Monday, December 10, 2007

मैं किसी को वोट नहीं देना चाहता (धारा 49-O)

Negative Voting Indian Elections

क्या आप जानते हैं कि हमारे संविधान की एक धारा 49-O में एक प्रावधान है जिसके अनुसार किसी भी चुनाव में मतदाता पोलिंग बूथ पर जाये, अपनी पहचान और मतदाता क्रमांक साबित करे, अपनी उंगली पर स्याही लगवाये, और फ़िर चुनाव अधिकारी से यह कहे कि मैं किसी को वोट नहीं करना चाहता। सवाल उठता है कि हमें ऐसा क्यों करना चाहिये? मान लीजिये कि आपके वार्ड चुनावों में लगभग सारे प्रत्याशी या तो गुंडे-बदमाश हैं (90% तो होते ही हैं), या फ़िर कोई निकम्मा उम्मीदवार पुनः मैदान में है और आप चाहते हैं कि सभी तो नालायक हैं, मैं क्यों वोट दूँ? उस वक्त यह धारा काम आयेगी... मान लीजिये कि आपके वार्ड से कोई प्रत्याशी 123 वोटों से जीतता है, लेकिन यदि उसी वार्ड में 124 वोट “मुझे किसी को वोट नहीं देना” वाली धारा 49-O के निकलते हैं तो न सिर्फ़ उस प्रत्याशी का चुनाव रद्द हो जायेगा, बल्कि जब पुनः चुनाव होंगे उस वक्त पिछले सारे प्रत्याशियों को चुनाव में भाग लेने का मौका नहीं मिलेगा, इस प्रकार अपने-आप सभी उम्मीदवार खारिज हो जायेंगे। यह धारा “Conduct of Election Rules” सन्‌ १९६१ में उल्लिखित है। इस धारा को हमारे नेताओं ने जानबूझकर प्रचारित नहीं किया, लेकिन आश्चर्यजनक यह भी है कि चुनाव आयोग और शेषन जैसे अधिकारियों ने भी जनता को इस बारे में जागरूक करने का प्रयास नहीं किया। पड़ताल करने पर पता चला कि इस धारा के उपयोग और इलेक्ट्रानिक मशीनों में “निगेटिव” (इनमें से कोई नहीं) वाला बटन लगाने सम्बन्धी याचिका उच्चतम न्यायालय में लम्बित है, और उस पर निर्णय आना बाकी है। इस सम्बन्ध में पत्रकार एस.दोराईराज ने अप्रैल २००६ में एक लेख लिखा था|


“किसी भी प्रत्याशी को वोट नहीं” के प्रावधान वाली भारतीय संविधान की धारा 49-O के बारे में जब मैंने गत दिनों मित्रों को ई-मेल किया था, तो अधिकतर की सलाह थी कि इसे मैं ब्लॉग पर डालूँ, फ़िर मैंने इस सम्बन्ध में कुछ जाँच-पड़ताल की तो पाया कि वाकई इस प्रकार की धारा हमारे चुनाव संविधान में उपलब्ध है। गत वर्ष तमिलनाडु विधानसभा के दौरान वहाँ के मुख्य चुनाव अधिकारी नरेश गुप्ता ने स्वीकार किया था कि इस प्रकार के प्रावधान होने की जानकारी एक “एनजीओ” ने माँगी थी, कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में भी “नकारात्मक वोटिंग” नामक एक बटन होना चाहिये। “पीपुल्स यूनियन फ़ॉर सिविल लिबर्टीज” नामक संस्था ने यह याचिका उच्चतम न्यायालय में लगाई है। यदि मित्रों को इस याचिका की वर्तमान स्थिति के बारे में पता हो तो उसे अपने-अपने ब्लॉग पर डालें, और नहीं तो कम से कम इस धारा के बारे में जनता को अवगत कराते रहें, कभी-न-कभी तो लोग इस बारे में समझने लगेंगे, और कुछ नहीं तो पार्टियों और उम्मीदवारों में एक भय की लहर तो दौड़ेगी। और भले ही यह जानकारी कुछ लोगों को पहले से ही हो, लेकिन मेरी तरह कई लोग और भी होंगे जिन तक यह जानकारी पहुँचना आवश्यक है, इसलिये इसे ब्लॉग पर डाल रहा हूँ....


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6 comments:

संजय बेंगाणी said...

आप हमेंशा कमाल की जानकारी लाते है. इस धारा के बारे में अनजान था.

CresceNet said...

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Sanjay said...

बिल्‍कुल सही बात. यह जानकारी हमारे यहां बहुत ही कम लोगों को है. आपने इसे यहां लाकर बहुत अच्‍छा कार्य किया. मेंने प्रकारांतर से इस अधिकार का इस्‍तेमाल किया है.
इसके अलावा एक अधिकार टैंडर वोट करने का भी है जो मतदाता को उस स्थिति में वोट डालने का अधिकार देता है, जब किसी और ने उसके नाम से पहले ही फर्जी वोट डाल दिया हो. चाहें तो इस बारे में भी लिख सकते हैं.

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

प्रिय सुरेश

CresceNet said... की टिप्पणी, स्पेम है. उसे मिटा दें.

इस लेख की जानकारी बडे कमाल की है. जन जन को जागरूक करने के लिये आभार !!

दीपक भारतदीप said...

इसकी जानकारी मुझे है पर इस पर लोग सामूहिक रूप से अमल करेंगे इस बँटे समाज में यह संभव नहीं क्योंकि यह बंटवारा हर स्तर पर है.
दीपक भारतदीप

आशीष महर्षि said...

हम लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि वोटिंग मशीन पर एक ऐसा बटन होना चाहिए