Friday, December 14, 2007

हे वामपंथियों और सेकुलरों बधाई हो...

Congrats Secularist Communists

१३ दिसम्बर को संसद पर हमले के छः बरस बीत गये। एक “परम्परा” की तरह हमारे प्रधानमंत्री (सचमुच?), लौहपुरुष (?) आडवाणी, एक गृहमंत्री नामक मोम के पुतले और “मम्मी के दुलारे” राहुल गाँधी ने शहीदों को याद करते हुए पुष्प अर्पित किये। उसी सभा के दौरान एक शहीद नानकचन्द की विधवा ने विलाप करते हुए कथित नेताओं को खरी-खरी सुनाते हुए बताया कि छः साल से उसे कोई सरकारी मदद नहीं मिली है। उसे एक पेट्रोल पंप आबंटित हुआ था, लेकिन उसे आज तक जमीन नहीं मिली (शायद सरकार “SEZ” के लिये जमीन हथियाने में व्यस्त होगी), और उस विधवा को शिकायत करने के कारण धकिया कर बाहर कर दिया गया।


(चित्र में नेताओं को आपबीती सुनाते हुए शहीद की विधवा)
दूसरी तरफ़ हमारे मानवाधिकार वाले भी खुश हो रहे होंगे कि चलो छः साल बीत गये आज तक हम अफ़जल को फ़ाँसी से बचाने में कामयाब रहे हैं। वामपंथियों और सेकुलरों का तो क्या कहना, उन्हें तो गुजरात में वोटों की फ़सल लहलहाती दिख रही होगी। क्या कहें ऐसे नेताओं को! जो अपनी ही जान बचाने वालों के परिजनों से ऐसा बर्ताव करते हों, इन नेताओं को तो रीढ़विहीन (Spineless) कहना भी इनका सम्मान ही होगा, इन्हें “हिजड़ा” कहना भी उचित नहीं है क्योंकि हिजड़ों को भी कभी-कभी गुस्सा आता है और वे भी अपना आत्मसम्मान बरकरार रखते ही हैं, लेकिन हमारे नेताओं ने तो अपना आत्मसम्मान पता नहीं किस रिश्वत के तले दबा कर रख दिया है।

सरकार को चिंता है कि हिन्दू देवियों की नग्न तस्वीरें बनाने वाला एमएफ़ हुसैन कैसे भारत लौटे, तसलीमा नसरीन के पेट में दर्द ना हो, दलाई लामा की तबियत ठीक रहे, या फ़िर तेलगी, सलेम, शहाबुद्दीन को कोई तकलीफ़ तो नहीं है, अफ़जल गुरु को चिकन बराबर मिल रहा है या नहीं... आदि-आदि... है ना परोपकारी सरकारें.. लेकिन खुद की जान की बाजी लगा कर इन घृणित लोगों की जान बचाने वालों का कोई खयाल नहीं... इसीलिये मेरा भारत महान है! क्या अभी भी यकीन नहीं हुआ? अच्छा चलो बताओ, कि ऐसा कौन सा देश है जिसके शांतिप्रिय नागरिक अपने ही देश में शरणार्थी हों... जी हाँ सही पहचाना... भारत ही है। कश्मीरी पंडितों को दिल्ली के बदबूदार तम्बुओं में बसाकर सरकारों ने एक पावन काम किया हुआ है और दुनिया को बता दिया है कि देखो हम कितने “सेकुलर” हैं। कांग्रेस की एक सफ़लता तो निश्चित है, कि उसने “सेकुलर” शब्द को लगभग एक गाली बनाकर रख दिया है। अभी भी विश्वास नहीं आया... लीजिये एक और सुनिये... समझौता एक्सप्रेस बम विस्फ़ोट में मारे गये प्रत्येक पाकिस्तानी नागरिक को दस-दस लाख रुपये दिये गये, मालेगाँव बम विस्फ़ोट में मारे गये प्रत्येक मुसलमान को पाँच-पाँच लाख रुपये दिये गये, और हाल ही में अमरावती में दंगों में लगभग 75 करोड़ के नुकसान के लिये 137 हिन्दुओं को दिये गये कुल 20 लाख। ऐसे बनता है महान राष्ट्र।

लेकिन एक बात तो तय है कि जो कौम अपने शहीदों का सम्मान नहीं करती वह मुर्दा कौम तो है ही, जल्द ही नेस्तनाबूद भी हो जाएगी, भले ही वह सॉफ़्टवेयर शक्ति हो या कथित “महान संस्कृति” का पुरातन देश....


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12 comments:

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

कम से कम शब्दों में सशक्त लेखन !

मिहिरभोज said...

बहुत सालिड लिखा भाई झटके दार,आप की हर पोस्ट में बहुत दम होता है आपका लिंक अपने चिट्ठे पर दे रहा हूं

Raj said...

नमस्कार सुरेश जी,आप जेसे लेखक सभी हो तो हमारा भारत बदल सकता हे,कयोकि जो काम कलम कर सकती हे वो तलवार भी नही कर सकती,मुझेय मान हे आप पर.

Sanjeet Tripathi said...

धांसू!!

रजनीश मंगला said...

सुरेश जी
अपनी कलम ढीली मत कीजियेगा। ये अपना देश रीढ़विहीन ही है। हाल ही में पढ़ने में आया था कि चीन ने भारत की फिर से काफ़ी ज़मीन हथिया ली है। कृपया उसपर भी कुछ छानबीन करके लिखें। धन्यवाद।

अरुण said...

क्या कहू ..? दर्द भी सैकुलर होता है..और इस सब मे कोढ मे खाज ये कि हमारे ज्यादातर पत्रकार भी वामपंथी घुट्टी पीकर बडे हुये है उन्हे भी इस सब को उजाकर करने मे शर्म आती है..

संजय बेंगाणी said...

शाबास

सागर नाहर said...

देश का दुर्भागय है जो इसे नेता मिले हैं, अगर किसी कारण से आतंकवादियों अपने मंसूबे में कामयाब हो जाते और एकाद नेता भी उस हमले में मारा जाता तो यही नेता उन सुरक्षाकर्मियों को सजा दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।

E-Guru Rajeev said...
This comment has been removed by the author.
E-Guru Rajeev said...
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E-Guru Rajeev said...

गज़ब गुरु, एक चुम्मी ले लूँ. क्या लिखा है.
भाई मेरी उमर लग जाए तुम्हें.
लिखना मत बंद करियो.
भाई तारीफ़ के जितने भी शब्द होते हैं सब तुम्हारे लिए.

दुनिया के सारे मैडल, अवार्ड दे देने को जी कर रहा है.

sisir chandra said...

suresh bhai! why do you not form a party against these selfish elements. if you would float a party then may be it will provide a nationalist platform to counter evil forces of society.
actually there is a lot of differences between bjp and nationalists. no. one bjp is not making effort to eliminate caste base reservation system. even sangh has also taken same stand on bjp's line. but i appreciate those kashmiri muslims who really not ready to deviate on their stand even a bit. our stand may be either good or bad we must firm on our stand which gives us depth by our firmness. and no doubt in future this will be our biggest asset to counter these wrong elements. we must never compromize with our ideology, even if people start leaving this fold. if one never deviate his/her stand, time make him winner. but it takes time. if one wants result forthwith, may be he would be annoyed.