Tuesday, January 6, 2009

“ठण्डे खून वालों का वक्ती उबाल” बैठ चुका है, अगले बम विस्फ़ोट के इन्तज़ार में हैं हम…

India Pakistan War, Terrorism, Nuclear Power

मुम्बई हमले और बम विस्फ़ोटों को लगभग डेढ़ माह होने को आया, जैसी की पूरी सम्भावना थी कि भारत के नेताओं से कुछ नहीं होने वाला और इस देश के मिजाज़ को समझने वाले अधिकतर लोग आशंकित थे कि पाकिस्तान के खिलाफ़ गुस्से का यह वक्ती जोश बहुत जल्दी ठण्डा पड़ जायेगा, ठीक वैसा ही हुआ… 40 आतंकवादियों की लिस्ट से शुरु करके धीरे से 20 पर आ गये, फ़िर “सैम अंकल” के कहने पर सिर्फ़ एक लखवी पर आ गये और अब तो अमेरिका की शह पर पाकिस्तान खुलेआम कह रहा है कि किसी को भारत को सौंपने का सवाल ही नहीं है… तमाम विद्वान सलाहें दे रहे हैं कि भले ही युद्ध न लड़ा जाये, लेकिन कुछ तो ऐसे कदम उठाना चाहिये कि दुनिया को लगे कि हम पाकिस्तान के खिलाफ़ गम्भीर हैं, कुछ तो ऐसा करें कि जिससे विश्व जनमत को लगे कि हम आतंकवाद के जनक, आतंकवाद के गढ़ को खत्म करने के लिये कटिबद्ध हैं। इसकी बजाय सोनिया जी के सिपहसालार क्या कर रहे हैं देखिये… एक मंत्री कहते हैं कि पाकिस्तान को “मोस्ट फ़ेवर्ड नेशन” (MFN) का दर्जा जारी रहेगा (यानी जब भी भारत की जनता बम विस्फ़ोट से मरना चाहेगी, बांग्लादेश से पहले पाकिस्तान “मोस्ट फ़ेवर्ड” देश होगा), पूर्व गृहमंत्री पाटिल साहब अभी भी “उसी पुराने चोले” में हैं, वे फ़रमाते हैं, “अफ़ज़ल गुरु को फ़ाँसी देने की इतनी जल्दी क्या है?” (अभी उसे भारत की छाती पर और मूँग दलने दो), हमारे नये-नवेले गृहमंत्री अमेरिका की यात्रा पर जा रहे हैं, वहाँ पर वे अमेरिका को पाकिस्तान के खिलाफ़ सबूत देंगे (इज़राइल ने कभी भी हमास के खिलाफ़ की सबूत नहीं दिया, न ही अमेरिका ने अफ़गानिस्तान-इराक के खिलाफ़ कोई सबूत दिया), “पपू” प्रधानमंत्री (ना, ना, ना…“पप्पू” नहीं, बल्कि परम पूज्य) कहते हैं कि “पाकिस्तान को हम बताना चाहते हैं कि आतंकवाद को समाप्त करने के लिये हम किसी भी हद तक जा सकते हैं…” (यानी कि अफ़ज़ल गुरु को माफ़ करने की हद तक भी जा सकते हैं), “भारत के सभी विकल्प खुले हैं…” (यानी कि पिछवाड़े में दुम दबाकर बैठ जाने का विकल्प)।

