Thursday, October 16, 2008

“प्रसिद्ध बुद्धिजीवी” का करियर अपनाना हो या NDTV, CNN-IBN में नौकरी चाहिये हो?… यह बहुमूल्य टिप्स लीजिये…

Become Secular Intellectual & Get Job in NDTV, CNN-IBN
मेरा भारत महान है इसमें कोई शक नहीं है, हाल के दिनों में तो यह और भी ज्यादा महान होता जा रहा है, क्योंकि यहाँ एक खास किस्म के बुद्धिजीवियों की “खरपतवार” उग आई है, ये महान बुद्धिजीवी (जिनमें से कुछ पत्रकार भी कहलाते हैं), विभिन्न चैनलों पर अपनी अमूल्य राय मुफ़्त में देते फ़िरते हैं, अखबारों में लेख लिखते हैं, सरकारों से पद्म पुरस्कार पाते हैं… यानी कि इनकी महिमा अपरम्पार है… यदि आप अभी युवा हैं और NDTV या फ़िर CNN-IBN जैसे चैनलों में नौकरी पाना चाहते हैं या फ़िर यदि आप एक “खास कैटेगरी” के बुद्धिजीवी का “चमकदार कैरियर” बनाना चाहते हैं तो ये टिप्स नोट कर लीजिये… आपके बहुत काम आयेंगे…

1) यदि आप हिन्दू हैं तो आप हिन्दुओं, हिन्दू धर्म और सनातन धर्म की अधिक से अधिक आलोचना करें। आपकी शैक्षणिक योग्यता, बुद्धिमानी, आपकी वर्तमान पोजीशन आदि कोई मायने नहीं रखता, बस आपको हिन्दुओं के खिलाफ़ लगातार, अबाध गति से बोलते जाना है।

2) भारतीय संस्कृति, भारतीय पुरातत्व और सांस्कृतिक गौरव को हमेशा हीन निगाह से देखें और उसे नीचा दिखाने की कोशिश करते रहें। अकबर जैसे दारूकुट्टे और औरंगजेब जैसे लुटेरे को भारत का नीति-नियन्ता बतायें तो और भी अच्छा रहेगा।

3) हिन्दू धर्म, पुरातन हिन्दू मान्यताओं, भगवा रंग, ओम्, मन्दिर, ब्राह्मण और पुजारियों की जमकर खिल्ली उड़ायें। आपको यह दर्शाना आना चाहिये कि सिर्फ़ आप ही हैं जो हिन्दू धर्म की बेहतरीन आलोचना कर सकते हैं।

4) दूसरे अन्य धर्मों की सिर्फ़ अच्छी-अच्छी बातें ही मीडिया को बतायें और हिन्दू धर्म की सतत आलोचना करते रहें। यदि आरएसएस और भाजपा, 2+2=4 बताये तो आप उसे 5 बताईये।

5) कभी भी भारतीय ग्रन्थों से किसी भी बात का उद्धरण (Quote) न दें, न सुनें, क्योंकि आपके मुताबिक तमाम भारतीय पुरातन ग्रन्थ एकदम घटिया और अवैज्ञानिक होने चाहिये। हमेशा पश्चिम की पुस्तकों, विचारकों, चीन के क्रान्तिकारियों और ईराक के नेताओं के वचनों का ही उद्धरण और उदाहरण पेश करें। यदि मजबूरी में भारत का ही कोई उद्धरण पेश करना पड़े, तो सिर्फ़ नेहरू और गाँधी परिवार द्वारा कही बातें ही पेश करें (उसमें से भी “जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है” जैसे वाक्य चुपचाप गोल कर जायें)।

6) अधिक से अधिक हिन्दू विरोधी बुद्धिजीवियों जैसे रोमिला थापर, माइकल विट्जेल, कांचा इल्लैया आदि की पुस्तकें पढ़ें और उसमें से छाँटकर उद्धरण पेश करें।

