आज लाईट नहीं गई, “धर्मनिरपेक्षता की जय”
Secularism BJP and Power Cut
शीर्षक पढ़कर पाठक चौंके होंगे कि लाईट जाने और धर्मनिरपेक्षता का क्या सम्बन्ध है? दरअसल हमारे उज्जैन में रोजाना सुबह 8.00 बजे से 10.00 बजे तक घोषित रूप से बिजली कटौती होती है (अघोषित तो अघोषित होती है भाई), तो आज मैंने घरवालों से शर्त लगाई थी कि आज बिजली कटौती नहीं होगी और मैं शर्त जीत गया। अब सोचिये कि लाईट क्यों नहीं गई? अरे भाई, आज “ईद” थी ना!!! अब आप सोच रहे होंगे कि भला इससे “धर्मनिरपेक्षता” का क्या सम्बन्ध है, तो सुनिये...हिन्दुओं के सबसे बड़े पर्व दीपावली के दिन भी सुबह नियमित समय पर कटौती हुई, सिखों के सबसे बड़े त्यौहार गुरुनानक जयन्ती के दिन भी लाईट गई थी, लेकिन चूँकि भाजपा को भी कांग्रेस की तरह धर्मनिरपेक्ष “दिखाई देने” का शौक चर्राया है, इसलिये आज सुबह ईद के उपलक्ष्य में लाईट नहीं गई (और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा)... अब मैं इन्तजार कर रहा हूँ कि क्रिसमस के दिन क्या होता है, यदि भाजपा को “थोड़ा कम” धर्मनिरपेक्ष होना होगा तो उस दिन लाईट जायेगी, और यदि “पूरा धर्मनिरपेक्ष” बनना होगा तो क्रिसमस के दिन भी लाईट नहीं जायेगी। भले ही पूरे प्रदेश में बिजली की कमी हो, लेकिन ईद और क्रिसमस के दिन दोगुना पैसा देकर भी बिजली खरीदी जायेगी (पैसा नेताओं की जेब से थोड़े ही जा रहा है)..... यहाँ तक कि आज तो नल भी दोनों टाईम आयेंगे ताकि कटे हुए लाखों बकरों के खून को आसानी से बहाया जा सके.... इसे कहते हैं असली धर्मनिरपेक्षता!!!
मप्र में हाल के दो उपचुनावों में भाजपा द्वारा जूते खा लेने के बाद उसे अगले वर्ष होने वाले चुनावों के लिये “धर्मनिरपेक्ष” दिखना जरूरी है, यह अन्तर है बाकी भाजपा में और गुजरात के मोदी में। मोदी “हिप्पोक्रेट” नहीं हैं, वे जो हैं वही दिखते भी हैं और इसीलिये उनका हिन्दू वोट बैंक(?) सुरक्षित है, जबकि भाजपा के बाकी नेता साफ़-साफ़ यह जान लेने के बावजूद कि मुसलमानों का वोट उन्हें कभी नहीं मिलेगा, इस तरह के करतबों से बाज नहीं आ रहे। “कन्धार विमान अपहरण” के शर्मनाक हादसे (जब पूरी दुनिया में हमने यह साबित कर दिया था कि हम नपुंसक हैं) के बाद स्वर्गीय कमलेश्वर जी को मैंने दो पत्र लिखे थे, (जिसका जवाब भी उन्होंने दिया था)। उन पत्रों में मैंने उनसे कहा था कि कन्धार मामले को भाजपा ने जैसे “सुलझाया”(?) है, उससे भाजपा के कट्टर समर्थक भी उससे दूर हो गये हैं, और अगले आम चुनावों में “इंडिया शाइनिंग” कितना भी कर ले, उन्हें हारना तय है और वही हुआ भी। कंधार प्रकरण ने भाजपा को देश-विदेश में अपनी छवि चमकाने का शानदार मौका दिया था और उसने वीपी सिंह (रूबिया सईद अपहरण कांड) और नरसिंहराव (हजरत बल दरगाह चिकन कांड) का रास्ता अपनाकर उसे गँवा दिया। भाजपा को अपने “कैडर” यानी संघ की विचारधारा के अनुसार काम करना चाहिये, लेकिन जब भी वह कहीं भी सत्ता में आती है, पार्टी और सरकार पर धनपतियों और नकली संघियों का कब्जा हो जाता है, दरी बिछाने से लेकर मतदाता पर्ची तैयार करने वाले आम कार्यकर्ता को भुला दिया जाता है। यही गलती पहले कांग्रेस करती थी, और इसीलिये अब वह नेताओं की पार्टी हो गई है, वहाँ कोई कार्यकर्ता नहीं बचा है। भाजपा अब भी इसी दुविधा में है कि उसे हिन्दूवादी होना चाहिये या धर्मनिरपेक्षता का कांग्रेसी ढोंग करना चाहिये.... और जब तक वह इस दुविधा में रहेगी जूते खाती रहेगी...यानी धर्मनिरपेक्ष(?) लोगों को खुश होना चाहिये। और बाकी लोगों को पैसा कमाने से थोड़ी फ़ुरसत मिल जाये तो अपने आसपास निगाह दौडा कर देख लीजिये, कितनी गुमटियाँ, कितनी झुग्गियाँ और अचानक "उग" आई हुई दरगाहें आपको दिखाई देती हैं.... जिन पर सिर्फ़ सरकार और प्रशासन की निगाह नहीं पड़ती...
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9 comments:
दुविधा से निकलना होगा जी....जबतक दुविधा है, तब तक ऐसी स्थिति बनी रहेगी....और ऐसी स्थिति का परिणाम भी वैसा ही होगा, जैसा होता आया है.
यह तुष्टीकरण की नीति एक बडी बीमारी है! इससे तथाकथित "अल्पसंख्यकों" के वोट खीचे जा सकते हैं लेकिन भला किसी का नहीं होता है.
लाईट तो आज हमारे यहां भी नहीं गई.
"जब भी वह कहीं भी सत्ता में आती है, पार्टी और सरकार पर धनपतियों और नकली संघियों का कब्जा हो जाता है" सही कहा आपने
मध्यप्रदेश में तो यही हो रहा है.
बाकी जूते अभी उन्होंने खाए कहां हैं यह तो ट्रेलर था फिल्म अभी बाकी है. :)
क्या सटीक मुद्दा पकड़ा है बॉस!!
मामला तो तगड़ा है देखिए हमारे यहां भी अभी तक बत्ती गुल तो नहीं हुई है लेकिन शाम का नहीं पता
प्रश्न विचारनीय है.----------------धर्मनिरपेक्षता का
स्थिति सोचनीय है.----------------वर्तमान राजनीति की
अवस्था दयनीय है.----------------तथाकथित अल्पसंख्यकों की
प्रयास सराहनीय है.---------------आपका
पहले हमारे यहाँ 15 अगस्त व 26 जनवरी को सुबह ध्वजारोहरण के समय बिजली जरूर जाती थी. तब गुजरात धर्मनिरपेक्ष (?) हुआ करता था.
आज इलाहाबाद में भी कटौती नही हुई। :) भगवान करें रोज ईद पडे रोज बिजली मिलती रहे। :)
mudda to sahi uthaya he, par taswir ka dusara pahalu bhi hai bhai. Dipawali ke dino me bijali jyadah kharach hoti he, ide ke din sabhi door chutti hoti hey jisase bijalee kam kharach hoti he isliye katane ki zarurat nahi, ye kyon bhulate ho ki katane wala bhi hindu he aur kisi aur ko jawab bhale hi na de, apane biwi bachhon ko to dena hi padata he
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