Friday, April 17, 2009

तीस्ता सीतलवाड के मुँह पर पड़ा “बूमरैंग” – क्यों न पद्मश्री वापस छीन ली जाये? Teesta Setalvad Gujrat Riots Supreme Court of India

“शर्मनिरपेक्षता” के खेल की धुरंधर खिलाड़ी, सेकुलर गैंगबाजों की पसन्दीदा अभिनेत्री, झूठे और फ़र्जी NGOs की “आइकॉन”, यानी सैकड़ों नकली पद्मश्रीधारियों में से एक, तीस्ता सीतलवाड के मुँह पर सुप्रीम कोर्ट ने एक तमाचा जड़ दिया है। पेट फ़ाड़कर बच्चा निकालने की जो कथा लगातार हमारा सेकुलर मीडिया सुनाता रहा, आखिर वह झूठ निकली। सात साल तक लगातार भाजपा और मोदी को गरियाने के बाद उनका फ़ेंका हुआ “बूमरेंग” उन्हीं के थोबड़े पर आ लगा है।

सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत गठित “स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम” (SIT) ने सुप्रीम कोर्ट में तथ्य पेश करते हुए अपनी रिपोर्ट पेश की जिसके मुख्य बिन्दु इस प्रकार हैं –

1) कौसर बानो नामक गर्भवती महिला का कोई गैंगरेप नहीं हुआ, न ही उसका बच्चा पेट फ़ाड़कर निकाले जाने की कोई घटना हुई।

2) नरोडा पाटिया के कुँए में कई लाशों को दफ़न करने की घटना भी झूठी साबित हुई।

3) ज़रीना मंसूरी नामक महिला जिसे नरोडा पाटिया में जिंदा जलाने की बात कही गई थी, वह कुछ महीने पहले ही TB से मर चुकी थी।

4) ज़ाहिरा शेख ने भी अपने बयान में कहा कि तीस्ता ने उससे कोरे कागज़ पर अंगूठा लगवा लिया था।

5) तीस्ता के मुख्य गवाह रईस खान ने भी कहा कि तीस्ता ने उसे गवाही के लिये धमकाकर रखा था।

6) सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि सारे एफ़िडेविट एक ही कम्प्यूटर से निकाले गये हैं और उनमें सिर्फ़ नाम बदल दिया गया है।

7) विशेष जाँच दल ने पाया कि तीस्ता सीतलवाड ने गवाहों को धमकाया, गलत शपथ-पत्र दाखिल किये, कोर्ट में झूठ बोला।

कुल मिलाकर कहानी में जबरदस्त मोड़ आया है और धर्मनिरपेक्षता के झण्डाबरदार मुँह छिपाते घूम रहे हैं। NGO नामक पैसा उगाने वाली फ़र्जी संस्थाओं को भी अपने विदेशी आकाओं को जवाब नहीं देते बन रहा, गुजरात में उन्हें बेहतरीन मौका मिला था, लेकिन लाखों डॉलर डकार कर भी वे कुछ ना कर सके। हालांकि देखा जाये तो उन्होंने बहुत कुछ किया, नरेन्द्र मोदी की छवि खराब कर दी, गुजरात को बदनाम कर दिया, “भगवा” शब्द की खूंखार छवि बना दी… यानी काफ़ी काम किया।

