Friday, March 6, 2009

अमृता अरोरा की मैरिज भी हुई, निकाह भी, लेकिन… (एक माइक्रो पोस्ट)

हिन्दी फ़िल्मों की एक हीरोइन अमृता अरोरा (नाम कितने लोगों ने सुना है?) ने 4 मार्च को अपने “बॉयफ़्रेण्ड” शकील से “मैरिज” कर ली। जिसने उनका नाम नहीं सुना हो उन्हें बता दूँ कि ये मोहतरमा, सलमान खान के भाई अरबाज़ खान की पत्नी मलाईका अरोरा की बहन हैं (उफ़्फ़्फ़्फ़ इतना लम्बा परिचय), और अक्सर शाहरुख के बंगले में होने वाली पार्टियों में पाई जाती हैं। इस माइक्रो पोस्ट का लब्बेलुआब यह है कि इन्होंने 4 मार्च को ईसाई वेडिंग पद्धति से “मैरिज” की, फ़िर 6 मार्च को इस्लामी पद्धति से “निकाह” भी किया। असल में इनकी माताजी एक मलयाली ईसाई जोयस पोलीक्रैप हैं और ताजा-ताजा पति मुस्लिम हैं, सो माताजी और पति की “धार्मिक भावनाओं”(?) का खयाल रखते हुए उन्होंने अपना “कर्तव्य” निभाया। अब बेचारे पिताजी ठहरे एक पंजाबी हिन्दू, तो इन्हें हिन्दू पद्धति से शादी करने की बिलकुल नहीं सूझी, न उन्हें किसी ने सुझाया होगा, (हिन्दुओं की भावनाओं का खयाल रखने का तो प्रचलन रहा नहीं अब…) आखिर “सेकुलरिज़्म” का मामला है भाई… जय हो… जय हो… (और ये तो उनका व्यक्तिगत मामला है, वे चाहे जैसे शादी करें हम कौन होते हैं दखल देने वाले, हमारा काम आपको सूचित करना भर है…)

“व्यक्तिगत स्वतन्त्रता के पक्षधर” और “सेकुलर” लोग लट्ठ (की-बोर्ड) लेकर आते ही होंगे, चलो निकलो भाईयों इधर से…। आजकल हिन्दू धर्म, हिन्दू संस्कृति आदि के बारे में कोई सवाल उठाना “ओल्ड फ़ैशन्ड” माना जाता है… और यदि किसी को अमृता जी द्वारा हिन्दू पद्धति से किये गये विवाह के बारे में कोई जानकारी हो लिंक दें ताकि उनके पिताजी के साथ-साथ हम जैसे दकियानूसी(?) लोगों का कलेजा भी ठण्डा हो सके…। एक बार फ़िर जय हो…

(नोट – “स्वास्थ्य” की बेहतरी के लिये कभी कभार ऐसी बेहद माइक्रो पोस्ट भी लिखना चाहिये… जिसमें एक भी “टैग” ना लगा हो)

20 comments:

Shastri said...

"(हिन्दुओं की भावनाओं का खयाल रखने का तो प्रचलन रहा नहीं अब…) आखिर “सेकुलरिज़्म” का मामला है भाई… जय हो… जय हो…"

आप ने एकदम सही विश्लेषण किया. हिन्दु धर्म और हिन्दुस्तान की अस्मिता से खिलवाड को आजकल "सेकुलरिस्म" का रूप दिया जा रहा है. इसका नखशिखांत विरोध होना चाहिये.

सस्नेह -- शास्त्री

-- हर वैचारिक क्राति की नीव है लेखन, विचारों का आदानप्रदान, एवं सोचने के लिये प्रोत्साहन. हिन्दीजगत में एक सकारात्मक वैचारिक क्राति की जरूरत है.

महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)

अंशुमाली रस्तोगी said...