उधर पुंछ में मेंढर के जंगलों में जैश के आतंकवादियों ने पक्के कंक्रीट के बंकर बना लिये हैं और महीनों की सामग्री जमा कर ली है, हमारे सुरक्षाबल कह रहे हैं कि “स्थानीय” मदद के बिना यह सम्भव नहीं है (यही बात मुम्बई हमले के वक्त भी कही गई थी), लेकिन कांग्रेस पहले आतंकवादियों की पार्टी (पीडीपी) के साथ सत्ता की मलाई चख रही थी, अब “नाकारा” नेशनल कांफ़्रेंस के साथ मजे मार रही है, लेकिन पाकिस्तानियों की हमारे देश में आवाजाही लगातार जारी है। सोच-सोचकर हैरत होती है कि वे लोग कितने मूर्ख होंगे जो यह सोचते हैं कि पाकिस्तान कभी भारत का दोस्त भी बन सकता है। जिस देश का विभाजन/गठन ही धार्मिक आधार पर हुआ, जिसके मदरसों में कट्टर इस्लामिक शिक्षा दी जाती हो, जो देश भारत के हाथों चार-चार बार पिट चुका हो, जिसके दो टुकड़े हमने किये हों… क्या ऐसा देश कभी हमारा दोस्त हो सकता है? एक बार दोनों जर्मनी एकत्रित हो सकते हैं, दोनो कोरिया आपस में दोस्त बन सकते हैं, लेकिन हमारे हाथों से पिटा हुआ एक मुस्लिम देश कभी भी मूर्तिपूजकों के देश का दोस्त नहीं बन सकता, लेकिन इतनी सी बात भी उच्च स्तर पर बैठे लोगों को समझ में नहीं आती?… तरस आता है…

अब तो लगने लगा है कि वाजपेयी जी ने पोखरण परमाणु विस्फ़ोट करके बहुत बड़ी गलती कर दी थी… कैसे? बताता हूँ… ज़रा सोचिये यदि वाजपेयी पोखरण-2 का परीक्षण ना करते और घोषित रूप से परमाणु बम होने की गर्जना ना करते, तो पाकिस्तान जो कि पोखरण के बाद पगलाये हुए साँड की तरह किसी भी तरह से परमाणु शक्ति बनने को तिलमिला रहा था, वह भी खुलेआम परमाणु शक्ति न बनता… “खुलेआम” कहने का मतलब यह है कि यह समूचा विश्व जानता है कि पाकिस्तान का परमाणु बम “चोरी” का है, यह बात भी सभी जानते हैं कि न सिर्फ़ पाकिस्तान, बल्कि ईरान और उत्तर कोरिया जैसे कई देश परमाणु बम शक्ति सम्पन्न हैं, लेकिन “अघोषित” रूप से… ऐसे में यदि न हम परमाणु बम की घोषणा करते, न ही हमारा नकलची पड़ोसी देखादेखी में परमाणु बम बनाता, तब स्थिति यह थी कि “बँधी मुठ्ठी लाख की खुल गई तो फ़िर खाक की…” लेकिन दोनों पार्टियों ने सारे विश्व को बता दिया कि “हाँ हमारे पास परमाणु बम है…”। अब होता यह है कि जब भी भारत, “पाकिस्तान को धोने के मूड” में आता है, सारा विश्व और सारे विश्व के साथ-साथ भारत में भी काफ़ी लोग इस बात से आशंकित हो जाते हैं कि कहीं “परमाणु युद्ध” न छिड़ जाये… इसलिये शान्ति बनाये रखो… पाकिस्तान जैसा गिरा हुआ देश भी परमाणु बम की धमकी देकर अमेरिका और बाकी देशों को इस बात के लिये राजी कर लेता है कि वे “भारत को समझायें…” रही बात भारत की तो वह तो “समझने” को तैयार ही बैठा रहता है, और कुल मिलाकर सेनाओं को सीमाओं तक ले जाकर बासी कढ़ी का उबाल थोड़े समय में ठण्डा पड़ जाता है, और ऐसा दो बार हो चुका है… जबकि उधर देखिये इज़राइल भले ही जानता हो कि ईरान एक “अघोषित” परमाणु शक्ति है, लेकिन चूँकि हमास या फ़िलीस्तीन के पक्ष में वह इस हद तक नहीं जा सकता, सो जब मर्जी होती है इज़राइल हमास पर टूट पड़ता है…

