Tuesday, April 1, 2008

तीसरे मोर्चे की बासी कढ़ी, बेकाबू महंगाई और पाखंडी वामपंथी

Third Front Communist Inflation Rate
माकपा के हालिया सम्मेलन में प्रकाश करात साहब ने दो चार बातें फ़रमाईं, कि “हम भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिये कुछ भी करेंगे”, कि “तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिशे जारी हैं”, कि “हम बढती महंगाई से चिन्तित हैं”, कि “यूपीए सरकार गरीबों के लिये ठीक से काम नहीं कर रही”, कि ब्ला-ब्ला-ब्ला-ब्ला… उधर भाकपा ने पुनः बर्धन साहब को महासचिव चुन लिया है, और उठते ही उन्होने कहा कि “हम महंगाई के खिलाफ़ देशव्यापी प्रदर्शन करने जा रहे हैं…”

गत 5 वर्षों में सर्वाधिक बार अपनी विश्वसनीयता खोने वाले ये ढोंगी वामपंथी पता नहीं किसे बेवकूफ़ बनाने के लिये इस प्रकार की बकवास करते रहते हैं। क्या महंगाई अचानक एक महीने में बढ़ गई है? क्या दालों और तेल आदि के भाव पिछले एक साल से लगातार नहीं बढ़ रहे? क्या कांग्रेस अचानक ही बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की खैरख्वाह बन गई है? जिस “कॉमन मिनिमम प्रोग्राम” का ढोल वे लगातार पीटते रहते हैं, उसका उल्लंघन कांग्रेस ने न जाने कितनी बार कर लिया है, क्या लाल झंडे वालों को पता नहीं है? यदि ये सब उन्हें पता नहीं है तो या तो वे बेहद मासूम हैं, या तो वे बेहद शातिर हैं, या फ़िर वे परले दर्जे के मूर्ख हैं। भाजपा के सत्ता में आने का डर दिखाकर कांग्रेस ने वामपंथियों का जमकर शोषण किया है, और खुद वामपंथियों ने “शेर आया, शेर आया…” नाम का भाजपा का हौआ दिमाग में बिठाकर कांग्रेसी मंत्रियों को इस देश को जमकर लूटने का मौका दिया है।

अब जब आम चुनाव सिर पर आन बैठे हैं, केरल और बंगाल में इनके कर्मों का जवाब देने के लिये जनता तत्पर बैठी है, नंदीग्राम और सिंगूर के भूत इनका पीछा नहीं छोड़ रहे, तब इन्हें “तीसरा मोर्चा” नाम की बासी कढ़ी की याद आ गई है। तीसरा मोर्चा का मतलब है, “थकेले”, “हटेले”, “जातिवादी” और क्षेत्रीयतावादी नेताओं का जमावड़ा, एक भानुमति का कुनबा जिसमें कम से कम चार-पाँच प्रधानमंत्री हैं, या बनने की चाहत रखते हैं। एक बात बताइये, तीसरा मोर्चा बनाकर ये नेता क्या हासिल कर लेंगे? वामपंथियों को तो अब दोबारा 60-62 सीटें कभी नहीं मिलने वाली, फ़िर इनका नेता कौन होगा? मुलायमसिंह यादव? वे तो खुद उत्तरप्रदेश में लहूलुहान पड़े हैं। बाकी रहे अब्दुल्ला, नायडू, चौटाला, आदि की तो कोई औकात नहीं है उनके राज्य के बाहर। यानी किसी तरह यदि सभी की जोड़-जाड़ कर 100 सीटें आ जायें, तो फ़िर अन्त-पन्त वे कांग्रेस की गोद में ही जाकर बैठेंगे, भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के नाम पर। क्या मिला? नतीजा वही ढाक के तीन पात। और करात साहब को पाँच साल बाद जाकर यह ज्ञान हासिल हुआ है कि गरीबों के नाम पर चलने वाली योजनाओं में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को छूट देने के कारण महंगाई बढ़ रही है… वाह क्या बात है? लगता है यूपीए की समन्वय समिति की बैठक में सोनिया गाँधी इन्हें मौसम का हाल सुनाती थीं, और बर्धन-येचुरी साहब मनमोहन को चुटकुले सुनाने जाते थे। तीसरे मोर्चे की “बासी कढ़ी में उबाल लाने” का नया फ़ण्डा इनकी खुद की जमीन धसकने से बचाने का एक शिगूफ़ा मात्र है। इनके पाखंड की रही-सही कलई तब खुल गई जब इनके “विदेशी मालिक” यानी चीन ने तिब्बत में नरसंहार शुरु कर दिया। दिन-रात गाजापट्टी-गाजापट्टी, इसराइल-अमेरिका का भजन करने वाले इन नौटंकीबाजों को तिब्बत के नाम पर यकायक साँप सूंघ गया।

