Wednesday, August 6, 2008

“धर्मनिरपेक्ष” छक्के ताली बजाने लगे हैं… जम्मू वालों अब मान भी जाओ

Jammu Kashmir Secularism and Congress
धर्मनिरपेक्ष “भांड-गवैयों” की स्वयंभू मालकिन “महारानी” सोनिया गाँधी ने राजनाथ सिंह से फ़ोन पर जम्मू समस्या सुलझाने के लिये मदद हेतु बात की। सोनिया जी ने फ़रमाया कि “इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं होना चाहिये…” अहा !! कितने उच्च विचार हैं, बिलकुल “छँटे हुए” कांग्रेसियों की तरह। लेकिन क्या वे यह बतायेंगी कि “यह गंदी राजनीति शुरु किसने की है…” नहीं, नहीं… गुलाम नबी आजाद ने नहीं, वो तो सिर्फ़ एक “नौकर” है, उसकी इतनी हिम्मत नहीं है कि इतने गम्भीर मुद्दे पर वह सोच भी सके। असल में यह “कीड़ा” तो शाहबानो केस के फ़ैसले को उलटने के साथ ही भारतीय लोकतन्त्र के शरीर में घुस गया था, वही कीड़ा आज जब “कैंसर” बनकर लपलपा रहा है तो तमाम गाँधीवादियों और मानवाधिकारवादियों को जमाने भर के “लेक्चर” याद आने लगे हैं। “संयम रखना चाहिये…”, “बहकावे में नहीं आना चाहिये…”, “संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहिये…” आदि-आदि, और मजे की बात तो यह है कि ऐसे “लेक्चर” अक्सर हिन्दुओं को ही पिलाये जाते हैं। बहुसंख्यक हिन्दू भी महान प्रवचन सुन-सुनकर ढीठ टाइप के हो गये हैं। उन्हें मालूम रहता है कि बम विस्फ़ोट हुए हैं, “संयम बरतना है…”, हिन्दुओं का सामूहिक नरसंहार हुआ है, “धैर्य रखना है…”, अपने ही देश में रिफ़्यूजी बनकर दिल्ली में कैम्प में सड़ना है लेकिन विरोध नहीं करना है, गुजरात में ट्रेन में आग से कितने ही मासूम मारे जायें, उन्हें सहिष्णु बने रहना चाहिये… चाहे असम में कांग्रेस हिन्दुओं को अल्पसंख्यक बनाने पर उतारू हो या उनके वामपंथी भाई अपने बांग्लादेशी भाइयों को गले लगा-लगा कर इस “धर्मशाला रूपी” देश में घुसाते जा रहे हों, “उसे तो हमेशा संयम ही बरतना है…” क्यों? क्योंकि हिन्दू धर्म महान है, यह सदियों पुराना धर्म है… आदि-आदि। इसी संयम की पराकाष्ठा अफ़ज़ल गुरु के रूप में हमारे सामने आ रही है, जहाँ सुप्रीम कोर्ट भी उसे सजा दे चुका है, लेकिन फ़िर भी कांग्रेसी अपने “दामाद” को फ़ाँसी देने को तैयार नहीं हैं। बस संयम रखे जाओ, गुलाब के फ़ूल भेंट किये जाओ, सत्याग्रह(?) किये जाओ, गरज यह कि बाकी सब कुछ करो, “कर्म” के अलावा, यह है खालिस बुद्धिजीवी निठल्ला चिन्तन। (इसलिये खबरदार… कोई मुझे बुद्धिजीवी न कहे, और “धर्मनिरपेक्ष बुद्धिजीवी” तो बिलकुल नहीं, और कोई भी गाली चलेगी)।