चलो माना कि किसी को पता नहीं है कि आखिर पाकिस्तान में “परमाणु बटन” पर किसका कंट्रोल है, या यह भी नहीं पता कि पाकिस्तान से कितने परमाणु बम आतंकवादियों के हाथ में पहुँच सकते हैं, या आतंकवादियों की पहुँच में हैं… सो हम युद्ध करने का खतरा मोल नहीं ले सकते… लेकिन पाकिस्तान से सम्बन्ध तो खत्म कर सकते हैं, उसके पेट पर लात तो मार सकते हैं (जो लोग इस बात के समर्थक हैं कि “आर्थिक रूप से मजबूत पाकिस्तान”, भारत का दोस्त बन सकता है, वे भी भारी मुगालते में हैं), पाकिस्तान की आर्थिक नाकेबन्दी करें, उसके साथ सभी सम्बन्ध खत्म करें, उसके नकली राजदूत (जो कि आईएसआई का एजेंट होने की पूरी सम्भावना है) को देश से निकाल बाहर करें, पाकिस्तान के साथ आयात-निर्यात खत्म करें, उधर से आने वाले कलाकारों, खिलाड़ियों पर प्रतिबन्ध लगायें, पाकिस्तान आने-जाने वाली तमाम हवाई उड़ानों को भारत के ऊपर से उड़ने की अनुमति रद्द की जाये… सिर्फ़ एक छोटा सा उदाहरण देखें – यदि पाकिस्तान एयरलाइंस की सभी उड़ानों को भारत के उड़ान क्षेत्र से न उड़ने दिया जाये तो क्या होगा… पाकिस्तान से दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैण्ड आदि देशों को जाने वाले विमानों को कितना बड़ा चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा, पाकिस्तान से बांग्लादेश या श्रीलंका जाने वाले विमानों को कहाँ-कहाँ से घूमकर जाना पड़ेगा… पाकिस्तान का कितना नुकसान होगा, कश्मीर घाटी में नदियों और पानी पर हमारा नियन्त्रण है, हम जब चाहें पाकिस्तान को सूखा या बाढ़ दे सकते हैं, देना चाहिये… इस सम्बन्ध में अन्तर्राष्ट्रीय नियम-कानूनों की दुहाई दी जायेगी, लेकिन यदि वाकई “महाशक्ति” बन के दिखाना है तो भारत को नुकसान दे सकने वाले नियम-कानून नहीं मानने चाहिये, अमेरिका या चीन कौन से सारे अन्तर्राष्ट्रीय कानून मानते हैं? संक्षेप में यह कि जब तक हम ही विश्व को यह संकेत नहीं देंगे कि पाकिस्तान एक “खुजली वाला कुत्ता” है और जो भी उससे सम्बन्ध रखेगा, वह हमसे मधुर सम्बन्ध की आशा न रखे… बस एक संकेत भर की देर है, पाकिस्तान पर ऐसा भारी दबाव बनेगा कि उसे सम्भालना मुश्किल हो जायेगा… लेकिन कांग्रेस हो या भाजपा दोनों से ऐसी उम्मीद करना बेकार है, वाजपेयी ने मुशर्रफ़ का लाल कालीन बिछाकर स्वागत किया था, आडवाणी जिन्ना की मज़ार पर हो आये, तो कांग्रेस इज़राईल की आलोचना कर रही है… और फ़िलीस्तीन जैसे “सड़ल्ले देश” को दिल्ली की बेशकीमती जमीन पर दूतावास खोलने दिया जा रहा है… दूसरी तरफ़ “मोमबत्ती ब्रिगेड” भी “हैप्पी न्यू ईयर” की खुमारी में खो चुकी है… हमारे विदेश मंत्रालय के अधिकारी इतने पढ़े-लिखे हैं फ़िर भी यह बात क्यों नहीं समझते कि अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति-कूटनीति में कोई भी “स्थायी दोस्त या दुश्मन” नहीं होता, न वहाँ भावनाओं का कोई महत्व है, न ही किये गये वादों का… बस अपने देश का फ़ायदा किसमें है सिर्फ़ यह देखा जाता है… ये छोटी सी बात समझाने के लिये क्या आसमान से देवता आयेंगे? “नकली सेकुलरिज़्म” और “थकेले” नेताओं ने इस देश को कहीं का नहीं छोड़ा…


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29 comments:

संजय बेंगाणी said...

करना चाहें तो बहुत कुछ हो सकता है, बिना युद्ध के ही घूटने टिकवा दें. मगर जितने भारत विरोधी पाकिस्तान में है, उससे ज्यादा पाकिस्तान समर्थक भारत में है. अतः लाचारी से देखते रहो. कभी तो वह सुबह आएगी.

