Tuesday, January 13, 2009

सन् 2040 के प्रथम विश्व हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन की रिपोर्ट

World Hindi Blogger Summit year 2040

नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम से -
सन् 2001 से शुरु हुए हिन्दी ब्लॉगिंग का सफ़र आज एक नये मुकाम पर आ पहुँचा है। आज विश्व में हिन्दी ब्लॉगरों की संख्या दस लाख को पार कर गई है और इस गौरवशाली उपलब्धि के अवसर पर विश्व के तमाम नये-पुराने हिन्दी ब्लॉगरों द्वारा प्रथम हिन्दी विश्व ब्लॉगर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में किया है, ताकि हिन्दी को विश्व मंच पर मजबूती से स्थापित करने, विदेशों में बसे भारतीयों को “स्वभाषा” में एक पहचान बनाने में वर्षों से जिन लोगों ने अथक मेहनत की है उन्हें भी सम्मानित किया जा सके। नई पीढ़ी के लिये हिन्दी ब्लॉगिंग अब इतने वर्षों के बाद कोई नया शब्द नहीं रह गया है। आज की तारीख में जहाँ हिन्दी ब्लॉगरों की संख्या दस लाख हो गई है, वहीं दूसरी तरफ़ ब्लॉगवाणी, चिठ्ठाजगत, नारद आदि ने जो परम्परा शुरु की थी उसे आगे बढ़ाते हुए आज विश्व में लगभग 800 हिन्दी ब्लॉग एग्रीगेटर हैं, जो इन दस लाख चिठ्ठों को संकलित कर रहे हैं, साथ ही हिन्दी की ई-पत्रिकाओं की संख्या भी लगभग 3000 हो गई है। आईये हिन्दी ब्लॉग विश्व सम्मेलन और सम्मान समारोह के बारे मे विस्तार से जानें…