असल में जम्मू के युवक भी सचमुच गलती कर रहे हैं, उन्हें पुलिस या राज्य सरकार पर अपना गुस्सा सड़कों पर उतारने की क्या जरूरत है? जम्मू क्षेत्र में जितने भी पीडीपी के स्थानीय नेता हैं, उन्हें घर से निकालकर चौराहे पर लाकर जूते से मारना चाहिये, पीडीपी नाम की “फ़फ़ूंद” जम्मू क्षेत्र से ही हटा देना चाहिये। और फ़िर रह-रह कर एक खयाल आता है कि यह सब हम किन “अहसानफ़रामोशों” के लिये कर रहे हैं? जिस कश्मीर की जनता को साठ साल में भी समझ में नहीं आया कि भारत के साथ रहने में फ़ायदा है या पाकिस्तान के साथ, उन मूर्खों को जबरदस्ती अपने साथ जोड़े रखने के लिये इतनी मशक्कत क्यों? अलग होना चाहते हैं, कर दो अलग… जवाहर सुरंग से उधर का घाटी वाला हिस्सा (लद्दाख छोड़कर) आजाद कर दो। मेरा दावा है कि पाकिस्तान भी इस “अवैध संतान” को गोद लेने को तैयार नहीं होगा। 5-10 साल में ही “अलग होने” का रोमांटिक भूत(?) सिर से उतर जायेगा। सारी अरबों रुपयों की सरकारी मदद बन्द कर दो, सारी केन्द्रीय परियोजनायें बन्द कर दो, सारी सब्सिडी बन्द कर दो, सेना के जवान वापस बुला लो और कश्मीर में पीडीपी और हुर्रियत को तय करने दो कि प्रधानमंत्री कौन बने और सरकार कैसे चले… छोड़ दो उन्हें उनके हाल पर। यही तो चाहते हैं न वे? आखिर क्यों हम अपने करदाताओं की गाढ़ी कमाई कश्मीर नामक गढ्ढे में डाले जा रहे हैं? जिस प्रकार पंजाब में जनता ने खुद आतंकवाद को कुचल दिया था, उसी प्रकार कश्मीर की जनता को भी बहुत जल्दी समझ में आ जायेगा कि भारत और पाकिस्तान में कितना भारी अन्तर है। इसलिये हे जम्मू वालों जब भी तुम्हारे द्वार पर “ताली” बजाते हुए धर्मनिरपेक्षतावादी आयें तुम भी उनसे यही मांगो कि पिछले 60 साल में दोनों हाथों से जितना कश्मीर को दिया है उसका ज्यादा नहीं तो आधा ही हमें दे दो…

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18 comments:

संजय बेंगाणी said...

कहने को कुछ नहीं है, मूक दर्शक बने हुए है.

hindugang said...

सुरेश जी अब बहुत हो चुका 5000 सालो की गुलामी से अब तो बहार निकलो अगर अब नही निकले तो हमेशा हमेशा के लिए ख़त्म होई जाओगे जम्मू केलोग हारे नही है ना ही हारेंगे श्री अमरनाथ बोर्ड को भूमि वापस मिल के रहेगी आज आप के ब्लॉग पर पहली बार आया काफी अच्छा लगा भाई लगे रहो

ek aam aadmi said...

achcha likha hai, aur bhi achcha ho yadi koi rajneetik dal banaya ja sake to, yadi indian muslim league ho sakti hai to hinduon ke liye Hindoo congress/league/dal kyon nahi ho sakta

ek aam aadmi said...

achcha likha hai, aur bhi achcha ho yadi koi rajneetik dal banaya ja sake to, yadi indian muslim league ho sakti hai to hinduon ke liye Hindoo congress/league/dal kyon nahi ho sakta

mahashakti said...

यह जम्‍मू की ही आग नही है अब भारत की आग बन चुकी है, देश के असली कांग्रेस है। जम्‍मू की आग में कांग्रेस आने वाली नस्‍लो को जला दिया जायेगा।

जय श्रीराम

भुवनेश शर्मा said...

पीडीपी ही क्‍यों कांग्रेस नाम की फफूंद को भी देश से हटाना पड़ेगा....तभी हमारा भविष्‍य और वर्तमान सुरक्षित रह सकेगा

बहुत हो गया धर्मनिरपेक्षता का नाटक....जब 100 साल बाद कृष्‍ण और राम और बुद्ध की भूमि पर कोई इनका नामलेवा भी नहीं रहेगा तब क्‍या होगा....जब हर जगह मुहम्‍मद और ईसा की संतानें राज कर रही होंगी

पर हम मूकदर्शक रहे बिना कर भी क्‍या सकते हैं...हजारों सालों से हमने यही किया है.

शर्म आती है जब एक विदेशी महिला हम पर राज करती है और उसके चरणसेवक मनमोहन और बिना रीढ़ के शिवराज पाटिल जैसे लोग आक्रामक तरीके से आतंकवादियों की भर्त्‍सना करने तक में डरते हैं....परमाणु डील करके अमेरिका की गोद में जाकर बैठने के बावजूद कूटनीतिक स्‍तर पर हमारे नेता चूहों जैसा आचरण करने पर उतारू हैं......नरेंद्र मोदी आगे बढ़ो, प्रधानमंत्री की कुर्सी के तुम्‍हीं असली हकदार हो और हिंदुस्‍तान के भविष्‍य के रखवाले भी

पंगेबाज said...

सुरेश जी ऐसा क्यो लगता है लिख आप रहे हो विचार मेरे है ? स्टार टी वी वाले पत्रकार परसो यही सवाल कर रहे थे कि अगर ऐसे मे जम्मू के बंद से परेशान कशमीरीयो ने पाक जाने के लिये मांग शुरु कर दि तो जम्मू वाले कही के नही रहेगे . अब उन्हे कौन समझाये कि अगर ऐसे ही देश से मांग उठती रही तो जो हम कहना चाहते है वही हो जायेगा .

राज भाटिय़ा said...

सुरेश जी कई बार ऎसे विचार मन मे आये आप ने आज लिख दिया, ओर आप की बात बिलकुल सही हे,सहमत हे आप की बात से, धन्यवाद

sanjay patel said...

