Thursday, November 8, 2007

“भद्रजनों के खेल” की कुछ प्रसिद्ध गालीगलौज (स्लेजिंग)

Slazing, Cricket, Gentleman Game

विकीपीडिया के अनुसार “स्लेजिंग” का मतलब है “विपक्षी खिलाड़ी को शब्द-बाणों से मानसिक संताप देकर उसका स्वाभाविक खेल बिगाड़ना”... क्रिकेट को भद्रजनों का खेल माना जाता है, माना जाता है इसलिये लिख रहा हूँ कि जब आप यह लेख पूरा पढ़ लेंगे तब इसे भद्रजनों का खेल मानेंगे या नहीं, कहना मुश्किल है। क्रिकेट में “स्लेजिंग” कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस स्लेजिंग या शब्दों के आक्रामक आदान-प्रदान के दौरान कई बार मजेदार स्थितियाँ भी बन जाती हैं, कई बार दाँव उलटा भी पड़ जाता है। मैंने अपने पिछले क्रिकेट लेख में पाठकों से वादा किया था कि क्रिकेट इतिहास की कुछ प्रसिद्ध(?) स्लेजिंग के बारे में लिखूँगा, तो पेश हैं कुछ खट्टी-मीठी, कुछ तीखी स्लेजिंग, जिसमें कई प्रसिद्ध खिलाड़ी शामिल हैं (महिला पाठकों से मैं अग्रिम माफ़ी माँगता हूँ, कोई-कोई वाक्य अश्लील हैं, लेकिन मैं भी मजबूर हूँ, जो महान(?) खिलाड़ियों के उद्‌गार हैं वही पेश कर रहा हूँ), लेकिन एक बात तो तय है कि स्लेजिंग से यह खेल नीरस और ऊबाऊ नहीं रह जाता, बल्कि इसमें एक “तड़का” लग जाता है, भारत दौरे पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाडियों के चिढ़ने का असली कारण यही था कि जिस स्लेजिंग के “खेल” में वे सबसे आगे रहते थे, उसी में भारतीय खिलाड़ी उनसे मुकाबला करने लगे।

स्लेजिंग की शुरुआत तो उसी समय हो गई थी, जब क्रिकेट के पितामह कहे जाने वाले इंग्लैंड के W.G.Grace ने एक बार अम्पायर द्वारा जल्दी आऊट दिये जाने पर उससे कहा था, “दर्शक यहाँ मेरी बल्लेबाजी देखने आये हैं, तुम्हारी उँगली नहीं”, समझे....और वे दोबारा बल्लेबाजी करने लगे। लेकिन एक बार जब गेंद से उनकी गिल्ली उड़ गई, तो ग्रेस महोदय सहजता से अम्पायर से बोले, “आज हवा काफ़ी तेज चल रही है, देखा गिल्लियाँ तक गिर गईं”, लेकिन अम्पायर साहब भी कहाँ कम थे, वे बोले, “हाँ वाकई हवा तेज है, और यह पेवेलियन जाते वक्त आपको जल्दी जाने में मदद करेगी”...।

डबल्यू जी ग्रेस को एक बार बहुत मजेदार “स्लेजिंग” झेलनी पड़ी थी, जब एक काऊंटी मैच में चार्ल्स कोर्टराईट नामक गेंदबाज की अपील चार-पाँच बार अम्पायर ने ठुकरा दी थी, और ग्रेस लगातार गेंदबाज को मुस्करा कर चिढ़ाये जा रहे थे, अन्ततः एक गेंद पर ग्रेस के दो स्टम्प उखड़ कर दूर जा गिरे, पेवेलियन जाते वक्त कोर्टराइट ने ताना मारा, “डॉक्टर..चाहो तो तुम अब भी खेल सकते हो, एक स्टम्प बाकी है...” और ग्रेस जल-भुनकर रह गये।

