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Friday 19 June 2009

टिप्पणी सम्बन्धी खुराफ़ात – एक गम्भीर मसला, कृपया सभी ब्लॉगर ध्यान दें…

(कृपया मेरे सभी “नॉन-ब्लॉगर” सब्स्क्राईबर इस पोस्ट को इग्नोर करें)
आज ई-मेल से किसी श्री राज सिंह का पत्र मिला कि आपने मेरे ब्लॉग पर जो भद्दी टिप्पणी की है उसे लेकर डॉ रूपेश श्रीवास्तव नाराज़ हैं और मुझसे स्पष्टीकरण माँग रहे हैं। इस मेल में राज जी ने मुझसे अनुरोध किया था कि इस टिप्पणी को लेकर कृपया अपना स्पष्टीकरण दें ताकि रूपेश श्रीवास्तव को सन्तुष्ट किया जा सके।
(प्राप्त ईमेल का स्नैपशॉट)




उनके कहे अनुसार उनके दिये ब्लॉग http://rajsinhasan.blogspot.com/2009/04/2.html पर जाकर देखा तो वाकई में बड़ी ही भद्दी भाषा में डॉ रूपेश श्रीवास्तव को भला-बुरा कहा गया था। जबकि यह टिप्पणी मैंने की ही नहीं थी, लेकिन टिप्पणी में मेरा नाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
(उक्त टिप्पणी का स्नैपशॉट)




मैंने तत्काल उनके ब्लॉग पर जाकर जवाब दिया और बताया कि मैंने इस प्रकार की कोई टिप्पणी नहीं की है, और यह निश्चित ही किसी की खुराफ़ात है।
(दिये गये जवाब का फ़ोटो स्नैपशॉट)




अमूमन मैं “कविता” वाले ब्लॉग पर जाता नहीं हूँ (जिस बात की मुझे समझ नहीं है वहाँ जाकर मैं क्यों अपना समय खराब करूँ, सभी कवितायें अच्छी ही होती हैं, लेकिन मुझे एक भी समझ नहीं आती, सो मैं कोई टिप्पणी भी नहीं करता)। मजे की बात यह है कि राज सिंह साहब का यह ब्लॉग मैंने आज से पहले कभी ठीक से देखा भी नहीं था, इसलिये इस प्रकार की टिप्पणी और उस पर आई हुई प्रति-टिप्पणियों से मैं भौंचक हो गया। कुछ लोगों को मुझे अशिष्ट, असभ्य होने तथा “संघी लोग ऐसे ही गालीगलौज करते हैं” टाइप की बात करने का भी मौका मिल गया। जबकि मेरे ढाई वर्ष के ब्लॉगिंग काल में मुझे याद नहीं कि मैंने किसी से भद्दी, गंदी गालीगलौज वाली भाषा में टिप्पणी की हो।

हालांकि मैं कोई तकनीकी व्यक्ति नहीं हूँ, और राज सिंह ने दावा किया कि उन्होंने पता किया है कि यह टिप्पणी मैंने ही की है (पता नहीं कैसे पता किया?)। इसलिये टिप्पणी का स्पष्टीकरण देने के बाद दोबारा मैंने अपनी उस कथित टिप्पणी को ध्यान से देखा तो पाया कि टिप्पणी में मेरे नाम के सामने जो “मार्क” है वह “अनाम” टिप्पणी वाला मार्क है, जबकि उसी टिप्पणी के नीचे रजनीश झा की टिप्पणी के नाम के सामने “ब्लॉगर” वाला मार्क (नारंगी घेरे में ‘B’ का मार्क) है। जब मैंने टिप्पणी का जवाब दिया तब भी उसके सामने वही ब्लॉगर वाला मार्क आया। इसका मतलब यह है कि अनाम टिप्पणीकर्ता ने किसी “ट्रिक” से मेरे नाम का उपयोग किया है।

