100 सब्स्क्राईबर होने के उपलक्ष्य में नये-नवेले ब्लॉगरों से कुछ बातें…
100 Subscribers & Hindi Blog Future
मुझे यह बताते हुए छोटी सी खुशी का अनुभव हो रहा है कि हाल ही में मेरे ब्लॉग के भी 100 सब्स्क्राईबर हो गये, साथ ही 40000 हिट्स का आँकड़ा भी पार हो गया। हालांकि यह कोई बहुत बड़ी उपलब्धि नहीं है, लेकिन एक व्यक्तिगत खुशी की छोटी सी बात तो है ही। असल में आज से 20 माह पहले 26 जनवरी 2007 को जब पहला ब्लॉग लिखा था तब सोचा नहीं था कि इतनी दूरी तय कर पाऊँगा, न ही इस बात की उम्मीद थी कि तकनीक की इस नई विधा पर हाथ आजमाते हुए पाठकों का इतना प्यार मिलेगा, लेकिन यह हुआ है, और मुझे आश्चर्य में डालते हुए हो गया है।
हाल ही में मेरे स्नेही श्री अनिल पुसदकर ने बताया कि उनके भी 100 लेख पोस्ट हो गये हैं, तथा एक और ब्लॉग हिन्दी बात ने भी सूचित किया कि उसके भी 100 सब्स्क्राईबर हो गये, और भी कई ब्लॉग़ ऐसे हैं जिनके 100 से ऊपर सब्स्क्राईबर हैं, कुछ व्यक्तिगत ब्लॉग हैं जबकि कुछ “समूह ब्लॉग” है (जहाँ कई लोग मिलकर अलग-अलग पोस्ट लिखते हैं) लेकिन इस बात में कोई शक नहीं कि हिन्दी ब्लॉग जगत तेजी से बढ़ रहा है। जो लोग अंग्रेजी ब्लॉग से हिन्दी ब्लॉग जगत की तुलना करते हैं, वे अन्याय करते हैं। हिन्दी ब्लॉग अभी शैशव अवस्था में ही कहा जा सकता है, 5000-6000 हिन्दी चिठ्ठे रजिस्टर्ड हैं जिनमें से नियमित (हफ़्ते में कम से कम तीन पोस्ट) लिखने वाले काफ़ी कम ही हैं, लेकिन इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि अपने-आप को अभिव्यक्त करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। धीरे-धीरे अखबारों में, सेमिनारों में, चिकने पन्नों वाली पत्रिकाओं में भी हिन्दी ब्लॉग की चर्चा छपने लगी है। गत रविवार के दैनिक भास्कर में ब्लॉग पर एक लेख आया है, जिसमें बड़ी सही बात कही है कि “ब्लॉग शुरु करना बेहद आसान होने के कारण लिखने वाले आ तो जाते हैं, लेकिन फ़िर निरन्तरता नहीं बनाये रखते, जल्द ही बोर हो जाते हैं और उनका ब्लॉग काफ़ी समय तक अपडेट नहीं होता और धीरे-धीरे मृतप्राय हो जाता है”…। इस दृष्टि से गत 20 महीने में लगभग 270 पोस्ट लिखकर मैं अभी अपनी ऊर्जा को बनाये रखे हूँ, इसका भी मुझे आश्चर्य है।
इस अवसर पर मैं चिठ्ठा लिखने वाले नये लेखकों से मुखातिब होना चाहता हूँ… कि वे अपना ब्लॉग ज़रूर शुरु करें, लेकिन उसे नियमित बनाये रखें। कुछ भी लिखें, लेकिन लिखें, धीरे-धीरे उनमें समझ बनेगी कि क्या लिखना चाहिये और कैसे लिखना चाहिये (हालांकि यह समझ तो मेरी भी अभी नहीं बन पाई है)। यदि वे अपना चिठ्ठा किसी विषय आधारित रखना चाहते हैं जैसे संगीत, फ़िल्म, राजनीति, समाज आदि, तो पहले से तय कर लें। यदि मेरे ब्लॉग जैसी “औघड़ दुकान” सजानी है तो बात और है, क्योंकि मैं कभी भी पहले से तय करके नहीं लिखता कि किस विषय पर लिखना है, जो बात आपके दिल-दिमाग पर असर करे उस पर लिखो।