एक गेंद में हीरो से जीरो बनने का वाकया – वेंकटेश प्रसाद Vs आमिर सोहेल
विश्वकप में भारत ने पाकिस्तान को हमेशा हराया है। भारत में हुए विश्वकप के दौरान भारत के पहली पारी में बनाये गये 287/8 के स्कोर का पीछा करते हुए आमिर सोहेल और सईद अनवर ने 15 ओवर में 110 रन बना लिये थे, दोनो बल्लेबाज जहाँ चाहे वहाँ रन ठोक रहे थे, ऐसे में एक ओवर के दौरान वेंकटेश प्रसाद की गेंद पर आमिर सोहेल ने एक जोरदार चौका जड़ा, और प्रसाद को इशारा कर बताया कि तेरी अगली गेंद भी मैं वहीं पहुँचाऊँगा। वेंकटेश प्रसाद आमतौर पर शांत रहने वाले खिलाड़ी हैं। वे चुपचाप अगली गेंद डालने वापस गये, और भाग्य का खेल देखिये कि प्रसाद की अगली गेंद पर सोहेल बहादुरी दिखाने के चक्कर में बोल्ड हो गये, अब बारी प्रसाद की थी और उन्होंने पहली बार आपा खोते हुए चिल्लाकर आमिर को पेवेलियन की ओर जाने का इशारा किया, आमिर सोहेल का मुँह देखने लायक था। उस गेंद के बाद प्रसाद ने हजारों गेंदे फ़ेंकी होंगी, सैकड़ों विकेट लिये होंगे, लेकिन वह गेंद और उनका वह आक्रामक जवाब उन्हें (और हमें भी) आजीवन याद रहेगा। उस मैच में भी इतनी बेहतरीन शुरुआत के बावजूद पाकिस्तान भारत से हार गया था।

स्टीव वॉ और एम्ब्रोज प्रकरण-

यह वाकया दो महान खिलाडियों के बीच का है, त्रिनिदाद के एक टेस्ट मैच के दौरान जब कर्टली एम्ब्रोज अपनी आग उगलती गेंदों से स्टीव वॉ को परेशान किये हुए थे, अचानक स्टीव ने एम्ब्रोज को कहा - " What the f*ck are you looking at? " एम्ब्रोज भौंचक्के रह गये, क्योंकि आज तक उनसे किसी ने ऐसी भाषा में कोई बात नहीं की थी। एम्ब्रोज स्टीव की तरफ़ आक्रामक रूप से बढ़े और कहा, "Don't cuss me, man", लेकिन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी किसी से हार नहीं मानते, स्टीव ने पलट कर फ़िर जवाब दिया-'Why don't you go and get f*cked.' " अब तो एम्ब्रोज लगभग स्टीव को मारने ही चले थे, वेस्टइंडीज के कप्तान रिची रिचर्डसन उन्हें बड़ी मुश्किल से संभाल पाये थे, वरना स्टीव वॉ एक घूँसा तो निश्चित खाते।

मैक्ग्राथ Vs एडो ब्रांडेस
एक बार जिम्बाब्वे की टीम के आखिरी बल्लेबाज एडो ब्रांडेस, मैक्ग्राथ के सामने खेल रहे थे, मैक्ग्राथ उन्हें आऊट करने की जी-तोड़ कोशिश करते रहे, ब्रांडेस ठहरे गेंदबाज, कभी गेंद चूक जाते, कभी कैच दूर से निकल जाता, कभी बल्ला कहीं लग जाता और गेंद कहीं और निकल जाती। जब आखिरी बल्लेबाज आऊट न हो रहा हो उस वक्त गेंदबाज सबसे ज्यादा निराश और गुस्से में होता है। मैक्ग्राथ चिढ़ कर ब्रांडेस से बोले- साले, तुम इतने मोटे क्यों हो?... हाजिरजवाबी की इन्तहा देखिये कि एक क्षण भी गँवाये बिना ब्रांडेस बोले, “क्योंकि जब-जब भी मैं तुम्हारी बीवी से प्यार करता हूँ, वह मुझे एक चॉकलेट देती है”... यह इतना तगड़ा झटका था कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी भी हँस पड़े थे।

विवियन रिचर्ड्स और ग्रेग थॉमस
यह वाकया काउंटी मैच के दौरान हुआ था, जब ग्लेमोर्गन और समरसेट के बीच मैच चल रहा था। ग्लेमोर्गन के तेज गेंदबाज ग्रेग थॉमस, महान रिचर्ड्स को दो-तीन बार “बीट” कर चुके थे, एक बाउंसर भी रिचर्ड्स की नाक के पास से गुजर चुका था, थॉमस ने कहा- “सुनो रिचर्ड्स, यह एक लाल गेंद है जो लगभग पाँच औंस की होती है, यदि तुम्हें पता न हो तो खेलना बन्द कर दो”, “किंग” के नाम से मशहूर रिचर्ड्स ने अगली दो गेंदों पर दो छक्के लगाये और ग्रेग से कहा- “ग्रेग जरा जाकर गेंद ढूँढो और मुझे बताओ कि वह कैसी लगती है”....