7) कभी भी भारत के भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्य की तारीफ़ें न करें, हमेशा यह दर्शाने की कोशिश करें कि भारतीय रूढियों के कारण ही यह देश सदियों तक गुलाम बना रहा। जहाँ तक हो सके तो भारतीय उत्थान की कहानियाँ अंग्रेजों से शुरु करें, या अधिक से अधिक मुगलकाल से… लेकिन उसके पहले के इतिहास को कूड़ा-करकट बतायें।

8) हमेशा विदेशी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को ही महान बतायें, हो सके तो कम्युनिस्ट देशों के। जबकि भारतीय वेदों, आयुर्वेद, आदि की आलोचना करें।

9) यदि कोई हिन्दू-विरोधी हस्ताक्षर अभियान चल रहा है, तो प्रेस के कैमरों के सामने उस पर हस्ताक्षर अवश्य करें।

10) मदर टेरेसा, ईमाम बुखारी, और सेंट जेवियर फ़्रांसिस आदि के बारे में मीठी-मीठी बातें बतायें (भले ही फ़्रांसिस ने गोआ में 480 मन्दिर ढहाये हों और हजारों हिन्दुओं का धर्मान्तरण करवाया हो)।



11) हमेशा यह आभास होना चाहिये कि आपको सब कुछ मालूम है, आप सारी दुनिया के मुद्दों के बारे में जानते हैं, चाहे वह इराक हो, ह्यूस्टन हो, कोरिया हो, लंका हो, मिजोरम हो, फ़िलीस्तीन हो, कुछ भी हो बस आपको बोलना है। सिर्फ़ कश्मीर, असम और नागालैण्ड के बारे में कोई नकारात्मक बात मुँह से न निकल जाये इसका ध्यान रखना होगा।

12) कश्मीर और नागालैण्ड में हमेशा भारतीय सेनाओं और पुलिस की ज्यादतियों के बारे में जोर-जोर से चिल्लाईये।

13) यदि कभी “अल्पसंख्यक आतंकवाद” के बारे में बोलना भी पड़ जाये तो उसके लिये “हिन्दू आतंकवाद” को दोषी बतायें।

14) जब आप किसी ईसाई संस्था में भाषण दें तो यह कहें कि आप अगले जन्म में ईसाई बनना चाहते हैं, और जब किसी मुस्लिम जलसे में बोलें तो कहें कि आप अगले जन्म में मुस्लिम बनना चाहते हैं, साथ में यह भी जोड़ दें कि वेद और उपनिषद् तो कुरान और बाईबल का ही एक अंश हैं।

15) हिन्दुओं के बड़े समारोहों और उत्सवों की आलोचना करें और हिन्दुत्व के बारे में अनाप-शनाप बकते रहें (आपका कुछ नहीं बिगड़ने वाला)। भगवान राम को काल्पनिक और रामसेतु को मनगढ़न्त बतायें…

16) यदि आप कोई पुस्तक लिखना चाहते हैं तो सबसे पहले हिन्दू-विरोधी, उनकी परम्परा विरोधी पुस्तक लिखें… आपको मार्केटिंग की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और पुस्तक हाथों-हाथ बिकेगी।

17) यदि आप JNU या Jamia से पढ़ाई करके निकले हुए हैं, फ़िर तो आप समझिये कि खुद-ब-खुद स्थापित हो जायेंगे, क्योंकि तब “सेकुलर” शब्द आपके माथे पर ही लिखा पाया जायेगा।

18) जब भी कोई पुलिस मुठभेड़ हो, तुरन्त सबसे पहले तो उसे नकली बताईये, फ़िर उस पर जमकर हल्ला मचाईये…। अफ़ज़ल गुरु की रिहाई के लिये हस्ताक्षर अभियान चलाईये, मोमबत्तियाँ भी जलाईये…। भले ही कश्मीर में लाखों हिन्दू मरते रहें, आप सिर्फ़ फ़िलीस्तीन का राग अलापिये…

