Monday, May 19, 2008

श्री जयंत नारलीकर द्वारा फ़लज्योतिष (भविष्यवाणी) की वैज्ञानिक जाँच करने का प्रयास

Astrology, Astronomy, Science, Jayant Narlikar
भारत में फ़लज्योतिष का इतिहास बहुत पुराना है, सदियों से ज्योतिषी विभिन्न तरीकों (ग्रहों की गणना, नाड़ी, ताड़पत्र आदि) से भविष्यवाणियाँ करके अपनी आजीविका चलाते रहे। लेकिन जैसे-जैसे शिक्षा का प्रसार हुआ और विज्ञान ने आम जनजीवन के दिमागों में ज्योति फ़ैलाने की शुरुआत की, धीरे-धीरे इनका “धंधा” कम हुआ। लेकिन जनसंख्या की बढ़ती रफ़्तार और जीवन की बढ़ती मुश्किलों ने व्यक्ति को अपना भविष्य जानने की उत्सुकता से मुक्त नहीं किया, प्रकारांतर से इस “धंधे” पर कोई खास असर नहीं पड़ा। हाल ही में इंग्लैंड में अदालत ने दक्षिण एशियाई ज्योतिषियों और भविष्यवाणीकर्ताओं पर किसी भविष्यवाणी के गलत साबित होने पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी है। महाराष्ट्र की अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति और कई समाज सुधारक वैज्ञानिक बुद्धिजीवी समय-समय पर ज्योतिषियों को “उपभोक्ता कानून” के अन्तर्गत लाने की माँग करते रहे हैं, जो कि वाजिब भी है, क्योंकि यजमान अन्ततः है तो एक “उपभोक्ता” ही। ज्योतिष समर्थकों का सबसे प्रमुख तर्क होता है कि ये “शास्त्र” सदियों पुराना है और पूर्णतः वैज्ञानिक पद्धति और गणनाओं पर आधारित है। अक्सर ज्योतिष समर्थकों और वैज्ञानिकों में इस पर बहस-मुबाहिसा होता रहता है कि फ़लज्योतिष (कुंडली देखकर भविष्यकथन) का वैज्ञानिक आधार क्या है? कैसे किसी बालक की कुंडली देखकर उसके भविष्य की घटनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है? इसमें गलती होने का प्रतिशत आमतौर पर कितना होता है? जन्म-समय क्या तय किया जाना चाहिये, ताकि दोनों पक्ष संतुष्ट हों? आदि-आदि।

पुणे विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति, इंटर-यूनिवर्सिटी खगोल शास्त्र एवं खगोल भौतिकी केन्द्र (आयुका) तथा प्रसिद्ध वैज्ञानिक जयन्त नारलीकर ने संयुक्त उपक्रम के तहत एक योजना तैयार की है, जिसमें फ़लज्योतिष और विज्ञान का आमना-सामना करने की कोशिश की है (इसमें पुणे विश्वविद्यालय की भूमिका केवल सांख्यिकीय आँकड़ों को एकत्र कर गणना करने / जाँचने की है)। वैज्ञानिक तरीकों और सांख्यिकी आँकड़ों के जरिये यह जानने की कोशिश की जायेगी, कि फ़लज्योतिष कितना कारगर है, या कितना वैज्ञानिक है, अथवा इसकी भविष्यवाणियाँ कितनी (कितने प्रतिशत तक) सटीक होती हैं, आदि-आदि। इससे दोनों पक्षों (फ़लज्योतिषियों / भविष्यवक्ताओं तथा वैज्ञानिकों / अंधविश्वास कहने वालों) को अपना-अपना पक्ष रखने में मदद मिलेगी। इस सम्बन्ध में विदेशों में कई प्रकार के शोध पहले से ही चल रहे हैं। इस समूची योजना का प्रारूप कुछ इस प्रकार का होगा –

प्रत्येक व्यक्ति की बुद्धि या कहें कि “दिमागी शक्ति” अलग-अलग होती है, जाहिर है कि इसका उस व्यक्ति के आने वाले जीवन पर गहरा असर पड़ता है, तो इस बात का प्रतिबिम्ब जन्म कुंडलियों में दर्शित होना चाहिये। कहने का मतलब यह कि जन्म कुंडली देखकर, उसका गहन “वैज्ञानिक” अध्ययन करके, फ़लज्योतिषी उस जातक के बारे में जान सकते हैं। इसी को विचार बनाकर इस जाँच प्रक्रिया को तय करने की कोशिश की गई है। एक मंदबुद्धि बच्चों के स्कूल के 100 बच्चों की जन्म-पत्रिका और जन्म समय (उनके माता-पिता की सहमति से) लिये जायेंगे, इसी प्रकार हमेशा 70% से अधिक अंक लाने वाले बच्चों की जन्म पत्रिकायें और जन्म समय एकत्रित किये जायेंगे। जो भी ज्योतिषी या ज्योतिष संस्था इस चुनौती को स्वीकार करेगी, उसे विभिन्न बच्चों की 40 जन्म-पत्रिकायें और जन्म-समय (अपने अनुसार जन्म पत्रिका बनाने के लिये अन्य “डीटेल्स” भी) दिये जायेंगे, उस ज्योतिषी या संस्था को एक माह में अध्ययन करके मात्र यह बताना है कि उक्त कुंडलियों में से कौन सी कुंडली मंदबुद्धि बालक की है और कौन सी कुंडली तीव्र बुद्धि बालक की (जाहिर है कि जो “घटना” घट चुकी है उसके बारे में कुंडली द्वारा जानना है)। प्रक्रिया के अनुसार ज्योतिषियों के 90% या अधिक परिणाम अचूक आये तो फ़लज्योतिष एक विज्ञान है यह सिद्ध करने की ओर निर्णायक कदम बढ़ेगा, जबकि यदि अध्ययनकर्ताओं के परिणाम 70% से कम निकले तो फ़लज्योतिष “विज्ञान” नहीं है यह अपने-आप सिद्ध हो जायेगा। इसी प्रकार यदि परिणाम 70% से 90% के बीच आते हैं तो फ़लज्योतिष और विज्ञान में सामंजस्य स्थापित करने और निश्चित परिणाम प्राप्त करने के लिये “सैम्पल” (40 या 100) का आकार बढ़ाया जायेगा, ताकि और अधिक अचूक परिणाम हासिल हो। इन सारे प्राप्त आँकड़ों का पुणे विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग में “डबल ब्लाइंड टेस्ट” पद्धति से मापन किया जायेगा। यह सारी प्रक्रिया पूर्णतः निशुल्क रहेगी, इच्छुक ज्योतिषी या ज्योतिष संस्था पुणे विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर सुधाकर कुंटे, सांख्यिकी विभाग, पुणे विश्वविद्यालय, पुणे – 411007 से कुंडलियाँ मंगवा सकते हैं। कुंडलियाँ मंगवाने के लिये उन्हें 11x9 साइज का बड़ा लिफ़ाफ़ा, वापस भेजने के लिये 35/- रुपये के टिकट लगाकर भेजना होगा।



