Subscribe

RSS Feed (xml)

Powered By

Skin Design:
Free Blogger Skins

Powered by Blogger

Wednesday, February 20, 2008

Nathuram Godse - Mahatma Gandhi - Asthi Kalash


नाथूराम गोड़से का अस्थि-कलश विसर्जन अभी बाकी है…


गत 30 जनवरी को महात्मा गाँधी के अन्तिम ज्ञात (?) अस्थि कलश का विसर्जन किया गया। यह “अंतिम ज्ञात” शब्द कई लोगों को आश्चर्यजनक लगेगा, क्योंकि मानद राष्ट्रपिता के कितने अस्थि-कलश थे या हैं, यह अभी तक सरकार को नहीं पता। कहा जाता है कि एक और अस्थि-कलश बाकी है, जो कनाडा में पाया जाता है। बहरहाल, अस्थि-कलश का विसर्जन बड़े ही समारोहपूर्वक कर दिया गया, लेकिन इस सारे तामझाम के दौरान एक बात और याद आई कि पूना में नाथूराम गोड़से का अस्थि-कलश अभी भी रखा हुआ है, उनकी अन्तिम इच्छा पूरी होने के इन्तजार में।

फ़ाँसी दिये जाने से कुछ ही मिनट पहले नाथूराम गोड़से ने अपने भाई दत्तात्रय को हिदायत देते हुए कहा था, कि “मेरी अस्थियाँ पवित्र सिन्धु नदी में ही उस दिन प्रवाहित करना जब सिन्धु नदी एक स्वतन्त्र नदी के रूप में भारत के झंडे तले बहने लगे, भले ही इसमें कितने भी वर्ष लग जायें, कितनी ही पीढ़ियाँ जन्म लें, लेकिन तब तक मेरी अस्थियाँ विसर्जित न करना…”। नाथूराम गोड़से और नारायण आपटे के अन्तिम संस्कार के बाद उनकी राख उनके परिवार वालों को नहीं सौंपी गई थी। जेल अधिकारियों ने अस्थियों और राख से भरा मटका रेल्वे पुल के उपर से घग्गर नदी में फ़ेंक दिया था। दोपहर बाद में उन्हीं जेल कर्मचारियों में से किसी ने बाजार में जाकर यह बात एक दुकानदार को बताई, उस दुकानदार ने तत्काल यह खबर एक स्थानीय हिन्दू महासभा कार्यकर्ता इन्द्रसेन शर्मा तक पहुँचाई। इन्द्रसेन उस वक्त “द ट्रिब्यून” के कर्मचारी भी थे। शर्मा ने तत्काल दो महासभाईयों को साथ लिया और दुकानदार द्वारा बताई जगह पर पहुँचे। उन दिनों नदी में उस जगह सिर्फ़ छ्ह इंच गहरा ही पानी था, उन्होंने वह मटका वहाँ से सुरक्षित निकालकर स्थानीय कॉलेज के एक प्रोफ़ेसर ओमप्रकाश कोहल को सौंप दिया, जिन्होंने आगे उसे डॉ एलवी परांजपे को नाशिक ले जाकर सुपुर्द किया। उसके पश्चात वह अस्थि-कलश 1965 में नाथूराम गोड़से के छोटे भाई गोपाल गोड़से तक पहुँचा दिया गया, जब वे जेल से रिहा हुए। फ़िलहाल यह कलश पूना में उनके निवास पर उनकी अन्तिम इच्छा के मुताबिक सुरक्षित रखा हुआ है।

15 नवम्बर 1950 से आज तक प्रत्येक 15 नवम्बर को गोड़से का “शहीद दिवस” मनाया जाता है। सबसे पहले गोड़से और आपटे की तस्वीरों को अखंड भारत की तस्वीर के साथ रखकर फ़ूलमाला पहनाई जाती है। उसके पश्चात जितने वर्ष उनकी मृत्यु को हुए हैं उतने दीपक जलाये जाते हैं और आरती होती है। अन्त में उपस्थित सभी लोग यह सौगन्ध खाते हैं कि वे गोड़से के “अखंड हिन्दुस्तान” के सपने के लिये काम करते रहेंगे। गोपाल गोड़से अक्सर कहा करते थे कि यहूदियों को अपना राष्ट्र पाने के लिये 1600 वर्ष लगे, हर वर्ष वे कसम खाते थे कि “अगले वर्ष यरुशलम हमारा होगा…”