SHASHI SINGH said...

चिरकुटई की भी ससुरी हद होती है। अभी तो पाकिस्तान जैसे खुजली वाले कुत्ते और बांग्लादेश जैसे छछूंदर से ही परेशान थे। भाई सा'ब अब तो नेपाल भी आस्तीन का सांप हो गया है। देखा नहीं कैसे पंडा को भेज के कैसे डंडा कर दिया?

पंगेबाज said...

अरे आप फ़िर से ऋणात्मक उर्जा दिखाने लगे . अभी तो पाठ पढे दो दिन भी नही हुये इत्ती जल्दी भूल गये ? कम से दो चार दिन तो मोमबत्ती जलाकर मित्रता कैसे बढाये पर लिखते. जल्द ही आप पर ही तोहमत लगने वाली है मित्रो की कि आप के लेख पढकर ही पाकिस्तान के लोगो को हिंन्दुस्तान (अरे रे रे माफ़ कीजीयेगा मै नान सेकुलर शब्द कह गया था .इस पर तो शायद पाबंदी लगी है वकील साहब ? )इंडिया मे बम धमाके मजबूरन करने पड रहे है वरना वो लोग तो कतई शांति प्रिय धनात्मक उर्जा से परि पूर्ण लोग है :)

Suresh Chandra Gupta said...

यह तो होना ही था. जिस सरकार में अंतुले, लालू, पासवान, शकील (और न जाने ऐसे कितने) हों उसे पाकिस्तान का कोई राजनीतिबाज भी अपनी सरकार में शामिल कर लेना चाहिए. मुशर्रफ़ की नौकरी चली गई है. वह भाषण देकर कुछ पैसे कमाने भारत आ रहा है उसे भारत का ग्रह मंत्री बना देना चाहिए.

कुश said...

उर्जा! उर्जा! उर्जा!

काश ये लेख वो भी पढ़ले जिन्हे पढ़ना चाहिए.. इस लेख के लिए आपकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है..

संजीव कुमार सिन्हा said...

संप्रग ने सत्‍तासीन होते ही आतंकवाद के प्रति अपने नरम रूख का परिचय दे दिया जब उन्‍होंने आतंकवाद विरोधी कानून पोटा को वापस ले लिया। इस सरकार ने देशवासियों के जीने का लो‍कतांत्रिक अधिकार छीन लिया हैं।

Alok Nandan said...

अक्षरश सहमत

Amit said...

बहुत बढ़िया ..बहुत ही कम शब्दों में आपने बहुत बात कह दी....काश ये लेख वो लोग पढ़ पाते जिनसे हमें आस है की वो कुछ कर सकेंगे...

अभिषेक ओझा said...

सब कुछ सच कहा है आपने... अब नहीं लगता आपसे कभी असहमति होगी. लेकिन जिनकी आँखे खुलनी चाहिए उनकी खुले तो कुछ फायदा हो.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

बिल्कुल सही कहते है आप . हमारे यहाँ एक कहावत है सोने वाले को तो जगाया जा सकता है लेकिन सोने का नाटक करने वाले को नही . हम हमारे नेता सब आँख बंद करे हुए है पता नही कौन से समय का इंतज़ार कर रहे है हम लोग

P.N. Subramanian said...

संजय बेंगानी जी के राग में साथ देते हुए हम भी यही सोचते हैं "वो सुबह कभी तो आएगी"

शाश्‍वत शेखर ’जमाल’ said...

आपकी एक एक बात सत्य है, सबसे जादा गुस्सा तो मुझे मोमबत्ती वालों पर आ रहा है| नेताओं से तो पहले से ही कोई उम्मीद नही थी|

राज भाटिय़ा said...

संजय जी की बात से १००% सहमत है, अब काग्रेसी उस परवेज को भारत मै ला कर भारत के शहीदो का अपमान करने की कोई कसर नही छोडना चाहती, जो वीर जवान कार्गिल मै शहीद हुये ओर इसी कुत्ते के कारण.
्सुरेश जी धन्यवाद

sareetha said...