यह पहली जाँच पूरी होने पर इसी प्रकार की और जाँचे (विवाह, मृत्यु आदि) करने की योजना है, ताकि ज्योतिष और विज्ञान के बीच चलने वाली बहस का निर्णायक निष्कर्ष निकले। इस योजना में पूरे भारत के किसी भी भाषा, प्रांत के ज्योतिषी शामिल हो सकते हैं, जो यह समझते हैं कि “ज्योतिष पूर्णतः विज्ञान है”। यह एक सतत चलने वाली लम्बी प्रक्रिया है, इसका उद्देश्य विशुद्ध रूप से यह जानना है कि “फ़लज्योतिष का कोई वैज्ञानिक आधार है या नहीं?” यदि है तो विज्ञान इसमें और क्या योगदान कर सकता है? और विज्ञान नहीं है तो क्यों न गलत-सलत भविष्यवाणियाँ करने वालों पर मुकदमा दायर किया जाये। ज्योतिषियों के सामने यह एक सुनहरा मौका है कि वे यह साबित करने की कोशिश करें कि पुरातन भारतीय ज्ञान, आज के विज्ञान से कहीं आगे था/है। इस चुनौती को स्वीकार करके और सफ़लता प्राप्त करके ज्योतिषी, सदा के लिये वैज्ञानिकों का मुँह बन्द कर सकते हैं… क्योंकि एक विरोधाभास यह भी है कि एक ओर तो पुणे विश्वविद्यालय ने “ज्योतिषशास्त्र” नामक विषय को शामिल करने से स्पष्ट मना कर दिया है, वहीं दूसरी ओर उज्जैन, (जो कि ज्योतिष और धर्म का एक प्रमुख स्थान माना जाता है) के विक्रम विश्वविद्यालय में ज्योतिषशास्त्र पर जोरशोर से पढ़ाई चल रही है और पीएच.डी दी जा रही है।

इस सम्बन्ध में प्रतिभागी और विद्वानजन, इस जाँच योजना के समन्वयक श्री प्रकाश घाटपांडे, डी २०२, कपिल अभिजात, डहाणुकर कॉलनी, कोथरुड पुणे (99231-70625) से भी सम्पर्क कर सकते हैं।

अंत में ताजा खबर : कल ही पुणे में सम्पन्न ज्योतिषियों की एक बैठक में सर्वसम्मति(?) से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि कोई भी ज्योतिषी इस चुनौती को स्वीकार न करे, यह ज्योतिषियों को बदनाम करने(??) का एक षडयन्त्र है। क्या ज्योतिषी सामना शुरु होने से पहले ही भाग खड़े होंगे…?

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8 comments:

विजयशंकर चतुर्वेदी said...

यह जोरदार आलेख है. अब इस कम्पीटीशन का नतीजा जानने की जिज्ञासा उत्पन्न हो गयी है.

Udan Tashtari said...

रोचक आलेख. फॉलोअप जरुर दिजियेगा कि हुई भी कि नहीं चैलेंन्ज.

ab inconvenienti said...

AB MAZAA AAYEGA

Lavanyam - Antarman said...

जो ज्योतिषाचार्य इस आधुनिक युग की चेलैन्ज को स्वीकारते हैँ
वे कितने अच्छे या घटिया हैँ उस पर भी आधार रहेगा चूँकि,
नारलीकर जी तो विद्वान हैँ ही --

Punit Pandey said...

किसी नें तो इस दिशा में कोई प्रयास किया। प्रयास तारीफ के काबिल है।

mamta said...

लगता है ज्योतिषिओं ने अपना भविष्य पहले ही देख लिया होगा इसी लिए सामना करने से डरते है।

yogssg said...
This comment has been removed by the author.
yogssg said...

ज्योतिष से जुड़े दो लेखों के लिंक यहाँ दे रहा हूँ आशा है बुद्धिजीवियों को खूब पसंद आयेंगे |

http://yssbrainrelease.blogspot.com/2009/09/blog-post_5117.html