Friday, July 4, 2008

कश्मीर का बोझा ढोते हम मूर्ख भारतीय…

Kashmir Drastic Liability on India
(भाग-1 : कश्मीर - नेहरु परिवार द्वारा भारत की छाती पर रखा बोझ… से जारी)

अपनी इन्हीं देशद्रोही नीतियों की वजह से कश्मीरी नेताओं और जनता ने देखिये क्या-क्या हासिल कर लिया है–
1) कश्मीर घाटी से गैर-मुस्लिमों का पूरी तरह से सफ़ाया कर दिया गया है।
2) कई आतंकवादी, जिन्हें सुरक्षाबलों ने जान की बाजी लगाकर पकड़ा था, पैसा, बिरयानी आदि लेकर जेल से बाहर आजाद घूम रहे हैं।
3) कश्मीर घाटी में अलगाववादी भावनायें जोरों पर हैं, चाहे वह “खुद का प्रधानमंत्री” हो या फ़िर छः साल की विधानसभा।
4) पश्चिमी मीडिया (खासकर बीबीसी) के सामने हमेशा कश्मीरी मुसलमान रोते-गाते नजर आते हैं कि “हम पर भारतीय सुरक्षा बल बहुत अत्याचार करते हैं…”
5) केन्द्र से मिली मदद, सबसिडी और छूट का फ़ायदा उठाने (यानी हमारा खून चूसने) में ये “पिस्सू” सबसे आगे रहते हैं।
6) “कश्मीरियत” का झूठा राग सतत् अलापते रहते हैं, जबकि अब कश्मीरियत मतलब सिर्फ़ इस्लाम हो चुका है।
7) कश्मीरी सारे भारत में कहीं भी रह सकते हैं, कहीं भी जमीने खरीद सकते हैं, लेकिन कश्मीर में वे किसी को बर्दाश्त नहीं करते।

कुल मिलाकर कश्मीरियों के लिये यह “विन-विन” की स्थिति है (दोनो हाथों में लड्डू), फ़िर क्या वे मूर्ख हैं जो इतनी आसानी से ये सुविधायें अपने हाथों से जाने देंगे? ढोंगी मुफ़्ती मुहम्मद चाहते हैं कि आतंकवादियों के परिवारों का पुनर्वास किया जाये (जाहिर है कि केन्द्र के पैसे से, यानी हमारे-आपके पैसे से) जिसके लिये एक करोड़ों की योजना उन्होंने केन्द्र को भेजी है। हमेशा की तरह इस योजना को मानवाधिकारवदियों और धर्मनिरपेक्षतावादियों ने हाथोंहाथ लपक लिया है। इनसे पूछना चाहिये कि आखिर किस बात का पुनर्वास और मुआवजा? तुम्हारा लड़का हमसे पूछकर तो आतंकवादी नहीं बना था। वह तो ज़न्नत में 72 परियों के लालच में “जेहादी” बना था ना? फ़िर हमारे खून-पसीने की कमाई पर तुम क्यों ऐश करोगे? जरा इसराइल से सबक लो, वहाँ स्पष्ट नीति है कि आतंकवादी के पूरे परिवार को दण्ड दिया जाता है, बुलडोजर से उसका घर-बार उखाड़ दिया जाता है और आतंकवादी के परिवार वाले फ़िलीस्तीन की सड़कों पर भीख माँगते हैं। शायद सड़क पर भीख माँगती अपनी माँ को देखकर किसी कट्टर आतंकवादी का दिल पिघले…। जले पर नमक छिड़कने की इंतहा तो यह कि महबूबा मुफ़्ती कहती हैं कि घाटी से गये पंडितों का स्वागत है, हम उनकी सुरक्षा का पूरा खयाल रखेंगे, लेकिन महबूबा ने यह नहीं बताया कि पंडितों की जिस सम्पत्ति और मकानों पर मुसलमानों ने कब्जा कर लिया था, वह उन्हें वापस मिलेगा या नहीं। है ना दोगलापन…



अब देखते हैं कि कैसे कश्मीरी मुसलमान हमारा खून चूस रहे हैं… कश्मीर के बारे में आर्थिक आँकड़े टटोलने की कोशिश कीजिये आपकी आँखें फ़टी की फ़टी रह जायेंगी। आप क्या सोचते हैं कि कश्मीर में गरीबी की दर क्या हो सकती है, बाकी भारत के मुकाबले कम या ज्यादा? 10 प्रतिशत या 20 प्रतिशत? तमाम छातीकूट दावों के बावजूद हकीकत यह है कि कश्मीर में गरीबी की दर है सिर्फ़ 3.4 प्रतिशत जबकि भारत की गरीबी दर है अधिकतम 26 प्रतिशत (बिहार और उड़ीसा जैसे राज्यों में), और ऐसा क्यों है, क्योंकि उन्हें पर्यटन (जो कि 90% भारतीय पर्यटक ही हैं), सूखे मेवों और पशमीना शॉलों के निर्यात से भारी कमाई होती है। ऊपर से तुर्रा यह कि कश्मीर को केन्द्र की तरफ़ से भारी मात्रा में पैसा मिलता है, मदद, सबसिडी और सहायता के नाम पर…