एक बात और, कृपया अपने-अपने ब्लॉग (ब्लॉगर उपयोग करने वाले, वर्डप्रेस में तो अपने-आप IP Address आ जाता है) ध्यान से देखें तो पायेंगे कि जब टिप्पणीकर्ता के नाम पर माउस ले जायें तो वह “Blogger Profile और उस प्रोफ़ाइल का एक विशिष्ट अंक” दर्शाता है, जबकि उक्त टिप्पणी (जो अब हटा दी गई है) में जब मेरे नाम पर माउस ले जाता था तब मेरे ब्लॉग का पता आता था। अब यह तकनीकी लोग ही बता सकते हैं कि टिप्पणी करते समय ऐसा क्या किया जाता है कि “अनाम बनकर भी” किसी के भी नाम से टिप्पणी की जा सके। हालांकि मेरी उस टिप्पणी के बाद श्री अजय मोहन जी ने भी यही आशंका व्यक्त की है कि कहीं राज सिंह ने खुद ही सुरेश चिपलूनकर के नाम का उपयोग नहीं कर लिया? हालांकि मैं राज सिंह से परिचित नहीं हूँ, न ही कभी उन्होंने मेरे चिठ्ठे पर कोई टिप्पणी की, न ही मैंने उनके, इसलिये उनके बारे में कुछ कह नहीं सकता।
(अजय मोहन द्वारा व्यक्त की गई शंका का स्नैपशॉट)




मुझे नहीं पता था कि मैं इतना फ़ेमस(?) हो चुका हूँ कि मेरे नाम का इस प्रकार उपयोग(?) होने लगा है, लेकिन इस प्रकरण से जो मुद्दे सामने आये हैं, उसके हल के लिये मेरा सुझाव है कि – जिस प्रकार मैंने अपने प्रोफ़ाइल में और ब्लॉग पर भी मेरा ईमेल पता सार्वजनिक किया हुआ है, सम्भव हो तो सभी ब्लॉगर अपने प्रोफ़ाइल में अपना ईमेल पता डिस्प्ले करें, ताकि किसी भी विवाद की दशा में उनसे सीधे सम्पर्क किया जा सके। यदि राज सिंह मुझे मेल करके नहीं बताते तो मुझे पता भी नहीं चलता कि मेरे नाम से ऐसी कोई खुराफ़ात की जा चुकी है और रूपेश श्रीवास्तव जी आजीवन मुझसे नाराज़ रहते, और इस बात की भी कु-सम्भावना है कि पहले भी पता नहीं किस-किस के ब्लॉग पर मेरे नाम से अभद्र टिप्पणी की गई होगी। इसलिये जैसे ही यह बात मेरे संज्ञान में आई है समय निकालकर यह पोस्ट लिख रहा हूँ।

इसी प्रकार मैं सभी ब्लॉगरों से अनुरोध करता हूँ कि यदि मेरे नाम से कोई भी अश्लील, भद्दी, गालीगलौज वाली टिप्पणी प्राप्त हो तो इधर-उधर न जाते हुए पहले सीधे मुझसे मेरे ईमेल पते पर सम्पर्क करें और स्पष्टीकरण पूछें। “टिप्पणी में भाषा सम्बन्धी” अभी तक का मेरा “ट्रैक रिकॉर्ड” साफ़-सुथरा रहा है। अभी मेरे इतने बुरे दिन भी नहीं आये कि मुझे “बेनामी” रहकर किसी को गालियाँ देनी पड़ें।

एक बात और कि ऐसा भी नहीं है कि मुझे गालियाँ आती ही नहीं हैं, भोपाल में कई वर्ष बिताने के कारण “ट्रेडिशनल” से लेकर कुछ “इनोवेटिव” टाइप की गालियाँ तक आती हैं, लेकिन जब भी मैं किसी को गालियाँ दूँगा, कोसूंगा या भद्दी-गन्दी भाषा का इस्तेमाल करूंगा तो खुल्लमखुल्ला करूंगा (भगवान करे ऐसा दिन कभी न आये)। इसी प्रकार जिन “सज्जन” ने मेरा नाम लेकर यह हरकत की है कभी उनका आईपी एड्रेस पता चल जाये तो ब्लॉग पर उनका सार्वजनिक अभिनन्दन करूंगा। निश्चित रूप से यह मुझे बदनाम करने की कोई घटिया साजिश है, लेकिन इस पर एक पोस्ट लिखना इसलिये आवश्यक था, क्योंकि ऐसा भविष्य में किसी भी ब्लॉगर के साथ हो सकता है। अतः एक बार फ़िर अनुरोध है कि यदि भविष्य में कभी भी मेरे नाम से कोई गालीगलौज या अभद्र भाषा वाली टिप्पणी मिले तो पहले मुझसे सीधे सम्पर्क करें… ताकि आपस में कोई गलतफ़हमी न हो और मेरी छवि भी खराब न हो…। अन्य ब्लॉगरों से भी अनुरोध है कि वे भी यही तरीका अपनायें।

(नोट - मैं शुरु से ही “बेनामी” टिप्पणी व्यवस्था, तथा “टिप्पणी मॉडरेशन” का विरोधी रहा हूँ…)

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