Saturday, August 30, 2008

प्रधानमंत्री जी, “राष्ट्रीय शर्म” और भी हैं… हिन्दी ब्लॉगरों से सुनिये

Kandhamal National Shame & Manmohan
विश्व के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे नेताओं में से एक हमारे देश के प्रधानमंत्री ने कंधमाल की घटनाओं को “राष्ट्रीय शर्म” घोषित किया है। इसके पहले एकाध बार ही “राष्ट्रीय शर्म” का नाम सुना था मैंने, जी हाँ “गुजरात दंगों” के दौरान… उस वक्त भी कई कांग्रेसियों ने और यहाँ तक कि वाजपेयी जी ने भी इसे राष्ट्रीय शर्म का नाम दिया था। सवाल उठता है कि एक देश के लिये “राष्ट्रीय शर्म” क्या होनी चाहिये? राष्ट्रीय शर्म के क्या मायने हैं? क्या इस परिभाषा के अनुसार पूरे देश को शर्म आना चाहिये, शर्म से डूब मरना चाहिये या शर्म के मारे सुधर जाना चाहिये, पश्चाताप करना चाहिये या माफ़ी माँगना चाहिये? जब राष्ट्रीय शर्म घोषित हुई है तो देश का कुछ तो फ़र्ज़ बनता ही है, जैसे कि राष्ट्रीय आपदा के दौरान हर देशवासी का फ़र्ज़ बनता है कि वह कुछ न कुछ आर्थिक सहयोग करे, उसी प्रकार देशवासी किसी राष्ट्रीय शर्म पर कम से कम मुँह लटका कर तो बैठ ही सकते हैं।

साठ साल में सिर्फ़ दो बार ही राष्ट्रीय शर्म आई? आईये अब एक लिस्ट बनाते हैं कि गुजरात और उड़ीसा के दंगों के अलावा क्या-क्या राष्ट्रीय शर्म हो सकती हैं, या होना चाहिये (लेकिन हैं नहीं)। इस सूची में आप भी अपनी तरफ़ से एक-दो शर्म डाल सकते हैं, जब शर्म की यह सूची बहुत लम्बी हो जायेगी तब इसे माननीय प्रधानमंत्री को भेजा जायेगा, इस सूची को अनुमोदन के लिये कांग्रेस और भाजपा के अन्य नेताओं को भी भेजा जायेगा और उनसे पूछा जायेगा कि इसमें से कोई मुद्दा “शर्म” की श्रेणी में आता है या नहीं? (बिलकुल निचोड़कर भेजा जायेगा साहब, क्योंकि तब तक यह लिस्ट “शर्म” से पानी-पानी होकर भीग चुकी होगी) –



1) जम्मू के तीन लाख से ज्यादा पंडित अपने ही देश में शरणार्थी बने हुए हैं, यह राष्ट्रीय शर्म है या नहीं?

2) गोधरा में कुछ हिन्दू जला दिये जाते हैं, तब किसी को शर्म नहीं आई?

3) आज़ादी के बाद 5000 से अधिक हिन्दू-मुस्लिम दंगे हो चुके हैं (अधिकतर “सेकुलरों” की सरकारों में), यह राष्ट्रीय शर्म है या नहीं?

4) विश्व के कम भ्रष्ट देशों में भारत का स्थान बहुत-बहुत नीचे है और इसकी छवि एक “बिकाऊ लोगों वाले देश” के रूप में है, यह राष्ट्रीय शर्म है या नहीं?

5) पिछले दस वर्षों में लाखों किसान आत्महत्या कर चुके हैं, यह राष्ट्रीय शर्म है या नहीं?

6) 525 सांसदों में से दो तिहाई पर चोरी, हत्या, बलात्कार, लूटपाट और धोखाधड़ी के आरोप हैं, ये शर्म है या गर्व?

7) मुफ़्ती मुहम्मद और हज़रत बल के दबाव में आतंकवादी छोड़े जाते हैं, कंधार प्रकरण में घुटने टेकते हुए चार आतंकवादियों को छोड़ा गया, शर्म आती है या नहीं?

8) देश की 40 प्रतिशत से अधिक जनता गरीबी की रेखा के नीचे है, यह राष्ट्रीय शर्म है या नहीं?

9) भारत नाम की “धर्मशाला” में लाखों लोग अवैध रूप से रह रहे हैं, यह राष्ट्रीय शर्म है या नहीं?

10) सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद शाहबानो केस बदला, दिल्ली में अतिक्रमणकारियों को शह दी गई, जस्टिस रामास्वामी को बचाने के लिये सारे भ्रष्ट एक सुर में बोले थे, अफ़ज़ल गुरु, अबू सलेम, तेलगी सब मजे कर रहे हैं, कभी शर्म आई थी कि नहीं?

11) देश के करोड़ों बच्चों को दोनों समय का भोजन नहीं मिलता है, यह राष्ट्रीय शर्म है या नहीं?

12) करोड़ों लोगों को प्राथमिक चिकित्सा तक उपलब्ध नहीं है, यह राष्ट्रीय शर्म है या नहीं?

मनमोहन जी, माना कि अपने “बॉस” को खुश करने के लिये ईसाईयों पर हमले को आपने “राष्ट्रीय शर्म” बता दिया, लेकिन ज़रा कभी इस “शर्म की लिस्ट” पर भी एक निगाह डाल लीजियेगा…

तो ब्लॉगर बन्धुओं, अब क्या सब कुछ मैं ही लिखूंगा? कभी तो कोई पोस्ट “छटाँक” भर की लिखने दो यार… चलो अपनी-अपनी तरफ़ से “एक-एक बाल्टी शर्म” इस लिस्ट में डालो और “आज तक की सबसे ज़्यादा सेकुलर सरकार” (जी हाँ, क्या कहा विश्वास नहीं होता? अरे भाई, राष्ट्रपति हिन्दू, उपराष्ट्रपति मुस्लिम, प्रधानमंत्री सिख और इन सबका बॉस "ईसाई", है ना महानतम सेकुलर) को भेजने का बन्दोबस्त करो…

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18 comments:

अनुनाद सिंह said...

भारत के राष्ट्रपति/प्रधानमन्त्री का विदेशों में एवं अपने ही देश देश में भारत की अपनी भाषा में न बोलना राष्ट्रीय शर्म है।


सौ करोड़ से अधिक जनों वाले इस देश का एक कुटिल विदेशी के संकेतों पर नाचना महान शर्म की बात नहीं है?

COMMON MAN said...

KUCHH DINON BAAD TO EK BHARTIYA KO YAHAN PAIDA HONE MEN SHARM AANE LAGEGI, AGAR AISE HI CHALTA RAHA TO.

जंगबाज़ said...

कुछ राष्ट्रीय शर्म हमारी तरफ़ से भी ग्रहण करें:

०१. "इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इस इंदिरा".....(राष्ट्रीय शर्म या राष्ट्रीय बेशर्म?)

०२. "बाकी देशों में राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री हैं. आपके देश में रिमोट कंट्रोल है. हम ओलिम्पिक में रिमोट कंट्रोल को इनवाईट कर रहे हैं": चीन सरकार

०३. "आपलोगों ने हमारे ऊपर सैकड़ों साल शासन किया. आपलोग बहुत अच्छे शासक थे. हम आपको फिर से इनवाईट करने आए हैं.": चिदंबरम इंग्लैंड में (विदेशी निवेशकों से)

०४. चीन ने आक्रमण कर दिया तो पता चला कि हमारे आयुध कारखानों में जूते बनते थे.

०५. हम आतंकवादियों द्वारा मारे जाने वाले लोगों की गिनती में सिर्फ़ इराक़ से पीछे हैं.

०७. सांसदों को घुस देकर सरकार बचाने के महान काम में दो बार एक ही पार्टी पकड़ी गई.

०८. जिनलोगों ने १९६२ में खुलकर चीन का समर्थन किया, वे सत्ता में भी हैं.

०९. किसी एक सम्प्रदाय के लोगों का देश के संसाधनों पर पहला हक़ बनता है. ये बेशर्मी किसकी है?

१०. अमेरिका से गेंहूं माँगा, जो मिला वो जानवरों को खिलाने लायक नहीं था.

संजय बेंगाणी said...

शर्म से पानी पानी हुआ मैं, क्या टिप्पणी दूँ?

michal chandan said...

हमारे देश के शिखंडी प्रधानमंत्री को उस वक्त तनिक भी शर्म नहीं आई जब हमारी ही धरती पर पाक का झंडा फहराते हुए इनके सरकारी मित्र सरकार को तमाचा जड़ते है।
हमारे माननीय शिखंडी प्रधानमंत्री अल्पसंख्यकों को विशेष दर्जा देने की बात करते है, जबकि हमें हमारी ही भूमि प्रयोग नहीं करने दी जा रहीं है। धिक्कार है मनमोहन सिंह के राष्ट्रीय शर्म की।

Anil Pusadkar said...

sikhon ka katl-e-aam karwane waali congress me rah kar sharm nahi aayi jisko uski sharm to nakli hi hogi

lata said...