आपको आराम की सख्त ज़रुरत है । कुछ दिन किसी पहाडी इलाके की सैर पर हो आइए । क्श्मीर मत जाइएगा ,वरना वहां से लौटकर फ़िर कोई धमाकेदार पोस्ट लिखेंगे और हम जैसे बचे खुचे लोगों का भी दिमाग खराब कर देंगे । हिमाचल और उत्तराखंड में फ़िलहाल शांति है जल्दी हो आइए । इतना गुस्सा अपनी और अपने हितचिंतकों की सेहत के लिए ठीक नहीं । द्विवेदीजी की भाषा में कहें तो नकारात्मक ऊर्जा को ना तो समेटें ना ही फ़ैलाएं । इस लिए ओम शांति ,शांति ,शांति.......!

प्रकाश बादल said...

आम आदमी को जागना होगा वर्ना नेता नहीं मानने वाले ये तो बेपैंदे लोटे है कहीं भी लुढ़क जाते है कभी अमेरिका की गोद में तो कभी किसी और देश की गोद में और उधर आतंकवाती किसी और हमले का षड़्यंत्र रच डालते है। नेताओं का क्या उनकी बला से कुछ भी हो। लेकिन हमें देश को आतंकवाद के शिकंजे से छुड़ाना होगा।

सुमन्त मिश्र ‘कात्यायन’ said...

साधो रे ये मुर्दों का गाँव...........और इस कब्रिस्तान के रखवाले हजारों करोड़ विदेशों में जमा किये हुये हैं,जब देश रुपी कब्रिस्तान को संभालने का नाटक फेल होंने लगेगा,विदेश भाग जाऎगे। इनके चारण भाट जब कोई और रास्ता नहीं दिखेगा तो धर्म बदल लेंगे (जब शादी करनें के लिए बदल सकते हैं तो जीवन और सत्ता के लिए तो तर्क संगत ही कहा जाएगा) और फिर राज करनें लगेंगे। जो हिन्दू बनें रहते हुए यहाँ रहना चाहेंगे ‘जिज़या’ दे कर रह सकेंगे। रही श्री मनमोहन सिंह जी की बात तो जो उनमें ‘महाराजा रणजीतसिंह’ की छवि देख रहे हैं वह धोखा खाँएगे और पी०चिदम्बरं मे ‘सरदार’ की छवि कोई पिनक मे रह कर देखना चाहे तो उसका कोई इलाज नही है। फिर भी जनता को सच्चाई बतानें का जो कार्य आप कर रहे हैं,वह प्रशंसनीय है।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

हमेशा की तरह आपकी बातों से शत-प्रतिशत सहमति है। जय हिन्द।

भारत के वर्तमान नेता कायर, भ्रष्ट, बौद्धिक दिवालिया, और देशद्रोही ज्याद होते जा रहे हैं। इन्हें एक साथ पूरा बदल देने में भलाई है।

सच्ची पोस्ट।

Nitish Raj said...

काफी अच्छा लेख लिखा है आपने। साथ ही सबसे बड़ी बात ये लगती है कि क्यों भारत को हर बात मनवाने के लिए अमेरिका का मुंह देखना पड़ता है। आज भी जब भी बुश का दिल करता है एक दो मिसाइल आतंकवाद के नाम पर पाकिस्तान पर दाग देता है उसकी बला से कोई मरे। तो हम क्यों अपने देश की सुरक्षा के बारे में दूसरों का मुंह देखें। हमें खुद कड़े कदम उठाने होंगे चाहे वो पाक से रिश्ता तोड़ने की बात ही क्यों ना हो। और जो भी इसका विरोध करेगा उनको पाकिस्तान का रुख करना होगा। ये हम हिंदुस्तानियों का फरमान और पैगाम है विभीषणों के लिए।

Tarun said...

ये पप्पू कांट डांस, पाकिस्तान ने सारे एपिसोड का मजाक बनाकर रख दिया। लातों के भूतों को बातों से बहलाने से कुछ नही होता, चंद वोटों ने वॉट लगा कर रख दी है देश की।

विवेक सिंह said...

