Sunday, October 19, 2008

लता, जयदेव और बालकवि बैरागी का एक और मधुर गीत…

A Beautiful Song of Lata Mangeshkar, Jaidev and Balkavi Bairagi

राजस्थान के बारे में कहा जाता है कि इसके कई-कई रंग हैं, यह सुबह को अलग दिखता है, शाम को अलग और रात में और अलग। राजस्थान के चटखीले रंगों, किलों और हवेलियों को हिन्दी फ़िल्मों में कई बार सुन्दर चित्रित किया गया है, चाहे जेपी दत्ता की गुलामी, बँटवारा या बॉर्डर हो, यश चोपड़ा की लम्हे हो या सुनील दत्त की रेशमा और शेरा हो…

यहाँ फ़िल्म रेशमा और शेरा का एक गीत पेश करता हूँ, प्रस्तुत गीत रेडियो पर अमूमन बहुत कम ही सुनने में आता है, इस फ़िल्म का गीत “तू चन्दा मैं चाँदनी…” ही अधिकतर सुनने में आता है, जबकि यह गीत भी उतना ही मधुर और हिन्दी कविता से भरा हुआ है, लेकिन पता नहीं क्यों इसकी फ़रमाईश नहीं आती। गीत के बोल हैं “एक मीठी सी चुभन, एक ठंडी सी अगन…” लिखा है बालकवि बैरागी ने और संगीत दिया है जयदेव ने। इस गीत में सुनील दत्त ने राजस्थान के जिस हवेलीनुमा मन्दिर का चित्रण किया है, वह तो अपने-आप में बेजोड़ है ही, उस पर वहीदा रहमान का मासूम अभिनय और “सिचुएशन” के मुताबिक लिखे गये (और फ़िर भी दिल को छू लेने वाले) बेहतरीन शब्द इसकी सुन्दरता में चार चाँद लगा देते हैं। पहले आप इस गीत को ऑडियो रूप में सुनिये… फ़िर आगे की बात करते हैं…



एक मीठी सी चुभन, एक ठंडी सी अगन
मैं आज पवन में पाऊँ, आज पवन में पाऊँ…
एक मीठी सी चुभन…
मन ही मन मैं नाच रही हूँ…. मन ही मन मुसकाऊँ…
क्योंकि मीठी-मीठी सी चुभन… ठंडी-ठंडी सी अगन…

1) जाग उठा है प्यार, झूमे सब संसार
अंगड़ाई लेते हैं सपने, धर के रूप हजार
नाच उठा है प्यार, आज मेरा आज मेरा झूम रहा संसार
मन का आँगन जो सूना था… आई है उसमें बहार
कंगना… पायल… कंगनवा खनके पायल छमके,
लट उलझी सुलझाऊँ, शरमाऊँ, मुसकाऊँ
क्योंकि एक मीठी-मीठी सी अगन…

2) ऐ मेरे भगवान, इतना कर अहसान
ये रसवन्ती हवा कहीं ना, बन जाये तूफ़ान
प्यार मेरा नादान, मन भी है अन्जान
जल ना जाये बैर अगन में जीवन के वरदान
धीरज भागे, चिन्ता जागे, मन ही मन घबराऊँ, घबराऊँ, घबराऊँ…


यह गीत प्यार की आगोश में पूरी तरह से भीगी हुई एक युवती के मन की दास्तान है। बालकवि के फ़ूलों से नाज़ुक बोल इसे एक नई ऊँचाई देते हैं। शुरुआत से ही यह गीत आपको भीतर से जकड़ने लगता है, जिसने भी एक खास उम्र में “प्यार” नाम के इस खूबसूरत अहसास को जिया है वह “एक मीठी सी चुभन, एक ठंडी सी अगन” जैसे शब्दों को शिद्दत से महसूस कर सकता है, वही व्यक्ति “रसवन्ती हवा” का मतलब भी समझ सकता है। फ़िल्म की “सिचुएशन” में बँधे होने के बावजूद एक गीतकार कैसे सुन्दर कविता कर लेता है यह इसका एक उदाहरण है। गीत के दूसरे अंतरे में नायिका (जो कि अपने दुश्मन कबीले के सरदार के बेटे के साथ प्रेम करती है) अपने भविष्य को लेकर बुरी तरह आशंकित है और वह भगवान से प्रार्थना करती है कि “ये रसवन्ती हवा कहीं ना बन जाये तूफ़ान…”। हालांकि बालकवि अधिक से अधिक हिन्दी शब्दों का प्रयोग करते हैं, लेकिन दूसरे अंतरे में “अहसान” शब्द का उपयोग शायद उन्होंने अगली पंक्तियों में आने वाले “तूफ़ान”, “अन्जान” और “वरदान” से तुकबन्दी मिलाने के लिये किया होगा, यह गीत पूरी तरह से गीतकार का ही है।