हालांकि यह एक छोटा सा कार्यक्रम होता है, और उपस्थितों की संख्या भी कम ही होती है, लेकिन गत कुछ वर्षों से गोड़से की विचारधारा के समर्थन में भारत में लोगों की संख्या बढ़ी है, जैसे-जैसे लोग नाथूराम और गाँधी के बारे में विस्तार से जानते हैं, उनमें गोड़से धीरे-धीरे एक “आइकॉन” बन रहे हैं। वीर सावरकर जो कि गोड़से और आपटे के राजनैतिक गुरु थे, के भतीजे विक्रम सावरकर कहते हैं, कि उस समय भी हम हिन्दू महासभा के आदर्शों को मानते थे, और “हमारा यह स्पष्ट मानना है कि गाँधी का वध किया जाना आवश्यक था…”, समाज का एक हिस्सा भी अब मानने लगा है कि नाथूराम का वह कृत्य एक हद तक सही था। हमारे साथ लोगों की सहानुभूति है, लेकिन अब भी लोग खुलकर सामने आने से डरते हैं…।

डर की वजह भी स्वाभाविक है, गाँधी की हत्या के बाद कांग्रेस के लोगों ने पूना में ब्राह्मणों पर भारी अत्याचार किये थे, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने संगठित होकर लूट और दंगों को अंजाम दिया था, उस वक्त पूना पहली बार एक सप्ताह तक कर्फ़्यू के साये में रहा। बाद में कई लोगों को आरएसएस और हिन्दू महासभा का सदस्य होने के शक में जेलों में ठूंस दिया गया था (कांग्रेस की यह “महान” परम्परा इंदिरा हत्या के बाद दिल्ली में सिखों के साथ किये गये व्यवहार में भी दिखाई देती है)। गोपाल गोड़से की पत्नी श्रीमती सिन्धु गोड़से कहती हैं, “वे दिन बहुत बुरे और मुश्किल भरे थे, हमारा मकान लूट लिया गया, हमें अपमानित किया गया और कांग्रेसियों ने सभी ब्राह्मणों के साथ बहुत बुरा सलूक किया… शायद यही उनका गांधीवाद हो…”। सिन्धु जी से बाद में कई लोगों ने अपना नाम बदल लेने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने दृढ़ता से इन्कार कर दिया। “मैं गोड़से परिवार में ब्याही गई थी, अब मृत्यु पर्यन्त यही मेरा उपनाम होगा, मैं आज भी गर्व से कहती हूँ कि मैं नाथूराम की भाभी हूँ…”।

चम्पूताई आपटे की उम्र सिर्फ़ 14 वर्ष थी, जब उनका विवाह एक स्मार्ट और आकर्षक युवक “नाना” आपटे से हुआ था, 31 वर्ष की उम्र में वे विधवा हो गईं, और एक वर्ष पश्चात ही उनका एकमात्र पुत्र भी चल बसा। आज वे अपने पुश्तैनी मकान में रहती हैं, पति की याद के तौर पर उनके पास आपटे का एक फ़ोटो है और मंगलसूत्र जो वे सतत पहने रहती हैं, क्योंकि नाना आपटे ने जाते वक्त कहा था कि “कभी विधवा की तरह मत रहना…”, वह राजनीति के बारे में कुछ नहीं जानतीं, उन्हें सिर्फ़ इतना ही मालूम है गाँधी की हत्या में शरीक होने के कारण उनके पति को मुम्बई में हिरासत में लिया गया था। वे कहती हैं कि “किस बात का गुस्सा या निराशा? मैं अपना जीवन गर्व से जी रही हूँ, मेरे पति ने देश के लिये बलिदान दिया था।

12 जनवरी 1948 को जैसे ही अखबारों के टेलीप्रिंटरों पर यह समाचार आने लगा कि पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये देने के लिये सरकार पर दबाव बनाने हेतु गाँधी अनशन पर बैठने वाले हैं, उसी वक्त गोड़से और आपटे ने यह तय कर लिया था कि अब गाँधी का वध करना ही है… इसके पहले नोआखाली में हिन्दुओं के नरसंहार के कारण वे पहले से ही क्षुब्ध और आक्रोशित थे। ये दोनों, दिगम्बर बड़गे (जिसे पिस्तौल चलाना आता था), मदनलाल पाहवा (जो पंजाब का एक शरणार्थी था) और विष्णु करकरे (जो अहमदनगर में एक होटल व्यवसायी था), के सम्पर्क में आये।

