Sunday, May 25, 2008

तैयार हो जाइये सलमान के छिछोरेपन को झेलने के लिये

Salman Khan, Sony Set Max, Reality Show
एक “प्रोमो” से हाल ही में पाला पड़ा और मेरे ज्ञान में वृद्धि हुई कि मल्लिका शेरावत के “मर्द संस्करण”, ऐश्वर्या राय जैसी सुन्दरी को सरेआम चाँटा जमाने / गरियाने वाले, स्वाद और शौक के लिये काले हिरण का शिकार करने फ़िर विश्नोईयों द्वारा अदालत में नाक रगड़ दिये जाने के बावजूद दाँत निपोरने वाले, विजय माल्या के “प्रोडक्ट” की शान रखते हुए फ़ुटपाथ पर “कीड़े-मकोड़ों” को कुचलने वाले, यानी की तमाम-तमाम गुणों से भरपूर, महान व्यक्तित्व वाले “सुपरस्टार” (जी हाँ प्रोमो में उन्हें सुपरस्टार ही कहा जा रहा था), एक टीवी कार्यक्रम पेश करने जा रहे हैं। अमूमन (केबीसी का पहला भाग देखने के बाद से) मैं शाहरुख, सलमान या और किसी के इस प्रकार के करोड़ों रुपये खैरात में बाँटने वाले कार्यक्रम नहीं देखता, लेकिन यदि किसी अन्य कार्यक्रम के बीच में “ट्रेलर” या “प्रोमो” नाम की बला मेरा गला पकड़ ले तो मैं क्या कर सकता हूँ। जाहिर है कि जब इतने “सद्गगुणी” कलाकार कार्यक्रम पेश करने वाले हैं तो उसकी जमकर “चिल्लाचोट” की जायेगी, कसीदे काढ़े जायेंगे। प्रोमो से ही पता चला कि ये महाशय “दस का दम” नाम का कोई “Percentage” (प्रतिशत) वाला खेल भारत के लोगों और लुगाइयों को खिलाने जा रहे हैं (जबकि भारतवासी पहले ही Percentage के खेल में माहिर हैं)।

जिस प्रकार चावल की बोरी से एक मुठ्ठी चावल की खुशबू से ही उसकी क्वालिटी के बारे में पता चल जाता है, उसी प्रकार पहले ही प्रोमो को देखकर लगा कि यह कार्यक्रम मानसिक दिवालियेपन की इन्तेहा साबित होगा। नमूना देखिये – सलमान पूछ रहे हैं कि “कितने प्रतिशत भारतीय अपनी सुहागरात सोते-सोते ही बिताते हैं?” अब महिला (जो कि इस बेहूदा सवाल पर या तो खी-खी करके हँसेगी, या फ़िर शरमाने का नाटक करेगी) को इस सवाल का जवाब बताना है। प्रोमो का अगला दृश्य है – “एक महिला (या लड़की) सलमान के सामने घुटने टेक कर उससे प्रेम की भीख माँग रही है”, अगले दृश्य में दर्शकों की फ़रमाइश पर (ऐसा कहने का रिवाज है) सलमान एक फ़ूहड़ सा डांस करके दिखा रहे हैं, साथ देने के लिये एक प्रतियोगी को भी उन्होंने नाच में शामिल किया हुआ है, और उस “भरतनाट्यम” में वे एक गमछानुमा वस्त्र लेकर दोनो टाँगों के बीच से कमर के नीचे का हिस्सा पोंछते नजर आते हैं… आया न मजा भाइयों (शायद आपने भी यह प्रोमो देखा होगा)।



