Tuesday, March 10, 2009

अल्पसंख्यक वोट, कांग्रेस और “दागी” अज़हरुद्दीन : मामला घुमावदार है

Azaharuddin, Match Fixing, Dawood, Congress, Secularism

हाल ही में पाकिस्तान में श्रीलंकाई क्रिकेटरों पर हमला हुआ, जिस बात की आशंका काफ़ी समय से सभी को थी, अन्ततः वह बात सच साबित हुई कि पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान, आईएसआई, तालिबान, लश्कर आदि सभी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं, यानी कि चोर-चोर मौसेरे भाई। इसी प्रकार पाकिस्तान में क्रिकेट भी एक सट्टे का रूप है, यह बात काफ़ी वर्षों से सभी लोग जानते हैं कि पाकिस्तान की सत्ता में रहने वाले दाऊद के बेहद करीबी हैं। दाऊद के हजारों धंधों में से एक है क्रिकेट पर सट्टा लगाना, खिलाड़ियों को खरीदना और मैच फ़िक्स करवाना। इस धंधे में भारत और पाकिस्तान के कई खिलाड़ी शामिल रहे हैं और उनकी घनिष्ठता इतनी बढ़ी है कि दाऊद ने जावेद मियाँदाद को अपना समधी भी बना लिया, मोहम्मद अज़हरुद्दीन के पाकिस्तानी क्रिकेटरों से काफ़ी करीबी सम्बन्ध रहे हैं, और मुशर्रफ़ के हालिया भारत दौरे के समय अज़हरुद्दीन उनसे भी गलबहियाँ कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में कांग्रेस ने हैदराबाद सीट से पूर्व् क्रिकेटर अजहरुद्दीन को टिकट देने का फ़ैसला लगभग कर ही लिया है। एक तरफ़ तो राहुल बाबा पार्टी में शुद्धता आदि की बातें कर रहे हैं और साफ़ छवि वाले युवाओं को मौका देने की “लाबिंग” कर रहे हैं ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर मुस्लिम वोटों की लालच में कांग्रेस को अज़हरुद्दीन जैसे दागी क्रिकेटर (वे अभी भी पूरी तरह से पाक-साफ़ घोषित नहीं हुए हैं) की जरूरत क्यों आन पड़ी है? यह वही अज़हरुद्दीन हैं जो क्रिकेट से बाहर का दरवाजा दिखाये जाने और जेल जाने की नौबत आने के तुरन्त बाद प्रेस से मुखातिब होते हुए बोले थे कि “चूंकि वे अल्पसंख्यक हैं इसलिये उन्हें फ़ँसाया गया है…” हालांकि बाद में मीडिया के दबाव में उन्होंने वह कथन वापस ले लिया था, लेकिन उनकी “मानसिकता” तत्काल उजागर हो गई थी। एक बार एक इंटरव्यू में दाऊद इब्राहीम ने भी कहा है कि वे तो भारत में आत्मसमर्पण करना चाहते हैं लेकिन चूंकि भारत की न्याय व्यवस्था पर उन्हें यह भरोसा नहीं है कि उन्हें उचित न्याय(?) मिलेगा, इसलिये वे समर्पण नहीं करेंगे…। एक और छैला बाबू हैं सलमान खान, हिरण के शिकार के मामले में जब वे जोधपुर जेल जाने को हुए, उन्होंने भी तुरन्त मुसलमानों की सफ़ेद जाली वाली टोपी पहन ली थी… आखिर यह कैसी मानसिकता है और इन सभी के विचारों(?) में इतनी समानता कैसे है? जबकि यही वह देश है, जहाँ आज भी अफ़ज़ल गुरु मस्ती से चिकन चबा रहे हैं, आज भी अबू सलेम आराम से अपनी प्रेमिका से बतिया रहे हैं, आज भी धरती का बोझ अब्दुल करीम तेलगी महंगा इलाज ले रहा है, आज भी शहाबुद्दीन संसद में ठहाके लगा रहे हैं, आज भी सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर पर सेकुलर लोग “स्यापा” कर रहे हैं, और अब अज़हरुद्दीन भी हमारी छाती पर मूंग दलने आ पहुँचे हैं… ऐसे में इस महान देश से ज्यादा महफ़ूज़ ठिकाना कौन सा हो सकता है?