सुरेश भाई;
ये आलेख नहीं आई ओपनर है,ज़लज़ला है.
इस देश में यदि अमन चैन चाहिये तो ये करना होगा:

१)सार्वजनिक धार्मिक अनुष्ठानों,रैलियों,शोभा यात्राओं और कथा प्रसंगो (किसी भी धर्म की हो)एकदम बंदिश लगाना होगी.धर्म एक निजी विषय होगा. देश के समस्त मंदिर और मस्ज़िदों, गुरूद्वारों, चर्चों का रखरखाव करने के लिये एक सर्वधर्म केन्द्रीय समिति बनाई जाए जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता,मीडिया के लोग भी शामिल होंगे.अध्यक्षता एक रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश करेगा.

२)किसी भी राजनैतिक पार्टी द्वारा जातिगत और धर्म आधार पर कोई प्रचार प्रसार नहीं किया जाएगा.किसी जाति विशेष को लाभ देने की बात चुनाव घोषणा पत्रों में नहीं की जा सकेगी.

३)किसी भी धार्मिक विवाद को सिर्फ़ और सिर्फ़ न्यायपालिका ही सुलझाएगी,उसमे किसी को राजनैतिक महात्वाकांक्षा नज़र आई तो उस इलाक़े के उस पार्टी के सांसद/विधायक/पार्षद की सदस्यता तुंरत प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी.

यदि ऐसा न हुआ सुरेश भाई और हालात कश्मीर जैसे ही बनते गए तो याद रखें (ये मैने नहीं कहा है स्व.राजेन्द्र माथुर ने कहा था..संयोग से कल उनकी जयंती है)कि धर्म के उन्माद में ये देश २२ राज्यों (तब २२ थे कृपया अपडेट कर लें)भारतों में बँट जाएगा....तो वेलकम धार्मिक उन्माद,आतंकवाद,साम्प्रदायिकता,अवसरवादिता एंड बी रेडी फ़ार भुखमरी,ग़रीबी,शोषण,अत्याचार...तब गाएंगे मिल के ....कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन..अंग्रेज़ों तुम ही भले थे ?

हर्षवर्धन said...

बहुत शानदार लिखा है। मुझे हर हिंदुस्तानी के दिल से यही बात निकल रही होगी।

राजीव रंजन प्रसाद said...

इस संवेदनशील विषय को कलम दे कर सचमुच आपने अलख जगाई है। आपका आलेख सश्क्त और सत्य है।


***राजीव रंजन प्रसाद

मिहिरभोज said...

सुरेश भाई क्या मस्त लिखते हैं आप ...यूं लगता है जैसे मन मस्तिष्क मैं चलती हुइ हर विचार को आपने शब्द दे दिये हों.....पर क्या हुआ यहां हिंदुसातानी जी ,और आनंद जी जैसे बुद्धीजीवी दिखाई नहीं दिये

संजीव कुमार सिन्हा said...

देश के हुक्ममरानों ने विगत २० सालों में जम्मू में हिन्दुओं के साथ जिस तरह का भेदभाव किया हैं, आज उसी का प्रतिसाद सामने आ रहा हैं.

पोटलीवाला बाबा said...

संजीवकुमार सिन्हा जी आपने लिखा.......देश के हुक्ममरानों ने विगत २० सालों में जम्मू में हिन्दुओं के साथ जिस तरह का भेदभाव किया हैं, आज उसी का प्रतिसाद सामने आ रहा हैं.

यहाँ प्रतिसाद शब्द ग़लत है...लिखिये आज उसी के ख़तरे या दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं.
ठीक है न सुरेश बाबू ?

Sanjay Sharma said...

इतना बढ़िया लिखे हैं और ताली पर रोक लगा रहें हैं . तो उपाय अपने पास हैं हम ताल ठोक रहे हैं .
कभी किसी ने कहा था
" ठोकर मार फोड़ दो उसको जिस बर्तन में छेद हो !
जल जाय वैसी लंका जहाँ भाई भाई में भेद हो ! "

Dr Prabhat Tandon said...

आपने बिल्कुल सही विशेलेषण किया है ,डरी और कायर सरकारों से देश नही चलता ।

bhartiya said...

Rajneeti per namak haram , deshdrohi musalmaanon ki auladon(Gandhi pariwar) ka kabja hai,Ye desh ko amerika jaise deson ko bech ker paisa kma rahe hain aur ak bra hissa aatankbadiyon ko bhej rahe hain. Unhen desh ki rajneeti se koi matlab nahin , desh jaye bhar main, paisa kamao aur salon sal baithh kar khao, aiss karo. Kuchh sal bad hindustani hindu, dusari sarkaron se uub jayenge, fir enki bari ayegi dubaraa kamane ki.Ab tak ka etihas yahi kahta hai.

Pratik Jain said...

सुरेशजी आपके लेख पुस्‍तकाकार रूप में मिल सकें तो बहुत खुशी होगी।