पहले इन्होंने गांधी वध के लिये 20 जनवरी का दिन तय किया था, गोड़से ने अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी में बदलाव किये, एक बार बिरला हाऊस जाकर उन्होंने माहौल का जायजा लिया, पिस्तौल को एक जंगल में चलाकर देख लिया, लेकिन उनके दुर्भाग्य से उस दिन बम तो बराबर फ़ूटा, लेकिन पिस्तौल न चल सकी। मदनलाल पाहवा पकड़े गये (और यदि दिल्ली पुलिस और मुम्बई पुलिस में बराबर तालमेल और खुफ़िया सूचनाओं का लेनदेन होता तो उसी दिन इनके षडयन्त्र का भंडाफ़ोड़ हो गया होता)। बाकी लोग भागकर वापस मुम्बई आ गये, लेकिन जब तय कर ही लिया था कि यह काम होना ही है, तो तत्काल दूसरी ईटालियन मेड 9 एमएम बेरेटा पिस्तौल की व्यवस्था 27 जनवरी को ग्वालियर से की गई। दिल्ली वापस आने के बाद वे लोग रेल्वे के रिटायरिंग रूम में रुके। शाम को आपटे और करकरे ने चांदनी चौक में फ़िल्म देखी और अपना फ़ोटो खिंचवाया, बिरला मन्दिर के पीछे स्थित रिज पर उन्होंने एक बार फ़िर पिस्तौल को चलाकर देखा, वह बेहतरीन काम कर रही थी।

गाँधी वध के पश्चात उस समय समूची भीड़ में एक ही स्थिर दिमाग वाला व्यक्ति था, नाथूराम गोड़से। गिरफ़्तार होने के पश्चात गोड़से ने डॉक्टर से उसे एक सामान्य व्यवहार वाला और शांत दिमाग होने का सर्टिफ़िकेट माँगा, जो उसे मिला भी। बाद में जब अदालत में गोड़से की पूरी गवाही सुनी जा रही थी, पुरुषों के बाजू फ़ड़क रहे थे, और स्त्रियों की आँखों में आँसू थे।

बहरहाल, पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करने और टुकड़े-टुकड़े करके भारत में मिलाने हेतु कई समूह चुपचाप काम कर रहे हैं, उनका मानना है कि इसके लिये साम-दाम-दण्ड-भेद हरेक नीति अपनानी चाहिये। जिस तरह सिर्फ़ साठ वर्षों में एक रणनीति के तहत कांग्रेस, जिसका पूरे देश में कभी एक समय राज्य था, आज सिमट कर कुछ ही राज्यों में रह गई है, उसी प्रकार पाकिस्तान भी एक न एक दिन टुकड़े-टुकड़े होकर बिखर जायेगा और उसे अन्ततः भारत में मिलना होगा, और तब गोड़से का अस्थि विसर्जन किया जायेगा।
========
डिस्क्लेमर : यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिये है, फ़ोकटिया बुद्धिजीवी बहस में उलझने का मेरा कोई इरादा नहीं है और मेरे पास समय भी नहीं है। डिस्क्लेमर देना इसलिये जरूरी था कि बाल की खाल निकालने में माहिर कथित बुद्धिजीवी इस लेख का गलत मतलब निकाले बिना नहीं रहेंगे।

, , , , , , , , , , , , ,

35 comments:

Lavanyam - Antarman said...

http://www.lavanyashah.com/2008/01/blog-post_30.html

सुरेश जी ,

गांधी जी का एक अस्थि कलश कनाडा में नही परन्तु अमरीका में है -- ये प्रविष्टी देखियेगा

joke-fun said...
This comment has been removed by the author.
joke-fun said...
This comment has been removed by the author.
हिन्दु चेतना said...