19) यदि आप महिला हैं तो माथे पर कम से कम पचास पैसे बराबर की बिन्दी लगाईये, यौन-शिक्षा की वकालत कीजिये, लिव-इन रिलेशनशिप, समलैंगिकता आदि का भी जोरदार समर्थन करें, साथ ही वाघा सीमा पर मोमबत्तियाँ भी जलाईये…

20) हमेशा बाल ठाकरे, नरेन्द्र मोदी को गिरफ़्तार करने की माँग करते रहिये, भले ही इमाम बुखारी के खिलाफ़ कई गैर-जमानती वारंट धूल खाते पड़े हों… हज सब्सिडी पर अपनी माँग बढ़ाते जाईये, और मन्दिरों-मठों के सरकारीकरण के लिये लॉबी बनाईये…

21) यदि किसी हिन्दू-विरोधी प्रदर्शनी पर हमला होता है तो उसे बजरंगियों की करतूत बताईये और लोकतन्त्र की दुहाई दीजिये, लेकिन कभी भी एमएफ़ हुसैन की आलोचना मत कीजिये, उन्हें सिर्फ़ महान बताईये। हमेशा हिन्दुओ के विरोध को “अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता” बताईये, लेकिन तसलीमा नसरीन को भारत मत आने दीजिये (वह सेकुलरिज़्म के लिये बहुत बड़ा खतरा है)। अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम पर जमाने भर के नुक्कड़ नाटक खेलिये, लेकिन सलमान रशदी की पुस्तक और ईसाईयों की पोल खोलने वाली “द विंसी कोड” फ़िल्म को भारत में प्रतिबन्धित करवा दीजिये।

22) अब्दुल करीम तेलगी, दाऊद इब्राहीम, अफ़ज़ल गुरु, अबू सलेम, परवेज मुशर्रफ़ आदि को महिमामंडित करने की और इन्हें बेगुनाह साबित करने की कोशिश कीजिये और इनकी तारीफ़ों के पुल बाँधिये…लेकिन शंकराचार्य को तत्काल अपराधी घोषित कर दें।

23) अरुंधती रॉय जैसे लेखकों के करीब रहने और उनकी चमचागिरी करने का सतत प्रयास करते रहें… बांग्लादेशी घुसपैठियों को मज़लूम, मजबूर… और हो सके तो अपना छोटा भाई कहें। संभव हो तो कश्मीर जाकर किसी आतंकवादी की मय्यत में शामिल हो जायें और कैमरे पर दिखाई दें…

तो भाईयों अब लिस्ट लम्बी होती जा रही है, आप तो संक्षेप में समझ लीजिये कि यदि आपको “सेकुलर बुद्धिजीवी”, “इंटेलेक्चुअल” कहलवाना है, दिखाई देना है, NDTV और CNN-IBN जैसे महान चैनलों पर बहस में हिस्सा लेना है तो आपको इन उपायों पर अमल करना ही होगा… फ़िर देखियेगा, कैसे धड़ाधड़ आप इन चैनलों की बहस में, सेमिनारों, मीटिंग, उद्घाटन समारोहों आदि में बुलाये जायेंगे, तमाम अखबारों के लाड़ले बन जायेंगे, आप विभिन्न पुरस्कारों के लायक बन जायेंगे। यदि आप ज्यादा “उँचे लेवल” तक चले गये तो आपको पद्मभूषण जैसे पुरस्कार, और भी ज्यादा उँचे चले गये तो मेगसायसाय और बुकर पुरस्कार तक मिल सकता है…

यदि आपको ऐसा लगता है कि एकाध “क्वालिफ़िकेशन” छूट गई है, तो आप टिप्पणी में जोड़ सकते हैं…

और यदि आप यह सब नहीं कर पाते हैं तो आप साम्प्रदायिक, कट्टरतावादी, हिन्दुत्व के झंडाबरदार, संघ के समर्थक… आदि-आदि-आदि-आदि माने जायेंगे…


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31 comments:

vimal said...