चूंकि इस प्रकार का विशाल आयोजन पहली बार ही किया जा रहा है, इसलिये आयोजन समिति ने तय किया है कि हिन्दी ब्लॉगिंग, हिन्दी भाषा को बढ़ावा देने, इंटरनेट पर हिन्दी के सतत प्रचार-प्रसार में वर्षों से लगे साधकों को “ब्लॉग-नोबल” का अति-प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया जाये। चूंकि ब्लॉगवाणी और चिठ्ठाजगत सबसे बड़े ब्लॉग संकलक के रूप में कार्यरत हैं एवं उनकी वार्षिक आय बीस लाख रुपये (1 रुपया=10 डॉलर) से ऊपर है इसलिये इस महा-आयोजन की “स्पांसरशिप” का जिम्मा इन दोनों ने उठा रखा है। आयोजन समिति के अध्यक्षद्वय यानी फ़रीदाबाद “सेज” के बड़े उद्योगपति “अरुण जी पंगेबाज” और “विपुल जैन” ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि यह विश्व भर में फ़ैले हिन्दी ब्लॉगरों को एक मंच पर लाने का एक महाप्रयास है। इन दोनों अध्यक्षों की सहायता के लिये अपेक्षाकृत युवा ब्लॉगरों जैसे सिरिल गुप्ता , कुश, और भुवनेश शर्मा आदि को विभिन्न जिम्मेदारियाँ सौंपी गईं हैं। पहले यह सोचा गया था कि शायद तालकटोरा स्टेडियम आयोजन के लिहाज से छोटा पड़ेगा, लेकिन चूंकि 8G मोबाईल तकनीक लगभग सभी ब्लॉगरों के पास है अतः इस का सीधा प्रसारण उनके मोबाईल पर ही दिखेगा और वहीं से वे सीधे अपने विचार आयोजन स्थल पर भेज सकेंगे। इस विशाल आयोजन हेतु विज्ञापन तथा मीडिया कंसल्टेंसी के समस्त अधिकार बेंगाणी बन्धुओं को सौंपे गये हैं, हालांकि वे अत्यधिक व्यस्त रहते हैं, लेकिन बचपन में ही पॉडकास्टिंग शुरु कर चुकी उनकी सुपुत्री ने इस जिम्मेदारी का निर्वहन बड़ी होशियारी से किया है। इसी प्रकार मंच संचालन, अतिथि सम्मान और प्रशस्ति-पत्र वाचन के लिये देश-विदेश में मशहूर सबसे बड़े मंच संचालक श्री संजय पटेल से आग्रह किया गया है। इस विशाल आयोजन के बारे में उन देशों में भी भारी उत्सुकता है जहाँ 8G तकनीक अभी नहीं पहुँच पाई है और वे अभी भी रेडियो पर ही निर्भर हैं। विविध भारती की शासकीय सेवा से VRS लेने के बाद चार-चार प्रायवेट एफ़एम चैनलों के मालिक श्री यूनुस खान को इस सम्मेलन के रेडियो अधिकार दिये गये हैं, ताकि वे अपनी मधुर आवाज़ में समूचे विश्व को इस सम्मेलन के बारे में अवगत करवा सकें, इसी प्रकार सम्मेलन के “फ़ुटेज चोरी” आदि की कॉपीराईट समस्या से निपटने के लिये भारत की प्रसिद्ध लॉ फ़र्म द्विवेदी एण्ड द्विवेदी असोसियेट्स सारे कानूनी मसले देखेगी। विशाल अनुभवों को देखते हुए, उम्र को दरकिनार कर, रेल मंत्रालय में पदस्थ “ओएसडी” श्री ज्ञानदत्त पाण्डेय के जिम्मे इस सम्मेलन की रेल परिवहन की व्यवस्था की गई है। जो वरिष्ठ हिन्दी ब्लॉगर बढ़ती उम्र की समस्याओं के कारण दिल्ली आने में असमर्थता व्यक्त कर रहे थे, उनके लिये पाण्डेय जी ने देश के 28 स्थानों से विशेष रेल सैलून चलाये हैं। इस अनूठे और पहले सम्मेलन की “प्रेस कवरेज (प्रिण्ट मीडिया)” के अधिकार विभिन्न राज्यों में अलग-अलग दिये गये। मध्यप्रदेश हेतु अनिल सौमित्र, राजस्थान के लिये अजीत वडनेरकर, छत्तीसगढ़, बिहार और उड़ीसा के लिये “मीडिया टायकून” अनिल पुसदकर को, उत्तरप्रदेश के अधिकार तीन समाचार पत्रों के मालिक संजीत त्रिपाठी, मुम्बई और गुजरात के लिये श्री शशि सिंह, दक्षिण भारतीय राज्यों हेतु प्रेस अधिकार शास्त्री जी, आदि को सौंपे गये हैं। इसी प्रकार इस सम्मेलन के प्रेस कवरेज के अन्तर्राष्ट्रीय अधिकार अमेरिका-कनाडा के लिये ई-स्वामी, यूरोप के लिये राज भाटिया और रजनीश मंगला को, पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों के लिये पूर्णिमा वर्मन तथा दक्षिण-पूर्व एशिया व ऑस्ट्रेलिया के लिये मीडिया अधिकार श्रद्धा जैन को दिये गये हैं।