नाथूराम गोड़से जी एक महान नायक थे शायद गाँधी से भी ज्यादा अच्छे जिन्हों ने कभी भी अंग्रेजों की चापलूसी नही की और हमेशा से देश के बारे में हि सोचा। हमें हर साल श्री नाथूराम गोड़से जी का सहादत दिवस याद करने की जरुरत है और आज के युवा वर्ग को बताने की जरुरत है कि हम जिसे राष्ट्रपिता का काग्रेसी दर्जा दिये हुये है उसकी सच्चाई क्या है। अगर श्री नाथूराम गोड़से जी नही होते तो गांधी पाकिस्तान का और कितना तलवा चाटता और नोवाखालि और बटवारा में हिन्दु का खुन की तरह और कितनों का खुन पीता। धन्य है वो वीर जिसने अपना खुन दे कर भी हमारे देश की रक्षा किया हमें प्रतिक्षा नही संकलप करना होगा कि श्री नाथूराम गोड़से जी का अस्थी कलश अखण्ड हिन्दुस्तान कें पवित्र सिन्धु नदी में प्रवाहित हो और असख्य देशभक्त जिन्होंने अपने जान कि बाजी लगाई है उनकी आत्मा को शान्ती मिलें।

अरुण said...

आमीन

संजय बेंगाणी said...

महान लोगो की भूले भी महान होती है. संत ने राजनीति में दखल दे कर देश का अहित किया था.

mahashakti said...

नाथूराम गोडसे कतई गांधी विरोधी नही थी किन्‍तु सत्‍ता परिवर्तन के बाद गांधी वाद में जो परिवर्तन देखने को मिला। जिससे नाथ राम ही नही करीब राष्‍ट्रवादी युवा वर्ग आहत था। गोडसे ने जो किया वह राष्‍ट्र हित में ही था। आपको बधाई कि इतना अच्‍छा लेख प्रस्‍तुत किया। गांधी के बलिदान को नही भूला जा सकता है तो गोडसे के बलिदान को भी नही।

जय गांधी जय गोड़से

SUNIL DOGRA जालिम said...

बापू ने बलिदान दे दिया परन्तु कुछ देशद्रोही अब भी बाकि हैं बाज आ जाओ झूठ के पुलिंदे लिखने बालो.............

SUNIL DOGRA जालिम said...

वाह भाई.... इतने सीधे तो आप हैं नहीं की आप जानते भी नहीं की क्या झूद के पुलिंदे लिखे हैं आपने.... आपका दोगलापन तो इसी से जाहिर होता है की एक तो डिस्क्लैमेर लगाकर बहस से तौबा कर लेते हैं औए दूसरी तरागफ हमे बहस के लिए आमंत्रित करते है आप.................

RAJ said...

Godse was a man with Nationalism and Hinduism phenomena while Gandhi was a saint.

(After Independence Gandhi should leave politics for Patel or Nehru but due his interfere we loose Man,Money and Land.)

सुमन कुमार said...

सोच नाथू राम गोड्स की
जीवित रहना महात्मा गांधी का,
ठीक नहीं था, देश और खुद उनके सेहद के लिए.
आज सरेआम वलात्कार की जा रही है,
उनके सपनों के भारत की,
भर्ष्टाचार के बुलडोजर से .
मिटा दी गई है,
राम राज्य की निशानी,
अतिक्रमण का नाम देकर.
नहीं देख सकते थे हकीकत,
अपने सपनों के भारत की.
सांसे रुक जाती, जब होता,
मासूमों के साथ वलात्कार.
रूह कांप उठाता देखकर,
गरीबों का नरसंहार.
पूजा करते मंदिरों में......
अनसन करते, संसद के सामने.
हो सकता है, बेचैन आत्मा,
संसद भवन के पास भटकती,
मुक्ति के इन्तजार में.
कितना आगे था, सोच
नाथू राम गोड्स की,
जो भारत का वलात्कार होने से पहले,
कर दी, पवित्र आत्मा को मुक्त,
सदा के लिए...........

shishir said...

nathuram godse ke baare me jaankaari ke liye dhanyavaad. wo itne achchhe rashtrabhakta hain iska likhit tathya maine pahli baar dekha. gandhiji nathuram ke aage kahin nahi thahrate.saare desh ko nathuram par garva hona chahie. wah is dharti ke sachche sipahi the. aaz jab khas tarah ka chashma chehre se utarne laga hai to pata chala ki gandhi ji ki sadgi ke peeche kitna syah chehra hai. khair gandhi ji ka jyada kusur mujhe nazar nahi aata, kyonki unhe pata hi nahi ki dushman kaun hai.isliye dange aur separate rashtra banane se rokne ki counter ranneeti kahan se bana pate. gandhi ji rajneeti ke liye nitant ayogya the. rashtrapita ke layak nathuram godse ji hain na ki gandhi ji. jay hind