आजकल कोई भी टीवी कार्यक्रम हिट करवाने के लिये कोई न कोई विवाद पैदा करना जरूरी है, या फ़िर उस प्रोग्राम में नंगई और छिछोरापन भरा जाये, या फ़िर जजों के बीच तथा जज और प्रतियोगियों के बीच गालीगलौज करवाई जाये, फ़िर पैसा देकर उसका प्रचार अखबारों में करवाया जाये, ताकि कुछ मूर्ख लोग भी ऐसे कार्यक्रम देखने के लिये पहुँचें। प्रोमो में “सुहागरात” वाला सवाल तो एक बानगी भर था ताकि चालीस पार के अधेड़ सलमान पर “मर-मिटने वाली”(?) बालायें कार्यक्रम के प्रति ज्यादा आकर्षित हों। लगभग यही चोंचला शाहरुख खान अपने कार्यक्रम “क्या आप पाँचवी पास से तेज हैं?” में अपना चुके हैं, जहाँ वे अधिकतर महिलाओं को ही प्रतियोगी चुनते हैं, फ़िर पहले उन महिलाओं के शरीर पर यहाँ-वहाँ-जहाँ-तहाँ हाथ फ़ेरते हैं, ठुमके लगाते हैं या फ़िर अपमानित करके बाहर भेजते हैं। अमिताभ बच्चन कैसे भी हों, कम से कम केबीसी में उन्होंने कभी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया (चाहे उनके फ़ैन्स ने अपनी मर्यादा को त्याग दिया हो), ये एक बड़ा अंतर है जो अमिताभ और शाहरुख/सलमान जैसों के संस्कारों में स्पष्ट दिखता है।

हो सकता है कि सलमान अगले एपिसोड में पूछें कि “बताइये भारत में कितने प्रतिशत लोग अंडरवियर पहनते हैं?” सही जवाब आपको दिलायेगा एक करोड़ रुपये…। या अगला सवाल “भारत में कितने प्रतिशत लड़कियाँ लड़कों के साथ भागने की इच्छुक हैं?” एक अंतहीन सिलसिला चलेगा बकवास सवालों का, नया विवाद पैदा करने के लिये इन सवालों में “धार्मिक” सवालों को भी जोड़ा जा सकता है। जिस प्रकार मूर्खता की कोई सीमा नहीं होती, शायद छिछोरेपन की भी कोई सीमा नहीं होती। मजे की बात यह होगी कि इस कार्यक्रम में अधिकतर सवाल अधकचरे या गैरजिम्मेदारी वाले ही पूछे जायेंगे, हमें इंतजार रहेगा जब सलमान पूछें कि “भारत में सड़कों के डामर में कितने प्रतिशत का कमीशन चलता है?”, या “बिजली चोरी का सर्वाधिक प्रतिशत “इस” राज्य में है, बताइये कितना?”, अथवा “प्राइमरी स्कूलों का प्रतिशत ज्यादा है या शराब की दुकानों का?” जाहिर है कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला… जवाबों के प्रतिशत खुद ही कार्यक्रम निर्माताओं द्वारा तय किये जायेंगे, ऐसा कोई “रेफ़रेंस” नहीं दिया जायेगा कि “प्रतिशत” का यह आँकड़ा ये लोग कहाँ से उठाकर लाये।

तो बस बुद्धू बक्से को निहारते जाइये, जब शाहरुख मैदान में हैं तो सलमान क्यों पीछे रहें? साथ ही बजरंग दल वालों को भी बोल दीजियेगा कि तैयार रहें उन्हें काम मिलने ही वाला है…

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7 comments:

अरुण said...

मतलब आप बूद्धू बक्से को देखते है :)

अनुनाद सिंह said...

झेलें वे जो इनके जैसे अपराधियों को टीवी पर देखते हैं और इनका भाव बढ़ाते हैं। मुझसे तो इनकी बेवकूफियाँ सहन नहीं होती।
ये देश के भोले-भाले लोगों को पथभ्रष्ट बनाने के औजार बन चुके हैं।

Abhishek said...

