करकरे, विनायक सेन, साध्वी प्रज्ञा, शहीद जवान – एक माइक्रो पोस्ट…
नईदुनिया अखबार (27 मई) में प्रकाशित समाचार के अनुसार मुम्बई हमले के शहीद हेमन्त करकरे की पत्नी ने बताया है कि उन्हें रुपये 15,000/- का करकरे के “अन्तिम संस्कार का बिल”(???) दिया गया है। इसी प्रकार परिजनों को 25 लाख रुपये देने की घोषणा हुई थी जिसमें से अब तक सिर्फ़ 10 लाख रुपये ही मिले हैं। उधर कसाब को सुरक्षा प्रदान करने और अदालती कार्रवाई के लिये करोड़ों रुपये अब तक खर्च हो चुके हैं। अब चूंकि कसाब तो “देश का जमाई” है इसलिये उसे तो कोई “बिल” थमा नहीं सकता।
एक और महान क्रांतिकारी “विनायक सेन” भी रिहा हो गये हैं, उनके लिये कई बड़े-बड़े लोगों ने प्रार्थनायें कीं, मोमबत्तियाँ जलाई, गीत गाये, हस्ताक्षर अभियान चलाये… कहने का मतलब ये कि विनायक सेन बहुत-बहुत महान व्यक्ति हैं। साध्वी प्रज्ञा के लिये महिला आयोग सहित किसी ने भी ऐसा कुछ नहीं किया, क्योंकि वे कीड़ा-मकोड़ा हैं। विनायक सेन की रिहाई की खुशियाँ मनाई जा रही हैं, इसे “जीत” के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है… उधर नक्सली हमलों में रोज-ब-रोज हमारे आर्थिक रूप से गरीब जवान मारे जा रहे हैं, किसी-किसी के तो शव भी नहीं मिलते और जब अफ़सर ग्रेड वाले करकरे की पत्नी के यह हाल हैं तो बेचारे छोटे-मोटे जवानों के परिवारों के क्या हाल होते होंगे…
अरे… ये आप भी किन खयालों में खो गये भाई… मैं तो इस प्रकार के अनर्गल प्रलाप जब-तब करता ही रहता हूँ… आप तो कांग्रेस की जय बोलिये, राहुल बाबा के नेतृत्व के गुण गाईये, प्रियंका की मुस्कान पर फ़िदा होईये, भाजपा को साम्प्रदायिक कहकर कोसिये, अफ़ज़ल की फ़ाँसी के बारे में चिदम्बरम के मासूम बयान सुनिये… आर्थिक तरक्की के सपने देखिये, सेंसेक्स के बूम की कल्पना करते रहिये, संघियों के “राष्ट्रवाद” को बकवास कहिये…।
कहाँ इन शहीदों और जवानों के परिवारों के चक्करों में पड़ते हैं… मेरा क्या है, मेरे जैसे “पागल” तो चिल्लाते ही रहते हैं…