अब समय आ गया है कि विदेशी मदद पाने वाले सभी NGOs की नकेल कसना होगी। इन NGOs के नाम पर जो फ़र्जीवाड़ा चल रहा है वह सबको पता है, लेकिन सबके अपने-अपने स्वार्थ के कारण इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। हाल ही में रूस ने एक कानून पास किया है और उसके अनुसार विदेशी पैसा पाने वाले NGO और अन्य संस्थाओं पर रूसी सरकार का नियन्त्रण रहेगा। पुतिन ने साफ़ समझ लिया है कि विदेशी पैसे का उपयोग रूस को अस्थिर करने के लिये किया जा रहा है, जॉर्जिया में “गुलाबी क्रांति”, यूक्रेन में “ऑरेंज क्रांति” तथा किर्गिस्तान में “ट्यूलिप क्रांति” के नाम पर अलगाववाद को हवा दी गई है। रूस में इस समय साढ़े चार लाख NGO चल रहे हैं और अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार इन संगठनों को 85 करोड़ डॉलर का चन्दा “रूस में लोकतन्त्र का समर्थन”(?) करने के लिये दिये गये हैं। ऐसे में भारत जैसे ढीले-ढाले देश में ये “विदेशी पैसा” क्या कहर बरपाता होगा, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि इस प्रकार के NGO पर भारत सरकार का नियन्त्रण हो भी जाये तो कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला, क्योंकि जब “माइनो सरकार” का पीछे से समर्थन है तो उनका क्या बिगड़ेगा?

हमेशा की तरह हमारा “सबसे तेज” सेकुलर मीडिया इस मामले को दबा गया, बतायें इस खबर को कितने लोगों ने मीडिया में देखा है? पहले भी कई बार साबित हो चुका है कि हमारा मीडिया “हिन्दू-विरोधी” है, यह उसका एक और उदाहरण है। बड़ी-बड़ी बिन्दियाँ लगाकर भाजपा-संघ के खिलाफ़ चीखने वाली महिलायें कहाँ गईं? अरुंधती रॉय, शबाना आजमी, महेश भट्ट, तरुण तेजपाल, बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई आदि के फ़टे हुए मुँह क्यों नहीं खुल रहे?

अब सवाल उठता है कि जिस “गुजरात के दंगों” की “दुकान” लगाकर तीस्ता ने कई पुरस्कार हड़पे उनका क्या किया जाये? पुरस्कारों की सूची इस प्रकार है –

1) पद्मश्री 2007 (मजे की बात कि पद्मश्री बरखा दत्त को भी कांग्रेसियों द्वारा ही मिली)

2) एमए थॉमस मानवाधिकार अवार्ड

3) न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क के साथ मिला हुआ डिफ़ेंडर ऑफ़ डेमोक्रेसी अवार्ड

4) न्यूरेनबर्ग ह्यूमन राईट्स अवार्ड 2003

5) 2006 में ननी पालखीवाला अवार्ड।

अब जबकि तीस्ता सीतलवाड झूठी साबित हो चुकी हैं, यानी कि ये सारे पुरस्कार ही “झूठ की बुनियाद” पर मिले थे तो क्या ये सारे अवार्ड वापस नहीं लिये जाने चाहिये? हालांकि भारत की “व्यवस्था” को देखते हुए तीस्ता का कुछ भी बिगड़ने वाला नहीं है, वह अपने इन नकली कामों में फ़िर से लगी रहेगी…

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चलते-चलते – क्या आपने मैसूर में हाल ही में (2 अप्रैल को) हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगों के बारे में किसी टीवी चैनल पर कोई खबर सुनी है? मुझे विश्वास है नहीं सुनी होगी… क्योंकि मीडिया को वरुण के बहाने हिन्दुत्व को गरियाने और लालू जैसे जोकर की फ़ूहड़ हरकतों से ही फ़ुर्सत नहीं है, इसलिये यहाँ पढ़िये…
http://mangalorean.com/news.php?newstype=broadcast&broadcastid=118985


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44 comments:

राजीव रंजन प्रसाद said...

सुरेश भाई कहीं कुछ बडे षडयंत्र की बू आती है, कहीं एसा लगता है कि देश को जाने अनजाने खाई की ओर ले जाया जा रहा है और इसमें गैरसरकारी संस्थाये, इन्हे मिलता पैसा और मीडिया का दुधमुहाँ पन जिम्मेदार है। लेकिन इनका सच जान कर बोलने वाले साम्प्रदायिक कहे जाने का खतरा मोल लेंगे। ठेकेदारी खोल रखी है लोगों नें...