कुछ भी लिखने के लिये आवश्यक है “कच्चा माल” यानी कि विचार, सबसे पहले मन ही मन सोचो कि क्या लिखना है, फ़िर उस विषय पर आधारित विभिन्न चिठ्ठे पढ़ो, फ़िर अपना एक विचार बनाओ कि कौन सी लाइन पकड़ना है, फ़िर उस पर मजबूती से जम जाओ। ब्लॉग को पठनीय बनाने के लिये “सर्च और रिसर्च” दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण हैं। ज्यादा नहीं तो थोड़ा सा ही समय इन कामों के लिये निकालो, ताकि तुम्हारा चिठ्ठा अधिक तथ्यपरक और समझदारी की बातों से भरा हुआ लगे। नये चिठ्ठाकार विषय को आधा-अधूरा उठाते हैं, फ़िर उस पर मात्र एकाध पैराग्राफ़ लिखकर उसे पोस्ट कर देते हैं, ऐसे में जो भी पाठक उनके चिठ्ठे पर आता है उसे निराशा होती है। ऐसे में अपेक्षा की जाती है कि उस विषय का विस्तार से अध्ययन करके फ़िर लिखा जाये, चाहे उससे पोस्ट लम्बी ही क्यों न हो जाये, पर उसमें उस ब्लॉगर का खुद का एक “एंगल” स्पष्ट हो। पहले मैं भी सोचता था कि छोटी-छोटी पोस्ट लिखने से फ़ायदा होता होगा, लेकिन हर विषय के प्रत्येक पहलू को लिखने या उस पर अपने विचार देने पर पोस्ट लम्बी हो ही जाती है, लम्बी पोस्टों को आप भाग 1, भाग 2 करके लिखें। हो सकता है इस विधि से आपकी पोस्टों की संख्या न बढ़े, लेकिन आप जो भी लिखेंगे वह ठोस होगा और लम्बे समय तक चलेगा।
यदि आप किसी दूसरे के ब्लॉग से कोई सामग्री लेना चाहते हैं तो कोशिश करें कि उसकी अनुमति ले लें, यदि यह सम्भव नहीं हो पाता है तो जहाँ से सामग्री ली गई है उस ब्लॉग / ब्लॉगर का नाम अपने लेख में अवश्य उल्लेख करें, इससे आपकी छवि तो साफ़-सुथरी रहेगी ही, आपका नेटवर्क भी मजबूत होगा। यदि किसी पुस्तक का अथवा नेट की किसी वेबसाईट का उल्लेख करते हैं या उसमें से जानकारी लेते हैं तो उसकी भी लिंक देने की कोशिश करें, इससे आपका चिठ्ठा अधिक विश्वसनीय और तथ्यपूर्ण लगता है और पाठक को नई जानकारी मिलती है। हो सकता है कि 50-75 पोस्ट लिखने के बाद आपको लगने लगे कि “यार ये तो बेकार का काम है, भला ब्लॉग लिखने से कुछ होता भी है?” यही वह वक्त होता है जब कोई ब्लॉगर निराश होकर ब्लॉगिंग छोड़ देता है, लेकिन ऐसा नहीं होने दें। एक बात अच्छी तरह समझ लें कि आपके या मेरे लिखने से कोई क्रान्ति होने वाली नहीं है, न ही कोई सरकारी नीति बदलने वाली है, फ़िर भी कोशिश करना अपने हाथ में है, हम यह क्यों भूलें कि ब्लॉग नामक विधा ने ही हमें अपनी बात लोगों तक पहुँचाने का रास्ता दिया है, वरना कौन सा अखबार आपका/मेरा आग उगलता लेख छापने वाला है? आप अपने ब्लॉग के राजा हैं, इंटरनेट सबको बराबरी से मौका देता है, यहाँ किसी की मठाधीशी नहीं चलती। अच्छा रचनात्मक लिखते रहें, एक न एक दिन किसी पारखी जौहरी की निगाह आप पर पड़ेगी, बस अपने विचार मजबूती से प्रकट करते रहें।