Sachmuch dil chahta hai ki is list ko lekar RASHTRIYA SHARM DIWAS manane walon ke pas pahuncha jae aur unse iska jawab manga jae.

Pratik Jain said...

बार-2 भुगतने के बाद भी देश के लोग नीच कांग्रेस को वोट देकर सत्‍ता सौंप देते हैं और हमारे जैसे कइ बुदिध्‍जीवी वोट देने ही नहीं जाते हैं यही अपने आप में शर्म से डूब मरने वाली बात है।

सत्याजीतप्रकाश said...

शर्म तो इसके लिए भी आनी चाहिए-
1. दरअसल अंग्रेजी ही हम भारतीयों की मातृभाषा है- मनमोहन
2. कई मायनों में ब्रिटिश शासन भारत के लिए अच्छा था(आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों को गाली देना राष्ट्रीय शर्म नहीं है, मनमोहन जी)
3. मनमोहन जी, अल्पसंख्यक बहुल 90 जिलों को पहचान करना, और भारतीय के टैक्स से उन्हें 5500 करोड़ देना राष्ट्रीय शर्म नहीं है.
4. जब कोई बड़ा पेड़ गिरता तो धरती हिलती है-राजीव गांधी
5. हमारे लोगों ने तृणमूल के लोगों को ईंट का जवाब पत्थर से दिया-बुद्धदेब भट्टाचार्य
6. इस बयान में बुराई क्या है- सीताराम येचुरी.
7. इस देश में कहीं भी कभी भी आतंकवादी हमला हो सकता है-श्रीप्रकाश जायसवाल
8. निकट भविष्य में आतंकवाद की समस्या और नक्सली समस्या से निपटा नहीं जा सकता है-शिवराज पाटील.

पंगेबाज said...

हम शर्म निर्पेक्ष देश के नागरिक है , जहा डाल डाल पर सेकुलर लोग पाये जाते है.जी हा सेकुलर मतलब से कु लर यानी सेक उलर . यानी वो जो अल्पसंख्यको की चिंता मे उल्लू की तरह सूखता दिखाई दे , जहा रहे वहा बरबादी के आसार लादे , जिस पेड पर डेरा डाल दे उस पेड को सुखा दे और लक्ष्मी को ढो ढोकर अपने घर मे ढेर लगादे. जैसे पाटिल , मुलायम मनमोहन सच्चर नाम का खच्चर और ये घटिया सोच के नेहरू के दत्तक पुत्र बने पत्रकार :)

SHAMBHU said...

केवल मुसलमानों या ईसाइयों के खिलाफ हुए अत्याचार पर ही शर्म आती है। हिन्दु मकता रहे फर्क नहीं पड़ता। कश्मीर में आस्तीन के सांप पाल रखे हैं,जब भी शर्म नहीं आती,पहली बार वहां हिन्दु खड़ा हुआ है तो शर्म तो आनी ही है। लाल सलाम का भी दोहरा मापदंड,मुस्लिम कट्टरवाद का कभी विरोध नहीं।


शर्म के लिए बहुतेरी चींजे हैं।

madgao said...

शर्म संख्या-१ ११३करोड़ की आबादी वाले देश का प्रमुख अगर अपनीं जनता को उसकी भाषा में संबोधित न कर सके! श०सं-२ देश के प्रमुख पद पर आसीन व्यक्ति निर्णय के लिए वैटिकन की प्रतिनिधि का मुँह जोहता हो ! श० सं०-३ जो अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की पॆंशन पर पलता हो ! श० स०-४ जिसे महाराजा रणजीतसिंह की रियासत के बलात्कारियों को मुँहतोड़ जवाब देना न आता हो !

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

मुझे ऐसे टुच्चे प्रधानमन्त्री पर ही शर्म आती है जिसकी पूँछ एक विदेशी महिला के सर्वाधिकार युक्त हाथ के नीचे दबी हुई है। महिला ऐसी जिसका हिन्दुस्तानी सरोकारों से कोई भावनात्मक रिश्ता है ही नहीं।

Gyan vane said...

Hadd ho gaye besharmo ko sharm aae bhe to kis bat pe.
Hinduon ki gardan kate to kuch nahi aur esaaeyon/muslims ke pair me kanta chubh jaye to rashtriy sharm?
Kya ye desh hum hinduo ko chod ke bake sabhe ka hai?
Aane wale samay me to hindu paida hona bhe gunah karar diya jayega.

theprudentindian said...

