Tuesday, April 22, 2008

215 पोस्ट, 20,000 हिट्स, 50 सब्स्क्राइबर… धीमी लेकिन तरक्की तो है

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बीच-बीच में अपने पिछले काम पर एक नजर डालना “सिंहावलोकन” कहलाता है, ये नाम किसने दिया ये तो पता नहीं (जरूर कोई “सिंह” रहा होगा जो “अवलोकन” करने निकल पड़ा होगा), और मैं कोई प्रेमचन्द या निराला तो नहीं हो गया हूँ कि “सिंहावलोकन” जैसा कुछ करूँ, लेकिन फ़िर भी दस मिनट रुककर मैंने अपने आँकड़ों को देखा। जब 26 जनवरी 2007 को ब्लॉगिंग की दुनिया में कदम रखा तब सोचा नहीं था कि इतना लिख पाऊँगा और पाठकों का स्नेह मुझे मिलेगा। 26 अक्टूबर 2007 (मात्र नौ महीने में) को जब मैंने 140 पोस्ट लिखीं और 10,000 हिट्स का आँकड़ा छुआ, तब मुझे अहसास हुआ कि “अरे, ये तो वाकई मैंने काफ़ी लिख लिया, और लोग पढ़ते भी हैं…” क्योंकि उसके पहले मैं समझता था कि नेट पर लिखना मतलब “नेकी कर कुँए में डाल” जैसा या फ़िर “फ़ोकट में भाड़ झोंकने” जैसा कुछ है, जिसे मैं अपने मन की खुशी के लिये करता रहता हूँ और मन की खुशी ही सबसे बड़ी बात है। मुझे भ्रष्ट नेताओं, अफ़सरों, अन्याय, अत्याचार से भरे पड़े समाज के “बड़े” लोगों को गरियाने, लतियाने, जुतियाने, में बहुत मजा आता है, मुझे एक आंतरिक खुशी मिलती है कि “चलो मैंने कुछ तो किया…” और वही करने मैं ब्लॉग पर आया था।

मेरे लेखों को अक्षरशः छापना अखबारों के बस की बात नहीं थी, जो लेख छपते थे, वे सम्पादक की काट-छाँट और तीखे शब्दों को उड़ाने के बाद “बिना दाँत-नाखूनों वाली बिल्ली” जैसे लगते थे। तब मैंने ब्लॉग लिखने के बारे में गम्भीरता से सोचा। शुरुआत में ब्लॉग जगत में अपना एक स्थान बना पाना मुझे मुश्किल लगा, लेकिन जैसा कि भीड़ भरी बस में घुसने के बाद किसी तरह जगह बन ही जाती है, उसी तरह पिछले साल-सवा साल में मैंने थोड़ी सी जगह बनाने की कोशिश की है।



जब अखबारों में फ़्री-लांसिंग करता था, तब प्रकाशन के बाद कुछ पैसे मिल जाया करते थे। अब ब्लॉग जगत में “मन की खुशी” तो है, लेकिन जेब की नहीं। 26 जनवरी 2008 को ब्लॉग जगत में एक वर्ष पूरा हुआ, उस दिन 175 पोस्ट और 14,000 हिट्स का आँकड़ा छुआ, और अगले तीन महीनों में अप्रैल में ये है आपके सामने 215 वीं पोस्ट और हिट्स 20,000 के पार। शुरु-शुरु में लगा था कि ये क्या हो रहा है? एकाध टिप्पणी आती थी, स्टेट काउंटर खिसकता ही नहीं था (मैंने उसे देखना तक बन्द कर दिया था), फ़िर धीरे-धीरे पाठक आने लगे, लोग सब्स्क्राइब भी करने लगे। जब 10,000 हिट्स थी तब सब्स्क्राइबर थे 23, जब ब्लॉगिंग का एक साल पूरा हुआ तब 38 सब्स्क्राइबर हो चुके थे और आज की तारीख में 50 से ऊपर सब्स्क्राइबर हैं, कहने का मतलब है कि धीमी ही सही, तरक्की तो हो रही है… लोग पढ़ रहे हैं, पाठक बढ़ रहे हैं, नये लोग जुड़ रहे हैं, लेख पसन्द कर रहे हैं, बगैर किसी विवाद में पड़े और बगैर कोई “गैंग” (समूह ब्लॉग) बनाये, एकल प्रयासों से यदि इतना कुछ मिलता है, तो मेरे हिसाब से काफ़ी है… ज्यादा अपेक्षा मैं नहीं करता, लेकिन इस वर्ष के अन्त तक 100 सब्स्क्राइबर हो गये तो मैं सन्तुष्ट हो जाऊँगा। हिन्दी ब्लॉग जगत के आकार और हिन्दी पाठकों की रुचि देखते हुए, कम में संतोष करना ही ठीक है। अब इंतजार है कुछ कमाई-धमाई का, गाड़ी में पेट्रोल डलता रहे तो ठीक रहता है ना!!! और इस मुगालते में जीने का मुझे पूरा हक है कि मेरे लिखे से कोई परिवर्तन आता है या सामाजिक क्रांति होती है।