यह तो हुई कुछ मामूली सी नसीहतें, अब आते हैं हिन्दी ब्लॉग जगत के काले पक्ष पर… जब मैंने अखबारों में लेख लिखना छोड़कर ब्लॉग शुरु किया तब मुझे नहीं पता था कि इस “छोटे से गढ्ढेनुमा हिन्दी ब्लॉग जगत” में भी भारी उठापटक होती होगी, इतनी गुटबाजी होती होगी। लेकिन शीघ्र ही मुझे समझ में आ गया कि यह “वर्चुअल दुनिया” भी “भारत की असली तस्वीर” से कुछ अलग नहीं है। यहाँ भी राजनीति होती है, यहाँ चाटुकारिता होती है, यहाँ गुटबाजी होती है, व्यक्तिगत हमले भी होते हैं। नये ब्लॉगर जो सचमुच इस क्षेत्र में टिकना चाहते हैं और कुछ गम्भीर वैचारिक लिखना चाहते हैं तो उन्हें डटे रहना सीखना होगा। यदि आप किसी विषय विशेष पर चिठ्ठा लिखते हैं तब तो कोई बात नहीं, प्रोत्साहन करने वाले बहुत मिल जायेंगे, लेकिन यदि आप राजनैतिक लेख लिखना चाहते हैं तब आपका मानसिक रूप से मजबूत होना बेहद आवश्यक है, खासकर उस स्थिति में जब आप कोई “हिन्दूवादी”(???) लेख लिखने की सोचें। ब्लॉग जगत में तथाकथित सेकुलरों की एक बहुत बड़ी गैंग है, जेएनयू की सेकुलर और वामपंथी “वैचारिक सड़ांध” फ़ैलाने में यह गैंग माहिर है, इस गैंग में कुछ पत्रकार भी शामिल हैं जिनकी हैसियत असल में एक ब्लैकमेलर से ज्यादा कुछ नहीं हैं, लेकिन वे सेकुलरिज़्म का लबादा ओढ़े हुए हैं और जमाने भर को ज्ञान बाँटते फ़िरते हैं। यह गैंग नये ब्लॉग लेखकों को पहले “हीनता बोध” से ग्रसित कराती है, आलोचना करती है, कभी अपमान भी करती है, फ़िर पुचकार कर अपना “पठ्ठा” बना लेती है, और इनमें कुछ बड़े नाम ऐसे भी हैं जो यह चाहते हैं कि नये ब्लॉगर इनकी चमचागिरी करके ही आगे बढ़ पायें।
लेकिन नये लिखने वालों से मैं यह कहना चाहता हूँ कि शुरुआत में बिलकुल भी न घबरायें, हो सकता है कि एक-दो महीने तक कोई टिप्पणी न मिले, या शुरुआती पोस्ट कोई भी न पढ़े (कोई दूसरा पढ़े या न पढ़े, आपके चिठ्ठे पर उड़न तश्तरी जरूर आयेगी और आपका हौसला बढ़ायेगी)। फ़िर धीरे-धीरे लोग आपको जानने लगेंगे, “Content is the King” की अवधारणा काम करने लगेगी, आप दूसरों के ब्लॉग पर जाकर टिपियायें, अपना नेटवर्क बनायें, अपने मित्रों से आपका ब्लॉग पढ़ने को कहें… धीरे-धीरे आप जम जायेंगे, जब आप जम जायेंगे और फ़िर भी किसी की चमचागिरी नहीं करेंगे तो आपको सताने की एक प्रक्रिया शुरु होगी, लेकिन यदि आप मजबूती से जमे रहे तो ही रहेंगे, वरना मैंने कईयों को भागते देखा है, इसलिये बस लिखते रहें, लिखते रहें, फ़ालतू की बातों पर ध्यान दिये बगैर और हिट्स की चिन्ता किये बगैर। यदि आपका लेखन अच्छा, तर्कपूर्ण, तथ्यपरक है तो आपको हिट होने से कोई रोक नहीं सकता, ध्यान रहे कि अच्छा लिखने वाले को लोग पढ़ते हैं, भले ही टिप्पणी न करें, या किसी चर्चा में उसका उल्लेख न करें। मुझे भी इस बात की ज्यादा खुशी है कि मेरे 100 सब्स्क्राइबर में से लगभग 70-75 ऐसे हैं जो हिन्दी ब्लॉग जगत के बाहर से हैं, साथ ही इस बात का भी अहसास है कि मेरी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। स्पष्ट है कि अब पाठक मुझसे कुछ अपेक्षा रखने लगे हैं, और मुझे उन पर खरा उतरना है, देखते हैं यह सिलसिला कहाँ तक जाता है…
इस अवसर पर मैं अपने सभी पाठकों का आभार व्यक्त करता हूँ… और नये ब्लॉगरों को शुभकामनायें देता हूँ कि वे हिन्दी को और आगे बढ़ायें, देशहित में लिखें, समाजहित में लिखें… आमीन।
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28 comments:
इस उपलब्धि पर मेरी बधाई स्वीकार करें।
दीपक भारतदीप
आमीन...