Bravo!
Suresh add my a bit in this list and i am giving you some facts in an easy to decipher table form. This episode has been missed by many bloggers. For you and your esteemed readers, reproducing some excerpts from this post.
http://theprudentindian.wordpress.com/2008/05/22/all-sikhs-were-%e2%80%98murderers-of-indira-gandhi%e2%80%99-hence-1984-is-justified-implies-arjun-singh/
Mr. PM, following are some facts for your kind consideration. Please revisit these facts.

India has witnessed 2500 riots for past 60, years most of the time when Congress was in power.


Congress, 1984.


Gujarat

What triggered the unfortunate, that followed.…


Mrs. Indira Gandhi shot dead by her two ‘Sikh’ body guards.

Why?

Sikhs then were deeply hurt by Operation Blue Star. (Ie.flushing out the ‘Frankenstein’s Monestor called ‘Bhinderwal’- from Golden Temple in June 84.


56 or more innocent Men, Women and Children were burnt alive by an organized Islamic mob with a well thought out and executed plan in Godhara.

Why?

Because they were Hindus and worst (!) were Ram Bhakts! They were returning from Ayodha…a sin in this ‘secular’ country!?

Response


Even after 72 hours of selective killing of Sikhs in the National capital, army was not called out. Mr.Gavai then the Lt.Governor of Delhi when asked Rajiv (then PM of India) was ‘curtly’ told, “Gavili Ji you are a heart patient, so you should take rest”.


With in 24 hours the army was called in and deployed.

Please note then, army was in eye ball to eye ball with Pakistan at the border.

Who Suffered …


More than 4000 Sikhs were dragged out from their homes and were set on fire. Congress Goons led by some former ministers in this cabinet, killed them selectively.


Post Godhara 256 Hindus and 790 Muslims were killed.

What did Police do?


Absolutely NOTHING. Mr. PM name one ‘rioter’ who was shot dead by Police. Just one single name!


Scores of Hindus were shot dead TOO, by the Police in order to control the situations.

What did the Leader say?


Rajiv Gandhi addressing a rally at boat club in the National Capital New Delhi, “When a big tree falls, the earth is bound to shake”!! Rajiv never denied saying it.


“Action and Reaction are equal”. This is imputed to Modi by the Sec-Soc Media.

What did the Sec-Soc media do?


Till date, except for customary breast beating…absolutely nothing. Anti Sikh Carnage is found just a passing mention in end less Big Fights/Debates Op Eds etc.Precious air times and ink is saved to debate and discuss the Gujarat Riots!


The media then made chanting ‘Jai Shri Ram’ by the hapless persons as such a ‘provocation’ for the Islamists to set them on fire!

Lambasting all Gujaratis in general and Modi in particular since then. All of the Gujarat and its people are ‘maligned’ forever!

Some people..


People responsible were made central ministers.


Secularists celebrated when USA under the influence of ‘secular propaganda’ against Modi, denied him visa.

Data source:IntelliBriefs.

Some more facts for you, Good Dr.PM JI.

Godhara has a notorious history of riots,1947,52,59,61,65,72,74,80,83,89 and 90 all these riots happened during Congress’s rule.

Mr. Prime Minister, I know very well, ‘that two wrongs do not make one right’, neither ‘counting other’s sins would absolve me of my sins’. I irrevocably condemn the killing of any one, anywhere for any reason or cause, howsoever great it could be. But at the same time I am also against the purposeful, deliberate and unjustified ‘vilification’ of any one in particular and people of a particular state in general.

I am aghast to see the choice of word ‘holocaust’ for what happened in Gujarat post Godhara.

Mr. Prime Minister what do you call the ‘Anti Sikh Carnage of 1984’? As?

Is this a Congress Shame or not? As we all know who unleashed this 'Holocaust' on hapless Sikhs. period.

PI

theprudentindian said...

OH!
The table has not appeared as intended, kindly refer to this link.
PI

http://theprudentindian.wordpress.com/2007/10/25/so-what-did-the-doctor-say/

Nitish Raj said...

इस लिस्ट में मुझे जो शर्म के विष्य लगे-
५, ६, ८, ११, १२ और बाकी बचे मुझे नहीं लगते
वो सब हमारे द्वारा बनाए गए हैं। वैसे तो आपदा और शर्म में अंतर होना ही चाहिए।

SUNIL DOGRA जालि‍म said...

हर चीज़ मैं राजनीती?????

लिखने की आज़ादी से खिलवाड़ मत कीजिये कलम वीरो