CAGR की रिपोर्ट के अनुसार 1991 में कश्मीर को 1,244 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया जो कि सन् 2002 तक आते-आते बढ़कर 4,578 करोड़ रुपये हो गया था (सन्दर्भ-इंडिया टुडे 14 अक्टूबर 2002)। 1991 से 2002 के बीच केन्द्र सरकार द्वारा कश्मीर को दी गई मदद कुल जीडीपी का 5 प्रतिशत से भी अधिक बैठता है। इसका मतलब है कि कश्मीर को देश के बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा हिस्सा दिया जाता है, किसी भी अनुपात से ज्यादा। यह कुछ ऐसा ही है जैसे किसी परिवार के सबसे निकम्मे और उद्दण्ड लड़के को पिता का सबसे अधिक पैसा मिले “मदद(?) के नाम पर”। क्या आपको बचपन में सुनी हुई कोयल और कौवे की कहानी याद नहीं आई? जिसमें कोयल अपने अंडे कौवे के घोंसले में रख देती है, और कौवा उसके अंडे तो सेता ही है, कोयल के बच्चे भी जोर-जोर से भूख-भूख चिल्लाकर कौवे के बच्चों से अधिक भोजन प्राप्त कर लेते हैं, ठीक यही कश्मीर में हो रहा है, “वे” हमारे पैसों पर पाले जा रहे हैं, और वे इसे अपना “हक”(?) बताकर और ज्यादा हासिल करने की कोशिश में लगे रहते हैं। भारत के ईमानदार करदाताओं का पैसा इस तरह से नाली में बहाया जा रहा है। जब नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि “गुजरात से कोई टैक्स न लो और न ही केन्द्र कोई मदद गुजरात को दे” तो कांग्रेस इसे तत्काल देशद्रोही बयान बताती है। अर्थात यदि देश का कोई पहला राज्य, जो हिम्मत करके कहता है कि “मैं अपने पैरों पर खड़ा हूँ…” तो उसे तारीफ़ की बजाय उलाहने और आलोचना दी जाती है, जबकि गत बीस वर्षों से भी अधिक समय से “जोंक” की तरह देश का खून चूसने वाला कश्मीर “बेचारा” और “धर्मनिरपेक्ष”?

एक बार रेलयात्रा में गृह मंत्रालय के एक अधिकारी मिले थे, उन्होंने आपसी चर्चा में बताया कि कश्मीर में आतंकवाद कभी भी खत्म नहीं होगा, क्योंकि “आतंकवाद के धंधे” से जुड़े लगभग सभी पक्ष नहीं चाहते कि इसका खात्मा हो!!! और खुलासा चाहने पर उन्होंने बताया कि आतंकवाद से लड़ने के नाम पर कश्मीर में पुलिस, BSF, CRPF और सेना को केन्द्र से प्रतिवर्ष 600 से 800 करोड़ रुपया “सस्पेंस अकाउंट” में दिया जाता है, जिसका कोई ऑडिट नहीं किया जाता, न ही इस बारे में अधिकारियों से कोई सवाल किया जाता है कि वह पैसा कहाँ और कैसे खर्चा हुआ। इसी प्रकार का “सस्पेंस अकाउंट” प्रत्येक राज्य की पुलिस को मुखबिरों को पैसा देने के लिये दिया जाता है (अब वह पैसा मुखबिरों तक कितना पहुँचता है, भगवान जाने)।

अब इसे दूसरी तरह से देखें तो, कश्मीर के प्रत्येक व्यक्ति पर केन्द्र सरकार 10,000 रुपये की सबसिडी देती है, जो कि अन्य राज्यों के मुकाबले लगभग 40% ज्यादा है, और यह विशाल धनराशि राज्य को सीधे खर्च करने को दी जाती है (कोई भी सामान्य व्यक्ति आसानी से गणित लगा सकता है कि कश्मीरी नेताओं, हुर्रियत अल्गाववादियों, आतंकवादियों और अफ़सरों की जेब में कितना मोटा हिस्सा आता होगा, “ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल” की ताजा रिपोर्ट में कश्मीर को सबसे भ्रष्ट राज्य का दर्जा इसीलिये मिला हुआ है)। इसके अलावा अरबों रुपये की विभिन्न योजनायें, जैसे रेल्वे की जम्मू-उधमपुर योजना 600 करोड़, उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला योजना 5000 करोड़, विभिन्न पहाड़ी सड़कों पर 2000 करोड़, सलाई पावर प्रोजेक्ट 900 करोड़, दुलहस्ती हाइड्रो प्रोजेक्ट 6000 करोड़, डल झील सफ़ाई योजना 150 करोड़ आदि-आदि-आदि, यानी कि पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है, लेकिन एक अंधे कुँए में… तो इस बात पर किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिये कि वहाँ की आम जनता की आर्थिक हालत तमाम आतंकवादी कार्रवाईयों के बावजूद, देश के बाकी राज्यों के गरीबों के मुकाबले काफ़ी बेहतर है।