आपने ठीक ही किया इस उत्तेजक माइक्रो-पोस्ट को लिखकर। लोगों (प्रगतिशीलों) का मन लगा रहेगा इसी बहाने।

चन्दन चौहान said...

भाई साहब इन लोगो का बात मत किया करो।
मेरे पास इन सभी को देने लायक गाली नही है।

आशीष कुमार 'अंशु' said...

कहाँ से यह 'अद्भूत' जानकारी आप जुटा पाते हैं?

पंगेबाज said...

हिंदू धर्म भी कोई धर्म है जिसमे बजरंगी आर एस एस जैसे तालीबानी लोग रहते है सही सेकुलर धर्म है मुस्लिम कोई शक है तो पाकिस्तान और दुबई को देख लो या फ़िर धर्म तो इसाई जहा का प्रभु उसकी शरण मे आये लोगो को चंगाई देता है पैसा देता है :)

mahashakti said...

जाने दीजिए एक गंदगी और कम हो गई

संजय बेंगाणी said...

बड़े ऑल्ड फेशंड हो भाई.... :)

P.N. Subramanian said...

इस मोहतरमा की अम्मा मूलतः किसी मातृसत्तात्मक कुनबे की रही होगी.

sareetha said...

वे अपनी बड़ी बहन के नक्शे कदम पर हैं । मलैका अरोरा खान ने भी पहले चर्च में पादरी के सामने अँगूठियाँ बदली थीं ,फ़िर निकाह भी पढ लिया । कई लोग जानना चाहेंगे कि ये सवाल तब नहीं तो अब क्यों ? कायदे से तो उन्हें गुरुद्वारे में भी मत्था टेकना चाहिए लेकिन फ़िर वही दकियानूसी सोच , पुरातनपंथी बातें......। अगर किन्हीं बेटियों ने मातृसत्तात्मक समाज की सोच आगे बढाने की शुरुआत की है तो हर्ज़ ही क्या है । महिला दिवस के आसपास ऎसे गंभीर मसले पर इतना हल्का सवाल खड़ाकर आपने मुसीबत मोल ले ली है । पिंक चड्डी प्रकरण के बाद ये दूसरा मामला होगा जिस पर आपकी छीछालेदार तय मानिये.....!

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

sahi kaha aapne, hindu vidhi apnate to fatwa jaari ho jaata. phir kahoonga hindu to vyopari hain.

BS said...

आपने ध्यान नहीं दिया, आईशा टकिया का भी निकहा इसी दिन हो गया।

अनिल कान्त : said...

अब क्या कहें कैसे कहें ...आप सब लोग पहले ही बहुत कुछ कह चुके हैं ....


मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

रचना said...

काजी जी क्यूँ दुबले शहर के अंदेशे से

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

oh god , hindu shadi tab tak to tlaak ho jaayyega

राज भाटिय़ा said...

आज से कई साल पहले फ़िल्मो मे तवायफ़ भी काम करने से मना करती थी... क्यो कि वो भी कुछ तो इज्जत रखती थी, ओर आज ..... राम राम राम.
आप ने लेख बहुत सटीक लिखा, वेसे इन नाचने वालियो से कोई शरीफ़ आदमी तो शादी करने से रहा, जो प्यार का खेल सरे आम खेले उन्हे प्यार का अर्थ भी मालुम होगा ?
धन्यवाद

jayram said...

suresh jee , jai ho likhne se pahle sochna tha kahin congresi fir na kar den !aakhir jai ho ki copy right to unhi ke pas hai !

Udan Tashtari said...

कल बड़ी कठनाई से एक कमेंट किए थे, वो भी गुम हो गया. :(

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

GOOD.........
....BETTER...........
..........BEST..........
JAI HO hindu....... ??????????????????????????????????????

Meenu khare said...

जय हो।

डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल said...

क्या यह इन लोगों का निजी मामला नहीं है? हम लोग क्यों दुबले हुए जा रहे हैं?