सरकारें चाहती है सभी लोग बेईमान और भ्रष्ट बन जायें…
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हाल ही में उज्जैन नगर निगम ने पानी की दरें 60 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 150 रुपये प्रतिमाह कर दी। यानी कि सीधे ढाई गुना बढ़ोतरी। नगर निगम ने अपने आँकड़ों में स्वीकार किया कि वर्तमान में उज्जैन में लगभग 80,000 मकान हैं, जिनमें से करीब 45,000 घरों में वैध नल कनेक्शन हैं और 10,000 घरों में अवैध नल चल रहे हैं। यदि 10,000 अवैध घरों, झुग्गियों आदि को छोड़ भी दिया जाये तो वैध 45,000 घरों में से सिर्फ़ 15,000 से कुछ ही अधिक घरों से जल दर की वसूली हो पाती है, मतलब सिर्फ़ 25% लोगों से पानी का पैसा वसूला जाता है। 10,000 अवैध और 30,000 वैध पानी लेने वालों पर नगर निगम का कोई बस नहीं चलता है। बेशर्मी की पराकाष्ठा तो यह है कि सब कुछ मालूम होने के बावजूद ईमानदारी से पानी का पैसा चुका रहे लोगों पर बोझा बढ़ा कर 60 रुपये से 150 रुपये कर दिया गया। बड़े-बड़े संस्थानों, उद्योगों, राजनेताओं, उनके लगुए-भगुओं-चमचों, पहलवानों, जाति विशेष के नलों, सम्प्रदाय विशेष की कालोनियों के नलों का पैसा खुलेआम जमा नहीं होता। इन परजीवियों (Parasites) को पाल-पोस रहे हैं वे ईमानदार जल उपभोक्ता जो अपना पैसा भरते हैं। भारत में सरकारें निकम्मी होती हैं, ये बात सभी जानते हैं, सब-कुछ जानबूझकर भी रौबदार लोगों पर कोई कठोर कार्रवाई न होना इस बात का सबूत है कि सरकार में इच्छाशक्ति ही नहीं है, कि वह इन “खास” VIP लोगों से पानी का पैसा वसूल कर सके। अब ईमानदार उपभोक्ता यही सवाल पूछ रहा है, कि “मैं ही क्यों पानी का पैसा भरूँ? क्यों न मैं भी चोरी कर लूँ? पहली बात तो सरकार कुछ करेगी नहीं, यदि करने का मन बना भी ले तो नेता हैं बचाने के लिये, जब चोरी बढ़ते-बढ़ते 10-15 हजार रुपये की हो जायेगी, तब सरकार खुद कहेगी कि “अच्छा चलो छोड़ो, चार हजार रुपये दे दो…बाकी का माफ़”।
आँकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में बिजली का नुकसान (Loss) करीब-करीब 35% है। इस 35% में से अधिकतर नुकसान ट्रांसमिशन और सप्लाई के दोषों के कारण है। बिजली बिलों की वसूली में हालांकि गत कुछ वर्षों में सख्ती आई है, लेकिन यह सख्ती सिर्फ़ मध्यम वर्ग और आम आदमी के हिस्से ही है। उच्च वर्ग तो अपने उद्योगों में दादागिरी से बिजली चोरी करता है, निम्न वर्ग भी अपनी झोपड़ियों में दादागिरी से हीटर जला रहा है, पिस रहा है मध्यम वर्ग जो ईमानदारी से बिजली का बिल भर रहा है। वह ईमानदार बिजली उपभोक्ता भी सरकार से पूछता है कि अकेले मालनपुर (भिण्ड), पीथमपुर (इन्दौर), मण्डीदीप (भोपाल) जैसे Industrial Area में रोजाना करोड़ों की बिजली चोरी हो रही है, क्यों न मैं भी सीधे तार डालकर बिजली चोरी कर लूँ?![]()
देश के हर शहर में आधुनिक जमीन चोर हैं। दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों से मिलीभगत करके लोगों ने करोड़ों की जमीन अतिक्रमण करके दबा ली, उन पर आलीशान शोरूम, दफ़्तर खोल लिये, लाखों-करोड़ों रुपये कमा लिये, जब उच्चतम न्यायालय ने डंडा चलाया तो दिल्ली सरकार और केन्द्र सरकार किसके पक्ष में खड़ी हुई, चोरों के। सीलिंग को लेकर जमाने भर के अड़ंगे लगाये गये, अतिक्रमणकारी सड़कों पर आकर प्रदर्शन करने लगे, जमीनों पर नाजायज कब्जे वालों ने कहा “हमारा क्या कसूर है?”, और ईमानदारी से नक्शा पास करवाकर, नियमों के मुताबिक “सेट-बैक” छोड़ने वाला, अनुमति लेकर ही दूसरी मंजिल बनाने वाला भी खुद से पूछ रहा है… “मेरा क्या कसूर है?…”