पुरस्कारों की दो श्रेणियाँ रखी गई हैं, वयोवृद्ध हिन्दी-ब्लॉग सेनानियों को “ब्लॉग नोबल” और उनसे कम उम्र के बुजुर्गों को ब्लॉग-रत्न, ब्लॉग-भूषण आदि। सम्मेलन का शुभारम्भ, लगातार दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री बने श्री नरेन्द्र मोदी ने दीप प्रज्जवलित करके किया। अपने प्रायवेट चार्टर प्लेन द्वारा कनाडा से सीधे आयोजन स्थल पर पहुँचे वयोवृद्ध हिन्दी ब्लॉगर श्री समीर लाल उर्फ़ उड़नतश्तरी ने कार्यक्रम में आये सभी अतिथियों का भावभीना स्वागत किया। अपनी लगभग 27 करोड़ “शुभकामना” टिप्पणियों के लिये रिकॉर्ड बना चुके समीर लाल जी ने यादों में खोते हुए युवाओं को बताया कि 2005-06 के दौरान जब कोई भी ब्लॉग लिखना शुरु करता था वे तत्काल टिप्पणी करके उसका हौसला बढ़ाते थे, फ़िर तो यह उनका जुनून ही बन गया और नये-नये चिठ्ठाकारों का सतत टिप्पणियाँ करके उत्साह बढ़ाना उनका प्रमुख कार्य बन गया। सम्मेलन का अगला सत्र आपसी विचार-विमर्श का था, जिसमें आपसी सहमति और मोबाइल वोटिंग से सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अगले साल यानी सन् 2041 से उपरोक्त सभी पुरस्कार प्रतिवर्ष दिये जायेंगे, ताकि अभी जो हिन्दी विश्व के 80 देशों में बोली जाती है, वह बढ़कर 120 देशों तक पहुँचे। जेएनयू के भूतपूर्व कुलपति और भारतीय ज्ञान आयोग के सदस्य श्री मसिजीवी ने बताया कि उनके दोनो पोते भी विदेश में रहने के बावजूद उनसे हिन्दी में ही चैटिंग करते हैं।

फ़िर शुरु हुआ पुरस्कारों का सिलसिला… सर्वप्रथम हिन्दी चिठ्ठा नोबल पुरस्कार की घोषणा की गई, चूंकि यह पुरस्कारों का पहला ही वर्ष है, इसलिये तय किया गया था कि सभी वरिष्ठतम चिठ्ठाकारों और हिन्दी सेवकों को नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा… बरहा के जनक वासु, मैथिली गुप्त, आलोक कुमार, विनय जैन, रमण कौल, मितुल पटेल, रवि रतलामी, उन्मुक्त जी, अनूप शुक्ला, देबाशीष, जीतेन्द्र चौधरी, विनय छजलानी, सी-डैक के श्री हरिराम जी को उनके अतुलनीय योगदान के लिये ब्लॉग नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया… अनुनाद सिंह, श्रीश शर्मा, सागर नाहर, तरुण, आशीष खण्डेलवाल, कुन्नू सिंह को तकनीकी ब्लॉग भूषण, आलोक पुराणिक, शिवकुमार मिश्रा को हास्य ब्लॉग भूषण प्रदान किया गया। अपने नाती-पोतों के साथ पधारी घुघूती बासूती जी तथा सरिता अरगरे, मनीषा, सुनीता शानू को महिलाओं में हिन्दी ब्लॉग को लोकप्रिय बनाने के लिये “ब्लॉग-वीरांगना” नामक एक विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया… इसी प्रकार ब्लॉग को पत्रकारिता का विकल्प बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले संजय तिवारी को “ब्लॉग रत्न” से विभूषित किया गया। इस अवसर पर दीपक भारतदीप, मिहिरभोज, महाशक्ति और चन्दन चौहान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा “लाइफ़टाइम अचीवमेंट” पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

गत वर्ष अर्थात सन् 2039 में 74 वर्ष की आयु में सुरेश चिपलूनकर जी स्वर्गवास हुआ था, आजीवन कांग्रेस और “सेकुलरिज़्म” के खिलाफ़ लिखने के कारण उन्हें दो बार जेलयात्रा भी करनी पड़ी थी, उन्हीं की स्मृति में इस वर्ष से एक गोल्ड मेडल देने का निर्णय किया गया है। कार्यक्रम के अन्त में नाईजीरिया और न्यूजीलैण्ड से आये दस वर्षीय दो हिन्दी ब्लॉगर बच्चों को वर्ष के सर्वश्रेष्ठ उभरते ब्लॉगर का “स्वर्गीय सुरेश चिपलूनकर स्मृति” गोल्ड मेडल दिया गया।