निर्झर'नीर said...

bahut mahattvpoorn jaankari dii hai aapne

Rohit said...

mein apki baat se purantya sahamat hu.lakin sunil dogra ji ne jo likha hai wo sahi nahi hai. unse meri request hai ke wo "mein aur gandhi"
2. rangila gandhi.
3. gandhi bharat ke liye abhishap
4. agar gandhi ne kuran padhi hoti to.
agar koi bhi en ko padh leta hai to wo ghandhi ko pujne ke jaghe thukne ko karega

shail said...

कोंग्रेस उन्ही मुग़ल आक्रंताओ की राजनितिक प्रतिनिधि है, वह उसी हिन्दू दब्बूपन को बढ़ाने वाली सत्ता है जो पिछले एक हजार साल से इस भारत भूमि का बलात्कार करती रही है... नेहरु (जिसने गाँधी का इस्तेमाल किया) और कोंग्रेस ने पाकिस्तान बनाया और अब उसका पोषण भी कर रही है...नेहरु और गांधीवाद सबसे खतरनाक शब्द हैं... राष्ट्रनायक गोडसे उस विवश हिन्दू हताशा का फल थे पर अगर हम वैचारिक और सांगठनिक रूप से गांधीवाद को समाप्त कर पाते तो श्रेष्ठ होता.. पर जो हुआ वह अच्छा हुआ (क्या वास्तव में? क्योंकि इस हत्या से गांधीवाद भारत का चरित्र ही बन गया..) पर अब देश को अब अपने शक्ति चरित्र में आना ही होगा..
ब्रह्मनाद ....

विजय सोहनी vijay sohani said...

मुझे आपका लेख अच्छा लगा, मैं आपकी बात से सहमत हूँ | लेकिन निम्न वेबसाईट http://www.hindi.mkgandhi.org/g_hatya.htm#top पर "गांधी की हत्या : सत्य का वध" लेख पढ़ा,जिससे मैं पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूँ |

Manish Dixit said...

Gandhi ke 4 putron (Harilal (1888-1948) who was born in India,
Manilal (1892-1956) born in India,
Ramdas (1897-1969) born in South Africa, and
Devdas (1900-1957) born in South Africa) ne Gandhi ko kabhi Bapu nahi kaha... Kyun? Kyun ki gandhi kabhi bhi apne privaar ke liye "Ahinsawadi" nahi rahe.. Na apne beton ke liye.. Na apni patni(wife) ke liye.. Charon Bete apni Maa se bahut pyaar karte the...
Jo apne beton ka "Bapu" nahi ho saka... Usi ko Congress ne Kitabon mein Saare Desh ka "Bapu" aur "Mahatma" bana diya. Aur hamari Aam Janta... Na Jaane yeh kab Jagegi aur Hamare desh ko such mein Freedom milegi...

sandip sinha said...

@sunil dogra, bhai pehle gandhi vadh padh lo, phir bahas me aana. be rational. gandhi ek saint tha na ki desbhakt while godse was a patriot not a saint. gandhi ki bhool ka natiza pakistaan aur ghatiya 1st pm of india.(nehru). pm le layak the patel,but due to gandhi we got bakwaas pm.

Nikhilesh Shandilya said...

Sunil ji Dogra ke liye kuch aur pustake.... "Vishwasghaat" and "Desh ki hatya" by Gurdutt. Aur ek visheh prarthna ki thoda addhyyan bhi suru kare.

vivek said...

Ye asthi kalash is desh ke prtyek deshbhakt hindu ke sir par karz hai jise utarana yani is asthi kalash ka ssamman sindhu nadi me visarajan karvane ka prytan karna harek hindu ka kartavya hai

Anonymous said...

aise lek likte rahiyee. aur in soyee huo ko jagte raheyeee.

Anonymous said...