ये बेचारे भी क्या करें? इनके चैनलों में पैसा भी तो चर्च और विदेशी संस्थाओं का लगा है। रोटी के आगे कुत्ता भी दुम हिलाता है वैसे ही ये एनडीटीविये और सीएनएनिये हिनहिनाते हैं।

माफ कीजिये, मैंने इन्हें कुत्ता कहा, कुत्ता तो वफादार होता है। गल्ती हुई, माफ कर दीजिये

हिमांशु said...

जबरदस्त लिखा है आपने. पर कहीं आस पास ही होंगे 'तद्भव' कहने कहलाने वाले 'तत्सम' लोग. डर लग रहा है ब्लॉग का इतिहास लिखते वक्त कहीं आपकी ऐसी प्रविष्टियों को दफना न दिया जाय. सच - इस लिखावट के लिए कहूं -

"थरथराता है अब तलक खुर्शीद
सामने तेरे आ गया होगा ."

mahashakti said...

आज की मीडिया सिर्फ चाटुकारिता की मूर्ति मात्र रह गई है।

संजय बेंगाणी said...

अब मेरे लिए बुद्धीजीवि बनना कोई मुश्किल नहीं रह गया है. बना ही समझो.
साथ ही कुछ और बातें सीख ली है, जैसे "गंगा-जमुनी संस्कृति", छोटे मगर बेचारे भाई, हिन्दी में अरबी के शब्दों की ठूसम-ठूस," वगेरे वगेरे...

पंगेबाज said...

विमल जी सुअर को कुत्ता मत बताईये क्योकी गंद्गी मे लेट कर वही उस को सुगंधित बता सकता है . अरे माफ़ कीजीयेगा ये श्ब्द सेकुलर डायरी मे नही आता :)

COMMON MAN said...

bilkul theek kah rahe hain, secular vichardhara wale log ise apna aadarsh paath maanege

COMMON MAN said...

ganga-jamni tahjeeb ki baat to chhod hi di

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सटीक और जबरदस्त लिखा है आपने ! ये आईना है ! बहुत धन्यवाद !

संजीव कुमार सिन्हा said...

काहे के सेकुलर बुद्धिजीवी, ये सब देशद्रोही हैं.

sumansourabh said...

दुर्भाग्य से आज आतंकवादियों और अलगाववादियों के पैरोकार ही बुद्धिजीवी माने जाने लगे हैं. देश के लिए यह चिंता का विषय हैं. लेकिन एक बात हैं भारत के जन आज भी इन बुद्धिजीवियों के साथ नहीं बल्कि राष्ट्रवादियों के साथ हैं.

Suresh Chandra Gupta said...

ऐसे बुद्धिजीवियों से यह देश भरा पड़ा है. मानव योनि में जन्म लिया है मानव बन कर रहेंगे. बुद्धिजीवी बन कर अपना जीवन नष्ट नहीं करेंगे.

भुवनेश शर्मा said...

सीएनएन और एनडीटीवी के सभी लोगों को गिन-गिनकर इतने जूते लगाने चाहिए कि मीडिया और अभिव्‍यक्ति शब्‍द तक भूल जाएं......इन्‍होंने अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता का जितना दुरूपयोग किया है उतना भारत के इतिहास में किसी ने नहीं किया होगा

एक इलाज और है...पिघला हुआ डामर इनके टेंटुए में भर दिया जाए तभी अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता मिलेगी इन कमीनों को

सागर नाहर said...

और यदि आप यह सब नहीं कर पाते हैं तो आप साम्प्रदायिक, कट्टरतावादी, हिन्दुत्व के झंडाबरदार, संघ के समर्थक… आदि-आदि-आदि-आदि माने जायेंगे…

मैं सचमुच नहीं कर पाया, क्या मैं भी?
बू हू हू ऽ ऽ ऽ

सतीश पंचम said...