बहुत पहले आपके ब्लॉग को मैं indiblogger के माध्यम से पढ़ा था, कुछ ही दिन में अपनी गलती का पता चल गया और मैंने आपके ब्लॉग को अपनी लिस्ट से निकाल दिया था। पर आज blogvaani ने फ़िर से आपके ब्लॉग के दर्शन करा दिए।
"जहाँ वे अधिकतर महिलाओं को ही प्रतियोगी चुनते हैं, फ़िर पहले उन महिलाओं के शरीर पर यहाँ-वहाँ-जहाँ-तहाँ हाथ फ़ेरते हैं, ठुमके लगाते हैं" आपने अपने मानसिक दिवालियेपन का न सिर्फ़ परिचय दिया बल्कि पूरा विज्ञापन भी कर दिया। कितनी घटिया दृष्टि है आपकी, मान गया सुरेश जी! वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूँ, कि शाहरुख (या कोई भी और प्रस्तुतकर्ता) कभी प्रतियोगी नहीं चुनते। उसके लिए एक अलग टीम होती है, और इस कार्यक्रम की टीम में वीर संघवी, उदय शंकर और सिद्धार्थ बासु जैसे लोग हैं।

और आप ने इस बात को बोल्ड में लिखा ताकि आपके जैसे और लोग भी इसे पढ़ें और आकृष्ट हों!
शर्मनाक और घटिया लेख.

Suresh Chiplunkar said...

@ abhishek :-
धन्यवाद अभिषेक जी, कम से कम मेरा एक लेख तो आपने पढ़ा, मैं अभिभूत हुआ कि इतने महान व्यक्ति ने मुझ जैसे घटिया व्यक्ति का लेख गलती से ही सही, पढ़ लिया। मेरी जानकारी तो कम है ही, आपने उदय शंकर, सिद्धार्थ बसु जैसे दिग्गजों का नाम लेकर मेरी आँखें खोल दीं, शायद इन्हीं लोगों ने शाहरुख को ऐसी छिछोरी हरकतें करने को कहा होगा :) वरना शाहरुख तो एकदम संत व्यक्तित्व हैं। आपने यदि अपने "प्रोफ़ाइल" को सार्वजनिक किया होता तो यह जवाब यहाँ नहीं लिखता बल्कि आपके व्यक्तिगत मेल पर और डीटेल्स के साथ लिखता, लेकिन पता ही नहीं चलता कि आखिर आपका "स्वयं का" महान ब्लॉग कौन सा है, या आपका मेल आईडी कौन सा है? जरा सामने तो आओ छलिये, छुप-छुप छलने में क्या राज है? :) :) :)

दीपक भारतदीप said...

सुरेशजी
आपने बढि़या लिखा है। हां, कुछ लोगांें को पसंद नहीं आयेगा। क्योंकि वह लोग चाहते हैं कि हिंदी वाले लिख कर बिना पैसे लिए उनका प्रचार करते हुए उन पर अपनी वक्रदृष्टि न डालें। आप समाज में जागरुकता पैदा करने वाला काम कर रहे है।
दीपक भारतदीप

Ghost Buster said...

प्रोमो से हुए कष्ट को हम समझ गए. हमारी पूरी सहानुभूति आपके साथ है. लगभग एक साल होने को आया है, हमने केबल कनेक्शन कटवा दिया था.

अमिताभ बच्चन से इन लम्पटों की तुलना अपने आप में बेमानी है. अमिताभ अपनी आधी से ज्यादा जिंदगी बौलीवुड के छिछोरे माहौल में गुजारने के बावजूद परिवार से मिले उच्च संस्कारों के दम पर अपनी शालीनता बरकरार रख पाए हैं. दूसरी ओर सलमान टुच्चे फिल्मी रंग ढंग में रंगे हैं.

असल में तेजी से बदलते हुए हिंदुस्तान में बहुत से अधकचरे किस्म के लोगों के पास पैसे की आमद भी तेज हुई है. ये लोग इन सितारों को भगवान् से कम का दर्जा नहीं देते. बाजार इसका पूरा लाभ लेने को तत्पर है.

anitakumar said...

हम ने तो बुद्धु बॉक्स देखना बहुत पहले बंद कर दिया था।