Tuesday, November 4, 2008

“मुगलिस्तान” और “लाल गलियारा” मिलकर तोड़ेंगे भारत को… (भाग-1)

Mugalistan and Red Corridor – Threat to Indian Security

गत दिनों असम में हुए उपद्रव और दंगों के दौरान भीड़ द्वारा सरेआम पाकिस्तानी झंडे लहराने की घटनायें हुईं। एक पाकिस्तानी झंडा तो 2-3 दिनों तक एक लैम्प पोस्ट पर लहराता दिखाई दिया था, जिसकी तस्वीरें नेट पर प्रसारित भी हुई थीं। असम के कांग्रेसी मुख्यमंत्री ने हमेशा की तरह कांग्रेसी (यानी नकली सेकुलर) तरीके से देश को बताने की कोशिश की, कि यह कोई खास बात नहीं है। उसी के बाद असम में भीषण बम-विस्फ़ोट हुए और कई लोग मारे गये। बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण असम, त्रिपुरा और मेघालय के कई इलाकों में स्थिति गम्भीर से भी ज्यादा खतरनाक हो चुकी है, असम अब कश्मीर की राह पर चल पड़ा है, लेकिन जब भी इस प्रकार के कोई आँकड़े पेश करके सिद्ध करने की कोशिश की जाती है तत्काल मामले को या तो “संघी एजेण्डा” कहकर या फ़िर हल्के-फ़ुल्के तौर पर लेकर दबाने की कोशिश तेज हो जाती है, और अब कुछ मूर्ख तो “हिन्दू आतंकवादी” नाम की अवधारणा भी लेकर आ गये हैं। ओसामा बिन लादेन के एक वीडियो में कश्मीर के साथ असम का भी विशेष उल्लेख है (देखें यह समाचार), लेकिन भारत की सरकार, असम की कांग्रेस सरकार और पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार खतरनाक नींद और मुगालते में खोई हुई है इसके प्रमाण लगातार हमें मिलते रहते हैं। विगत 5 साल से “मुगलिस्तान” नाम की नई देशद्रोही अवधारणा मूर्तरूप लेती जा रही है, फ़िर भी सभी राजनैतिक पार्टियाँ गहरी निद्रा में तल्लीन हैं। इस “मुगलिस्तान” की अवधारणा पाकिस्तान की ISI और बांग्लादेश की इस्लामी सरकार ने मिलकर तैयार की है। इस विस्तृत अवधारणा को ओसामा बिन लादेन का फ़िलहाल नैतिक समर्थन हासिल है, तथा दाऊद इब्राहिम जो कि पाकिस्तान के आकाओं की दया पर वहाँ डेरा डाले हुए है उसका आर्थिक और शारीरिक समर्थन मिला हुआ है। विभिन्न वेबसाईटों पर अलग-अलग लेखकों ने इस कथित “मुगलिस्तान” के बारे लिखा हुआ है। जिसमें से (मुख्य वेबसाईट यह है) यह आँकड़े किसी “धर्म-विशेष” के खिलाफ़ नहीं हैं, बल्कि देश पर मंडरा रहे खतरे को सबके सामने रखने की एक कोशिश भर है। “नकली कांग्रेसी सेकुलरों” को तो इन आँकड़ों से कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला, लेकिन जो भी देशप्रेमी और हिन्दू हित की बात करने वाले लोग हैं उन्हें समय रहते जाग जाना होगा, वरना…।
यह एक ऐतिहासिक तथ्य और सत्य है कि जिस भी क्षेत्र, इलाके या देश विशेष में मुस्लिमों की आबादी बहुसंख्यक हुई है या पहले से रही है, वहाँ अन्य धर्मों को पनपने का कोई मौका नहीं होता। इसका सबसे बड़ा सबूत तो यही है कि भारत में गरीबों की सेवा के नाम पर ढिंढोरा पीटने वाली मिशनरी संस्थायें किसी इस्लामी देश में तो बहुत दूर की बात है, भारत में ही उन इलाकों में “सेवा”(???) करने नहीं जातीं, जिन जिलों या मोहल्ले में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मुस्लिम पिछड़े, गरीब और अशिक्षित नहीं हैं? और उन्हें मिशनरी सेवा की जरूरत नहीं है?… बिलकुल है, और सेवा करना भी चाहिये, मुस्लिम बस्तियों में विभिन्न शिक्षा प्रकल्प चलाने चाहिये, लेकिन इससे मिशनरी का “असली” मकसद हल नहीं होता, फ़िर भला वे मुस्लिम बहुल इलाकों में सेवा क्यों करने लगीं। हिन्दू-दलित आदिवासियों को बरगलाना आसान होता है, क्योंकि जहाँ हिन्दू बहुसंख्यक होता है वहाँ धार्मिक स्वतंत्रता होती है, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता होती है, लोकतन्त्र होता है… लेकिन जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक होता है वहाँ…………… तो इस बात को अलग से साबित करने की आवश्यकता नहीं है कि, धीरे-धीरे जनसंख्या बढ़ाकर और बांग्लादेश के रास्ते घुसपैठ बढ़ाकर भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से में मुस्लिम बहुल जिले बढ़ते जा रहे हैं तब देश के सामने क्या चुनौतियाँ हैं।



