सोनियाजी ऐसी भी क्या दुश्मनी!!!
Sonia Gandhi Amitabh Bachchan Rivalry
आमतौर पर एक सामाजिक मान्यता है कि भले ही आप किसी परिवार में मांगलिक अवसरों पर उपस्थित न हो सकें तो चलेगा, लेकिन उस परिवार की गमी में अवश्य शामिल होना चाहिये, चाहे उस परिवार से आपका कितना ही मनमुटाव क्यों ना हो... अमिताभ बच्चन की माँ अर्थात तेजी बच्चन के अन्तिम संस्कार में गाँधी परिवार का एक भी सदस्य मौजूद नहीं था, जबकि भैरोंसिंह शेखावत अपने खराब स्वास्थ्य के बावजूद इसमें शामिल हुए।
उल्लेखनीय है कि तेजी बच्चन एक संभ्रांत सिख परिवार की बेटी थीं, जिन्होंने अपने परिवार के भारी विरोध के बावजूद उस जमाने में एक कायस्थ से प्रेम विवाह किया। हालांकि उनके दबंग व्यक्तित्व को रेखांकित करने के लिये यही एक तथ्य काफ़ी है, लेकिन इसके भी परे उन्होंने अपने बच्चों अमिताभ और अजिताभ को बेहतर संस्कार दिये और उन्हें एक मृदुभाषी और संस्कारित व्यक्ति बनाया।
तेजी बच्चन के स्व.इन्दिरा गाँधी से व्यक्तिगत सम्बन्ध रहे और उन्होंने हमेशा राजीव गाँधी को अपने पुत्र के समान माना और स्नेह दिया। जब सोनिया माइनो से राजीव का विवाह तय हुआ उस समय सोनिया को भारतीय संस्कारों और परम्पराओं की जानकारी देने के लिये इंदिरा गाँधी ने तेजी से ही अनुरोध किया था, और एक तरह से तात्कालिक रूप से सोनिया का कन्या पक्ष बच्चन परिवार ही था, और चूँकि भारतीय पद्धति से विवाह (देखें लिंक दिखावे के लिये ही सही) हो रहा था इसलिये “कन्यादान” जैसी रस्म भी बच्चन परिवार ने ही निभाई थी। दो परिवारों के बीच इतने “प्रगाढ़” सम्बन्ध होने के बावजूद ऐसा क्या हो गया कि अब सोनिया एक महत्वपूर्ण शोक के अवसर पर नदारद रहीं। क्या राजनीति और अहं की परछाईयाँ इतनी लम्बी होती हैं कि व्यक्ति अपने सामान्य नैतिक व्यवहार तक भूल जाता है? क्या बच्चन परिवार ने गाँधी परिवार का इतना बुरा कर दिया है कि इस मौके पर भी कम से कम राहुल गाँधी को उपस्थित रहने का निर्देश भी सोनिया नहीं दे सकीं? अब तक तो बच्चन परिवार की ओर से शालीन बर्ताव के कारण यह पता नहीं चल सका है कि इन दोनों परिवारों में मनमुटाव की ऐसी स्थिति क्यों और कैसे बनी (अब तक तो यही देखने में आया है कि अमिताभ के खिलाफ़ आयकर विभाग को सतत काम पर लगाया गया, जया बच्चन की राज्यसभा सदस्यता “दोहरे लाभ पद” वाले मामले में कुर्बान करनी पड़ी) लेकिन एक बार बीच में राहुल के मुँह से निकल गया था कि “बच्चन परिवार ने हमारे साथ विश्वासघात किया है”... हो सकता है कि ऐसी कोई बात हो भी, लेकिन भारतीय संस्कृति में और इतने बड़े सार्वजनिक पद पर रहने के कारण सोनिया का यह फ़र्ज बनता था कि अपने “दुश्मन” के यहाँ इस अवसर पर उपस्थित रहतीं, या परिवार के किसी सदस्य को भेजतीं, और नहीं तो कम से कम एक बयान जारी करके अखबारों में ही संवेदना प्रकट कर देतीं, लेकिन शायद “इटली” के संस्कार भारतीय बहू(?) पर भारी पड़ गये.... ऐसी भी क्या दुश्मनी!!!!!
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9 comments:
मेरे भाइ राजनीती संसकारो और रिश्तो से बडी है,अब ये आप क्यू नही समझते जी...:)
राजनीति और रिश्तों का दूर-दूर तक कोई वास्ता नही है।
सुरेशजी सही फरमाया आपने. सुबह अखबार में अंत्येष्टि का दृश्य देखकर मेरे मन में भी यही खयाल आया....
बहुत दुखद... पर राजनीतीज्ञों को क्या पता कि संस्कारिता किसे कहते हैं।
ये सांस्...खार् क्या होटा हाय.
ये विदेशी क्या जाने भारतीय संस्कार, इन्हें दोस्ती न सही दुश्मनी निभाना खूब आता है।
aap ret me dub ugne ki kalpana kar rahe hai.......ek to wo rajniti me hai....aur dusre congress me tisre nehru pariwar se......usase aisi koi umeed karna benami hai....
Sonia GUNDI ko Hum Sab Dhakke Mar kar Italy wapis kyun nahi bhej dete ???
Congress Se Toba Toba
भाई लोगों, अभी कुछ दिनों पहले श्रीमती इंदिरा गाँधी तथा श्री राजीव गाँधी के पूर्व निवास व् अब स्मारकों में तब्दील रेसकोर्स व विलिंग डन की बड़ी बड़ी कोठियों में जाना हुआ. राजीव गाँधी के बचपन के और विवाह के बहुत सारे फोटो हटा दिए गए हैं. वहां के अधिकारी ने बहुत जोर देने के बाद बताया कि जिन फोटो में बच्चन परिवार (हरिवंश राय बच्चन सहित) का कोई भी सदस्य है वे फोटो हटाने के आदेश हैं. कुछ फोटो तो एडिट कर दिए गए हैं. क्या राजनीतिक द्वेष, पारिवारिक स्मृतियों से भी बड़ा है?
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