहते है और इनकी गिरफ्तारी भी नही हो सकती......अब कोई ओफीसर यदि कोई गिरफ्तारी करता है तो ऊपर से पैरवी करके भाई लोग इन्हे आज़ाद करा देते हैं.....फिर मानवाधिकार भी केवल अल्पसंख्यकों के लिए बना है....
ऐसे भ्रस्त देश मे कौन नही राज करना चाहेगा .....
यदि कल को ये देश फिर से गुलामी की ओर जाता है तो कोई आस्चरय नही होना चाहिए.....
मदरसों की शिक्षा से प्रेरित हिन्दुस्तान के मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग कुछ इसी भांति सोंचता रहा है। पाकिस्तान/अफगानिस्तान में हालिया सालों में घट रही घटनाओं से शायद कुछ सीख लें।
Suresh G, Please give us permission to use some data from your blog.
"madar....."
suresh ji apshist likhne ke liye maaf kijiyega...
par yahi soojh raha tha bus !!
...aur chahe ye sarfira ho par 25% 2% wali baat aur bangladesh wali baat to sahi kahi hai is "kutte ke bacche ne"
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