संजय बेंगाणी said...

नकली सेक्युलरों के मूँह पर कालिख पूत गई है.


मगर ये बेशर्म लोग चूप है.

Ravi said...

तीस्ता ने झूठे सबूत गढ़कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है, सिर्फ पद्मश्री छीन लेने से काम क्यों चले?

यह एक आपराधिक मामला है, तीस्ता पर इस अपराध के लिये गिरफ्तार करके मुकदमा चलना चाहिये

हमारे ब्लाग जगत के कमीने, मेरा मतलब है कि कमीनिष्ट लोग कहां गायब हो गये? हे विनोद दुआ, हे बरखा दत्तो, हे रवीश कुमारो, किस बिल के अन्दर छुप गये हो?

Shiv Kumar Mishra said...

मुंह पर बूमरैंग पड़ने की जगह जूते पड़ने चाहिए. कांग्रेस का क्या है? वो तो साल २०११ में इन्हें भारत-रत्न से नवाजने की सोच रही होगी.

पंगेबाज said...

महान काग्रेसी और तीसरे मोर्चे को भी जूते पडने चाहिये उन्होने भी साथ मे ही राग अलापा था . अब कहा गये रवीश और मोहल्ले के उल्लू के पट्ठे ?

Arvind Mishra said...

अगर यह रिपोर्ट सचमुच सही है और अब सही न होने का कोई कारण भी नहीं है तो इस दुष्टात्मा को सर मुड़ा कर गधे पर बैठा भारत भ्रमण कराया जाय ! और यह जहां जहाँ जाय उसके मुंह पर लोह थूंके -शायद इसी से इसका वह आचरण कुछ सीमा तक कम्पनसेट किया जा सके !

Amit Sharma said...

इन प्रणव राय, बरखा दत्‍त, रवीश कुमार, सरदेसाई, विनोद दुआ को लाइन में खड़ा कर इनके पिछवाड़े पर इतने बेंत लगाने चाहिए कि आगे से फालतू चूं-चपड़ करने के काबिल ना रहें

एनडीटीवी सरेआम देशद्रोही हरकतें कर रहा है इटली की महिला द्वारा संचालित सरकार में और दनादन उसे पुरस्‍कृत किया जा रहा है....शर्म आनी चाहिए

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ said...

इसका मतलब यह हुआ कि गुजरात में जो दंगा हुआ वो पूरी तरह से झूठ था, मिडिया के द्वारा गढा गया एक प्रपंच मात्र था और हिन्दुओं को बदनाम करने की साजिश भी थी, इस लेख में वर्णित और जगजाहिर किये गए सताए गए लोगों की बातें अब झूठी पायीं जा रहीं हैं, वहां जितनी लाशें मिली वह सब लाश नहीं थी, झूठ था | वहां से जो मुसलमान पलायन कर गए झूठ था, सब झूठ कोई हिन्दू ने किसी मुसलमान को नहीं मारा...............

या अब जो हो रहा है वह झूठ है???????

संजय बेंगाणी said...

प्यारे स्वच्छ संदेश भाई....आपकी आवाज अधूरी है अतः हिन्दुस्तान की आवाज नहीं हो सकती.


दंगे हुए वह सत्य है. लोग मरे वह भी सत्य है. मगर एक बहुत बड़ा सत्य था जिसे छुपा दिया गया और एक ऐसा झूठ था जिसे सत्य बना कर बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत किया गया. यही झूठ अब साबित हो रहा है.

रही बात दुआ, रविश व ना ना प्रकार के लोगों की तो वे इस लायक नहीं कि उन्हे यहाँ वहाँ घसीट कर खामखा (खल)नायक बनाया जाय. ये खुन्नस खाए लोग है.

संजय बेंगाणी said...

हालाँकि यहाँ पहले लिखा गया था, मगर इसे भी हमारी टिप्पणी माना जाय...

http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=1021

RAJ said...