काफी हद तक बातें सच लग रही हैं लेकिन मुद्दे के दुसरे पक्ष को भी रखते तो ज्यादा बात बनती।

PD said...

पोल खोल कर रख दिया है आपने सबका.. बहुत बढिया.. :)

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

जबरदस्त सूची है...। इसका पर्चा छपवाकर सभी पार्टियों के दफ़्तरों में दुकान लगाने का धन्धा बड़ा चोखा चलेगा।:)

katyayan said...

बिल्कुल ठीक कहा।गणपति विसर्जन के दिन रात ९ बजे से रात १ बजे तक मैं सी एन एन आई बी एन इसलिए देखता रहा क्योंकि बार बार माता जी(न्यूज रीड़र) बता रहीं थीं कि एलिफेन्ट गाड का विसर्जन कैसे चल रहा है। सेक्युलर कहलवानें का एक और तरीका है कि आप किसी दूसरे धर्म की लड़्की या लड़्के से शादी कर लीजिये। कल प्रधानमंत्री जी नें मींटिंग के बाद ग्रहमंत्री और स्वास्थ्यमंत्री से कहा कि समलैंगिक मसले पर आपस में बैठ कर मामले को निपटा लीजिये,यह समाचार सभी चैनल्स पर कल रात दिखाया गया। मैं अभी तक यह जाननें में असफल रहा हूँ कि इन दोनों मंत्री महोदय में कौन समलिंगी है? क्या आप कुछ प्रकाश ड़ालेंगे?

Debashish said...

आप लिखते इतना संयमित हैं कि असहमत होते हुये भी तर्कों को नकारना मुश्किल होता है।

अनुनाद सिंह said...

बहुत सही ! इससे विभिन्न छद्मवेष-धारी भारत के शत्रुओं को पहचानने में सुविधा होगी।

Anil Pusadkar said...

सुरेश भाऊ आपसे कुछ छूट सकता है क्या?हां पने सिलेबस मे रामदेव बाबा के योग और उसकी दवाओं को गालियां देने वाला पाठ भी शामिल कर लेते तो ठीक हो जाता और पचास पैसे वाली बिंदी वाली रिश्तेदार का सपोर्ट भी।गज़ब लिखते हो भाऊ,आपको सर्विस तो दूर स्टुडियो के आस-पास फ़टकने भी नही मिलेगा।सबसे पहले आपको सरनेम छोड कर सिर्फ़ सुरेश या ज्यादा से ज्यादा सुरेश कुमार लिखना होगा।पहले इतना कर ही नही कर पाओगे आगे क्या बताऊं।बहुत सही।

संजय बेंगाणी said...

देवाशिषजी की टिप्पणी माने रखती है. उनकी यहाँ टिप्पणी आना आश्चर्य जगाता है. बधाई :)

पंकज बेंगाणी said...

इन चैनलों को अपने अपने आकाओं को खुश रखना होता है जिनका पैसा लगा है.

दूसरा यह कि हम भारतीयों की मानसिकता ही ऐसी हो गई है. 2000 वर्षों की गुलामी ने हमारे जीन बिगाड कर रख दिए हैं. हीन भावना से ग्रस्त हैं हम. आत्मसम्मान खो चुके हैं हम.

हम खुद का खराब ही खराब दिखता है.. हमारे वेद पूराण सब बेकार और उनके लेखन सब अच्छे.

भारतीय संस्कृति की कोई पूछ ही नही है... डिस्कवरी चैनल देखिए.. रोम सभ्यता और उनके आविष्कारों के इतने कार्यक्रम आते हैं. क्या हमारे पूर्वजों और उनकी खोजों के आते हैं?? नहीं आते क्योंकि ना उन्हे पडी है ना हमे पडी है...

