Friday, January 9, 2009

ब्लॉगरों के लिये एक अनोखी दवा का फ़ॉर्मूला…

आवश्यक सामग्री

सच्चाई के फ़ूल - 50 ग्राम
ईमानदारी के पत्ते – 300 तोला
मिलनसारिता के आंवले – 100 ग्राम
संगठन का दूध - 30 माशा
वाणी की मिठास - 200 ग्राम
परोपकार की जड़ - 30 ग्राम
सत्संग का जल – आवश्यकतानुसार
शान्तिप्रियता की छाल - 5 तोला
स्वदेश प्रेम का रस - आधा लीटर

बनाने की विधि
ऊपर बताई हुई आवश्यक सामग्री को मिलाकर परमात्मा रूपी तपेले में भक्ति का शुद्ध घी डालकर प्रेम के चूल्हे पर ध्यान रूपी अग्नि जलायें एवं अच्छी तरह पक जाने पर ठण्डा करके शुद्ध मन के पवित्र कपड़े से छानकर मस्तिष्क रूपी शीशी में रखे।

सेवन की विधि
इस दवा को रोज प्रातः सन्तोष रूपी गुलकन्द के साथ इंसाफ़ रूपी चम्मच से 13 ग्राम प्रतिदिन सेवन करें।

परहेज
क्रोध की मिर्च, अहंकार का तेल, लोभ का पापड़, धोखे का नमक एवं दुराचार के अचार से बचें।

विशेष
दवा सेवन के बाद कुछ समय नैतिकता रूपी दूध पिये और स्वाध्याय (अध्ययन) करें, निश्चित लाभ मिलेगा।

इस दवा के नियमित सेवन से आपका लेखन सुधरेगा एवं ब्लॉग पर हिट्स की संख्या में बढ़ोतरी होगी। स्वाद और पसन्द के अनुसार सामग्री में थोड़ा सा हेरफ़ेर किया जा सकता है, लेकिन परिणाम अन्ततः सुखद ही रहेगा…

निर्माता एवं कॉपीराईट - वैद्य पण्डित हिन्दीप्रेम ब्लॉगाचार्य
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टीप - चेन मेल पर आधारित…

32 comments:

कुश said...

इसकी एक्स्पायरी डेट क्या है???

:)

Suresh Chiplunkar said...

कुश भाई, यह एक आयुर्वेदिक दवा है… कोई एक्सपायरी डेट नहीं, बल्कि जितने अधिक समय तक मस्तिष्क की शीशी में रखी रहेगी और सेवन की जायेगी फ़ायदा उतना ही ज्यादा होगा… :) :)

रंजना [रंजू भाटिया] said...

:) अच्छा है यह

Udan Tashtari said...

आधी से ज्यादा सामग्री तो अब बाजार में आती ही नहीं....कौन पंसारी के यहाँ मिलेगी बिना मिलावट-वो एड्रेस भी तो दो.

लगती तो उम्दा दवाई है.

बात वैसी ही है जैसे संजीवनी बूटी खाने की कोई सलाह दे और यह न बता पाये कि मिलेगी कहाँ. :)

Amit said...

बहुत सही..अच्छी दवा है..........

mahashakti said...

अच्‍छा फार्मूला है,

विवेक सिंह said...

मतलब आपने पहले से ही सभी बिलागरों की बीमार समझ रखा है :)

संजय बेंगाणी said...

आयूर्वेद की दवा धीरे धीरे असर करती है. देखें हम पर कब असर करती है. आप एक शीशी भिजवा ही दें :) समीरलालजी खूद बनाने के चक्कर में पंसारी खोज रहे है.

जोरदार, मजेदार लिखा है.

sareetha said...

