Saturday, February 23, 2008

क्या शादीशुदा मर्दों में विशेष आकर्षण होता है?

Indian Heroines Wedding Married Men

आज ही खबर आई है कि रानी मुखर्जी और आदित्य चोपड़ा का विवाह होने वाला है। हालांकि इस खबर पर कोई आश्चर्य करने वाली कोई बात नहीं है, क्योंकि इसमें कोई अजूबा नहीं है, और यह उनका व्यक्तिगत मामला है। पहले भी भारतीय हीरोईनें “समय आने पर” अपना घर बसाती रही हैं। लेकिन इस बनने वाली जोड़ी में एक बात है, जो कि चर्चा और जिक्र के काबिल है, वह है आदित्य चोपड़ा का शादीशुदा होना। वे अपनी पत्नी से तलाक लेने जा रहे हैं और रानी मुखर्जी से शादी करेंगे।

शादीशुदा, तलाकशुदा, दुहाजू या बल्कि तिहाजू पुरुष से शादी करने का हमारी फ़िल्म इंडस्ट्री में रिवाज रहा है। ज्यादा पीछे न जायें तो हेमामालिनी ने धर्मेन्द्र से उनकी पत्नी जीवित रहते और तलाक न देने के बावजूद रोमांस किया और शादी भी की। हेमामालिनी का मामला ज्यादा अलग इसलिये भी है कि उस वक्त धर्मेन्द्र दो बच्चों के पिता भी थे। रेखा और अमिताभ के किस्से तो सभी को मालूम ही हैं, अमिताभ भी उस वक्त शादीशुदा थे और दो बच्चों के बाप थे, लेकिन फ़िर भी रेखा उन पर मर मिटी थीं और लगभग हाथ-पाँव धोकर उनके पीछे पड़ी थीं। यदि “कुली” फ़िल्म की दुर्घटना न हुई होती, जया भादुड़ी ने अमिताभ की सेवा करके उन्हें मौत के मुँह से खीच न लिया होता तो शायद अमिताभ भी रेखा के पति बन सकते थे। सारिका ने भी कमल हासन से उनके शादीशुदा रहते विवाह किया, उसके बाद सुना है कि उनमें भी तलाक हो गया है और कमल हासन को तीसरी औरत मिल गई है (शायद हीरोइन ही है)। हालांकि दक्षिण में दूसरी शादी का रिवाज सा है, और इसे “विशेष” निगाह से देखा भी नहीं जाता, लेकिन उत्तर भारत में इसे गत दशक तक “खुसुर-पुसुर” निगाहों से देखा जाता था। बीते दस वर्षों में, जबसे समाज में “खुलापन” बढ़ा है, यह संख्या तेजी से बढ़ी है, और चूँकि ये हीरोईने लड़कियों की “आइकॉन” होती हैं, इसलिये फ़िल्मों से बाहर के समाज में भी यह रिवाज पसरता जा रहा है।

हाल के वर्षों में यह ट्रेण्ड कुछ ज्यादा ही चल पड़ा है, पिछली पीढ़ी की हीरोइनों से शुरु करें तो सबसे पहले श्रीदेवी ने शादीशुदा और बच्चेदार बोनी कपूर से शादी की, फ़िर करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, ॠचा शर्मा, मान्यता (आमिर खान की दूसरी बीवी हीरोइन नहीं हैं, लेकिन आमिर खुद दुहाजू ही हैं, फ़िरोज खान ने भी बुढ़ौती में एक जवान लड़की से शादी की थी) आदि भी उनकी ही राह चलीं। ताजा मामला आदित्य और रानी मुखर्जी का है, लेकिन उससे पहले करीना और सैफ़ का जिक्र करना भी आवश्यक है, खबरें हैं कि उनमें जोरों का रोमांस चल रहा है, लेकिन फ़िल्म इंडस्ट्री के “अफ़वाह रिवाज” पर तब तक भरोसा नहीं किया जा सकता जब तक कि वाकई में शादी न हो जाये, फ़िर भी यदि करीना-सैफ़ की शादी हुई तो यह शाहिद कपूर के साथ अन्याय तो होगा ही, सैफ़ जैसे अधेड़ और “तिहाजू” से करीना कैसे फ़ँस गई, यह भी शोध का विषय होगा।

बहरहाल, लेख का उद्देश्य इन हीरोइनों की आलोचना करना नहीं है, क्योंकि शादी उनका व्यक्तिगत मामला है, लेकिन प्रश्न उठते हैं कि आखिर इन शादीशुदा मर्दों में ऐसा क्या आकर्षण होता है कि हीरोईनें अपने हम-उम्र लड़कों का साथ छोड़कर इनके साथ शादी रचा लेती हैं?

1) क्या यह दैहिक आकर्षण है? (यदि ऐसा है तो मर्दों की दाद देनी होगी)
2) इसमें रुपये-पैसे का रोल और एक सुरक्षित भविष्य की कामना दबी होती है? (लेकिन वे खुद भी काफ़ी पैसे वाली होती हैं)
3) क्या वाकई ये हीरोइनें अपने-आपको इतनी असुरक्षित समझती हैं कि वे दूसरी औरत का घर उजाड़ने में कोई कोताही नहीं बरततीं? (उन्हें यह डर भी नहीं होता कि कल कोई और लड़की उसे बेदखल कर देगी?)
4) क्या वे “अनुभव” को प्राथमिकता देती हैं? (लेकिन यदि पुरुष को जीवन का अनुभव होता तो पहला तलाक ही क्यों होता?)
5) क्या आधुनिक समझे जाने वाली उस सोसायटी में भी मर्दों का राज ही चलता है? (चोखेर बालियाँ ध्यान दें…)
6) क्या यह कोई मनोवैज्ञानिक समस्या है?