Suresh ji is khabar ke liye bahut bahut dhanyawad.

Krpya is bare me bhi likhen ki hamara media kin logon ke hathon bika hua hai .

Ve kaun se desh hain jo yaha pe asthirta faila rahe hain.

Fargi NGO ka kya gorakhdhandha chal raha hai.

I think China is sending Millions of dollars to destroy our country with the help of CPI and NGO's .

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

सुरेश भाई
जबसे गुजरात दंगे हुए थे, भाजपा को भले ही इसका लाभ न मिल सका हो (जैसा कि तमाम सारे धर्मनिरपेक्ष लोगों का आरोप था कि ऐसा भाजपा ने अपने लाभ के लिए ऐसा करवाया) पर अन्य लोगों ने जो हिन्दुओं से भाजपा से किसी न किसी रूप में अपनी अघोषित दुश्मनी सी निकालना चाहते थे, उन्होंने इसका भरपूर लाभ लिया।
तीस्ता की हालत तो ये थी कि आज कुछ बयान कल कुछ और बयान। आज उनके द्वारा खड़े किये गये गवाह ने कुछ कहा कल और कुछ कह दिया। जहाँ तक पुरस्कार बापसी का सवाल है तो क्या अदालत झूठे गवाह खड़े करने और झूठी कहानी सुना कर सालों-साल अदालत को गुमराह करने के आरोप में सजा नहीं दे सकती?
वैसे कहना नहीं चाहिए जब इस देश में झूठा शपथ-पत्र देकर कांग्रेस बरी हो सकती है (रामसेतु मामले में झूठा शपथ-पत्र दिया गया था) तो तीस्ता तो इस समय अन्तर्राष्ट्रीय हस्ती है। क्या अदालती कार्यवाहियों के विशेषज्ञ अथवा कानूनविद् यह बताने का कष्ट करेंगे कि यदि किसी आम आदमी ने झूठा शपथ-पत्र अदालत में दिया होता और एक-दो दिन बाद बापस लेता तो अदालत की क्या प्रतिक्रिया होती?
अब क्या करेगे साहब....हमारा भारत देश महान!!!

mahashakti said...

इन राक्षसीयो को पूतना कहना भी गलत होगा

मुनीश ( munish ) said...

Hon'ble Supreme Courts' verdict reigns Supreme! Guilty must be brought to the book . Shame on pseudo-seculars !

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

swachhh ji, kya gujrat se pahle kahin dange nahin huye, soochna ka adhikaar me maangiye ki dange kab kab huye kahan huye, kisne shuruaat ki, kis dharm ke kitne log mare aur is sab ke baad ki kashmeer me jo hindu maare gaye, keral aur asaam me jo kuchh ho raha hai uske liye kya kahenge. paakistan me sikhon se jo jajiya liya gaya uske khilaf bhi to bolen, ab dharmnirpekshi kahan chale gayen hain, kya paakistan ke sikh insaan nahin hain.

सागर नाहर said...

है भगवान.... इतना बड़ा झूठ!!!
अब तो बाकी लोगों की भी पोल खुलने का इन्तजार है।

paraag said...

So finally Teesta Seetalwad has been exposed. It is now clear that she's not just biased against Hindus, but that she has an agenda of her own. Her agenda is to discredit the tolerance of Hindus, and hurt the very foundation of India. What she has done is paramount to treason against the country. She has also committed perjury, and has defrauded the people.

She was lying when she said that a pregnant lady's stomach was torn open and the child taken out, she was lying about killings in Gujarat, and she was lying about the maltreatment of Muslims in Gujarat. Now that it is clear that she lied, we must find out who paid her to do this.

It is very obvious that too many of the NGOs are being funded by organisations who are trying to hurt the integrity of India. A lot of this money is coming from the Middle east and the Western nations to promote their vested interests. Unless we have regulations to discover what this money is being used for, we can never stop its misuse.