ये जडियां तो मिल जाएंगी लेकिन अनुपात बनाना ज़रा टेढी खीर है । कौन झंझट पाले ...? आसाराम और रामदेव बाबा की तरह आप भी ब्लाग पर स्टाल गगा लीजिए इस चूरन - चटनी का ...। नाम भी होगा और दाम भी मिलेंगे । बोनस में राज्य सभा या लोकसभा का टिकट पक्का ।

jayram said...

bahut achchha bhai, blogeron ko aise hi kisi waidya ki jarurat thi lagta ilaaj ho jayega......

COMMON MAN said...

एक फ्रेंचाईजी मिलेगी क्या?

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

सुरेश जी, दवा बनाते अगर नाप-तौल मे कमी रह गई तो कहीं लेने के देने ना पड जाऎँ.
अब आप ही बना दो जी, बस पैसे बोलो कितने लोगे.

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

जब आपने पहले से ही सभी ब्लोगेरों को बीमार समझ रखा है.....तो एक सैम्पल वाला पाउच भिजवा दें / पसंद आने पर , और फायदा समझ आने पर अगला आर्डर पक्का!!

वैसे नए नवेले हम जैसों के लिए है यह होनी चाहिए अमृत समान!!

अभिषेक ओझा said...

निर्माता का पुरा पता भी दे दीजिये और कीमत भी बताइये :-)

PD said...

यह तो शराब जैसी कुछ लग रही है.. जैसा चिपलूनकर जी ने बताया है कि समय के साथ यह और बढ़िया हो जाती है.. अरे भाई.. कोई मत पीना इसे.. यह कोई साजिश है.. :)

विष्णु बैरागी said...

इन्‍स्‍टण्‍ट और रेडीमेड के इस समय में आपका आशावाद प्रणम्‍य है कि लोग आपके नुस्‍खे का सामान जुटाएंगे भी और बनाएंगे भी।
लगता है, आपने इसका भरपूर स्‍टाक कर रखा है और इस तरह डिमाण्‍ड क्रिएट कर रहे हैं ताकि बाद में मनमाने दाम वसूल किए जा सकें।
अपनेवालो का ध्‍यान रखिएगा।

सुमन्त मिश्र ‘कात्यायन’ said...

मुझे इस दवा पर गहरी आपत्ति है। इस दवा में हृदय,मन,बुद्धि,भावना,आस्था और मानव तन की मिलावट है। इसमें मानव अंगों की मिलावट है,यह स्वतः सिद्ध है। यह दवा अवैज्ञानिक ही नहीं राष्ट्र्वाद का वायरस फैलानें वाली है और विज्ञानाधारित डार्विनवाद,फ्रायड़्वाद,मार्क्सवाद,साम्यवाद,लेनिनवाद,माओवाद,नक्सलवाद और प्रचंण्ड पाथ जो बड़ी मुश्किल से जड़ें जमा पाया है उसके खिलाफ एक षड़यन्त्र है। हमारे सभी ज़ेबी संगठन इसका पुरजोर विरोध करेंगे।

अनूप शुक्ल said...

कित्ती बिकी अब तक!

Satyajeetprakash said...

यह तो एक्सिम यानि स्वयं सिद्ध है, इसे थेओरेम समझकर इसमे माथा पच्ची करने की जरुरत नहीं है, बल्कि इसे उपयोग में लाने की जरुरत है.

RDS said...

सुरेश भाई !

बहुत कठिन है ! बहुत दुर्लभ !!

लगता है यह विधि किसी कालपात्र को खोद निकालने से मिली है ! अब न तो वे बगीचे रहे कि आवश्यक सामग्री जुटाई जा सके और न ही ऐसे बावर्ची जो इस कालातीत व्यंजन को पका सके !!

हमारे मालियों ने ही वे बगीचे उजाड़ दिया ! हाँ, कहीं कहीं किचन गार्डन में आप जैसों ने इन औषधीय पौधों को सहेज रखा हो तो कुछ संभावना बनती है |

फिर भी आपने सप्रयास इस विधि को प्रस्तुत किया , अच्छा लगा ! लगा जैसे बरसों पहले खोया हुआ सुखसागर ग्रन्थ मिल गया हो | बांचें या न बांचें , धूल तो साफ कर ही लेंगे | फिर अगली पीढी का जिम्मा कि वो भी गाहे बगाहे धूल झटकारती रहे |

शुक्रिया फिर एक बार !!

