Wednesday, November 5, 2008

असम पर एक और माइक्रो पोस्ट…

भाई अनिल पुसदकर जी से प्रेरणा लेकर आजकल मैं भी माइक्रो पोस्ट लिखने की कोशिश कर रहा हूँ… पेश है असम में लगातार प्रसिद्ध हो रहे और बड़ी संख्या में भेजे जा रहे SMS -

1. शुभ दीपावली in 1947, दीवाली मुबारक in 2010, दीप वाले अली का सालाना उर्स in 2030.

2. Buy Two get one Store (Bangladesh) – Buy one Bangladeshi get two Bangladeshi free with UNLIMITED Stock.

8 comments:

संजय बेंगाणी said...

:)

ummed Singh Baid "saadahak " said...

सौ से ज्यादा हो गये,मुसलमान के दोष.
नेता उनको ढक रहे अब तो करले होश.
अब तो करले होश,देश धू-धू जलता है.
हिन्दू तेरे घर में दुष्ट रावण पलता है.
कह साधक कवि, वज़ीर बन बैठे हैं प्यादा.
ऊल्लू संसद में पहुँचे नौ सौ से ज्यादा.

COMMON MAN said...

बिलकुल ठीक कह रहे हैं, मुझे तो अभी से ही यह लगने लगा है कि मैं किसी अति उदार इस्लामिक देश में रह रहा हूं.

PD said...

इस पर हंसे या रोयें यह भी बता दिजिये..

Mired Mirage said...

buy नहीं invite कहिए और कहिए get 2 votes for free.
घुघूती बासूती

Anil Pusadkar said...

पूरी दमदारी और ईमानदारी से सच लिखने की हिम्मत दिखाने के लिये शत-शत नमन आपका।

Suresh Chandra Gupta said...

"अति उदार इस्लामिक देश"
एक ब्लागकारा ने अपने ब्लाग पर कुरान की कुछ शिक्षाओं का जिक्र किया, उसमें एक उदारता से सम्बंधित थी -
पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल0 को संबोधित करते हुए कहा गया है कि ''ऐ मुहम्मद! हमने तुम्हें दुनिया के लिए दयालुता ही बनाकर भेजा है।'' (क़ुरान 21:07)
मैंने यह पूछा कि क्या इस उदारता के दायरे में गैर-मुस्लिम भी आते हैं? पर कोई उत्तर नहीं मिला.
इस्लाम को एक उदार धर्म कहा जाता है, पर यह उदारता लगता है सिर्फ़ इस्लाम के अनुयाइयों तक ही सीमित है.

lata said...

सुरेश जी, आप सच का आईना दिखा-दिखा के सचमुच डराने लगे हैं.

अब कुछ दिन फिर से चलो थोड़ा रोमानी हो जाएँ,
इन व्यर्थ की बातों को भूल कर धर्मनिरपेक्षता के ख्वाबों मे खो जाएँ.

कौन मरता है कौन बचता है,
हिंदू की सरलता उसका स्वभाव है या उसकी कमज़ोरी,
क्या ज़रूरत हमे भी इन पचड़ों मे पड़ने की,
आप भी व्यर्थ कोशिश करते हैं,
भाड़ मे डालिए इस हमेशा के गुलाम देश को,
लूटीए अपने लोगों को और मज़े लीजिए ज़िंदगी के,
बिल्कुल अपने देश के कथित नेताओं की तरह.