इस तरह एक सफ़लतम आयोजन सम्पन्न हुआ और विश्व में हिन्दी की धाक और मजबूत हुई। इसी के साथ गत 100 वर्षों से भारत से बाहर रह रहे भारतवासियों का अपनी भाषा के प्रति मोह और भी उभरकर सामने आया।
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नोट : मेरे ब्लॉगिंग के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लिखे गये इस लेख को सभी इष्ट मित्रों और स्नेहियों के प्रति शुभकामना के तौर पर लिया जाये, यह अनुरोध करता हूँ। किसी ने कहा है कि 1) यदि “हाथी” पकड़ने की कोशिश करोगे तो “कुत्ता” पकड़ पाओगे, लेकिन यदि “कुत्ता” पकड़ने का टारगेट रखा तो “चूहा” भी नहीं मिलेगा…। किसी ने तो यह भी कहा है कि 2) सपना वह नहीं होता जो सोते समय देखा जाता है, “सपना” वह होता है जो सोने न दे…

बहरहाल, ब्लॉगर सम्मेलन की यह “रिपोर्ट” आपको कैसी लगी, अवश्य बताईयेगा। ऊपर उल्लेखित सभी मित्रों का मेरे जैसे “खसके” हुए “ठरकी” ब्लॉगर को लगातार दो साल तक (और आगे भी) झेलने की क्षमता रखने पर पुनः धन्यवाद… जय हिन्दी, जय सशक्त भारत…

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44 comments:

संजय बेंगाणी said...

अब इस उम्र में न खाँसा जाता है, न हँसा जाता है. 60 को पार गया. शुक्र है मेरी स्वचालित टिप्पणी प्रणाली अभी भी काम करती है, तो रोज के एक लाख चिट्ठों पर टिप्पणी कर पाता हूँ.

भई पढ़ कर आनन्द आया. बस स्मृति पुरस्कार वाली बात नहीं जमी. आप अपने हाथों से पुरस्कृत करेंगे....


मोदी वाली बात पर कईयों को करंट लगा होगा :)

पंकज बेंगाणी said...

मजा आ गया महाराज. थकी हुई खोपडी रीचार्ज हो गई.

सबको लपेट लिए हो... बस हमे ब्लाग रत्न नहीं दिया. अरे भाई मै तो कम ही लिखता हूँ , तो कुछ काम का तो हुँ नही इसलिए एकदम उपयुक्त भी था.. हे हे.. चलो अब लाइफ टाइम अचीवमेंट ही दे देना आगे.


बढिया प्रयास बहुत शानदार.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

ओहो हमारा तो नाम ही गायब हो गया यहाँ तक आते आते ..:) चलो हमने हिन्दी ब्लागिंग में भविष्य जान लिया अपना अच्छा हुआ :) बढ़िया है जी.. वैसे कल्पना बढ़िया है यह .सोचने में क्या जाता है :)

SHASHI SINGH said...

ओठों पर हंसी और आंखों में आंसू आ गये। आमीन!!!


पुरस्कारों की एक श्रेणी "स्मृति पुरस्कार" पर आपत्ति है। उसे निरस्त किया जाये। बाकी पूरा आयोजन अदभूत रहा।

Alok Nandan said...

ब्लॉग नाबेल वाला मामला जरा ठीक नहीं है, नाबेल की जगह पर कुछ और होना चाहिये...अब पता नहीं क्या। यह पुरस्कार से नाबेल से भी भारी है....वैसे कभी-कभी स्थापित प्रतीकों का इस्तेमाल जरूरी हो जाता है। लगता है कुछ धड़फड़ी में लिखी गई है...इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने ब्लॉगरों को संबोंधित करते हुये क्या कहा गया नहीं बताया गया है, खैर कोई बात नहीं...मैं पतरातू की एक गुफा में बैठकर इस पूरे कार्यक्रम को अपने मोबाईल पर लाइव देख रहा था...हालांकि कैमरा टीम वाले ठीक से काम नहीं कर रहे थे...और गुफा में बैठे रहने के कारण प्रसारण भी ठीक से नहीं मिल रहा था...वैसे साऊंड क्लीयर आ रहा था....पुरस्कार पाने सभी लोगों को मेरी और से हार्दिक बधाई...और ब्लाग पर पूरा रिर्पोट नहीं लिखने के कारण, रिर्पोटर को तीन तक की-बोर्ड से दूर करने की मांग पूरे ब्लॉग जगत में उठ रही है। एक अडियल और सड़ियल ब्लॉगर ने यहां तक कहा है, चाहे यह ब्लॉग लिखने वाला जागते हुये सपने देखकर कितना भी मचले, किसी भी कीमत पर तीन दिन तक इस ब्लागर की उंगलियां को की-बोर्ड नसीब नहीं होने चालिये...जियो हजारों साल,साल के दिन हो पचास हजार....सारे सपने जमीन पर उतर जाये.......फिर शायद तारों के साथ अच्छी नींद आएगी..फिर शायद तारों के साथ अच्छी नींद आएगी.. फिर शायद तारों के साथ अच्छी नींद आएगी......