आखिर क्या बात है… ?

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9 comments:

गुस्ताखी माफ said...
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mahashakti said...

आपके इस लेख को पढ़कर लगता है कि आपके पास विषयों की कमी नही है :)

मैने भी बहुत सोचा कि ऐसा क्‍यो होता है किन्‍तु परिणाम के निकट नही पहुँच सका हूँ। इतना ही लगता है कि स्त्री जाति की सबसे बड़ी दुश्मन स्त्री ही होती है, एक लड़की पैदा होने पर इतना दुख पुरूष को नही होता है जितना एक औरत को।

यही मामला मुझे शादी में भी लगता है, किसी के जुठन खाने में ज्‍यादा स्‍वाद होता है यही करण है कि ये किसी शादी शुदा मर्द के पिछे भागती है।

गुस्ताखी माफ said...

1. नहीं ये सिर्फ दैहिक आकर्षण नहीं है. केवल महिलायें ही पुरुष भी अपने से बड़ी महिलाओं से शादी करते हैं. सैफ की पहली पत्नी अमृता तो सैफ से काफी बड़ी थी.

2. प्रेम न हाट बिकाय. इस तरह शादी करने वाले दरअसल समाज और परिवार के बंधनों से एकदम मुक्त होते हैं. पैसे की कोई भूमिका नहीं होती क्योंकि ये तो दोनों के पास होता है. यही तो प्यार है, असली प्यार यही है.

3. कैसी असुरक्षा? यदि सुरक्षा की भावना होती तो देखभाल ठोकबजा कर शादी न की होती! कम्बख्त इश्क जब सिर पर सवार होता है तो कल की कौन परवाह करता है? प्रेम का मतलब आज, प्रेम का मतलब सिर्फ इन्हीं पर में जीना!

4. दिल का मामला है!

5. मर्दों का राज कतई नही चलता. हेमा ने धरम से शादी की लेकिन हेमा ने अपनी व्यक्तिगत स्वंत्रतता नहीं खोई. दरअसल ये शादी सिर्फ प्यार के लिये होती है. अगर कोई मर्द अपनी चलाने की कोशिश करता भी है और शादी को बंधन बनाने पर उतारू हो जाता है तो ये उस बंधन को तोड़ डालतीं है.

6. प्यार मन की बात है. प्यार दूसरों के लिये तो समस्या ही है. इसलिये इसे मनोवैज्ञानिक समस्या कह लीजिये. कौन सोच सकता है कि सैफ जैसा उम्रदराज आदमी अपने अंग पर एक नाम गुदा कर इस तरह इजहार करेगा!

सुरेश जी क्या आपने कभी इस प्रेम के समंदर में डुबकी लगाई है? बस वही बात है. एसा तन मन भीगता है कि बस .....

Grey Hat Guy said...

शुक्र है रेगिस्तान में हरियाली की तरह गांधी परिवार, राजनीति और हिन्दुत्व से हटके आपने कुछ हल्का फुल्का लिखा.

दुख सिर्फ़ इस बात का है कि इस रविवार न्यूज़ चैनल रानी मुखर्जी की खबरों से भरा रहेगा. लिहाज़ा इस रविवार के लिये स्टार स्पोर्ट्स और बी. बी. सी. और सी. एन. एन. ज़िन्दाबाद :)

अरुण said...

"दो पाटन के बीच मे साबुत बचा ना कोय
लेकिन ये सब बच गये ,ये अचरज है मोय
इनकी किस्मत देख कर अपना दिल भी होय
ज्यादा की इच्छा नही,दो चार दिला दो मोय"

mamta said...

फिल्मी दुनिया कुछ ऐसी ही है मृगतृष्णा जैसी।

Rachna Singh said...

Indian Heroines Wedding Married Men
aap inglish kee is laain ko shudh kar layae nahin to isae bhi hindi mae likh dae .
aakarsh na mard mae hota haen naa aurat mae . aakarshan hamare khud kae man mae hota haen . aap jisko bhi chaahae apna maan saktey haen . jinkae ghar pehlae sae totae hotaey hae wohi kahii aur jaa taey haen . yae sab aaj sae nahin bahut pehlae sae hota haen , pehlae media nahin tha to baat itnii bahar nahin aatii thi . aur ek marae huae rishtey ko jeetaey rehane sae ek nayaa rishta bananna jyaada theek hoga kyoki kam sae kam aap ko kisi sae jhood to nahin bolna hoga . agar vivahit ho kar bhi aap ka man bhatktaa hae to aap ka partner bhi uskae liyae utna hii jimedaar hae . vivahit purush ho yaa strii agar usaey woh aatm santishtii nahin milti { mae aatm santushti kii baat kar rahee hun } to woh avshya bahar jaaega . hamari sanskriti mae apne ichaaoo ko dabaney kee paramparaa hen jo hamey jhood bolney per majboor kartee haen . ek nayaa rishta shuru karnae waale un logo sae bahut achchey haen jo jhood bol kar apni shaadi ko nibhatey haen

Sanjeet Tripathi said...

बॉस अगर आपकी हेडिंग वाली बात एक्दमै सही है तो फ़िर तो बड़ा लोचा है।
मुझे अपने आकर्षण को विशेष करने के लिए ही शादीशुदा बनना पड़ेगा फ़िर तो ;)

संजय बेंगाणी said...

यह गुणसुत्र का लोचा है. महिलाएं प्रतिभाशाली, अनुभवी, सम्पन्न, प्रभावी पुरूष पसन्द आते है. ये गुण पाने में उम्र हो जाती है.