केन्द्र सरकार द्वारा यह घोषित नियम है कि कुकिंग गैस LPG सिर्फ़ घरेलू खाना पकाने के लिये उपयोग की जायेगी, इसका कोई व्यावसायिक उपयोग नहीं होगा। हमें-आपको-आम आदमी को चारों तरफ़ दिखाई दे रहा है कि लगभग सभी होटलों में, ढाबों में, चाय ठेलों पर, छोटे-बड़े मिठाई शो-रूमों पर खुलेआम धड़ल्ले से 450/- रुपये का सिलेण्डर लेकर काम किया जा रहा है। जिनकी कार खरीदने की औकात तो है (लेकिन उसे पेट्रोल से चलाने की औकात नहीं है), वे हर दूसरे रोज अपनी कार में कुकिंग गैस भरवाते नजर आते हैं, या अपने घर की टंकी सरेआम कार में लगाते दिख जाते हैं। लेकिन यह सब कुछ सरकार(?) को नहीं दिखाई देता। सरकार सिर्फ़ नियम बनाने में लगी है – कि अब महीने में सिर्फ़ एक सिलेण्डर दिया जायेगा, कि 25 दिन के पहले गैस का नम्बर नहीं लगाया जायेगा आदि-आदि। आम आदमी जो बचा-बचाकर गैस उपयोग करता है, डीलर की झिड़कियाँ सुनता है, हॉकर की मान-मनौव्वल करता है, वह पूछता है कि “मेरा कसूर क्या है…?” मैं तो गैस चोरी भी नहीं कर सकता।
केन्द्र सरकार की कर्ज माफ़ी (Loan Waiver Scheme) की घोषणा मात्र से अकेले उज्जैन जिले के सहकारी बैंकों के 5000 करोड़ रुपये फ़ँस गये हैं। चूँकि अभी सिर्फ़ घोषणा हुई है, गाइडलाइन नहीं आई हैं, इसलिये लगभग सभी किसानों ने हाथ ऊँचे कर दिये हैं कि “काहे की वसूली… कर्जा तो माफ़ हो गया है…”। अब ईमानदार किसान जिसने बैंक का कर्ज समय पर चुका दिया था, खुद से पूछ रहा है कि उसने क्या गलती कर दी? जो उसे इस प्रकार की सजा मिल गई है।
गरज यह कि चारों तरफ़ खुलेआम लूट मची हुई है हर चीज में हर बात में… जिसका दाँव लग रहा है चोरी कर रहा है, डाके डाल रहा है। सरकार भी उन्हीं के साथ है… निकम्मी सरकारें पानी चोरी नहीं रोक पातीं, बिजली चोरी नहीं रोक पातीं, कुकिंग गैस का व्यावसायिक उपयोग नहीं रोक पातीं, परीक्षाओं में नकल नहीं रोक पातीं, बड़े उद्योगपति से टैक्स वसूल नहीं कर पातीं, अतिक्रमणकर्ता से जमीन खाली नहीं करवा पातीं, कर्ज वसूल नहीं कर पातीं तो उसे माफ़ कर देती हैं…। ऐसा लगता है कि हमारी नपुंसक सरकारों ने ठान लिया है कि कानून-व्यवस्था का राज तो उनसे चलेगा नहीं, क्यों न पूरी जनता को चोर, उठाईगीरा, बेईमान और भ्रष्ट बना दिया जाये… है ना मेरा भारत महान !!!
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6 comments:
बहुत सही लेख.
खासकर कार को सिलेण्डर से चलाने वालों का तो अंदाज ही निराला है. वे पूरे दिन कार को ऐसे घुमाते हैं जैसे उनके अलावा दुनिया में किसी और की कार रखने की औकात ही नहीं और हम जैसे मूर्ख किफायत से पेट्रोल खर्च करते हैं.....
सौ में से 99.99999999999999999999 बेईमान तो साला काहे का भारत महान.
फिलहाल तो आप यह सब लिख सकते हैं र हम इतना ही कह सकते हैं "क्या होगा इस देश का"!!
सुरेश जी अब जब सरकार ही चोर उच्च्को की हे तो जेसा राजा प्रजा भि तो वेसी ही होगी,लेकिन मे एक बात मानता हू एक इमानदार भुखो मर जाये गा लेकिन इन बेईमानॊ के साथ नही खडा होगा,(हमारे इमान दार प्र्धान्मत्री जी की बात अलग हे,उन के चारो ओर सभी दुध के धुले हे)
सागर जी आप कह रहे हे इस देश का कया होगा ? अरे जब घर मे नालयक ओलाद पेदा हो जाये तो जो उस घर का होता हे वही हमारे इस महान देश का होगा.
बिलकुल ठीक कहा आपने। अभी तक की नीतियों और उनके अनुपालन को देखते हुए साफ नतीजा निकाला जा सकता है कि सरकार चोरी और चोरों को प्रोत्साहित करती है। - आनंद
हम भ्रष्टन मे भ्रष्ट हमारे
आजा तू भी टोली मे
काहे फिरता द्वारे द्वारे..:)
bahut sahi likha, is des ko gathbandhan ke sarkerai barbad ker dagi. kabhi hum america ke khaas banne ke leya iran ke khilaf america ka saath datain hai jiske karan bharat iran gas pipe line pariyojna khatm ho gai to kabhi arakshan ke been baja ker desh ke logo ko jativad me fasa ker apna ullu sidha kertai hai. Bhagwan Bachayie inse.
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