लता मंगेशकर तो खैर हमेशा की तरह गीत की आत्मा में उतरकर गाती ही हैं, संगीतकार जयदेव ने भी इसमें कमाल किया है। फ़िल्म इंडस्ट्री में दो संगीतकार “रवि” और “जयदेव” हमेशा “अंडर-रेटेड” और “अंडर-एस्टीमेटेड” (इस स्थान पर उपयुक्त हिन्दी शब्द नहीं मिल रहा) ही रहे, जबकि दोनों ही बेहद प्रतिभाशाली हैं। जयदेव हमेशा कम से कम वाद्य यन्त्रों के प्रयोग के लिये जाने जाते रहे हैं। इस गीत में भी उन्होंने संतूर, जलतरंग और बाँसुरी का शानदार उपयोग किया है। गीत बेहद उतार-चढ़ाव भरा है और लता मंगेशकर ने इसके साथ पूरा न्याय किया है, खासकर “मन ही मन मुस…काऊँ” वाली लाईन में “मुस” शब्द के बाद एक सेकण्ड का विराम तो आपको उड़ाकर ले जाता है। इसी प्रकार सिनेमेटोग्राफ़र एस रामचन्द्र ने भी राजस्थान की इस लोकेशन को कैमरे से कविता की तरह दर्शकों के सामने पेश किया है चाहे वह उस हवेलीनुमा मन्दिर की भव्यता हो या पत्थरों की जाली की नक्काशी हो, वहीदा रहमान के अभिनय के साथ दोनों एकाकार हो जाते हैं और आपको अनायास ही रेगिस्तान के रंग-बिरंगे मंज़र में ले जाते हैं। इस गीत का खूबसूरत वीडियो भी देखें… आप सोचते रह जायेंगे कि हिन्दी फ़िल्मों में कितने कविता और शायरीनुमा एक से बढ़कर एक गीत हैं, जो कम सुनने में आते हैं… लेकिन हंस भी तो कभी-कभार दिखाई देते हैं, कौए तो हमेशा मौजूद रहते हैं…



इस गीत के गीतकार के बारे में मन में थोड़ा संशय था, नेट पर सर्च करने से पता चला कि कहीं-कहीं इस गीत के गीतकार का नाम “उद्धव कुमार” बताया गया है। फ़िर “महफ़िल” के सागर भाई नाहर जी से चर्चा की, उन्हें भी कुछ संशय हुआ, फ़िर क्या किया जाये? तब बालकवि बैरागी जी के छोटे भ्राता श्री विष्णु बैरागी जी (ब्लॉग एकोहम) से इस सम्बन्ध में चर्चा हुई और उन्होंने कन्फ़र्म किया कि इस गीत के गीतकार उनके और हमारे सबके प्रिय “दादा बालकवि बैरागी” ही हैं, तब यह लेख सम्पूर्ण हो सका… इन दोनों ही सज्जनों का आभार…अस्तु… अन्त भला तो सब भला… इस मधुर गीत के लिये हम सभी संगीतप्रेमी बालकवि जी, जयदेव जी और स्वर साम्राज्ञी के ॠणी रहेंगे… (जिन सज्जन को इस गीत की शूटिंग लोकेशन की एकदम सही जानकारी हो वे बतायें, उनका भी अग्रिम आभार)

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10 comments:

सजीव सारथी said...

जिसने भी एक खास उम्र में “प्यार” नाम के इस खूबसूरत अहसास को जिया है वह “एक मीठी सी चुभन, एक ठंडी सी अगन” जैसे शब्दों को शिद्दत से महसूस कर सकता है, वही व्यक्ति “रसवन्ती हवा” का मतलब भी समझ सकता है
आहा क्या बात कही है जनाब......क्या गीत सुनाया ...आनंद आ गया......बस एक ही बात का अफ़सोस है :)

sareetha said...

आदरणीय सुरेश्जी ,
इतनी मीठी रचना की बेहतरीन प्रस्तुति के लिए बधाई । सच्ची बातों को कडवे अंदाज़ में कहने वाला शख्स प्रेम की चाशनी में पगी रचना की मिठास से भी लोगों को रुबरु कराने का माद्दा रखता है ,ये जानकर आश्चर्य तो हुआ पर बहुत अच्छा भी लगा ।

मीत said...

पसंदीदा गीत. बहुत दिनों बाद सुना ... शुक्रिया.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

सुरेश जी, आपकी यह रुचि वाकई बहुत आनन्द दे गयी। इस कालजयी रचना को जिस पूर्णता के साथ आपने प्रस्तुत किया उसके लिए कोटिशः धन्यवाद।

“अंडर-रेटेड” और “अंडर-एस्टीमेटेड” का भाव इन शब्दों में दे सकते हैं: इनकी प्रतिभा को कम करके आंका गया; या इनका मूल्यांकन इनके स्तर से कम किया गया; या इन्हें वह प्रतिष्ठा नहीं मिली जिसके ये वास्तविक हकदार थे।

अजित वडनेरकर said...

बरसों से सुनता हूं यह गीत...पसंदीदा रचना...और हर बार बैरागी भैया को स्मरण करते हुए ही सुनता हूं...
आभार....

Suresh Chandra Gupta said...

वाह सुरेश जी वाह. मन को छू गया यह गीत और आपका प्यार भरा लेख.

lata said...

Bahut pyara geet aur aapka lekh.
Dhanyawad.

brahmanand said...

Suresh ji meri comment is post ke bare me nahi hai.maine ek blog pe aaki comment padi. Kisi ki buraiyon ka kewal is liye samrthan karna ki koi dusara bhi is jaisa hai ye aapki ochhi mansikta ko darsata hai jaisa ki aap raj thakre ke bare me kar rahe ho.

lata said...

suresh ji, bahut khushi hui aapka lekh navbhart-times me dekhkar.

मुन्ना पांडेय(कुणाल) said...

बहुत खूबसूरत पोस्ट. दिल छू लेने वाली ..