करने वाले तो बहुत कुछ कर दें . वहाँ नहीं तो यहाँ कर दें . स्कोप तो यहाँ भी बहुत है . बल्कि वहाँ से ज्यादा है . पर करना कौन चाहता है ?

COMMON MAN said...

साले, हरामी (मुझे माफ करें यह शब्द मैं प्रयोग करना नहीं चाहता था)मुर्दों से क्या उम्मीद होगी.अगर ऐसा न होता तो जयचन्द यहीं पैदा क्यों होता.

safat alam said...

मैं कहता हूं कि पाकिस्तानी आतंकवादों ने मानवता का तो खून किया ही है उसके साथ साथ उन्होंने भारत के मुसलमानों की शबीह भी खराब कर दी है। इससे हानि भारत के मुसलमानों को ज्यादा हो रही है क्योकि हर व्यक्ति लश्करे तैबा के समान ही भारत के मुसलमानों को समझने लगा है हालाँकि ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। हम सब भारती है और भारत के लिए एक दूसरे को सहयोग दें तथा देते रहें।

इंडियन said...

साहस भइया साहस की ज़रूरत है जो हमारे दोगले नेताओं में नही है । अक्सर कहा जाता है कि "पॉलिटिकल विल" की आवश्यकता होती है। अब कांग्रेस जैसे किसी दल से जिसके सरपरस्त ही ख़ुद मुसलमान हों उनसे इस प्रकार की ढिलाई के अलावा और क्या उम्मीद कर सकते हैं आप ? रही सही कसर इनके सहयोगी दल पूरी कर देते हैं जिसमें लालू , मुलायम, शिबू सोरेन जैसे चोर नेता शामिल हैं, और ये ख़ुद कौनसे चोर से कम हैं । हमारे शहीदों की शहादत को जाया करने में पी एच डी की है हमारे नेताओं ने। चार चार जूते इनको सरे आम लगा के बाहर कर दिया जाना चाहिए इन बदमाशो को। अभी कारगिल और मुंबई को भूले भी नही थे हम लोग और फ़िर असम में विस्फोट हो गए है और तो और मेंधर में फ़िर कारगिल जैसी हिमाकत कर दी है पकिस्तान ने और हमारे नीरो टाइप नेता चैन की बंसी बजाने से बाज़ नही आ रहे हैं।

ab inconvenienti said...
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ab inconvenienti said...
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ab inconvenienti said...

सो हम युद्ध करने का खतरा मोल नहीं ले सकते… लेकिन पाकिस्तान से सम्बन्ध तो खत्म कर सकते हैं, उसके पेट पर लात तो मार सकते हैं

मुश्किल है, देश के सभी दलों में चीन, दाऊद और सीआइए के एजेंट घुस चुके हैं, देर हो चुकी है. आपको मालूम होगा की सन बन्नावे के मुंबई बम कांड के बाद दाऊद इब्राहीम और उसके परिवार को कौन भारत से सुरक्षित निकाल ले गया था.... माननीय कृषि/क्रिकेट मंत्री शरद पावर इब्राहीम/मेमन परिवार को अपने साथ विमान में देश से निकाल ले गए थे. आज १७ साल बाद तो हर पार्टी में पवार जैसे लोग है, और नौकरशाही व सेना/बीएसफ तक में आइएसआई का नेटवर्क है.

पाकिस्तान का कितना नुकसान होगा, कश्मीर घाटी में नदियों और पानी पर हमारा नियन्त्रण है, हम जब चाहें पाकिस्तान को सूखा या बाढ़ दे सकते हैं, देना चाहिये…