A wonderful writeup.Full of information.It is a bad luck of this country to have political leaders like Gandhi and Nehru. Going beyound the article there are endless numbers of people like Sh Sunil Dogra.If a nation has been divided why should the Muslims stay in India. Any way,if at all they here in a Hinduland why should they be given preference and priority. Godse made a blunder ,the old man called the father of the nation was to die his own death and would have certainly died in a year or so.The man who played with the country called Nehru should have been killed.He was responsible for our territorial loss in NEFA and J@K.Bad luck for India that he ruled for sixteen years and made the country impotent.Good article indeed.

vivek singh said...

सुरेश जी में आपके लेख से पूर्णतया सहमत हूँ. महान राष्ट्रभक्त गोडसे के बारे में नयी जानकारी मिली..उसके लिए धन्यवाद.
गाँधी एक संत थे और उन्हें महात्मा की उपाधि कांग्रेस ने नहीं बल्कि एक महान राष्ट्र भक्त सुभाष चन्द्र बोस ने दी थी, वे गाँधी जी का बहुत आदर करते थे पर उन्हें गाँधी का कभी समर्थन हासिल नहीं हुआ.
मेरे विचार में गाँधी जी की वजह से ही देश ने एक वीर सपूत को खो दिया (बोस) और एक काले अँगरेज़ (नेहरु) को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला.
यह देश का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता हे की ऐसे अँगरेज़ परस्त और देशद्रोही लोग आज़ादी के बाद सत्ता में आये और आज भी देश में ऐसे ही लोगों की मानी जाती हे.
आज देश को संपूर्ण क्रांति की जरूरत हे ताकि सता में केवल देशभक्त लोग ही आयें. वन्देमातरम.

Bhupinder Bhatia said...

सुरेश जी के अति उत्तम लेख पर एक दो लोगों ने लिखा है की गाँधी एक संत थे . लगता है इन लोगों को भारत में रह कर भी संत का मतलब नहीं मालूम . अगर ये लोग चर्च वाला saint लिख देते तो शायद ठीक होता क्योंकि ऐसा saint होने के लिए निर्मल हृदय होना जरुरी नहीं होता, चालूपना चल सकता है, चालुपने से, हाथ की सफाई से, एक आध चमत्कार दिखाना होता है.
और गांधी जी से बड़ा यह चमत्कार कौन कर सकता था
रातों रात पटेल की बजाये नेहरु को प्रधानमंत्री दिया.

Ravinder Jayalwal said...

----:महात्मा गाँधी द्वारा कुछ बहुत बड़ी गलतियाँ :----
महात्मा गाँधी ने शरू में काफी अच्छे काम किये परुन्तु बुढ़ापे में कुछ बहुत बड़ी गलतियाँ कर बैठे .

जैसे उन्होंने नेहरु को प्रधान मंत्री बनाया जबकी सभी ने सरदार वल्लभ भाई का नाम दिया था . नेहरु ने गाँधी के कान में ऐसा क्या कह दिया की गाँधी ने सरदार वल्लभ भाई को प्रधान मंत्री पद से आपना नाम लेने को कह दिया?
अच्छा भला "असहयोग आन्दोलन " चल रहा था पर बीच में ही गाँधी ने छोटी सी बात के लिए आन्दोलन रोक दिया .
गाँधी भगत सिंह को फांसी से बचा सकते थे पर नहीं बचाया . क्यों ?
नेता सुभाष चंद्र बोस को कांग्रेस में देख कर वो क्यों चिड़ते थें और उनको वहाँ से निकलवा कर ही दम लिया . क्यों ?
नत्थू राम ने गाँधी का "वध " क्यों किया इस बात को तो सरकार ने बाहर आने ही नहीं दिया और उनके अदालत के बयान को ही बेन कर दिया .ऐसा क्यों किया गया ? क्या जनता को उनके मारने के कारण जानने का अधिकार नहीं है .
गाँधी ने अपने जीते जी देश का बटवारा क्यों होने दिया ये एक बहुत बड़ा सवाल है मेरा ?


गाँधी के "अंध" भक्तो को इन बातों का जवाब देना चाहिए .

swapnil said...