Sachin said...

सुरेश जी, आप वाकई देशभक्त और मातृभाषा भक्त हैं। आपने इस पोस्ट में अपने को स्वर्गवासी क्यों लिखा। भगवान ने चाहा तो आप दीर्घजीवी होंगे और अगले कई दशकों तक देश और मातृभाषा की सेवा करते रहेंगे। २०४० के कई दशकों बाद भी....।

दीपक भारतदीप said...

मित्रवर यह क्या? आपने हमें कहां आकाश से उठाकर जमीन पर फैंक दिया। अरे, जनाब तब हम भी आपके साथ आकाश में खड़े होकर यह माजरा देखकर आनंद उठायेंगे। वाकई आपको बहुत दूर की सूझी। वैसे संभव है कि आप हों ऐसी कामना है-हमारा न होना तो तय है- और हमारे नाम पर कोई पुरस्कार या ट्राफी दूसरों को प्रदान करें पर फिर भी हमारे लिखने पर कोई पुरस्कार जरूर दीजियेगा। दो वर्ष सफलता पूर्वक पूर्ण करने पर लिखा गया यह व्यंग्य बहुत जोरदार रहा। दोनों के लिये हार्दिक बधाई
दीपक भारतदीप

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

पसंद आया !!

PD said...

अजी भारत में कोई सम्मेलन हो और उसमें विरोध प्रकट करने कोई ना जाये ये भला कैसे संभव है? तो आगे का नजारा हम आपको दिखाये देते हैं.. बाहर बड़ा सा पंडाल लगा हुआ है(कितने लोग वहां हैं ये ना पुछियेगा.. :)).. और भूख हड़ताल पर पीडी बैठे हुये हैं(अब समीर जी को यहां भी बैठाना ठीक नहीं है ना, वो तो अंदर हैं :D).. कुछ तख्तियों पर रोमण भाषा में हिंदी के कुछ नारे लिखे हुये हैं.. जैसे

"NAHI CHALEGI-NAHI CHALEGI..
TANASHAHI NAHI CHALEGI"

"HINDI CHITTHAJAGAT KISKA?
HAMARA, APAKA, ISAKA, USAKA.."

आखिर विरोध पर क्यों ना बैठें? हम भी तो आपको दो साल तक झेलें हैं.. और हमारा कहीं नाम भी नहीं.. :(

आपको एक नये रूप में देखना भी अच्छा लगा.. ढ़ेर सारी शुभकामनायें.. :)

Arvind Mishra said...

वाह क्या फंतासी है ! सभी शत्नजीवी हों !

कविता वाचक्नवी said...
This comment has been removed by the author.
कविता वाचक्नवी said...

कल्पना की कैसे सुन्दर उड़ान आपने भरी, कि सब कुछ यथार्थ-सा लगने लगा। कितना सुन्दर स्वप्न था!
परन्तु यह ७४ वर्षीय स्व का कालातीत होना हजम नहीं हो रहा। इस किरकिरी को निकाल दें तो अजब रंग की फंतासी है।

चन्दन चौहान said...

मेरे लिये क्या हूक्म हैं

Sanjeet Tripathi said...

जबरदस्त!
वैसे एक बात तो है बॉस!॰

'प्रभु' का ऐसा मिज़ाज़ 'सुनील' को ज्यादा पसंद आता है,बनिस्बत हमेशा एंग्रीयंगमैन बने रहने के। ;)

हे हे।

दिल खुश कर दिया आपने, अभी प्रेस में काम धाम निपटा के पढ़ा ये। सारी थकान दूर और अपन रिचार्ज!