पता नहीं वह ब्लॉग कैसे दिखते हैं जिन्हें 20,000 हिट्स रोज की मिलती हैं। मुझे तो यह आँकड़ा पाने के लिये ब्रिटनी स्पीयर्स, मैडोना या जेम्स बांड बनना पड़ेगा। :)

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14 comments:

संजय बेंगाणी said...

ब्रीटनी स्पेर बनाना तो ठीक नहीं, उसकी फोटो चिपकाने से भी हीट बढ़ जायेगी :) अगर मंजूर हो तो.

अच्छा लिखते है, आँकड़े तमाम उँचाईयाँ छुएगें.

अरुण said...

और अगर आप संजय भाई को या मोदी ,गुजरात को भी गरियाने घोषणा ही करदे हिट बढ जायेगे :)

संजय तिवारी said...

सन 2010. महीना अप्रैल. सुरेश चिपलूणकर का ब्लाग. सब्सक्राईबर 250 से ऊपर, औसत पेजव्यू हजार बारह सौ रोज. यानी हर महीने तीस पैंतीस हजार पेजलोड.

आप ही बताईये यह कम है क्या?

वैसे 2010 तक हिन्दी के कुछ ब्लागों पर मासिक एक-डेढ़ लाख से ज्यादा पेजव्यू होगा. लाख-डेढ़ लाख का आंकड़ा चाहते हैं तो लेखन में व्यापक बदलाव करने होंगे.

Udan Tashtari said...

महा जाल पर यह महा आंकड़े-आप महा बधाई के पात्र है. स्विकार करें. शुभकामनायें.

mahashakti said...

aapka likha mujhe kafi achchha lagata hai. aap achchha likhate hi hai.

aane vale samay men jaroor paridrishya badlega aur hindi ko pathak milege.

aapko mayajaal hi nahi aur bhi jagh kafi pathak milte hai. :)


aapko shubhkamnayen.

Kirtish Bhatt, Cartoonist said...

बहुत बहुत बधाई. आप संजय तिवारी जी की बात ध्यान में रखिये और लगे रहिये......हिन्दी ब्लोगिंग का भविष्य बहुत उज्जवल है.

Gyandutt Pandey said...

बधाई। जुते रहिये!

mamta said...

सुरेश जी बहुत-बहुत बधाई और २०१० के लिए शुभकामनाएं तो बस लिखते रहिये।

SHASHI SINGH said...

ये उत्साहवर्धक आंकड़े न होते तब भी आपका उद्देश्यपूर्ण और सार्थक लेखन मेरे लिए खास ही रहता। अब जब आंकड़े भी सहयोग कर रहे हैं तो अच्छा लिखने वालों को मैदान में बने रहना चाहिये। शुभकामना!

दीपक भारतदीप said...

सुरेश जी बधाई, आप बहुत प्रभावपूर्ण लिखते हैं, इसमें संदेह नहीं है.
दीपक भारतदीप

भुवनेश शर्मा said...

हम तो पहले से ही कह रहे हैं आप हिन्‍दी के टॉप ब्‍लागर्स में से हैं वह भी अपनी दम पर बगैर कोई टीम-टाम के.

लगे रहिए. शुभकामनाएं

अतुल said...

आपका तो महाजाल है पर फ़ांट नही दिखता ब्लाग पर. ब्लाग वाणी पर दिखा.

हर्षवर्धन said...

महाजाल फैलने के लिए बधाई।

सागर नाहर said...

सितम्बर २००८ में आपकी एक और पोस्ट आने वाली है जिसमें आप बतायेंगे कि हिट का आंकड़ा इक्यावन हजार पर पहुंच गया है और सदस्य भी १५१ हो चुके हैं। :)

बधाई स्वीकार करें।