People like Teesta Seetalwad, Rajdeep Sardesai, Barkha Dutt, Vinod Dua, Arundhati Roy pretend to work in the interest of the country and humanity, but I believe that they are being paid to adopt the position they have adopted. They are being paid by those who do not have interest of India at heart.

How can Teesta Seetalwad explain the money she has got to push her cause. Who is paying her? We must find that out. I urge the court to take cognizance and try her for her crimes. She must pay for her lies and her tirade against the people of Gujarat and India.

संजीव कुमार सिन्हा said...

अपने को सामाजिक कार्यकर्ता, धर्मनिरपेक्ष, मानवाधिकारवादी होने का दावा करनेवाली अति मुखर तीस्ता सीतलवाड़ व माकपा ने गुजरात दंगों में हताहत लोगों पर काफी हंगामा मचाया था। अब यह तथ्य उजागर हो गया है कि गुजरात दंगों के गवाहों से बयान दिलवाने के लिए उन्हें उनके द्वारा मोटी-मोटी रकम दी गयी। जो लोग दंगों के शिकार हुए थे तथा चश्मदीद गवाह थे उन्हें 1 लाख तथा 50 हजार रुपए और जो लोग केवल दंगा पीड़ित थे उन्हें पांच-पांच हजार रुपए दिए गए। यह पैसा माकपा-स्रोतों से दिया गया जिसमें तीस्ता सीतलवाड़ की अहम भूमिका थी। यह भी उल्लेखनीय है कि दंगा पीड़ित या चश्मदीद गवाहों को जब धन दिया गया तो वृंदा करात भी मौजूद रही थीं।

गुजरात दंगों के गवाहों को वामपंथी रिश्वत?

Anil Pusadkar said...

तमाम मानवाधिकारवादियो, को कश्मीर,पीओके और पाकिस्तान और अफ़गानीस्तान भेज दिया जाना चाहिये॥इनको वंही भेजा जाना चाहिये जंहा का रुपया डकार कर ये यंहा ग़ुर्राती हैं। मगर ये बेशरम है इनका जब तक़ जुलूस नही निकले तब तक़ सुधरेंगे नही॥

Anil Pusadkar said...

तमाम मानवाधिकारवादियो, को कश्मीर,पीओके और पाकिस्तान और अफ़गानीस्तान भेज दिया जाना चाहिये॥इनको वंही भेजा जाना चाहिये जंहा का रुपया डकार कर ये यंहा ग़ुर्राती हैं। मगर ये बेशरम है इनका जब तक़ जुलूस नही निकले तब तक़ सुधरेंगे नही॥

Reality Bytes said...

same art of subversion used by every intelligence agency ..

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

तीस्ता जैसी फितरती शख्सियत भारत की छवि पूरे विश्व मे बिगाड़ती है . देश को नुक्सान पहुचाने वाले को देशद्रोही ही कहा जायेगा शायद

cmpershad said...

ओह! अब समझा कि धोनी और भज्जी पद्मश्री लेने क्यों नहीं गए:) निश्चय ही हो तीस्ता की श्रेणी में खडे़ होना पसंद नहीं करते !!!!!!!

वीरमदेव की चौकी से ......... said...

तीस्ता की पोले खुल गई इससे बड़ा वाकया क्या हो सकता है तीस्ता अकेली थोडी है उसके पीछे बहुत सारे लोग है उनका भी भंडा फूटना चाहिए हिन्दू समाज को बहुत बदनाम कर दिया अभी भी यही कर रहे है परन्तु मीडिया सारा मर गया जो इस पर सयापा नहीं कर रहा है जोर जोर से रो नहीं रहा है की हे कोर्ट तुने यह क्या कर डाला अब हमारा क्या होगा हमको कोन पूछेगा मीडिया ने इसपूरी खबर को ही दबा दिया वहा रे मीडिया वहारे सरकार हिन्दू को गाली. राम को अस्वीकार तीस्ता को पुरस्कार फिर भी हम वोट देवे यह खबर तो हर गली में सुनाई जावे