Shastri said...

वाह सुरेश, वाह !! आज तो मजा आ गया! हां "खबर" में एक दो तकनीकी गलतियां हो गई हैं.

1. सुरेश चिप्लूनकर के स्वर्गवासी होने की खबर दर असल सन 2060 की है जो गलती से "टाईम मशीन" द्वारा 2040 में किसी ने देख लिया और इसे 2040 का समझ कर छाप दिया. अत: इस भाग को सन 2060 की खबर समझ कर पढा जाये.

2. हिन्दी ईपत्रिकाओं की असली संख्या सन 2040 में 3000 नहीं 30,000 है.

3. कुछ महत्वपूर्ण चिट्ठाकार इस सम्मेलन में मौजूद थे, लेकिन आपके संपादक ने जगह की कमी के कारण उनके नाम आखिरी क्षण इस खबर से निकाल दिये. कृपया इस लेख की एक दूसरी किश्त जरूर दें जिस में ये छूटे हुए नाम शामिल करके हिन्दी जगत के समर्पित चिट्ठाकारों को आदर दिया जा सके.

इस प्रयोगवादी आलेख के लिये बहुत बहुत बधाई!!

सस्नेह -- शास्त्री

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

चिपलूनकर जी खुद शहीद होने का आनंद उठा रहे हैं ये गलत बात है। कलम अपने हाथ में होने का अर्थ ये नहीं कि वे दूसरों के साथ अन्याय करें। भाई, इस में जो लोग आए उनमें जीवितों के साथ साथ कुछ के भूत भी जरूर ही होंगे। इस बीच हिन्दी ब्लागिंग में जो नए लोग आ कर शीर्ष पर पहुंच रहे होंगे वे सब नदारद हैं। कुछ स्थान उन के लिए भी होना चाहिए था। सब से अधिक नाइंसाफी मोदी जी के साथ की है आप ने। यदि उन्हें 2030 के बाद तक प्रधानमंत्री बनने के लिए इंतजार करना पड़ा तो फिर हो चुका देश का कल्याण। इस बीच देश की बागडोर कौन संभालेगा? हाँ ये द्विवेदी एंड द्विवेदी ऐसोसिएटेस् का दूसरा द्विवेदी कौन है? यह रहस्य जरूर बता दें जिस से फर्म जल्दी शुरु की जाए। मेरा इकलौता बेटा तो सोप्टवेयर बनाने की तैयारी में है। बाकी खूब लिखा है। आनंद आया। हाँ स्टेट्स यदि अभिषेक ओझा से ऑडिट करवा ली होती तो शास्त्री जी को गलती निकालने का मौका नहीं मिलता।

Manisha said...

बहुत अच्छा
कल्पना की उड़ान अच्छी रही।

मनीषा

amit jain said...

वाह सुरेश साहब आप की भविष्य द्रष्टा की भूमिका ने एक अलग ही मजा दिया है , मेरे दुआ है की आप का ये सपना न सिर्फ़ सच हो , बल्कि इस मे आप भी सक्रीय रूप से किसी डंडे के सहारे ही समाहरोह मे पुरुस्कार वितरण करे
किर्पया कभी http://wwwdarddilka.blogspot.com/ पर भी दस्तक दे /शायद उस समारोह मे हमे आप दर्शक के रूप मे आने की इजाजत दे दे

विवेक सिंह said...

अति सुन्दर कल्पना की है साहब आपने ! आप 174 वर्ष तक ब्लॉगिंग करते रहें ! आभार !

वाकई मज़ा आगया !

Udan Tashtari said...

अरे भई, हम क्या उतनी दूर से सिर्फ भाषण देने आयेंगे वो भी उस उम्र में-कोई पुरुस्कार हमारे लिए भी तो हो :) और आप कहाँ चले-अमां आने का मकसद ही आपके साथ जाम टकराना रहेगा. चल दिये तो बड़ी नाइंसाफी कहलायेगी.