यह देश राम भरोसे चलता आया है, चल् रहा है, और चलता रहेगा. कोई हमे लूट ले जाए हमे कोई फर्क नही पडता कोई देश तोड जाए हम बैठे रहेंगे क्योंकि रामभरोसे बाकी बचा देश फिर भी चलता रहेगा.


कहते हैं देश मे मुस्लिमों पर अत्याचार होते रहते हैं.. कहते हैं एक मुस्लिम सैनिक का घर जला दिया... कोई यह क्यों नही सोचता कि वह एक भारतीय सैनिक था.. मुस्लिम बाद में था. वह हिन्दू भी हो सकता था.. मुस्लिम भी घर जलाते हैं.

देश के लोगों को हिन्दू मुस्लिम मे बाँटने वाले राजनेता तो हैं ही, ये कथाकथित "कस्बे", "मोहल्ले" वाले पत्रकार भी हैं.

क्या ज्यादती उनके साथ ही होती है.. क्या हिन्दू प्रताडित नही होते? रोज तो गालियाँ खाते हैं इन लोगों की, और कितना प्रताडित होंगे.


क्यों उनको ही देश बेगाना सा लगता है, क्यों मेरे जैसे सुपर सुपर माइनोरिटी जैन इंसान को देश बेगाना नही लगता? सोचिए.

स्वप्निल सेकुलर said...

आपने हमारे किए-कराये पर पानी फेर दिया. असल में सेकुलरता के साथ-साथ हम बुद्धिजीवी बनाने का इंस्टीच्यूट खोलने जा रहे थे लेकिन आपने तो हमारे पेट पर लात दे मारी. लेकिन एक बात है. हमारे पास केवल चौदह पॉइंट थे. आपने नौ और दे दिए.

आपसे एक रिक्वेष्ट है. ये पोस्ट उतार देते तो हमारे इंस्टीच्यूट खोलने का रास्ता साफ़ हो जाता. वो क्या है कि हमने ऑस्ट्रेलिया के एक मिशनरी से इंस्टीच्यूट के नाम पर ढेर सारा पैसा ले लिया है. अगर इंस्टीच्यूट नहीं खुला तो वे लोग पैसा वापस मांग लेंगे.

dhiru singh said...

n d t v jaiso ke baare main aisa na likhey . karat shab bura maan jainge .kyonki pravan roy aur voh saadu bhai hai .

mayank said...

मेरा बस चले तो इंडिया के सभी सेकुलरों की चमड़ी उतार कर उसके जूते बनाकर पहनूं.

Tarun said...

Suresh, Aapki is post ke liye debashish ki tippani se sehmat, mixed vegetable me jo sabjiyon ka haal hota hai wohi India me ho reha hai, Jaahir si baat hai isme jo particular sabji jyada matra me hai usi ka swad aayega. Lekin shayad secular ye nahi samajhte.

Gyan vane said...

इसीलिए कहते हैं कि मेरा देश महान।
यहाँ सबकुछ different होता है या कहें उल्टा होता है।
समाचार चैनलों के माध्यम से ये बहुत बड़ी साजिश कर रहे हैं सही बात को जनता तक पहुँचने ही नहीं देते।
कहते हैं दूर से देखा तो मुजरिम खड़ा था पास गया तो आईना पड़ा था।

katyayan said...
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Queer Quiver said...

Am using English language, forgive me for it. However I believe that to bring down a system, first be a part of the system.
I do agree with all that is penned and it is really an exhaustive list. However, nothing said there is new or original.
We all know about it, am sure. Our bigger problem is the factionalism in HINDU. In the name of vote banks, various political parties, divide and rule us.
And we let them. We do not have the political will. I am also included in this criticism.

रंजीत said...

Swarhneet secularism ka yahee anjam hai. Bhai, yeh secularism nahin swarthism hai.

मिहिरभोज said...

लो मैंने पढली और याद भी करली अब फारम भरने की पता भी बतां दें एक बात और जोङी जा सकती थी कि फैंच कट दाढी हो तो सोने मैं सुहागा