सचिन तेंडुलकर Vs अब्दुल कादिर
अमूमन भारतीय खिलाड़ी पहले के जमाने में किसी से उलझते नहीं थे, और तेंडुलकर तो शुरु से शांत खिलाड़ी रहे हैं और बल्ले से ही जवाब देत हैं। सन्‌की बात है, लिटिल मास्टर ने अपना पहला टेस्ट मैच पाकिस्तान में खेलना शुरु किया। उस वक्त उनकी उम्र ड्रायविंग लायसेंस प्राप्त करने लायक भी नहीं थी। पाकिस्तानी दर्शकों ने पोस्टर लगा रखे थे “दूध पीता बच्चा, घर जा के दूध पी”, सचिन ने लेग स्पिनर मुश्ताक अहमद के एक ओवर में दो छक्के लगाये। मुश्ताक के गुरु वरिष्ठ लेग स्पिनर अब्दुल कादिर से नहीं रहा गया, उसने कहा- “बच्चों को क्या मारता है बे, हमें भी मार कर दिखा”.... सचिन चुपचाप रहे, कादिर के अगले ओवर में सचिन सामने थे, बिना डरे उन्होंने 6, 0, 4, 6, 6, 6 का स्कोर उस ओवर में किया और दुनिया के सामने शंखनाद कर दिया कि एक महान खिलाड़ी मैदान में आ चुका है।

मैक्ग्राथ Vs रामनरेश सरवन
मई २००३ में एंटीगुआ टेस्ट के दौरान जब सरवन सभी ऑस्ट्रेलियन गेंदबाजों को धो रहे थे, उस वक्त मैक्ग्राथ का पारा गरम हो गया। वे लगातार सरवन को घूरते रहे, चिढ़ाते रहे, इशारे करते रहे, लेकिन सरवन आऊट नहीं हो रहे थे, मैक्ग्राथ ने एक भद्दी टिप्पणी की- "So what does Brian Lara's d*ck taste like?" सरवन ने भी तड़ से जवाब दिया- "I don't know. Ask your wife. " अब तो मैक्ग्राथ पूरी तरह उखड़ गये (क्योंकि उस समय उनकी पत्नी का कैंसर का इलाज चल रहा था), लगभग घूँसा तानते हुए मैक्ग्राथ ने कहा- "If you ever F*&king mention my wife again, I'll F*cking rip your F*fing throat out." लेकिन इसमें सरवन की कोई गलती नहीं थी, उन्होंने तो सिर्फ़ जवाब दिया था।

मार्क वॉ Vs एडम परोरे
मार्क वॉ जो अक्सर दूसरी स्लिप में खड़े रहते थे, हमेशा वहाँ से कुछ न कुछ बोलते रहते थे, एक बार उन्होंने एडम परोरे से कहा- "Ohh, I remember you from a couple years ago in Australia. You were sh*t then, you're fu*king useless now". परोरे ने जवाब दिया - "Yeah, that's me & when I was there you were going out with that old, ugly sl*t & now I hear you've married her. You dumb c*nt ".

रवि शास्त्री Vs माइकल व्हिटनी
भारत के एक और “कूल माइंडेड” खिलाड़ी रवि शास्त्री ने भी एक बार मजेदार जवाब दिया था। ऑस्ट्रेलिया में एक मैच के दौरान जब रवि शास्त्री एक बार रन लेने के लिये दौड़ने वाले थे, बारहवें खिलाड़ी माइकल व्हिटनी ने गेंद मारने के अन्दाज में कहा- “यदि तुमने एक कदम भी आगे बढ़ाया तो इस गेंद से मैं तुम्हारा सिर तोड़ दूँगा”, शास्त्री ने बगैर पलकें झपकाये जवाब दिया, “जितना तुम बोलने में अच्छे हो यदि उतना ही खेलने में अच्छे होते तो आज बारहवें खिलाड़ी ना होते”...

रॉबिन स्मिथ Vs मर्व ह्यूज
ऑस्ट्रेलिया के मर्व ह्यूज “स्लेजिंग” कला(?) के बड़े दीवाने थे, और लगातार कुछ ना कुछ बोलते ही रहते थे। एक बार लॉर्ड्स टेस्ट के दौरान जब एक-दो बार रॉबिन स्मिथ उनकी गेंद चूके तो ह्यूज बोले- “ए स्मिथ तुम्हें बल्लेबाजी नहीं आती”। अगली दो गेंदों पर दो चौके लगाने के बाद स्मिथ ने कहा-“ए मर्व, हम दोनों की जोड़ी सही रहेगी, मुझे बल्लेबाजी नहीं आती और तुम्हें गेंदबाजी...”

