Monday, March 9, 2009

होली के निमित्त, ब्लोगरों से एक सवाल… (फ़ालतू सी सुपर माइक्रो पोस्ट)

आजकल “एक लाइन” की सुपर-माइक्रो पोस्ट लिखने का फ़ैशन शुरु हुआ है, सो उसी परम्परा का निर्वहन करते हुए सभी ब्लॉगरों से एक आसान सा सवाल है कि –

“अंकल” कहने पर पुरुषों को ज्यादा बुरा लगता है या “आंटी” कहने पर महिलाओं को? परिभाषा सहित तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करें…

“बुरा ना मानो होली है…” कहना मेरा फ़र्ज और एक परम्परा है, लेकिन फ़िर भी यदि कोई बुरा मान ही जाये तो मेरी बला से…

21 comments:

neeshoo said...

अब हम जैसे लोग भी अकंल की श्रेणी में आ गये हैं क्योंकि बच्चे कभी-कभी ' अकंल' जैसी उपाधि दे देते हैं । पर बहुत ज्यादा बुरा नहीं लगता सोचते हैं बच्चा है चलो जाने दो । पर हां एक बार एक अधेड़ उम्र की महिला को आंटी कहने जा जुर्म किया था । तो उन्होंने शिक्षा का ऐसा पाठ पषढ़ाया कि आज तक जब किसी अपरचित महिला से रू-ब-रू होता हूँ । एक्सक्यूज मी से ज्यादा कुछ भी नहीं निकला । अब आप खुद ही आंकलन कर ले कि किसे ज्यादा बुरा लगता है ।

निशाचर said...

यह इस बात पर निर्भर करता है लक्ष्य व्यक्ति स्वयं को किस आयु वर्ग में रखता है. अंकल कहने पर कई पुरुष भी बुरा मान जाते हैं खासकर वे जो अविवाहित होते हैं.
स्त्रियाँ तो चिरयौवना और षोडशी होती हैं. अब ब्यूटी पार्लर के गुरु गंभीर बिल को भुगत कर आ रही किसी महिला को यदि "आंटी" कहने की गुस्ताखी करेंगे तो बेचारी का भड़कना जायज है. माना कि मंदी के दौर है लेकिन जबान की फराखदिली में कोई खर्च नहीं लगता.

PD said...

अरे अंकल, ये क्या पूछ बैठे? :D

Arvind Mishra said...

आपने पूँछ लिया तो सुन ही लीजिये -दोनों को बुरा लगता है जब तक वे अपने को किशोर वयी या जवानी से लबरेज समझते हैं !
पर शायद कोई पुरुष इसे इगनोरभी कर दें कथित अत्याधुनिकाएं तुंरत अगिया वैताल हो जाती हैं ! क्योंकि उन्हें जो चीज सबसे ज्यादा सालती है वह है उनकी ढलती उम्र ! और आंटी कह देना इस चोर नस को दबा देता है !
वैसे मेरी सलाह है कि आप चाची शब्द का इस्तेमाल करके देंखें जैसा मैं करता हूँ उसमें उम्र की वह चुगली नही होती

Suresh Chiplunkar said...

@ नीशू भाई, आकलन और अनुमान लगा चुका हूँ, इसीलिये तो यह पोस्ट लिखी है… हा हा हा हा
@ निशाचर भाई, जब से ब्लॉग लिखना शुरु किया है बुरा मानना छोड़ दिया है… हाँ लेकिन जब कभी कद्दू-लौकी सी बाँहों वाली महिला मुझे अंकल कहती है, तब बुरा मान ही लेता हूँ… :) :)
@ PD भाई, टिप्पणी के लिये धन्यवाद अंकल… :D
@ अरविन्द जी, "चाची" शब्द भी आजकल "साम्प्रदायिक" हो गया है, दंगा भड़काओगे क्या अंकल… :)

आवारा प्रेमी said...

बुरा ना मानो होली है…
चिपलूनकर भाया
मुझे आप पर प्यार आता है...

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

अंकल , आधी लाइन की पोस्ट पर तीन पन्नो की टिप्पणी मांग रहे हो . होली है अप्रेल फूल नहीं

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

अरविन्द जी चाची किन्हें कहते हैं ...मतलब आपकी चाची की उम्र की महिलाएं तो स्वर्ग सिधार गईं होंगी कब की ...हा हा हा


बुरा न मानो होली है ...

Udan Tashtari said...

अंकल याने काका हिन्दी में:

महाकवि केशव की बात सुनें:


केशव केशन अस करी जस अरिहू न कराहिं
चन्द्र मुखी मृगलोचनी बाबा कहि कहि जाहिं

-महाकवि केशव

याने सफेद बालों के चक्कर में सारा लफड़ा मचा है.


- क्या बुरा मानें, जब अपने ही धोका दे गये याने बाल तो अपने हैं कम से कम वो ही साथ देते.