गत कुछ सालों से एक नाम हवा में तैर रहा है “मुगलिस्तान” यानी मुसलमानों के लिये एक अलग “गृहदेश”। जैसा कि पहले कहा इस (Concept) अवधारणा को अमलीजामा पहनाने का बीड़ा उठाया है पाकिस्तान की ISI ने। इस अवधारणा के अनुसार भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से, पश्चिम बंगाल (जहाँ पहले ही कई जगह मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक हो चुकी है) को पाकिस्तान से मिलाना, ताकि पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक एक “मुगलिस्तान” बनाया जा सके। इस काम में ISI वामपंथियों, माओवादियों और नक्सलवादियों के बीच प्रसारित “लाल गलियारा” की मदद भी लेने वाली है। जैसा कि सभी जानते हैं कि आंध्रप्रदेश के उत्तरी इलाके, मध्यप्रदेश के दक्षिण-पूर्वी कुछ जिले, समूचा छत्तीसगढ़, आधा उड़ीसा, लगभग आधा झारखण्ड तथा दक्षिणी बिहार के बहुत सारे जिलों में माओवादियों और नक्सलवादियों ने अपना अघोषित साम्राज्य स्थापित कर लिया है और इस गलियारे को नेपाल तक ले जाने की योजना है, जिसे “लाल गलियारा” नाम दिया गया है। नेपाल में तो माओवादी लोकतन्त्र के सहारे (बन्दूक के जोर पर ही सही) सत्ता पाने में कामयाब हो चुके हैं, छत्तीसगढ़, झारखण्ड और उड़ीसा के कई दूरदराज के जिलों में “भारत सरकार” नाम की चीज़ नहीं बची है, ऐसे में सोचा जा सकता है कि ISI और नक्सलवादी-माओवादी का गठबन्धन देश के लिये कितना खतरनाक साबित होगा।

इस समूचे मास्टर-प्लान (जिसे भारत का “दूसरा विभाजन” नाम दिया गया है) को बांग्लादेश की जहाँगीरनगर विश्वविद्यालय में पाकिस्तान की ISI और बांग्लादेश की Director General of Forces Intelligence (DGFI) द्वारा मिलकर तैयार किया गया है। इस योजना के “विचार” को पाकिस्तान के तानाशाह जनरल जिया-उल-हक के समय से “ऑपरेशन टोपाक” के तहत सतत पैसा दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जिया-उल-हक का भारत को तोड़ने का सपना अधूरा ही रह गया, लेकिन पाकिस्तान के शासकों ने अभी भी अपने प्रयास कम नहीं किये हैं, पहले “खालिस्तान” को समर्थन, फ़िर कश्मीर में लगातार घुसपैठ और अब बांग्लादेश के साथ मिलकर “मुगलिस्तान” की योजना, यानी कि साठ साल बाद भी “कुत्ते की दुम टेढ़ी की टेढ़ी”।



दाऊद इब्राहीम, लश्कर-ए-तोयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन मिलकर इस योजना को गुपचुप अंजाम देने में जुटे हुए हैं, भारत में उन्होंने “सिमी” और “इंडियन मुजाहिदीन” जैसे बड़े मजबूत नेटवर्क वाले संगठन तैयार कर लिये हैं। लश्कर-ए-तोयबा के साहित्य और वेबसाईटों पर भारत विरोधी दुष्प्रचार लगातार चलता रहता है। लश्कर और जैश दोनों ही संगठनों का एकमात्र उद्देश्य भारत को तोड़ना और कश्मीर को आजाद(?) करना है। नई रणनीति यह है कि इंडियन मुजाहिदीन कर बम विस्फ़ोट की जिम्मेदारी ले, ताकि पाकिस्तान पर लगने वाले “आतंकवादी देश” के आरोपों से बचा जा सके और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को बताया जा सके कि तमाम विस्फ़ोट भारत के अन्दरूनी संगठन ही करवा रहे हैं।