(भाग-3 में कश्मीर समस्या का एक हल “जरा हट के”…)
(भाग-3 में जारी रहेगा…)

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12 comments:

anima said...

Waiting for 3rd part...

भुवनेश शर्मा said...

सही लिखा है कुछ लोग नहीं चाहते कि आतंकवाद का खात्‍मा हो...अच्‍छा लिखा है...गांधी परिवार की भूमिका के बारे में जरा और विस्‍तार से लिखें

संजय बेंगाणी said...

हँसी तब आती है जब हिन्दू कट्टरपंथिता पर प्रहार करने वाले लोग कश्मीर के इस्लामि कट्टरपंथियों की आलोचना करने के स्थान पर “कश्मीरियत” का झूठा राग अलापने लगे है, कहीं हम मुसालमानो को गलत न समझे :)

Cyril Gupta said...

10,000 रु प्रति व्यक्ति हर साल की सब्सिडी? मुझे आशा है कि आपने मज़ाक किया हो.

इतना तो बिहार में किसी गरीब को साल भर हाड़-तोड़ कर मुश्किल से नसीब होता होगा.

Sanjay Sharma said...

आँखें खोल देने वाली पोस्ट .पर खुली आँख से दूसरी तरफ़ देखने की बीमारी है हम भारतियों में. एक बात बताएं अब सही हो या ग़लत हिंदू का बिखराव ही सरे समस्या को जन्म दिया है
. इसी मुफ्ती का बेटी राबिया थी जो विश्वनाथ के पधान मंत्री रहते हुए नाटक में अपहरण हुआ और दो दुर्धंत आतंकी के बदले मुक्त कराया गया .जबकि कांग्रेस को भरपूर गाली देकर राजा ने "राजा नही फ़कीर है देश की तक़दीर है" के नारे से गद्दी संभाली थी. नेहरू ने जो भी किया लेकिन बाकियों ने किया क्या?

jasvir saurana said...

baap re baap!!!!!itni adhik jankari kashmir ke bare me,aaj tak tak nahi malum tha,iske bare me.thanks for your information......and also tell us the solution.plz,i am with you.

राज भाटिय़ा said...

हमे अकल कब आये गी ?

राज भाटिय़ा said...

हमे अकल कब आये गी ?

mahashakti said...

चुनाव की बू अभी से आने लग गई है, अल्‍पसंख्‍यक नाम की रेवडि़याँ केन्‍द्र सरकार ने बटना शुरू कर दिया है। आज कर रेडियों और दूरदर्शन पर अल्‍पसंख्‍यक नाम का खूब जाप हो रहा है। अल्‍पसंख्‍यको मे भी सिर्फ रहीम और अब्‍लदुला आते है अन्य धर्म सम्‍प्रदाय तो जैसे विलीन ही हो गये।

अबकी बार तो जनता को इन नमक हरामों को सबक सिखाना ही पड़ेगा नही तो पता नही ये अपने आपको क्‍या समझेगे।

anup said...

Kandhar Plane highjack
if you go thru the list of the passenger apart from other VIPs you would find the name of the SON,
DAOGHTER-IN-LAW
AND GRAND CHILDREN
OF the then MEMBER OF PARLIAMENT
Sh.PRAFULLA KUMAR MAHESWARI
of CONGRESS-I
who is also one of the owner of Nav-Bharat group of papers.
very few people know about it.

sachin said...

acha likha he, is vishay par mene bhi 4 articles likhe hain, kripya dekhe..unke link ye rahe..
http://sachinsharma5.mywebdunia.com/2008/07/04/1215181432067.html?&w_d_=59A8CC6829C144B9DC543D17F7EC6456.node1

http://sachinsharma5.mywebdunia.com/2008/07/05/1215269465624.html

http://sachinsharma5.mywebdunia.com/2008/07/06/1215338452138.html

http://sachinsharma5.mywebdunia.com/2008/07/07/1215441787251.html

Pratik Jain said...

बंधु मैं तो यही सोचता हूं कि देश के हिंदू नीच कांग्रेसियों को वोट देना कब बंद करेंगे।