अज़हरुद्दीन के मामले पर सीबीआई अभी जाँच कर रही है, ऐसे में कहीं उनके कांग्रेस में शामिल होने की कोई गुप्त शर्त तो नहीं है? क्या इसका मतलब यह लगाया जाये कि कांग्रेस अबू सलेम को भी आज़मगढ़ से टिकट दे सकती है? सुप्रीम कोर्ट हाल ही में बेशर्म कांग्रेस को सीबीआई का दुरुपयोग करने हेतु सरेआम डाँट लगा चुकी है, लेकिन कोई असर नहीं। सीबीआई की विभिन्न रिपोर्टों में साफ़-साफ़ उल्लेख है कि अज़हरुद्दीन दाऊद के दो खास आदमियों अनीस इब्राहीम और अबू सलेम के सतत सम्पर्क में थे। शारजाह में होने वाले मैच खासतौर पर फ़िक्स किये जाते थे, क्योंकि वह इलाका भी दाऊद के लिये “घर” जैसा ही है। पाठकों को भारतीय क्रिकेट टीम के फ़िजियो डॉ अली ईरानी भी याद होंगे, वे गाहे-बगाहे मैचों के बीच में किसी न किसी बहाने मैदान के बीच पहुँच जाते थे और बतियाते रहते थे, आखिर ऐसा बार-बार क्यों होता था? सीबीआई की 162 पृष्ठों की एक रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि किस तरह से अंडरवर्ल्ड का पैसा अज़हरुद्दीन के मार्फ़त घूम-फ़िरकर माफ़िया के हाथों में वापस पहुँचता था। कुख्यात बुकी मुकेश गुप्ता और हांसी क्रोन्ये के बयानों से भी साबित हुआ था कि क्रिकेट मैच सट्टे और फ़िक्सिंग में दाऊद गैंग गले-गले तक सक्रिय है। अभी-अभी उत्तरप्रदेश के एक और डॉन बबलू श्रीवास्तव ने कहा है कि वे और अज़हरुद्दीन लगभग एक जैसे ही हैं, लेकिन अज़हरुद्दीन सिर्फ़ इसलिये जेल से बाहर हैं क्योंकि उनके दाऊद से मधुर सम्बन्ध हैं। इस बयान का बहुत गहरा मतलब है, आज की तारीख में अज़हरुद्दीन हैदराबाद के जिस पॉश इलाके बंजारा हिल्स में रहते हैं, वहाँ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है और मुम्बई पुलिस की एक खुफ़िया रिपोर्ट आने के बाद वहाँ “शार्प शूटर्स” की तैनाती भी की गई है, भला एक “पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी” को इतनी भारी-भरकम सुरक्षा व्यवस्था की क्या आवश्यकता है? हालांकि बबलू ने कहा है कि अज़हरुद्दीन को जान का कोई खतरा हो ही नहीं सकता, क्योंकि उनके सभी “भाई” लोगों से मधुर सम्बन्ध हैं। जब अबू सलेम पुर्तगाल में आज़ादी से घूमता था उस वक्त सीबीआई ने अज़हरुद्दीन को किये गये उसके कई फ़ोन कॉल्स ट्रेस किये थे (दिव्या चावला की रिपोर्ट देखें)।

कोई न कोई अन्दरूनी बात है जो कि अभी खुलकर सामने नहीं आ रही है और अब अज़हरुद्दीन के कांग्रेस में शामिल हो जाने के बाद ऐसा कुछ सामने आने की सम्भावना भी कम होती जा रही है। “जय हो…” के कॉपीराइट खरीदने की बजाय कांग्रेस 25-50 साफ़ छवि वाले उम्मीदवार ही खड़े कर दे तो शायद देश का कुछ भला हो…

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12 comments:

पंगेबाज said...

मेरे भाई आप कब ये सब उलटा सीधा लिखना बंद करोगे ? भारत की एक महान सेकुलर पार्टी को काहे बदनाम कर रहे हो ? वो तो अफ़जल औरकासिब को टिकट देकर पूर्ण भार्तीय बनाना चाह रही थी पर आप जैसे लोगो के कारण ये महान कार्य नही कर पा रही है पासवान जी इन दोनो को भारतीय नागरिकता दिलाने के लिये पिछले दिनो राष्ट्रपती तक से मिल चुके है इन सब महान लोगो के लिये भारत की काग्रेस पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले है खुले ही रहेंगे . क्या आप चाहते हो सारे लोग मुलायम या मायावती की पार्टी से ही जीत कर सेकुलर कहलाये .

neeshoo said...

ये राजनीतिक उठापटक मेरे बस की बात नहीं । बार -बार विचार धारा की बात आती हैं । सभी पार्टियां अपना चुनावी एजेंड़ा तय करती हैं । कि कैसे जनता को बर्गला सके । और अपनी जीत सुनिश्चित कर सके । राहुल ने जो कहा है क्या वो करने के लिए है क्या ? सब एक दूसरे के अपने हैं । जैसा मौका वैसी ताल बस । अब बाहुबली और इस तरह की महान हस्तियां नहीं आयेंघी तो भारत देश बर्बाद कैसे होगा। अच्छा तार जोड़ा आपने सुरेश भाई । होली मनाइये कुछ दिन मौज मस्ती करिये छोड़िये इन भेडियों को । शुभ होली

संजय बेंगाणी said...