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

विडम्बना ये है कि ऐसी दुष्टाओं को ही मीडिया सिर पर क्यों उठाए रहता है यह समझ से परे है? मेनका गान्धी जैसे लोग भी एन.जी.ओ. बनाकर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। पर्यावरण और जीव जन्तुओं की सम्पदा की रक्षा के लिए। लेकिन मीडिया को उसे दिखाने बताने में कोई रुचि नहीं है। उन्हें तो झूठ का पुलिन्दा चिल्ला-चिल्ला कर प्रसारित करने में ही अधिक फायदा दिखता है। हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था का चौथा स्तम्भ भी भ्रष्टाचार और स्वार्थपरता की भेंट चढ़ गया लगता है।

उपाध्यायजी(Upadhyayjee) said...

मीडिया किसी को भी हीरो और किसी को भी जीरो बना सकता है. ये तीस्ता भी मीडिया की ही पैदाइस हैं. अब मीडिया वाले चुप क्यों हैं? वरुण के भाषण पर तो इतना हंगामा खडा किये लेकिन तीस्ता के कबुतरबाजी पर चुप्पी क्यों? क्या हिंदुस्तान सच मुच इन बीके हुए मीडिया और सेकुलर शब्द के प्रयोग करने वाले झूठो के अधीन हो गया है? सेकुलर के नाम पर जो नंगा नाच चल रहा है वो ठीक नहीं है. दोस्तों ये ब्लोग्स और youtube का प्रयोग कर के एक नया प्रयास शुरू होना चाहिए. ताकि ये देश सेकुलर के नाम पर कमीने लोगो के अधीन ना आ जाए. इतना तो तय है की भले कोई बोले ना लेकिन मन ही मन सब सेकुलरिस्म से ऊब गए हैं.

katyayan said...

स्वच्छ सन्देश/ सलीम जी, मोहम्मद साहब नें फर्माया था कि पत्थर वह मारे जिसनें कभी पाप न किया हो? बिना माँगे सन्देश देना भी कुछ ऎसा ही है। डा० शैलेश ज़ैदी के ब्लाग" युगविमर्श’ और बाग्लादेश की वेबसाइट "मुक्तोमनों" पर अबुल कासिम तथा अन्यों के लेख पढ़े, चेहरा साफ नज़र आनें लगेगा। जहाँ तक डा० जाकिर नाइक का सवाल है उनके बारे में शिया हजरात तो अच्छी राय (दीन के सम्बन्ध में) नहीं रखते है वहीं कुछ दीगर मसलहत के विद्वान भी उन से एक राय नहीं रखते। वैसे आखिरी पैगम्बर जब हो चुके हैं तो हजरत नाइक को नया पैगम्बर क्यों बनाये दे रहे हैं?

paricharcha said...

मची हो लूट घर के सामानों की
तो बेचें न वे अपने इमां क्यूँ कर.

उन इज्जत आफजाई का भी शुक्रिया
मिलते हैं जो मुश्किल से गुलिश्तां बेच कर.

दे खंजर उन गरीबों के हाथ ऐ खुदा
बहता है खून जिनका तमाशा बन कर.

--कौतुक

चन्दन चौहान said...

अब किस मुह से गरियायेगे ये विकास पुरुष नरेन्द्र मोदी को

श्रीकान्त मिश्र ’कान्त’ said...

मित्रो !