बहुत बधाई-ऐसे ही बरस दर बरस माहौल बनाये रहें, अनेक शुभकामनाऐं.

अनूप शुक्ल said...

धांसू उड़ान है। सुरेश चिपलूनकर की मरने की खबर गलत है। जनता की बेहत मांग पर उनको दुबारा क्यूट सा बनाकर वापस भेजा गया और वे ही इस आयोजन के देखभाल का काम कर रहे हैं। इनाम अब चूंकि बन गया सो बंटेगा उन्हीं के नाम से लेकिन स्वर्गीय की जगह चिरंजीव लिखा जायेगा-बस्स।
ऐसे ही लिखते रहें और मस्त रहें।

नितिन व्यास said...

उम्र और ब्लोगिंग के शतक पूरें करे यही प्रार्थना!

Tarun said...

दो साल पूरे होने पर ७०-७४ साल तक की सोचना, कमाल है। दो साल पूरे होने पर बधाई, ऐसे ही धारदार लिखते रहें यही कामना है। आपकी कृपा से बूढ़ापे तक पहुँचते पहुँचते अपने को भी कुछ मिल जायेगा ऐसी उम्मीद बँधाने के लिये पुनः शुक्रिया ;)

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

तालकटोरा में एक सीट अभी से बुक कराता हूँ। तबतक तो मैं भी सरकारी नौकरी से रिटायर होकर आराम से ब्लॉगिंग कर रहा होऊंगा। नाती-पोते भी साथ लाऊंगा।:)

आपका आशावादी लेखन हमें नयी ऊर्जा और प्रेरणा देता है। आपका सारस्वत अभियान चिरंजीवी हो। हार्दिक शुभकामनाएं।

mahashakti said...

बढि़या प्रस्‍तुति है।

हमें "लाईफ टाईम अचीवमेंट" मजा आ गया, हम सठियाये तो नही रहेगे किन्‍तु 54 वर्ष के जरूर हो जायेगे।

90 वर्षीय युवा प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी से यह पुरस्‍कार प्राप्‍त करना भी सुखद होगा।

जब 90 वर्षीय मोदी युवा रहेगे तो आप भी चिरयुवा की श्रेणी में आ जायेगे। आपका पुरस्‍कार कैसिंल, किसी अन्‍य को स्‍थानन्‍तरित कर दे। :)

COMMON MAN said...

kuchh varshon me yah sapna saakar ho jaayega

Irshad said...

आपका ये कितना अच्छा प्रयास है ये बताने की जररूत नहीं है। बहुत सुन्दर लेखन और कल्पनाशक्ति का जो प्रयोग आपने किया है वो अभिनव है। लेकिन गन्दगी मलने की क्या जरूरत थी। हिन्दी ब्लॉगिंग को घटिया और स्वार्थपरक राजनीति से अगर दूर ही रखा जाए तो कितना अच्छा हो। आप एक सम्मानित ब्लॉगर माने जाते है। मेरी तरह से बहुत बहुत शुभकामनाएं।

Irshad said...

आपका ये कितना अच्छा प्रयास है ये बताने की जररूत नहीं है। बहुत सुन्दर लेखन और कल्पनाशक्ति का जो प्रयोग आपने किया है वो अभिनव है। लेकिन गन्दगी मलने की क्या जरूरत थी। हिन्दी ब्लॉगिंग को घटिया और स्वार्थपरक राजनीति से अगर दूर ही रखा जाए तो कितना अच्छा हो। आप एक सम्मानित ब्लॉगर माने जाते है। मेरी तरह से बहुत बहुत शुभकामनाएं।

'Yuva' said...

आपकी रचनाधर्मिता का कायल हूँ. कभी हमारे सामूहिक प्रयास 'युवा' को भी देखें और अपनी प्रतिक्रिया देकर हमें प्रोत्साहित करें !!

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

२०४० का पहला सत्र स्वर्गीय ब्लोगोरो को याद करने के लिए रखा जाएगा . जिसमें स्व. धीरू सिंह को भी याद किया जाएगा .

विनय said...

मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

-----नयी प्रविष्टि
आपके ब्लॉग का अपना SMS चैनल बनायें
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

सागर नाहर said...