हमारे पास सतलुज, सिन्धु, ज़न्स्कार, सुरु जैसी नदियों को रोकने के कुछ विकल्प हो सकते हैं. पर हमने यहाँ कुछ कड़ा कदम उठाया तो पाकिस्तान का सगा बाप चीन ब्रह्मपुत्र और नेपाल कोसी कार्ड खेल सकते हैं. इससे भारत का भी काफी नुकसान होगा. और अमेरिका कोई मदद नहीं करने वाला, रूस से भी सम्बन्ध साधारण ही हैं. यह आत्मघाती कदम होगा . बल्कि किसी भी तरह पाकिस्तान को आर्थिक और कूटनीतिक रूप से हलाकान रखें तो ही कुछ लाभ है. जैसे की उसके प्रमुख निर्यातों पर से भारत ड्यूटी हटा ले या खुफिया एजेंसियों को पाकिस्तान अंदरूनी रूप से अस्थिर करने का आदेश दें.
सांस्कृतिक बहिष्कार और वायुमार्ग छीनना भी एक बढ़िया विकल्प हैं. लेकिन पाकिस्तानी गुर्गे हमारे सिस्टम को डोप जो कर चुके हैं........दाऊद की दी हुई पगार पर पलने वाले नेता नौकरशाह एनजीओस और कम्यूनिस्ट कुछ होने दे तब न! उसने इन्हे फिट ही इसीलिए किया है.

Meenu khare said...

बहुत बढ़िया ..बहुत ही कम शब्दों में आपने बहुत बात कह दी....अक्षरश सहमत. जय हिन्द।

Vinay Choudhary said...

मैने उपरोक्त सभी लोगों की टिप्पणीयां देखी, सभी के अपने-अपने विचार देखे, किसी ने सराहना की है किसी ने उपहास, पर किसी भी कवि के विचारों की आलोचना नही करनी चाहिये। कोइ समर्थक है तो कोइ आलोचक। कोइ अहिंसावादी है तो कोइ हिंसावादी, पर इन सब समस्याओं का समाधान टिप्पणीओं से सुलझने वाला है? नही ।।।।
हमे एक जुट होकर आतंकवाद को खत्म करना है(आतंकवादी को नही)।
क्यों कि बंद मुट्ठी मे ही शक्ती होती है, खुली मुट्ठी मे नही। एकता सबसे बडी शक्ती है। हम लोग जब आपस मे ही लड रहे हैं तो दुसरे देश के खिलाफ कैसे लड सकते हैं, मैने कयी ऐसे परिवारों को आपस मे लडते देखा है जो चन्द रुपयों कि खातिर अपने भाइ तक का खूँन करने को तैयार है, और किसी को अपने पडोसियों की प्रगति पर जलन होती है, छि!! सुन कर भी दु:ख होता है, कोइ इतनी गंदी हद तक भी जा सकता है क्या? किसी दुसरे के प्रगति देखने के वजाय अगर वो अपनी प्रगति के बारे मी सोचे तो देश का कितना भला हो सकता है, पर नही हमे इससे क्या सभी अपने लिये जीतें हैं , आखिर ऐसा क्युँ? जब हमारे देश मे ही धर्मो कि अवहेलना की जा रही है तो दुसरा देश इसका फायदा तो उठायेगा ही, ऐसा पहले भी अंग्रेजों ने किया था, आपसी फूट डालकर, पर आज भी तो ऐसा हो रहा है, कहीं धर्म के नाम पे दंगे होते हैं तो कही जातिवाद के नाम पर। पहले अपने आप को बदलो फिर इस देश को बदलने कि सोचो। अगर आप बदलेंगे तो ए युग बदलेगा, अगर आप सुधरेंगे तो युग सुधरेगा।।।
और रहा सवाल पाकिस्तान का तो हमारे सब्र का इम्तिहान ले रहा है, जब ए सब्र टुट गया ना, तो धरती माँ की कसम कोइ नही बचा सकता है उसे। हम उसके नापाक इरादों को कामयाब नही होने देंगें। उसके मंसुबे को नस्तोनाबुत कर देंगें। हम सब इस भारत माँता के सिपाही हैं।
और ए कोइ हिंदु,मुस्लिम,सिक्ख या इसाइ नही बोल रहा ए एक पक्का हिन्दूस्तनी बोल रहा है जिसमे इस देश के उपर जान नेव्छावर कर देंने का जज्बा है, और मै सभी भारतीयों से यह आसा करता हुं कि उनके अंदर भी यही जज्बा हो, और वो हमारे देश के उपर बढने वाले सभी गंदे हाथों को जड से उखाड फेकें ।
"जय हिंद जय भारत"
---विनय चौधरी---

ravindra kumar jha said...

sarita ji apni soch badaliye...lekhak ji bahut achhi bat likhi aapne..jay bharat