कुतर्क और दुष्प्रचार का उत्तर जनजागरण ही होता है. आज समय है और वोट की शक्ति भी ..... अच्छा यह होगा कि इस सम्पूर्ण षडयंत्र को राजनीतिक प्रत्युत्तर और शक्ति से ही निबटें. मात्र शाब्दिक भडास निकालने से कहीं अधिक प्रासंगिक है हाथ आये अवसर 'राष्ट्रीय चुनाव' को राष्ट्रीय हित में सही दिशा देना और सही जनप्रतिनिधियों को नेतृत्व के लिए पहुँचने में सहायता करना. तीस्ता जैसी अनेकों उदाहरण हैं जिनको देश की भोली जनता को प्रायः जानकारी ही नहीं होती. अच्छा होगा कि अपने चारो और के परिवेश में लोगों को बिना विवाद के सही जानकारी देने का प्रयास किया जाए .... शुभस्य शीघ्रम ... उतिष्ठत ......- शुभ वोटिंग

khursheed said...

खैर आप लोगों को सुप्रीम कोर्ट की बातों पर यकीन तो हुआ वर्ना इससे पहले इसी सुप्रीम कोर्ट ने न जाने कितने बार गुजरात सरकार को फटकार लगाई है. उस को भी याद रखियेगा.

मिहिरभोज said...

आप लोग याने.....
खुर्शीद भाई वो यकीन इसी लिए नहीं आ रहा था कि पता था कि इसी तरह के बहुत सारे सबूत बनाये गये हैं......सत्य नहीं...और सुप्रीम कोर्ट भी कहां तटस्थ भूमिका निभा रहा है....अफजल गुरू की फांसी के मामले पर क्यों नहीं कैंद्र सरकार को लताङ पिलाता है...

khursheed said...

सब को कोर्ट की वही बातें अच्छी लगती हैं जिससे उनके तर्क को मजबूती मिलती हैं. इससे पहले इसी सुप्रीम कोर्ट ने न जाने कितनी बार इसी गुजरात सरकार को फटकार लगाई है. उसकी बात कोई नहीं कर रहा हैं. आप लोग शायद कोर्ट में यकीन करने वाले लगते हैं. तो आप लोगों को एक बात बताता चलूँ की २००७ में हैदराबाद की मक्काह मस्जिद में ब्लास्ट हुआ था. पुलिस ने अपनी आदतानुसार मुस्लिम नौजवानों को आरोपी बनाकर पकड़ लिया. लेकिन १ जनवरी २००९ को कोर्ट ने सभी आरोपियों को रिहा कर दिया क्योंकि पुलिस कोई भी ऐसा सबूत पेश नहीं कर पाई जिससे उन पर आरोप साबित किया जा सके. (दिनाक १ जनवरी का द हिन्दू समाचार पत्र देखें). मगर कोर्ट की इस बात द संघियों को यकीन नहीं होगा. क्योंकि कोर्ट की उसी बात को बड़ा चडाकर पेश करते हैं जिससे उनको नफरत फैलाने का मौका मिले.

khursheed said...

मिहिरभोज भाई आप सुप्रीम कोर्ट में अफज़ल गुरु से सम्बंधित एक याचिका क्यों नहीं दायर करते.

khursheed said...

तमाम तरह के तर्क - कुतर्क पेश न करते हुए केवल इतना बताना चाहूँगा कि सांप्रदायिक दंगे (नरसंहार) संघ परिवार का अस्ततित्व हैं. कोई भी अक्लमंद हिन्दू या मुस्लमान सोच सकता है कि १९९२ के देशव्यापी दंगे से पहले संघ परिवार की राजनितिक शाखा भाजपा को कितनी संसदीय सीटें मिलती थी और कितने प्रदेशों में उसकी सरकार थी.

khursheed said...

मदनी को कोर्ट ने बरी कर दिया है और अगर किसी के पास मदनी के खिलाफ सबूत हैं तो वो उसे कोर्ट में पेश करें. मेरी समझ में नहीं आता कि भारत में कोई अपने को निर्दोष कैसे सिद्ध करे.

katyayan said...