हमारी मांग है कि, इस कार्यक्रम में समीरलालजी और संजयबैंगानीजी को स्वचलित टिप्पणीयंत्र बनाने के लिये विशेष पुरस्कार दिया जाना चाहिये।
बहुत ही मजेदार लेख, कई बातें गुददुदा गई। चिट्ठाकारी में दो साल पूरे करने पर हार्दिक बधाई। भगवान करे सन् 2060 में होने वाले इस कार्यक्रम का जीवंत प्रसारण इस चिट्ठे पर मेरे पड़पोते जरूर देखें।

सुमन्त मिश्र ‘कात्यायन’ said...

स्वर्गीय? तब तक तो जन्नतनशीं शब्द रूढ़ हो चुका होगा !

Dev said...

आपको लोहडी और मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ....

Tara Chandra Gupta "MEDIA GURU" said...

bhai bura mat manna kali ka avard kise gaye . :)

hem pandey said...

मजेदार लेख. साधुवाद.

रौशन said...

क्या प्रथम हिन्दी ब्लोगर सम्मलेन के लिए 2040 तक इंतज़ार करना होगा?
2009 की शुरुआत के 5500 हिन्दी ब्लोगर 2040 तक सिर्फ़ 10 लाख ही हो पायेंगे?
इतनी निराशा क्यों सुरेश जी?

Dr Prabhat Tandon said...

बहुत खूब , खुद को ही शहीद भी कर लिया और किनारे पर बैठ कर लहरों का मजा भी लेते रहे :)

Zakir Ali Rajnish (TSALIIM) said...

मजेदार पोस्‍ट। काशा, उस दिन भी ऐसा ही हो।

अजित वडनेरकर said...

बहुत देर से पहुंचे हैं। हमारी गाड़ी काफी लेट चल रही है...मज़ेदार...

कुन्नू सिंह said...

देर आए गूरूस्त आए

मजा आ गया 2039 :)

सबको बढीया बढीया पूरस्कार मीला है।

मूझे ब्लाग भूषण के जगह "शूद्ध हिन्दी वर्तनी" का पूरस्कार देतें तो बहुत मजा आता।

उन्मुक्त said...

दो साल पूरे होने पर बधाई।
अरे वाह, नोबल पुरुस्कार मैं धन्य हुआ।
माफ कIजियेगा कुछ देर से आना हुआ।

दिलीप कवठेकर said...

वाह, मज़ा आ गया.

भैय्याजी, म्हारे भी कदी काम जेओ नी...

कईं करनों हे २०४० में? गाना बजाना तो करी लांगा, ब्लोगरोन के लिये.

अविनाश वाचस्पति said...

13 जनवरी की गाड़ी में अजित वडनेरकर भाई जी मैं भी 26 जनवरी को ही चढ़ पाया हूं क्‍योंकि 24 जनवरी को गिरफ्तार कर लिए जाने के बाद गणतंत्र दिवस के अवसर पर एकमात्र गिरफ्तार ब्‍लॉग कैदी की रिहाई पोस्‍टों की नियमितता के आधार पर की गई है, सो छूट कर आया हूं और सबसे पहले यहीं पर टिपियाया हूं।
और हिन्‍दी ब्‍लॉगों की संख्‍या करोड़ों में दिखलायें। मैं तब नब्‍बे वर्ष का हो चुका होऊंगा और कैसा लगूंगा इस बारे में तो राजीव तनेजा जी बेहतर बतला पायेंगे। हो सकता है वे कोई चित्र भी दिखला दें, मेरा तब का।
वैसे तब हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग बोल कर की जा सकेगी और टाइप करने की जहमत नहीं उठानी पड़ेगी तथा टिप्‍पणियां करने के लिए एक से एक बेहतर साफ्टवेयर उपलब्‍ध होंगे। जिस पर मैथिली जी और सिरिल जी कार्य कर रहे हैं और इसके काफी नजदीक पहुंच चुके हैं।
सुंदर मन भावन विवरण। बेहतर परिकल्‍पना। सच होगा जो आज है सपना।