वन्देमातरम गाये जाते समय जो आदमी मंच से उतर जाए उसे कॉंग्रेस का अध्यक्ष गाँधीजी ने बनवाया था. आज भी उसी परम्परा का निर्वहन हो रहा है.
भारत में क्रिकेट दुसरा धर्म है और धर्म से गद्दारी करने वाले को लोग वोट देते हैं तो कहना पड़ेगा हम से पतित कोई नहीं.

Manisha said...

आपकी कई बातों से सहमति के बावजूद कहना चाहूंगी कि सलमान खान के बारे में आपके विचार सही नहीं हैं। सलमान खान और उसके पिताजी सलींम खान सच्चे धर्मनिरपेक्ष भारतीय हैं। आप देखिये कितने ही फतवों और लानतों के बाद भी सलमान खान गणेश चतुर्थी अपने पूरे परिवार के साथ मनाता है और इस बार सलीम खान ने िस बारे में कहा था कि वो बहुसंख्यकों के साथ हैं। हमें इस तरह के राष्ट्रवादी मुस्लिमों को पूरा समर्थन देना चाहिये।

मैं काफी दिनों से ऐसे मुस्लिमों के ऊपर एक ब्लोग पोस्ट लिखना चाह रही थी, लेकिन अब मेरी इच्छा और आपसे आग्रह है कि आप अपने ब्ल़ॉग में ऐसे लोगों के बारे में लिखें। ऐसे कई लोग हैं।

मैं आपके लेख पढ़ती हूं और कई बार आपसे सहमत और कई बार असहमत रहती हूं, मैंने अपने चिठ्ठें पर आपके ब्लॉग को लिंक भी किया हुआ है।

मनीषा
हिंदीबात

HEY PRABHU YEH TERA PATH said...

आपको एवम आपके सपरिवार को हे प्रभु के पुरे परिवार, कि तरफ से भारतीय सस्कृति मे रचा- बसा, "होली" पर्व पर घणी ने घणी शुभकामनाऐ :)(: )(::

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

जिस पार्टी ने आजादी के पहले महान देशभक्त पैदा किए आज आजादी के साठ साल बाद वही पार्टी देशद्रोहियों की सबसे बड़ी शरणस्थली बन गयी है। इस पार्टी के रहते हम रसातल को पहुँचने वाले है। हत्‌भाग्य है देश का... :(

राज भाटिय़ा said...

जब घर मे ही ऎसे दुशमन बेठे हो तो दुशमनो की कया जरुरत, यह कुते है, अरे नही कुत्ता तो वफ़ा दार होता है, यह साले सारे सु्यर है,
आप का लेख आंखे खोलने वाला है,
धन्यवाद,

आपको और आपके परिवार को होली की रंग-बिरंगी ओर बहुत बधाई।बुरा न मानो होली है। होली है जी होली है

इंडियन said...

सुरेश भाई आपने इतना अच्छा विश्लेषण किया इन कांग्रेसी छिछोरों का, काश देश की जनता भी ये समझ सकती और इस देशद्रोही पार्टी को कूडेदान में डाल देती किंतु अफ़सोस ऐसा नही हो पा रहा है। ऐसा लगता है कि ये पार्टी इस देश का बेडा गर्क करके ही मानेगी, अच्छे लेख के लिए बहोत बधाइयां लेकिन ये तभी सार्थक होगा जब देश की जनता भी इसे समझे। फिलहाल आपको और आपके परिवार को होली की ढेरों बधाईयाँ।

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

होली कैसी हो..ली , जैसी भी हो..ली - हैप्पी होली !!!

होली की शुभकामनाओं सहित!!!

प्राइमरी का मास्टर
फतेहपुर

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

वारंट अभी मिला या नहीं??????????

jayram said...

suresh jee , ek blog dekhiyega jara http://swachchhsandesh.blogspot.com aur bataye ki kitna swachch sandesh hai inka ..............

Dr. Munish Raizada said...

बिलकुल ठीक कहा आपने, सुरेश जी! सलमान खान वैसे शायद नहीं जैसा आपने लिखा, लेकिन बाकी सारा विश्लेषण खरा है.
देखिये, जबतक सेकुलर देश में सामान सहिंता कानून लागू नहीं होगा, रिज़र्वेशन के नाम पर लोगों (हिन्दुओं) की बाटना बंद नहीं होगा, तब तक ऐसे ही खिलवाड़ चलता रहेगा. किसी भी देश को ले लीजिये, नागरिक अनुसाशन तथा कानून प्रिय पैदायशी नहीं होते, ठीक सिस्टम उन्हें ठीक सिस्टम में का एक हिस्सा बनाता है, लेकिन अपने भारत में तो डेमोक्रेसी के नाम पर मजाक ही चल रहा है.