ऐसा नहीं है कि स्लेजिंग सिर्फ़ विपक्षी खिलाडियों में ही होती है, कई बार एक ही टीम के खिलाड़ी भी आपस में भिड़ लेते हैं (पाकिस्तान इस मामले में मशहूर है)। एक बार इंग्लैंड का पाकिस्तान दौरा चल रहा था, फ़्रैंक टायसन बहुत मेहनत से गेंदबाजी कर रहे थे, अचानक एक कैच स्लिप में रमन सुब्बाराव नामक खिलाड़ी की टाँगों के बीच से निकल गया। ओवर समाप्त होने के बाद रमन ने टायसन से माफ़ी माँगते हुए कहा, “सॉरी यार मुझे टाँगों के बीच गैप नहीं रखना था”... टायसन जो कि नस्लभेदी मानसिकता के थे, ने कहा- हरामी, तुम्हें नहीं बल्कि तुम्हारी माँ को टाँगों के बीच गैप नहीं रखना था”....

दो बदमजा वाकये –
ये दो वाकये हालांकि “स्लेजिंग” की श्रेणी में नहीं आते लेकिन यदि यह पूरी तौर से घटित हो जाते तो क्रिकेट इतिहास में काले धब्बों के नाम पर गिने जाते।

पहला वाकया है डेनिस लिली और जावेद मियाँदाद के बीच का- ऑस्ट्रेलिया में एक मैच के दौरान एक रन लेते समय मियाँदाद, लिली से टकरा गये। मियाँदाद के अनुसार लिली ने उन्हें जानबूझकर रन लेने से रोकने की कोशिश की थी। उस टक्कर के बाद अचानक, गुस्सैल लिली, मियाँदाद के पास पहुँचे और उनके पैड पर एक लात जड़ दी। मियाँदाद भी गुस्से से बैट लेकर आगे बढे और लिली के सिर पर प्रहार करने ही वाले थे, लेकिन अम्पायर ने किसी तरह बीच-बचाव किया और दोनों को शांत किया।

दूसरी घटना है गावसकर और लिली के बीच की, मेलबोर्न टेस्ट के दौरान जब गावस्कर 70 रनों पर खेल रहे थे, तब लिली ने एक एलबीडब्लयू की अपील की, गावसकर ने अम्पायर को अपना बल्ला दिखाते हुए कहा कि गेंद उनके बल्ले से लगने के बाद पैड पर लगी है, लेकिन लिली को धैर्य कहाँ, वे तेजी से आगे बढ़े और गावसकर के पैड पर इशारा करके बताया कि गेंद यहाँ लगी और पास आकर धीरे से एक गाली दी, अम्पायर के आऊट देने के बाद गावसकर जब पेवेलियन वापस जाने लगे तब लिली ने एक और गाली दी, बस तब गावसकर दिमाग खराब हो गया, वे चार कदम वापस लौटे और अपने साथी खिलाड़ी चेतन चौहान को साथ लेकर पेवेलियन जाने लगे। सभी हक्के-बक्के हो गये, क्योंकि इस तरह से किसी कप्तान और बल्लेबाज का मैदान छोड़कर जाना हैरानी भरा ही था। तत्काल मैनेजर और वरिष्ठ अधिकारियों ने बात को मैदान में आकर संभाला, वरना जो अर्जुन रणतुंगा और इंजमाम ने किया था, वह गावस्कर पहले ही कर चुके होते। हालांकि बाद में गावस्कर ने अपनी पुस्तक में इस घटना के बारे में लिखा था कि “वह निर्णय मेरे द्वारा लिया आवेश में गया एक बेहद मूर्खतापूर्ण कदम था”....

गावस्कर को ही एक बार रिचर्ड्स ने मजाक में ताना मारा था, हुआ यह था कि गावस्कर ने एक बार यह तय किया कि वह नम्बर चार पर बल्लेबाजी करने आयेंगे... और संयोग यह हुआ कि मैल्कम मार्शल ने पहली दो गेंदों पर ही अंशुमन गायकवाड़ और दिलीप वेंगसरकर को आऊट कर दिया था, गावस्कर जब बल्लेबाजी करने उतरे तो स्कोर था 0/2, रिचर्ड्स ने मजाक में कहा, “सनी तुम चाहे जो कर लो, तुम जब भी बल्लेबाजी के लिये उतरोगे, स्कोर 0 ही रहेगा”.....

स्टीव वॉ Vs पार्थिव पटेल
अपने आखिरी टेस्ट मैच में स्टीव बढिया बल्लेबाजी कर रहे थे, 19 वर्षीय पार्थिव विकेटकीपर थे, स्टीव वॉ स्वीप पर स्वीप किये जा रहे थे, पटेल से नहीं रहा गया, वह बोला- “कम ऑन क्रिकेट में आखिरी बार अपना स्वीप चला कर दिखा दो”... 38 वर्षीय स्टीव ने जवाब दिया, “कम से कम बड़ों के प्रति कुछ तो इज्जत दिखाओ, जब तुम लंगोट में थे तब मैं टेस्ट खेलना शुरु कर चुका था”.... उसके बाद पार्थिव पूरे मैच कुछ नहीं बोले....

