Sunday, June 8, 2008

मनमोहन जी, गोली मारना “अपरिहार्य” कब बनेगा?

महान अर्थशास्त्री और भारत के सबसे मजबूत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल ही में फ़रमाया कि महंगाई का बढ़ना “अपरिहार्य” है… महंगाई आज के दौर में जीवन की एक सच्चाई है (Inflation is a Fact of life), मेरे ख्याल से वे गलत नहीं कह रहे हैं, बल्कि उन्होंने तो सिर्फ़ एक ही बात गिनाई है जो “अपरिहार्य” है, ऐसी कुछ और बातें हैं जो “मेरा भारत महान” में अपरिहार्य हैं, जैसे –

1) पेट्रोल की कीमतें बढ़ना अपरिहार्य है
2) टैक्स (सर्विस टैक्स) आदि का बढ़ना अपरिहार्य (Fact of Life) है
3) भ्रष्ट नेता हमारे जीवन में अपरिहार्य है
4) “काला पैसा” (Black Money) भी अपरिहार्य है
5) आलसी, कामचोर और मक्कार सरकारी कर्मचारी भी अपरिहार्य हैं
6) खराब सड़कें अपरिहार्य हैं
7) बिजली चोरी करके बचने वाले अपरिहार्य हैं
8) गंदे शहर और अतिक्रमण हमारे लिये अपरिहार्य हैं
9) सांठगाँठ, अनियमिततायें, नेता-आईएएस-उद्योगपति गठजोड़ अपरिहार्य है
10) आतंकवाद, मारकाट, खून-खच्चर भी अपरिहार्य है
11) नेताओं के भव्य जन्मदिन अपरिहार्य हैं
12) पेट्रोल खरीदने की औकात न होने पर भी LPG से कारें-होटलें चलाने वाले अपरिहार्य हैं
13) किसानों की आत्महत्यायें भी अपरिहार्य है
14) बढ़ती जनसंख्या और बेरोजगारी, अपरिहार्य है….

और भी गिनाऊँ क्या? “मन्नू भाई”, मैं सिर्फ़ एक बात जानना चाहता हूँ, कि इन सब कामों के लिये जिम्मेदार व्यक्तियों को जेल में सड़ाना और गोली से उड़ाना कब अपरिहार्य होगा????

नोट : कभी-कभी छोटा ब्लॉग पोस्ट भी लिखना चाहिये, ऐसा एक वरिष्ठ ने कहा था…

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9 comments:

sanjay patel said...

मनमोहन के राज में मन मारना ही अपरिहार्य है.

Gyandutt Pandey said...

मनमोहन जी जो कह रहे हैं, हताश हो कह रहे हैं। इसका चुनावी परिप्रेक्ष्य में ठीक स्वर नहीं बनता।

भुवनेश शर्मा said...

आप और हम जैसे लोग तो फ्रस्‍ट्रेशन ही निकाल सकते हैं कोसकर....

मन्‍नू भाई के लिए एक लवलैटर हमने भी लिखा है-

http://sureshchiplunkar.blogspot.com/2008/06/blog-post.html

भुवनेश शर्मा said...

सॉरीजी गलती से आपका ही यूआरएल चेंप दिया...ये रहा मेरा वाला-

http://hindipanna.blogspot.com/2008/06/blog-post_07.html

संजय बेंगाणी said...

छोटी पोस्ट पसन्द आयी.

हर्षवर्धन said...

सुरेशजी
छोटी पोस्ट में आपने जितने बड़े और गंभीर सवाल उठाए हैं, उनका जवाब देना 'सरकार'के बस का नहीं है। आधे से ज्यादा की अपरिहार्यता इन्हीं की बनाई हुई है। संजय पटेलजी की बात कि मन मारना अपरिहार्य है एकदम सही है

अरुण said...

एक बात भूल गये जी टिपियाना भी अपरिहार्य है :)

Suresh Chandra Gupta said...

सुरेश जी, मेरे ब्लाग पर आने के लिए आपका धन्यवाद. आपका सुझाव सही है पर उसमें पुलिस, अदालत सब शामिल हैं. मैंने एक सरल उपाय सुझाया है जिसमें एक व्यक्ति है और है उसका संकल्प ख़ुद को सुधारने का जिससे घर सुधरेगा.

Rajesh Kamal said...

सुरेश जी,
आपने सही फ़रमाया... लेकिन इस लोकतंत्र के तंत्र - जाल से इससे ज्यादा की उम्मीद भी बेकार ही लगती है।