U R RIGHT RAVINDER JI......

sanjay said...

i think yu are fundamentalist hindu whre all yr thinking based on the manu smriti.your theory apparently shows that hindu means upper cast especiaaly brahmin.why you abuse oter cast especially muslim because tumahre jaise dhurt aur pakhandi brhmno ki wajah se hindu dharm ka nas hu hai.kyu muslimo aur angrjo ne tum par raj kiya kyoki tumahre liye hinu matlab uppr cast.loer cast dalit obc hinduo ka jitna bejjat aur apman tuhari biradri ne kiya hai utna to unhone bhi nhi kiya hai.tumare likne wale hath me tab kyo paralyis ho jata hai jab dalit bacward ko mandiro me ghusne nahi dete ho/balatkar karte ho/sir par gandh dhulwate ho/reservation ka virodh karte ho/sharm karo hindu-hidu ka dhol pitne par.......meri salah mano apna ghar shudharo....muslim/chritian par apne aap vijay mil jyegi

Anonymous said...

mahatma gandi ki hatya nahi huyi thi 'vadh' hua tha ,aur vadh ko sanatan dharm me manyanta prapta hai ,aadi shakti ne asuron ka vadh kiya tha ,ram ne ravan ka aur shri krishna ne kans ka vadha kiya tha , veer shiromni nathuram ne agar gandhi vadha 1940 me kar diya hota to na jane kitne kranikari aaj hamare beech zinda hote , aur aaj ke lutere rajniitigyon se loha le rahe hote ,nathuram godse dwara vadha ke uprant yadi unka bayan bharat sarkar prakashit krati to aaj nathuram aura aapte sahab gaddar nahii sachche deshbhakto ki shrediyo me aate ,badi bidambana hai ki hame bachpan se gandhi ji ke bare me ek yahi bat sunayee jaa rahi thi ki gandhi ji ko nathuram godse namak pagal ne goli maari thee, he bhagwan kaise kasi desh premiyon ko kya bana kar nayii peedhee ko bataya ja rahatha ,aankhe kholne ke liye dhanyavaad bharat sarkar aur khaskar congress hamesha se sachchaai chhupati aayii hai ,ab hamen godse, aapte,karkare, pahawa aadi ko unka uchit samman v itihas me sthan dilwana hoga muhim zari rakho vande matram

"JWALAMUKHI"

diya shah said...

nonsense and third class categary ka lekh aapke artikal me hamesha oneside hi hoti hai

Anonymous said...

nathuram godse was a great man....
i hate gandhi.... wo mahatma kehlane ke laayak bhi nahi hai.....
nathu raam godse ki jagah use suli pe latka dena chahiye tha.....
ya phir beech baazaar mein chappal khol kar maarna chahiye tha

Anonymous said...

IT IS WIERED THAT PEOPLE TALK OF A GREAT MOVEMENT LIKE IT WOULD HAVE BEEN EASY IF GANDHI WAS NOT THERE..... BUT THINK WHAT IF GANDHI WAS NOT THERE.... THE BRITISHERES WOULD HAVE LEFT INDIA AFTER A MUCH MORE BLOODY REVOLUTION... GANDHI WAS A MOVEMENT INITIATED BY THE POWER CRAZY NEHRU FAMILY...NURTURED BY THEM PICKING THE WEEKNESS OF EAST INDIA COMPANY.... THAT WAS TO THE POINT SUCCESSFUL.... AND NEHRU FAMILY STILL RULES US... IT IS NOW UP TO US TO THROW AWAY THE GANDHI FAMILY FROM INDIAN POLITICS

Ronak said...

A very short sighted article followed by non-sense comments by one sided thinkers, not even thinkers but emotional nationalists who even does not understand meaning of Rashtra.

If you go beyond today's Bharat, in the time Vedic culture, you can see the difference between so shallow thinking and feelings and deep spiritual principle based actions. That’s how Aryans had created our culture. Do not kill people who do not agree with you. Just kill when they are killing. Godse killed a great man because he was thinking differently and chose a path he thought to be right and people followed him. But no one has a right to hate a great man just because one does not understand him.

Seema kumari said...

gandhi kamina tha.usne bharat ke do tukde kiye aur hum aaj tak uski galti ki saja vhukat rahe hai.nathuji ne sahi kiya jo use mar diya.unko ye kam aur pahle karna chahiye tha.nathuram godse jindabad.

ePandit said...

नमन हुतात्मा नाथूराम को। ईश्वर वह दिन शीघ्र दिखाये जब उनकी अस्थियों का विसर्जन हो सके।

Anonymous said...

Mere khayal se nathuram ji ne desh ka bahut bhala kiya h unhe sat sat naman