स्वच्छ सन्देश और फिर खुर्शीद मिय़ाँ? दोंनो में क्या समानता है? लगातार २-३-४ कमेन्टस पोस्ट करना। एक का ब्लाग है दूसरे का प्रोफाइल गायब है=दोनों एक ही किरदार हैं-सब समझ में आ रहा है। मियाँ दीन पर, उस खुदा पर ईमान लानें की कोशिश करो जिसनें सारी कायनात बनायी, इन्शान बनाया। खुदा एक है यदि इस बात पर अकीदा है तो मान लो कि उसी नें हिन्दू बनाया,मुसलमान बनाया। अगर उसे मंजूर नहीं तो चाहे जो कोशिश कर लो हिन्दू को मिटा नहीं पाओगे,मुसलमान को बचा नहीं पाओगे। संघ परिवार का अस्तित्व दंगो पर आधारित है या नहीं पर पाकिस्तान जरूर दंगो की कोख से जन्मा है। वैसे बरखुर्दार पाकिस्तान,अफगानिस्तान इराक में जो मुस्लमान लड़ रहे हैं उसमें संघ की भूमिका के बारे मे जरा रॊशनी तो ड़ाळो?

khursheed said...

katyayan sahab
pakistan beech me kahan se aa gaya.

katyayan said...

खुर्शीद मियाँ, मुआफी चाहता हूँ,गलती मेरी ही है, दर अस्ल मैनें आलिम समझा था! वैसे आखिरी लाइनें फिर से पढ़ें।

prashant said...

जिस देश मे धर्म निर्पैक्स्था का मतलब हिन्दू विरोध है ,वहा ये सब चलता रहेगा !! ताजुब है ना

khursheed said...

pakistan, afganistan aur iraq me angrezon se ladne wale galat hain. aur hamare desh me angrezon se ladne wale freedom fighter.

Mahesh Sinha said...

NGO बहुत बड़ी चीज है ये . अब तो सरकार भी अपना काम इन्हें सौप रही है और बाकायदा कानून बनाकर . भारत सरकार एक " National health bill 2009" ला रही है जिसमे इनका भी जिक्र है और क्यों न हो अब सारे NGO सक्षम अधिकारीयों और नेताओं की बीबियाँ या रिश्तेदार जो चला रहे हैं

नेशनल हैल्थ बिल का प्रारूप और आपके विचारों के लिए लिंक ;
.http://mohfw.nic.in/nrhm/draft_bill.htm

प्रणव रॉय क्या करें प्रकाश करात के रिश्तेदार जी ठहरे

Indra said...

दोस्तों, एन. डी. टी. वी. का पूर्ण रूप से बहिष्कार होना चाहिए. इस चैनल ने कुछ ज्यादा ही सेकुलरिस्म का झंडा उठाया हुआ है. हर कार्यक्रम मैं तीस्ता को बुला कर आग उगलने का मौका देते हैं. इन सबका सही उपाय ब्लॉग ही है इसे मज़बूत और लोकप्रिय करना होगा. एन डी टी वी से डायरेक्ट सवाल उठाने होंगे की मंगलौर दंगो की रिपोर्ट क्यों नहीं दिखाई. ऐसा भी नहीं है की मीडिया ब्लॉग की पोपुलारिटी और ताकत नहीं जानता इसीलिए बरखा दो बार अपने वीकली कार्यक्रम वी द पीपुल मैं ब्लॉग का महत्व आने वाले दिनों मैं पर चर्चा कर चुकी है. जिसमे रविश भी शामिल हो चुके हैं. हमारे देश की जनता अपरिपक्व है, नेता मौकापरस्त हैं और मीडिया बाज़ार के हाथो खेल रहा है.

उम्दा सोच said...

तीस्ता से भली वेश्या जो सिर्फ़ शरीर बेचती है इसने तो अपनी आत्मा बाज़ार मे बेच डाली!

सोनिया गान्धी अब इसे एक और पद्मश्री दिलायेगी मक्कारी का पद्मश्री!

हिन्दू बर्बर हो गया तो इतिहार,भूगोल उलट जायेगा, इस लिये उनकी शहिशणुता का सम्मान करो!