इन पाखंडियों से पूछा जाना चाहिये कि –
1) स्टॉक न होने के बावजूद चावल का निर्यात जारी था, चावल निर्यात कम्पनियों ने अरबों के वारे-न्यारे किये, तब क्या ये लोग सो रहे थे?

2) तेलों और दालों में NCDEX और MCX जैसे एक्सचेंजों में खुलेआम सट्टेबाजी चल रही थी जिसके कारण जनता सोयाबीन के तेल में तली गई, तब क्या इनकी आँखों पर पट्टी बँधी थी?

3) आईटीसी, कारगिल, AWB जैसे महाकाय कम्पनियों द्वारा बिस्कुट, पिज्जा के लिये करोड़ों टन का गेंहूं स्टॉक कर लिया गया, और ये लोग नन्दीग्राम-सिंगूर में गरीबों को गोलियों से भून रहे थे, क्यों?

जब सरकार की नीतियों पर तुम्हारा जोर नहीं चलता, सरकार के मंत्री तुम्हें सरेआम ठेंगा दिखाते घूमते हैं, तो फ़िर काहे की समन्वय समिति, काहे का बाहर से मुद्दा आधारित समर्थन? लानत है…। आज अचानक इन्हें महंगाई-महंगाई चारों तरफ़ दिखने लगी है। ये निर्लज्ज लोग महंगाई के खिलाफ़ प्रदर्शन करेंगे? असल में यह आने वाले चुनाव में संभावित जूते खाने का डर है, और अपनी सर्वव्यापी असफ़लता को छुपाने का नया हथकंडा…


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7 comments:

अरुण said...

भाइ जी चुनाव पास है और ये बंदे दुबारा आते नही इन्हे भी पर्ता है तो नोट कब बनायेगे जी..:)

anima said...

Satik aur santulit aalekh.
Aam Hindustani ki vyatha kafi spasht shabdo me vyakt ki he aapne...
Gaagar me Saagar
Abhinandan!!!

Baki aaj 1 April he :)

mahashakti said...

इन कांग्रेसियों को पता है कि अब दोबारा आने का चांस नही है इसलिये जितना अधिक जनता को पीस के पी सको उतना अच्‍छा है। यही कारण मँहगाई है और पैसा कांग्रेसी बना रहे है।

राज भाटिय़ा said...

सुरेश जी आप की कलम देश का हर नगरिक नही तो कम से कम आधे भी पढ ले तो,शायद उन्लोगो की भी आंखे खुले जो, भावनो मे वह कर इन लुटेरो को फ़िर बार बार चुनते हे, ओर भुगता सब को पडता हे,धन्यवाद एक ओर सच बोलने का

संजय बेंगाणी said...

भाऊ चुनाव सर पर है और चाहते है ये शांति से हार मान लें. इनका जितना जरूरी है, वरना भारत में चीन-लोबी का क्या होगा?

Srijan Shilpi said...

सही है।

Srijan Shilpi said...

सही है।