राज भाटिय़ा said...

चलिये वेद्ध जी हम अभी लाते है यहा सारा समान ओर जुट जाते है इसे बनाने मै, ओर अगले लेख से शुरु.
धन्यवाद इस सुंदर ओर सस्ती दवा बताने के लिये

Sanjeet Tripathi said...

देखो जी,
सच्चाई के फूल सिर्फ़ हमारी बगिया में खिलते है जो हम किसी को देने वाले नई है।
और जब सच्चाई के फूल नई देंगे तो अपनी बगिया से इमानदारी के पत्ते भी देने से रहे अपन।
;)
संगठन हम सिर्फ़ इसलिए ही तैयार रखते है कि कोई हमारी बगिया से ये सब चुरा न सके।
वाणी की मिठास हम सिर्फ़ अपनों के लिए रखते हैं।;)

परोपकार हम सिर्फ़ उन्ही के साथ करते हैं जो हमारे साथ करें। ;)
मतलब यह कि जब अपन फूल-पत्ते नईं दे रहे तो जड़ ही काहे देंगे जी।;)
सत्संग का जल मतलब कि हमारे अपने 'कॉकस' का ही पीने का ;)
शान्तिप्रियता की छाल तभी जब तक कोई हमारी छाल न उतारे।

बस एकई चीज है जो हम सबको बांटने को रेडी हैं जी
वो है स्वदेश प्रेम का रस, मिल-बांट के इस रश को पिया जाए, ज्यादा से ज्यादा पिया जाए।

शेष शुभ है प्रभु!

Anil Pendse अनिल पेंडसे said...

मानो या मत मानो पर इस पोस्‍ट के पहले से मन में एक सवाल था
भाई! आप किस चक्‍की का आटा खाते हो?
पर तब तक तो बाजार में दवाई का फार्मुला ही आ गया।

सुरेश जी बहुत खुब, मजेदार

safat alam said...

बहुत अच्छा लेख पेश किया आपने सुरेश भाई बहुत बहुत धन्यवाद. दिल की गहराई से।

safat alam said...

बहुत अच्छा लेख पेश किया आपने सुरेश भाई बहुत बहुत धन्यवाद. दिल की गहराई से।

महेंद्र मिश्रा said...

ब्लागरो के लिए बढ़िया दावा ईजाद की है . डाक्टर सब ठण्ड के दिनों में ब्लागिंग में मंदी आ गई है . ब्लॉगर लोग ठण्ड में पल्ली ओडे पड़े है . क्या यह दवा ब्लागरो के लिए ठण्ड में असरदार रहेगी जिससे ब्लागरो की ठंडी दूर हो और पल्ली छोड़ कर जल्दी जल्दी ब्लागिंग कर सके .
बहुत ही मजेदार व्यंग्यात्मक पोस्ट . धन्यवाद.

मिहिरभोज said...

लो हमने तो पी ली

Bahadur Patel said...

bahut achchhi dava hai bhai.
dhanywaad.

bhoothnath(नहीं भाई राजीव थेपडा) said...

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amit jain said...

आपकी इस दवा को बनने के बाद पिया , सम्पुर्ण रूप से तृप्ति हो गई है , धन्यवाद इस अलोकिक दवा की जानकारी के लिए

कीर्ति राणा said...

blog se judne ki shuruat hai. abhi to samajh hi raha hu. isme bhi mere sathi tarun sharma sahyog kar rahe hain.
kirti rana.

शारदा अरोरा said...

किसी को दवा , किसी को साजिश , किसी को मुश्किल लगती है ; मुझको तो ये जीने की कला लगती है |