पाकिस्तान की आजादी के बाद वहाँ के घरू हालात सुधारने की बजाय उग्रवादी गुटों को भारत को तोड़ने की ललक ज्यादा है। वे यह नहीं देखते कि पाकिस्तान में भयंकर गरीबी है, देश दीवालिया होने की कगार पर पहुँच चुका है… बल्कि वे लोगों को “जेहाद” के नाम पर चन्दा देने को उकसाते हैं और पाक सरकार भी भारी मात्रा में पैसा देकर उनकी सहायता करती रहती है। हालांकि अमेरिका ने लश्कर और जैश पर प्रतिबन्ध लगा दिया है, लेकिन उस प्रतिबन्ध को लागू तो पाकिस्तान की सरकार को ही करवाना है, ऐसे में इस प्रतिबन्ध का कोई मतलब नहीं है। इस प्रस्तावित मुगलिस्तान की प्लानिंग के अनुसार भारत भर में लगभग 100 जिले चिन्हित किये गये हैं, जहाँ कि पहले से ही मुस्लिम आबादी 30% से लेकर 60% है और ये जिले भारत के विभिन्न हिस्सों में फ़ैले हुए हैं, इसमें जम्मू-कश्मीर के जिले शामिल नहीं हैं, क्योंकि वहाँ पहले ही कश्मीरी पंडितों को सामूहिक हत्याओं के जरिये भगाया जा चुका है और उनकी सम्पत्तियों पर कब्जा जमाया चुका है। अब ISI की प्राथमिकता है पश्चिम बंगाल और असम पर जहाँ का राजनैतिक वातावरण (वामपंथी और कांग्रेस) उनके अनुकूल है। इन प्रदेशों के जिलों में भारी संख्या में घुसपैठ करवाकर यहाँ का जनसंख्या सन्तुलन काफ़ी हद तक बिगाड़ा जा चुका है और अगले कदम के तौर पर यहाँ बात-बेबात दंगे, मारकाट और तोड़फ़ोड़ आयोजित किये जायेंगे ताकि वहाँ रहने वाले अल्पसंख्यक हिन्दू खुद को असुरक्षित महसूस करके वहाँ से पलायन कर जायें या फ़िर उन्हें मार दिया जाये (जैसा कि कश्मीर में किया गया)। केरल के मलप्पुरम, आंध्रप्रदेश के हैदराबाद दक्षिण जैसे इलाके भी इनके खास निशाने पर हैं।

(भाग-2 में जारी रहेगा…) (सभी सन्दर्भ www.bengalgenocide.com से साभार)

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11 comments:

मिहिरभोज said...

कांग्रेस अपने आप को और इस देश को इस्लामिक आतंकवदियों के हाथों मैं बैच चुकी हैं .....इन्हें देश नहीं सत्ता चाहियें..ये तब तक आंख बंद करके रखेंगे जब तक ये आग इनके पांव तक नहीं पहुंचेंगी...और शायद तब न इनके पास और न हमारे पास कोई रास्ता बचेगा...तब तक के लिए भगवान से सिर्फ प्रार्थना ही की जासकती है

संजय बेंगाणी said...

"यह बकवास है" ऐसा अभी पाकिस्तान की सम्भावना पर कहा जाता था अब मुगलिस्तान के लिए कहा जाएगा. मुगलते में रहना हमें भाता है.

COMMON MAN said...

abhi bhi ham udaarvaadi islamic desh men rah rahe hain, is desh ke napunsakon ne itihaas se kuchh bhi nahin seekha.

Suresh Chandra Gupta said...

कांग्रेस ने पहली बार देश का बंटवारा करवाया था नेहरू को कुर्सी पर बिठाने के लिए. मुझे लगता है कांग्रेस फ़िर दोहराएगी अपने इतिहास को?

satyendra... said...

किस हिंदू और हिंदुत्व की बात करते हैं... राज ठाकरे या बाल ठाकरे?

eSwami said...

ऐतिहासिक तथ्यों को देखते हुए मुझे तो ये मात्र एक कांस्पिरेसी थ्योरी से कहीं अधिक लगता है!

दहाड़ said...

इतिहास गवाह है कि हिन्दु घटा और देश बटा.
संजय जी/इ स्वामी जैसे लोग मुगालते में जी रहे हैं. राज/बाल ठाकरे जैसे लोग इस मिशन को कामयाब करने में आइ एस आइ की मदद कर रहे हैं

संजय बेंगाणी said...

भाई दहाड़ सिंह टिप्पणी को धैर्य से पढ़ लिया करो.

मैने कहा है कभी पाकिस्तान बन जाएगा ऐसा चेताने वालो को बेवकुफ कहा जाता था, आज मुगलीस्तान की बात बकवास लग सकती है, मगर मुगलते में न रहें यही बेहतर है. पाकिस्तान बन कर ही रहा यह हमारे सामने है.

COMMON MAN said...

सर, आपकी टिप्पणी के सन्दर्भ में मैंने अभी आपकी पोस्ट देखी, मैं अपने ब्लाग पर तदनुसार संशोधन कर रहा हूं.

anitakumar said...

आप की ये पोस्ट चौंकानेवाली भी है और चिन्तित भी करती है। अगर खतरे के साथ साथ उसका तोड़ भी लिखें तो अच्छा रहेगा। आप की पोस्ट के दूसरे भाग का इंतजार है। ये पोस्ट सहेज कर रख रहे हैं दूसरों को इस खतरे की जानकारी देने के लिए।

Satyajeetprakash said...

AAPKI BAATON MEIN DAM HAI.