आंटी लोगों का तो आंटी जी जाने. हम क्या कहें? हम तो वैसे ही घबराते हैं.

--होली की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

भाई, हमारे यहाँ हाट में कोई 50 साल की औरत किसी 12-15 साल के युवा से टकरा जाए तो युवा को नसीहत देती है- दाज्जी,काईं ड्याँ फूट गी कईं? (दादा जी आँखें फूट गईं क्या?)
फिर अंकल आण्टी का क्या?

cmpershad said...

अरे बन्धु, जब कोई फिल्म स्टार प्राइमरी स्कूल में जाती है और बच्चे आदतन आंटी कह देते हैं तो उन्हें सिखाया जाता है- ना बेटे, दीदी कहो!!:)

अविनाश वाचस्पति said...

अं ........... कल

लिखूं टिप्‍पणी

अनुभव बटोर लूं

किसी को कह दूं

किसी से सुन लूं

अपनी राय कैसे दूं



पहने आन(आने) दो टी (चाय)
एक नहीं दो चाय

फिर देंगे हम
जरूर अपनी राय बताय।

वरुण जायसवाल said...

सुरेश जी , वाकई आपने मजाक में भी बड़ा ही गर्भित प्रश्न पूछ लिया है |
खैर यदि आपने पूछा ही है तो कुछ हम भी कहे देते हैं |
अंकल या आंटी होना मानसिक समझदारी पर निर्भर करता है | आज के युवा की मानसिक समझदारी का यदि औसत निकाला जाये तो २४ से २८ की परिपक्व उम्र में भी लोग समझदारी का परिचय नहीं दे पाते हैं | ऐसे में व्यक्ति अगर जागरूक होने के साथ - साथ समझदार भी हो तो इन युवा बच्चों के सामने तो अनुभव में अंकल या आंटी ही साबित होगा , अर्थात अगर कोई कम उम्र के बावजूद आपको अंकल या आंटी कह रहा है तो वो आपको मानसिक रूप से स्वयं से अधिक विकसित स्वीकार कर रहा है ऐसे में तो हमें गर्व होना चाहिए की कम उम्र के बावजूद हम समाज से औसतन ज्यादा परिपक्व हो चुके हैं |
धन्यवाद ||

राज भाटिय़ा said...

सुरेश जी, अंकल, ओर आंटी वेसे भी खराब लगता है,लेकिन क्या करे इन अंग्रेजॊ ने हमारे सब रिश्ते बिगाड दिये, इस लिये मुझे कोई बच्चा अकंल ओर हमारी बीबी को आंटी कहता है तो बहुत अच्छा लगता है,बिलकुल अपने बच्चो की तरह से, बाकी ओरो का पता नही

आपको और आपके परिवार को होली की रंग-बिरंगी ओर बहुत बधाई।
बुरा न मानो होली है। होली है जी होली है

बी एस पाबला said...

बढ़ती उम्र के अहसास को ढोने वाले हर मानव को इस तरह के संबोधन बुरे लगते हैं। किसी को देखकर उम्र की यह वास्तविकता सालने लगे और वही अंकल-आंटी कह दे, तो कहाँ-कहाँ लग जाती है, इस होली के माहौल में ना ही पूछें :-)

अक्षत विचार said...

आपको होली की ढेर सारी शुभकामनायें....

दिल दुखता है... said...

अंकल जी..... जब भी आपके ब्लॉग पर आता हूँ ...
गजब कुछ न कुछ अलग ही पड़ने को मिलता है...
मत पूछिये किसे ज्यादा बुरा लगता है... मैं भुक्त भोगी हूँ...

Anil Pusadkar said...

बुरा न मानो होली है। वैसे अपन तो बचपन से काका-काकी,चाचा-चाची,मामा-मामा वाले है,अंकल-आंटी वाले नही।उसमे तो पता ही नही चलता कि माताजी के भाई से बात कर रहे है या पिताजी के।

होली की रंग बिरंगी बधाई।

अजय said...

OpenOffice-Hindi-LangPack2.2 का सेटअप चलाने पर ( नीचे गन्तव्य फ़ोल्डर एक OpenOffice.org.2.2 संस्करण को नहीं रखता है ) अलग फ़ोल्डर चुनने के लिए किल्क करें c:\Programfile\ . .............. बदलें लिखकर आता है क्या करें

अजय said...

अंकल या आन्टी कहने पर बुरा तब लगता है जब सामने वाला लगभग बराबर का लग रहा हो

Arvind Mishra said...

एक जवाब लवली को
मेरी उम्र तो अभी ३२ साल की है इतनी खराब गणित है आपकी और मेरी चाचियों स्वर्गवासी बता रही हैं ! बता दूं मेरी चाचियाँ इसी धरा पर हैं और आप से तो यंग ही हैं -न विश्वास हो तो नम्बर ले के बात कर लें या फोटो सोटो कहें तो भेज दूं !