1960 में जब इंग्लैंड के क्रिकेट मैदानों में पेवेलियन से आने के लिये एक लकड़ी का छोटा सा दरवाजा लगा होता था, एक नया बल्लेबाज क्रीज पर आने के लिये पेवेलियन से निकला और मैदान में आकर वह पीछे का लकडी का दरवाजा बन्द करने लगा, तब फ़्रेड ट्रूमैन तत्काल बोले, “रहने दो, खुला ही रहने दो बच्चे, तुम्हें जल्दी ही तो वापस आना है”....

1980 में इयान बॉथम का वह बयान बहुत चर्चित हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था, “पाकिस्तान नाम की जगह इतनी घटिया है कि हरेक व्यक्ति को अपनी सास को वहाँ भेजना चाहिये”, जाहिर है पाकिस्तानी इस बयान का बदला लेने के को बेताब थे। जब 1992 के विश्वकप में पाकिस्तान ने इंग्लैंड को हराया, तब आमिर सोहेल ने इयान बोथम से कहा, “क्यों नहीं तुम अपनी सास को पाकिस्तान भेजते, कम से कम वह तुम लोगों से तो अच्छा ही खेलेगी”.....

एक बार इंजमाम ने ब्रेट ली को खिजाते हुए कहा था, “यार स्पिन गेंदें फ़ेंकना बन्द करो”, और ऐसे ही भारत के पिछले पाक दौरे पर शाहिद अफ़रीदी ने पठान के बल्लेबाजी के लिये उतरने पर सीटी बजाते हुए कहा था, “ओय होय, मेरा शहजादा आ गया...”

तो पाठक बन्धुओं, स्लेजिंग तो क्रिकेट में सनातन चली आ रही है, और यह बढ़ती ही जायेगी, जब तक कि एकाध बार फ़ुटबॉल जैसी मारामारी (जिनेदिन झिडान जैसी) न हो जाये। एक बात तो तय है कि गोरे खिलाड़ी नस्लभेदी मानसिकता से ग्रस्त हैं, वे सोचते हैं कि सिर्फ़ हम ही स्लेजिंग कर सकते हैं, क्योंकि हम “श्रेष्ठ” हैं, साथ ही एक और निष्कर्ष निकलता है कि जिस प्रकार एशियाई खिलाड़ी अपनी माँ-बहन की गाली के प्रति संवेदनशील होते हैं, अंग्रेज खिलाड़ी अपनी पत्नी की गाली के प्रति होते हैं.... अस्तु। स्लेजिंग के और भी बहुत से उदाहरण दिये जा सकते हैं, लेकिन ज्यादा लम्बा लेख हो जायेगा तो ठीक नहीं होगा.... और हाँ... भगवान के लिये क्रिकेट को “भद्रजनों का खेल” (Gentlemen Game) कहना बन्द कीजिये। आमीन....

, , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,


AddThis Social Bookmark Button

7 comments:

Gyandutt Pandey said...

भगवान के लिये क्रिकेट को “भद्रजनों का खेल” (Gentlemen Game) कहना बन्द कीजिये।
---------------------------------
अच्छा, आप वास्तव में सोचते हैं कि भद्रजन यह भाषा नहीं जानते/प्रयोग नहीं करते। :-)

mahashakti said...

बहुत ही मंनोरंजक, मजा आ गया।

Udan Tashtari said...

बहुत रोचक रहा भाई, आनन्द आ गया.

आप एवं आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं।

Udan Tashtari said...

बहुत रोचक रहा भाई, आनन्द आ गया.

आप एवं आपके परिवार को दीपावली की शुभकामनाएं।

नितिन व्यास said...

बहुत सुन्दर लेख, आनंद आया पढ कर।
शुभ दीपावली!

सागर चन्द नाहर said...

आम तौर पर इस तरह की भाषा हर कोई अपने सहयोगियों , मित्रों और जान पहचान वालों के साथ मजाक में या गुस्से में प्रयोग कर लेता है।
इस तरह तो कोई भी भद्रजन नहीं हुआ।
शायद आप और मैं भी :)
{स्माईली लगा दी है इसे स्लैजिंग समझ कर.... :) }
दीपावली और नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

सागर चन्द नाहर said...

और हाँ बढ़िया लेख के लिये बधाई