हमारे सबस्क्राइबर तो नौ ही बताया जा रहा है, लम्बी दूरी तय करनी है.
आपको बधाई. लिखते रहें...
badhai ho sir
keep writing
regards
badhi ho, lekh hamesha ki tarah achcha hai
bahut bahut badhaai.sneh banaye rakhiyega.aapke tips aage badhane me mere aur naye bloggers ke kaam aayenge
बधाई हो।
Badhai Ho
अरे वाह ये छोटी नही बड़ी खुशी की बात है ।
बहुत-बहुत बधाई ।
सुरेश जी, आपकी इस उपलब्धि से प्रसन्नता हुई। आपको हार्दिक बधाई।
"हालांकि यह कोई बहुत बड़ी उपलब्धि नहीं है"
कैसी बात करते हो सुरेश! इस छोटे से चिट्ठाजगत में यह बहुत बडी दो उपलब्धियां हैं.
लिखते रहो, आपका विश्लेषण बहुत सशक्त है एवं बहुत लोग तिलमिला जाते हैं. सत्य सदैव कुछ लोगों के लिये कडुवा होता है, अत: तिलमिलाने दो!!
सस्नेह
-- शास्त्री
-- हिन्दीजगत में एक वैचारिक क्राति की जरूरत है. महज 10 साल में हिन्दी चिट्ठे यह कार्य कर सकते हैं. अत: नियमित रूप से लिखते रहें, एवं टिपिया कर साथियों को प्रोत्साहित करते रहें. (सारथी: http://www.Sarathi.info)
आप बहुत झूठे हैं....
आपका मीटर तो 107 बता रहा है और आप 100 बता रहे हैं :)
बधाई
मुबारक हो ।
बधाई, सेकुलरहों से त्रस्त (फिर भी १००+ सबस्क्राइबर वाले) ब्लॉगर को! :)
बधाई हो आपको .
आप और आपका ब्लॉग ऐसे ही उतरोत्तर नई उचाईयों को छुए ऐसी शुभकामनाये .
bahut badhai
हमारे जैसे अनियमित ब्लागरों के लिये आप प्रेरणा जरूर देती है, आज भी इस साल की 100वीं पोस्ट लिख ही डाला और सम्पूर्ण लेख 280 हो चुके है। तिहरा शतक तो पहले आपका ही होगा, मेरा इस साल हो भी पायेगा, इसमें सशय है।
अपने फीड रीडर का तो मुझे पता नही है, कि इसे ब्लाग पर कैसे लगाया जाये। इसके बारें भी देखते है क्या माजरा है।
आपको बहुत बहुत बधाई।
बहुत-२ बधाई ! लेकिन उडनतशतरी नजर नही आ रहे हैं :)
सुरेश जी मुबारक हो, उन सौ या एक सौ सात में एक मैं भी हूँ। आज का लेख सहेज लिया है…।:)
सुरेशजी, आप हम जैसे अनेक चिट्ठाकारों के लिए प्रेरणाश्रोत हैं. बस यूं ही हौसला देते रहिए.
'प्रभु' "सुनील' की बधाई!
उपलब्धि पर मेरी बधाई स्वीकार करें!हमारे सबस्क्राइबर तो 58 ही बताया जा रहा हैआपका ब्लॉग नई उचाईयों को छुए ऐसी शुभकामनाये!
बहुत अच्छे, बहुत बधाईयाँ.
हमारी शुभकामनाएं स्वीकारें!
अच्छा लगा जानकर.. अभी मेरे चिट्ठे के भी दो साल पूरे होने वाले हैं.. 35 हजार हिट्स भी होने वाले हैं..(2 साल होते-होते हो जायेंगे..) 230 के लगभग लेख भी मैंने पोस्ट किये हैं.. आपका लेख पढकर सोचता हूं दो साल पूरे होने पर मैं भी अपने चिट्ठे का जन्मदिन मना ही डालूं.. पिछले साल नहीं मनाया था सो बहुत गालियां दिया होगा मेरा चिट्ठा.. :)
बिल्कुल यह एक उपलब्धि है.
बधाई
Congrats Suresh, may u scale new heights.My best wishes.
Please excuse me for i do not know Hindi Typing (though I tried sometime but of no avail) anyway, i have been reading you and some others for quite some time and feel good. keep it up.
:)
PI.
मुबारक हो बड़े भाई
आप को बहुत-बहुत वधाई.
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